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  • सेहत का खजाना है Silent Walking, जानें इसके कितने फायदे

    सेहत का खजाना है Silent Walking, जानें इसके कितने फायदे

    Silent Walking : सेहत को दुरुस्त रखना है तो सुबह-शाम पैदल चलने की सलाह दी जाती है. बचपन से ही हमें सुनने को मिलता आया है कि पैदल चलना शरीर के लिए जबरदस्त फायदेमंद होता है. कई लोग मॉर्निंग या इवनिंग वॉक पर निकलते हैं. आजकल साइलेंट वॉकिंग (Silent Walking) भी ट्रेंड में है. सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है. यह खुद को फिट रखने और बीमारियों से दूर रहने के लिए अच्छा बताया जा रहा है. तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है साइलेंट वॉकिंग और इससे क्या-क्या बेनिफिट्स हैं…
     
    साइलेंट वॉकिंग क्या है

    साइलेंट वॉकिंग यानी कि वॉक करते समय किसी भी तरह के आर्टिफिशियल आवाज से दूर रहना. टिक टॉक इंफ्लुएंसर मेडी माओ ने आधे घंटे का वॉकिंग का एक वीडियो शेयर किया है. यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और ट्रेंड बन गया. साइलेंट वॉकिंग में 30 मिनट तक सामान्य तौर पर पैदल चलना होता है. इसमें अकेले चलना पड़ता है. इस दौरान किसी भी तरह की चहल पहल यानी ध्यान भटकाने वाली जगह से दूर जाकर शांत जगह वॉक करना होता है. वॉकिंग के दौरान बिल्कुल शांत रहना पड़ता है.
     
    साइलेंट वॉकिंग के फायदे

    स्ट्रेस की छुट्टीद नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी एक स्टडी में बताया गया है कि मेंटल हेल्थ के लिए साइलेंट वॉकिंग बेहद फायदेमंद है. प्रकृति में शांत होकर सिर्फ कुछ मिनट चलने से ही स्ट्रेस कम हो सकता है. रोजाना इसे करने से मानसिक बीमारियों को बढ़ाने वाली न्यूरल प्रक्रिया में सुधार आता है. इससे स्ट्रेस और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं.
     
    खुद रहने का मंत्र

    शोधकर्ताओं के अनुसार, साइलेंट वॉकिंग से आप खुद को खुश रख सकते हैं. ट्रिपल बोर्ड सर्टिफाइड साइकैट्रिस्ट डॉ. राफात डब्लू गिरजिस का कहना है कि साइलेंट वॉकिंग बिल्कुल मेडिटेशन की तरह है. दरअसल, बाहर की आवाजें जब दिमाग में जाती हैं तो स्ट्रेस बढ़ता है. ऐसे में साइलेंट वॉकिंग से स्ट्रेस दूर होता है और मन प्रसन्न.

  • छीलें या न छीलें:  क्या है बादाम खाने का सबसे अच्छा तरीका?

    छीलें या न छीलें: क्या है बादाम खाने का सबसे अच्छा तरीका?

    Soaked Almonds Benefits : बादाम भिगोकर खाने की प्राचीन परंपरा भारत से कायम है. भिगोने का मुख्य उद्देश्य है इसके पोषक तत्वों को सहजता से पाचने में सहायक बनाना और छिलका आसानी से हटा पाना बादाम को भिगोने से उसमें मौजूद पोषक तत्व अधिक उपलब्ध हो जाते हैं।  लेकिन क्या वाकई हमें बादाम की छिलका हटाकर ही खानी चाहिए? चलिए इस के बारे में जानते हैं। बादाम के छिलके में टैनिन नामक एक पदार्थ होता है, जो बादाम के पोषक तत्वों को अवशोषित होने से रोकता है। इसलिए छिलका हटाने से बादाम के पूरे पोषक तत्व आसानी से शरीर में अवशोषित हो पाते हैं। बादाम के छिलके को हटाने के अन्य फायदे भी हैं।बादाम का छिलका कड़वा होता है जिससे बादाम का स्वाद खराब हो जाता है। छिलके को हटाने से बादाम की मिठास बरकरार रहती है। छिलके में कीटनाशक और रसायन भी हो सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इनको हटाने से बादाम 100% शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक बना रहता है। 

    बादाम उन मेवों में से एक है जिसमें सेहत के अनगिनत फायदे हैं. यहां बादाम के कुछ प्रमुख फायदे यहां देखें 

    • .ह्रदय के लिए लाभकारी: बादाम में सेहतमंद फैटी एसिड, विशेष रूप से मोनोअंसैच्युरेटेड और पॉलीअंसैच्युरेटेड फैट्स पाए जाते हैं जो ह्रदय के लिए अच्छे होते हैं। 
    • वजन घटाने में सहायक: बादाम में फाइबर, प्रोटीन, और अच्छा वसा होता है जो भूख को नियंत्रित करने में सहायक है और आपको ज्यादा समय तक संतुष्ट महसूस कराता है। 
    • ब्लड शुगर को नियंत्रित करना : बादाम में मौजूद मैग्नीशियम ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। 
    • उचित पोषण: बादाम विटामिन E, मैग्नीशियम, और अन्य महत्वपूर्ण मिनरल्स से भरपूर होते हैं। 
    • बढ़ते हुए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना: बादाम में स्टेरॉल्स और फाइबर होते हैं जो बढ़ते हुए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। 
    • एंटीऑक्सीडेंट स्रोत:  विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर के सेल्स को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त रेडिकल्स से बचाव करता है। 
    • जोड़ों और मांसपेशियों के लिए: बादाम में मौजूद मैग्नीशियम और पोटैशियम जोड़ों और मांसपेशियों के स्वस्थ रहने में महत्वपूर्ण होते हैं। 
    • मास्टिक और त्वचा के लिए: बादाम तेल का उपयोग त्वचा के लिए मॉइस्चराइज़र के रूप में होता है, और यह त्वचा को नरम और मुलायम बनाए रखता है। 
    • इन सभी फायदों को देखते हुए, बादाम को आपकी दैनिक डाइट में शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है। फिर भी, इसे सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि यह कैलोरी में काफी ऊंचा है।
  • Water Apple खाने से मिलेंगे शरीर को ये 6 फायदे

    Water Apple खाने से मिलेंगे शरीर को ये 6 फायदे

    Water Apple Health Benefits: शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियों का सेवन करने की जरूरत होती है। सेब, केला, अमरूद और अंगूर जैसे फलों का सेवन तो हर कोई करता है.। आप ज्यादातर फलों के फायदों के बारे में भी भलिभांति जानते होंगे, लेकिन क्या आपने कभी ‘वॉटर एप्पल’ का नाम सुना है, या कभी इस करिश्माई फल का सेवन किया है? अगर नहीं तो आज हम आपको इस फल के ऐसे फायदों के बारे में बताएंगे, जिन्हें जानने के बाद आप वॉटर एप्पल का सेवन करना भी शुरू कर देंगे। वॉटर एप्पल एक उष्णकटिबंधीय फल है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में ज्यादातर देखा जाता है। यह फल भारत के भी कुछ राज्यों जैसे- केरल और आंध्र प्रदेश में भी पाया जाता है। आइए जानते हैं आपको वॉटर एप्पल क्यों खाना चाहिए। 

    Water Apple क्यों फायदेमंद

    1. बॉडी को रखता है हाइड्रेट: गर्मी के मौसम में अक्सर शरीर में पानी की कमी देखी जाती है और डिहाइड्रेशन हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए आप वॉटर एप्पल का सेवन कर सकते हैं।  यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।  

    2. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर: वॉटर एप्पल गैलिक एसिड, टैनिन और क्वेरसेटिन जैसे स्ट्रॉन्ग एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। ये फ्री रेडिकल्स से शरीर को होने वाले नुकसान से बचाता है। इसके अलावा, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को भी कम करता है। 

    3. वजन घटाना: वॉटर एप्पल का सेवन करके आप अपने बढ़े हुए वजन को भी कम कर सकते हैं।  इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट को लंबे वक्त तक भरे रखने का काम करता है।  इससे आपको कुछ भी अनहेल्दी खाने की क्रेविंग नहीं होगी और आप ओवरईटिंग से भी बचे रहेंगे। 

    4. डायबिटीज: डायबिटीज के मरीजों के लिए भी वॉटर एप्पल बहुत फायदेमंद है। क्योंकि इसमें पॉवरफुल एंटीहाइपरग्लाइसेमिक गुण पाए जाते हैं। जिसका मतलब है कि इसका सेवन करने से ब्लड शुगर के लेवल को कम किया जा सकता है। बायोएक्टिव क्रिस्टलीय अल्कलॉइड ‘जंबोसिन’ वॉटर एप्पल में मौजूद होता है। ये स्टार्च को शुगर में तब्दील होने से रोकता है। यही वजह है कि वॉटर एप्पल खाने से ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल में रहता है। 

    5. दिल के स्वास्थ्य में सुधार: वॉटर एप्पल में पोटेशियम की मात्रा अच्छी खासी होती है। यही वजह है कि इसे खाने से दिल को सेहतमंद रखने में मदद मिलती है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी दूर हो सकती है। 

  • डायबिटीज में खत्म न हो जाए आंखों की रोशनी,रखें इन बातों का ध्यान 

    डायबिटीज में खत्म न हो जाए आंखों की रोशनी,रखें इन बातों का ध्यान 

    Eye Care in Diabetes :  आजकल ड्राई आई सिंड्रोम (DES) की समस्या काफी कॉमन हो गई है. यह आंखों से जुड़ी एक ऐसी प्रॉब्लम है, जो पर्याप्त मात्रा में आंसू न बनने के कारण होती है. इसकी वजह से आंखें लाल होने लगती हैं, उसमें जलन महसूस होती है, कई बार धुंधला-धुंधला भी दिखता है. आंखों की इस समस्या का एक नहीं कई कारण है. उम्र बढ़ना, हॉर्मोनल बदलाव इस समस्या के काफी आम कारण हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक, डायबिटीज और ड्राई आई सिंड्रोम का भी संबंध है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्लड शुगर जब सामान्य से ज्यादा बढ़ता है, तब आंखों की रक्त वाहिकाओं पर असर डालता है. जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. यहां तक की आंखें कमजोर होने लगती हैं

    डायबिटीज और ड्राई आई सिंड्रोम का क्या संबंध:

    इस बात की पुष्टि कई अध्ययनों में हुई है कि डायबिटी और डीईएस का संबंध है. जर्नल डायबिटीज केयर में छपे एक अध्ययन के अनुसार, ऐसे लोग जो डायबिटीज से पीड़ित हैं, उनमें डीईएस की आशंका दूसरों की तुलना में ज्यादा होती है.  इस अध्ययन में करीब 1,000 लोगों को शामिल किया गया. जिसमें पाया गया कि डायबिटीज मरीजों की आंखों में आंसू कम बनते हैं या फिर उनके आंसुओं की गुणवत्ता में कमी आ जाती है. ब्लड शुगर लेवल जब ज्यादा होता है तो आंसू बनाने वाले ग्लैंड्स को नुकसान पहुंचता है. जिससे ड्राई आई सिंड्रोम की आशंका बढ़ जाती है.

    डायबिटीज में इस तरह बचाएं आंखें:

    1. अगर डायबिटीक को ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
    2. चूंकि ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना आंखों के लिए ठीक नहीं होता है. ये ब्लड वैसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में ब्लड शुगर कंट्रोल करने पर ध्यान देना चाहिए.
    3. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से आंखें और बॉडी हाइड्रेट रहती हैं और ड्राई आई सिंड्रोम का खतरा कम होता है.
    4. लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठते हैं तो डीईएस के लक्षण नजर आने पर फोन, लैपटॉप की स्क्रीन से ब्रेक लें. पलकों को झपकाना न भूलें.
    5. यूवी किरणों से आंखों की ये समस्या और भी बढ़ सकती है. इसलिए आंखों को धूप से बचाना चाहिए.
    6. धूम्रपान से डीईएस के लक्षण गंभीर हो सकते हैं. इसलिए शराब-सिगरेट से दूरी बनाएं.

  • रसोई में मौजूद एक ऐसा जादुई मसाला, जिसमे छुपे है सुन्दर त्वचा के कई नुस्खे

    रसोई में मौजूद एक ऐसा जादुई मसाला, जिसमे छुपे है सुन्दर त्वचा के कई नुस्खे

    Health Tips: हींग हमारी रसोई का एक बहुत ही खास मसाला है. दाल हो या सब्जी, एक चुटकी हींग का इनमे तड़का लग जाए तो स्वाद दोगुना हो जाता है. वहीं पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी हींग कमाल कर सकती है.  अक्सर गैस या अपच की शिकायत होती है तो सबसे पहले बड़े बुजुर्ग हींग खाने की सलाह देते हैं.लेकिन क्या आपको मालूम है की हींग आपकी त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. जी हां हींग का इस्तेमाल करके आप बेदाग और निखरी हुई त्वचा पा सकते हैं आइए जानते हैं कैसे…

    त्वचा के लिए हींग के फायदे जानिए 

    1.ये स्किन इंफेक्शन से भी बचाता है.इचिंग को दूर करता है औऱ कॉर्न्स जैसी समस्या से बचाता है.हींग में कूलिंग इफेक्ट होता है.ये स्किन प्रॉब्लम्स के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया दूर करने में हेल्प करता है.

    2.पिंपल की समस्या में हींग का फेस पैक काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. ये इन्फेक्शन पैदा करने वाले कीटाणुओं से लड़ती है और त्वचा को मुंहासे दाग धब्बे से बचाता है.

    3.धूल-मिट्टी प्रदूषण की वजह से अगर आपकी त्वचा डल औरत ड्राई हो गई है तो हींग इसमें भी फायदा पहुंचा सकता है. यह त्वचा को नमी देने के साथ ग्लोइंग बनाए रखता है.

  • Breakfast में भूलकर भी न करें इन चीज़ों का सेवन, शरीर को हो सकता है नुक्सान

    Breakfast में भूलकर भी न करें इन चीज़ों का सेवन, शरीर को हो सकता है नुक्सान

    Health Tips: हर खाद्य पदार्थ को खाने का एक सही समय होता है और अगर किसी चीज़ को गलत समय या गलत ढंग से सेवन करने पर शरीर खराब हो सकता है। ऐसे ही कुछ फूड्स को ब्रेकफास्ट में खाने खाने से शरीर को नुक्सान हो सकता है। ऐसा करने पर हाई ब्लड शुगर, हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ट्राइग्लिसराइड, किडनी-लिवर की बीमारी हो सकती है।

    ठंडा और गर्म पानी

    ज्यादातर लोगों को सुबह उठते ही पानी पीने की आदत है। यह एक अच्छी आदत है, लेकिन पानी ठंडा या गर्म नहीं होना चाहिए। इससे आपके पेट की गर्मी और एसिड असंतुलित हो सकता है। इसलिए आपको गुनगुना पानी पीना चाहिए।

    कच्ची सब्जियां और सलाद

    खाने के साथ सलाद खाना अच्छी बात है लेकिन अगर आप सवेरे-सवेरे सलाद खाते हैं तो तुरंत बंद कर दें। यह आपके पाचन को खराब कर सकता है और पेट दर्द का कारण बन सकता है। इस वक्त आपको सब्जियां पकाकर खानी चाहिए।

    शुगर और एनर्जी ड्रिंक

    एनर्जी ड्रिंक और मीठे पेय पदार्थों में चीनी की मात्रा काफी अधिक होती है। जो ब्लड शुगर को तुरंत ऊंचा कर देते हैं और आपको तकलीफ हो सकती है। इसके कारण दिन में थकावट-कमजोरी महसूस हो सकती है।

    डीप फ्राइड फूड

    ​ब्रेकफास्ट में डीप फ्राइड फूड खाने की गलती कभी ना करें। क्योंकि इस वक्त आपका पाचन काफी कमजोर होता है और ऐसा खाना पचने में काफी टाइम लग सकता है। जिससे पूरे दिन गैस, एसिडिटी की दिक्कत हो सकती है।

    (यह आर्टिकल केवल सामानय जानकारी के लिए है हम इसकी पुष्टी नहीं करते। किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।)

  • Health Tips: मटके का पानी पीने से मिलते हैं गजब के फायदे, बस इन बातों का रखें ख्याल 

    Health Tips: मटके का पानी पीने से मिलते हैं गजब के फायदे, बस इन बातों का रखें ख्याल 

    नई दिल्ली : गर्मी में प्यास लगने पर हम घर में रखे फ्रिज खोलकर ठंडा-ठंडा पानी पी लेते हैं। उस समय तो वह ठंडा पानी बहुत राहत देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शरीर के लिए कितना घातक है? वहीं अगल फ्रिज के ठंडे पानी की बजाए जब आप मटके का पानी पीते हैं तो आपको इसके फायदे मिलते हैं.

    इन बातों का रखें ध्यान

    नए मटके को इस्तेमाल करने के लिए इसे नल के पानी से धो लें। फिर मटके को 24 घंटे के लिए पानी से भर दें और अगले दिन इस पानी को हटा दें। इस पानी का इस्तेमाल आप पौधों के लिए कर सकते हैं। ऊपर दी गई प्रक्रिया को दूसरे दिन भी दोहराएं। फिर तीसरे दिन से ताजा पानी पीना शुरू करें। मटके को कभी भी कपड़े से न लपेटें क्योंकि इससे पानी ठंडा होने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

    कोई भी सामान्य मटका साल भर इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर भी, अगर आप देखते हैं कि मटके में कुछ दरारें हैं या वह पानी को ठंडा नहीं कर रहा है, तो आपको इसे बदलने की जरूरत है।

    मटके का पानी है फायदेमंद

    मटके का पानी विटामिन बी और सी का समृद्ध स्रोत होता है, जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाता है। साथ ही हमारे दिमाग और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है। इससे शरीर की कई बीमारियां भी दूर होती हैं। वहीं RO पानी को फिल्टर करने के दौरान उससे जरूरी पोषक तत्वों को भी खत्म कर देता है, जबकि मटका नैचुरल फिल्टर के रूप में काम करता है।

    गर्मियों में हम धूप और पसीने में बाहर से घर आकर अगर हम फ्रिज का पानी एक दम से पी लेते हैं तो कई बार बुखार, गले में दर्द जैसी बीमारियां हमें घेर लेती हैं। इससे शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है और डॉक्टर के पास लोग कई बार इस समस्या को लेकर जाते हैं। वहीं घड़े का पानी पीने से इस तरह की बीमारियों के होने का खतरा न के बराबर हो जाता है।

    (यह आर्टिकल केवल सामानय जानकारी के लिए है हम इसकी पुष्टी नहीं करते। किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।)

  • इतने दिन बाद ‘जहर’ बन जाते हैं अंडे! खाने से पहले ऐसे करें चेक  

    इतने दिन बाद ‘जहर’ बन जाते हैं अंडे! खाने से पहले ऐसे करें चेक  

    हैल्थ टिप्स : अंडे में पोषक तत्व भरपुर मात्रा में होते हैं। एक अंडे में करीब 6 ग्राम प्रोटीन होती है। प्रोटीन हमारे मसल्स की ताकत को बढ़ाता है। इसमें शरीर के लिए जरूरी अन्य विटामिन और मिनरल भी होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडों की भी एक्सपायरी डेट होती है? ज्यादा दिन होने के बाद अंडा बासी हो जाता है और अपना पोषण खोने लगता है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि इसमें एक बैक्टीरिया पनपने लगता है, जो शरीर के अंदर घमासान मचा सकता है। 

    फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, निकलने के बाद अंडा अगर कमरे के तापमान (28+/-2 डिग्री सेल्सियस) पर रखा गया है तो यह 10-12 दिन तक ताजा रह सकता है। हालांकि, कमरे का तापमान बढ़ने पर इसकी ताजगी जल्दी खत्म हो सकती है और फ्रिज में ठंडे तापमान पर अंडे स्टोर करने से इन्हें 4-5 हफ्तों तक खा सकते हैं। मगर इस वक्त के बाद इनकी क्वालिटी गिरने लगती है और सैल्मोनेला बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है।

    बासी यां गंदे खाद्य पदार्थों में सैल्मोनेला होते है। सैल्मोनेला एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है। इसके संक्रमण में पतले दस्त, पेट दर्द, बुखार, उल्टी, जी मिचलाना, ठंड लगना, सिरदर्द, मल में खून आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। FSSAI कहता है कि जब आप ताजे अंडों को उबालकर लंबा काटते हैं, तो इसका पीला भाग (योल्क) आमतौर पर बीच में देखेंगे। लेकिन अगर यह ढीला या सेंटर से हटा हुआ है तो अंडे के बासी होने का खतरा हो सकता है।

    ताजे अंडे को कैसे पहचाने 

    ताजे अंडे पहचानने का सबसे आसान तरीका इन्हें पानी में डुबोना है। आप एक गिलास पानी लेकर उसमें अंडा डालिए। अगर अंडा ताजा होगा तो वह पूरी तरह गिलास की सतह पर टिका रहेगा। वहीं, थोड़ा पुराना अंडा एक सिरे से ऊपर उठेगा और खराब या एक्सपायरी अंडा पानी के ऊपर तैरने लगेगा।

    (डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।)

  • WHO ने लोगों की डेली रूटीन से मांगे 60 मिनट, जानें क्यों

    WHO ने लोगों की डेली रूटीन से मांगे 60 मिनट, जानें क्यों

    नई दिल्ली: कोरोना काल में लोगों ने ज्यादा से ज्यादा समय घर पर रहते हुए बिताया और इस दौरान व्यायाम, सैर जैसी जरूरी एक्टिविटीज भी लोगों ने बंद करनी बंद कर दी. इस कारण से कईं नई प्रकार की मानसिक व् शारीरिक बीमारियां तेजी से बढ़ने लगी है ।  

    अंदर बैठे रहने और खाने के बाद भी कोई कसरत, सैर न करने के कारण लोगों को स्‍ट्रेस, डिप्रेशन, ब्‍लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसी बहुत सी बीमारियों से लोग पीड़ित होने लगे ।  इन्ही परिशानियों को ध्यान में रखते हुए (WHO) वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन ने इन बीमारियों से बचाव के लिए बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं ।  यही नहीं बल्कि (WHO) ने 4 एक्टिविटीज के बारे में जानकारी दी है जिनसे इन बिमारियों से बचा जा सकता है ।  वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशनलोगों ने लोगों को सलाह दी है कि वह इन 4 एक्टिविटीज में से कोई भी एक जरूर करें जो भी उन्‍हें पसंद हो और इसे रोजाना करें ।  

    हर रोज़ की दौड़ भाग वाली हमारी ज़िन्दगी में हम सबका मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है ।  
     डब्‍ल्‍यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार चाहे बुजुर्ग हों यां फिर बच्‍चे, रोजाना 60 मिनट के लिए इनमें से कोई भी एक  फिजिकल एक्टिविटी करने से वह पूरी तरह तंदरुस्त होंगे  यहाँ तक कि ऐसा करने से दुनिया भर में हर वर्ष होने वाली लगभग 50 लाख मौतें होने पर रोक लग सकती है । डब्‍ल्‍यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक खराब लाइफस्‍टाइल ही ज्यादातर गैर संक्रामक और क्रॉनिक डिजीज उत्पन्न होने कि वजह है कोरोना के बाद से लोगों की फिजिकल एक्टिविटी काफी प्रभावित हुई है। 

    WHO द्वारा बताई गई ये 4 एक्टिविटीज आपको इतना स्वस्थ बना देंगी कि आप हर प्रकार की छोटी बड़ी बिमारियों से बचेंगे। 

    .दौड़ना  – कूदना या साइकिल चलाना – कोई भी आउटडोर खेल खेलना – डांसिंग

    डब्‍ल्‍यूएचओ द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अगर आप इन 4 एक्टिविटीज में से कोई भी एक, दो या सभी मिलाकर रोजाना कम से कम 60 मिनट तक करते ही हैं तो यह आपकी मानसिक और शारीरिक स्ट्रेंथ के लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगा। इसके अलावा जो लोग घर के काम, साफ़ सफाई, गार्डनिंग, आदि करते हैं, यह सब भी सेहत को स्वस्थ रखने में बेहद सहायक होता है। 

  • अगर आप भी कंप्यूटर या मोबाइल का करते हैं अधिक इस्तेमाल तो ऐसे रखें आँखों का ख्याल

    अगर आप भी कंप्यूटर या मोबाइल का करते हैं अधिक इस्तेमाल तो ऐसे रखें आँखों का ख्याल

    आजकल ज्यादातर लोग मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग करते हैं जो कि आँखों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी आँखों की सुरक्षा का ख़ास ख्याल रखेंI  नीचे दिए कुछ आसान से टिप्स आपके लिए काफी सहायक सिद्ध हो सकते हैं I

    आँखों को रखें नम: अपनी आँखों को ड्राई न होने देंI इन्हें नम और साफ़ रखें। इसके लिए आप अपनी आँखों को नियमित रूप से आराम दें I

    देर तक स्क्रीन के सामने बैठने से बचें: यदि आप लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठते हैं यां मोबाइल बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो बीच-बीच में ब्रेक लें और थोड़ा टहल लें । ऐसा करने से आपका माइंड भी रिलैक्स होगा और आँखों का तनाव भी कम होगा ी

    अवश्य करें आँखों का व्यायाम: समय-समय पर आँखों का व्यायाम भी करें I काम के बीच कुछ समय निकाल कर बैठे-बैठे आँखों को दाहिने और बाएं तरफ घुमाएँ। इसे एक मिनट तक करें और फिर आराम करें। फिर कुछ पल आँखों को बंद करके धीरे से 10 से 15 तक गिनती करें। इसे कुछ देर तक रोजाना करें।

    पलकों की गति बढ़ाएँ: अपनी पलकों को तेजी से ऊपर और नीचे ले जाएँ। दिन में जब समय मिले 10 से 15 बार ऑंखें जरूर झपकाएं ।

    पर्याप्त नींद लें: आँखों की सुरक्षा की लिए सही समय पर सोने की आदत डालें और पूरी नींद लें. 

    अच्छी क्वालिटी का मॉनिटर करें इस्तेमाल: एक उच्च-गुणवत्ता वाला मॉनिटर खरीदें जो न केवल आपकी आँखों के लिए अधिक सुरक्षित होता है बल्कि आपके दृष्टि की स्थिरता बनाए रखता है।

    नियमित आँखों की जाँच करवाएं: नियमित अंतराल पर आई स्पेशलिस्ट से आँखों की जाँच करवाना बहुत जरूरी है। आँखों की समस्याओं को जल्द से जल्द पहचानना चाहिए ताकि इसे उचित समय पर ठीक किया जा सके।।

    संयमित आहार: संयमित आहार लेना आँखों के लिए बहुत जरूरी है। खाने में फल और सब्जी का सेवन ज्यादा करें। विटामिन ए और सी का सेवन करें । यह आँखों के लिए बहुत जरूरी होते हैं।

    उचित रोशनी में करें काम : उचित रोशनी में आँखों को रखना बहुत जरूरी है। ज्यादा उज्ज्वल रोशनी से आँखों को नुकसान पहुंच सकता है। अधिक रोशनी से बचने के लिए, उचित रूप से वाइट बैलेंस सेटिंग का उपयोग करें ।