Category: Entertainment
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बद्दी में नकली दवा बनाने वाली कंपनी का भांडा फोड़
55 लाख रुपये की नकदी दवाई पकड़ीड्रग विभाग ने दवाई को कब्जे में लेने के बाद कंपनी को किया सीजबददी/सचिन बैंसल: बददी में एक नकली दवाई बनाने वाली कंपनी का भांडा फोड हुआ है। यह कंपनी मैनकाईंड व इंटास फार्मा की नकली दवाईएं बना रही थी। विभाग ने कंपनी को सीज करने के बाद सवाईयों को कब्जे में ले लिया है। कंपनी का संचालक मौके से फरार हो गया है।विभाग की नकली दवाई बनाने की सूचना मिली। जिस पर ड्रग विभाग के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बद्दी स्थित एक ट्रांसपोर्ट गोदाम आरएस रोड लाइन साई रोड़ बद्दी में दबिश दी तो वहां पर नकली दवाईयों का एक बड़ा भंडार मिला। सिक्किम निर्मित मैनकाइंड और इंटास फार्मा की चीनी और मल्टीविटामिन की 55 लाख की कीमत की नकली दवाएं बरामद की गईं। जब वहां पर इसकी छानबीन की गई तो जांच में पता चला कि यह दवाईयां बद्दी के काठा स्थित मेगटेक इंटर प्राईजिज में तैयार हुई है जिस पर विभाग की टीम ने कंपनी में छापेमारी गई। कंपनी में में मके से इनपासेस टैबलेट और स्क्रैप का भारी स्टाक बरामद किया गया।परिवहन से मिली जानकारी के बाद, मैसर्स मैग्नेटेक एंटरप्राइज़ बद्दी की निर्माण इकाई पर भी छापा मारा गया और टीम की ओर से इनपॉसेस टैबलेट और स्क्रैप का भारी स्टॉक बरामद किया गया। विभाग ने कंपनी को सीज कर दवाईयों क कब्जे में ले लिया है। विभाग ने ट्रांसपोर्ट के उस वाहन को भी जब्त कर लिया गया जिसमें कंपनी की ओर से दवा की सप्लाई की गई थी। यह पाया गया कि फर्म ने बाजार में नकली दवाओं का भारी स्टॉक बेचा था और बाजार से सभी सामग्री को बरामद करने के लिए विभाग की जांच चल रही है। दिल्ली में नकली दवाओं की संदिग्ध डिलीवरी के बाद ड्रग कंट्रोलर दिल्ली ने भी इस संबंध में जानकारी दी। मामले में अन्य आरोपियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। ड्रग कंट्रोलर नवनीत मरवाह ने मामले की पुष्टि की है। -

पुलिस ने बाल्द खड्ड में फंसे एक बच्चे व युवक को किया रेस्क्यू
DSP लखबीर ने क्रैन की सहायता से बाहर निकाला
बच्चा बेहोश होने पर अस्पताल में किया भर्ती
बददी/सचिन बैंसल : बद्दी पुलिस ने बालद नदी में फंसे एक बच्चे व युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। बच्चे को बचाने के लिए एक व्यक्ति भी पानी में कूद गया था लेकिन ऊपर से पानी अधिक आने से बच्चे व व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ गई थी। जिस पर पुलिस ने क्रेन से व्यक्ति व बालक को बाहर निकाला। बालक बेहोश होने पर उसे बद्दी के अस्पातल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार शाम के समय बद्दी पुलिस को सुचना मिली कि सनसीटी आउटडोर स्टेडियम के सामने बालद नदी में एक बच्चा फंसा है जिस सूचना पर बद्दी पुलिस प्रशिक्षित अधिकारी के साथ पुलिस टीम तुरंत घटना स्थल पर पहुंची तथा देखा कि एक बच्चा बहती हुई बाल्द खड्ड में बीचों-बीच गंभीर स्थिति में खडा है।बताया जा रहा है कि यह बच्चे खड्ड में खेल रहा था और अचानक पानी आने से बीच में फंस गया। इस बच्चे को बचाने के लिए हरियाणा से पानीपत के समालखा गांव के निवासी गुरदयाल सिंह तैर कर उस बच्चे के पास पंहुच चुका था। जिसने उक्त बच्चे को एक पत्थर के पास सुरक्षित खडा कर रखा था । मौके की गंभीरता को पहचानते हुए, पुलिस टीम ने तुरंत क्रेन मशीन को मौका पर बुलाया गया । जिस पर बिना किसी विलंब के राम राय क्रेन सर्विसस की एक क्रेन सनसीटी आउटडोर स्टेडियम के पास पहुंची और डीएसपी लखबीर सिंह ने लोगों के साथ खड्ड में जाकर उस बच्चे को बाहर निकाला। पुलिस ने बच्चे को बचाने में गुरदयाल सिंह व क्रेन संचालक का अभार जताया। बच्चे पानी में डर गया था जिससे वह बेहोश हो गया। बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत खतरे से बाहर है। -

वैदिक न्यूरोथैरेपी उपचार केंद्र की वैवसाईट का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रणेश राणा ने किया
बिना दर्द के सभी बीमारियों का उपचार करने वाली पद्वति है
न दर्द न दवा न साईड इफैक्ट: महेंद्र पाल
बददी/सचिन बैंसल : वैदिक न्यूरोथैरेपी उपचार केंद्र बददी की वैवसाईट का शुभारंभ एनयूजे (इंडिया) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रणेश राणा ने किया। उन्होने कहा कि वर्तमान में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से पीडीत है लेकिन अगर कोई बिना दवा के ठीक होता है तो यह बहुत बडी बात है। उन्होने कहा कि अब हमें अग्रेंजी दवाईयों से दूर होकर पुरानी व विश्सनीय पद्वति की ओर लौटना है। उन्होने वैदिक उपचार केंद्र के संचालकों को बधाई दी और कहा कि वो ईमानदारी से मानवता की सेवा करें। यह वैदिक केंद्र भारद्वाज अस्पताल के निकट सिटी सक्वेयर कांपलेक्स में चल रहा है जिसके संचालक महेंद्र पाल है। महेंद्र पाल ने बताया कि हमारे यहां कोई भी रोगी जिसमें अधिक दवाओं के सेवन से निराश रोगी नाममात्र शुल्क पर ईलाज करा सकते हैं जिसमें न दर्द, न दवा न साईड इफैक्ट होता है। न्यूरोथैरेपी की विशेषताएं यह है कि यूरोथैरेपी बिना दर्द के सभी बिमारियों का सफलता से उपचार करने वाली एक प्राचीन पद्वति है।न्यूरोथैरेपी द्वारा रोगों पर ध्यान रखते अलग अलग हिस्सों पर दबाव डालकर बीमारियों का उपचार किया जाता है । इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है। न्यूरोथैरेपी में हर आयु वर्ग के हुए शरीर के रोगियों का उपचार किया जाता है। न्यूरोथैरेपी द्वारा जिन बीमारियों का इलाज किया जाता है जिसमें पेट सम्बंधी रोग नाभी की समस्या, ऐसिडिटी, गैस, कब्ज, दस्त, भूख न लगना आदि है। इसके अलावा जोड़ो के दर्द, गर्दन दर्द, (सरवाइकल), कमर दर्द, स्लिप डिस्क, साइटिका, महिलाओं से सम्बन्धित रोग । त्वचा रोग एलर्जी, एग्जिमा, सोराईसिस, सफेद दाग, चेहरे व सिर के रोग मुँहासे, मोतिया, नींद न आना,याददाश्त कमजोर होना, सिर दर्द, माईग्रेन, जुकाम। अस्थमा, थाइराइड, पैरालाइसिस, हृदय रोग, मंदबुद्धि बच्चे, लम्बाई कम होना, मोटापा, आदि बीमारियों का इलाज किया जाता है। -

बद्दी के धर्मपुर में 6 दिनों से पानी की दिक्कत से जूझ रहे है ग्रामीण
घरों में लगे नल बने शोपीस : प्रदीप कुमार
बद्दी/सचिन बैंसल : औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के तहत गांव धर्मपुर के लोग पिछले छह दिनों से पीने के पानी किल्लत झेल रहे हैं। ग्रामीणों को दूर-दराजों से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पेयजल विभाग के एसडीओ को भी कई बार इसकी जानकारी दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों को बार-बार अधिकारियों से आश्वासन तो मिल रहा है, लेकिन विभाग ग्रामीणों को इस समस्या से निजात दिलाने में पूरी तरह से असमर्थ नजर आ रहा है। गांव धर्मपुर की महिलाओं को दूर-दराजों से पानी भरकर लाना पड़ रहा है, वहीं कुछ ग्रामीण गांव में आने वाले टैंकरों व बाजार से पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।गांव में व्याप्त इस पानी की समस्या से कई बार ग्रामीणों ने पेयजल विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को बताया, लेकिन उनकी इस समस्या की ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। गांव धर्मपुर के ग्रामीण राजेश गुरु का कहना है कि गांव में पिछले छह दिनों से ग्रामीण पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि गर्मियों में पानी की जरूरत ज्यादा होती है फिर भी विभाग इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं देता। ग्रामीण प्रदीप कुमार का कहना है कि गांव में पिछले छह दिनों से पानी की आपूर्ति न होने के कारण घरों में लगे नल शोपीस बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कमल वर्मा का कहना है कि गांव के कुछ लोग तो पानी खरीदकर अपनी पूर्ति कर लेते हैं, लेकिन जो पानी खरीदने में असमर्थ हैं वह अपनी पूर्ति खारा पानी पीकर या फिर दूर-दराजों से भरकर लाते हैं।गांव धर्मपुर में व्याप्त इस पेयजल संकट के बारे में जब विभाग के एसडीओ चमन लाल से पूछा गया तब उन्होंने कहा कि सड़क बनने के कारण हुई पहाड़ की कटान से मेन राइजिंग लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है और विभाग द्वारा नई लाइन डाली जा रही है। जल्द ही नई लाइन से पेयजल सप्लाई को शुरू करा दिया जाएगा। -

मन्धाला में पलटी कर्मचारियों से भरी बस
18 कर्मचारी चोटिल, 3 कर्मचारी गंभीर रुप से हुई घायल
बददी/सचिन बैंसल : पंचकूला से बददी की एक स्पिनिंग मिल्स में आ रही कंपनी की बस मंधाला में पलट गई जिसमें ड्राईवर समेत 19 लोग घायल हो गए। तीन महिलाएं गंभीर रुप से घायल हो गई जिनको चंडीगढ़ के अस्पताल भेज दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचकूला से धागा कंपनी की बस नंबर सीएच-01 टीबी-0724 सूरजपुर के पास से कंपनी के वर्करों को लेकर आ रही थी। जैसे ही यह बस मंधाला पंचायत घर के सामने पहुंची तो संतुलन खोकर साथ लगते ढलान में गिर गई। हादसे मे 15 महिला कर्मचारी आंशिक रुप से घायल हुई और उनको ईएसआई काठा भेजा गया जबकि तीन कर्मचारी गंभीर रुप से घायल हुई जिनको तुरंत अस्पताल रैफर कर दिया गया। थाना प्रभारी श्याम लाल ने बताया कि पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और उनको संबधित अस्पतालों में भेजा गया। उन्होने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बस का स्टेयरिंग लॉक होने से हादसा हुआ पर फिर भी हम बारीकी से जांच कर रहे हैं। -

बाढ़ पीडि़तों के लिए मानवता की सेवा संस्था ने लगाया लंगर
नालागढ़/सचिन बैंसल : नालागढ़ के जगातखाना पुल के समीप मानवता के लिए सेवा संस्था ने बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राशन, भोजन और उनके तिरपाल की व्यवस्था कराई। चिकनी खड्ड के साथ राजस्थान राज्य के गुरजीत, रामपाल, कांसी राम समेत 12 परिवार झगियां बना कर रहे थे, लेकिन खड्ड में पानी आने से इनकी झुगियां बह गई। और इनका सारा सामान भी पानी की भेंट चढ़ गया। इन लोगों के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था। ऐसे में संस्था आगे आई। संस्था के प्रधान इंद्रजीत सिंह राणा ने इनके लिए न केवल भोजन की व्यवस्था की वहीं उनके राशन की कीटें भी बांटी। दोबारा से झुगी तैयार करने के लिए इन लोगों को तिरपाल भी दी गई।राणा ने बताया कि उनकी संस्था पिछले डेढ दशक से समाज सेवा में जुटी है। वह पेशे से मेडिकल लाइन में होने से गरीब बीमार लोगों को मुफ्त उपचार करते है तथा रोगियों को उपचार करने में भी मद्द करते है। यही नहीं यह संस्था पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्य करती है। कोरोना काल में जहां संस्था की ओर से अटूट लंगर लगाया गया वहीं 165 आक्सीजन सिलेंडर भी गंभीर रोगियों को मुहैया कराए गए। यही नहीं जो बाहरी राज्य के लोग यहां पर महामारी के दौरान फंस गए थे उन्हें प्रशासन से परमिशन लेकर उनके राज्य तक छोडऩे तक का कार्य किया गया। शुक्रवार को लंगर बांटने के कार्य में वीर, श्यामलाल ने भी उनका सहयोग किया। -

पीने के पानी की बून्द बून्द को तरस रहे बददी के लोग
बददी/सचिन बैंसल: बद्दी स्थित उठाऊ पेयजल योजना के बिजली न होने से पिछले दो दिनों से वार्ड एक और दो में पीने का पानी सप्लाई नहीं हो पाया। जिससे लोग पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहे है। यहां पर कुछ लोगों ने अपने बोरवेल खुदवा रखे है जिससे लोगों ने पानी भरा। वहीं वार्ड पार्षद रमन कौशल ने भी अपने वार्ड के लोगों को पानी के टैंकर लगाए। जिससे लोगों ने पीने व खाना बनाने के लिए थोड़ा बहुत पानी लिया।जल शक्ति विभाग ने की योजना के स्टोर टैंक के टाईमर मंगलवा को खराब हो गया था जिससे बिजली आने पर टैंक नहीं भरा। कुछ लोगों ने स्वयं गेटवाल खोल कर पानी भर लिया जिससे टैंक खाली हो गया। मंगलवार सांय के समय मात्र दस मिनट के लिए ही पानी आया और टंैंक खाली हो गया। बताया जा रहा है कि टाईमर ठीक होने के बाद विभाग के कर्मचारियों ने स्टोर टंैंक भर दिया था । जैसे ही टैंक भरा तो कुछ शरारती तत्वों ने अपने एरिया का ओर जाने वाले गेटवाल को खोल दिया। जिससे आधे से ज्यादा टैंक से वहां के लोगों ने पानी भर लिया। मंगलवार शाम को जब विभाग के कर्मचारियों ने पानी छोड़ा तो वह मात्र दस मिनट में समाप्त हो गया जिससे लोगों को एक एक बाल्टी ही पानी की मिल पाई।पानी की किल्लत को देखते हुए पहले वार्ड नंबर दो के रहने वाले अशोक शर्मा ने अपने वोरबेल से लोगों को पानी दिया वहीं वार्ड दो के मनोनीत पार्षद ने पानी के टैंकर लगा कर यहां के प्रवासी कामगार और स्थानीय लोगों को प्यास बुझाई। वार्ड दो निवासी सचिन बैंसल, बेअंत ठाकुर, हरनेक ठाकुर, दलजीत, चरणजीत ने बताया कि शाम के समय मात्र दस मिनट पानी आने से कुछ लोगों को एक बाल्टी भी पानी नहीं मिल पाया।जलशक्ति विभाग के अधीशासी अभियंता राहुल अबरोल ने बताया कि बिजली की कमी क चलते चलते टैंक नहीं भर पाया था। उन्होंने स्टोर टैंक के गेट पर ताला लगाने के जेई को आदेश दिए है जिससे लोग स्वयं पानी न खोल सके। -

BBN में तेज बारिश के कारण सड़कें बनी तालाब, आवाजाही हुई बंद, देखें वीडियो
बददी/सचिन बैंसल: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बीवीएन में नालागढ़ स्वारघाट को जोड़ने वाला नेशनल हाइवे पर बनी पुलिया तेज बारिश के चलते नदी के बहाव में बह गई। जिससे कि काफी गांव का संपर्क टूट गया है ।वही नेशनल हाईवे पर बनी पुलिया टूटने की वजह से इस मार्ग पर जाने वाली ट्रैफिक ने भी अपना रूट बदला है। आसपास के क्षेत्रों के आने जाने वाले लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है ।
गौरतलब है कि शनिवार को सुबह से ही बीबीएन क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हो रही थी जिसके कारण बीवीएन की सभी सड़कें तालाब बन गई और सभी सड़कों पर घुटने घुटने तक पानी भर गया। नौकरी करने वाले व्यक्तियों को नौकरी व घर आने जाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। वही नालागढ़ स्वारघाट नेशनल हाईवे गांव झिड़ीवाला के पास नदी पर बनी पुलिया नदी के तेज बहाव के कारण बह गई। जिससे किसी प्रकार का जानी नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन नेशनल हाईवे के बह जाने से कई गांव का संपर्क टूट गया ।हालांकि आगे जाने के लिए कई अन्य मार्ग भी है लेकिन लोगों को अपने घर पहुंचने के लिए लगभग 40 से 50 किलोमीटर ज्यादा सफर तय करना पड़ा। -

शिविर में 53 लोगों ने किया रक्तदान
बीबीएनआईए के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने रक्तदान शिविर का किया शुभारंभ
बददी/सचिन बैंसल: ईएसआईसी की पैरा मेडिकल यूनियन की ओर से रक्तदान शिविर लगाया गया जिसमें 53 लोगों ने रक्तदान किया। ईएसआईसी के माडल अस्पातल में आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ बीबीएनआईए के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने किया। उन्होंने लोगों ने रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि रक्तदान से मनुष्य के शरीर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आती है और एक स्वस्थ मनुष्य को तीन माह के बाद रक्तदान करना चाहिए। उन्होंने पैरामेडिकल युनियन के प्रधान सन्नी, शिवांगी राजपुत, अरिहंत जोशी, अमर सिंह और हनुमान का इस पुनीत कार्य कराने के लिए अभार जाताया।
शिविर का विशेष अतिथि पहुंचे ईएसआईसी से सेवानिवृत सहायक निदेशक देवव्रत यादव और भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश उद्योग प्रभारी मेला राम चंदेल ने कहा कि ईएसआईसी की पैरा मेडिकल एसोसिएशन हर साल रक्तदान शिविर लगाती है। रक्त दान आपात काल में मरते हुए व्यक्ति को नया जीवन प्रदान करता है। उन्होंने युवाओं को इस पुण्य कार्य में बढ़ चढ़ कर भाग लेने की बात कही। शिविर में यश एपलाईंसिस के महाप्रबंधक शरत कुमार, विनसम कंपनी के महाप्रबंधक रंिवंद्र रोहिला अपने कामगार व समाज सेवक गिरधारी लाल अपने साथ युवाओं को रक्तदान कराने लाए।
शिविर में 53लोगों ने रक्दान किया। जिसमें 48 पुरूष और 5 महिलाओं ने रक्दान किया। 37 वर्षीय हेमराज ने 26वीं बार वहीं संदीप गुलेरिया ने 11वीं बार रक्तदान किया। इस मौके पर राजू भारद्वाज, खेमराज, प्रिय दर्शन भी उपस्थित रहे।
फोटो बद्दी दो -

मशहूर बॉलीवुड अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती पर टूटा दुखों का पहाड़, घर में छाया मातम
मुबंईः मशहूर बॉलीवुड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती की मां को लेकर एक दुखद खबर सामने आई है। एक्टर की मां शांतिरानी चक्रवर्ती का निधन हो गया है। वो लंबे वक्त से बीमार थीं। 6 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली। एक्टर-पॉलिटिशयन मिथुन चक्रवर्ती पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता के बाद उनके सिर से मां का साया भी उठ गया है। शुक्रवार को उनकी मां शांतिरानी ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। शांतिरानी मुंबई में मिथुन की पत्नी योगिता और बच्चों के साथ रहती हैं। इससे पहले वो बच्चों के साथ कोलकाता में रहा करती थीं, पर जैसे ही उनके बेटे मिथुन को सक्सेस मिली। वो मुंबई आकर रहने लगीं। बढ़ती उम्र के साथ मिथुन की मां बीमार होती गईं। उम्र संबंधी बीमारियों से जूझते हुए उनका वीरवार को निधन हो गया।

करीब तीन साल पहले मिथुन चक्रवर्ती के पिता बंसत कुमार चक्रवर्ती का भी निधन हो गया था। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने शांतिरानी के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मिथुन चक्रवर्ती की मां के निधन पर दुख है। मिथुदा और उनके परिवार को दुख सहन करने की शक्ति मिले। सभी लोगों की तरह मिथुन भी अपने माता-पिता से काफी अटैच थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्हें पेरेंट्स संग कनेक्शन पर खुलकर बात भी की थी। मिथुन ने माता-पिता संग रिश्ते पर बात करते हुए कहा था- मेरे माता-पिता को कभी एहसास नहीं हुआ कि मैं बॉलीवुड स्टार बन गया हूं।
उन्होंने कभी ऐसा नहीं जताया कि वो एक स्टार के पेरेंट्स हैं। वो काफी साधारण थे, जिन्होंने आम इंसान की तरह जिंदगी जीने में विश्वास किया। मिथुन के पिता गवर्नमेंट टेलीफोन एक्सचेंज ऑफिस में सुपरवाइजर तौर पर काम करते थे। वो एक हैप्पी फैमिली के हैप्पी इंसान थे। पिता के निधन के बाद मिथुन ने किसी तरह खुद को संभाला था। वहीं अब उनकी मां का जाना उन्हें गहरा सदमा दे गया। एक्टर के चाहने वाले दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। फैंस दुआ कर रहे हैं कि उन्हें जिंदगी के सबसे बड़े दुख को सहने की हिम्मत मिले।