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  • बाढ़ नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में पंजाब सरकार का बड़ा कदम

    बाढ़ नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में पंजाब सरकार का बड़ा कदम

    चंडीगढ़ : वन भवन, एस.ए.एस. नगर में श्री लाल चंद कटारूचक्क, वन एवं वन्य जीव संरक्षण मंत्री, पंजाब की अध्यक्षता में राज्य वन्य जीव बोर्ड की स्थायी समिति की पाँचवीं बैठक हुई। बैठक में प्रशासनिक सचिव (वन) कमल किशोर यादव (वीसी के माध्यम से), प्रमुख मुख्य वन पाल (वन बल के प्रमुख) धर्मिंदर शर्मा और मुख्य वन्य जीव वार्डन सतिंदर सागर के अलावा वन विभाग और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इस बैठक में पिछले वर्ष राज्य में आई बाढ़ के कारण दरियाओ में सिल्ट/रेत जमा होने के कारण आने वाले समय में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने और नदियों के बेहतर प्रबंधन के लिए जल संसाधन विभाग, पंजाब द्वारा ब्यास दरिया और रावी दरिया में विभिन्न स्थलों पर डी-सिल्टिंग करने के उद्देश्य से पेश किए गए 8 प्रस्तावों पर विचार किया गया। विचार-विमर्श के पश्चात राज्य में दरियाओं की बेहतर देखभाल, जनता के हित में और वन्य जीवों की सुरक्षा एवं बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए ब्यास दरिया में जिला होशियारपुर की दो, कपूरथला की तीन तथा गुरदासपुर की एक साइट और रावी दरिया में कथलोर-कुशलिया वन्य जीव सेंचुरी से सटी एक साइट पर की जाने वाली डी-सिल्टिंग संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी के लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की स्टैंडिंग समिति को भेजने की सिफारिश की गई। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग से ब्यास दरिया में लगभग 30 विभिन्न साइटों की डी-सिल्टिंग करने का प्रस्ताव वन विभाग को प्राप्त हुआ था। क्योंकि ब्यास दरिया कंजर्वेशन रिजर्व के साथ-साथ एक रामसर साइट भी है और इसमें डॉल्फिन, घड़ियाल और अन्य महत्वपूर्ण जीव पाए जाते हैं। इसलिए इस संबंध में आईआईटी रोपड़ से अध्ययन करवाया गया था कि किस प्रकार वन्य जीवों को नुकसान पहुँचाए बिना बाढ़ रोकथाम के कदम उठाए जा सकते हैं। आईआईटी रोपड़ की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात इन 30 साइटों का एक विशेषज्ञ समिति द्वारा दौरा किया गया। समिति द्वारा प्रत्येक साइटों के दौरे के पश्चात केवल ब्यास दरिया में 6 साइटों पर डी-सिल्टिंग करने की सिफारिश की गई। क्योंकि इन 6 साइटों पर अत्यधिक सिल्ट जमा होने के कारण न केवल दरिया का प्रवाह बदल गया है, बल्कि वन्य जीवों के आवास पर भी प्रभाव पड़ा है। समिति की राय के अनुसार इन 6 साइटों पर डी-सिल्टिंग करने से आने वाले समय में बाढ़ रोकथाम के प्रबंध भी किए जा सकेंगे और पानी की गहराई बढ़ने से वन्य जीवों को भी लाभ होगा।
     
  • वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा कर्मचारी यूनियनों के मुद्दों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बैठकें

    वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा कर्मचारी यूनियनों के मुद्दों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बैठकें

    चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने प्रदेश की विभिन्न कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों की वैध मांगों के समाधान के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा के नेतृत्व वाली कैबिनेट उप-समिति ने आज कई यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत करने के लिए महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों के दौरान सौंपे गए ज्ञापनों की बारीकी से समीक्षा की गई और कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई पेशेवर और वित्तीय शिकायतों के समाधान के लिए विचार-विमर्श किया गया।

    इस विस्तृत वार्तालाप के दौरान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिक्षा कर्मियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया, जिसमें 3704 अध्यापक यूनियन, ई.टी.टी. 2364 अध्यापक यूनियन, ई.टी.टी. टेट पास अध्यापक यूनियन (जय सिंह वाला) और 10 वर्ष सेवा पूरी कर चुके कच्चे अध्यापक यूनियन के ज्ञापनों की समीक्षा की गई। बैठक में वेतन निर्धारण, स्थानांतरण और नियमितीकरण(रेगुलर करने) संबंधी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उठाए गए मसलों का तुरंत संज्ञान लेते हुए, वित्त मंत्री ने विभाग को इन वैध मांगों का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए।

    शिक्षा क्षेत्र के अलावा, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन पंजाब के प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बैठक की। एसोसिएशन ने प्रदेश में मेडिकल प्रैक्टिशनर्स द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता हुआ एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। बैठक के दौरान, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तुरंत शुरू करने की उनकी प्रमुख मांग का मूल्यांकन किया गया। वित्त मंत्री ने इन प्रैक्टिशनर्स द्वारा जमीनी स्तर पर प्रदान की जा रही आवश्यक सेवाओं की सराहना की और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों के सहयोग से उनके औपचारिक प्रशिक्षण में तेजी लाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदमों पर विचार-विमर्श किया।

    इन बैठकों के दौरान 3704 अध्यापक यूनियन की ओर से हरजिंदर सिंह, यादविंदर सिंह और जीवनजोत सिंह; ई.टी.टी. 2364 अध्यापक यूनियन की ओर से समरजीत सिंह, गुरदीप सिंह और जुगराज सिंह; ई.टी.टी. टेट पास अध्यापक यूनियन (जय सिंह वाला) की ओर से कमल ठाकुर, सोहन सिंह और गुरमुख सिंह; 10 वर्ष सेवा पूरी कर चुके कच्चे अध्यापक यूनियन की ओर से जसपाल सिंह, ममता, तजिंदर कौर और किरनजीत कौर; और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन की ओर से डॉ. रमेश बाली, डॉ. मघर सिंह माशल और डॉ. अंग्रेज सिंह सेमा ने अपने-अपने मुद्दे उठाए।

  • बी.एल.ओ. के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: सीईओ अनिंदिता मित्रा

    बी.एल.ओ. के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: सीईओ अनिंदिता मित्रा

    चंडीगढ़ : पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीमती अनिंदिता मित्रा ने आज कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) कार्य में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (बी.एल.ओ.) के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंजाब के पटियाला और बरनाला जिलों में बी.एल.ओ. के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आई हैं, जिनका गंभीरता से संज्ञान लिया गया है।

    उन्होंने बताया कि पटियाला के आनंद नगर क्षेत्र में बूथ संख्या 113 के बी.एल.ओ. पर एक स्थानीय निवासी ने उस समय हमला कर दिया, जब अधिकारी एस.आई.आर. प्रक्रिया के संबंध में उससे आवश्यक जानकारी एकत्र कर रहे थे। इस घटना के बाद थाना त्रिपड़ी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 351(3), 221 और 132 के तहत आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है।
    श्रीमती अनिंदिता मित्रा ने बताया कि इसी प्रकार बरनाला जिले के धनौला क्षेत्र में बूथ संख्या 103, अकालगढ़ कोठे के बी.एल.ओ. के साथ भी एस.आई.आर. संबंधी कार्य के दौरान एक स्थानीय व्यक्ति ने गाली-गलौज की तथा हमला किया। इस संबंध में थाना धनौला में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 132, 221 और 115(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    मुख्य चुनाव अधिकारी ने राज्य के सभी जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे एस.आई.आर. अभियान के दौरान बी.एल.ओ. की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने पंजाब के सभी मतदाताओं से भी अपील की कि वे बी.एल.ओ. को पूर्ण सहयोग दें तथा यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटनाएं न हों।

     

  • श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व: मान सरकार 13 हजार से अधिक गांवों में दिखा रही है डॉक्यूमेंट्री फिल्म

    श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व: मान सरकार 13 हजार से अधिक गांवों में दिखा रही है डॉक्यूमेंट्री फिल्म

    चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार, गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में उनके जीवन और शिक्षाओं को मोबाइल एलईडी वैनों के माध्यम से प्रत्येक गांव तक पहुंचा रही है। यह जानकारी आज यहां पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने दी।

    डिजिटल प्रणाली आधारित इस आयोजन का विवरण साझा करते हुए स.सौंद ने बताया कि गुरु रविदास जी के प्रेम, भक्ति और समानता के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए वाहनों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाकर 13 हजार से अधिक गांवों में 30 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जा रही है।

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार का उद्देश्य इस ऐतिहासिक अवसर को बड़े स्तर पर मनाना है, ताकि गुरु रविदास जी के समाज पर पड़े गहरे प्रभाव को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जा सके। इसी क्रम में वाराणसी, फरीदकोट, जम्मू और बठिंडा से चार शोभायात्राएं शीघ्र ही खुरालगढ़ साहिब में एकत्र होंगी तथा पूरे पंजाब के श्रद्धालु तीर्थ यात्राओं के माध्यम से वाराणसी स्थित उनके जन्मस्थान पर नतमस्तक होंगे।

    राज्यभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गुरु रविदास जी के जीवन और शिक्षाओं पर सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि गुरु जी के दर्शन और विचारों को युवा पीढ़ी तक सार्थक ढंग से पहुंचाया जा सके।

    स सौंद ने बताया कि गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में 6.5 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे। उन्होंने इस अभियान को  गुरु रविदास जी की पर्यावरण संबंधी शिक्षाओं से भी जोड़ा। वर्षभर चलने वाले इन कार्यक्रमों के दौरान पूरे प्रदेश में रक्तदान शिविर, मैराथन, साइकिल रैलियां तथा कीर्तन समागम भी आयोजित किए जाएंगे।

  • बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा के लिए मान सरकार का बड़ा कदम; मोहाली में बनेगा आधुनिक वृद्धाश्रम

    बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा के लिए मान सरकार का बड़ा कदम; मोहाली में बनेगा आधुनिक वृद्धाश्रम

    चंडीगढ़ : पंजाब के बुजुर्गों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में एक आधुनिक वृद्धाश्रम (सीनियर सिटिजन होम) का निर्माण किया जा रहा है। सरकारी स्वामित्व और प्रबंधन के तहत बनने वाले इस आश्रम के लिए गमाडा द्वारा सेक्टर-78 में 2.92 एकड़ जमीन आवंटित कर दी गई है। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार बुजुर्गों के कल्याण और उनके सम्मान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्ग हमारी पूंजी और मार्गदर्शक हैं और जीवन के इस पड़ाव पर उनकी देखभाल करना सरकार का सबसे पहला कर्तव्य है।

    प्रदेश के मुखिया के दृष्टिकोण को साझा करते हुए डॉ. बलजीत कौर ने भावुक होकर कहा, “हमारी सरकार सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं बना रही, बल्कि एक ऐसा ‘सुरक्षित घर’ तैयार कर रही है, जहां बेसहारा बुजुर्गों को अपनापन, सम्मान और परिवार जैसी प्यार मिल सके। मुख्यमंत्री का स्पष्ट प्रण है कि पंजाब के किसी भी बुजुर्ग को उम्र के इस पड़ाव पर अकेलेपन या लाचारी के आंसू नहीं बहाने पड़ें, बल्कि उनके चेहरे पर मुस्कान लाना हमारा मुख्य कर्तव्य है। यह आश्रम उनके लिए एक मजबूत सहारा बनेगा।”

    कार्य की प्रगति के बारे में बताते हुए मंत्री ने आगे कहा कि परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए एस्टेट अधिकारी (प्लॉट्स), गमाडा, पुड्डा भवन, मोहाली को पत्र जारी कर दिया गया है।  उनसे अनुरोध किया गया है कि लागू नियमों के अनुसार उक्त साइट का भौतिक कब्जा (Physical Possession) जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, मोहाली को सौंपने के लिए आवश्यक कार्रवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए, ताकि निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।

     

  • मान सरकार की किसान-हितैषी नीतियों से बागवानी के तहत रकबा बढ़कर 5.21 लाख हेक्टेयर हुआ

    मान सरकार की किसान-हितैषी नीतियों से बागवानी के तहत रकबा बढ़कर 5.21 लाख हेक्टेयर हुआ

    चंडीगढ़ : पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा किसानों के कल्याण तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से लागू की जा रही किसान-हितैषी नीतियों के सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य में बागवानी के अंतर्गत क्षेत्रफल बढ़कर 5.21 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों को पारंपरिक फसल चक्र से आगे बढ़कर फल, सब्जियां, फूल तथा अन्य उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ बागवानी को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में भी सहायता मिल रही है।

    भगत ने आगे बताया कि बागवानी विभाग द्वारा किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकार की प्रत्येक योजना का लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंचाया जाए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे बागवानी से संबंधित सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं तथा किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए अपने निकटतम बागवानी कार्यालय से संपर्क करें।

  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बदलते बिज़नेस और कॉमर्स करियर के हिसाब से इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड बीबीए और बी.कॉम प्रोग्राम उपलब्ध है

    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बदलते बिज़नेस और कॉमर्स करियर के हिसाब से इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड बीबीए और बी.कॉम प्रोग्राम उपलब्ध है

    जालंधर : जैसे-जैसे डिजिटल फाइनेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल ट्रेड में तरक्की के साथ बिज़नेस बदल रहे हैं, वैसे-वैसे सही स्किल्स और प्रैक्टिकल जानकारी वाले ग्रेजुएट्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। इन बदलती ज़रूरतों को देखते हुए, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने अपने  मित्तल स्कूल ऑफ बिजनेस के ज़रिए बीबीए और बी.कॉम प्रोग्राम ऑफ़र करती है।

    क्लासरूम की पढ़ाई और प्रोफेशनल उम्मीदों के बीच के अंतर को कम करने के लिए बनाए गए एलपीयू के बीबीए और बी.कॉम प्रोग्राम्स में एकेडमिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल अनुभव भी मिलते हैं। इसमें लाइव प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, इंडस्ट्री पार्टनरशिप, वर्कशॉप, हैकाथॉन, गेस्ट लेक्चर, प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन, अंडरग्रेजुएट रिसर्च, इनक्यूबेशन प्रोजेक्ट्स, एजुकेशनल विज़िट, विदेश में पढ़ाई के मौके और लाइव स्टॉक ट्रेडिंग, ड्रॉप शिपिंग प्रोजेक्ट्स और असल दुनिया की बिज़नेस समस्याओं को सुलझाने जैसी एक्टिविटीज़ के ज़रिए प्रैक्टिकल लर्निंग शामिल है। यह प्रैक्टिकल लर्निंग का तरीका स्टूडेंट्स को क्लासरूम में सीखी गई बातों को असल ज़िंदगी में लागू करने में मदद करता है, साथ ही उनके प्रोफेशनल स्किल्स, नौकरी पाने की काबिलियत और करियर के लिए तैयारी को मज़बूत करता है।

    एलपीयू के बी.कॉम प्रोग्राम्स में कॉमर्स, अकाउंटिंग, फाइनेंस, टैक्सेशन और बिज़नेस मैनेजमेंट की मज़बूत नींव के साथ-साथ इंडस्ट्री के हिसाब से खास स्पेशलाइज़ेशन और दुनिया भर में माने जाने वाले प्रोफेशनल रास्ते शामिल हैं। खास प्रोग्राम्स में पेटीएम के साथ मिलकर फिनटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बी.कॉम, यूएस- सीएमए के साथ इंटीग्रेटेड बी.कॉम (मैनेजमेंट अकाउंटिंग और इंटरनेशनल फाइनेंस), और यूके- एसीसीए के साथ इंटीग्रेटेड बी.कॉम (इंटरनेशनल अकाउंटिंग) शामिल हैं। ये प्रोग्राम्स स्टूडेंट्स को डिजिटल फाइनेंस, इंटरनेशनल अकाउंटिंग, फाइनेंशियल प्लानिंग और एआई-बेस्ड बिज़नेस सॉल्यूशंस में काबिल बनाते हैं।

    अपने कॉमर्स प्रोग्राम्स के साथ-साथ, एलपीयू के बीबीए प्रोग्राम्स स्टूडेंट्स को उभरते बिज़नेस सेक्टर के हिसाब से खास स्किल्स सिखाते हैं। स्टूडेंट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट के साथ-साथ डिजिटल मार्केटिंग, बिज़नेस एनालिटिक्स और फाइनेंशियल मार्केट्स जैसे ज़्यादा मांग वाले क्षेत्रों में भी प्रोग्राम कर सकते हैं। लाइव बिज़नेस प्रोजेक्ट्स, स्टॉक मार्केट सिमुलेशन, एंटरप्रेन्योरशिप पहल और ड्रॉप शिपिंग एक्सरसाइज़ के ज़रिए प्रैक्टिकल लर्निंग से ये प्रोग्राम्स ग्रेजुएट्स को टेक्नोलॉजी-बेस्ड बिज़नेस, कंसल्टिंग, फाइनेंस, मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स और कॉर्पोरेट सेक्टर में करियर के लिए तैयार करते हैं।

    पढ़ाई के अलावा, छात्र इंटर्नशिप, रिसर्च, इनोवेशन प्रोजेक्ट्स, एंटरप्रेन्योरशिप पहल और प्रैक्टिकल सीखने के मौकों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, जो उन्हें बदलते टूरिज्म इकोसिस्टम के लिए तैयार करते हैं।खास प्रोग्राम, ग्लोबल सहयोग और अनुभव-आधारित सीखने के तरीके के साथ, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का मित्तल स्कूल ऑफ बिजनेस फाइनेंस, अकाउंटिंग, मैनेजमेंट, कंसल्टिंग, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, एंटरप्रेन्योरशिप और बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर में करियर के लिए ग्रेजुएट्स को तैयार करता है।

     
  • वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग में सेवारत किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया जाएगा

    वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग में सेवारत किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया जाएगा

    चंडीगढ़ : पंजाब के वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने आज जंगलात वर्कर यूनियन पंजाब, डेमोक्रेटिक जंगलात मुलाज़ीम यूनियन पंजाब और पंजाब राज वन विभाग वर्कर यूनियन के पदाधिकारियों के साथ उनके सेवा-संबंधी मुद्दों और मांगों की समीक्षा के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया। यूनियन के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए मंत्री ने उन्हें सरकारी नीतियों के दायरे में उनकी जायज मांगों पर सहानुभूति और सौहार्दपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

    राज्य सरकार की कर्मचारी-हितैषी पहुंच को दोहराते हुए कटारूचक्क ने स्पष्ट रूप से कहा कि वन एवं वन्यजीव विभाग में वर्तमान में सेवारत किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार विभाग से संबंधित प्रत्येक कर्मचारी के लिए नौकरी की पूर्ण सुरक्षा और कार्य के दौरान उचित सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
    मंत्री ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को यूनियनों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने और लंबित मामलों के समयबद्ध समाधान के लिए तीव्र गति से कार्य करने के निर्देश दिए।

    इस अवसर पर अन्य के अलावा वन विभाग के प्रमुख मुख्य वनपाल (वन बल के प्रमुख) धर्मेंद्र शर्मा, सीसीएफ (प्लेन्ज़) निधि श्रीवास्तव, ए.पी.सी.सी.एफ. (बजट) सौरव गुप्ता, अमरीक सिंह राज्य प्रधान वन कर्मचारी यूनियन, रछपाल सिंह जोधानगरी राज्य प्रधान डेमोक्रेटिक वन कर्मचारी यूनियन और बलवीर सिंह मंडोली प्रधान पंजाब राज वन विभाग वर्कर यूनियन उपस्थित थे।

  • सुनने की क्षमता बहाल करने से लेकर जिंदगियाँ बचाने तक: समय पर ईएनटी इलाज अब पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण एवं कारगर

    सुनने की क्षमता बहाल करने से लेकर जिंदगियाँ बचाने तक: समय पर ईएनटी इलाज अब पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण एवं कारगर

    चंडीगढ़ : ई.एन.टी. (कान, नाक और गले) के विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार कान के संक्रमण के कारण अच्छी तरह से सुन न पाने वाला बच्चा, वर्षों से नाक से साँस लेने में असमर्थ व्यक्ति या तम्बाकू के उपयोग के कारण लंबे समय तक मुँह के अल्सर को नज़रअंदाज़ करने वाला व्यक्ति — ये ऐसी आम समस्याएँ हैं जिनमें मरीज़ अक्सर इलाज कराने में देरी कर देते हैं। इस कारण सामान्य सी बीमारी भी गंभीर रूप धारण कर लेती है और फिर बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है।

    ई.एन.टी. संबंधी बीमारियाँ हर उम्र के लोगों को प्रभावित करती हैं। इनमें लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण, सुनने की क्षमता में कमी, साइनस की बीमारी से लेकर मुँह और जीभ का कैंसर शामिल हैं। इनमें से अधिकतर बीमारियों का प्रभावी इलाज संभव है, परंतु डॉक्टरों का मानना है कि समय पर बीमारी की पहचान होने से स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है और मरीज़ के ठीक होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित शोध के अनुसार सिर और गर्दन के कैंसर की समय पर पहचान न होने के कारण बीमारी गंभीर स्थिति में पहुँच जाती है। इससे इलाज मुश्किल हो जाता है और मरीज़ के ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसलिए लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों की समय पर जाँच करवाना बहुत आवश्यक है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के पात्र मरीज़ों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में आधुनिक ईएनटी सर्जरी निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 2,030 मरीज़ों की ईएनटी सर्जरी की जा चुकी हैं, जिन पर करीब 5.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।” डॉ. निधि गुप्ता, मेडिकल ऑफिसर (ईएनटी विशेषज्ञ), सिविल अस्पताल, रूपनगर (रोपड़) ने कहा, “लोग अक्सर कान से लगातार पानी बहना, सुनने की क्षमता घटना, नाक बंद रहना या मुँह के छालों जैसी समस्याओं को शुरुआती दौर में दर्द न होने के कारण नज़रअंदाज़ कर देते हैं। परंतु इलाज में देरी के कारण स्थायी रूप से बहरापन, क्रोनिक साइनस या गंभीर मुँह का कैंसर हो सकता है।”

    ईएनटी से संबंधित बीमारियों में सबसे अधिक कानों की बीमारियाँ पाई जाती हैं। कानों का पुराना संक्रमण और सुनने की क्षमता में कमी, ईएनटी सर्जरी के सबसे आम कारण हैं। मरीज़ अक्सर कान से बार-बार पानी बहना, कम सुनाई देना, कान में आवाज़ (घंटी या भनभनाहट) आना या लंबे समय से संक्रमण की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास आते हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े पाँच महीनों के दौरान लगभग 1,050 कानों की सर्जरी की गईं, जिन पर करीब 2.9 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें 897 टाइम्पेनोप्लास्टी, 88 रेडिकल मास्टोइडेक्टमी और कान की चोट तथा पिन्ना (बाहरी कान) के ट्यूमरों की सर्जरी शामिल हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा, “इनमें से अधिकांश ऑपरेशन फटे हुए कान के पर्दे की मरम्मत करने या कान के मध्य भाग में लंबे समय से मौजूद संक्रमण को दूर करने के लिए किए जाते हैं। समय पर सर्जरी करवाने से न केवल सुनने की क्षमता बहाल होती है, बल्कि संक्रमण को मास्टोइड हड्डी और आस-पास के महत्वपूर्ण अंगों तक फैलने से भी रोका जा सकता है।”

    साँस लेने संबंधी समस्याओं को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है

    लगातार नाक बंद रहने की समस्या को लोग सामान्य बात समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि इसका सीधा असर नींद, काम करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय का साइनस संक्रमण, नाक की टेढ़ी हड्डी (डी.एन.एस.), बढ़े हुए टर्बीनेट्स और नाक के पॉलिप्स लंबे समय तक साँस लेने में कठिनाई के मुख्य कारण हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य में लगभग 900 नाक और साइनस की सर्जरी की गईं, जिन पर 2.1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आया। इनमें 395 फंक्शनल सेप्टो राइनोप्लास्टी, 354 सेप्टोप्लास्टी, 227 फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी (एफ.ई.एस.एस.) और अन्य सुधारात्मक सर्जरी शामिल हैं।डॉ. गुप्ता ने कहा, “कई मरीज़ वर्षों तक केवल नाक वाले स्प्रे का उपयोग करते रहते हैं, परंतु असली कारण का इलाज नहीं करवाते। एंडोस्कोपिक सर्जरी दीर्घकालिक राहत देती है, साँस लेने में सुधार करती है और बार-बार होने वाले संक्रमण की संभावना को कम करती है।”

    मुँह का कैंसर: मामले कम, परंतु गंभीरता काफी अधिक

    यद्यपि मुँह और जीभ संबंधी सर्जरियों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, परंतु विशेषज्ञों का कहना है कि देर से पता लगने के कारण ये ईएनटी की सबसे पेचीदा सर्जरियों में से एक मानी जाती हैं।
    लगभग 80 मरीज़ों के मुँह और जीभ संबंधी ऑपरेशन किए गए, जिन पर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए। इनमें शामिल हैं—

    · मुँह, साइनस और गले के ट्यूमर निकालने की 47 सर्जरी
    · 13 जीभ के ट्यूमर की सर्जरी, जिनमें गर्दन की लिम्फ नोड्स को हटाना (नेक डिसेक्शन) और फ्री फ्लैप रीकंस्ट्रक्शन शामिल था।
    · 7 कंपोजिट रिसेक्शन और रीकंस्ट्रक्शन की सर्जरी।
    · हेमीग्लोसेक्टोमी सहित अन्य बड़े ऑपरेशन।

    डॉ. गुप्ता ने बताया कि मुँह का कैंसर अक्सर ऐसे छाले के रूप में शुरू होता है जो लंबे समय तक ठीक नहीं होता, या फिर मुँह में सफेद या लाल धब्बे, जीभ में दर्द या निगलने में कठिनाई के रूप में सामने आता है। तम्बाकू, गुटखा, सुपारी और शराब इसके मुख्य कारक हैं।

    डॉ. गुप्ता ने आगे कहा कि यदि मुँह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे तो उसे कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। ‘द लैंसेट’ सहित अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि कैंसर की पहचान में देरी होने से यह गंभीर स्थिति में पहुँच जाता है और उपचार के परिणाम भी प्रभावित होते हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा, “यदि कैंसर की पहचान शुरुआत में ही हो जाए तो इसका इलाज अक्सर छोटे ऑपरेशन से संभव है। परंतु देर से पता लगने पर बड़े ऑपरेशन, रीकंस्ट्रक्शन और अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता पड़ती है।” गंभीर मामलों में गर्दन की लिम्फ नोड्स को हटाने की सर्जरी और शरीर के किसी अन्य भाग से टिशू लेकर मुँह की संरचना को पुनः तैयार करने (रीकंस्ट्रक्शन) की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे मरीज़ की बोलने और निगलने की क्षमता को पुनः बहाल किया जाता है।

    जागरूकता से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव

    डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश ईएनटी से संबंधित पेचीदगियों को समय पर पहचान और सही इलाज के माध्यम से रोका या सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है। यदि कान से लगातार पानी बहता रहे, सुनने की क्षमता घटने लगे, नाक लंबे समय तक बंद रहे, बार-बार साइनस का संक्रमण हो, आवाज़ लगातार बैठी रहे या मुँह का छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो तो तुरंत किसी ईएनटी विशेषज्ञ से जाँच करवानी चाहिए। डॉ. गुप्ता ने कहा, “समय पर विशेषज्ञ से सलाह करने का मतलब है आसान इलाज, जल्दी स्वास्थ्य लाभ और दीर्घकालिक बेहतर परिणाम।”

    अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत एडवांस्ड ईएनटी सर्जरी की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बना रही है। परंतु, इसका सबसे बड़ा लाभ तभी मिलेगा जब लोग जागरूक होंगे, समय पर जाँच करवाएंगे और बीमारी के शुरुआती चरण में ही इलाज शुरू करवाएंगे। इससे बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है और बड़े ऑपरेशनों की आवश्यकता भी काफी हद तक घटाई जा सकती है।

     

  • दो नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े तीन व्यक्ति 13 किलोग्राम हेरोइन सहित अमृतसर से गिरफ्तार

    दो नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े तीन व्यक्ति 13 किलोग्राम हेरोइन सहित अमृतसर से गिरफ्तार

    चंडीगढ़/अमृतसर : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के अनुसार पंजाब को सुरक्षित राज्य बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) अमृतसर ने दो नशा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर तीन व्यक्तियों को 13 किलोग्राम हेरोइन सहित गिरफ्तार किया है। यह जानकारी आज यहां पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने दी।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अकाशदीप सिंह निवासी खेमकरण (तरन तारन), जो वर्तमान में खेराबाद, अमृतसर में रह रहा था, तथा मंगल सिंह और बलजीत सिंह, दोनों निवासी गांव भोडीवाला, जिला मोगा, के रूप में हुई है। पुलिस टीमों ने मादक पदार्थ की बरामदगी के अलावा आरोपियों द्वारा नशा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही हुंडई वर्ना कार (पंजीकरण संख्या यूपी-14-डीएल-0324) भी जब्त कर ली है।

    डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी विभिन्न स्थानों से हेरोइन की खेप प्राप्त कर उसे पूरे पंजाब में अलग-अलग पार्टियों तक पहुंचाते थे। पहले ऑपरेशन का विवरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सीआई अमृतसर की पुलिस टीमों को पुख्ता सूचना मिली थी कि संदिग्ध अकाशदीप के पास हेरोइन की बड़ी खेप पहुंची है। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने खेराबाद, अमृतसर स्थित उसके घर पर छापा मारकर उसके कब्जे से 8 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। उन्होंने बताया कि एक अन्य कार्रवाई में पुलिस को सूचना मिली थी कि दो नशा तस्कर अपनी वर्ना कार में हेरोइन की खेप की सप्लाई करने जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर सीआई अमृतसर की टीम ने अमृतसर-झबाल जीटी रोड पर नाकाबंदी कर वर्ना कार को रोक लिया, जिसमें मंगल सिंह और बलजीत सिंह सवार थे। वाहन की तलाशी के दौरान कार से 5 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई।

    डीजीपी ने कहा कि दोनों मामलों में अन्य आरोपियों की पहचान करने तथा पूरी सप्लाई चेन का पर्दाफाश करने के लिए आगे और पीछे के सभी संबंधों की गहन जांच की जा रही है। इस संबंध में थाना स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी), अमृतसर में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पहला मामला एफआईआर नंबर 42 दिनांक 06-07-2026, एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21 और 29 के तहत तथा दूसरा मुकद्दमा एफआईआर नंबर 43 दिनांक 06-07-2026, एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21, 25 और 29 के तहत दर्ज किया गया है।