Category: Government News>Punjab Govt

  • पंजाब सरकार ने ‘Elderline 14567’ के माध्यम से बुजुर्गों के लिए सहायता प्रणाली को किया और अधिक सशक्त

    पंजाब सरकार ने ‘Elderline 14567’ के माध्यम से बुजुर्गों के लिए सहायता प्रणाली को किया और अधिक सशक्त

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए ‘एल्डरलाइन 14567’ के माध्यम से बुजुर्गों के लिए सहायता सेवाओं का निरंतर विस्तार कर रही है। इस पहल के जरिए वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता, कानूनी मार्गदर्शन तथा अनेक आवश्यक सेवाएं सरल और सुलभ तरीके से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि ‘एल्डरलाइन 14567’ राज्य के बुजुर्गों के लिए एक विश्वसनीय सहारा बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि अब तक पूरे पंजाब से प्राप्त 2.5 लाख से अधिक कॉलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त हेल्पलाइन के माध्यम से 91 बेसहारा बुजुर्गों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उन्हें उनके परिवारों से मिलाया गया है। साथ ही बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार तथा भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े 1,000 से अधिक मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है, जिससे प्रभावित वरिष्ठ नागरिकों को समय पर राहत मिली, उनका सम्मान बहाल हुआ तथा यह सुनिश्चित किया गया कि कठिन परिस्थितियों में कोई भी बुजुर्ग स्वयं को असहाय महसूस न करे।

    डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर और मजबूत आधार हैं। वे सम्मान, संवेदनशील व्यवहार तथा सुरक्षित जीवन के पूर्ण अधिकारी हैं। पंजाब सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है ताकि राज्य का कोई भी वरिष्ठ नागरिक स्वयं को उपेक्षित, असुरक्षित अथवा बेसहारा महसूस न करे। उन्होंने कहा कि ‘एल्डरलाइन 14567’ केवल एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए विश्वास, मार्गदर्शन और आवश्यकता के समय त्वरित सहायता का सशक्त माध्यम है।

    कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पंजाब में ‘एल्डरलाइन 14567’ का संचालन सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंजाब, हेल्पएज इंडिया (HelpAge India) तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस (NISD) के त्रिपक्षीय समझौते के तहत किया जा रहा है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन सप्ताह के सातों दिन प्रातः 8:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक संचालित रहती है, जहां प्रशिक्षित एवं संवेदनशील कॉल अधिकारी बुजुर्गों को तत्काल सहायता एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं।

    यह हेल्पलाइन वृद्धावस्था पेंशन तथा अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ पेशेवर परामर्श (काउंसलिंग), कानूनी सहायता, बेसहारा बुजुर्गों के रेस्क्यू एवं पुनर्वास की सुविधा भी प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ के अंतर्गत गठित जिला ट्रिब्यूनलों के माध्यम से बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, उपेक्षा तथा भरण-पोषण संबंधी मामलों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    डॉ. बलजीत कौर ने वरिष्ठ नागरिकों तथा उनके परिवारों से अपील की कि आवश्यकता पड़ने पर वे टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने दोहराया कि पंजाब सरकार एक ऐसे संवेदनशील, समावेशी और सहृदय समाज के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित है, जहां प्रत्येक बुजुर्ग सम्मान, सुरक्षा, आत्मविश्वास और मानसिक शांति के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके।

  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट की ओर से लैंड पूलिंग के लाभों में वृद्धि

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट की ओर से लैंड पूलिंग के लाभों में वृद्धि

    चंडीगढ़ : ज़मीन मालिकों की चिंताओं को दूर करने और ज़मीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को अधिक लाभ देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने ज़मीन मालिकों के लाभों से संबंधित मौजूदा नीति में संशोधनों को मंजूरी दे दी है तथा राहत के लिए कई अन्य कदमों की भी शुरुआत की है। यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया। ज़मीन अधिग्रहण के दौरान ज़मीन मालिकों के लिए बढ़े हुए लाभों के बारे में विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि कैबिनेट ने ज़मीन मालिकों के लिए आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटों का क्षेत्र बढ़ाने के लिए संशोधनों को मंजूरी दी है, जबकि हितधारकों के सामने आने वाली चिंताओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को हल करने के लिए ‘आउस्टी पॉलिसी’ में भी कई बदलाव किए गए हैं।

    संशोधित नियमों के अनुसार लैंड पूलिंग के तहत आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी चुनने वाले ज़मीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट मिलते रहेंगे, जबकि कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो लोग केवल आवासीय श्रेणी चुनते हैं, उन्हें अब 1,600 वर्ग गज की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा, जबकि व्यावसायिक श्रेणी के प्रोजेक्ट्स के लिए व्यावसायिक जगह 800 वर्ग गज से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। कैबिनेट ने आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत वह ज़मीन मालिक जिनकी 1 एकड़ ज़मीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे; जिनकी अधिग्रहित ज़मीन 1 एकड़ से अधिक और 2.5 एकड़ तक है, उन्हें 300 वर्ग गज का प्लॉट मिलेगा; जबकि जिनकी अधिग्रहित ज़मीन 2.5 एकड़ से अधिक है, वे 500 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे।

    कैबिनेट ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है और ‘सुविधा सर्टिफिकेट’ की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दी है। इसके अलावा इस नीति के तहत विकसित प्लॉट लेने वाले असली ज़मीन मालिकों को रजिस्ट्रेशन या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वैकल्पिक रूप से वे अधिग्रहित ज़मीन के कलेक्टर रेट पर गणना किए गए मूल्य तक पंजाब में कहीं भी ज़मीन खरीदते समय स्टांप ड्यूटी की छूट का लाभ ले सकते हैं। योग्य ज़मीन मालिकों को एक तरजीही ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा, जबकि इस नीति में भाग लेने वाले किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लॉटों की आबंटन के योग्य होंगे।

    इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पंजाब सरकार ने मौजूदा नीति संबंधी ज़मीन मालिकों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया था और उनके सुझावों तथा चिंताओं को मुख्य रखते हुए इन संशोधनों को स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा, “आवासीय और व्यावसायिक विकल्प के तहत आवासीय जगह प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज ही रहेगी, जबकि व्यावसायिक जगह 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। यदि कोई ज़मीन मालिक व्यावसायिक जगह की बजाय केवल आवासीय प्लॉट चुनता है तो आवासीय जगह 1,600 वर्ग गज से बढ़ाकर 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है।”

  • लुधियाना में मानसून के दौरान लोगों की सुविधा के लिए 1700 सीसीटीवी कैमरों वाला ‘मानसून वॉर रूम’ स्थापित

    लुधियाना में मानसून के दौरान लोगों की सुविधा के लिए 1700 सीसीटीवी कैमरों वाला ‘मानसून वॉर रूम’ स्थापित

    लुधियाना : मानसून के मौसम के दौरान लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के उद्देश्य से पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री स हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि नगर निगम लुधियाना द्वारा एक आधुनिक ‘मानसून वॉर रूम’ स्थापित किया गया है। यह हाईटेक कंट्रोल सेंटर 1700 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे पूरे शहर की निगरानी करेगा।
    आज यहां नगर निगम के जोन-डी, सराभा नगर स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) में स्थापित ‘मानसून वॉर रूम’ का निरीक्षण करने के बाद स हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि इस वॉर रूम की बड़ी स्क्रीन पर उन चौकों, निचले इलाकों और संवेदनशील नालों की लाइव एचडी फुटेज दिखाई जाएगी, जहां जलभराव की समस्या रहती है। इस व्यवस्था के माध्यम से जलभराव का पता कुछ ही सेकंड में चल जाएगा, जिससे नगर निगम की टीमें तुरंत संबंधित स्थान पर पहुंच सकेंगी। इससे कार्रवाई का समय घंटों से घटकर कुछ मिनटों तक सीमित हो जाएगा।

    कंट्रोल सेंटर के कामकाज का जायजा लेने के बाद स्थानीय निकाय मंत्री ने घोषणा की कि जल्द ही एक समर्पित मानसून हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। शहरवासी इस हेल्पलाइन पर फोन कर जलभराव, जाम या ओवरफ्लो नालों से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिसे वॉर रूम में तुरंत दर्ज किया जाएगा। प्रत्येक शिकायत को शहर के नक्शे पर जियो-टैग किया जाएगा और उसे सबसे निकट की फील्ड टीम को सौंपा जाएगा। समस्या के समाधान होने तक उसकी लगातार निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान कर लोगों को तुरंत राहत प्रदान करना है। इसके बाद नगर निगम अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में स हरजोत सिंह बैंस ने मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। उन्होंने अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने, बुद्धा दरिया और मुख्य सीवरेज लाइनों की सफाई (डी-सिल्टिंग) कराने, दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी मैनहोल ढकने, सड़क किनारे लगी जालियों की सफाई तथा टूटी सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    स बैंस ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में हम कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। ‘मिशन क्लीन पंजाब’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर चलाया जा रहा हमारा व्यावहारिक अभियान है।” उन्होंने चेतावनी दी कि सफाई अथवा आपातकालीन ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर, नगर निगम आयुक्त ओजस्वी अलंकार, वरिष्ठ डिप्टी मेयर राकेश पराशर, डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर, संयुक्त आयुक्त तपन भनोट तथा सहायक आयुक्त जसदेव सेखों भी उपस्थित रहे। नगर निगम आयुक्त ओजस्वी अलंकार ने स्थानीय निकाय मंत्री को कमांड सेंटर की तैयारियों की जानकारी दी और भरोसा दिलाया कि नगर निगम की सभी टीमें पूरी तरह सतर्क और अलर्ट हैं।

     

  • राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों को राज्य स्तरीय पुरस्कारों से किया गया सम्मानित

    चंडीगढ़ : मेडिकल पेशेवरों की अथक सेवाओं को मान्यता देने के लिए अहम कदम उठाते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने आज यहां म्युनिसिपल भवन में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाने के लिए आयोजित राज्य स्तरीय चिकित्सक पुरस्कार समारोह में सरकारी और निजी क्षेत्र के 59 डॉक्टरों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की यह अनूठी नीति उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों को सम्मानित करने का नेक प्रयास है। इस संस्थागत और योग्यता-आधारित नीति के तहत राज्य के स्वास्थ्य विभाग, सरकारी मेडिकल कॉलेजों और निजी क्षेत्र की बेहतरीन सेवाएं निभाने वाले डॉक्टरों को सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह दिए गए।

    सभी डॉक्टरों को डॉक्टर दिवस पर बधाई देते हुए स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह ने पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) के निदेशक डा. वीरेंद्र सिंह का उनके बहुमूल्य योगदान के लिए विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जिस इमारत को मूल रूप से एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के लिए बनाया गया था, वहां अब पीआईएलबीएस है, जहां पहला लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान में बहुत जल्द किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू हो रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल के निदेशक डा. आशीष गुलिया की, राज्य में कैंसर संबंधी देखभाल को उच्च स्तर पर ले जाने और शुरुआती निदान पर ध्यान केंद्रित करके कैंसर की रोकथाम करने के लिए सराहना की। इसके अलावा डा. बलबीर सिंह ने प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डा. बिश्व मोहन और न्यूरोलॉजिस्ट डा. जैराज डी. पांडियन की, हब-एंड-स्पोक-आधारित प्रोजेक्ट्स – स्टेमी और स्ट्रोक – को सफलतापूर्वक चलाने के लिए प्रशंसा की।

    उल्लेखनीय है कि हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित पंजाब स्टेमी प्रोजेक्ट का उद्देश्य दिल के दौरे के मरीजों को समय पर और प्रभावी इलाज प्रदान करना है, जिसमें मुख्य तौर पर थ्रोम्बोलाइसिस पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस जीवन-रक्षक पहल के तहत टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन, जो दिल में खून के थक्कों को घोलने में मदद करता है और आम तौर पर 25,000 से 35,000 रुपये की कीमत का होता है, मरीजों को पूरी तरह से मुफ्त दिया जा रहा है। इसी तरह पंजाब स्ट्रोक प्रोजेक्ट का उद्देश्य इस्केमिक स्ट्रोक से पीड़ित स्ट्रोक मरीजों को मुफ्त मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टोमी प्रदान करना है। यह प्रोजेक्ट भी हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित है, जिसमें सी.एम.सी. लुधियाना को केंद्रीय हब और तीन जिला अस्पतालों को स्पोक्स के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

    समारोह के दौरान समग्र चिकित्सा समुदाय की सराहना करते हुए डा. बलबीर सिंह ने डॉक्टरों को ग्लोबल रोल मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी मुसीबत आए – चाहे बाढ़ हो, कोविड-19 हो या कोई अन्य आपदा – डॉक्टर हमेशा लोगों की सेवा के लिए अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मरीजों के साथ सहानुभूति से पेश आने के लिए डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर मानक स्वास्थ्य सेवा को निजी अस्पतालों के बराबर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। उन्होंने दोहराया कि मानक स्वास्थ्य सेवा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का भी एक मौलिक अधिकार है। डा. बलबीर सिंह ने घोषणा की कि बहुत जल्द इसी तरह आशा वर्करों, पैरा-मेडिकल स्टाफ और अन्य हेल्थ वर्करों को सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय आयोजन किया जाएगा।

  • ’चिट्टा’ के खिलाफ चॉक: पंजाब की कक्षाएँ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का अग्रिम मोर्चा बनीं

    ’चिट्टा’ के खिलाफ चॉक: पंजाब की कक्षाएँ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का अग्रिम मोर्चा बनीं

    चंडीगढ़: गर्मी की एक महीने की छुट्टी के बाद जैसे ही पंजाब के स्कूल फिर से खुल रहे हैं, हज़ारों शिक्षक राज्य को नशामुक्त बनाने के अभियान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब यह लड़ाई पुलिस थानों और नशा मुक्ति केंद्रों से आगे बढ़कर स्कूलों और कक्षाओं तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाले ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत प्रशिक्षित शिक्षक, जागरूक प्रधानाचार्य और सुरक्षित स्कूल वातावरण के माध्यम से हर बच्चे के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाया जा रहा है। बच्चों को नशे के खतरों की जानकारी देने के साथ-साथ मानसिक तनाव से निपटने के कौशल और सुरक्षित, गुप्त रूप से शिकायत करने के विकल्प भी दिए जा रहे हैं।

    इस व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए पंजाब सरकार उन लोगों में निवेश कर रही है जो रोज़ाना किशोरों के संपर्क में रहते हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ के विशेषज्ञों के सहयोग से नौ जिलों (विशेषकर सीमावर्ती जिलों) के 1,400 से अधिक स्कूल प्रमुखों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे नशे के शुरुआती संकेत पहचान सकें, सहानुभूति के साथ प्रतिक्रिया दें और मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण से समझकर संभाल सकें।

    इसके अलावा, अमृतसर में कक्षा 9 से 12 तक के 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप आयोजित की गई हैं। इस ट्रेनिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ट्रेनिंग के बाद 75% शिक्षकों ने बताया कि उन्हें स्वस्थ स्कूल वातावरण बनाने की प्रेरणा मिली , जबकि 85% ने माना कि किशोरों में नशे का संबंध तनाव, साथियों के दबाव और भावनात्मक चुनौतियों से जुड़ा है।अब इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे राज्य के सभी जिलों में किया जा रहा है।

    स्कूल स्टाफ की जागरूकता के साथ-साथ सरकार किशोरों में तनाव और भावनात्मक असंतुलन जैसी मूल समस्याओं को भी संबोधित कर रही है। राज्य भर के सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया ‘माइंडफुलनेस प्रोग्राम’ कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रोज़ सुबह 30 मिनट का सत्र देता है, जिसमें साँस लेने के अभ्यास, मेडिटेशन , सकारात्मक विचार और आभार अभ्यास शामिल हैं, ताकि ध्यान, भावनात्मक मज़बूती और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके। मोहाली के लगभग 210 सरकारी स्कूलों में पायलट रूप से लागू इस कार्यक्रम में 83% छात्रों ने बताया कि वे कठिन परिस्थितियों को अब बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं और तनाव कम महसूस करते हैं।

    इस पहल के महत्त्व पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “नशे से बचाए गए हर बच्चे को एक सुरक्षित परिवार और मज़बूत भविष्य मिलता है। स्कूलों को ऐसा स्थान बनाकर जहाँ बच्चे आत्मविश्वास, लचीलापन और जीवन कौशल विकसित करें, सरकार एक स्वस्थ समाज की नींव रख रही है। हमारा उद्देश्य केवल नशे के खतरों से चेतावनी देना नहीं है, बल्कि बच्चों को सही निर्णय लेने के लिए ज्ञान, शक्ति और समझ प्रदान करना है।” पंजाब ने अपनी रोकथाम रणनीति को और मज़बूत करते हुए सम्पूर्ण राज्य में कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए भारत का पहला एविडेंस -आधारित एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम शुरू किया। पिछले साल अगस्त में शुरू किए गए इस कार्यक्रम में 3,658 स्कूलों के लगभग 8 लाख छात्र शामिल हैं और इसे 6,500 से अधिक प्रशिक्षित शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

    जे-पैल साउथ एशिया (J-PAL South Asia) और व्यवहार वैज्ञानिकों के सहयोग से विकसित यह पाठ्यक्रम पारंपरिक जागरूकता अभियानों से आगे बढ़कर छात्रों को नशा, साथियों का दबाव, निर्णय लेने की क्षमता और नशे से इनकार करने के व्यावहारिक कौशल सिखाता है। अमृतसर के एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका बलविंदर कौर, जो राज्य के नशा-विरोधी अभियान के तहत किशोर बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं, ने कहा, “बच्चों से हमें उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। वे कक्षा और स्कूल स्तर पर चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इससे हमें भरोसा मिलता है कि आने वाले समय में टीनेजर और एडोलेसेंटस नशे की समस्या से दूर रहेंगे।” छात्रों के लिए सुरक्षित मदद प्रणाली के तहत नशे से जुड़ी चिंताओं की जानकारी देने के लिए गुमनाम शिकायत पेटियाँ लगाई गई हैं, ताकि छात्र बिना डर और पहचान उजागर हुए गोपनीय रूप से रिपोर्ट कर सकें।

    पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह पहल सरकार की युवा पीढ़ी को सुरक्षित बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, “शिक्षकों ने हमेशा समाज में बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नशे के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें शिक्षक और मेंटर सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” पंजाब पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में अग्रणी राज्य बन चुका है, नेशनल अचीवमेंट सर्वे (राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण) और नीति आयोग की स्कूल एजुकेशन सिस्टम रिपोर्ट 2026 में शीर्ष स्थान प्राप्त कर चुका है। अब राज्य नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई में भी नई मिसाल पेश कर रहा है। यह दिखा रहा है कि नशे पर रोक सिर्फ कानून लागू करने से नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता, वैज्ञानिक सोच और समय रहते रोकथाम से भी लगाई जा सकती है। शिक्षकों, स्कूल प्रमुखों और कक्षाओं को इस अभियान का केंद्र बनाकर पंजाब ऐसा मॉडल तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को नशे की गिरफ़्त में आने से पहले ही सुरक्षित रखना है।

  • ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों और आउटसोर्स्ड स्टाफ को निष्पक्ष ढंग से रखा जाएगा : तरुनप्रीत सिंह सौंद

    ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों और आउटसोर्स्ड स्टाफ को निष्पक्ष ढंग से रखा जाएगा : तरुनप्रीत सिंह सौंद

    चंडीगढ़ : पंजाब के बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने आज कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य सरकार द्वारा ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने तथा आउटसोर्स्ड स्टाफ को ठेके पर लाने की घोषणा की जा चुकी है। मंत्री ने कहा कि इस फैसले को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष ढंग से लागू किया जा रहा है।

    बिजली मंत्री ने पी.एस.पी.सी.एल. और पी.एस.टी.सी.एल. की तीन यूनियनों, जिनमें तालमेल समिति, पावरकॉम ट्रांसको आउटसोर्स्ड यूनियन और आउटसोर्स्ड एम्प्लॉइज़ फेडरेशन शामिल थीं, के साथ बैठक की। मंत्री ने उन्हें फिर से आश्वासन दिया कि राज्य सरकार कॉन्ट्रैक्ट ठेके पर रखे स्टाफ को पक्का करने, आउटसोर्स्ड वर्कर्स को कॉन्ट्रैक्ट पर लाने और साथ ही उनकी अन्य सभी जायज़ मांगों को भी तेजी से हल करने के लिए सक्रिय रूप से प्रक्रिया कर रही है। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार के इस फैसले से पी.एस.पी.सी.एल. और पी.एस.टी.सी.एल. में काम करने वाले 8,000 से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

    तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए, बिजली मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी प्रक्रिया में तेजी लाने और सभी जायज़ मांगों को फास्ट-ट्रैक मोड में हल करने का निर्देश दिया। इस दौरान सी.एम.डी. डॉ. बसंत गर्ग ने भी कर्मचारी यूनियनों के सदस्यों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी जायज़ मांगों को योजनाबद्ध तरीके से हल किया जाएगा और बिजली विभाग द्वारा कर्मचारियों के हित में अध्यादेश के प्रावधानों का शब्दश: पालन किया जाएगा। बैठक के दौरान एस.एस.पी. खन्ना डॉ. दरपन आहलूवालिया, निदेशक (जनरेशन) इंजीनियर पुनीरदीप सिंह बराड़ सहित अन्य अधिकारी और यूनियनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

     

  • पंजाब राज्य में 97.44 प्रतिशत गणना फॉर्मों का वितरण हुआ: CEO Anindita Mitra

    पंजाब राज्य में 97.44 प्रतिशत गणना फॉर्मों का वितरण हुआ: CEO Anindita Mitra

    चंडीगढ़: पंजाब राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत 25 जून, 2026 से लेकर 01 जुलाई, 2026 तक 97.44 प्रतिशत गणना फॉर्मों का वितरण किया जा चुका है। यह जानकारी पंजाब राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा द्वारा आज यहाँ दी गई।

    पंजाब राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन संबंधी कार्यवाही बहुत सुचारू ढंग से चल रही है, जिसके फलस्वरूप प्रदेश के 24,453 बी.एल.ओज़. द्वारा घर-घर जाकर प्रदेश के 2 करोड़ 14 लाख 61 हज़ार 43 मतदाताओं में से 01 जुलाई, 2026 तक 2 करोड़ 9 लाख 12 हज़ार 619 मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह कुल मतदाताओं का 97.44 प्रतिशत बनता है।

    सी.ई.ओ. श्रीमती अनिंदिता मित्रा द्वारा बताया गया कि बी.एल.ओज़. द्वारा मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित करने के साथ-साथ फॉर्म भरवाने में भी मदद की जा रही है, ताकि किसी भी मतदाता के गणना फॉर्म में कोई गलती न हो सके। बी.एल.ओज़. द्वारा भरे हुए गणना फॉर्म एकत्रित करने का कार्य भी आरंभ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इन फॉर्मों के डिजिटलीकरण का काम भी आरंभ हो गया है।

    अनिंदिता मित्रा द्वारा पंजाब राज्य के समस्त मतदाताओं से अपील की गई है कि वे अपना गणना फॉर्म भरना सुनिश्चित करें और बी.एल.ओज़. को अधिकतम सहयोग दें, ताकि इस बड़े कार्य को समय पर पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि बी.एल.ओज़. द्वारा घर-घर जाकर गणना फॉर्म का वितरण और भरे हुए फॉर्म वापस लेने का कार्य 24 जुलाई, 2026 तक किया जाएगा।

     

  • पंजाब सरकार का बड़ा भर्ती फैसला, 619 हेल्थ वर्करों की भर्ती को मंजूरी

    पंजाब सरकार का बड़ा भर्ती फैसला, 619 हेल्थ वर्करों की भर्ती को मंजूरी

    चंडीगढ़: पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत 619 मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) के पदों पर भर्ती तथा उद्योग विभाग के महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं फील्ड पदों के रणनीतिक पुनर्जीवन संबंधी व्यापक प्रशासनिक प्रस्तावों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस निर्णय का उद्देश्य जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना तथा संस्थागत रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

    यहां जारी एक प्रेस बयान में दोनों प्रशासनिक स्वीकृतियों का विस्तृत विवरण साझा करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य पूरे पंजाब में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना तथा औद्योगिक प्रशासन को अधिक सक्षम बनाना है। सरकार सख्त वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करेगी कि आम जनता से सीधे जुड़े आवश्यक विभागों में कर्मचारियों की कोई कमी न रहे।

    राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बड़े भर्ती अभियान की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि नए स्वीकृत ढांचे के अंतर्गत मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) ग्रुप-सी के 619 रिक्त पद भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन 619 पदों में प्रत्यक्ष भर्ती तथा पदोन्नति (प्रमोशन) कोटे का संतुलित और रणनीतिक समावेश किया गया है। वित्त मंत्री के अनुसार, कुल 220 पद ऐसे हैं जो एक वर्ष से कम समय से रिक्त हैं, जबकि 346 पद पदोन्नति कोटे के लिए आरक्षित किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षित दाई (ट्रेंड दाई) कैडर के पात्र कर्मचारियों को मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) के रूप में पदोन्नत किया जा सके।

    प्रत्यक्ष भर्ती के 53 पद, जो एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त थे और वित्त विभाग के 6 जून 2019 के दिशा-निर्देशों के अनुसार समाप्त कर दिए गए थे, उन्हें मंत्रिमंडल की आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर औपचारिक तौर पर पुनः बहाल किया जाएगा। वित्त मंत्री चीमा ने कहा, “इस पहल के तहत स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति ‘पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तकनीकी (ग्रुप-सी) सेवा (प्रथम संशोधन) नियम, 2025’ के अनुसार लेवल-3 के 21,700 से 69,100 रुपये के वेतनमान में की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने इन 619 पदों को पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखने का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर पूरी भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़, फरीदकोट के माध्यम से संचालित की जाएगी। इस संबंध में 3 दिसंबर 2025 को अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा औपचारिक सहमति और स्वीकृति पहले ही प्रदान की जा चुकी है।”

    इन पदों को भरने से परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) के दौरान राज्य सरकार पर लगभग 16.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा। उद्योग क्षेत्र में प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष भर्ती कैडरों को पुनर्जीवित करने संबंधी उद्योग विभाग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में हुए पुनर्गठन के दौरान उद्योग विभाग ने अपनी कुल 1,728 स्वीकृत पदों में से 721 पद समर्पित (सरेंडर) कर दिए थे, जिससे विभाग की संगठनात्मक क्षमता में लगभग 42 प्रतिशत की कमी आ गई थी और ग्रुप-ए, ग्रुप-बी तथा ग्रुप-सी में केवल 825 स्वीकृत पद ही शेष रह गए थे।

    वित्त मंत्री ने कहा कि यदि कर्मचारियों की संख्या में और कटौती होती है तो इससे विभाग के कार्यों तथा जमीनी स्तर पर सेवाओं की आपूर्ति पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए उद्योग विभाग को वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम 97 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि वह तत्काल एक व्यापक एवं आधुनिक पुनर्गठन समीक्षा तैयार करे, जिसमें विभाग की वर्तमान प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्यों का वास्तविक आकलन प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद इस समीक्षा को दीर्घकालिक योजना के लिए वित्त विभाग को औपचारिक प्रस्ताव के रूप में भेजा जाएगा।

  • रिश्वत मांगने के आरोप में साइंस मास्टर-कम-कानूनी सलाहकार विजिलेंस ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार

    रिश्वत मांगने के आरोप में साइंस मास्टर-कम-कानूनी सलाहकार विजिलेंस ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कपूरथला के साइंस मास्टर-कम-कानूनी सलाहकार परमजीत सिंह को सतिंदर बीर सिंह की फर्म ‘एजूराइज एंटरप्राइज’ को साइकोमेट्रिक टेस्टिंग आवंटित करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

    आज यहां यह जानकारी साझा करते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि यह गिरफ्तारी मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पोर्टल पर सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी सतिंदर बीर सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की गई है।

    प्रवक्ता ने बताया कि शिकायत की जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद स्कूली विद्यार्थियों के लिए साइकोमेट्रिक टेस्ट कराने हेतु अमृतसर में ‘एजूराइज एंटरप्राइज’ नामक कंपनी शुरू की थी। शिकायतकर्ता ने अपनी कंपनी की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी), कपूरथला को सौंपी थी, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए ब्लॉक भुलत्थ, कपूरथला के अंतर्गत आने वाले 14 सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत 187 छात्राओं की मनोवैज्ञानिक टेस्टिंग कराने की अनुमति मांगी गई थी।

    इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) के कार्यालय में तैनात सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कपूरथला के साइंस मास्टर-कम-कानूनी सलाहकार परमजीत सिंह ने कथित रूप से प्रति छात्रा 200 रुपये रिश्वत की मांग की, जिसे बाद में जिला शिक्षा अधिकारी के हवाले से घटाकर 150 रुपये प्रति छात्रा कर दिया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि उक्त टेस्ट कराने के लिए सरकार कंपनी को प्रति छात्रा 700 रुपये का भुगतान करती है।

    प्रवक्ता ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप सही पाए गए। इस संबंध में आरोपी के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो पुलिस थाना, जालंधर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच के दौरान अन्य संदिग्ध अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। मामले की आगे की जांच जारी है।

     

  • पंजाब पुलिस की बड़ी पहल, राज्यभर के थानों से हटाए गए 7,402 पुराने वाहन

    पंजाब पुलिस की बड़ी पहल, राज्यभर के थानों से हटाए गए 7,402 पुराने वाहन

    चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप राज्यभर के पुलिस थानों में लंबे समय से खड़े लावारिस एवं जब्त वाहनों के शीघ्र निस्तारण के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने पिछले एक माह के दौरान 7,402 जब्त वाहनों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया है।

    इस अभियान से पहले पंजाब पुलिस के पास कुल 55,721 जब्त वाहन थे। इसी अवधि के दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन तथा गैरकानूनी गतिविधियों के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान के दौरान पुलिस ने 3,355 अन्य वाहन भी जब्त किए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 59,076 हो गई। हालांकि, पिछले एक माह में 7,402 वाहनों का निस्तारण किए जाने के बाद वर्तमान में पुलिस के पास जब्त वाहनों की संख्या घटकर 51,674 रह गई है।

    इस संबंध में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “वाहनों की सघन जांच तथा अपराधियों के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई के तहत पंजाब पुलिस विभिन्न विशेष अभियान चला रही है। पिछले एक माह के दौरान पुलिस ने 3,355 वाहन जब्त किए हैं तथा प्रभावी कार्रवाई के माध्यम से 7,402 वाहनों का सफलतापूर्वक निस्तारण भी किया है।”

    उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान एनडीपीएस अधिनियम की धारा 52-ए के अंतर्गत आने वाले मामलों को छोड़कर 8,121 वाहनों से संबंधित आवेदन कानूनी जांच के अधीन हैं, जबकि धारा 52-ए के अंतर्गत 1,276 मामलों में इन्वेंट्री तैयार करने तथा फोटोग्राफी संबंधी कानूनी प्रक्रिया अभी लंबित है।

    यह विशेष अभियान राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों एवं पुलिस कमिश्नरेटों में व्यापक स्तर पर चलाया गया। जालंधर पुलिस कमिश्नरेट ने अपनी अभिरक्षा में मौजूद 5,993 वाहनों में से 779 वाहनों का निस्तारण किया। मोगा पुलिस ने 2,367 में से 697 तथा बठिंडा पुलिस ने 3,008 में से 631 वाहनों का निस्तारण किया। इसी प्रकार फिरोजपुर पुलिस ने 2,649 में से 586, लुधियाना (देहात) पुलिस ने 1,618 में से 538 तथा लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट ने 7,471 में से 460 वाहनों का निस्तारण किया। तरनतारन पुलिस ने 2,033 में से 302 तथा फाजिल्का पुलिस ने अपनी अभिरक्षा में मौजूद 2,216 वाहनों में से 283 वाहनों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया।

    इस अवसर पर पंजाब के विशेष डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा, “ये आंकड़े स्वयं इस बात का प्रमाण हैं कि पंजाब पुलिस न केवल कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह सक्रिय है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित कर रही है। आने वाले महीनों में राज्य पुलिस सभी कानूनी प्रक्रियाओं का समयबद्ध पालन करते हुए कस्टडी में रखे वाहनों के निस्तारण की प्रक्रिया को और अधिक तेज करने के लिए निरंतर प्रयास करेगी।”