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  • एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी बनकर उभरेगा संगरूर

    एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी बनकर उभरेगा संगरूर

    संगरूर : पंजाब को भारत का खेल केंद्र बनाने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज संगरूर में 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बने ओलंपिक स्तर के स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संगरूर जिला एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी के रूप में उभरेगा। खेलों के बुनियादी ढांचे में सरकार द्वारा किए गए अभूतपूर्व निवेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने कभी भी पंजाब का खेल बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं बढ़ाया था, जबकि हमारी सरकार ने खेल बजट को बढ़ाकर 1,790 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार पंजाब को एशियन हॉकी चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी मिली है और राज्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए क्रिकेट और हॉकी प्रीमियर लीग शुरू करने के लिए भी तैयार है।

    इस कार्यक्रम का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “आज संगरूर के लोगों को खेलों के क्षेत्र में बड़ा प्रोत्साहन मिला है क्योंकि वार हीरोज स्टेडियम में ओलंपिक स्तर के आधुनिक स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया गया है। 9.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 50×21 मीटर आकार का स्विमिंग पूल खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण ढांचा उपलब्ध कराएगा।” उन्होंने आगे लिखा, “पंजाब की खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए हमारी सरकार ने खेल बजट को 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,790 करोड़ रुपये कर दिया है। खिलाड़ियों को अब प्रशिक्षण के लिए अग्रिम राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक के लिए 1 करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 75 लाख रुपये और कांस्य पदक के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।”

    पोस्ट के अंत में लिखा गया, “खेल संस्कृति को और बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार जल्द ही पंजाब प्रीमियर लीग और पंजाब हॉकी लीग शुरू करेगी। इसके अलावा, अक्टूबर-नवंबर के दौरान मोहाली और जालंधर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी (हॉकी) की मेजबानी की जाएगी, जिससे देश में खेलों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में पंजाब की स्थिति और मजबूत होगी।” उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज का दिन संगरूर के लोगों, विशेष रूप से युवाओं के लिए अत्यंत गौरव और खुशी का दिन है, क्योंकि यह नया अत्याधुनिक स्विमिंग पूल उन्हें समर्पित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह स्विमिंग पूल मात्र एक इमारत नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य के ओलंपियन खिलाड़ियों की नर्सरी के रूप में उभरेगा।” खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वस्तरीय स्विमिंग पूल पंजाब को देश का नंबर एक खेल राज्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह स्विमिंग पूल अंतरराष्ट्रीय मानकों और ओलंपिक विनिर्देशों के अनुरूप 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसका आकार 50 मीटर × 21 मीटर है, इसकी गहराई 4.5 फीट से 7.5 फीट तक है तथा इसमें 2.5 लाख लीटर पानी की क्षमता है।” इस परिसर में विकसित सुविधाओं का विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि खिलाड़ियों और खिलाड़ीाओं की सुविधा के लिए अलग-अलग आधुनिक शॉवर, चेंजिंग रूम, प्रशिक्षकों के लिए विशेष कक्ष तथा स्टोर रूम बनाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस बढ़ाने के लिए आधुनिक जिमनेजियम भी स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “7 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एक विशेष मिनी स्विमिंग पूल भी तैयार किया गया है।”

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्विमिंग पूल का निर्माण विश्वस्तरीय ‘मिर्था रेनोवएक्शन’ और ‘क्लासिक मॉड्यूलर सिस्टम’ तकनीक का उपयोग करके किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इसमें लैमिनेटेड पीवीसी और स्टेनलेस स्टील के पैनल लगाए गए हैं, जो इसे देश के सबसे आधुनिक स्विमिंग पूलों में से एक बनाते हैं। स्वच्छ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय मानकों के अनुरूप फिल्ट्रेशन और डिसइन्फेक्शन सिस्टम स्थापित किया गया है।” संगरूर तथा आसपास के क्षेत्रों के अभिभावकों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपने बच्चों को खेलों के प्रति प्रेरित करें। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि खेलों के विकास के लिए सुविधाओं अथवा धन की कभी कोई कमी न आने पाए।” राज्यभर में खेलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार खेलों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को नशे की बुराई से दूर रखने के उद्देश्य से पूरे पंजाब में 3,100 खेल मैदानों का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत तथा तरुनप्रीत सिंह सौंद भी उपस्थित थे।

     

  • एस.सी. आयोग द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव तलब

    एस.सी. आयोग द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव तलब

    चंडीगढ़, 30 जून : पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा आज स्वतः संज्ञान (सुओ-मोटो नोटिस) लेते हुए शिक्षा विभाग के भर्ती बोर्ड द्वारा लेक्चरारों के पदों के लिए जारी विज्ञापन में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए लागू आरक्षण नीति की अनदेखी करने के मामले में पंजाब सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को तलब किया गया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने बताया कि यह मामला उनके ध्यान में आया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए आयोग द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग, पंजाब के सचिव को 3 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
  • पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से 3,524 निःशुल्क आँखों के ऑपरेशन करवाए

    पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से 3,524 निःशुल्क आँखों के ऑपरेशन करवाए

    चंडीगढ़ : पंजाब सरकार मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से आँखों की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ा रही है। इस योजना के तहत हजारों मरीजों को सरकारी तथा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में निःशुल्क आँखों के ऑपरेशन की सुविधा मिल रही है। इससे उपचार में होने वाली देरी कम हुई है, विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा तक लोगों की पहुँच बढ़ी है तथा विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है। योजना के आँकड़ों के अनुसार अब तक 3,524 मरीजों की आँखों की सर्जरी लगभग 1,98,68,890 रुपये की लागत से निःशुल्क की जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक संख्या मोतियाबिंद के ऑपरेशनों की रही, क्योंकि यह बुजुर्गों में अंधत्व का प्रमुख कारण है।

    सबसे अधिक 3,070 मरीजों की स्मॉल इन्सीजन कैटरैक्ट सर्जरी (एसआईसीएस) नॉन-फोल्डेबल इंट्रा-ऑक्यूलर लेंस (आईओएल) के साथ की गई, जिनकी कुल लागत 1,54,40,380 रुपये रही। यह योजना के तहत कवर की गई आँखों की सभी सर्जरियों का 87 प्रतिशत से अधिक था।
    दूसरी सबसे अधिक की गई प्रक्रिया प्टेरीजियम विद कंजंक्टाइवल ऑटोग्राफ्ट रही, जिसके तहत 333 मरीजों का उपचार किया गया और इस पर 31,83,300 रुपये खर्च हुए। इसके अलावा योजना के तहत 28 एंट्रोपियन करेक्शन, 12 एक्ट्रोपियन करेक्शन, बच्चों की लेंस सर्जरी, ग्लूकोमा का उपचार, टियर डक्ट सर्जरी तथा अन्य कई प्रकार की आँखों की सर्जरी भी निःशुल्क की गईं, जिससे सभी आयु वर्ग के मरीजों को नेत्र उपचार की सुविधा मिल रही है।

    गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीश धवन ने कहा कि यह योजना आँखों के आधुनिक उपचार को प्रत्येक वर्ग के लिए आसान और किफायती बना रही है। उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत मरीजों को अत्याधुनिक नेत्र उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। फोल्डेबल इंट्रा-ऑक्यूलर लेंस के साथ आधुनिक फेकोइमल्सिफिकेशन मोतियाबिंद सर्जरी निःशुल्क की जाती है। इसके अलावा यदि समय पर उपचार न मिले तो अंधत्व का कारण बनने वाले ग्लूकोमा का उपचार भी इस योजना में शामिल है, जिससे मरीजों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।”

    उन्होंने कहा कि यह योजना विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हुई है, क्योंकि आर्थिक तंगी के कारण कई लोग उपचार टाल देते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत की जा रही आँखों की सर्जरियाँ बुजुर्ग मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हुई हैं। मोतियाबिंद की सर्जरी जैसी प्रक्रियाएँ अब अधिक सुलभ हैं। इससे मरीजों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है और वे अधिक आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जिन्हें पहले दृष्टि संबंधी समस्या के कारण दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।” उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा स्क्विंट (भेंगापन) का ऑपरेशन भी इस योजना के तहत निःशुल्क किया जाता है।”

    डॉ. मुनीश धवन ने आँखों की बीमारियों से बचाव तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “आँखों की बीमारियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों की नियमित दृष्टि जाँच, 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की समय-समय पर आँखों की जाँच तथा शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की नियमित निगरानी बहुत आवश्यक है, क्योंकि डायबिटीज आँखों की रोशनी पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।”

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को शामिल करने से पूरे राज्य में आधुनिक तरीके से नेत्र उपचार सेवाएँ अधिक सुलभ हो गई हैं। उन्होंने कहा, “सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों तक सेवाओं का विस्तार करके हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अधिक से अधिक मरीजों को समय पर निःशुल्क सर्जरी मिल सके। समय पर उपचार से दृष्टि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है और मरीजों के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार लाया जा सकता है।”

    स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की कि धुंधला दिखाई देना, आँखों में लगातार जलन, अत्यधिक पानी आना अथवा पलकों से संबंधित किसी भी प्रकार की असामान्यता जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से जटिलताओं से बचा जा सकता है और दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना रही है। इसके माध्यम से पात्र मरीजों को सामान्य से लेकर विशेष नेत्र सर्जरियों तक की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे हजारों लोग बेहतर उपचार प्राप्त कर स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।”

  • पंजाब की जवानी को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: CM Bhagwant Singh Mann

    पंजाब की जवानी को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: CM Bhagwant Singh Mann

    बठिंडा: पंजाब में चल रहे ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज डिप्टी कमिश्नरों, पुलिस कमिश्नरों तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि जब तक पंजाब नशे की बुराई से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक इस अभियान को और अधिक तेज किया जाए। विलेज डिफेंस कमेटियों के कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने नशों की सप्लाई लाइन तोड़ने और बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सफलता हासिल की है, जिससे नशे के अभिशाप की कमर टूट गई है। इस अभियान में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जानी चाहिए तथा जमीनी स्तर पर अधिक सशक्त कार्रवाई, अधिक जनभागीदारी और गांवों में विश्वास बहाली के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि इस गति को बनाए रखते हुए नशों के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की जा सके।

    बैठक के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा, “आज बठिंडा के लेक व्यू गेस्ट हाउस से मैंने ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत सभी डिप्टी कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। सभी अधिकारियों को नशों के पूर्ण उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आइए, हम सभी मिलकर पंजाब को नशामुक्त बनाएं और राज्य को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।”

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “नशों की सप्लाई लाइन पहले ही तोड़ी जा चुकी है और इस घिनौने अपराध में शामिल बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस अभियान की गति को बनाए रखना होगा और समय की मांग है कि इसे तब तक और तेज किया जाए, जब तक पंजाब पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता।” विलेज डिफेंस कमेटियों के सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर रहे हैं और उन्होंने पिछले तीन महीनों में ही नशा तस्करों के खिलाफ 13,000 से अधिक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। उन्होंने कहा, “जिन जिलों में विलेज डिफेंस कमेटियां अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं, उन्हें इस जनहित के मिशन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। प्रत्येक जिले में हर महीने विलेज डिफेंस कमेटियों की बैठकें आयोजित की जानी चाहिए और मैं स्वयं मासिक राज्य स्तरीय बैठकों में उनके कार्यों की समीक्षा करूंगा।”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या एक वैश्विक चुनौती है, लेकिन दुनिया में कहीं भी इसके खिलाफ इतनी दृढ़ और व्यापक मुहिम नहीं चलाई गई है। उन्होंने कहा, “पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए विलेज डिफेंस कमेटियों के 1.50 लाख सदस्यों की एक मजबूत शक्ति तैयार की गई है। जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि नशों के खिलाफ इस लड़ाई को जन आंदोलन का रूप देना होगा। नशा एक सामाजिक समस्या है और इस अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लोगों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने डीसीज़ और एसएसपीज़ को निर्देश दिए कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग प्राप्त करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके क्षेत्रों में कहीं भी नशे की बिक्री न हो और प्रत्येक नशा पीड़ित व्यक्ति को इस दलदल से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने कहा, “लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए पुलिस टीमों को नियमित रूप से गांवों का दौरा करना चाहिए और जमीनी हकीकत जानने के लिए स्थानीय लोगों से संवाद करना चाहिए। नशा तस्करों के बारे में सूचना देने वाले विलेज डिफेंस कमेटी के सदस्यों अथवा किसी भी नागरिक की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए।”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नशा तस्करों को गिरफ्तार कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजकर नशों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे नशा तस्करों पर शिकंजा कसा गया, नशों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नशे के शिकार लोग नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचने लगे। इसलिए सरकार ने पीड़ितों को नशामुक्त कर उन्हें सम्मान और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने योग्य बनाने के उद्देश्य से नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया है।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के अंतर्गत वर्तमान नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। “कई नए केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा मौजूदा केंद्रों में सेवाओं की गुणवत्ता और समग्र वातावरण में व्यापक सुधार किया गया है, जिसमें एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। सरकार द्वारा संचालित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में बिस्तरों की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है।”

    ओट केंद्रों को भी उन्नत किया गया है तथा आवश्यक दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। “जहां भी आवश्यकता महसूस हुई, वहां नए ओट केंद्र स्थापित किए गए, जिससे उनकी कुल संख्या 529 से बढ़कर 565 हो गई है। अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी ओट केंद्रों एवं नशा मुक्ति केंद्रों में दवाइयों, आवश्यक सामग्री तथा बिस्तरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।”

    ‘सूरमा’ पहल पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक अनूठा कार्यक्रम है, जिसके तहत उन व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने नशे पर विजय प्राप्त की है और दो वर्षों से अधिक समय से नशे से दूर हैं। उन्होंने कहा, “ये ‘सूरमा’ अब अन्य लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे तथा पंजाब को पूर्णतः नशामुक्त बनाने के लिए ‘नशा मुक्ति के दूत’ के रूप में सरकार के साथ मिलकर कार्य करेंगे।”

    यह पहल नशों को जड़ से समाप्त करने के प्रति राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम की वास्तविक भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका संघर्ष और दृढ़ संकल्प रंगले पंजाब की राह प्रशस्त करता है। वे हमारी आशा के दूत हैं और सरकार नशा मुक्ति केंद्रों, कौशल विकास तथा नशे से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के प्रयासों में निरंतर निवेश करती रहेगी, ताकि प्रत्येक नशामुक्त हो रहा व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके और बेहतर आजीविका के अवसर प्राप्त कर सके।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि राज्य सरकार ने नशों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए इस अभिशाप के विरुद्ध निर्णायक अभियान छेड़ा है। उन्होंने कहा, “पंजाब पुलिस का कानून-व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से सफलतापूर्वक निपटने का गौरवशाली इतिहास रहा है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह बल अपनी इस गौरवपूर्ण परंपरा को आगे भी कायम रखेगा और जनता के सक्रिय सहयोग से पंजाब को पूरी तरह नशामुक्त बनाएगा। आने वाली पीढ़ियों को नशों की इस भयावह समस्या से बचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”

    नशों के विरुद्ध यह लड़ाई केवल सूक्ष्म स्तर पर सुव्यवस्थित योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ही जीती जा सकती है, जिसके लिए प्रत्येक अधिकारी को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार पंजाब की युवा शक्ति की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए सामूहिक प्रयास कर रही है। यह एक असाधारण लड़ाई है और इसके लिए सरकार के साथ-साथ इस मिशन से जुड़े प्रत्येक अधिकारी को नवीन सोच अपनाते हुए परंपरागत तरीकों से हटकर प्रभावी पहल करनी होगी।”

     

  • Phukoyoka Japan की 80 प्रतिशत कंपनियों में मानव संसाधन की भारी कमी

    Phukoyoka Japan की 80 प्रतिशत कंपनियों में मानव संसाधन की भारी कमी

    चंडीगढ़: जापान के फुकुओका में तकनीकी क्षेत्र की 80 प्रतिशत कंपनियों, जिनमें सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, आईटी तथा अन्य निर्माण इकाइयां शामिल हैं, को इस समय तकनीकी रूप से कुशल मानव संसाधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर ने हरियाणा सरकार से यहां के युवाओं को उनकी जरूरत के अनुसार तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का अनुरोध किया है ताकि अगले पांच साल में यहां के 50 हजार युवाओं को फुकुओका प्रीफेक्चर में रोजगार उपलब्ध करवाकर मानव संसाधन की कमी को दूर किया जा सके।

    हरियाणा सरकार और जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर के बीच औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में सहयोग को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में सोमवार को हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में ‘हरियाणा-फकुओका कनेक्ट-2026’ के अंतर्गत उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में फुकुओका प्रीफेक्चर सरकार, फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हरियाणा सरकार, विश्वविद्यालयों व विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न विषयों पर मंथन किया।

    बैठक के दौरान हरियाणा और फुकुओका के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, निवेश संभावनाओं, तकनीकी मानव संसाधन तथा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने भारतीय युवाओं, विशेषकर हरियाणा के 50 हजार विद्यार्थियों और तकनीकी पेशेवरों के लिए अगले पांच साल में जापान में रोजगार, इंटर्नशिप तथा कौशल विकास के अवसर बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

    हरियाणा के विदेश सहयोग विभाग की आयुक्त एवं सचिव अमनीत पी कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को हरियाणा सरकार की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन योजनाओं तथा जापानी कंपनियों के लिए विकसित किए जा रहे विशेष औद्योगिक इकोसिस्टम की जानकारी दी। राज्य सरकार ने निवेशकों को त्वरित अनुमतियां, सिंगल विंडो प्रणाली तथा उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

    पिछले वर्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने जापान की यात्रा कर विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग से विकास की प्रतिबद्धता जाहिर की थी। इसके साथ ही जापान के साथ आपसी समन्वय माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। उन्होने बताया कि हरियाणा और जापान को इतिहास, सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में भी आदान-प्रदान की जरूरत है ताकि दोनों क्षेत्र एक-दूसरे को अच्छी प्रकार समझ सकें। ग्रीन जॉब्स तथा ग्रीन फ्यूल्स आदि क्षेत्रों में भी मिलकर कार्य करने की जरूरत पर बल दिया।

    हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा और फुकुओका के बीच सहयोग को संस्थागत स्वरूप देने के लिए ‘हरियाणा सकुरा वर्किंग ग्रुप’ का गठन किया गया है जिसके माध्यम से फुकुओका आधारित कंपनियों और संस्थानों की सहायता के लिए एक ‘समर्पित हेल्प डेस्क’ भी स्थापित की गई है। हरियाणा में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए विभिन्न प्रकार की अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी फुकुओका की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को तैयार करने में व्यक्तिगत दिलचस्पी ले रहे हैं ताकि हरियाणा के अधिक से अधिक युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि विदेश सहयोग विभाग के माध्यम से तथा एचकेआरएन के सहयोग से हरियाणा के उच्च शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को फुकुओका में मानव संसाधन की कमी की पूर्ति करने का अवसर मिलेगा। हरियाणा के शिक्षण संस्थानों में फुकुओका की जरूरत के अनुसार जापानी भाषा तथा अन्य तकनीकी शिक्षा के नए कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।

    विदेश सहयोग विभाग के महानिदेशक अशोक कुमार मीणा ने कहा कि विदेशी कंपनियों की मदद के लिए विदेश सहयोग विभाग निरंतर कार्य कर रहा है और तकनीकी रूप से पारंगत मानव संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए विभाग फुकुओका के साथ मिलकर कार्य करेगा। उन्होंने संस्कृति, विरासत और अध्यात्म के क्षेत्र में इको-सिस्टम तैयार करने, सिस्टर सिटी तथा इको-टाउन मॉडल विकसित करने की दिशा में मिलकर कार्य करने की जरूरत पर बल दिया।

    विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन कुमार चौधरी ने गुरुग्राम में फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक परिसर की स्थापना की संभावनाओं का प्रस्ताव रखा, ताकि हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निवास कर रहे जापानी पेशेवरों तथा उनके परिवारों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। हरियाणा अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। गुरुग्राम में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन के परिसर की स्थापना राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चौधरी ने कहा कि हरियाणा में किसी प्रतिष्ठित जापानी शैक्षणिक संस्थान की उपस्थिति न केवल दोनों क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि अनुसंधान साझेदारियों, संकाय आदान-प्रदान, उद्योग-शिक्षा जगत सहयोग तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रतिभा विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    दोनों पक्षों ने विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने हरियाणा के विद्यार्थियों के लिए अध्ययन एवं शोध के अवसरों पर भी प्रस्तुति दी।

    इस अवसर पर हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा विभाग, एचकेआरएन तथा विदेश सहयोग विभाग सहित अन्य विभागों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए और जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ भविष्य में मिलकर कार्य करने की संभावनाओं पर प्रसन्नता व्यक्त की। बैठक से पूर्व फुकुओका प्रतिनिधिमंडल और विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच द्विपक्षीय चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का समापन भविष्य की कार्ययोजना तय करने तथा सहयोग को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की सहमति के साथ हुआ।

    बैठक में हरियाणा के विदेश सहयोग विभाग की आयुक्त एवं सचिव अमनीत पी कुमार, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, विदेश सहयोग विभाग के महानिदेशक अशोक कुमार मीणा, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग, विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन कुमार चौधरी, फुकुओका प्रीफेक्चरल सरकार के अंतरराष्ट्रीय मामलों के कार्यकारी निदेशक शोजी हिरानो, अंतरराष्ट्रीय नीति प्रभाग के निदेशक हिसाशी कागे, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप महानिदेशक शिन्या नाकानो, तकनीकी मानव संसाधन विकास प्रभाग के निदेशक मनाबु हिराता, फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ अधिकारियों सहित हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रतिनिधि, उच्चतर शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

  • पंजाब सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पर मार्च 2022 से मई 2026 तक 16,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं

    पंजाब सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पर मार्च 2022 से मई 2026 तक 16,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन के माध्यम से बड़े मील के पत्थर स्थापित किए हैं। शासन व्यवस्था से भ्रष्टाचार का पूर्णतः उन्मूलन राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है।

    भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन नंबर 9501 200 200 की शुरुआत 23 मार्च 2022 को की गई थी। यह पहल नागरिकों को आगे आकर पंजाब भर के सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध निडर होकर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करती है।

    इस संबंध में आज यहां जानकारी देते हुए पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि 23-03-2022 से 31-05-2026 तक मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पर ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सहित कुल 16,950 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 10,951 शिकायतें अन्य विभागों से संबंधित होने के कारण आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेज दी गई।

    इसके अतिरिक्त 1,445 शिकायतें विजिलेंस ब्यूरो से संबंधित थी, जिन्हें आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित जिला विजिलेंस ब्यूरो के एसएसपी को भेज दिया गया। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा इन शिकायतों की जांच के बाद अब तक दर्ज की गई 284 एफआईआर में 368 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

    विजिलेंस ब्यूरो ने जनता से अपील की है कि वे राज्य को पूरी तरह पारदर्शी और रिश्वतखोरी मुक्त बनाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करना जारी रखें। यह पहल जनता के लिए रिश्वतखोरी की शिकायतें दर्ज कराने हेतु एक उपयोगकर्ता-अनुकूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म है। नागरिक इस प्लेटफॉर्म पर रिश्वत से संबंधित उपयुक्त ऑडियो एवं वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ 24 घंटे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित एवं समयबद्ध निपटारा किया जाता है, जिससे आम जनता को अनावश्यक परेशानियों से बड़ी राहत मिली है।

     

  • CM Bhagwant Singh Mann ने पवित्र नगरी Amritsar को दिया बड़ा तोहफा, नवां सुल्तानविंड फ्लाईओवर जनता को समर्पित

    CM Bhagwant Singh Mann ने पवित्र नगरी Amritsar को दिया बड़ा तोहफा, नवां सुल्तानविंड फ्लाईओवर जनता को समर्पित

    अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पवित्र नगरी अमृतसर के निवासियों को सुल्तानविंड बाईपास और सुल्तानविंड लिंक रोड के जंक्शन पर निर्मित नए फ्लाईओवर को जनता को समर्पित कर बड़ी सौगात दी। लंबे समय से चली आ रही यातायात समस्या के समाधान तथा प्रतिदिन श्री अमृतसर साहिब में दर्शन के लिए आने वाले दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए इस परियोजना को पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से पूरा किया गया, जिससे जनता के 11.52 करोड़ रुपये की बचत हुई।

    अपनी सरकार के विकासोन्मुखी शासन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 15 जुलाई तक जनता के लिए 3,100 नए स्टेडियम, 3,000 जिम और 400 नए आम आदमी क्लीनिक तैयार हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत से अधिक नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा है तथा 43,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण के बाद उनके पांच वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदारों की होगी। उन्होंने कहा कि जहां उनकी सरकार विकास और ईमानदार शासन पर केंद्रित है, वहीं विपक्षी दल सरकार के कार्यों को चुनौती देने में असफल रहने के कारण फर्जी वीडियो वायरल करने जैसे ओछे हथकंडे अपना रहे हैं।

    अपने एक्स हैंडल पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “पवित्र नगरी अमृतसर में सुल्तानविंड लिंक रोड पर नया ओवरब्रिज जनता को समर्पित किया गया है। सरकार ने अपनी पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से इस परियोजना में जनता के 11.5 करोड़ रुपये बचाए हैं। 15 जुलाई तक 3,100 नए खेल मैदान और 3,000 जिम तैयार हो जाएंगे, जबकि 400 नए आम आदमी क्लीनिक भी जनता की सुविधा के लिए लगभग पूरी तरह तैयार हैं।”

    मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, “खेती के लिए रिकॉर्ड 80 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा है और अब ठेकेदारों के लिए उनके द्वारा बनाई जाने वाली सड़कों की पांच वर्ष की गारंटी देना अनिवार्य कर दिया गया है। आपकी सरकार ईमानदार नीयत से काम कर रही है। आइए, हम सब मिलकर पंजाब को और अधिक समृद्ध बनाएं तथा नई बुलंदियों तक पहुंचाएं।”

    फ्लाईओवर को जनता को समर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र नगरी में श्री दरबार साहिब तथा अन्य ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनाने के लिए हमारी सरकार शहर के बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है। आज हमने सुल्तानविंड बाईपास और सुल्तानविंड लिंक रोड के जंक्शन पर निर्मित नए फ्लाईओवर को जनता को समर्पित किया है।”

    परमात्मा का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं अकाल पुरख का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मुझे इस महत्वपूर्ण परियोजना को जनता को समर्पित कर इस पवित्र नगरी की सेवा करने का अवसर प्रदान किया। यह फ्लाईओवर यातायात की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “तारा वाला पुल के निकट तरनतारन रोड पर स्थित सुल्तानविंड लिंक रोड के जंक्शन पर भारी यातायात के कारण प्रतिदिन आने-जाने वाले लोगों, स्थानीय निवासियों तथा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को लंबे समय से जाम की समस्या का सामना करना पड़ता था। यह फ्लाईओवर शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार लाने के साथ-साथ प्रतिदिन हजारों लोगों के बहुमूल्य समय की भी बचत करेगा।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुझे खुशी है की यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि पवित्र नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इस परियोजना को युद्ध स्तर पर पूरा किया गया और निर्धारित समय से पहले ही जनता को समर्पित कर दिया गया।”

    परियोजना के पारदर्शी निर्माण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यद्यपि पंजाब सरकार ने इस परियोजना के लिए 34.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी, लेकिन इसे मात्र 22.68 करोड़ रुपये की लागत से सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे जनता के 11.52 करोड़ रुपये की बचत हुई। उन्होंने बताया कि पहुंच मार्गों सहित इस परियोजना की कुल लंबाई 985 मीटर है।”मुख्यमंत्री ने बताया, “फ्लाईओवर की लंबाई 725 मीटर और चौड़ाई 14 मीटर है। स्थानीय यातायात की सुगम आवाजाही के लिए फ्लाईओवर के दोनों ओर 5.50 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी बनाई गई हैं।”

    परियोजना की पर्यावरण अनुकूल विशेषताओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “यह एक पर्यावरण-अनुकूल परियोजना है। वर्षा जल निकासी के लिए आर.सी.सी. नालियों के अलावा, इसके डिजाइन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग वेल्स को भी शामिल किया गया है। यह पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार करदाताओं का पैसा बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) का उपयोग कर रही है। हम 43,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कर रहे हैं और ठेकेदारों को उनके रखरखाव के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। राज्य के खजाने का एक-एक पैसा लोगों की भलाई के लिए सही ढंग से उपयोग किया जा रहा है।”

    उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। यहां तक कि किसानों को अब दिन के समय बिजली मिल रही है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों के टैक्स का पैसा राज्य का है, और हम इसे उनकी भलाई पर समझदारी से खर्च कर रहे हैं। लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों के पास वापस जा रहा है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार केवल लोगों के लिए काम कर रही है। हमने लोगों को मुफ्त बिजली दी है, 68,000 से अधिक युवाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार और सिफारिश के सरकारी नौकरियां दी हैं, सड़कों में सुधार किया गया है, अवधि समाप्त हो चुके टोल प्लाजा बंद किए गए हैं, जिससे रोजाना लोगों के 70 लाख रुपये बच रहे हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को मजबूत किया गया है, मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है और कई अन्य प्रमुख पहल की गई हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा, “जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी, उस समय पंजाब में सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग होता था। आज यह बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जिससे सिंचाई का दायरा बढ़ा है और भूजल पर निर्भरता कम हुई है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार गांवों के विकास के लिए अथक प्रयास कर रही है और गांवों को बड़ी अनुदान राशि दी जा रही है।” उन्होंने कहा, “हमारे युवाओं को नशे की बीमारी से दूर रखने के लिए राज्य सरकार 15 जुलाई तक पंजाब भर में 3,100 नवनिर्मित स्टेडियमों का लोकार्पण करेगी। खेल संस्कृति को बढ़ावा देना नशे के खिलाफ हमारे अभियान में सबसे प्रभावी हथियारों में से एक है। खेलों के माध्यम से हमारे युवाओं की असीम ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जा रहा है।”

    विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने धार्मिक मुद्दों पर मुझे बदनाम करने के लिए एक-दूसरे के साथ हाथ मिलाकर बहुत ही निम्न स्तर की राजनीति कर रहे हैं। एक बेहद घटिया राजनीतिक साजिश के तहत मेरी फर्जी वीडियो वायरल की गई हैं।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “जब मेरे विरोधी किसी अन्य मोर्चे पर मुझे चुनौती देने में सक्षम नहीं रहे, तो वे अब मुझे धार्मिक मुद्दों के माध्यम से बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल की गई है जिसमें न तो उस व्यक्ति की शारीरिक बनावट, कद, चलने का तरीका और न ही शारीरिक भाव-भंगिमा मुझसे मेल खाते हैं।” इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ. और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

     

  • स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने संत कबीर दास जी के प्रकाश पर्व पर श्रद्धासुमन अर्पित किए

    स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने संत कबीर दास जी के प्रकाश पर्व पर श्रद्धासुमन अर्पित किए

    चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवां ने आज महान संत, कवि एवं दार्शनिक संत कबीर दास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संदेश में स्पीकर ने कहा कि संत कबीर दास जी की शिक्षाएं आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके जीवनकाल में थीं। संत कबीर जी ने अपने पूरे जीवन में सामाजिक कुरीतियों, जाति-पाति के भेदभाव तथा धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध संघर्ष किया। मानवता को प्रेम, शांति, समानता और भाईचारे का संदेश दिया तथा समाज को ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होकर रहने की प्रेरणा दी।

    श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में भगत कबीर जी की पावन वाणी का शामिल होना उनके गहन आध्यात्मिक दर्शन और समतामूलक समाज की स्थापना के प्रति उनकी दूरदृष्टि का प्रमाण है। पंजाबवासियों से आह्वान किया कि वे संत कबीर जी द्वारा दिखाए गए सत्य, मानवता, सामाजिक सद्भाव और समानता के मार्ग पर चलकर एक बेहतर, न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

  • मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस आपातकालीन हृदय उपचार से पंजाब में बच रही हैं अनगिनत जानें

    मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस आपातकालीन हृदय उपचार से पंजाब में बच रही हैं अनगिनत जानें

    चंडीगढ़: जब मालेरकोटला निवासी शेख ज़ीशान कुरैशी को गंभीर हृदय संबंधी समस्या हुई, तब उन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता पड़ी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए), जिसे सामान्यतः एंजियोप्लास्टी कहा जाता है, के साथ डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम किया।

    पीटीसीए एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हृदय की धमनियों में आई रुकावट को दूर कर रक्त प्रवाह को पुनः सामान्य किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक के दौरान हर मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उपचार में देरी से हृदय को स्थायी क्षति पहुंच सकती है और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन अनेक परिवारों के लिए आपातकालीन उपचार हेतु तत्काल धन की व्यवस्था करना कठिन होता है, जिसके कारण इलाज में देरी हो जाती है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना इस आर्थिक बाधा को समाप्त करते हुए पात्र परिवारों को कैशलेस उपचार उपलब्ध करा रही है। शेख ज़ीशान कुरैशी के मामले में 80,320 रुपये के उपचार का पूरा खर्च मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत वहन किया गया।

    शेख ज़ीशान कुरैशी ने कहा, “मेरे और मेरे परिवार के लिए यह बहुत बड़ी राहत थी कि मेरा इलाज समय पर और बिना किसी आर्थिक बोझ के हो गया। मुख्यमंत्री सेहत योजना ने पूरे पंजाब में लोगों के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को और आसान बना दिया है।”

    राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के अनुसार, पिछले पांच महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 6,000 से अधिक कार्डियक प्रक्रियाएं की गई हैं। इनमें अधिकांश पीटीसीए प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिससे मरीजों को अस्पताल के खर्च की चिंता किए बिना तुरंत उपचार मिल सका।

    डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम सहित पीटीसीए मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत 64.82 करोड़ रुपये के व्यय के साथ दूसरी सबसे अधिक खर्च वाली उपचार श्रेणी है, जो केवल घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) के बाद आती है। अब तक पंजाब के 6,138 मरीज इस उपचार का लाभ उठा चुके हैं और मरीजों की संख्या के आधार पर यह योजना में छठे स्थान पर है। प्रति मामले औसत उपचार लागत 1,05,611 रुपये (लगभग 1.06 लाख रुपये) रही है, हालांकि प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की लागत अलग-अलग हो सकती है।

    हार्ट अटैक के दौरान पीटीसीए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं जीवनरक्षक उपचार है, जिसे समय पर किया जाना मरीज की जान बचाने के लिए अनिवार्य होता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उपलब्ध कैशलेस सुविधा के कारण अस्पताल आर्थिक औपचारिकताओं की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत उपचार शुरू कर सकते हैं।

    इसी प्रकार गुरदासपुर जिले की 60 वर्षीय हरजिंदर कौर ने भी मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ लिया। अमृतसर के महाजन अस्पताल में उनकी पीटीसीए, डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम तथा अस्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण किया गया। उनके पुत्र गुरमीत सिंह, जो एक किसान हैं, ने बताया कि वे अपने स्तर पर इस उपचार का खर्च वहन नहीं कर सकते थे।

    उन्होंने कहा, “यदि मेरे पास स्वास्थ्य कार्ड नहीं होता तो मैं अपनी मां का इलाज नहीं करा पाता। उपचार का खर्च हमारी सामर्थ्य से बाहर था। आज मेरी मां मुख्यमंत्री सेहत योजना की बदौलत स्वस्थ हो रही हैं।”

    सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंदरा अस्पताल, पटियाला के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा कि पीटीसीए हार्ट अटैक के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण आपातकालीन उपचारों में से एक है।

    उन्होंने कहा, “इलाज में हर मिनट की देरी से हृदय को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस उपचार उपलब्ध होने से डॉक्टर परिवार द्वारा पैसों की व्यवस्था किए जाने की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं।”

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पूरे पंजाब में आपातकालीन हृदय उपचार तक लोगों की पहुंच को बेहतर बना रही है।

    उन्होंने कहा, “कैशलेस उपचार की सुविधा से मेडिकल आपातकाल के दौरान मरीजों और उनके परिवारों की हिचकिचाहट कम हुई है। अब अधिक से अधिक लोग समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं और डॉक्टर बिना किसी आर्थिक देरी के तत्काल उपचार शुरू कर पा रहे हैं। इससे अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा रही है।”

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत बढ़ रही कार्डियक प्रक्रियाओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि लोगों में योजना के प्रति जागरूकता बढ़ी है और सरकार समर्थित स्वास्थ्य सेवाओं पर उनका विश्वास मजबूत हुआ है।

    मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत पंजाब के परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है, जिसमें अत्याधुनिक हृदय उपचार सहित अनेक प्रकार की चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं।

  • पंजाब स्टेट फूड कमीशन ने 3 महीने के राशन के लिए एक ही पर्ची और बहुभाषी लेन-देन रसीदें जारी करने की सिफारिश की

    पंजाब स्टेट फूड कमीशन ने 3 महीने के राशन के लिए एक ही पर्ची और बहुभाषी लेन-देन रसीदें जारी करने की सिफारिश की

    चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने डिपो होल्डरों की समस्याओं पर की बैठक

    चंडीगढ़ : पंजाब स्टेट फूड कमीशन ने आज यहां आयोजित एक बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को अधिक सरल, प्रभावी और जनहितैषी बनाने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया। कमीशन के सदस्यों विजय दत्त और चेतन प्रकाश धालीवाल ने चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा को अवगत कराया कि विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान डिपो होल्डरों ने बताया कि राज्य सरकार लाभार्थियों को एक बार में तीन माह के गेहूं का आवंटन करती है, लेकिन ई-पीओएस मशीनों के माध्यम से प्रत्येक महीने के लिए अलग-अलग लेन-देन की रसीद (स्लिप) जारी करनी पड़ती है।

    इसके अतिरिक्त, ‘मेरी रसोई’ योजना के तहत वितरित किए जाने वाले फूड किट के लिए भी अलग से एक स्लिप जारी की जाती है। इस प्रकार प्रत्येक लाभार्थी के लिए कुल चार स्लिपें तैयार करनी पड़ती हैं—तीन माह के गेहूं के लिए तीन अलग-अलग स्लिपें तथा ‘मेरी रसोई’ योजना के लिए एक अतिरिक्त स्लिप। इस पूरी प्रक्रिया में प्रति लाभार्थी लगभग 20 से 25 मिनट का समय लग जाता है, जिससे उचित मूल्य की राशन दुकानों (फेयर प्राइस शॉप्स) के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं और डिपो संचालकों व उनके कर्मचारियों पर कार्यभार भी बढ़ जाता है।

    डिपो होल्डरों ने सुझाव दिया कि कार्यकुशलता बढ़ाने और समय की बचत के लिए तीन माह के राशन की पात्रता को एक ही लेन-देन (सिंगल ट्रांजैक्शन) के माध्यम से कवर करते हुए केवल एक संयुक्त स्लिप जारी की जाए। साथ ही, ‘मेरी रसोई’ योजना के अंतर्गत होने वाले वितरण को भी इसी प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
    बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान में जारी होने वाली स्लिपें केवल अंग्रेजी भाषा में होती हैं, जिन्हें अधिकांश लाभार्थी समझ नहीं पाते। इसलिए सुझाव दिया गया कि लेन-देन की रसीदें पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी—तीनों भाषाओं में जारी की जाएं, ताकि सभी लाभार्थियों को जानकारी आसानी से समझ आ सके।

    इस विषय पर विस्तृत चर्चा के बाद पंजाब स्टेट फूड कमीशन ने निर्णय लिया कि इस संबंध में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव को एक सलाह (एडवाइजरी) जारी की जाएगी, ताकि आवश्यक सुधारों पर विचार किया जा सके। इसी प्रकार, कमीशन ने सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग को भी सलाह देने का निर्णय लिया कि फाजिल्का, फिरोजपुर और होशियारपुर जिलों में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों को सूखा राशन समय पर और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।