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पंजाब सरकार द्वारा प्रमुख मांग स्वीकार किए जाने के बाद आम आदमी क्लीनिक पूरी तरह से हुए कार्यशील: Harpal Singh Cheema
चंडीगढ़: पंजाब में जनसेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए राज्य के वित्त मंत्री तथा कर्मचारियों के मुद्दों एवं मांगों के समाधान के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज घोषणा की कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की 16 यूनियनों तथा आम आदमी क्लीनिक (एएसी) स्टाफ यूनियन ने आधिकारिक रूप से अपनी हड़ताल वापस ले ली है और कर्मचारी पुनः कार्य पर लौट आए हैं।
यह निर्णय पिछले दो दिनों के दौरान राज्य सरकार के नेतृत्व में हुई विस्तृत वार्ताओं के बाद लिया गया, जिनमें स्वास्थ्य कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करने तथा बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों की वित्तीय मांगों पर विचार के लिए एक विशेष वित्तीय समिति गठित करने सहित महत्वपूर्ण मुद्दों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया। पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पटियाला मुख्यालय में मेरी अध्यक्षता में लगभग पांच घंटे चली बैठक तथा बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद और पीएसपीसीएल के सीएमडी के साथ देर रात तक यूनियनों की हुई चर्चा के बाद बिजली क्षेत्र की सभी 16 यूनियनों के साथ सहमति बन गई है।”

जिन प्रमुख यूनियनों ने समझौते पर सहमति जताई है, उनमें टेक्निकल सर्विसेज यूनियन पीएसईबी, पीएसईबी इम्प्लाइज फेडरेशन (एआईटीयूसी), मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन पीएसईबी (एमएसयू), एसोसिएशन ऑफ जूनियर इंजीनियर्स, पीएसईबी इम्प्लाइज फेडरेशन (भारद्वाज), पीएसईबी थर्मल इम्प्लाइज कोऑर्डिनेशन कमेटी, पीएसईबी कर्मचारी दल पंजाब, इम्प्लाइज फेडरेशन पीएसईबी, पंजाब राज्य बिजली मजदूर संघ (बीएमएस), वर्कर फेडरेशन इंटक पीएसपीसीएल/पीएसटीसीएल, इम्प्लाइज फेडरेशन पीएसपीसीएल/पीएसटीसीएल (पहलवान समूह), इम्प्लाइज फेडरेशन पीएसपीसीएल/पीएसटीसीएल (चाहल समूह), आईटीआई एसोसिएशन, ग्रिड सब-स्टेशन इम्प्लाइज यूनियन पंजाब (पंजीकृत), पावरकॉम एवं ट्रांसको पेंशनर्स यूनियन (एआईटीयूसी), पेंशनर्स वेलफेयर फेडरेशन पंजाब (पहलवान) तथा मुलाजिम यूनाइटेड ऑर्गेनाइजेशन आदि शामिल हैं। इन सभी संगठनों ने सामान्य कार्य बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है।
“यूनियनों की वित्तीय मांगों के समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष वित्तीय समिति का गठन किया है, जो 15 अगस्त तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।” वित्त मंत्री ने आगे बताया कि आम आदमी क्लीनिक (एएसी) यूनियन के प्रतिनिधियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक के बीच हुई बैठक के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित विवाद का भी समाधान हो गया है। “राज्य सरकार ने नियमित पदों पर भर्ती के दौरान यूनियन के कर्मचारियों के सेवा अनुभव को मान्यता देने की प्रमुख मांग स्वीकार कर ली है, जबकि अन्य प्रशासनिक मांगों पर भी सक्रियता से विचार किया जा रहा है।”

वित्त मंत्री ने सफाई एवं सीवरेज बोर्ड के कर्मचारियों से जुड़े मामले का भी उल्लेख करते हुए बताया कि उनके तथा स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ हुई चर्चा के बाद संबंधित प्रमुख यूनियनों ने भी अपनी हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के सकारात्मक और कर्मचारी हितैषी दृष्टिकोण को दोहराते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध के दायरे में लाने के लिए एक अध्यादेश राज्यपाल को भेज दिया गया है। इससे राज्यभर के हजारों कर्मचारियों को बेहतर सेवा सुरक्षा तथा अधिक सुदृढ़ सेवा शर्तों का लाभ मिलेगा।”
बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं का सामान्य संचालन पूरी तरह बहाल होने पर वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार कर्मचारियों के कल्याण और राज्य के लोगों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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पंजाब की महिलाओं ने ‘मुख्यमंत्री मांवां धीयां सत्कार योजना’ के तहत डीबीटी की सराहना की
चंडीगढ़: भगवंत मान सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री माँवां धीयां सत्कार योजना’ के तहत महिलाओं के बैंक ख़ातों में वित्तीय सहायता सीधे भेजने के निर्णय को राज्यभर की लाभार्थियों से भरपूर सराहना मिली है। महिलाओं का कहना है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली ने पारदर्शिता, सुविधा और आर्थिक सशक्तीकरण को सुनिश्चित किया है, क्योंकि सहायता राशि सीधे उनके ख़ातों में पहुँच रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार अब तक इस योजना के तहत डीबीटी प्रणाली के माध्यम से लगभग 33 लाख महिलाओं के बैंक ख़ातों में ₹1,149 करोड़ सीधे भेज चुकी है। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की पात्र लाभार्थियों को ₹1,500 की तीन मासिक किस्तों के रूप में कुल ₹4,500 दिए गए हैं, जबकि अन्य वर्गों की लाभार्थियों को ₹1,000 की तीन मासिक किस्तों के रूप में कुल ₹3,000 प्रदान किए गए हैं। ‘मुख्यमंत्री माँवां धीयां सत्कार योजना’ के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं की रजिस्ट्रेशन के साथ यह योजना पंजाब की सबसे बड़ी महिला-केंद्रित सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक बन गई है।
राज्यभर की महिलाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह राशि बिना किसी बिचौलिये और बिना किसी देरी के सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँची है तथा वे आवश्यकता पड़ने पर यह राशि कभी भी निकाल सकती हैं। गुरदासपुर की 32 वर्षीय सरबजीत कौर ने कहा कि डीबीटी प्रणाली ने यह सुनिश्चित किया है कि वित्तीय सहायता अपने वास्तविक उद्देश्य के लिए ही उपयोग हो। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पैसा सीधे हमारे बैंक ख़ातों में भेजा है, जिससे मैं बहुत ख़ुश हूँ। अगर यह राशि नकद दी जाती तो शायद इसका सही उपयोग नहीं होता। कैश देंदे ता आदमी लोग पेग-शेग ते ख़र्च कर देंदे हैं, पर ख़ाते विच ता साडा पैसा सेफ़ है (अगर नकद देते तो आदमी लोग इसे दारू-वगैरह पर ख़र्च कर देते, लेकिन ख़ाते में हमारा पैसा सुरक्षित है।) अब पैसा हमारे अपने ख़ाते में है और जब भी ज़रूरत होगी, हम उसे निकाल सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि यह राशि केवल घर की ज़रूरतों और अन्य आवश्यक ख़र्चों पर ही ख़र्च हो।”
हरचोवाल गाँव की 35 वर्षीय गगनदीप कौर ने इस योजना को अपने अनुभव की सबसे पारदर्शी जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा, “मैंने अभी तक यह राशि नहीं निकाली है क्योंकि जब ज़रूरत होगी तभी इसका उपयोग करूँगी। आर्थिक सहायता देने का यह सबसे अच्छा तरीका है। अगर सरकार नकद राशि बाँटती तो लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता। आवेदन करने के पाँच से छह दिनों के भीतर ही पैसा मेरे ख़ाते में आ गया। पूरी प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और बिना किसी परेशानी के है।”
हरगोबिंदपुर की 49 वर्षीय सुमन कुमारी ने कहा कि इस आर्थिक सहायता से उनके परिवार को घरेलू तथा शिक्षा संबंधी महत्त्वपूर्ण ख़र्च पूरे करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, “इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि पैसा सीधे महिलाओं के ख़ातों में आता है। मैंने इस राशि का उपयोग सार्थक कार्यों में किया है। मेरी दोनों बेटियाँ, जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिला है। इसके साथ-साथ हमारे परिवार को मुफ़्त राशन, मुफ़्त बिजली और मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा भी मिल रही है, जिससे काफ़ी राहत मिली है।”
मंडी अहमदगढ़ की हरपाल कौर ने कहा कि इस आर्थिक सहायता ने महिलाओं को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार ख़र्च करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा, “मैंने यह राशि घर की ज़रूरतों पर ख़र्च की है। मेरी दोनों बेटियों को भी यह राशि मिली है और वे इसका उपयोग अपनी ज़रूरतों के अनुसार कर रही हैं। बेटियों की अपनी आवश्यकताएँ होती हैं और यह अच्छी बात है कि सरकार इस समय उनका सहयोग कर रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे हमारे बैंक ख़ातों में आया है, जिसे हम ज़रूरत पड़ने पर कभी भी निकाल सकते हैं। सरकार ने एह पैसा चंगी नीयत नाल दित्ता है, एह चंगी जगह ही ख़र्च करना चाहीदा है (सरकार ने यह पैसा अच्छे इरादे से दिया है, इसलिए इसे अच्छे कामों पर ही ख़र्च करना चाहिए।)”
लाभार्थियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि डीबीटी मॉडल ने न केवल कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी ढंग से पहुँचाना सुनिश्चित किया है, बल्कि महिलाओं को सरकारी वित्तीय सहायता पर सीधा अधिकार देकर उनकी आर्थिक स्वतंत्रता भी मज़बूत की है। इस बीच, पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा, “मुख्यमंत्री मांवां धीयां सत्कार योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सहायता मिले। कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित नहीं रहेगी।”
डीबीटी प्रणाली का सफल क्रियान्वयन योजना के नोडल बैंकिंग साझेदार एक्सिस बैंक के सहयोग से भी संभव हुआ है, जिसने पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर लाभ राशि के हस्तांतरण को सुगम बनाया है। एक्सिस बैंक के ग्रुप हेड (ब्रांच बैंकिंग, नॉर्थ एवं टैस्क बिज़नेस) रेनॉल्ड डी’सूज़ा ने कहा, “पंजाब सरकार के साथ मिलकर मुख्यमंत्री माँवां धीयां सत्कार योजना के क्रियान्वयन में भागीदार बनना एक्सिस बैंक के लिए गर्व की बात है। यह पहल राज्य की लाखों महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। हम लाभार्थियों तक सहायता राशि का समय पर, पारदर्शी और प्रभावी वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम जब प्रभावी ढंग से और बड़े स्तर पर लागू किए जाते हैं, तो वे आर्थिक सुरक्षा को मज़बूत करने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं।”
लाभार्थियों के बैंक ख़ातों में सीधे राशि भेज कर डीबीटी प्रणाली न केवल समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित कर रही है, बल्कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता तथा परिवार में निर्णय लेने की उनकी क्षमता को भी सशक्त बना रही है।
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World Hepatitis Day: P.I.L.B.S. मोहाली द्वारा कल विशेष Liver Health Camp किया जाएगा आयोजित
प्रमुख जांचें मात्र 1000 रूपये में उपलब्ध
चंडीगढ़/मोहाली: विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर लिवर की देखभाल के लिए राज्य की प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी संस्था पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरी साइंसेज़ (पी.आई.एल.बी.एस.), मोहाली द्वारा 28 जुलाई, 2026 (मंगलवार) को प्रातः 9 बजे से संस्थान के ओपीडी परिसर में एक व्यापक लिवर हेल्थ कैंप आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष की वैश्विक थीम “लेट्स ब्रेक इट डाउन” को ध्यान में रखते हुए इस कैंप का उद्देश्य आम जनता के लिए लिवर संबंधी आधुनिक जांच सुविधाओं को सुलभ और किफायती बनाना है। पी.आई.एल.बी.एस. के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस विशेष पहल के तहत विशेषज्ञ हेपेटोलॉजिस्ट के परामर्श सहित प्रमुख लिवर जांचें—जिनमें फाइब्रोस्कैन, अल्ट्रासाउंड, लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), रीनल फंक्शन टेस्ट (आरएफटी), यूरिन रूटीन माइक्रोस्कोपी तथा हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की स्क्रीनिंग शामिल हैं—मात्र ₹1000 में उपलब्ध कराई जाएंगी। डॉ. वीरेंद्र सिंह ने आम लोगों से इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने की अपील करते हुए प्रदेशभर के नागरिकों से कैंप में पहुंचकर अपनी सेहत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “यह कैंप केवल लिवर रोग से पीड़ित मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका लिवर पूरी तरह स्वस्थ है।” उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि रोग की समय रहते पहचान और नियमित जांच लिवर की गंभीर बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में किसी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते, उनके लिए भी समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है। -

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की NEET, J.E.E और Talent सर्च परीक्षा में सफलता शिक्षा सुधारों की खास झलक
गरीबी खत्म करने और समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
लुधियाना: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि उनकी सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को मजबूत करने, शिक्षा के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और शिक्षकों के प्रशिक्षण में लगातार किए जा रहे निवेश ने राज्य को स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में देश का सबसे अग्रणी राज्य बना दिया है।
यहां सरकारी प्राथमिक स्कूल, लोहारा में पाँच करोड़ रुपये की लागत से बने ‘वर्धमान ब्लॉक’ का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीट, जे.ई.ई. और पंजाब राज्य टैलेंट सर्च परीक्षा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की शानदार सफलता सरकार के शिक्षा सुधारों के दूरगामी प्रभाव को दर्शाती है। उन्होंने दोहराया कि गरीबी समाप्त करने और आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली साधन है।
सरकारी प्राथमिक स्कूल में नए ब्लॉक का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह नया ब्लॉक पाँच करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसका पूरा खर्च वर्धमान टेक्सटाइल समूह ने वहन किया है, जिसके लिए मैं समूह के नेतृत्व का तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ। इस नए ब्लॉक में विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर सहित 18 कक्षाएँ तथा शिक्षकों के लिए तीन कमरे बनाए गए हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “वर्धमान टेक्सटाइल समूह विशेष रूप से सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इस समूह ने लोहारा, ग्यासपुरा, कासाबाद, लाडोवाल, सेखेवाल और अन्य सरकारी स्कूलों में भी भवनों का निर्माण कराया है। कोई भी मुफ्त सुविधा या रियायत राज्य से गरीबी अथवा अन्य सामाजिक बुराइयों को समाप्त नहीं कर सकती, बल्कि शिक्षा ही वह कुंजी है, जो लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाकर उन्हें गरीबी के दलदल से बाहर निकाल सकती है।”
उन्होंने कहा, “सरकार के अथक प्रयासों के कारण पंजाब प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुँच गया है। राज्य सरकार ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाया है, व्यवस्था को मजबूत किया है, स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए हैं और शिक्षकों को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर रहा है और भारत सरकार की प्रमुख संस्था नीति आयोग द्वारा जारी नवीनतम आँकड़े दर्शाते हैं कि पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले चार वर्षों से राज्य सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और स्मार्ट क्लासरूम पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है और आज पंजाब शीर्ष पर खड़ा है। पहले केरल पहले स्थान पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से नंबर एक का दर्जा हासिल किया है। आने वाले समय में भी ऐसे और प्रयास किए जाएंगे। शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधकार को दूर कर दुनिया को रोशन करता है, इसलिए राज्य सरकार इस पर विशेष जोर दे रही है।”
मुख्यमंत्री ने बताया, “लुधियाना जिले के सरकारी स्कूलों में लगभग तीन लाख विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जहां 16 स्कूल ऑफ एमिनेंस, 11 स्कूल ऑफ ब्रिलियंस और 35 स्कूल ऑफ हैप्पीनेस हैं। मिलरगंज और डिवीजन नंबर-3, लुधियाना में दो अन्य स्कूल ऑफ एमिनेंस बनकर तैयार हो चुके हैं और शीघ्र ही जनता को समर्पित किए जाएंगे। 146 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा, 33 विद्यार्थियों ने जे.ई.ई. मेन परीक्षा, 9 विद्यार्थियों ने जे.ई.ई. एडवांस्ड परीक्षा तथा 47 विद्यार्थियों ने पी.एस.टी.एस.ई. परीक्षा उत्तीर्ण की है।
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कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने करवाई केंद्रीय जेल में आम आदमी क्लीनिक की शुरुआत
जेल में बंदियों को 45 तरह के मेडिकल टेस्टों के अलावा 100 से अधिक तरह की दवाओं की मिलेगी मुफ्त सुविधा
चंडीगढ़/होशियारपुर: पंजाब के जेल और प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने यहां केंद्रीय जेल में नए बने आम आदमी क्लीनिक की शुरुआत एक बंदी से करवाते हुए कहा कि पंजाब सरकार राज्य के हर क्षेत्र में बहुत ही सुगम तरीके से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करवाने में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, जिससे आम लोगों को घरों के नजदीक ही प्राथमिक टेस्ट और दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा राज्य में 1090 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए जा चुके हैं, जहां कुशल स्टाफ द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल ढांचे को और मजबूत करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, टेस्ट और दवाओं की मुफ्त सुविधा सुनिश्चित की जा रही है।
होशियारपुर की केंद्रीय जेल में आम आदमी क्लीनिक की शुरुआत होने से जिले में चल रहे इन क्लीनिकों की संख्या 77 हो गई है और अब जेल में बंदियों के 45 तरह के टेस्ट की सुविधा अंदर ही उपलब्ध रहेगी, जहां उन्हें 100 से अधिक तरह की दवाइयां भी मुफ्त मिलेंगी। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य की 8 जेलों में आम आदमी क्लीनिक खोले जा चुके हैं, ताकि जेलों में बंद कैदियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंध सुचारू तरीके से अमल में लाया जा सके।
जेलों में इन क्लीनिकों के अंदर मेडिकल ऑफिसर, फार्मासिस्ट, क्लीनिक असिस्टेंट, हेल्पर आदि को तैनात किया गया है, ताकि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें। होशियारपुर की जेल में 1400 से अधिक बंदियों के प्राथमिक टेस्ट अब जेल के अंदर के आम आदमी क्लीनिक में ही हो जाएंगे और जरूरी दवाइयां भी अंदर से ही दी जाएंगी।
आम आदमी क्लीनिकों में लोगों द्वारा ली जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि इन क्लीनिकों में दी जा रही सुविधाओं का लोगों को बहुत लाभ मिल रहा है और अब तक 5.90 करोड़ मरीजों द्वारा अपना चेकअप करवाया जा चुका है। राज्य में पहले चल रहे 990 क्लीनिकों में से रोजाना अनुमानित 83 हजार लोगों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं ली जा रही थीं।
अब इन क्लीनिकों की संख्या 1090 हो जाने से और भी लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इन क्लीनिकों में अब तक साढ़े 3 करोड़ के करीब टेस्ट किए जा चुके हैं। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि आम आदमी क्लीनिकों में अब गर्भवती महिलाओं की देखभाल, स्क्रीनिंग और पोषण प्रबंधन की सेवाएं भी उपलब्ध हैं। पंजाब सरकार द्वारा आने वाले समय में 300 और आम आदमी क्लीनिक खोलने की योजना है, ताकि राज्य के हर क्षेत्र में लोगों को अपने घरों के नजदीक ही प्राथमिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
जेल सुपरिटेंडेंट हरचरन सिंह गिल, सिविल सर्जन डॉ. मनदीप कमल ने जेल में आम आदमी क्लीनिक की स्थापना, स्टाफ और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर अतिरिक्त सुपरिटेंडेंट हरबंस सिंह, डिप्टी सुपरिटेंडेंट आशा रानी, आम आदमी क्लीनिकों के शहरी नोडल अधिकारी डॉ. रोहित बबूटा, जिला प्रोग्राम मैनेजर एन.एच.एम. मोहम्मद आसिफ भी मौजूद थे।
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PFSC के चेयरमैन Bal Mukand Sharma ने न्यूट्रिशन गार्डनों की नियमित निगरानी और तकनीकी सुधार के दिए निर्देश
चंडीगढ़: पंजाब स्टेट फूड कमीशन (पीएसएफसी) ने आयोग की विभिन्न गतिविधियों की व्यापक समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। तेजी से बदल रहे तकनीकी परिवेश को ध्यान में रखते हुए आयोग के चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयोग की वेबसाइट का आधुनिकीकरण और नियमित अद्यतन (अपडेट) करने का निर्णय लिया गया, ताकि आयोग की गतिविधियों, योजनाओं और पहलों संबंधी नवीनतम जानकारी आम जनता तक समयबद्ध ढंग से पहुंचाई जा सके।

बैठक के दौरान आयोग द्वारा तैयार की गई जन-जागरूकता फिल्म की भी समीक्षा की गई। इस अवसर पर चेयरमैन ने निर्देश दिए कि वर्तमान फिल्म का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और उसमें खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग द्वारा हाल के समय में शुरू किए गए विभिन्न नए अभियानों, कार्यक्रमों और पहलों को भी शामिल किया जाए, जिससे लोगों को आयोग के कार्यों की व्यापक जानकारी मिल सके।

मानसून सीजन की शुरुआत के मद्देनज़र चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि आयोग द्वारा राज्यभर के गोद लिए गए विद्यालयों में विकसित किए गए न्यूट्रिशन गार्डनों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए तथा उनके उचित रखरखाव, देखभाल और तकनीकी सुधार सुनिश्चित किए जाएं।

उन्होंने कहा कि इन पोषण वाटिकाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में संतुलित आहार, पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, इसलिए इनकी गुणवत्ता और उपयोगिता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में सदस्य सचिव सोना थिंद तथा आयोग के सदस्य विजय दत्त और चेतन प्रकाश धालीवाल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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Punjab News: मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत 6 महीनों में 14.032 मरीजों की इस बीमारी का हुआ कैशलेस इलाज
सांस फूलने की समस्या को कभी भी नजरअंदाज न करें; समय पर उपचार से फेफड़े, जीवन और आजीविका तीनों को बचाया जा सकता है: डॉ. बलबीर सिंह
चंडीगढ़: सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खांसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और सीने में घरघराहट को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियां चढ़ना भी कठिन न हो जाए। तब तक अनेक मरीज फेफड़ों की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो चुके होते हैं, जिसके उपचार के लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के अंतर्गत पंजाब के ताजा उपचार संबंधी आंकड़े बताते हैं कि फेफड़ों की पुरानी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा राज्य के कामकाजी आयु वर्ग से संबंधित है, जो यह दर्शाता है कि श्वसन संबंधी बीमारियां स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ा रही हैं। अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और अपने आप ठीक नहीं होतीं। जितनी जल्दी इनकी पहचान हो जाए, फेफड़ों को होने वाले नुकसान को उतनी ही आसानी से रोका जा सकता है। दवाओं और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है, जबकि गंभीर मामलों में थोरेसिक सर्जरी जीवनरक्षक साबित हो सकती है। ऐसे मामलों में उपचार में देरी करना कभी भी उचित नहीं होता। दुर्भाग्यवश, उपचार का खर्च वहन न कर पाने के कारण अनेक मरीज इलाज टालते रहते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 के बीच 14,032 लोगों ने फेफड़ों की पुरानी बीमारियों तथा थोरेसिक सर्जरी/श्वसन संबंधी उपचार का लाभ प्राप्त किया। इन उपचारों पर 37.30 करोड़ रूपये की कैशलेस राशि का भुगतान किया गया। इन आंकड़ों के पीछे उन हजारों मरीजों की कहानी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने से पहले लाखों रुपये की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ी। यही इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है। आंकड़ों के अनुसार 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार के मामले दर्ज किए गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों ने भी अस्पताल में उपचार प्राप्त किया। ये दोनों आयु वर्ग मिलकर योजना के अंतर्गत हुए कुल श्वसन संबंधी उपचारों के 80 प्रतिशत से अधिक मामलों में शामिल रहे। इसके अतिरिक्त 2,522 युवा वयस्कों तथा 292 बच्चों ने भी श्वसन संबंधी उपचार प्राप्त किया। लिंग आधारित आंकड़ों के अनुसार 8,345 पुरुषों का 22.79 करोड़ रूपये की लागत से उपचार किया गया, जबकि 5,684 महिलाओं को 14.50 करोड़ रूपये के उपचार का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त ‘अन्य’ लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी योजना के अंतर्गत कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। मासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान विशेष श्वसन संबंधी सेवाओं की मांग लगातार बनी रही। उपचार के मामलों की संख्या जनवरी में 1,332 से बढ़कर अप्रैल में 2,509 हो गई, जो छह महीनों में सर्वाधिक रही। हालांकि जून में 2,004 मामले दर्ज किए गए, लेकिन उपचार पर कुल 6.73 करोड़ रूपये खर्च किए गए, जो सबसे अधिक था। इससे स्पष्ट होता है कि योजना के अंतर्गत अधिक जटिल और महंगे श्वसन संबंधी उपचार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ये आंकड़े श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। लोग लगातार रहने वाली खांसी या सांस फूलने को अक्सर अस्थायी समस्या अथवा बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दुर्भाग्यवश, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती हैं। जब तक अनेक मरीज चिकित्सकीय सहायता लेते हैं, तब तक फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंच चुकी होती है। सांस फूलने की समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार से फेफड़े, जीवन और आजीविका—तीनों को बचाया जा सकता है।” स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों, औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों तथा धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों से अपील की कि यदि लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने तंबाकू से दूर रहने, प्रदूषित वातावरण के संपर्क को कम करने तथा श्वसन संबंधी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर भी जोर दिया। समय पर बीमारी की पहचान, तंबाकू का सेवन छोड़ना, वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम और बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता से बचने के सबसे प्रभावी उपाय हैं। -

साढ़े चार साल में Punjab में एक भी पेपर लीक न होना गर्व की बातः सीएम मान, देखें वीडियो
मनीष सिसोदिया ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं जीकरपुर में आयोजित एक समारोह में नीट 2026 क्लीयर करने वाले 882 छात्रों को किया सम्मानित
चंडीगढ़ः मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य में ऐसी व्यवस्था स्थापित की है, जहां पैसे और सिफारिश के बजाय केवल योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जाती हैं। वर्ष 2026 की राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में पंजाब के सरकारी स्कूलों के रिकॉर्ड 882 विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की है। वहीं, राज्य सरकार ने पूरी तरह पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से अब तक 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां केवल योग्यता के आधार पर प्रदान की हैं, जो सरकार की ईमानदारी, पारदर्शिता और समान अवसर प्रदान करने की प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जीरकपुर में आयोजित समारोह के दौरान नीट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, निःशुल्क कोचिंग, मेंटोरशिप और करियर काउंसलिंग को दी गई प्राथमिकता का परिणाम है। इससे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को देश के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला है और रंगला पंजाब की मजबूत नींव रखी जा रही है। सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नीट-2026 उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और उनसे संवाद किया। इस यादगार अवसर पर कई विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से ऑटोग्राफ भी लिया। मुख्यमंत्री ने स्नेहपूर्वक विद्यार्थियों को अपने हस्ताक्षर दिए। विद्यार्थियों ने भी आभार व्यक्त करते हुए अपने हाथों से बनाए गए मुख्यमंत्री के चित्र उन्हें भेंट किए, जिससे यह अवसर और भी भावुक एवं विशेष बन गया।View this post on Instagram
इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने तथा ‘रंगला पंजाब’ की मजबूत नींव रखने के लिए मुख्यमंत्री के निरंतर प्रयासों की सराहना की।
सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने नीट में सफलता हासिल कर रचा नया इतिहास
पंजाब में शिक्षा सुधारों के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2026 की नीट परीक्षा में सरकारी विद्यालयों के 882 विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की है, जो वर्ष 2024 में सफल हुए 437 विद्यार्थियों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। पिछले तीन वर्षों में सरकारी विद्यालयों के 2,166 विद्यार्थियों ने नीट तथा 786 विद्यार्थियों ने जेईई परीक्षा उत्तीर्ण की है, जो सरकारी विद्यालयों में बढ़ती शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।
इस वर्ष नीट में सफल हुए 882 विद्यार्थियों में 686 छात्राएँ हैं, जबकि 340 विद्यार्थी अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित हैं। यह उपलब्धि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समावेशी एवं समान अवसर उपलब्ध कराने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस परिवर्तन में ‘पेस’ (पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस ) कार्यक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ‘अवंती’ तथा ‘मंत्रा फॉर चेंज’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के सहयोग से इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग, मेंटरशिप, मॉक टेस्ट तथा करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए अब तक 28,000 से अधिक नियमित शिक्षकों की भर्ती, 5,012 सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर लैब की स्थापना, 8,268 इंटरैक्टिव पैनलों की स्थापना, आधुनिक आधारभूत ढाँचे का विकास तथा शिक्षकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण सुनिश्चित कर शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं।
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तरलोचन सिंह को डॉ. रतन सिंह जग्गी स्मृति पुरस्कार से किया जाएगा सम्मानित
अल्पसंख्यकों, धर्म, समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं तरलोचन सिंह
चंडीगढ़: पंजाब कला परिषद, चंडीगढ़ द्वारा पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित समारोह में प्रथम डॉ. रतन सिंह जग्गी स्मृति सम्मान से पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सरदार तरलोचन सिंह को सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के अंतर्गत ₹51 हजार की नकद राशि, शॉल तथा स्मृति चिह्न भेंट किया जाएगा। सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में 27 जुलाई को सायं 5:30 बजे डॉ. रतन सिंह जग्गी स्मृति पुरस्कार एवं डॉ. रतन सिंह जग्गी ओपन एयर थिएटर के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया जाएगा। पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष स. कुलतार सिंह संधवां इस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। स. तरलोचन सिंह अल्पसंख्यकों, धर्म, समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता, निष्पक्ष प्रशासन और मानवता की सेवा के माध्यम से भारत के सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट स्थान बनाया है। देश के विभाजन की पीड़ा बचपन में झेलने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने शिक्षा, सेवा और सामाजिक समर्पण को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने लोक सेवा का मार्ग चुना और अपने लंबे प्रशासनिक तथा सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक जिम्मेदारी का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन किया। सरदार तरलोचन सिंह ने पंजाब सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग सहित अनेक महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर भारत के राष्ट्रपति सचिवालय तक विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं और उच्च सदन में जनहित से जुड़े अनेक मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाया। यद्यपि वे हरियाणा से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, फिर भी अपने छह वर्षीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वभर में बसे सिखों और पंजाबियों के हितों की बुलंद आवाज उठाई। अल्पसंख्यकों के अधिकारों, पंजाबी भाषा, सिख विरासत, राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर उन्होंने निरंतर सक्रिय भूमिका निभाई। स तरलोचन सिंह भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष भी रहे, जहां उन्होंने स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए खेलों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल के सदस्य के रूप में सेवाएं दीं तथा देश में आयोजित एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के सफल आयोजन में भी अहम भूमिका निभाई। उनकी विशिष्ट सार्वजनिक सेवाओं और योगदान को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2021 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
