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  • S.I. R 2026: सी.ई.ओ. पंजाब द्वारा घर-घर गणना चरण को समय से पहले पूरा करने के लिए ई.आर.ओज़. का सम्मान

    S.I. R 2026: सी.ई.ओ. पंजाब द्वारा घर-घर गणना चरण को समय से पहले पूरा करने के लिए ई.आर.ओज़. का सम्मान

    चंडीगढ़: निर्वाचन प्रबंधन में उत्कृष्टता को मान्यता देने और प्रोत्साहित करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब अनिंदिता मित्रा ने आज निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) 2026 के घर-घर गणना चरण को निर्धारित समय-सीमा से पहले पूरा करने में उनके असाधारण समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया।

    यह महत्वपूर्ण उपलब्धि, निर्वाचन प्रक्रिया में शुद्धता, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का स्पष्ट प्रमाण है। गुरविंदर सिंह जौहल के नेतृत्व में धरमकोट विधान सभा क्षेत्र (जिला मोगा), घर-घर गणना अभ्यास को पूरा करने वाला राज्य का पहला क्षेत्र बनकर उभरा। इसके बाद सुनील फोगाट, आई.ए.एस., बलाचौर (जिला एस.बी.एस. नगर); तरसेम चंद, पी.सी.एस., दिर्घबा (जिला संगरूर); गगनदीप, पी.सी.एस., निहाल सिंह वाला (जिला मोगा); अमरीक सिंह सिद्धू, पी.सी.एस., बाघा पुराना (जिला मोगा); सतविंदर पाल रणीके, पी.सी.एस., मोगा (जिला मोगा); इसमत विजय सिंह, पी.सी.एस., धूरी (जिला संगरूर) और विपन भंडारी, पी.सी.एस., बंगा (जिला एस.बी.एस. नगर) शामिल हैं।

    जिला निर्वाचन अधिकारियों, ईआरओ, एईआरओज़, सुपरवाइजरों और बीएलओज़ के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए मित्रा ने कहा कि यह मील का पत्थर उनके सामूहिक समर्पण और मिशन-आधारित कार्य को दर्शाता है। इस अवसर पर बोलते हुए सी.ई.ओ. ने अधिकारियों की उनके अथक प्रयासों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रशंसा की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस चरण का सफलतापूर्वक पूरा होना मजबूत और पूर्णतः डिजिटाइज़्ड मतदाता सूची बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल नागरिकों को सशक्त बनाया जा रहा है, बल्कि मतदान की प्रक्रिया में उनका विश्वास भी बढ़ा है।

    सी.ई.ओ. ने सभी जिलों से एस.आई.आर.-2026 के आगामी चरणों में इसी प्रकार समर्पण के साथ कार्य करते रहने की अपील की। उन्होंने पंजाब के मतदाताओं से भी अपील की कि जिन्होंने अभी तक संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारियों को अपने गणना फॉर्म जमा नहीं करवाए हैं, वे 3 अगस्त (अंतिम तिथि) से पहले ऐसा करना सुनिश्चित करें ताकि उनके नाम 13 अगस्त, 2026 को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूचियों में शामिल किए जा सकें।

     

  • पंजाब विधान सभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने विधान सभा में 40 से अधिक फलदार पौधे लगाए

    पंजाब विधान सभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने विधान सभा में 40 से अधिक फलदार पौधे लगाए

    पंजाब की समृद्धि को पुन: बहाल करने और राज्य को हरा-भरा बनाने के लिए हमें अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए : स्पीकर कुलतार सिंह संधवां

    चंडीगढ़: पर्यावरणीय स्थिरता और हरियाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब विधान सभा के स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवां ने आज पंजाब विधान सभा परिसर में फलदार पौधे लगाए। इस अवसर पर बोलते हुए स्पीकर संधवां ने बताया कि पंजाब विधान सभा में अब तक 40 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पंजाब को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है और पौधे लगाने का यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा।

    स्पीकर संधवां ने कहा, “यदि हम प्रकृति से प्रेम करेंगे, तो प्रकृति भी हमें वही प्रेम वापस करेगी।” उन्होंने वर्तमान समय में नियमित रूप से पौधे लगाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ‘ग्रीन पंजाब’ बनाने के लिए अब सभी को मिलकर काम करने का समय आ गया है। स्पीकर ने आगे कहा कि सतत पर्यावरण को बढ़ावा देना समय की प्रमुख आवश्यकता है। आज अधिक से अधिक पेड़ लगाकर, हम आने वाली पीढ़ियों और सदियों को एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के तहत सुरक्षित रख सकते हैं।

    उन्होंने पंजाब के लोगों से गुरबानी की मुख्य शिक्षाओं और सिख गुरुओं द्वारा दिखाए गए ऐतिहासिक मार्ग से गहरी आध्यात्मिक दिशा लेकर व्यापक पर्यावरण आंदोलन शुरू करने की पुरजोर अपील की। उन्होंने आगे कहा कि सच्ची दिव्यता प्रकृति में निवास करती है। प्रत्येक मानव, पशु, पौधा और पेड़ सर्वशक्तिमान की जीवंत अभिव्यक्ति है।

    राज्य में घटते जा रहे पर्यावरणीय संतुलन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पीकर ने बताया कि पंजाब का वन क्षेत्र घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जिसके लिए तत्काल सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि हरियाली और वनस्पति की कमी सामाजिक बुराइयों के बढ़ने से जुड़ी हुई है, जो शांति और समृद्धि को नष्ट करती है। प्रकृति की कद्र और संरक्षण पूरे समुदाय के लिए दिव्य कृपा, समृद्धि और आशीर्वाद सुनिश्चित करता है।

    स. संधवां ने बताया कि हमें छठे पातशाह गुरु हरगोबिंद साहिब जी से दिशा लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने स्वयं बाग लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। यदि हम पंजाब को पुनः रंगीन और जीवंत बनाना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले राज्य को हरा-भरा पंजाब बनाना होगा। उन्होंने समस्त पंजाबियों से अपील की, “जहां भी और जब भी अवसर मिले, आओ सभी एकजुट होकर पेड़ लगाएं।” उन्होंने आगे अपील की कि सभी नागरिक प्रकृति से जुड़ी अपनी पारंपरिक मान्यताओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि पंजाबी सतत पर्यावरण सुनिश्चित कर सकते हैं, जहाँ प्रकृति फले-फूलेगी और आने वाली पीढ़ियां पेड़ों के तहत क्षेत्र को बढ़ाकर समृद्ध होंगी।

     

  • सुचेतक रंगमंच ने ‘वकत तैनू सलाम है’ नाटक के साथ टैगोर थिएटर में रंग जमाया

    सुचेतक रंगमंच ने ‘वकत तैनू सलाम है’ नाटक के साथ टैगोर थिएटर में रंग जमाया

    सामाजिक विषयों पर आधारित ऐसे नाटक अंधविश्वासों से ऊपर उठने का संदेश देते हैं : बाल मुकंद शर्मा

    चंडीगढ़: थिएटर ग्रुप ‘सुचेतक रंगमंच’ द्वारा टैगोर थिएटर, चंडीगढ़ में पंजाबी नाटक ‘वकत तैनू सलाम है’ का मंचन किया गया। नाटक को उसके मजबूत सामाजिक संदेश और मार्मिक अभिनय के लिए दर्शकों ने खूब सराहा। यह नाटक सी.टी. खानोलकर के प्रसिद्ध नाटक का पंजाबी रूपांतरण है। इस प्रस्तुति के दौरान देश भगत विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. जोरा सिंह और देश भगत विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर डॉ. तजिंदर कौर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा और बोटैनिक हेल्थकेयर के डॉ. गौरव सोनी, समुदाय के कई अन्य गणमान्य लोगों के साथ अतिथियों के रूप में उपस्थित थे। बाल मुकंद शर्मा ने नाटक, उसके निर्देशक और कलाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सामाजिक विषय पर आधारित ऐसे नाटक न केवल अंधविश्वासों से ऊपर उठने का संदेश देते हैं, बल्कि जीवन को व्यावहारिक रूप से जीने के लिए भी प्रेरित करते हैं। अनीता शब्दीश द्वारा निर्देशित और पंजाबी में अनुवादित इस नाटक ने दर्शकों को अपने रोचक कथानक, आकर्षक अभिनय और सार्थक विषय-वस्तु से बांधे रखा। रंगमंच प्रेमियों, कलाकारों और अतिथियों ने नाटक की भरपूर प्रशंसा की। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. जोरा सिंह ने समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देने के लिए रंगमंच का सार्थक उपयोग करने हेतु समूह को बधाई दी। प्रबंधकों ने इस शाम को सफल बनाने के लिए मुख्य अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों, मीडिया, समर्थकों और दर्शकों का उनके शानदार स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। सुचेतक रंगमंच ने महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देने वाले सार्थक नाटकों का मंचन जारी रखने के अपने संकल्प को दोहराया।
  • भगवंत मान सरकार की ‘मांवां धीयां सत्कार योजना’ 100 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को भी दे रही सम्मान और आर्थिक संबल

    भगवंत मान सरकार की ‘मांवां धीयां सत्कार योजना’ 100 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को भी दे रही सम्मान और आर्थिक संबल

    मैं यह राशि अपनी बेटियों पर ख़र्च करूँगी और अपने लिए ‘हियरिंग एड’ खरीदूँगी: भरपूर कौर, 109 वर्षीय लाभार्थी

    चंडीगढ़: पंजाब की सौ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए भगवंत मान सरकार द्वारा ‘माँवां धीयां सत्कार योजना’ के तहत दी जा रही वित्तीय सहायता केवल आर्थिक मदद नहीं है। यह उनके जीवन की संध्या बेला में सम्मान, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का एक नया आधार है। इन महिलाओं में से कई चलने-फिरने में असमर्थ हैं , तो किसी को ठीक से सुनाई नहीं देता या कोई ठीक से बोल पाने में असमर्थ है। फिर भी, सौ वर्षों का पड़ाव पार कर चुकी ये महिलाएँ इस बात को भली-भांति समझती हैं कि उन्हें मिलने वाली यह राशि उनकी अपनी है और वे इसे अपनी इच्छा के अनुसार ख़र्च कर सकती हैं। अपने इस अधिकार का एहसास ही उन्हें गहरा संतोष देता है। कई लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी सबसे पहले अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों से मिली।वे इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहती थीं; इसलिए उन्होंने अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को मनाया, ताकि वे उनके साथ निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र पहुंच कर आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी कर सकें। उनके लिए यह सहायता इसलिए भी अधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें वृद्धावस्था या विधवा पेंशन के अतिरिक्त मिल रही है। संगरूर की 109 वर्षीय भरपूर कौर ने अपनी पड़पोते की पत्नी की सहायता से आवेदन प्रक्रिया पूरी की और अब उसी की मदद से बैंक से राशि निकालती हैं। उन्होंने यह पैसा अपने बटुए में संभालकर रखा है।वे कहती हैं, “मैं इस पैसे का एक हिस्सा अपनी बेटियों पर ख़र्च करूँगी, जिनकी उम्र भी अब पचास वर्ष से अधिक है, और बाकी राशि से अपने लिए सुनने की मशीन खरीदूँगी। मुझे सुनने में कठिनाई होती है, लेकिन इसके अलावा मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ। आज भी घर का सारा काम स्वयं कर लेती हूँ। मुझे घुटनों का दर्द या कोई अन्य बीमारी नहीं है। आज तक किसी सरकार ने ऐसा काम नहीं किया।” कोटकपूरा की 110 वर्षीय मुख्तियार कौर को भी योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्हें सुनने में कठिनाई होती है, लेकिन वे बोलती स्पष्ट रूप से हैं और बताती हैं कि उन्होंने यह राशि घर-गृहस्थी की आवश्यकताओं पर ख़र्च की। वे कहती हैं, “मैंने पहले कभी किसी सरकार को पंजाब की महिलाओं को इतना सम्मान देते नहीं देखा।” फरीदकोट की 102 वर्षीय जसमेल कौर ने अपना अधिकांश जीवन परिवार की देखभाल में बिताया है। उन्हें मिली सहायता राशि का उपयोग भी उन्होंने परिवार की भलाई के लिए ही किया। वे कहती हैं, “मैं कुछ पैसा आपनी दवाई-बूटी ते खर्च कीता ते कुछ पैसा आपने जवाई दे इलाज वास्ते आपनी बेटी नूँ दे दित्ता।(मैंने कुछ पैसे अपनी दवाइयों पर ख़र्च किए और कुछ पैसे अपने दामाद के इलाज के लिए अपनी बेटी को दिए।” मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि भगवंत मान सरकार महिलाओं का इतना ध्यान रख रही है।” वे कहती हैं, “इस उम्र में पैसा आपका सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। हर काम के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। अब तो साँस लेना भी कठिन लगता है।” मोगा की 102 वर्षीय प्रीतम कौर बेहद कमज़ोर हैं और उन्हें सुनने में भी कठिनाई होती है। उम्र के कारण वह बहुत कम बोल पाती हैं, इसलिए उनके पुत्र सिकंदर सिंह बताते हैं कि 3,000 रुपये की इस सहायता ने उनकी माँ का जीवन कुछ आसान बना दिया है। परिवार ने इस राशि से उनके लिए एक व्हीलचेयर खरीदी, जिससे अब वे घर के भीतर आसानी से आ-जा सकती हैं। शेष राशि उनकी दवाइयों पर ख़र्च की गई। प्रीतम कौर के लिए यह सहायता उनके दैनिक जीवन को पहले की तुलना में अधिक सहज बनाने का माध्यम बनी है। 102 वर्षीय अंग्रेज कौर भी इस योजना से बेहद प्रसन्न हैं। उन्हें सुनने में कठिनाई होती है, लेकिन उनका उत्साह देखते ही बनता है। वह पूरे आत्मविश्वास से कहती हैं, “मैं ताँ आपने कोल रखाँगी एह पैसा, जित्थे दिल करेगा ओथे ही ख़र्च करांगी। (यह पैसा मैं अपने पास रखूँगी। जहाँ मेरा मन करेगा, वहीं इसे ख़र्च करूँगी।)” उन्होंने इस राशि से अपनी दवाइयाँ खरीदीं, अपने लिए नया सूट लिया और कुछ पैसे अपनी पोती पर भी ख़र्च किए। 102 वर्ष की आयु में भी उनका यह स्नेह और उदारता दूसरों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है। इन महिलाओं की बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ , शारीरिक सीमाएँ और विपरीत परिस्थितियों में भी उनका शांत धैर्य, ‘माँवां धीयां सत्कार योजना’ के महत्त्व को और अधिक बढ़ाता है। इन सौ वर्षों से अधिक आयु की महिलाओं के लिए यह वित्तीय सहायता केवल उनके बैंक ख़ाते में जमा होने वाली राशि नहीं है, बल्कि उनके गरिमापूर्ण जीवन को दिया गया सम्मान, आर्थिक आत्मनिर्भरता का संबल और इस बात का प्रमाण है कि समाज और सरकार की नज़र में आज भी उनका महत्त्व बना हुआ है। अपने शांत और प्रेरणादायक जीवन से ये महिलाएँ यह संदेश देती हैं कि सम्मान, गरिमा और अपने निर्णय स्वयं लेने की स्वतंत्रता जीवन के हर पड़ाव पर अनमोल होती है।
  • गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली 4,056 महिलाओं को 1.70 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता : डॉ. बलजीत कौर

    गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली 4,056 महिलाओं को 1.70 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता : डॉ. बलजीत कौर

    सरकार द्वारा दूसरे बच्चे के रूप में बेटी के जन्म पर 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार महिलाओं के कल्याण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार जनहितकारी कदम उठा रही है। इसी क्रम में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को 1.70 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी। इस सम्बन्धी ओर जानकारी देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि सरकार द्वारा पहले बच्चे के जन्म पर पात्र महिलाओं को 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है, जिसमें पहली किस्त 3,000 रुपये तथा दूसरी किस्त 2,000 रुपये की होती है। यदि दूसरे बच्चे के रूप में बेटी का जन्म होता है, तो सरकार की ओर से 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता एकमुश्त प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि यह पूरी राशि लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता और समय पर सहायता सुनिश्चित होती है। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक 4,056 गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक इस योजना के अंतर्गत 36,154 लाभार्थी महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि माताओं के स्वास्थ्य, पोषण तथा नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का प्रयास है कि कोई भी मां आर्थिक अभाव के कारण आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे तथा प्रत्येक बच्चे को जन्म से ही सुरक्षित और स्वस्थ शुरुआत मिल सके। उन्होंने अंत में दोहराया कि मान सरकार महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा यह सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।
  • सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और ई-चालान शिकायत प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए परिवहन विभाग के बड़े कदम: हरपाल सिंह चीमा

    सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और ई-चालान शिकायत प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए परिवहन विभाग के बड़े कदम: हरपाल सिंह चीमा

    नए जिला शिकायत निवारण सेल के माध्यम से नागरिकों को 45 दिनों के भीतर गलत ई-चालानों को चुनौती देने का अधिकार: हरपाल सिंह चीमा

    चंडीगढ़: पंजाब में सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने तथा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वित्त एवं परिवहन मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की। नए दिशा-निर्देशों के तहत जहां नागरिकों को गलत ई-चालानों को चुनौती देने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है, वहीं खतरनाक ड्राइविंग, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा वाहन संबंधी रिकॉर्ड समय पर अपडेट न करने पर भी सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। जारी एक प्रेस बयान में परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि ई-चालान संबंधी विवादों के त्वरित और अधिकार क्षेत्र के अनुसार निपटारे के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में जिला शिकायत निवारण सेल स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, “यदि किसी नागरिक को लगता है कि उसका ई-चालान गलत तरीके से जारी किया गया है, तो वह 45 दिनों के भीतर इसे चुनौती दे सकता है। वाहन स्वामी अपने दावे के समर्थन में डैशकैम फुटेज, फोटो, वीडियो क्लिप, गवाहों के बयान अथवा अन्य आवश्यक साक्ष्य जिला शिकायत निवारण सेल के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।” वाहन पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री चीमा ने कहा कि वाहन स्वामियों द्वारा स्वामित्व अथवा पते में परिवर्तन की जानकारी समय पर दर्ज न कराने पर अब सख्त जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार पता बदलने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर पंजीकरण प्राधिकरण को सूचित करना अनिवार्य है। इसी प्रकार, यदि वाहन का स्वामित्व पंजाब के भीतर हस्तांतरित किया जाता है तो 14 दिनों तथा राज्य से बाहर हस्तांतरण होने पर 45 दिनों के भीतर इसकी सूचना देना आवश्यक होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार 500 रुपये तथा प्रत्येक अगले उल्लंघन पर 1,500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खतरनाक ड्राइविंग को आधिकारिक रूप से गैर-समझौता योग्य (नॉन-कंपाउंडेबल) अपराध घोषित कर दिया है। इसका अर्थ है कि ऐसे मामलों का निपटारा मौके पर केवल जुर्माना भरकर नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के अंतर्गत आने वाले अपराध, जैसे लालबत्ती पार करना, स्टॉप साइन की अनदेखी करना, यातायात की निर्धारित दिशा के विपरीत वाहन चलाना तथा शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना, अब सख्त कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। चीमा ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों पर भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में किसी प्रकार की रियायत या समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होगी। उन्होंने कहा, “यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए अपराध करता है तो उसके माता-पिता, अभिभावक अथवा वाहन मालिक को उत्तरदायी माना जाएगा। ऐसे मामलों में भारी जुर्माना लगाया जाएगा, वाहन का पंजीकरण तत्काल निरस्त किया जा सकता है तथा संबंधित नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा।” सड़क अनुशासन को मजबूत बनाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इन नई अधिसूचित व्यवस्थाओं का उद्देश्य पूरे राज्य में यातायात कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। सभी नागरिकों से अपील की कि वे सड़क पर चलते समय यातायात नियमों और कानूनी प्रावधानों का पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से पालन करें।
  • मोहिंदर भगत ने पूर्व सैनिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ की विशेष समीक्षा बैठक

    मोहिंदर भगत ने पूर्व सैनिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ की विशेष समीक्षा बैठक

    पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने पर दिया जोर

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों के कल्याण के लिए तेजी से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए चंडीगढ़ में रक्षा सेवाएं कल्याण, स्वतंत्रता संग्रामी तथा बागवानी मंत्री श्री मोहितंदर भगत ने रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग तथा पंजाब एक्स-सर्विसमैन कॉरपोरेशन (पेस्को) के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के लिए अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की। बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिवारों तथा उनके आश्रितों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर तथा पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों की समस्याओं के त्वरित निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। इससे पहले बैठक के दौरान रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुमेर सिंह गुर्जर तथा निदेशक ब्रिगेडियर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (सेवानिवृत्त) ने विभाग की विभिन्न परियोजनाओं तथा उनकी प्रगति के बारे में मंत्री को विस्तारपूर्वक अवगत कराया। इस अवसर पर विभाग की चल रही परियोजनाओं, आवश्यक बजट, कर्मचारियों की पदोन्नतियों, भर्ती प्रक्रिया तथा सैनिक स्कूलों के विकास से संबंधित मामलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस अवसर पर भगत ने पंजाब एक्स-सर्विसमैन कॉरपोरेशन (पेस्को) के कार्यों की भी समीक्षा की। पेस्को के प्रबंध निदेशक मेजर जनरल हरमनदीप सिंह ने पूर्व सैनिकों को कॉरपोरेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए रोजगार तथा कॉरपोरेशन की प्रगति के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर मंत्री ने पूर्व सैनिकों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करवाने तथा पेस्को की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निर्देश दिए।
  • डॉ. बलजीत कौर ने SC विद्यार्थियों से की ये अपील

    डॉ. बलजीत कौर ने SC विद्यार्थियों से की ये अपील

    चंडीगढ़: पंजाब की सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत आने वाले सभी अनुसूचित जाति (एस.सी.) विद्यार्थियों से अपील की है कि वे 15 अगस्त, 2026 तक अपने सक्रिय बैंक खातों की आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding) अनिवार्य रूप से पूरी करवा लें, ताकि उनकी छात्रवृत्ति की बकाया राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा सके।

    कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति की राशि केवल डी.बी.टी. के माध्यम से लाभार्थी के आधार से जुड़े सक्रिय बैंक खाते में ही हस्तांतरित की जाती है। ऐसे में जिन विद्यार्थियों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हैं, वे पात्र होने के बावजूद छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं।

    डॉ. बलजीत कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि शैक्षणिक सत्र 2022-23 से 2025-26 तक के उन अनुसूचित जाति विद्यार्थियों की सूची, जिनकी छात्रवृत्ति का भुगतान केवल बैंक खातों की आधार सीडिंग न होने के कारण लंबित है, डॉ. अंबेडकर छात्रवृत्ति पोर्टल तथा पंजाब सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। उन्होंने संबंधित विद्यार्थियों से अपील की कि वे सूची में अपना नाम जांचें, अपने बैंक खाते की स्थिति का सत्यापन करें तथा तुरंत अपने संबंधित बैंक से संपर्क कर खाते को आधार से लिंक करवाएं, ताकि उनकी बकाया राशि बिना किसी अतिरिक्त विलंब के जारी की जा सके।

    शिक्षा को सामाजिक सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला बताते हुए डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि कोई भी जरूरतमंद विद्यार्थी केवल प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्रवृत्ति विद्यार्थी के भविष्य में किया गया एक महत्वपूर्ण निवेश है, जो प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मान और आत्मविश्वास के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है तथा ‘रंगला पंजाब’ के निर्माण के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

    मंत्री ने सभी पात्र विद्यार्थियों से एक बार फिर अपील की कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और निर्धारित समय से पहले ही आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूरी कर लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो विद्यार्थी 15 अगस्त, 2026 तक अपने सक्रिय बैंक खातों की आधार सीडिंग नहीं करवाते हैं, उनकी छात्रवृत्ति की राशि में होने वाली देरी अथवा भुगतान रुकने के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे, क्योंकि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने तक भुगतान संभव नहीं होगा।

    डॉ. बलजीत कौर ने दोहराया कि पंजाब सरकार प्रत्येक पात्र अनुसूचित जाति विद्यार्थी तक पारदर्शी, समयबद्ध और सुचारु तरीके से छात्रवृत्ति सहायता पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया, ताकि वे बिना किसी परेशानी के छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त कर सकें।

  • पंजाब में नहरी सिंचाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है : जल संसाधन मंत्री

    पंजाब में नहरी सिंचाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है : जल संसाधन मंत्री

    चंडीगढ़/लुधियाना: पंजाब सरकार द्वारा किसानों के कल्याण और कृषि को अधिक सशक्त एवं टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से जल संसाधन, खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने समराला विधानसभा क्षेत्र के गांव पूनियां में 1.10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार प्रदेश के प्रत्येक किसान के खेत तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि भूजल पर निर्भरता कम हो, जल संरक्षण को बढ़ावा मिले और खेती को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके।

    जल संसाधन मंत्री ने बताया कि गांव पूनियां लंबे समय से नहरी पानी की सुविधा से वंचित था तथा यहां भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा था। 1.10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के अंतर्गत 8 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसके माध्यम से 767 एकड़ कृषि भूमि तक पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है। इस योजना से लगभग 120 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा उनकी सिंचाई लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

    उन्होंने कहा कि सरहिंद नहर का निर्माण वर्ष 1985 में हुआ था, लेकिन इस क्षेत्र को कभी इसका लाभ नहीं मिल पाया। मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान ने वर्ष 2022 में सरकार बनने के बाद प्रत्येक खेत तक नहरी पानी पहुंचाने का जो संकल्प लिया था, उसे चरणबद्ध ढंग से धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक सरहिंद नहर से जुड़ी सात लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से 2,124 एकड़ क्षेत्र को पहली बार नहरी पानी उपलब्ध कराया गया है।

    गोयल ने बताया कि समराला विधानसभा क्षेत्र में नहरों के नवीनीकरण तथा भूमिगत पाइपलाइन बिछाने पर 43.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिससे 12,630 एकड़ भूमि को नियमित रूप से नहरी पानी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में नहरी सिंचाई के विस्तार के लिए लगभग 7,200 करोड़ रुपये व्यय कर भूजल संरक्षण, बिजली की बचत तथा कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है।

    वर्ष 2022 में प्रदेश में केवल 26 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था, जबकि आज यह बढ़कर 86 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 प्रतिशत तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार पंजाब के 1,550 गांवों तक नहरी पानी पहुंचाया गया है, जो राज्य की सिंचाई व्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है। कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उद्घाटन स्थल पर पौधारोपण भी किया। समराला के विधायक जगतार सिंह दयालपुरा ने कहा कि गांव पूनियां में इस परियोजना के शुरू होने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और कृषि को नई दिशा मिलेगी।

    मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरे राज्य में नहरी सिंचाई नेटवर्क का विस्तार कर रही है, जिससे भूजल पर निर्भरता कम होगी। नहरी पानी उपलब्ध होने से किसानों के डीजल आधारित सिंचाई खर्च में कमी आएगी, खेती की लागत घटेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, नहरी पानी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व भूमि की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। यह परियोजना कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाएगी, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।

    इस अवसर पर पंजाब जल संसाधन प्रबंधन एवं विकास निगम के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार बंसल, अधीक्षण अभियंता मनिंदर सिंह, कार्यकारी अभियंता गौरव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, किसान तथा क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

  • नूरपुर बेदी ब्लॉक के गाँवों को मिलेंगी सिंचाई सुविधाएँ, 650 करोड़ रुपये से योजना तैयार

    नूरपुर बेदी ब्लॉक के गाँवों को मिलेंगी सिंचाई सुविधाएँ, 650 करोड़ रुपये से योजना तैयार

    चंडीगढ़ : पंजाब के जल संसाधन एवं भूमि व जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज नूरपुर बेदी ब्लॉक के गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने की योजना की चरणबद्ध शुरुआत गांव छज्जा से की। इस सिंचाई योजना पर 650 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित नूरपुर बेदी ब्लॉक के गाँवों के निवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नूरपुर बेदी क्षेत्र के गाँव देश की आज़ादी से लेकर अब तक कृषि के लिए सिंचाई की पानी की सुविधाओं से वंचित थे। इस समस्या के समाधान के लिए चार संभावित विकल्पों का अध्ययन किया गया, जिनमें नंगल रिजर्वायर, सतलुज दरिया, एएसएचसी और एनएचसी के क्रॉसिंग तथा चोआं-नदियों पर बाँध बनाकर वर्षा जल का संरक्षण शामिल है।

    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इसके तहत 8 से 14 गाँवों के समूह बनाकर छोटी-छोटी लिफ्ट सिंचाई योजनाएँ विकसित की जा रही हैं, ताकि किसानों की आवश्यकता के अनुसार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही चोआं और नदियों पर बाँध बनाकर वर्षा जल को संग्रहित करने और गुरुत्वाकर्षण प्रवाह के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाने की योजना भी तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से स्वां नदी को चैनलाइज़ करने, बाढ़ से आस-पास के गाँवों की सुरक्षा करने और बड़ी मात्रा में पानी संग्रहित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह संग्रहित पानी भविष्य में सिंचाई के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे कृषि को बड़ा लाभ मिलेगा और भू-जल पर निर्भरता भी कम होगी। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि 102 गाँवों को सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए सतलुज दरिया आधारित लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और स्वां नदी पर बनाए जाने वाले बाँध को एक साथ लागू करना सबसे उचित रहेगा।

    गोयल ने कहा कि इस परियोजना की अनुमानित कुल लागत 650 करोड़ रुपये होगी। इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए 2,785 एकड़ क्षेत्र को कवर करने वाले 9 गाँवों के लिए लिफ्ट सिंचाई सुविधाएँ प्रदान करने की योजना शुरू की जा चुकी है, जिससे भविष्य में शेष गाँवों तक भी चरणबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक एडवोकेट दिनेश चढ्ढा ने संबोधित करते हुए कहा कि यह पहली बार होने जा रहा है कि हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले नूरपुर बेदी क्षेत्र को नहरी पानी मिल रहा है। अब तक सतलुज और खड्डों के पानी ने किसानों की जमीनों का नुकसान ही किया था, लेकिन अब इस लिफ्ट सिंचाई योजना से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

    विधायक ने कहा कि अब तक की सरकारों द्वारा नहरी पानी संबंधी न तो कोई सर्वेक्षण किया गया और न ही योजना का प्रस्ताव इस क्षेत्र के लिए लागू किया गया, जबकि सतलुज के पानी का उपयोग बहुत पहले से ही किया जा सकता था। विधायक ने क्षेत्रवासियों को इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि यह योजना इस क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगी, जिसके द्वारा नूरपुर बेदी के सभी गाँवों तक पानी पहुँचाया जाएगा।