चंडीगढ़: निर्वाचन प्रबंधन में उत्कृष्टता को मान्यता देने और प्रोत्साहित करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब अनिंदिता मित्रा ने आज निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) 2026 के घर-घर गणना चरण को निर्धारित समय-सीमा से पहले पूरा करने में उनके असाधारण समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया।
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि, निर्वाचन प्रक्रिया में शुद्धता, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का स्पष्ट प्रमाण है। गुरविंदर सिंह जौहल के नेतृत्व में धरमकोट विधान सभा क्षेत्र (जिला मोगा), घर-घर गणना अभ्यास को पूरा करने वाला राज्य का पहला क्षेत्र बनकर उभरा। इसके बाद सुनील फोगाट, आई.ए.एस., बलाचौर (जिला एस.बी.एस. नगर); तरसेम चंद, पी.सी.एस., दिर्घबा (जिला संगरूर); गगनदीप, पी.सी.एस., निहाल सिंह वाला (जिला मोगा); अमरीक सिंह सिद्धू, पी.सी.एस., बाघा पुराना (जिला मोगा); सतविंदर पाल रणीके, पी.सी.एस., मोगा (जिला मोगा); इसमत विजय सिंह, पी.सी.एस., धूरी (जिला संगरूर) और विपन भंडारी, पी.सी.एस., बंगा (जिला एस.बी.एस. नगर) शामिल हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारियों, ईआरओ, एईआरओज़, सुपरवाइजरों और बीएलओज़ के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए मित्रा ने कहा कि यह मील का पत्थर उनके सामूहिक समर्पण और मिशन-आधारित कार्य को दर्शाता है। इस अवसर पर बोलते हुए सी.ई.ओ. ने अधिकारियों की उनके अथक प्रयासों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रशंसा की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस चरण का सफलतापूर्वक पूरा होना मजबूत और पूर्णतः डिजिटाइज़्ड मतदाता सूची बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल नागरिकों को सशक्त बनाया जा रहा है, बल्कि मतदान की प्रक्रिया में उनका विश्वास भी बढ़ा है।

सी.ई.ओ. ने सभी जिलों से एस.आई.आर.-2026 के आगामी चरणों में इसी प्रकार समर्पण के साथ कार्य करते रहने की अपील की। उन्होंने पंजाब के मतदाताओं से भी अपील की कि जिन्होंने अभी तक संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारियों को अपने गणना फॉर्म जमा नहीं करवाए हैं, वे 3 अगस्त (अंतिम तिथि) से पहले ऐसा करना सुनिश्चित करें ताकि उनके नाम 13 अगस्त, 2026 को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूचियों में शामिल किए जा सकें।





बाल मुकंद शर्मा ने नाटक, उसके निर्देशक और कलाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सामाजिक विषय पर आधारित ऐसे नाटक न केवल अंधविश्वासों से ऊपर उठने का संदेश देते हैं, बल्कि जीवन को व्यावहारिक रूप से जीने के लिए भी प्रेरित करते हैं। अनीता शब्दीश द्वारा निर्देशित और पंजाबी में अनुवादित इस नाटक ने दर्शकों को अपने रोचक कथानक, आकर्षक अभिनय और सार्थक विषय-वस्तु से बांधे रखा। रंगमंच प्रेमियों, कलाकारों और अतिथियों ने नाटक की भरपूर प्रशंसा की।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. जोरा सिंह ने समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देने के लिए रंगमंच का सार्थक उपयोग करने हेतु समूह को बधाई दी। प्रबंधकों ने इस शाम को सफल बनाने के लिए मुख्य अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों, मीडिया, समर्थकों और दर्शकों का उनके शानदार स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। सुचेतक रंगमंच ने महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देने वाले सार्थक नाटकों का मंचन जारी रखने के अपने संकल्प को दोहराया।

कोटकपूरा की 110 वर्षीय मुख्तियार कौर को भी योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्हें सुनने में कठिनाई होती है, लेकिन वे बोलती स्पष्ट रूप से हैं और बताती हैं कि उन्होंने यह राशि घर-गृहस्थी की आवश्यकताओं पर ख़र्च की। वे कहती हैं, “मैंने पहले कभी किसी सरकार को पंजाब की महिलाओं को इतना सम्मान देते नहीं देखा।”
फरीदकोट की 102 वर्षीय जसमेल कौर ने अपना अधिकांश जीवन परिवार की देखभाल में बिताया है। उन्हें मिली सहायता राशि का उपयोग भी उन्होंने परिवार की भलाई के लिए ही किया। वे कहती हैं, “मैं कुछ पैसा आपनी दवाई-बूटी ते खर्च कीता ते कुछ पैसा आपने जवाई दे इलाज वास्ते आपनी बेटी नूँ दे दित्ता।(मैंने कुछ पैसे अपनी दवाइयों पर ख़र्च किए और कुछ पैसे अपने दामाद के इलाज के लिए अपनी बेटी को दिए।” मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि भगवंत मान सरकार महिलाओं का इतना ध्यान रख रही है।” वे कहती हैं, “इस उम्र में पैसा आपका सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। हर काम के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। अब तो साँस लेना भी कठिन लगता है।”
मोगा की 102 वर्षीय प्रीतम कौर बेहद कमज़ोर हैं और उन्हें सुनने में भी कठिनाई होती है। उम्र के कारण वह बहुत कम बोल पाती हैं, इसलिए उनके पुत्र सिकंदर सिंह बताते हैं कि 3,000 रुपये की इस सहायता ने उनकी माँ का जीवन कुछ आसान बना दिया है। परिवार ने इस राशि से उनके लिए एक व्हीलचेयर खरीदी, जिससे अब वे घर के भीतर आसानी से आ-जा सकती हैं। शेष राशि उनकी दवाइयों पर ख़र्च की गई। प्रीतम कौर के लिए यह सहायता उनके दैनिक जीवन को पहले की तुलना में अधिक सहज बनाने का माध्यम बनी है।
102 वर्षीय अंग्रेज कौर भी इस योजना से बेहद प्रसन्न हैं। उन्हें सुनने में कठिनाई होती है, लेकिन उनका उत्साह देखते ही बनता है। वह पूरे आत्मविश्वास से कहती हैं, “मैं ताँ आपने कोल रखाँगी एह पैसा, जित्थे दिल करेगा ओथे ही ख़र्च करांगी। (यह पैसा मैं अपने पास रखूँगी। जहाँ मेरा मन करेगा, वहीं इसे ख़र्च करूँगी।)” उन्होंने इस राशि से अपनी दवाइयाँ खरीदीं, अपने लिए नया सूट लिया और कुछ पैसे अपनी पोती पर भी ख़र्च किए। 102 वर्ष की आयु में भी उनका यह स्नेह और उदारता दूसरों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।
इन महिलाओं की बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ , शारीरिक सीमाएँ और विपरीत परिस्थितियों में भी उनका शांत धैर्य, ‘माँवां धीयां सत्कार योजना’ के महत्त्व को और अधिक बढ़ाता है। इन सौ वर्षों से अधिक आयु की महिलाओं के लिए यह वित्तीय सहायता केवल उनके बैंक ख़ाते में जमा होने वाली राशि नहीं है, बल्कि उनके गरिमापूर्ण जीवन को दिया गया सम्मान, आर्थिक आत्मनिर्भरता का संबल और इस बात का प्रमाण है कि समाज और सरकार की नज़र में आज भी उनका महत्त्व बना हुआ है। अपने शांत और प्रेरणादायक जीवन से ये महिलाएँ यह संदेश देती हैं कि सम्मान, गरिमा और अपने निर्णय स्वयं लेने की स्वतंत्रता जीवन के हर पड़ाव पर अनमोल होती है।







