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  • 10,000 रुपये की रिश्वत लेते सहायक उप-निरीक्षक को विजिलेंस ब्यूरो ने रंगे हाथ  किया काबू

    10,000 रुपये की रिश्वत लेते सहायक उप-निरीक्षक को विजिलेंस ब्यूरो ने रंगे हाथ  किया काबू

    चंडीगढ़ : पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के दौरान कूमकलां, थाना लुधियाना में तैनात सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) जगजीवन सिंह को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ काबू किया है। आज यहां यह जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी पुलिस अधिकारी को भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पोर्टल पर सुरजीत कॉलोनी, राहों रोड, लुधियाना निवासी एक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

    उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता के रिश्तेदार के विरुद्ध थाना कूमकलां, लुधियाना में एक मामला दर्ज था। एएसआई जगजीवन सिंह इस मामले का जांच अधिकारी था। जब शिकायतकर्ता उक्त मामले के संबंध में आरोपी अधिकारी से मिला तो उसने शिकायतकर्ता के रिश्तेदार को जमानत दिलाने में मदद करने के बदले 10,000 रुपये की रिश्वत मांगी और प्राप्त की। इसके बाद आरोपी एएसआई ने शिकायतकर्ता को दोबारा बुलाकर 10,000 रुपये की अतिरिक्त रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने रिश्वत मांगने संबंधी पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी।

    रिश्वत या किसी अन्य गैर-कानूनी तरीके का सहारा न लेने का निर्णय करते हुए शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो रेंज, लुधियाना से संपर्क किया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में आरोपी सहायक उप-निरीक्षक जगजीवन सिंह को शिकायतकर्ता से 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में विजिलेंस ब्यूरो थाना, लुधियाना में आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

  • सुनाम में मेगा रोजगार मेले में 562 युवाओं का नौकरियों के लिए चयन

    सुनाम में मेगा रोजगार मेले में 562 युवाओं का नौकरियों के लिए चयन

    चंडीगढ़ : पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण मंत्री अमन अरोड़ा ने आज सुनाम में आयोजित ‘मेगा रोजगार मेले’ के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य में रोजगार और नौकरियों का एक बेहतरीन एवं प्रगतिशील माहौल सृजित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। संगरूर, मलेरकोटला और बरनाला जिलों के क्लस्टर का यह पहला मेगा रोजगार मेला उनके दोनों विभागों – उद्योग विभाग एवं रोजगार सृजन विभाग – द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इसमें 18 वर्ष से 50 वर्ष तक के उम्मीदवारों ने भाग लिया और योग्यता एवं अनुभव के अनुसार 12,000 रुपये से लेकर 42,000 रुपये प्रति माह तक की तनख्वाह वाली नौकरियां प्राप्त कीं।

    इस रोजगार मेले में देश और राज्य की 61 बड़ी एवं नामी कंपनियों ने भाग लिया और 2129 युवाओं ने रोजगार मेले में हिस्सा लिया। मेले में 562 युवाओं का नौकरियों के लिए चयन हुआ और विभिन्न कंपनियों ने 618 युवाओं को नौकरियों के लिए शॉर्टलिस्ट किया। युवाओं को मौके पर ही ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ भी दिए गए। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान सरकार द्वारा लगभग 70,000 सरकारी नौकरियां पूर्ण पारदर्शिता के साथ, बिना किसी रिश्वत और बिना किसी सिफारिश के योग्य युवाओं को दी जा चुकी हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों से ही सभी युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा सकता, इसलिए एक ऐसा ‘इको-सिस्टम’ तैयार करना आवश्यक है, जहां बड़े पैमाने पर प्राइवेट कंपनियां और उद्योग भी युवाओं को रोजगार दे सकें।

    रोजगार सृजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग और उद्योग विभाग मिलकर एक पुल के रूप में कार्य कर रहे हैं, ताकि कंपनियों और युवाओं का आपसी तालमेल करवाया जा सके। इस मेले में शामिल होने वाली प्रमुख कंपनियों में सोनालिका, महिंद्रा ट्रैक्टर्स, के.आर.बी.एल., अवानी, ए.पी. ऑर्गेनिक्स, मैक्स, नाहर स्पिनिंग और अन्य कई बड़े औद्योगिक यूनिट शामिल थे। मेले में विभिन्न स्तर की शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर उपलब्ध करवाए गए। 10वीं, 12वीं, आई.टी.आई. (बॉयलर, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल), बी.एससी (नॉन-मेडिकल), बी. कॉम, ग्रेजुएट, डिप्लोमा धारक (मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल) तथा सी.एन.सी. कोर्स पास युवाओं ने इस मेले में भाग लिया और नौकरियां प्राप्त कीं।

    इस अवसर पर मीडिया द्वारा बैंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों की तरह पंजाब में आई.टी. हब बनाने के बारे में पूछे गए सवाल पर मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “हमारा मोहाली में आई.टी. का बहुत बड़ा और बेहतरीन हब पहले ही स्थापित हो चुका है। इसके अलावा लुधियाना, अमृतसर और जालंधर जैसे बड़े शहरों में भी हजारों युवा रोजगार कर रहे हैं। युवाओं को जहां अच्छे अवसर मिलें, वहां जाने की पूरी आजादी होनी चाहिए।” इस मौके पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने हर कंपनी के काउंटर पर जाकर कंपनियों के प्रतिनिधियों और युवाओं से बातचीत की।

    मेले के दौरान रोजगार सृजन एवं प्रशिक्षण विभाग की निदेशक श्रीमती अमृत सिंह आईएएस, उपायुक्त संगरूर श्रीमती पूनमदीप कौर आईएएस, अतिरिक्त उपायुक्त अंकुर महिंद्रू, एसडीएम सुनाम  गगनदीप सिंह, मार्केट कमेटी सुनाम के चेयरमैन मुकेश जुनेजा, कैबिनेट मंत्री के मीडिया सलाहकार यशपाल मंगला, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पदाधिकारी, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

     

  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 100% डिजिटलीकरण करने वाली चुनाव टीमों का बढ़ाया हौसला

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 100% डिजिटलीकरण करने वाली चुनाव टीमों का बढ़ाया हौसला

    चंडीगढ़: मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब अनिंदिता मित्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) 2026 के चल रहे घर-घर गणना चरण के दौरान निर्धारित समय से पहले गणना फॉर्मों की 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिए दिड़बा (ज़िला संगरूर) और निहाल सिंह वाला (ज़िला मोगा) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव अमले को बधाई दी।

    ज़िला निर्वाचन अधिकारी, ईआरओज़, एईआरओज और बीएलओज़ के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए मित्रा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि उनकी लगन और मिशन मोड में उनकी कार्य कुशलता को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी ज़िले निर्धारित समय के भीतर डिजिटलीकरण का कार्य पूरा कर लेंगे।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पंजाब के उन मतदाताओं से भी अपील की, जिन्होंने अभी तक अपने गणना फॉर्म अपने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओज़) को जमा नहीं करवाए हैं, कि वे शीघ्र से शीघ्र ये फॉर्म जमा करवाएं ताकि मसौदा मतदाता सूचियों में उनका नाम शामिल किया जाना सुनिश्चित किया जा सके।

     

  • मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी के परिणाम होंगे अच्छे, नशे से पीड़ित मरीजों को होगा फायदा: Dr Balbir Singh

    मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी के परिणाम होंगे अच्छे, नशे से पीड़ित मरीजों को होगा फायदा: Dr Balbir Singh

    चंडीगढ़: पंजाब ने गंभीर रूप से सिंथेटिक नशे (ओपिओइड) से जूझ रहे लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नशा छुड़ाऊ उपचार मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (एमएमटी) की शुरुआत की है। मेथाडोन की शुरुआत राज्य की नशों के विरुद्ध उपचार-केंद्रित रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तक राज्य में नशा पीड़ितों का इलाज मुख्य रूप से 500 से अधिक आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) केंद्रों के माध्यम से ब्यूप्रेनोर्फिन आधारित ओपिओइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी से किया जाता था। इस थेरेपी में हानिकारक ओपिओइड की जगह चिकित्सकीय निगरानी के तहत नियंत्रित दवाओं का उपयोग करके नशे के शिकार मरीजों का इलाज किया जाता है। अब, मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी उन मरीजों के लिए उपचार का एक अतिरिक्त विकल्प मुहैया कराएगी, जो लंबे समय से सिंथेटिक नशों पर निर्भर हैं और जिन पर मौजूदा इलाज ज्यादा असरदार साबित नहीं हुए हैं। इस समय पंजाब में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक चालू हैं। ये सरकारी मेडिकल कॉलेज फरीदकोट, सिविल अस्पताल लुधियाना, सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला और गुरदासपुर, मोहाली तथा जालंधर के जिला अस्पतालों में स्थापित किए गए हैं। पंजाब सरकार आने वाले महीनों में छह और एम.एम.टी. केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है, जिससे ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा कि मेथाडोन सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार के नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ का हिस्सा है, जिसमें खास तौर पर उन लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है, जो सिंथेटिक नशे पर निर्भर हैं और जिनमें फिर से नशे की ओर लौटने का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा, ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (एनएसीओ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू की जा रही मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से सिंथेटिक नशों के आदी लोगों के लिए प्रभावी उपचार का विकल्प है। यह समग्र उपचार प्रणाली मरीजों के उपचार के परिणामों में सुधार लाएगी और उन्हें अपने परिवार एवं समाज में सफलतापूर्वक पुनः स्थापित होने में मदद करेगी।’ नए क्लीनिक विशेष आउटपेशेंट सुविधाओं के रूप में काम करेंगे, जहाँ मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में मेथाडोन थेरेपी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, मनोचिकित्सा सलाह, पुनः नशे की लत से बचाव संबंधी सेवाएं, पारिवारिक काउंसलिंग और नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी दी जाएगी। मरीजों को अपनी निर्धारित खुराक लेने के लिए हर रोज क्लीनिक आना होगा, जहाँ उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में दवा दी जाएगी। दवा की हर खुराक डॉक्टर की निगरानी में दी जाएगी ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके और सही उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

    मेथाडोन थेरेपी क्या है?

    मेथाडोन, ओपिओइड यूज डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों, जैसे कि हेरोइन की लत से जूझ रहे मरीजों के लिए वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित एक प्रभावी उपचार है। मेथाडोन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की मॉडल सूची में ओपिओइड यूज डिसऑर्डर के उपचार के लिए भी शामिल किया गया है। यह दवा प्रशिक्षित डॉक्टरों की निगरानी में एक समग्र उपचार कार्यक्रम के तहत दी जाती है। मेथाडोन मस्तिष्क के उन्हीं ओपिओइड रिसेप्टर्स पर काम करती है, जिन पर हेरोइन और अन्य सिंथेटिक नशे असर करते हैं। निर्धारित खुराक के अनुसार यह नशे की तीव्र इच्छा (क्रेविंग) को नियंत्रित करती है, नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षणों से राहत देती है और ओपिओइड के प्रति सहनशीलता पैदा करती है, जिस कारण फिर से नशा लेने की तलब महसूस नहीं होती। इससे मरीज की सेहत स्थिर रहती है और वह उपचार, रोजगार और पारिवारिक जीवन में अधिक सुचारू ढंग से हिस्सा लेने लगता है। समय के साथ मरीज की सेहत की स्थिति और उपचार में हुई प्रगति को ध्यान में रखते हुए मेथाडोन की खुराक धीरे-धीरे कम की जा सकती है। चूंकि मरीज हर रोज क्लीनिक में चिकित्सकीय निगरानी में दवा लेते हैं, इसलिए इसके दुरुपयोग की संभावना बहुत कम रहती है। मेथाडोन लंबे समय तक असर करने वाली दवा है। इसकी रोजाना एक खुराक आम तौर पर लगभग 24 घंटों तक नशा छोड़ने के लक्षणों और नशे की तलब को नियंत्रण में रखती है, जिससे मरीज पूरा दिन सामान्य और स्थिर जीवन बिता सकते हैं।
  • मान सरकार द्वारा महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा पर 298 करोड़ रुपये खर्च : डॉ. बलजीत कौर

    मान सरकार द्वारा महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा पर 298 करोड़ रुपये खर्च : डॉ. बलजीत कौर

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण और सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करने तथा उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठा रही है।

    इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा सुविधा प्रदान करने पर 298 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं हर महीने लगभग 1.20 करोड़ मुफ्त बस यात्राओं का लाभ उठा रही हैं, जो इस प्रमुख जनकल्याणकारी योजना की व्यापक सफलता और लोकप्रियता का प्रमाण है।

    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस योजना से महिलाओं पर आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है और रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाली लाखों महिला यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि यात्रा को सस्ता और सुगम बनाकर इस पहल ने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया है, जिससे वे नए रोजगार के अवसर तलाशने और पंजाब के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदारी करने में सक्षम हुई हैं।

    डॉ. बलजीत कौर ने आगे बताया कि यह मुफ्त यात्रा सुविधा सरकारी बसों में उपलब्ध है, जिससे पूरे राज्य में महिलाओं को सुरक्षित, विश्वसनीय और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं की गतिशीलता, स्वतंत्रता और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।

    मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ऐसे ‘रंगला पंजाब’ के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जहां प्रत्येक महिला सुरक्षित यात्रा कर सके, सम्मानजनक जीवन जी सके और अपने सपनों को साकार कर सके। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने तथा विकास का लाभ राज्य के प्रत्येक घर तक पहुंचाने के लिए भविष्य में भी जनहितैषी और प्रगतिशील फैसले लेती रहेगी।

  • इस उम्र की महिलाओं को सबसे ज्यादा होगा मांवां धियां सत्कार योजना’ का लाभ

    इस उम्र की महिलाओं को सबसे ज्यादा होगा मांवां धियां सत्कार योजना’ का लाभ

    चंडीगढ़: भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना’ राज्य की पात्र महिलाओं को ऐसे समय में आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जब बढ़ते घरेलू ख़र्च, कॉलेज दाखिलों की लागत और महँगाई परिवारों के बजट पर लगातार दबाव बढ़ा रहे हैं। 25 जून 2026 तक रजिस्ट्रेशन पूरा करने वाली लगभग 33 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों के बैंक ख़ातों में सहायता राशि सीधे भेजी जा चुकी है, जबकि शेष पात्र महिलाओं को यह राशि 1 अगस्त को मिलेगी। अब तक लगभग 70 लाख से अधिक महिलाओं ने इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है।

    योजना के लाभार्थियों के प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि यह सहायता उन महिलाओं तक पहुँच रही है, जो जीवन के ऐसे चरण में हैं जब आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ सबसे अधिक होती हैं। कुल लाभार्थियों में से 36–45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की हिस्सेदारी 25.2 प्रतिशत और 46–59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की हिस्सेदारी 25.4 प्रतिशत है। इस प्रकार, 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी 36 से 59 वर्ष की आयु के हैं।

    जीवन के इसी दौर में परिवारों पर सबसे अधिक आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ होती हैं। परिवारों को बच्चों की शिक्षा, कॉलेज में दाखिला, विवाह, स्वास्थ्य सेवा, मकान, लोन की किश्तें, बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल और अपने भविष्य की योजना जैसी अनेक ज़िम्मेदारियाँ निभानी पड़ती हैं। ऐसे समय में हर रुपये का महत्त्व बहुत बढ़ जाता है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना के तहत मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता महिलाओं को परिवार के ख़र्चों में सीधे योगदान देने और आवश्यक ज़रूरतों का बोझ कम करने में मदद कर रही है। कई परिवारों के लिए यह सहायता शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़मर्रा के घरेलू ख़र्चों का एक महत्त्वपूर्ण सहारा बन गई है।

    फाज़िल्का ज़िले के गाँव धानी खरासवाली की 48 वर्षीय सुनीता रानी ने बताया कि इस मासिक सहायता से उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी बी.टेक की पढ़ाई कर रही है और बेटा ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता है। मैंने इस राशि का अधिकांश हिस्सा बेटे की स्कूल फ़ीस भरने में लगाया और बाकी पैसे अपने पति को दे दिए। गृहिणी होने के कारण मेरी अपनी कोई आय नहीं है, इसलिए इस सहायता से मुझे परिवार की ज़रूरतों में योगदान देने का संतोष मिला है। मेरे पति भी इस सहयोग से बहुत ख़ुश हैं। पहले हमें मुफ़्त बिजली मिली, फिर 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिला और अब यह मासिक आर्थिक सहायता मिल रही है। सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएँ शुरू की हैं।”

    उन्होंने कहा कि इस सहायता से आर्थिक तनाव कम हुआ है और बच्चों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी रखने में मदद मिली है। फिरोज़पुर के वार्ड नंबर 17 की 55 वर्षीय पच्छो के लिए यह योजना जीवन के बेहद कठिन दौर में बड़ी राहत लेकर आई है। अपने पति के निधन के बाद वह अपनी तलाकशुदा बेटी और नाती के साथ रहती हैं तथा लंबे समय से ख़राब स्वास्थ्य और सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैंने इस राशि का कुछ हिस्सा अपने इलाज पर ख़र्च किया और बाकी घरेलू ज़रूरतों के लिए बचाकर रख लिया। मेरे पति का कई वर्ष पहले निधन हो गया था और तब से हम कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। भगवंत मान सरकार की यह सहायता हमारे लिए बहुत बड़ा सहारा बनी है।”

    उन्होंने बताया कि इस आर्थिक सहायता से वह अपने नाती की स्कूल फ़ीस भी भर सकीं। योजना के लिए कई लोगों का आवेदन करवाने में मदद करने वाली पच्छो ने ख़ुशी जताई कि इससे अनेक ज़रूरतमंद परिवारों को लाभ मिला है। सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य 46 वर्षीय करमजीत कौर ने बताया कि यह मासिक सहायता उन्हें रोज़मर्रा के ख़र्च पूरे करने के साथ-साथ परिवार के भविष्य पर भी ख़र्च करने का अवसर दे रही है। उन्होंने कहा, “मैं ताँ इस पैसे नाल अपनी ऐनक बनवाई ते स्कूटी विच पेट्रोल पुआ लिया। (मैंने इस पैसे से अपना नया चश्मा बनवाया और अपनी स्कूटी में पेट्रोल डलवाया।)” उन्होंने आगे कहा,”आने वाले महीनों में मैं इस राशि का उपयोग अपने बेटे के खेल संबंधी ख़र्चों के लिए करूँगी। वह राष्ट्रीय स्तर का हॉकी खिलाड़ी है।”

    पूर्व कबड्डी खिलाड़ी करमजीत कौर ने आम परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने वाली जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। फाज़िल्का की 28 वर्षीय लाभार्थी प्रीति, लोगों के घरों में काम करती हैं और अपने दो स्कूली बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सहायता ऐसे समय मिली है जब बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च उठाना लगातार मुश्किल होता जा रहा था। उन्होंने कहा, “इस पैसे से हमने अपने बच्चों की स्कूल फ़ीस भरी। यह सहायता बिल्कुल सही समय पर मिली है और इससे हमारा आर्थिक बोझ काफ़ी कम हुआ है।”

    इसी प्रकार, विधवा बलजीत कौर ने बताया कि इस मासिक सहायता से वह अपने चिकित्सा संबंधी ख़र्च पूरे कर सकी हैं, जिन्हें वह पहले वहन करने में कठिनाई महसूस कर रही थीं। इससे उन्हें काफी आर्थिक राहत मिली है। पंजाब के विभिन्न ज़िलों से सामने आ रहे लाभार्थियों के अनुभव मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं। यह योजना समय पर आर्थिक सहायता के माध्यम से महिलाओं को घरेलू ज़िम्मेदारियाँ निभाने, परिवार का सहयोग करने और बढ़ते आर्थिक दबाव के दौर से बेहतर ढंग से उबरने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जालंधर में होने वाली राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप की तैयारियों का जायजा लिया

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जालंधर में होने वाली राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप की तैयारियों का जायजा लिया

    जालंधर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस साल दिसंबर महीने में जालंधर के ऐतिहासिक रायज़ादा हंसराज स्टेडियम में होने वाली सब-जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप की तैयारियों का जायजा लिया। अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने एक अत्याधुनिक इनडोर बैडमिंटन हॉल के निर्माण के लिए 2.14 करोड़ रुपये की विशेष अनुदान देने की घोषणा की, जिससे प्रदेश भर में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और खेलों में सफलता को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से रेखांकित किया गया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लगभग 44 साल बाद राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप ऐतिहासिक रायज़ादा हंसराज स्टेडियम में वापस आ रही है। उन्होंने कहा, “अंडर-13 श्रेणी की यह चैंपियनशिप पंजाब में बैडमिंटन को बड़ा बढ़ावा देगी और प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूत करेगी। पंजाब सरकार नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

    मुख्यमंत्री ने नए इनडोर बैडमिंटन हॉल के निर्माण के लिए डिप्टी कमिश्नर जालंधर वरजीत सिंह वालिया और पंजाब बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रितिन खन्ना को 2.14 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने उल्लेख किया, “लगभग छह दशकों में यह पहली बार है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक स्टेडियम का दौरा किया है, जिसने कई शानदार बैडमिंटन खिलाड़ी पैदा किए हैं।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया, “लोक निर्माण विभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगा और टेंडर प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी। निर्माण कार्य अगस्त में शुरू होने की उम्मीद है। मौजूदा चार आउटडोर मल्टीपर्पज कोर्टों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के बुनियादी ढांचे से लैस विश्व स्तरीय इनडोर बैडमिंटन सुविधा में बदला जाएगा।”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरा होने के बाद रायज़ादा हंसराज स्टेडियम में कुल 10 इनडोर बैडमिंटन कोर्ट होंगे, जिससे यह पंजाब का एकमात्र ऐसा खेल मैदान बन जाएगा, जहां इतना बड़ा इनडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स होगा और यह उत्तर भारत के प्रमुख बैडमिंटन केंद्रों में से एक बन जाएगा।

    उन्होंने कहा, “यह उन्नत बुनियादी ढांचा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंटों की मेजबानी करने के लिए पंजाब की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा। इस स्टेडियम को इस साल दिसंबर में सब-जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी के लिए चुना गया है, जो लगभग चार दशकों में यहाँ होने वाली पहली राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप होगी।”

    अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खिलाड़ियों, कोचों और खेल अधिकारियों से बातचीत की और स्टेडियम में मौजूदा खेल बुनियादी ढांचे का जायजा लिया। उन्होंने बैडमिंटन जगत को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार चैंपियनशिप के सफल आयोजन के लिए हर संभव सहयोग देगी और प्रदेश भर में खेल बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश करना जारी रखेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने कई महान खिलाड़ी पैदा किए हैं और सदियों से खेलों से इसका गहरा संबंध रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारे पूजनीय सिख गुरुओं ने खेलों के माध्यम से न केवल आध्यात्मिकता बल्कि शारीरिक तंदुरुस्ती को भी बढ़ावा दिया। श्री गुरु अंगद देव जी ने खडूर साहिब में ‘मल्ल अखाड़ा’ स्थापित किया और खुद कुश्ती और शारीरिक प्रशिक्षण की निगरानी की, जबकि श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने नौजवानों को घुड़सवारी और तीरंदाजी का प्रशिक्षण दिया। दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी अपने समय के हर खेल और युद्ध कला (मार्शल आर्ट) में माहिर थे। आज भी पंजाब श्री अनंदपुर साहिब में होला महल्ला के दौरान की जाने वाली पारंपरिक खेलों के माध्यम से अपनी समृद्ध खेल परंपराओं का गर्व के साथ प्रदर्शन करता है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “खेल बुनियादी ढांचे और एथलीटों के विकास में पंजाब सरकार के निरंतर निवेश ने पहले ही उत्साहजनक परिणाम देना शुरू कर दिए हैं, जिससे प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बनाई है।” उन्होंने दोहराया कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने और पंजाब के नौजवानों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं सृजित करने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेगी।

  • मेरी रसोई राशन किटों का वितरण 30 लाख से पार

    मेरी रसोई राशन किटों का वितरण 30 लाख से पार

    3.44 लाख से अधिक राशन किटों के वितरण के साथ लुधियाना अग्रणी, पटियाला 2.24 लाख से अधिक के साथ दूसरे और अमृतसर 2.08 लाख किटों के वितरण के साथ तीसरे स्थान पर

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने जरूरतमंद परिवारों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के मद्देनजर अपनी चल रही राशन किट वितरण मुहिम ‘मेरी रसोई’ में और तेजी लाई है, जिसके तहत लगभग 30.48 लाख परिवार पहले ही लाभ ले रहे हैं। इस मुहिम का उद्देश्य हर तिमाही (3 महीनों) बाद पंजाब भर में कुल 40.48 लाख पात्र परिवारों को कवर करना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी सोच और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क की निगरानी में इस प्रमुख पहल के तहत राशन का वितरण मिशन मोड पर किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक परिवार को एक राशन किट मिलेगी, जो एक घर की आवश्यक खाद्य वस्तुओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें मासिक खपत के लिए दो किलो दाल, दो किलो चीनी, एक किलो नमक, 200 ग्राम हल्दी पाउडर, और एक लीटर सरसों का तेल शामिल है। ये राशन किटें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पात्र लाभार्थियों को पहले से ही वितरित की जा रही गेहूं के अतिरिक्त प्रदान की जा रही हैं। राशन किटें मार्कफेड द्वारा एकत्रित की जाती हैं, जबकि खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा प्रदेश भर में वितरण नेटवर्क की निगरानी की जाती है। अब तक वितरित की गई 30.48 लाख राशन किटों में से, लुधियाना 344427 के साथ पहले, पटियाला 224447 के साथ दूसरे स्थान, अमृतसर 208073 के साथ तीसरे स्थान पर, बठिंडा 190800 के साथ चौथे, जालंधर 169223 के साथ पांचवें स्थान पर और गुरदासपुर 168880 राशन किटों के वितरण के साथ छठे स्थान पर है। बाकी जिलों की बात करें तो फाजिल्का में 162163 राशन किटें, संगरूर में 157009, होशियारपुर में 149846, तरन तारन में 147049, श्री मुक्तसर साहिब में 141122, फिरोजपुर में 117865, मोगा में 115314, मानसा 98149, कपूरथला 84355, फतेहगढ़ साहिब में 81700, फरीदकोट में 81300, साहिबजादा अजीत सिंह नगर में 79753, पठानकोट में 79363, रूपनगर में 73625, बरनाला में 67927, मलेरकोटला में 53804 और शहीद भगत सिंह नगर में 52002 राशन किटें वितरित की गई हैं। योजना का उद्देश्य अनाज के साथ-साथ आवश्यक प्रोटीन, खाना पकाने का तेल और मसाले उपलब्ध कराना भी है, ताकि योजना के अंतर्गत आने वाले परिवारों को समग्र रूप से पौष्टिक तत्वों से युक्त भोजन मिल सके। वितरण की सुचारू निगरानी की जा रही है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए हर घर तक स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन पहुंचाया जा सके। जिला प्रशासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग और स्थानीय अधिकारी इस नए उपाय की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तनदेही एवं समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। यह योजना राज्य सरकार की वचनबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है कि कोई भी जरूरतमंद एवं पात्र परिवार खाद्य सुरक्षा से वंचित न रहे। मौजूदा एनएफएसए गेहूं वितरण में इन राशन किटों को जोड़कर, भूखमरी और पोषण दोनों मुद्दों का समाधान किया जा रहा है।  
  • भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को मिली बड़ी सौगात

    भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को मिली बड़ी सौगात

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ के अंतर्गत राज्यभर के उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शुरू किए गए ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम के अत्यंत उत्साहजनक और सार्थक परिणाम सामने आए हैं। बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक., बी.वोकेशनल तथा आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के पहले वर्ष में लगभग 95,000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। इनमें से 25,693 विद्यार्थियों ने अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू किए, जबकि 20,241 छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में लगभग 90 करोड़ रुपये का कारोबार किया।

    इस उपलब्धि पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “पंजाब का बिजनेस क्लास कार्यक्रम शिक्षा के उद्देश्य को नई परिभाषा दे रहा है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले, उद्यमी और रोजगार सृजित करने वाले युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है। लगभग 95,000 विद्यार्थियों ने अपने व्यावसायिक विचारों पर काम किया, जिनमें से 25,000 से अधिक ने अपने स्टार्टअप शुरू किए। पहले ही वर्ष में इन उद्यमों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे स्पष्ट है कि यदि युवाओं को सही अवसर मिलें तो वे सफल व्यवसाय खड़े कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

    उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की शिक्षा क्रांति हमारे युवाओं को केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार और अवसर सृजित करने के लिए तैयार कर रही है।” इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के युवा केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं रोजगार सृजित करें और आर्थिक विकास में भागीदार बनें। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य की 20 विश्वविद्यालयों, 494 कॉलेजों, 320 आईटीआई और 91 पॉलिटेक्निक सहित कुल 925 उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. तथा बी.वोकेशनल के विद्यार्थियों के लिए अकादमिक सत्र 2025-26 के दौरान दो-क्रेडिट का अनिवार्य पाठ्यक्रम शुरू किया गया।

    पारंपरिक शिक्षा, जो केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित रहती है, उससे अलग यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावसायिक अवसरों की पहचान, ग्राहक अनुसंधान, बाजार सत्यापन, व्यवसाय स्थापित करना, डिजिटल उपस्थिति, मूल्य निर्धारण रणनीति, ग्राहक प्राप्ति, वित्तीय योजना, संचार कौशल तथा समस्या समाधान जैसे व्यावहारिक उद्यमिता कौशल सिखाता है। परिणामस्वरूप लगभग 57,000 विद्यार्थी (करीब 60 प्रतिशत प्रतिभागी) पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हुए।

     

    इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कॉमर्स, बेकरी एवं फूड सर्विस, डिजिटल कंटेंट निर्माण, कोडिंग एवं प्रोफेशनल सेवाएं, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिटनेस एवं वेलनेस, रिटेल, ब्यूटी एवं पर्सनल केयर, कृषि आधारित उद्यम, हस्तशिल्प तथा अन्य स्थानीय सेवा व्यवसायों में अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे पंजाब में देखने को मिल रहा है।

    गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र सौरव ने अपने माचा पेय ब्रांड ‘मॉक, इन माचा’ के माध्यम से कॉलेज कार्यक्रमों में उत्पाद बेचकर लगभग 90,000 रुपये कमाए।इस उद्मम ने अपने विलक्षण फ्लेवरों और ताज़गी के कारण के कारण ख्याति हासिल की।

    महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के शरणवीर सिंह ने ‘स्किलएक्सस’ नामक डिजिटल करियर गाइडेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया, जिसके 2.5 लाख से अधिक उपयोगकर्ता हो चुके हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि विद्यार्थी इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़े स्तर पर तकनीक आधारित उद्यम स्थापित कर रहे हैं। संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय, जालंधर के पंकज ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से ‘जारिया ज्वेलरी’ नाम से ऑनलाइन आर्टिफिशियल ज्वेलरी व्यवसाय शुरू किया और लगभग 150 ग्राहकों को सेवाएं देकर 30,000 रुपये की आय अर्जित की।

    सरकारी आईटीआई, पटियाला के कमलजीत सिंह ने ‘केएमएल मशरूम’ की स्थापना की, जो स्थानीय बाजारों और रेस्तरां को बटन मशरूम की आपूर्ति करता है। उन्होंने लगभग 1.5 लाख रुपये कमाए और अपने ब्रांड की पैकेजिंग भी विकसित की। सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने ‘नेल स्टूडियो बाय गगन’ नाम से घर आधारित नेल आर्ट व्यवसाय शुरू किया, जो इंस्टाग्राम और स्थानीय सैलून के सहयोग से संचालित हो रहा है। इससे उन्होंने लगभग 55,000 रुपये की कमाई की।

    सरकारी आईटीआई, मोहाली के रमनदीप सिंह ने ‘क्वालिटी इलेक्ट्रॉनिक स्टोर’ नाम से ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने अपनी वेबसाइट बनाई और सोशल मीडिया के माध्यम से बिक्री का विस्तार किया। ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम राज्यभर के युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहा है।

    पहले ही वर्ष में मिली अभूतपूर्व सफलता और उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने सर्वसम्मति से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी स्नातक (अंडरग्रेजुएट) डिग्री कार्यक्रमों में ‘बिजनेस क्लास’ का विस्तार करने की सिफारिश की है। पहले यह कार्यक्रम केवल बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. और बी.वोकेशनल तक सीमित था, लेकिन अब इसे बी.ए., बी.एससी. तथा अन्य सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में भी लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को नियमित शिक्षा के साथ व्यावहारिक उद्यमिता कौशल प्राप्त हो सके।

    ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम की सफलता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पंजाब की शिक्षा क्रांति की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च शिक्षा में उद्यमिता को शामिल कर सरकार विद्यार्थियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल प्रदान कर रही है, जिनकी बदौलत वे पढ़ाई के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू कर सकें और भविष्य में रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकें।

    महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के बी.टेक. (कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग) के छात्र शरणवीर सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार द्वारा उद्यमिता को दी गई प्राथमिकता ने मेरे जैसे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा किया है। ‘स्किलएक्सस’ उसी सोच को एक डिजिटल करियर गाइडेंस इकोसिस्टम में बदलने का मेरा प्रयास है, जो विद्यार्थियों को सही करियर चुनने में मदद करता है।”

    सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने कहा, *“‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम से पहले मुझे लगता था कि नौकरी ही एकमात्र विकल्प है। इस कार्यक्रम ने मेरी सोच बदल दी और मुझे अपने विचारों पर विश्वास करना सिखाया। आज मैं केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय स्थापित करने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित हूं।”

  • मान सरकार ने संपत्ति पंजीकरण की भाषा आम लोगों के लिए और सरल बनाने का लिया फैसला

    मान सरकार ने संपत्ति पंजीकरण की भाषा आम लोगों के लिए और सरल बनाने का लिया फैसला

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भूमि और संपत्ति की खरीद-फरोख्त के दौरान पंजीकरण में प्रयुक्त भाषा को अधिक सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने राजस्व विभाग में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे 35 कठिन शब्दों के स्थान पर ऐसे सरल पंजाबी शब्दों के प्रयोग का निर्णय लिया है, जिन्हें आम नागरिक आसानी से समझ सकें।

    पंजाब के राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री स. हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि सरकार का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को लोगों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि संपत्ति पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों में प्रयुक्त कठिन भाषा के कारण आम लोगों को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुराने कठिन शब्दों के स्थान पर सरल और सहज पंजाबी शब्दों के प्रयोग का फैसला किया है।

    राजस्व मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के निर्देशों के बाद राजस्व एवं पुनर्वास विभाग द्वारा एक विशेष कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर संपत्ति पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों में प्रयुक्त 35 कठिन शब्दों के स्थान पर 35 सरल पंजाबी शब्दों को अपनाने का निर्णय लिया गया है।

    स. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि यह निर्णय पंजाब सरकार की जनहितैषी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी कामकाज में प्रयुक्त भाषा को आम नागरिकों की समझ के अनुरूप बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को अपनी भूमि या संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों को समझने में अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    राजस्व मंत्री ने बताया कि महानिरीक्षक पंजीकरण तथा राज्य के सभी उपायुक्तों को पत्र जारी कर पुराने और नए अनुशंसित शब्दों की सूची भेज दी गई है। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लोगों की सुविधा के लिए संपत्ति पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों में नए सरल शब्दों का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।

    पुराने शब्दों के स्थान पर अनुशंसित नए सरल शब्द

    उजर की जगह एतराज़,
    उजरत की जगह फीस,
    अराज़ी की जगह ज़मीन,
    साकिन की जगह वसनीक,
    साकिन देह की जगह गांव का वसनीक,
    हसब ज़ाबता की जगह कानून के अनुसार,
    हिब्बा की जगह दान,
    कैफ़ियत की जगह विशेष कथन,
    गैर मजरूआ की जगह अणवाहिया खेत,
    गरिंदा की जगह लेने वाला,
    ज़र की जगह रकम,
    ताबे की जगह अनुसार/मुताबिक/अधीन,
    तकावी की जगह कृषि ऋण,
    तरमीम की जगह शोध/दरुस्ती,
    तसब्बुर/तसव्वुर की जगह मन्न लेणा,
    तलबाना की जगह खर्चा,
    देह की जगह पिंड,
    दाखिल-खारिज की जगह इंतकाल,
    फक-उल-रहन की जगह गिरवी रखी जायदाद को छुड़ाना,
    फ़ौत की जगह मौत,
    फ़र्द की जगह नकल जमाबंदी,
    फ़रीक की जगह धिर,
    फ़रीक अव्वल की जगह पहली धिर,
    फ़रीक दोम की जगह दूजी धिर,
    बदस्तूर की जगह पहले दी तरह,
    बैनामा की जगह बिक्रीनामा,
    बज़रिया की जगह राहीं,
    बाया की जगह बेचने वाला,
    मख़सूस की जगह खास,
    मुश्तरका की जगह संयुक्त,
    मुंतकिल की जगह तबदील,
    मज़कूर की जगह उपरोक्त,
    मनसूख करना की जगह रद्द करना/खारिज करना,
    मुश्तरी हुशियारबाश की जगह खरीदार सावधान रहे,
    मुरतहिनकी जगह ज़मीन गहणे लेने वाला