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  • डॉक्टरों और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिला सरकार का समर्थन, सीएम मान ने खुद किया ऐलान

    डॉक्टरों और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिला सरकार का समर्थन, सीएम मान ने खुद किया ऐलान

    चंडीगढ़: राज्य में 10 लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना की निर्बाध और सुचारू शुरुआत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना (एमएमएसवाई) के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) पंजाब में आयोजित इस बैठक में सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    बैठक में प्रमुख भागीदारों में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पंजाब, पंजाब हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन (पीएचएनए), पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज (पीसीएमएस) के डॉक्टर तथा प्रमुख निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि शामिल थे। इस अवसर पर प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) कुमार राहुल और एसएचए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संयम अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

    इस योजना के सहयोगात्मक और नागरिक-केंद्रित क्रियान्वयन के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन, नैतिक चिकित्सकीय अभ्यास और पूर्ण पारदर्शिता के माध्यम से ही एमएमएसवाई को सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के प्रत्येक निवासी को बिना किसी वित्तीय बोझ के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हों, और यह केवल सरकार, डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य संस्थानों के बीच ईमानदार सहयोग से ही संभव है।

     

  • ₹467.49 लाख का निवेश, लाखों युवाओं की उम्मीद: नशा मुक्ति की दिशा में मान सरकार का बड़ा कदम

    ₹467.49 लाख का निवेश, लाखों युवाओं की उम्मीद: नशा मुक्ति की दिशा में मान सरकार का बड़ा कदम

    चंडीगढ़: पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूर्ण दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए ठोस और प्रभावी कदमों के परिणाम आज ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा कुल 467.49 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

    कैबिनेट मंत्री ने बताया कि राज्य में नशों के विरुद्ध जन-जागरूकता पैदा करने, लोगों को संवेदनशील बनाने और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा आपसी समन्वय से व्यापक योजना के तहत कई प्रभावशाली कार्यक्रम लागू किए गए हैं। विशेष रूप से बच्चों, युवाओं और अध्यापकों को नशा मुक्ति अभियान से जोड़ने के लिए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम तैयार कर लागू किए गए हैं, जिनके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं।

    उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत 107.22 लाख रुपये, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियों हेतु 202.99 लाख रुपये, जबकि सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा राज्य के सभी जिलों में जागरूकता शिविरों की श्रृंखला आयोजित करने के लिए 109.12 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

    डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि नशों की सबसे बड़ी मार राज्य के युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ती है। कई माताएं अपने बेटों के भविष्य के लिए प्रतिदिन प्रार्थना करती हैं, कई बच्चे अपने पिता की आंखों में से आशा को समाप्त होते हुए देखते हैं और कई घरों की खुशियां नशों की भेंट चढ़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मान सरकार इस पीड़ा को गहराई से समझती है और नशा मुक्त पंजाब की लड़ाई को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय, संवेदनशील और सामाजिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रही है।

    कैबिनेट मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नशों को जड़ से समाप्त करना ही नहीं है, बल्कि प्रत्येक युवा को पुनः सपने देखने का साहस देना, प्रत्येक मां के आंसू पोंछना और हर परिवार में खुशहाली वापस लाना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का दृढ़ संकल्प है कि पंजाब का प्रत्येक युवा नशों से दूर रहकर प्रगति, आत्मगौरव और सम्मानपूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए आगे बढ़े।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार केवल नीतियाँ नहीं बना रही, बल्कि टूटे हुए परिवारों के सपनों को फिर से जोड़ रही है। करोड़ों का बजट और विभागों का आपसी तालमेल यह साबित करता है कि पंजाब अब सुरक्षित हाथों में है।”

  • पंजाब सरकार की बड़ी पहल: एनआरआई को ई-सनद पोर्टल पर 27 सेवाएं, 2026 में होगी भव्य NRI मिलनी

    पंजाब सरकार की बड़ी पहल: एनआरआई को ई-सनद पोर्टल पर 27 सेवाएं, 2026 में होगी भव्य NRI मिलनी

    चंडीगढ़: पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रवासी पंजाबियों और एनआरआई समुदाय के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘एनआरआई ई-सनद पोर्टल’ लॉन्च किया है। इस डिजिटल पहल के तहत विदेशों में रह रहे पंजाबियों को अब 27 महत्वपूर्ण सरकारी सेवाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस पहल का उद्देश्य एनआरआई समुदाय को दस्तावेज़ीकरण और प्रशासनिक सेवाओं के लिए बार-बार पंजाब आने की मजबूरी से मुक्ति दिलाना है। यह पोर्टल खासतौर पर उन प्रवासी पंजाबियों के लिए वरदान साबित होगा जो कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में निवास करते हैं और अपने मूल प्रदेश से जुड़े रहना चाहते हैं।

    इस पोर्टल के माध्यम से एनआरआई अब जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र सहित कई अन्य दस्तावेज़ घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे। पहले एनआरआई को इन दस्तावेज़ों के लिए या तो भारत आना पड़ता था या फिर रिश्तेदारों के माध्यम से लंबी प्रक्रिया पूरी करनी होती थी, जिसमें महीनों लग जाते थे। लेकिन अब मात्र कुछ क्लिक में और डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद ये सभी सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पोर्टल यूज़र-फ्रेंडली हो और पंजाबी, अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध रहे। इससे न केवल समय और पैसे की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

    पंजाब सरकार ने वर्ष 2026 में एनआरआई पंजाबियों के लिए ‘एनआरआई मिलनी’ नामक एक विशेष अंजुमन की योजना की भी घोषणा की है। इस अनूठी पहल के तहत विश्वभर में बसे पंजाबियों को एक मंच पर लाया जाएगा, जहां वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे। यह मिलनी प्रवासी पंजाबियों और मातृभूमि के बीच एक सशक्त सेतु का काम करेगी। इस आयोजन में व्यापार, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशे जाएंगे। सरकार का मानना है कि एनआरआई समुदाय पंजाब की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और उन्हें सम्मानित करना राज्य का दायित्व है।

    आंकड़ों के अनुसार, पंजाब से सबसे ज्यादा प्रवासन हुआ है और दुनियाभर में लगभग 30 लाख से अधिक पंजाबी मूल के लोग बसे हुए हैं। ये प्रवासी भारतीय हर साल अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा अपने परिवारों को भेजते हैं, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। लेकिन प्रशासनिक सेवाओं में जटिलताओं के कारण वे अक्सर असुविधा का सामना करते थे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “हमारे प्रवासी भाई-बहन पंजाब की धड़कन हैं। उनके लिए सेवाओं को सरल और सुलभ बनाना हमारी प्राथमिकता है। ई-सनद पोर्टल उसी दिशा में एक ठोस कदम है।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार भविष्य में इस पोर्टल पर और अधिक सेवाएं जोड़ने की योजना बना रही है।

    एनआरआई कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस पोर्टल के माध्यम से संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़, पेंशन संबंधी सेवाएं और कानूनी प्रमाणपत्रों की सुविधा भी शीघ्र ही शामिल की जाएगी। राज्य सरकार ने विदेशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि दस्तावेज़ों का सत्यापन तेज़ी से हो सके। डिजिटल हस्ताक्षर, आधार आधारित प्रमाणीकरण और ओटीपी वेरिफिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पोर्टल को पूर्णतः सुरक्षित बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी समुदाय मौजूद हैं।

    कैनेडा में रहने वाले जसविंदर सिंह ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “यह हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है। अब हर छोटे-मोटे काम के लिए टिकट काटकर भारत नहीं आना पड़ेगा। पंजाब सरकार ने हमारी समस्याओं को समझा और उसका समाधान किया।” वहीं, लंदन में व्यवसाय करने वाली हरप्रीत कौर ने कहा कि इस तरह की डिजिटल सुविधाओं से प्रवासी पंजाबी अपनी जड़ों से और मजबूती से जुड़े रह सकेंगे। सोशल मीडिया पर भी इस घोषणा को लेकर एनआरआई समुदाय में खुशी की लहर देखी गई है। कई लोगों ने इसे ‘गेम चेंजर’ और ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है जो न केवल भ्रष्टाचार को कम करेगा बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा। तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार का यह कदम दूरदर्शी है। ऐसे पोर्टल विकसित देशों में आम हैं लेकिन भारत में राज्य स्तर पर यह पहल उल्लेखनीय है।” उन्होंने कहा कि अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया तो यह प्रवासी भारतीयों और मातृभूमि के बीच के संबंधों को नई ऊंचाई देगा। साथ ही, इससे निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

    पंजाब सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले एनआरआई परिवारों के बुजुर्ग सदस्यों को भी इस सेवा का लाभ मिल सके। इसके लिए सभी तहसील और जिला स्तर के कार्यालयों में हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। यहां प्रशिक्षित कर्मचारी नागरिकों की सहायता करेंगे और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में मदद करेंगे। सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जिस पर एनआरआई किसी भी समस्या के लिए संपर्क कर सकते हैं। भाषा की बाधा को दूर करने के लिए अंग्रेजी और पंजाबी दोनों में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    इस पहल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पहले महीने में ही हजारों एनआरआई ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अगले छह महीनों में सभी 27 सेवाएं पूरी तरह से चालू हो जाएं और एनआरआई समुदाय को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को इस पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एन्क्रिप्शन का उपयोग किया गया है।

    पंजाब सरकार की यह पहल निश्चित रूप से प्रवासी पंजाबियों और उनकी मातृभूमि के बीच के संबंधों को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी। विशेषकर युवा पीढ़ी, जो विदेशों में जन्मी और पली-बढ़ी है, वह भी अब आसानी से अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी। डिजिटल युग में इस तरह की पहल न केवल सुविधाजनक है बल्कि समय की मांग भी है। आने वाले समय में जब ‘एनआरआई मिलनी’ आयोजित होगी, तो यह पोर्टल उसकी रीढ़ की हड्डी बनेगा और विश्वभर के पंजाबियों को एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाएगा। पंजाब सरकार का यह प्रयास दर्शाता है कि जनता की सेवा ही सरकार का मूल उद्देश्य है।

  • अब पंजाब की बेटियां बनेंगी अफसर, मान सरकार ने किया बड़ा ऐलान

    अब पंजाब की बेटियां बनेंगी अफसर, मान सरकार ने किया बड़ा ऐलान

    चंडीगढ़: पंजाब में महिलाओं का आत्मविश्वास और हौसला नई ऊंचाइयों तक पहुंचने वाला है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि सरकारी नौकरियों में 33% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। यह आरक्षण ग्रुप A, B, C और D सभी कैटेगरी की नौकरियों पर लागू होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल रोजगार के नए अवसर खोलेगा, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को भी और मजबूत बनाएगा।

    सोशल सिक्योरिटी, वीमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इस फैसले से महिलाओं की प्रशासनिक और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में भागीदारी बढ़ेगी। सरकार की इस नीति से लैंगिक असमानता कम होगी और महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी वर्ष 2022-23 में 25.2% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 36% है, जो दर्शाता है कि सुधार की गुंजाइश अभी भी है।

    मान सरकार का यह कदम सिर्फ़ नौकरी देने तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक बराबरी और लैंगिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। आने वाले समय में इसका असर पंजाब के समाज और प्रशासन दोनों में साफ दिखाई देगा और यही कदम ‘रंगला पंजाब’ के सपने को हकीकत बनाने में मदद करेगा।

     

  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग के 606 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग के 606 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे

    चंडीगढ़: पंजाब में ‘मिशन रोजगार’ के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग के 606 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपकर रोजगार के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। चार वर्षों में कुल 61,281 सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं, जिनमें 385 स्पेशल एजूकेटर, 157 प्राइमरी शिक्षक, 8 प्रिंसिपल और 56 अन्य कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नियुक्तियां पूरी तरह मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर की गई हैं और पिछली सरकारों की तरह किसी चहेते को नौकरी नहीं दी गई।

    मुख्यमंत्री ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पहला अलग कैडर बनाने की भी घोषणा की। इसके तहत 385 स्पेशल एजूकेटर शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जिससे लगभग 48,000 विशेष जरूरत वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने नए शिक्षकों को बच्चों के भविष्य में मार्गदर्शन और मानवता की सेवा का संदेश देते हुए कहा कि शिक्षक का योगदान बच्चे के जीवन को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब के सरकारी शिक्षकों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। 234 प्रिंसिपलों और शिक्षा अधिकारियों ने सिंगापुर में, 249 हेड टीचर्स ने IIM अहमदाबाद में और 216 प्राइमरी शिक्षकों ने फिनलैंड की टुर्कू यूनिवर्सिटी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 118 स्कूल ऑफ़ एमिनेंस स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे गरीब बच्चों को सुनहरा भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

  • अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं: डॉ. बलजीत कौर

    अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं: डॉ. बलजीत कौर

    चंडीगढ़: पंजाब की सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने राज्य में अनुसूचित जातियों की सामाजिक-आर्थिक भलाई के लिए लागू किए जा रहे अनुसूचित जाति सब-प्लान (एस.सी.एस.पी.) की प्रगति की समीक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक के दौरान एस.सी. सब-प्लान के तहत योजनाएं लागू कर रहे लगभग 25 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में डॉ. बलजीत कौर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा एस.सी. सब-प्लान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन योजनाओं के लिए निर्धारित राशि अभी तक खर्च नहीं हुई है, उनकी उपयोगिता में तेजी लाई जाए और राशि तुरंत जारी करवाई जाए, ताकि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक लोगों तक पहुँच सके।

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि एस.सी. सब-प्लान के तहत आरक्षित राशि का उपयोग केवल अनुसूचित जाति समुदाय की भलाई के लिए ही किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही या गलत उपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभिन्न विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों द्वारा कवर किए जा रहे लाभार्थियों और गांवों की विस्तृत सूची सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग को उपलब्ध करवाएं, ताकि आरक्षित फंड का सही, पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

    डॉ. बलजीत कौर ने विभागों को अनुसूचित जाति समुदाय की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप नई, जन-हितैषी और अभिनव योजनाएं तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार अनुसूचित जातियों के समग्र विकास, सशक्तिकरण और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। मंत्री ने एस.सी. सब-प्लान की प्रगति की निरंतर समीक्षा के लिए जल्द ही पुनः ऐसी बैठक आयोजित करने की बात भी कही, ताकि अनुसूचित जातियों से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक सुचारू, समयबद्ध और प्रभावी बनाया जा सके। इस बैठक में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विकास प्रताप (आई ए एस), एस.सी. सब-प्लान के नोडल विभाग सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख सचिव श्री वी.के. मीना (आई.ए.एस.), निदेशक-सह-अतिरिक्त सचिव श्रीमती विम्मी भुल्लर (आई.ए.एस.), अनुसंधान अधिकारी डॉ. लिवप्रीत कौर तथा श्री कमलजीत सिंह भी उपस्थित रहे।

  • सरकारी स्कूलों के छात्रों को टॉप संस्थानों के लिए तैयार कर रही मान सरकार: हरजोत सिंह बैंस

    सरकारी स्कूलों के छात्रों को टॉप संस्थानों के लिए तैयार कर रही मान सरकार: हरजोत सिंह बैंस

    चंडीगढ़: पंजाब शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि पेस (पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस) कार्यक्रम के तहत आयोजित विंटर रेज़िडेंशियल कोचिंग कैंपों में 1728 सरकारी स्कूल विद्यार्थियों ने भाग लिया। बठिंडा, लुधियाना और मोहाली में आयोजित इन कैंपों में जेईई, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली कोचिंग दी गई।

    कैंपों में फिजिक्स, रसायन और गणित जैसे विषयों में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने पढ़ाया। विद्यार्थियों को दैनिक शंका समाधान, वन-टू-वन मेंटरिंग, तनाव प्रबंधन और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गईं। सुरक्षित आवास और पौष्टिक भोजन सहित संपूर्ण व्यवस्थाओं के माध्यम से विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित किया गया।

    हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह पहल सभी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए है। पिछले वर्ष पेस के विद्यार्थियों ने जेईई, नीट जैसी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे राज्य के सरकारी स्कूल देश के शीर्ष पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए लॉन्चपैड बनकर उभरे हैं।

  • सोशल मीडिया पर पंजाब सरकार की जनता-फ्रेंडली नीतियों की तारीफ

    सोशल मीडिया पर पंजाब सरकार की जनता-फ्रेंडली नीतियों की तारीफ

    चंडीगढ़: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की ‘जनता पहले’ नीति का असर साफ नजर आ रहा है। लोग अब अपने मोबाइल से सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। यह कोई प्रचार नहीं, बल्कि असली बदलाव की झलक है। मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी स्कूलों में सुधार से आम जनता सीधे लाभ महसूस कर रही है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में अब गरीब से गरीब व्यक्ति को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। मोहल्ला क्लीनिकों में मुफ्त इलाज और दवाइयां मिल रही हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में नई मशीनें, साफ-सफाई और डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कह रहे हैं कि अब पहली बार महसूस हो रहा है कि सरकार उनके लिए काम कर रही है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार नजर आ रहा है। सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, खेल के मैदान और अच्छे शौचालय जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ जैसी योजनाओं से गरीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का अवसर मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मान सरकार की यह रणनीति छोटे लेकिन जरूरी काम करके जनता का भरोसा जीतने वाली साबित हो रही है।

  • स्वच्छ सर्वेक्षण में चमका पंजाब, मान सरकार के प्रयासों की हुई सराहना

    स्वच्छ सर्वेक्षण में चमका पंजाब, मान सरकार के प्रयासों की हुई सराहना

    चंडीगढ़: वर्ष 2025 के दौरान पंजाब ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा कराए गए स्वच्छ सर्वेक्षण में नगर निगम बठिंडा को स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है। इसके अलावा राज्य की 25 यूएलबी को कूड़ा मुक्त स्टार-1, एक यूएलबी को स्टार-3, 46 यूएलबी को वाटर+, 53 को ओडीएफ++, 43 को ओडीएफ+ और 22 यूएलबी को ओडीएफ प्रमाणन प्राप्त हुआ है।

    स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विरासत ठोस कचरे के निपटारे पर विशेष ध्यान दिया है। 131 यूएलबी में कुल 84.09 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 40.78 लाख मीट्रिक टन का निपटारा किया जा चुका है, जबकि शेष कचरे को अप्रैल 2027 तक निपटाने की योजना है। इसके साथ ही घर-घर कचरा संग्रहण, स्रोत पर पृथक्करण और प्रोसेसिंग को सशक्त किया गया है, जिससे 81 प्रतिशत गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान हो रहा है।

    डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और सुल्तानपुर लोधी में कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और अन्य पर कार्य जारी है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अमृतसर में 1200 डीजल ऑटो को ई-ऑटो से बदला गया है, वहीं बड़े शहरों में 447 ई-बसें खरीदी जा रही हैं। इसके अलावा डोर-स्टेप सेवाओं की शुरुआत, जल-सीवरेज नेटवर्क का डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास से शहरी सेवाओं में व्यापक सुधार हुआ है।

  • पंजाब विधानसभा में शहीदों को श्रद्धांजलि, साहिबजादों का बलिदान किया याद

    पंजाब विधानसभा में शहीदों को श्रद्धांजलि, साहिबजादों का बलिदान किया याद

    चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सदन ने चार साहिबज़ादों—बाबा अजीत सिंह जी, बाबा जुंझार सिंह जी, बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी—की लासानी शहादत को श्रद्धा और सम्मान अर्पित किया। इस अवसर पर सदन ने माता गुजरी जी, बाबा जीवन सिंह जी, बाबा संगत सिंह जी, दीवान टोडर मल जी तथा अन्य महान शहीदों को भी स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहिबज़ादों के महान बलिदान हमें ज़बर-जुल्म के आगे कभी न झुकने और सिद्धांतों के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का संदेश देते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि चार साहिबज़ादों का बलिदान सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में अद्वितीय स्थान रखता है और आज भी ये आने वाली पीढ़ियों को अन्याय और दमन के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने साहिबज़ादों और माता गुजरी जी को ‘ठंडा बुर्ज’ में कैद रखने की कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उनके अदम्य साहस और सिद्धांतों के प्रति अडिगता की सराहना की।

    साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने शहीदी सभाओं और श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर संगत के लिए स्वास्थ्य, आवागमन, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतज़ाम किए। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए ई-रिक्शा और बसों की सुविधा के साथ पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित करने का जिक्र किया, ताकि किसी को कोई असुविधा न हो।