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  • जालंधर में खेल प्रौद्योगिकी विस्तार केंद्र की स्थापना को मिली मंजूरी, एमएसएमई मंत्रालय ने की घोषणा

    जालंधर में खेल प्रौद्योगिकी विस्तार केंद्र की स्थापना को मिली मंजूरी, एमएसएमई मंत्रालय ने की घोषणा

    चंडीगढ़ : पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन तथा एनआरआई मामलों के माननीय कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने 21 जुलाई, 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी से भेंट कर पंजाब के एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु तत्काल सहयोग का अनुरोध किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से जालंधर में केंद्रित खेल सामग्री उद्योग पर जोर दिया।

    बैठक के दौरान संजीव अरोड़ा ने बताया कि पंजाब का खेल सामग्री उद्योग निर्यात की अपार संभावनाओं से युक्त है, किंतु इसे प्रौद्योगिकी उन्नयन, उत्पाद विकास, परीक्षण सुविधाओं तथा वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुपालन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जालंधर में प्रोसेस कम प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर (PPDC), मेरठ के अंतर्गत एक टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर (TEC) की स्थापना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। यह प्रस्ताव राज्य सरकार द्वारा आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पिछले आठ महीनों से मंत्रालय में लंबित था।

    इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए, भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने 18 दिसंबर, 2025 को प्रधान निदेशक आदित्य प्रकाश शर्मा के माध्यम से एक आधिकारिक पत्र जारी किया, जिसमें जालंधर स्थित सरकारी चमड़ा एवं फुटवियर प्रौद्योगिकी संस्थान (GILFT) में स्वीकृत टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर तथा लीज डीड के निष्पादन का आह्वान किया गया। यह स्वीकृति हब एवं स्पोक मॉडल के अंतर्गत प्रदान की गई है, जिसमें TEC को PPDC, मेरठ द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। समझौता ज्ञापन पर 5 जनवरी, 2026 को जालंधर में हस्ताक्षर किए जाने प्रस्तावित हैं।

    पत्र के अनुसार, GILFT भवन के ग्राउंड, प्रथम एवं द्वितीय तल पर स्थित कुल 11,166 वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र को इस केंद्र की स्थापना हेतु पहले ही चिन्हित किया जा चुका है। यह टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर उन्नत उत्पाद एवं प्रक्रिया विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, परीक्षण सुविधा, कौशल विकास तथा परामर्श एवं हैंडहोल्डिंग सहायता जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे विशेष रूप से खेल सामग्री एवं संबंधित विनिर्माण इकाइयों को लाभ मिलेगा।

    इस निर्णय का स्वागत करते हुए संजीव अरोड़ा ने केंद्रीय एमएसएमई मंत्री का समयोचित हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर पंजाब के खेल सामग्री उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध होगा, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, गुणवत्ता मानकों में सुधार होगा और निर्यात को नया प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र के शीघ्र संचालन हेतु पंजाब सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

    यह पहल केंद्र–राज्य के मजबूत समन्वय को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई को सशक्त बनाना, नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना तथा पंजाब को प्रमुख विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र के रूप में और अधिक सुदृढ़ करना है।

  • पंजाब में किसानों को मिला देश का सबसे उच्च गन्ना भाव, फसलों में रिकॉर्ड वृद्धि

    पंजाब में किसानों को मिला देश का सबसे उच्च गन्ना भाव, फसलों में रिकॉर्ड वृद्धि

    चंडीगढ़: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2025 में किसानों की खुशहाली और टिकाऊ कृषि के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, प्रदेश में गन्ने का भाव भारत में सबसे अधिक ₹416 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिला। इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत कमी दर्ज की गई, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला।

    फसली विविधता और टिकाऊ कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। कपास की खेती में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई, 52,000 से अधिक किसानों ने बीजों पर सब्सिडी के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया। धान की सीधी बिजाई (डी.एस.आर.) तकनीक के तहत क्षेत्र में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि बासमती की खेती भी बढ़कर 6.90 लाख हेक्टेयर हो गई।

    इसके अलावा, छह जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 11,000 एकड़ क्षेत्र में धान की बजाय खरीफ की मक्की की खेती की गई, जिसमें किसानों को वित्तीय सहायता और बीजों पर सब्सिडी प्रदान की गई। कृषि मंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना है। पंजाब सरकार ने वर्ष 2026 में भी नवीनतम और टिकाऊ कृषि योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया है।

  • पंजाब के मेडिकल कॉलेजों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए मान सरकार का बड़ा निवेश

    पंजाब के मेडिकल कॉलेजों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए मान सरकार का बड़ा निवेश

    चंडीगढ़: मेडिकल कॉलेजों में लोगों को मानक उपचार एवं मेडिकल टेस्ट की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों का काया-कल्प करने के लिए 68.98 करोड़ रुपए के फंड तुरंत जारी करने के आदेश दिए हैं।

    यहां आज मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के इन मेडिकल कॉलेजों में इन सुविधाओं का विस्तार करना समय की जरूरत थी ताकि लोगों को बेहतर इलाज के साथ-साथ मेडिकल टेस्ट की सुविधा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों को अति-आधुनिक एवं विश्व स्तरीय मशीनरी से लैस करना आवश्यक है ताकि ये मरीजों को बेहतर तरीके से सेवाएं दे सकें। भगवंत सिंह मान ने मेडिकल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि इन मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए तुरंत 68.98 करोड़ रुपए जारी किए जाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 26.53 करोड़ रुपए सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर, 28.51 करोड़ रुपए सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला, 9.43 करोड़ रुपए डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एस.ए.एस. नगर (मोहाली) तथा 4.51 करोड़ रुपए पी.जी.आई. सैटेलाइट सेंटर, फिरोजपुर के लिए तुरंत दिए जाएं। उन्होंने कहा कि इन फंडों का उपयोग आधुनिक मशीनें एवं अन्य उपकरण खरीदने के साथ-साथ मेडिकल कॉलेजों में विकास कार्यों के लिए किया जाए। भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि हमारी सरकार पंजाब को विश्व भर में मेडिकल शिक्षा का गढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इससे इलाज एवं मेडिकल टेस्ट की सुविधाओं को और बल मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में यह कार्य समयबद्ध एवं उचित तरीके से पूरा किया जाए ताकि लोगों को इलाज की सुविधाएं किफायती दरों पर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि पंजाब का इतिहास रहा है कि इसने विश्व स्तरीय डॉक्टर पैदा किए हैं और आज भी राज्य में बड़ी संख्या में विद्यार्थी डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल शिक्षा ले रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों में मानक शिक्षा देना राज्य सरकार का फर्ज है ताकि मेडिकल शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों को बड़े स्तर पर लाभ मिले।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों का काया-कल्प करने का एकमात्र उद्देश्य लोगों की मानक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इन प्रमुख कॉलेजों में मानक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने से आम आदमी की भलाई सुनिश्चित होगी। भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि राज्य सरकार इस जनकल्याणकारी कार्य के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अलोक शेखर, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कुमार राहुल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत तथा अन्य उपस्थित थे।

     

  • हर छात्र को समान अवसर, मान सरकार ने शुरू किया AI-आधारित करियर गाइडेंस प्रोजेक्ट

    हर छात्र को समान अवसर, मान सरकार ने शुरू किया AI-आधारित करियर गाइडेंस प्रोजेक्ट

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों के छात्रों को समान करियर अवसर देने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। शिक्षा मंत्री  हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि राज्य की सरकारी स्कूल शिक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित करियर गाइडेंस को एकीकृत किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सरकारी और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में 25 एआई-आधारित करियर गाइडेंस लैबोरेटरीज शुरू की गई हैं। इन लैबोरेटरीज का उद्घाटन एक साथ सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नंगल और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लड़कियां), श्री आनंदपुर साहिब में किया गया।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों को सही समय पर सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य का चुनाव कर सकें। ‘बियोंड मेंटर’ के सहयोग से लागू इस कार्यक्रम में छात्रों को एआई आधारित योग्यता और रुचि आकलन से गुजरना होगा, जिसके आधार पर व्यक्तिगत करियर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद पेशेवर काउंसलर छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ वन-टू-वन सत्र कर एक व्यावहारिक करियर योजना बनाएंगे। पायलट चरण की सफलता के बाद इसे पूरे पंजाब में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि करियर गाइडेंस केवल संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस एआई-आधारित संरचित व्यवस्था के जरिए छठी कक्षा से ही छात्रों को डेटा आधारित व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलेगा। पीएसईबी चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह और छात्रों व अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम सरकारी स्कूलों के छात्रों को आत्मविश्वास के साथ अपने करियर को लेकर निर्णय लेने में मदद करेगा और पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करेगा।

     

  • बाढ़ संकट में पशुधन बचाकर मान सरकार ने संभाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था

    बाढ़ संकट में पशुधन बचाकर मान सरकार ने संभाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था

    चंडीगढ़: पंजाब के पशुपालन विभाग ने चालू वर्ष के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। बाढ़ के समय विभाग ने राज्य के 12 प्रभावित जिलों में पशुधन की सुरक्षा के लिए त्वरित और सक्रिय भूमिका निभाई। 713 गांवों में 492 रैपिड-रिस्पॉन्स वेटरनरी टीमें तैनात की गईं, 24 घंटे का इमरजेंसी ग्रिड स्थापित किया गया और 3.19 लाख से अधिक पशुओं को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी गई। इसके साथ ही बीमारियों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दिया गया ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन को सुरक्षित रखा जा सके।

    पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए उपचार के साथ-साथ रोकथाम के उपाय भी किए गए। गलघोटू रोग से बचाव के लिए 2.53 लाख से अधिक पशुओं को मुफ्त बूस्टर डोज दी गई। विभाग ने जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से पशुओं के लिए चारा, फीड, साइलेज, मिनरल मिक्सचर, डी-वर्मर और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई, वहीं पशुपालकों को जागरूक करने के लिए 1,619 जागरूकता शिविर भी लगाए गए।

    बाढ़ राहत के अलावा विभाग ने पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए। छह पशु पॉलीक्लीनिकों को आधुनिक सुविधाओं से अपग्रेड किया गया और पटियाला वेटरनरी पॉलीक्लीनिक में अत्याधुनिक डिजिटल रेडियोग्राफी प्रणाली स्थापित की गई। मंत्री ने कहा कि नस्ल सुधार, डेयरी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों से किसानों की आय बढ़ेगी और पंजाब का पशुपालन क्षेत्र भविष्य में और अधिक सशक्त होगा।

  • ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की ओर सरकार का बड़ा कदम

    ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की ओर सरकार का बड़ा कदम

    शिमला: हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में ग्रामीण आबादी की निर्णायक भूमिका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली से आगमन के उपरान्त कहा कि कृषि आज भी प्रदेश की जीवन रेखा है। राज्य की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और लगभग 53.95 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती के लिए दूरगामी और निर्णायक सुधार लागू किए गए हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था, बागवानों के हितों की रक्षा हेतु सेब के लिए यूनिवर्सल कार्टन को लागू करना, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लक्षित सब्सिडी योजनाएं तथा किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से गोबर खरीद की अभिनव पहल जैसे कदम इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इन निर्णयों का उद्देश्य ग्रामीण आबादी को अधिकतम लाभ पहुंचाना और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है।

    इसी क्रम में राज्य सरकार ने 9.61 लाख किसान परिवारों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव लाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश भर के किसानों के लिए स्थायी और सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव के दृष्टिगत प्रदेश सरकार द्वारा किसान हितैषी योजनाओं का एक व्यापक ढांचा लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में लगभग 38,437 हेक्टेयर क्षेत्र में 2,22,893 किसान और बागवान पूरी तरह या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत कम हो रही है, मिट्टी की उर्वरकता में भी सुधार हुआ है और किसानों की आय में आशातीत वृद्धि हो रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने 15 अप्रैल 2025 को चंबा जिले की जनजातीय पांगी उप-मंडल को आधिकारिक रूप से प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया है। यहां के किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ प्राकृतिक पद्धति से विभिन्न प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों की खेती कर रहे हैं, जो क्षेत्र की पर्यावरण-अनुकूल कृषि के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। हजारी सरकार ने पहले प्राकृतिक रूप से तैयार की गई मक्का और गेहूं क्रमशः 30 और 40 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य निर्धारित किया जिसे इस वर्ष से बढ़ाकर क्रमशः 40 और 60 रुपये प्रति किलो किया गया है। कच्ची हल्दी पर 90 रुपये प्रति किलो और पांगी घाटी में उगाई गई जौ पर 60 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही फलों के समर्थन मूल्य में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के बैंक खाते में सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित हो रही है। पिछले किसानों से 399 मीट्रिक टन प्राकृतिक मक्का की खरीद की गई जिसके लिए उनके बैंक खातों में 1 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। इस वर्ष 14 नवम्बर से अब तक किसानों से 161.05 क्विंटल मक्का की खरीद गई है। इसके अलावा 2,123 क्विंटल गेहूं की खरीद के लिए 1.32 करोड़ रुपये और छह जिलों में 127 क्विंटल कच्ची हल्दी के लिए 11.44 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

    बाजार से पहचान मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती के उत्पादों को एक विशेष ब्रांड के तहत लॉन्च किया गया है। मक्का का आटा ‘हिम भोग हिम मक्की’, गेहूं के उत्पाद ‘हिम चक्की आटा’ और ‘हिम दलिया’, तथा कच्ची हल्दी ‘हिम हल्दी’ के नाम से बेचे जा रहे हैं, जिससे हिमाचली उत्पादों को बेहतर बाजार पहुंच और पहचान मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार प्राकृतिक खेती के आदान तैयार करने के लिए प्रति ड्रम 750 रुपये की सब्सिडी दे रही है, जिसमें प्रति परिवार अधिकतम तीन ड्रम शामिल हैं। इसके अलावा गोशालाओं के सुधार के लिए प्रति किसान 8,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। देशी नस्ल की गाय खरीदने के लिए 25,000 रुपये तक की सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है।

    सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिम उन्नति (हिम कृषि योजना) के अंतर्गत क्ल्स्टर आधार पर कृषि और कृषि से संबंधित गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया है और प्रदेश में 2600 क्ल्स्टर अंकित किए जा रहे है। इसके अंतर्गत चंबा, लाहौल-स्पिति और किन्नौर जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्दी तथा कुछ क्षेत्रों में केसर की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के इन प्रयासों से राज्य आत्मनिर्भर और सबसे समृद्ध राज्य बनने की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ देश का पहला प्राकृतिक राज्य बन कर उभरेगा।

  • पंजाब में महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम

    पंजाब में महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब सरकार द्वारा विधवा और आश्रित महिलाओं को अब तक 895 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी।

    इस संबंध में और जानकारी देते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक राज्य की 6 लाख 75 हजार 857 पात्र लाभार्थी महिलाओं को यह वित्तीय सहायता नियमित रूप से प्रदान की जा रही है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक सहारा मिल रहा है।

    डॉ. बलजीत कौर ने जोर देकर कहा कि यह योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि विधवा और आश्रित महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा, आत्मसम्मान और आर्थिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त कदम है, ताकि वे अपने और अपने परिवारों के भविष्य को सुरक्षित कर सकें।

    कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि विधवा और आश्रित महिलाओं को वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा इस मद के अंतर्गत 1170 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिसका लाभ पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।

  • योजना बोर्ड के वाइस चेयरपर्सन ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, नई जिम्मेदारी के लिए जताया आभार

    योजना बोर्ड के वाइस चेयरपर्सन ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, नई जिम्मेदारी के लिए जताया आभार

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड के नव-नियुक्त वाइस चेयरमैन गुलज़ार इंदर सिंह चाहल को राज्य की तरक्की और खुशहाली के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा ताकि लोगों की भलाई को अधिक से अधिक सुनिश्चित किया जा सके। इस मौके पर वाइस चेयरपर्सन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नई जिम्मेदारी सौंपने के लिए धन्यवाद किया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की तरक्की के लिए योजनाबंदी बनाने, विभिन्न सेक्टरों के विकास के लिए योजनाएं तैयार करने समेत अन्य रणनीतियां तैयार करने में आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड द्वारा राज्य सरकार को सहयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले से ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और आम लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाएं तैयार कर रही है जिसके लिए बोर्ड को सहयोग करते रहना चाहिए।

  • केंद्र की नई VB-G RAM G योजना पर सीएम मान की चेतावनी: पंजाब विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर आवाज उठाएंगे

    केंद्र की नई VB-G RAM G योजना पर सीएम मान की चेतावनी: पंजाब विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर आवाज उठाएंगे

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को बदलकर VB-G RAM G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) लाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला बताया और कहा कि बीजेपी सरकार महात्मा गांधी का नाम हटाने के साथ-साथ योजना की मूल भावना को खत्म करने पर लगी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा, जिसमें पंजाबियों की आवाज़ को केंद्र तक पहुंचाया जाएगा।

    लोकसभा में इस नए विधेयक को पारित कर दिया गया है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 125 दिन का रोजगार गारंटी देने का प्रावधान है। हालांकि, विपक्ष और आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित है। योजना का वित्त पोषण अब राज्यों और केंद्र के बीच 60:40 के अनुपात में होगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों जैसे पंजाब के लिए यह बड़ी चुनौती बन सकती है। इसके अलावा, “नॉर्मेटिव फंडिंग”, “नो वर्क पीरियड” और बेरोज़गारी भत्ते जैसे बदलाव अधिकार आधारित योजना को विवेकाधीन बना सकते हैं।

    इस फैसले के खिलाफ पूरे पंजाब में विरोध शुरू हो गया है। किसान मजदूर यूनियन और विपक्षी दलों ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के पुतले फूंके। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब की सरकार गरीबों के अधिकारों के लिए लड़ेगी और सुनिश्चित करेगी कि ग्रामीण मजदूरों को उनकी मजदूरी और रोजगार की गारंटी मिले। उनका जोर है कि नाम बदलना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि असली काम यह है कि गरीबों की आजीविका सुरक्षित रहे।

  • वादों पर अमल: मान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 4683.94 करोड़ रुपये खर्च किए

    वादों पर अमल: मान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 4683.94 करोड़ रुपये खर्च किए

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए लगातार जनहितैषी नीतियां लागू कर रही है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 6175 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें से नवंबर 2025 तक 4683.94 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। वर्तमान में 35.29 लाख से अधिक लाभार्थियों को नियमित वित्तीय सहायता मिल रही है।

    डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार बाल भिक्षावृत्ति और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। प्रोजेक्ट जीवनजोत के तहत अब तक 766 बच्चों को भीख मांगने से रेस्क्यू कर शिक्षा और पुनर्वास से जोड़ा गया है, जबकि वर्ष 2025 में 64 बाल विवाह समय रहते रोके गए। बच्चों की सुरक्षा के लिए सेफ स्कूल वाहन नीति के तहत 2385 स्कूली बसों की जांच की गई, जिनमें नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर कार्रवाई की गई।

    उन्होंने बताया कि महिलाओं और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। महिलाओं को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा, दिव्यांगजनों को रियायती किराया, हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर और आंगनवाड़ी केंद्रों से सेनेटरी पैड वितरण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।