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  • एएनएम और स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का बड़ा ऐलान

    एएनएम और स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का बड़ा ऐलान

    चंडीगढ़: पंजाब के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत एएनएम और स्टाफ नर्सों के 1,568 रिक्त पदों को भरने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के तहत 729 एएनएम और 839 स्टाफ नर्सों की भर्ती की जाएगी, ताकि स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बाधा न आए।

    वित्त मंत्री ने बताया कि इन ठेका-आधारित भर्तियों पर सालाना करीब 48.88 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसमें एएनएम पदों पर 18.98 करोड़ रुपये और स्टाफ नर्सों पर 29.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तय वेतन के अनुसार एएनएम को 21,700 रुपये और स्टाफ नर्सों को 29,700 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा लिखित परीक्षा करवाई जाएगी।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत बनाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। इन पदों को भरने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और सशक्त होंगी तथा लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा, जो सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • पानी की समस्या पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा आईआईटी रोपड़, पंजाब सरकार ने दी मंजूरी

    पानी की समस्या पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा आईआईटी रोपड़, पंजाब सरकार ने दी मंजूरी

    चंडीगढ़: पंजाब के पानी की समस्याओं को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां जल संसाधनों और सीपेज के पैटर्नों के बारे में 1.61 करोड़ रुपये के सूक्ष्म-स्तरीय अध्ययन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी की घोषणा की। यह अध्ययन, जो पंजाब राज्य किसान एवं खेत मजदूर कमीशन (पी.एस.एफ.एफ.डब्ल्यू.सी) द्वारा आई.आई.टी रोपड़ के सहयोग से किया जाएगा, प्रदेश के भूगर्भ जल स्तरों के प्रबंधन के लिए प्रभावी समाधान विकसित करने में सहायता करेगा।

    इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एक कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, पंजाब को पानी की उपलब्धता और इसके टिकाऊ उपयोग से संबंधित गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट प्रदेश के कृषि युग के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि पी.एस.एफ.एफ.डब्ल्यू.सी द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एन.आई.एच), रुड़की के सहयोग से किए गए प्रारंभिक मैक्रो-स्तरीय अध्ययन को कृषि सुधारों पर पंजाब विधान सभा कमेटी द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बाद एक और अधिक विस्तृत सूक्ष्म-स्तरीय अध्ययन का निर्णय लिया गया।

    इस अध्ययन की वैज्ञानिक गहराई के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सूक्ष्म-स्तरीय अध्ययन में कार्बन डेटिंग और भूगर्भ तथा पानी के भंडारों के आइसोटोप विश्लेषण के साथ-साथ प्रदेश भर में सीपेज के नमूनों की व्यापक जांच सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस अध्ययन के उद्देश्यों में कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं, जिनमें हर प्रकार के उपलब्ध जल संसाधनों का ब्यौरा, नीतिगत निर्णयों के लिए एक्विफरों की विशेषता बताना, हेलीकॉप्टर के माध्यम से आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर जल संसाधनों का सर्वेक्षण, वैकल्पिक जल संसाधनों की खोज करना, और सीपेज दरों को निर्धारित करने के लिए सूक्ष्म-स्तरीय अध्ययन करना शामिल है।

    अध्ययन के लिए मंजूर वित्तीय आवंटन के बारे में विवरण प्रदान करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को कुल 221.65 लाख रुपये के खर्च से फंड किया जाएगा। इस राशि में से, आई.आई.टी रोपड़ अपने संसाधनों से 60.00 लाख रुपये का योगदान देगा, जबकि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब राज्य किसान एवं खेत मजदूर कमीशन को 161.00 लाख रुपये का फंड उपलब्ध कराया जाएगा। फंडिंग के बदले आई.आई.टी. रोपड़ व्यापक तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, जिसमें डिजाइन और कार्यान्वयन विशेषज्ञता, फील्ड जांच, नमूने एकत्र करना, पोर्टेबल उपकरण लगाना, बुनियादी ढांचा और प्रयोगशाला सुविधाएं, तथा तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण पहल शामिल हैं।

    इस अध्ययन में पांच विस्तृत चरण शामिल हैं, जो आवश्यक फंड प्राप्त होने के 12 महीनों के अंदर पूरा होने के लिए निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में सैंपलिंग साइटों का पता लगाने के लिए एक फील्ड सर्वेक्षण किया जाएगा, दूसरे चरण के दौरान प्रदेश के एक्विफर सिस्टमों का एक हाइड्रोजियोलॉजिकल फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा, तीसरे चरण में प्रदूषण स्तरों का मूल्यांकन करने और स्रोत क्षेत्रों की पहचान करने के लिए हाइड्रो-केमिकल विशेषता और आइसोटोपिक विश्लेषण शामिल होगा, चौथे चरण में नहरी नेटवर्क के विस्तार के लिए क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, और पांचवें चरण में प्रबंधन उपायों के लिए सिफारिशें प्रदान की जाएंगी।

    वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आई.आई.टी. रोपड़ के साथ सहयोग प्रदेश सरकार की विज्ञान-आधारित नीति-निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार प्रदेश के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए टिकाऊ और स्थायी समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

  • AAP सांसद की PM को सिफारिश, वीर बाल दिवस के स्थान पर ‘साहिबजादे शहादत दिवस’ मनाने की मांग

    AAP सांसद की PM को सिफारिश, वीर बाल दिवस के स्थान पर ‘साहिबजादे शहादत दिवस’ मनाने की मांग

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने केंद्र की भाजपा सरकार को सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करने के लिए कड़ा नोटिस दिया है। सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ‘वीर बाल दिवस’ का नाम बदलकर ‘साहिबज़ादे शहादत दिवस’ करने की मांग की। पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार पंजाब के गौरवशाली इतिहास और सिख धर्म के सम्मान को उचित महत्व नहीं दे रही है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि वह पंजाब की अस्मिता और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर लड़ने को तैयार है।

    सांसद सीचेवाल ने पत्र में कहा कि चार साहिबज़ादों की शहादत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस दिवस का नाम ‘साहिबज़ादे शहादत दिवस’ होना चाहिए, ताकि शहादत की सालगिरह पर पूरे सिख समुदाय के बलिदान का सही सम्मान हो। पंजाब सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखें और पंजाब व सिख संगठनों की याचिकाओं पर गंभीरता से विचार करें।

    पिछले दो वर्षों में पंजाब सरकार ने सिख धर्म और पंजाबी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। इसमें गुरुद्वारों के विकास, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जैसी पहल शामिल हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार ने मुफ्त बिजली, बेहतर शिक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के माध्यम से जनता में विश्वास पैदा किया है।

    जनता ने भी सरकार के इस रुख का समर्थन किया है। अमृतसर के जसविंदर सिंह ने कहा कि यह पहली बार है जब सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान कर रही है, जबकि पहले की सरकारें केवल वोट के लिए काम करती थीं। लुधियाना की शिक्षक सिमरनजीत कौर ने कहा कि यह सिर्फ नाम का मामला नहीं है, बल्कि पंजाब की पहचान का सवाल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केंद्र और पंजाब के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है, जबकि AAP की सख्त स्थिति जनता में विश्वास बढ़ा रही है और आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।

       
  • मान सरकार का ऐतिहासिक निर्णय, मरीजों के हित में प्राइवेट अस्पतालों को दी चेतावनी

    मान सरकार का ऐतिहासिक निर्णय, मरीजों के हित में प्राइवेट अस्पतालों को दी चेतावनी

    चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार ने पंजाब के निजी अस्पतालों के लिए सख्त और जनहितकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों का उद्देश्य मरीजों के अधिकारों को मजबूत करना और स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय प्रथाओं को सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों में मॉर्च्यूरी की सुविधा अनिवार्य कर दी है ताकि शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से रखा जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पतालों को मृतक का शव परिवार को सौंपना होगा, भले ही बकाया बिल न चुकाया गया हो।

    सरकार ने निजी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने वाले नोटिस बोर्ड लगाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई है, जिससे भी मृतकों को सम्मानजनक विदाई मिले। अनुपालन की निगरानी के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की जाएगी और नियमों का पालन न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि करुणा, गरिमा और पारदर्शिता स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र में होनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि आम आदमी पार्टी की सरकार मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी बिना भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह कदम मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा और स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। पंजाब में यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पूरे देश के लिए भी उदाहरण बन सकती है।

     

     

  • पंजाब सरकार ने उद्योगपतियों को दिया ‘सेकंड चांस’, PSIEC की OTS योजना 31 दिसंबर 2025 तक लागू

    पंजाब सरकार ने उद्योगपतियों को दिया ‘सेकंड चांस’, PSIEC की OTS योजना 31 दिसंबर 2025 तक लागू

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उद्योगपतियों को एक अभूतपूर्व राहत देते हुए ऐतिहासिक वन टाइम सेटलमेंट योजना की शुरुआत की है। यह योजना उन 1,145 औद्योगिक प्लॉट धारकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जो पिछले चालीस से अधिक वर्षों से बढ़ी हुई जमीन की लागत और मूल राशि के भुगतान में डिफॉल्ट होने के कारण कानूनी और वित्तीय परेशानियों का सामना कर रहे थे। पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) की यह योजना 31 दिसंबर 2025 तक खुली है और इससे उद्योगपतियों को कुल 410 करोड़ रुपये की राहत मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल पुराने विवादों को सुलझाने में मदद करेगी, बल्कि पंजाब में औद्योगिक विकास को भी गति देगी और हजारों रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

    उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 3 मार्च 2025 को मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी मिलने के मात्र 10 दिनों के भीतर नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया, जो सरकार की त्वरित कार्यशैली को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह योजना उन औद्योगिक इकाइयों के लिए एक नया जीवन है जो दशकों से वित्तीय बोझ तले दबी हुई थीं। मान सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह उद्योग-समर्थक सरकार है।” योजना के तहत डिफॉल्टर प्लॉट धारकों को केवल 8 प्रतिशत साधारण ब्याज पर अपनी बकाया राशि का भुगतान करना होगा और 100 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज माफ कर दिया जाएगा। यह छूट उन उद्योगपतियों के लिए भी लागू है जिनके प्लॉट पहले ही रद्द हो चुके हैं।

    इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिन उद्योगपतियों के आवंटन रद्द हो चुके हैं, वे भी अपनी बकाया राशि का भुगतान करके अपने प्लॉट वापस पा सकते हैं। यह ‘सेकंड चांस’ की संकल्पना उन सैकड़ों छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है जिन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी औद्योगिक इकाइयां खो दी थीं। योजना 1 जनवरी 2020 से पहले आवंटित सभी औद्योगिक प्लॉट, शेड और आवासीय प्लॉट पर लागू होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह योजना बढ़ी हुई भूमि लागत और विलंबित मूल भुगतान से संबंधित औद्योगिक विवादों को निपटाने की सुविधा प्रदान करेगी। PSIEC द्वारा विकसित औद्योगिक फोकल पॉइंट्स में स्थित सभी संपत्तियां इस योजना के दायरे में आएंगी।

    लुधियाना से राज्यसभा सांसद और पश्चिम लुधियाना से विधायक संजीव अरोड़ा ने इस योजना को एक “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि वह लंबे समय से इस मुद्दे को सरकार के साथ उठाते रहे हैं। उन्होंने कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की और उद्योगपतियों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं के बारे में जानकारी दी। अरोड़ा ने कहा, “यह योजना केवल वित्तीय राहत नहीं है, बल्कि उद्योगपतियों के भरोसे को बहाल करने का माध्यम है। जो लोग दशकों से अनिश्चितता में जी रहे थे, अब वे आत्मविश्वास से अपने व्यवसाय को पुनर्जीवित कर सकते हैं।” उन्होंने बताया कि लुधियाना में सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां इस समस्या से प्रभावित थीं और अब उन्हें नई उम्मीद मिली है।

    पंजाब के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से मिली प्रतिक्रियाएं बेहद सकारात्मक हैं। जालंधर के एक छोटे उद्योगपति रविंदर सिंह ने बताया, “2018 में मुझे एक प्लॉट आवंटित हुआ था, लेकिन व्यवसाय में आई कठिनाइयों के कारण मैं बढ़ी हुई लागत का भुगतान नहीं कर सका। मेरा प्लॉट रद्द हो गया और मैंने सोचा कि सब कुछ खत्म हो गया। अब इस योजना ने मुझे फिर से खड़े होने का मौका दिया है।” इसी तरह मोहाली के औद्योगिक क्षेत्र से हरदीप कौर ने कहा, “हम पिछले पांच वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे और भारी वकीलों की फीस चुका रहे थे। यह योजना हमारे लिए राहत की सांस है। अब हम अपना पूरा ध्यान व्यवसाय विस्तार पर लगा सकते हैं।” उद्योग संघों ने भी इस पहल की सराहना की है और अधिक से अधिक सदस्यों को योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

    इस योजना का आर्थिक प्रभाव व्यापक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 1,145 उद्योगपतियों को राहत मिलने से न केवल उनके व्यवसाय स्थिर होंगे, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। ये उद्योगपति सामूहिक रूप से हजारों लोगों को रोजगार देते हैं। PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह योजना पंजाब को एक उद्योग-अनुकूल राज्य के रूप में स्थापित करेगी और नए निवेश को आकर्षित करेगी। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, इस योजना से राज्य की GDP में भी वृद्धि होगी क्योंकि बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयां फिर से शुरू होंगी। PSIEC को भी लंबे समय से लंबित बकाया राशि मिलने से उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वह नई औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश कर सकेगा।

    पंजाब सरकार ने योजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। PSIEC द्वारा एक विशेष वर्चुअल हेल्प डेस्क स्थापित की गई है जहां उद्योग प्रवर्तक योजना का लाभ उठाने के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह हेल्प डेस्क आवेदकों के लिए एक सुगम और परेशानी मुक्त प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी। PSIEC के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत केवल प्लॉट की मूल लागत और बढ़ी हुई भूमि लागत पर ही OTS लागू होगी। मूल राशि किसी भी तरह से माफ नहीं की जाएगी, लेकिन 100 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज की छूट और केवल 8 प्रतिशत साधारण ब्याज का प्रावधान उद्योगपतियों के लिए बड़ी राहत है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि डिफॉल्टर इस योजना के तहत भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो बकाया राशि उनके संबंधित आवंटन की शर्तों के अनुसार वसूल की जाएगी।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था, जो सरकार की उद्योग-केंद्रित नीतियों का प्रमाण है। मान सरकार ने अपने कार्यकाल में कई उद्योग-समर्थक पहल की हैं, जिनमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और निवेशक अनुकूल नीतियां शामिल हैं। इस OTS योजना को भी उसी शृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने कहा, “यह पहल पंजाब में औद्योगिक विकास को गति देगी, राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी और व्यवसायों तथा रोजगार सृजन के समर्थन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी।” यह योजना पंजाब को उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    31 दिसंबर 2025 की अंतिम तिथि को ध्यान में रखते हुए, उद्योगपतियों से अपील की जाती है कि वे जल्द से जल्द इस योजना का लाभ उठाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना न केवल मौजूदा समस्याओं का समाधान है, बल्कि यह भविष्य में बेहतर औद्योगिक माहौल की नींव भी रखती है। सोशल मीडिया पर भी उद्योगपतियों और व्यापारियों ने इस योजना की खूब सराहना की है। कई लोग इसे “मान सरकार का उद्योगों के लिए दिवाली गिफ्ट” बता रहे हैं। राज्य भर में उद्योग संघ अपने सदस्यों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित कर रहे हैं। PSIEC के कार्यालयों में पूछताछ करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो योजना की लोकप्रियता को दर्शाता है।

    पंजाब सरकार की यह पहल यह संदेश देती है कि जब सरकार उद्योग-अनुकूल होती है तो न केवल व्यवसायों को फायदा होता है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को लाभ मिलता है। औद्योगिक इकाइयों के पुनर्जीवित होने से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और पंजाब की समग्र विकास दर में सुधार होगा। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए आशा की किरण है जो इन औद्योगिक इकाइयों पर निर्भर हैं। अब जिम्मेदारी उद्योगपतियों की है कि वे समय रहते इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों को सुलझाकर पंजाब के औद्योगिक विकास में अपना योगदान दें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना की सफलता अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

  • मान सरकार का कदम: शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, मिशन रोजगार को मिलेगा बल

    मान सरकार का कदम: शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, मिशन रोजगार को मिलेगा बल

    चंड़ीगढ़ : पंजाब की आप सरकार छात्रों का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए पंजाब युवा उद्योग योजना ला रही है। इस योजना के तहत, सरकारी स्कूलों के 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को व्यवसाय और मार्केटिंग में कौशल शिक्षा प्रदान की जाएगी। मान सरकार ने शिक्षा के पारंपरिक ढांचे से हटकर कौशल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना है। सरकार का यह नज़रिया राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा। इस योजना के तहत, छात्र न केवल वित्तीय साक्षरता और स्वतंत्रता प्राप्त करेंगे, बल्कि मार्केटिंग और उद्यमिता की मूल बातें भी सीखेंगे। यह एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है, जो प्रत्येक छात्र को सक्षमता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सक्षम और सशक्त बनाएगा। आधुनिक तकनीक का समावेश कर सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कौशल प्रशिक्षण नई तकनीकों और उद्योगकी जरूरतों के अनुसार हो।

    यह एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है, जो प्रत्येक छात्र को क्षमता और आत्मविश्वास केसशक्त और सक्षम बनाएगा। अब छात्रों को नौकरी चाहने वालों की बजाय नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजना के तहत, पंजाब सरकार सभी प्रगतिशील सोच वाले छात्रों को हर तरह की सहायता के साथ-साथ वित्तीय और तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी| पंजाब के लोगो ने मान सरकार पर जो विश्वास दिखाया उस पर मान सरकार पूरी तरह से खरी उतरी है। पंजाब के लोगो का मान सरकार पर भरोसा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।

    पंजाब युवा उद्योग योजना विद्यार्थियों के सुनहेरी भविष्य के साथ साथ पंजाब के लिए भी एक नए युग की शुरुआत होगी। शिक्षा क्रांति में पंजाब युवा उद्योग योजना एक मील पत्थर साबित होगी। आप सरकार का उद्देश्य न केवल छात्रों को डिग्री या डिप्लोमा पास कराना है, बल्कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कमाई का हुनर भी सिखाना है। मान सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ इस पहल की ही आधारशिला हैं। इन स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के कौशल को निखारा जाता है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे जेईई, नीट और सिविल सेवाओं की मुफ्त तैयारी भी करवाई जाएगी, जो पंजाब के युवाओ के उज्जवल भविष्य के लिए सफल सिद्ध होगी |

    अप्रैल 2025 में, मुख्यमंत्री मान ने लुधियाना में ‘विश्व कौशल उत्कृष्टता परिसर’ का उद्घाटन किया। इसमें एक अत्याधुनिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और बहु-कौशल विकास केंद्र (एमएसडीसी) शामिल हैं। यह परिसर प्रतिवर्ष 3,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण देने में सक्षम है। मान सरकार ने पंजाब के आईटीआई संस्थानों में नई जान फूंकी है। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण के कारण इन संस्थानों में दाखिलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो पहले 50-60% थी, वह अब 97% तक पहुंच गई है। सरकार युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए भी कौशल विकास का उपयोग कर रही है। जुलाई 2025 में, नशे के दुष्प्रभावों के बारे में छात्रों को जागरूक करने के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया गया। यह कार्यक्रम 8 लाख से अधिक छात्रों तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है और उन्हें नशे से दूर रहने के लिए सशक्त बनाता है। ‘पंजाब कौशल विकास मिशन’ से मान सरकार पंजाब के युवाओं को नशे जैसी महामारी से भी बचा रही है , जिससे विकासशील पंजाब का निर्माण किया जाए।

    मान सरकार द्वारा कौशल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना, पंजाब के युवाओं के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है। ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ से लेकर आधुनिक आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों तक, ये पहल युवाओं को न केवल शिक्षित कर रही हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना रही हैं। यह दृष्टिकोण पंजाब को एक ऐसे राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है जहां शिक्षा का सीधा संबंध रोजगार और समृद्धि से है और ये सब मान सरकार के अधीन संभव हो रहा है ,बहुत सालो बाद पंजाब के शिक्षा क्षेत्र मे नए युग का आरम्भ हुआ है |

  • मुख्यमंत्री मान का ज्ञान क्रांति अभियान: 275 नई लाइब्रेरियां बनकर तैयार

    मुख्यमंत्री मान का ज्ञान क्रांति अभियान: 275 नई लाइब्रेरियां बनकर तैयार

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में 275 अत्याधुनिक पुस्तकालय स्थापित कर दिए है, जबकि 58 और पुस्तकालयों पर काम जारी है । अबोहर में स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर पब्लिक लाइब्रेरी (आभा लाइब्रेरी) इस शृंखला की एक शानदार कड़ी है, जिसकी भव्यता देखकर लोग इसे किसी पंचसितारा होटल से तुलना कर रहे है। यह महज़ एक पुस्तकालय नहीं बल्कि मान सरकार की दूरदर्शिता और युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग आश्चर्य जता रहे है कि यह कोई लग्ज़री होटल नहीं बल्कि सरकारी पुस्तकालय है, जो आम छात्रों के लिए बनाया गया है।

    15 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री ने खन्ना के इस्रू गांव से ग्रामीण पुस्तकालय योजना की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक यह योजना पूरे पंजाब में एक मूक क्रांति का रूप ले चुकी है। अमृतसर ज़िले में 4, बठिंडा में 29, फतेहगढ़ साहिब में 10, फाजिल्का में 21, लुधियाना में 15 और पटियाला में 18 पुस्तकालय पहले ही चालू हो चुके हैं । प्रत्येक पुस्तकालय का निर्माण लगभग 30 से 35 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है, जबकि जिला स्तरीय पुस्तकालयों पर एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो रहा है। यह निवेश दर्शाता है कि मान सरकार शिक्षा और युवा विकास को कितनी गंभीरता से ले रही है।

    अबोहर की आभा लाइब्रेरी की बात करें तो इसकी वास्तुकला और डिजाइन किसी भी आधुनिक कॉर्पोरेट कार्यालय या लग्जरी होटल को टक्कर देती है। इन पुस्तकालयों में वाई-फाई कनेक्टिविटी, सोलर पावर, डिजिटल एनालॉग और अन्य उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं । प्रत्येक पुस्तकालय में वातानुकूलित पठन कक्ष, आरओ वाटर सप्लाई, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, कंप्यूटर सेक्शन और इन्वर्टर की सुविधा दी गई है। इन पुस्तकालयों में समकालीन साहित्य और पाठ्यक्रम की किताबों का समृद्ध संग्रह है । प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और अन्य परीक्षाओं से संबंधित हजारों पुस्तकें उपलब्ध है। कुछ पुस्तकालयों में तो 65,000 से अधिक पुस्तकें है और नियमित रूप से नई पुस्तकें जोड़ी जा रही हैं।

    बरनाला में आठ पुस्तकालयों का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा था कि ये पुस्तकालय छात्रों में नई आशा जगा रहे है। दूरदराज के गांवों के छात्र अब अपने ही गांव में रहकर दुनिया भर के ज्ञान तक पहुंच सकते है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि ये पुस्तकालय युवाओं की किस्मत बदलने में मदद करेंगे और वैज्ञानिक, डॉक्टर और तकनीशियन पैदा करेंगे । संगरूर ज़िले में 12 पुस्तकालयों का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने स्कूली छात्रों से बातचीत की और पुस्तकालय संसाधनों के उपयोग के लाभों पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से पुस्तकालयों की सक्रिय रूप से देखभाल करने का आग्रह किया ताकि सीखने के लिए अनुकूल वातावरण बना रहे।

    इन पुस्तकालयों की विशेषता यह है कि इन्हें सप्ताह के सातों दिन सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक खुला रखा जाता है। कई ज़िला स्तरीय पुस्तकालयों में 24×7 अध्ययन कक्ष की सुविधा भी दी गई है। धुरी में एक पुस्तकालय का निर्माण 1.59 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, जो दो मंजिला इमारत है और इसका कवर्ड क्षेत्र 3,710 वर्ग फुट है । कुछ पुस्तकालयों में तो कैंटीन की सुविधा भी है जहां छाय, कॉफी और स्नैक्स उपलब्ध है। पार्किंग की व्यवस्था, हरित क्षेत्र और आधुनिक लैंडस्केपिंग इन पुस्तकालयों को एक संपूर्ण शैक्षणिक परिसर का रूप देती है। महिलाओं के लिए अलग से सुरक्षित और आरामदायक अध्ययन व्यवस्था की गई है।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये पुस्तकालय वरदान साबित हो रहे हैं। पहले छात्रों को चंडीगढ़, मोहाली या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाकर महंगी लाइब्रेरी की सदस्यता लेनी पड़ती थी, जिसमें हजारों रुपये खर्च होते थे। लड्डा गांव के एक छात्र जगदीप सिंह कहते हैं कि वे रोज पुस्तकालय आते हैं और यहां का माहौल बेहद साफ-सुथरा और अध्ययन के लिए उपयुक्त है। UPSC की तैयारी कर रहे एक अन्य छात्र का कहना है कि यहां पुस्तकों का संग्रह बेहद अच्छा है। अबोहर, फाजिल्का, बठिंडा और अन्य सीमावर्ती जिलों के छात्र विशेष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में पहले कभी इस तरह की सुविधाएं नहीं थीं।

    मान सरकार ने केवल नए पुस्तकालय ही नहीं बनाए बल्कि पुराने पुस्तकालयों का भी जीर्णोद्धार किया है। सांगरूर जिला पुस्तकालय का नवीनीकरण लगभग 1.12 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, जिसमें अब 250 छात्रों के बैठने की व्यवस्था है । धुरी और अबोहर जैसे शहरों में औपनिवेशिक काल से चले आ रहे पुराने पुस्तकालयों को भी आधुनिक बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य भर के पुस्तकालयों को इसी मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा। ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सोंद ने बताया कि यह परिवर्तनकारी कदम ग्रामीण समुदायों को ज्ञान, शिक्षा और सशक्तिकरण के माध्यम से उन्नत बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    इन पुस्तकालयों का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता से युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियां भी बड़ी संख्या में पुस्तकालयों में आकर अध्ययन कर रही हैं। डॉ. अम्बेडकर के नाम पर अबोहर की लाइब्रेरी का नामकरण भी सामाजिक न्याय और समानता का संदेश देता है। दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के छात्रों को अब वह सब कुछ मिल रहा है जो पहले केवल अमीरों की पहुंच में था। यह योजना वास्तव में समावेशी विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्रामीण युवा अब महसूस कर रहे है कि सरकार उनके भविष्य के बारे में गंभीर है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई मौकों पर कहा है कि पिछली सरकारें भ्रष्टाचार में डूबी थी और मंत्रियों ने जनता के पैसे लूटे। उन्होंने कहा कि अब राज्य के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन है और वे यह सुनिश्चित कर रहे है कि जनता का पैसा जनता की भलाई में ही खर्च हो। पुस्तकालय योजना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। जालंधर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि जनता ने उनके काम को सराहा है और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश ही राज्य का असली विकास है। उन्होंने एक युवा आईपीएस अधिकारी रॉबिन को मंच पर बुलाकर छात्रों को प्रेरित भी किया कि शिक्षा सभी सामाजिक बुराइयों का समाधान है।

    पंजाब की यह पुस्तकालय क्रांति देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। जब सरकारें जनता के पैसे को सही जगह निवेश करती हैं तो सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। अबोहर की आभा लाइब्रेरी और राज्य भर में फैली 275 से अधिक लाइब्रेरियां यह साबित करती है कि पंजाब सरकार केवल वादे नहीं करती बल्कि उन्हें पूरा भी करती है। आने वाले वर्षों में ये पुस्तकालय सैकड़ों सफल अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक तैयार करेंगे जो न केवल अपने बल्कि पूरे पंजाब और देश के विकास में योगदान देंगे। मान सरकार का यह निवेश वास्तव में पंजाब के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है।

  • नौजवानों को खेलों से जोड़ रही मान सरकार, 3000 खेल मैदानों का वादा हो रहा साकार, देखें वीडियो

    नौजवानों को खेलों से जोड़ रही मान सरकार, 3000 खेल मैदानों का वादा हो रहा साकार, देखें वीडियो

    चंडीगढ़: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने विकास की एक नई इबारत लिखना शुरू कर दिया है। राज्य भर में 3000 स्टेडियम और खेल के मैदान बनाने की महत्वाकांक्षी योजना अब धरातल पर दिखने लगी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केवल एक हलके ‘जीरा’ में ही 15-16 खेल के मैदान एक साथ बनाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्थानीय लोग इस अभूतपूर्व विकास कार्य की जानकारी दे रहे हैं और मान सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे है। यह पहल साबित करती है कि भगवंत मान की सरकार अपने हर वादे को न केवल पूरा कर रही है, बल्कि उम्मीदों से कहीं आगे जा रही है।

    जीरा हलके से सामने आए वीडियो में एक स्थानीय व्यक्ति बता रहे हैं कि उनके क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार मजदूर और मशीनें काम में जुटी हुई है। 15-16 गांवों में एक साथ खेल के मैदानों का निर्माण चल रहा है और यह काम बिना किसी रुकावट के जारी है। उन्होंने कहा कि दशकों से गांवों में इस तरह का विकास कार्य कभी नहीं देखा गया। मान सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी ईमानदारी और तेजी से पूरा किया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे निर्माण स्थल पर जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर और दर्जनों मजदूर एक साथ काम करते हुए नज़र आ रहे है।

    मान सरकार की इस पहल को ‘विकास का नया मॉडल’ करार दिया जा रहा है। पहले की सरकारों में एक-दो मैदान बनाने में भी सालों लग जाते थे, लेकिन मान सरकार ने एक ही हलके में 15-16 मैदानों का निर्माण एक साथ शुरू करके यह साबित कर दिया है कि जब इच्छाशक्ति और ईमानदारी हो तो विकास की रफ्तार कितनी तेज हो सकती है। यह केवल खेल के मैदान नहीं बल्कि पंजाब के युवाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान का विजन स्पष्ट है – हर गांव, हर युवा को बराबर का मौका मिले।

    जीरा हलके के ग्रामीणों का कहना है कि पिछली सरकारों में विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित रहते थे। फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रहती थीं और जमीन पर कुछ नहीं होता था। लेकिन मान सरकार ने सत्ता में आते ही काम करके दिखाना शुरू कर दिया। एक स्थानीय युवक ने अपने वीडियो में भावुक होते हुए कहा, “हमने कभी सोचा नहीं था कि हमारे गांव में भी पक्का खेल का मैदान बनेगा। मान साहब ने हमारे सपनों को पंख दे दिए हैं।” यह जनभावना सरकार की मेहनत और समर्पण का प्रतिबिंब है।

    निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रतिदिन निगरानी की जा रही है और समय सीमा के भीतर काम पूरा करना सुनिश्चित किया जा रहा है। जीरा हलके में मजदूरों की नियमित उपस्थिति यह दर्शाती है कि परियोजना को गंभीरता से लिया जा रहा है। खेल विभाग के अधिकारी नियमित रूप से साइट विजिट कर रहे हैं और निर्माण की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रहे है।

    मान सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण युवाओं को मिलने वाला है। पंजाब जैसे खेल प्रेमी राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में कई युवा अपनी क्षमता को निखार नहीं पाते। अब जब हर गांव में खेल के मैदान होंगे तो युवाओं को अपने गांव में ही प्रशिक्षण लेने का मौका मिलेगा। यह न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा देगा बल्कि युवाओं को नशे और अपराध जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पंजाब के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को बदल देगा।

    आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से हजारों मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। जीरा हलके में ही दर्जनों मजदूर परिवार इस काम से जुड़े हुए हैं और उन्हें नियमित आय मिल रही है। स्थानीय ठेकेदारों और छोटे व्यवसायियों को भी इससे फायदा हो रहा है। मान सरकार की यह नीति केवल युवाओं के भविष्य में निवेश नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम भी है। यह समावेशी विकास का बेहतरीन उदाहरण है।

    सोशल मीडिया पर जीरा हलके के वीडियो वायरल होने के बाद पंजाब के अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी ही तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। लोग अपने-अपने गांवों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी साझा कर रहे हैं और मान सरकार को बधाई दे रहे हैं। यह जन भागीदारी और सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि जनता अपनी सरकार के प्रति आश्वस्त है। एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “मान सरकार ने राजनीति में विश्वास बहाल किया है। लोग अब मानने लगे हैं कि चुनावी वादे सच हो सकते है।”

    पंजाब की राजनीतिक जमीन पर भी इस पहल का गहरा असर दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल भी अब मान सरकार की इस योजना की खुलेआम आलोचना नहीं कर पा रहे क्योंकि जनता खुद इसके गवाह और समर्थक हैं। जीरा हलके जैसे उदाहरण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गए हैं। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी निजी तौर पर इस पहल की सराहना की है। यह दर्शाता है कि जब काम ईमानदारी से किया जाए तो राजनीतिक सीमाएं भी धुंधली पड़ जाती हैं और जनहित सर्वोपरि हो जाता है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने कार्यकाल में साबित कर दिया है कि सादा जीवन और ईमानदार इरादे विकास की असली नींव हैं। 3000 स्टेडियम परियोजना उनके विजन का एक हिस्सा भर है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी – हर क्षेत्र में मान सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। जीरा हलके में एक साथ 15-16 मैदानों का निर्माण यह संदेश देता है कि पंजाब अब पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। आने वाले समय में जब ये मैदान तैयार हो जाएंगे और उन पर युवा खिलाड़ी अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे, तब यह पहल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगी। मान सरकार ने न केवल वादे पूरे किए हैं बल्कि पंजाब के युवाओं को एक नया सवेरा दिखाया है।

  • जसवीर सिंह गढ़ी ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से की मुलाकात, दलित कल्याण पर हुई चर्चा

    जसवीर सिंह गढ़ी ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से की मुलाकात, दलित कल्याण पर हुई चर्चा

    चंडीगढ़: पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने आज पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से उनके निवास स्थान पर मुलाकात की। मुलाकात के दौरान श्री जसवीर सिंह गढ़ी ने मुख्यमंत्री पंजाब भगवंत सिंह मान को अनुसूचित जाति आयोग द्वारा राज्य के दलित वर्ग के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में अवगत कराया। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री को आयोग के सामने आने वाली समस्याओं के बारे में भी जानकारी दी।

    श्री गढ़ी ने इस मुलाकात के बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आयोग के कार्यों के संबंध में संतुष्टि व्यक्त की और साथ ही आयोग के सामने आने वाली समस्याओं के बारे में लिखित रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा ताकि उन्हें जल्द से जल्द हल किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री को पेश कर दी जाएगी। श्री गढ़ी ने बताया कि इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री को जापान और दक्षिण कोरिया के सफल दौरे के लिए बधाई दी।

  • साहिबजादों की शहादत पर आधारित निबंध प्रतियोगिता का सीएम सैनी ने किया शुभारंभ

    साहिबजादों की शहादत पर आधारित निबंध प्रतियोगिता का सीएम सैनी ने किया शुभारंभ

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेशभर के विद्यालयों में निबंध लेखन प्रतियोगिता की शुक्रवार को चंडीगढ़ से वर्चुअल शुरुआत की। यह प्रतियोगिता साहिबज़ादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की अमर शहादत, साहस और अद्वितीय बलिदान के संदेश को जन – जन तक पहुँचाने का एक प्रयास है। इस वर्चुअल कार्यक्रम में प्रदेशभर के स्कूलों से हजारों बच्चे ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ संवाद किया। उन्होंने वीर साहिबज़ादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी को नमन करते हुए सभी बच्चों से कहा कि साहिबज़ादों के बलिदान से जुड़ी कहानी को आप जितनी बार पढ़ेंगे, सुनेंगे और जानेंगे, उतने ही आप अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट और दृढ़ निश्चयी होंगे। उन्होंने कहा कि आज प्रदेशभर में वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में चार भाषाओं – हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी और संस्कृत में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। इस प्रतियोगिता में वीर साहिबज़ादों के जीवन पर सारगर्भित निबंध लिखकर बच्चे अपनी प्रतिभा का परिचय देंगे। इस प्रतियोगिता के लिए उन्होंने बच्चों को अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी । मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबज़ादों श्री जोरावर सिंह जी और श्री फतेह सिंह जी ने केवल नौ साल और छ: साल की उम्र में अपने जीवन में हिम्मत और सच्चाई दिखाकर हम सबको प्रेरणा दी है। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 से प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि पूरा देश इन शूरवीरों को हमेशा याद रखे। उन्होंने कहा कि छोटे साहिबज़ादों का बलिदान हमें सिखाता है कि छोटी उम्र में भी बड़ी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है। इसलिए हर विद्यार्थी हिम्मत और सत्यनिष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करे, अपने संस्कारों और मूल्यों को संरक्षित रखते हुए देश को आगे बढ़ाने में अपना सहयोग दे। सभी विद्यार्थी अपना जीवन निडर होकर, कठिनाइयों का सामना करते हुए जिएं क्योंकि साहस वही दिखाता है जो सच्चाई के लिए खड़ा होता है।

    साहिबजादों के जीवन से छात्र सीखें सिद्धांत, साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक हमारे समाज के मार्गदर्शक हैं। जैसे श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने साहिबज़ादों को धर्म और साहस का पाठ पढ़ाया, वैसे ही शिक्षक विद्यार्थियों के मन में संस्कार, साहस और अच्छे विचारों के बीज बो रहे हैं। उनका हर शब्द, हर शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव बनती है। बच्चों को केवल पढ़ाई में नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और चरित्र निर्माण में भी मार्गदर्शन दीजिए। आपका परिश्रम और समर्पण ही भविष्य के भारत को सशक्त बनाएगा। साहिबजादों के जीवन से छात्र सिद्धांत, साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना सीखें।

    प्रत्येक विद्यार्थी छोटे साहिबज़ादों के जीवन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाए

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हरियाणा का प्रत्येक विद्यार्थी छोटे साहिबज़ादों के जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतार ले तो हमारे विद्यालय सच्चे अर्थों में मानव निर्माण के केन्द्र बन जाएंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को प्रतिदिन छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए प्रेरित करें। इनमें सहपाठियों की मदद करना, विद्यालय को स्वच्छ रखना, शिक्षकों का सम्मान करना, कमजोर विद्यार्थियों को सहयोग देना, सदैव सत्य बोलना, बुराई के विरूद्ध आवाज उठाना और अच्छा इंसान बनना। यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी विरासत से जोड़ती हैं और उन्हें अपने इतिहास पर गर्व करने का मौका देती हैं। इस प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार राशि भी बच्चों के लिए निर्धारित की है, जिसमें राज्य स्तर पर प्रथम स्थान धारक को 21 हजार, द्वितीय स्थान धारक को 11 हजार तथा तृतीय स्थान धारक को 5100 रुपये, निबंध लेखन प्रतियोगिता (अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और पंजाबी भाषा) के लिए के प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, जिला स्तर पर प्रथम स्थान के विजेताओं को 3100 रुपये की राशि मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बच्चों और समाज से आह्वान किया कि छोटे साहिबज़ादों की शहादत को याद करके हम स्वयं को यह संकल्पित करें कि हम ऐसा भारत बनाएंगे, जहां हर बच्चा सच्चा, मेहनती और देशभक्त बने। हम सभी मिलकर अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा और संस्कार दें कि वे आने वाले समय में देश के सच्चे रक्षक बनें। इस मौके पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विनीत गर्ग, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव श्री यश पाल और ओएसडी डॉ प्रभलीन सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।