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  • पंजाब 2.0 की शुरुआत: CM की कोरिया में शीर्ष उद्योगपतियों से अहम मुलाकात

    पंजाब 2.0 की शुरुआत: CM की कोरिया में शीर्ष उद्योगपतियों से अहम मुलाकात

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज दक्षिण कोरिया की अग्रणी कंपनियों— डैवू इंजीनियरिंग एवं निर्माण, जी.एस. इंजीनियरिंग एवं निर्माण, नॉन्गशिम, कोरिया रक्षा उद्योग संघ, सियोल व्यवसाय एजेंसी तथा अन्य अनेक कंपनियों—को राज्य में निवेश करने का आमंत्रण दिया।

    दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने डैवू इंजीनियरिंग एवं निर्माण के चेयरमैन जंग वॉन जू से मुलाक़ात की और नवोन्मेषी ऊर्जा परियोजनाओं—समुद्री पवन ऊर्जा संयंत्र, सौर ऊर्जा संयंत्र तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन—में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढाँचे—तरलीकृत प्राकृतिक गैस टर्मिनल, पेट्रो-रासायनिक परिसर, उर्वरक संयंत्र—तथा आधुनिक आवासीय और शहरी विकास परियोजनाओं, स्मार्ट नगर परियोजनाओं, और सड़क, पुल, रेल, बंदरगाह व हवाई अड्डों से संबंधित सिविल ढांचे में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने मॉड्यूलर तथा पूर्व-निर्मित ढाँचों की आधुनिक निर्माण तकनीक में तकनीकी आदान-प्रदान की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि तेज़ और किफायती निर्माण मॉडल विकसित किए जा सकें।

    डैवू इंजीनियरिंग एवं निर्माण जैसी विश्वविख्यात अवसंरचना कंपनी के साथ रणनीतिक बैठक के दौरान उन्होंने पंजाब की मजबूत औद्योगिक गति, आधुनिक बुनियादी ढाँचों के निर्माण हेतु चल रहे प्रमुख प्रयासों तथा “निवेश पंजाब” प्रणाली के अंतर्गत विशेष संयुक्त निरीक्षण ढाँचे की जानकारी साझा की। उन्होंने वैश्विक उद्योग समूह को पंजाब में व्यापक आधारभूत विकास, आधुनिक निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने और प्रस्तावित औद्योगिक नगरों में संभावनाओं की खोज करने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूलता के वैश्विक मानकों के अनुरूप चलने वाली पहलों—ईएसजी प्रतिबद्धताओं और हरित हाइड्रोजन कार्यक्रमों—में साझा प्रयासों पर भी ज़ोर दिया।

    इसके बाद हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने जी.एस. इंजीनियरिंग एवं निर्माण के वाइस चेयरमैन यंग हा र्यु से मुलाक़ात की। उन्होंने सौर, पवन और हाइड्रोजन जैसी नव्य ऊर्जा परियोजनाओं; सड़क, पुल और स्मार्ट नगर जैसी आधारभूत परियोजनाओं; तथा औद्योगिक परिसरों एवं अभिकल्प-खरीद-निर्माण (ई.पी.सी.) सेवाओं के क्षेत्र में समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मॉड्यूलर निर्माण तकनीक और हरित हाइड्रोजन तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विशाल संभावनाओं का उल्लेख किया और राज्य सरकार की ओर से हर प्रकार के सहयोग का आश्वासन दिया।

    नॉन्गशिम होल्डिंग्स के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग में संयुक्त कार्य का प्रस्ताव रखा। उन्होंने भारतीय स्वादानुसार नवीन त्वरित-पकवान (इंस्टैंट) नूडल्स के नए संस्करण विकसित करने की आवश्यकता बताई, साथ ही भारत की सुपरमार्केट श्रृंखलाओं और ई-वाणिज्य मंचों पर इनके वितरण के विस्तार पर भी चर्चा की। उन्होंने युवा वर्ग और स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं तक ब्रांड की पहुँच बढ़ाने, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ पर्यावरण-हितैषी पैकेजिंग समाधान विकसित करने तथा दीर्घकालिक उपयोग योग्य खाद्य पदार्थ और पौध-आधारित विकल्पों पर अनुसंधान में साझेदारी की वकालत की।

    कोरिया रक्षा उद्योग संघ (के डी आई ए) के वाइस चेयरमैन ली सुंग क्यू से बातचीत में मुख्यमंत्री ने रक्षा निर्माण, रक्षा-तकनीक के आदान-प्रदान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और मानव-रहित प्रणालियों जैसी उन्नत सैन्य तकनीकों में सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने सायबर सुरक्षा तथा कौशल-विकास कार्यक्रमों में साझा प्रयास करके रक्षा निर्माण क्षेत्र में दक्ष जनशक्ति तैयार करने की संभावनाओं पर भी बल दिया।

    सियोल व्यवसाय एजेंसी के स्टार्टअप प्रभाग के निदेशक जोंग वू किम के साथ मुलाक़ात के दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब-आधारित नवोन्मेषी उद्यमों को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने हेतु उनके त्वरक (एक्सलेरेशन) और इंक्यूबेशन कार्यक्रमों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने स्टार्टअप पारिस्थितिकी-तंत्र, अनुसंधान-विकास, नवाचार-संस्कृति तथा उत्पाद-प्रमाणीकरण (जैसे “सियोल पुरस्कार”) में साझेदारी को समय की आवश्यकता बताया।

    इसके बाद आयोजित पंजाब में व्यवसाय सुगमता पर गोलमेज़ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दक्षिण कोरिया की अग्रणी वाणिज्यिक, निवेश और उद्योग कंपनियों—बी.के.एल., यूलचोन, बडट्री प्रबंधन समूह, एस.के. प्रतिभूति, किम एंड चांग, शिन एंड किम, ली एंड को, डेन्टन्स ली, कोरिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन, कोरिया रोबोट उद्योग संघ, कोरिया व्यापार-निवेश प्रोत्साहन संगठन, कोरिया ऑटो-भाग उद्योग सहकारी, युआन्टा प्रतिभूति, कैपस्टोन परिसंपत्ति प्रबंधन, एन.एच. निवेश एवं प्रतिभूति, और कोरिया औद्योगिक अर्थशास्त्र एवं व्यापार संस्थान—के प्रतिनिधियों से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री ने पंजाब को सर्वाधिक उपयुक्त निवेश स्थान बताते हुए राज्य सरकार द्वारा की गई प्रमुख सुधार पहलों से इन्हें अवगत कराया और उद्योग विकास को और सहज बनाने हेतु सुझाव भी मांगे। मुख्यमंत्री ने एशिया के सबसे उन्नत नवाचार-केंद्रों में से एक पैंग्यो टेक्नो वैली—जिसे “कोरिया की सिलिकॉन वैली” कहा जाता है—का अवलोकन भी किया। ग्योंगगीदो व्यवसाय एवं विज्ञान त्वरक के अधिकारियों ने उन्हें पैंग्यो के एकीकृत मॉडल, तकनीकी नवोन्मेष, स्टार्टअप संस्कृति और उच्च-मूल्य अनुसंधान की प्रणाली के बारे में जानकारी दी। उनके अनुसार 1,780 से अधिक कंपनियों, 83,000 पेशेवरों और 25,000 शोधकर्ताओं वाला पैंग्यो विश्व-स्तरीय नवोन्मेषिक क्षेत्र है।

    मुख्यमंत्री ने पैंग्यो के संरचित त्वरक कार्यक्रमों, विशेष परीक्षण सुविधाओं और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन पद्धतियों की विशेष प्रशंसा की और कहा कि मोहाली में भी ऐसे मॉडल अपनाकर स्टार्टअप पारिस्थितिकी, अनुसंधान-विकास और कौशल-आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने मोहाली को व्यापक विकास देकर उसे नवाचार-केंद्र के रूप में उभारने की आवश्यकता बताई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विस्तृत संभावनाओं द्वारा पंजाब सरकार ने कोरियाई कंपनियों का स्वागत करने, नवाचार-आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने और दीर्घकालिक पारस्परिक साझेदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में निर्माण, प्रौद्योगिकी, खाद्य-प्रसंस्करण, अनुसंधान एवं विकास सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि सियोल रोड-शो “प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन-2026” से पूर्व यह सम्पूर्ण कार्यक्रम वैश्विक निवेशकों को पंजाब में तीव्र आर्थिक-औद्योगिक अवसरों से अवगत कराने का एक प्रमुख माध्यम है।

  • कांग्रेस पर CM पद बेचने का आरोप, मान सरकार ने पंजाब में खड़ा किया ₹500 करोड़ का निवेश

    कांग्रेस पर CM पद बेचने का आरोप, मान सरकार ने पंजाब में खड़ा किया ₹500 करोड़ का निवेश

    चंड़ीगढ़: हाल ही में पंजाब की राजनीति में एक चौंकाने वाला बयान आया है। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता की पत्नी ने खुलेआम यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि पंजाब में मुख्यमंत्री (CM) बनने के लिए ₹500 करोड़ या उससे अधिक का “सूटकेस” देना पड़ता है। यह बात सुनकर हर पंजाबी के मन में एक ही दर्द भरा सवाल उठता है| जो ₹500 करोड़ देकर CM बनेगा, क्या वह पंजाब के बारे में सोचेगा? एक व्यक्ति इतना बड़ा पैसा क्यों खर्च करेगा? सीधा-सा जवाब है – वसूलने के लिए! जब कोई नेता हजारों करोड़ रुपए खर्च करके कुर्सी हासिल करेगा, तो उसकी प्राथमिकता पंजाब के लोगों की सेवा नहीं, बल्कि अपने लगाए हुए पैसों को कई गुना बढ़ाकर वापस पाना होगी। ऐसे समय में मान सरकार की सादगी, पारदर्शिता और ईमानदार छवि एक आशा की किरण बनकर उभरती है। ना बड़े-बड़े खर्चे, ना भ्रष्टाचार के आरोपों का बोझ—बस सीधा-सादा संदेश, “राजनीति को महलों से निकालकर आम लोगों तक लाना है।”मान सरकार की यह कोशिश कि सत्ता का मतलब शाही ठाठ नहीं बल्कि जनता की सेवा है, आज के माहौल में और भी क़ीमती लगती है। पंजाब को ऐसे ही नेतृत्व की ज़रूरत है—जिसके दिल में जनता हो, जेब में सौदे नहीं। जब कुर्सी खरीदकर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से मिलती है| तभी सत्ता सच में सेवा बनती है।

    गरीबों का क्या होगा? क्या ऐसे नेता को आम आदमी की टूटी सड़क, फटे हाल किसान या बेरोजगार युवा की परवाह होगी? नहीं! उनका ध्यान केवल बड़े ठेकों, घोटालों और अपने ‘मालिकों’ की तिजोरियां भरने पर होगा। यह आरोप केवल एक पार्टी पर नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। यह दिखाता है कि राजनीति अब ‘सेवा’ नहीं, बल्कि ‘सबसे बड़ा निवेश’ बन गई है। यह संस्थागत भ्रष्टाचार का शिखर है। यह सोचकर ही दिल दहल जाता है कि जिस कुर्सी पर बैठकर पंजाब के गुरुओं की धरती के विकास, शिक्षा और कानून-व्यवस्था की शपथ ली जाती है, क्या उस कुर्सी की कीमत अब ₹500 करोड़ हो गई है? पंजाब की जनता को अब सोचना होगा! हमें ऐसी राजनीति नहीं चाहिए, जहाँ मुख्यमंत्री पद नीलामी में बिकता हो। हमें ऐसा नेता चाहिए जो पैसे से नहीं, बल्कि सेवाभाव, ईमानदारी और कर्मठता से CM बने।

    ऐसे में, जब इस तरह के गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो पंजाब में मौजूदा ‘आम आदमी पार्टी’ की भगवंत मान सरकार की ईमानदारी और लोक-कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करना और भी ज़रूरी हो जाता है। एक तरफ ₹500 करोड़ के “सूटकेस” की बात है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान का फोकस जापान जैसे देशों से ₹500 करोड़ का निवेश पंजाब में लाने पर है। ₹500 करोड़ का निवेश पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार और राज्य के लिए विकास लाता है। जबकि ₹500 करोड़ का सूटकेस केवल भ्रष्टाचार और जनता की लूट को बढ़ावा देता है। मान सरकार ने लोगों को एक ईमानदार विकल्प दिया है, जिस पर अभी भी लोगों का भरोसा कायम है। यह सरकार ‘सेवा’ की भावना से काम कर रही है, न कि ‘वसूली’ की भावना से।

    अगर राजनीति को स्वच्छ और जन-केंद्रित बनाना है, तो हमें ईमानदार और आम आदमी के लिए काम करने वाली मान सरकार को ही समर्थन देना होगा। ₹500 करोड़ की राजनीति पंजाब को बर्बादी की ओर ले जाएगी, जबकि जनसेवा की राजनीति ही इसे ‘गोल्डन स्टेट’ बना सकती है। ऐसे माहौल में, जहाँ राजनीति को ‘काला धंधा’ बना दिया गया है, हमें मौजूदा भगवंत मान सरकार (AAP) के उस ईमानदार विकल्प की सराहना करनी चाहिए, जो पंजाब की जनता के सामने है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने बार-बार यह साबित किया है कि सत्ता जनता की सेवा के लिए है, किसी के निजी स्वार्थ के लिए नहीं। वे नशा-मुक्त पंजाब, शिक्षा में सुधार और किसानों के हकों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। यह सरकार 500 करोड़ का निवेश पंजाब में ला रही है, जिससे युवाओं को रोजगार मिले—न कि 500 करोड़ का सूटकेस भरकर जनता को लूटा जाए!

    जहां एक तरफ ₹500 करोड़ की राजनीति पंजाब को धोखा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ मान सरकार की नीतियां यह साबित कर रही हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी खरीदी नहीं जा सकती, बल्कि यह जनता के विश्वास से जीती जाती है। यह केवल बेहतर होने की बात नहीं है, यह नैतिकता, पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही को वापस लाने की बात है। पंजाब ने उस ‘म्यूजिकल चेयर’ वाली राजनीति को नकार दिया है, जहाँ पांच साल एक पार्टी और पाँच साल दूसरी पार्टी आती थी और दोनों मिलकर राज्य को लूटती थीं। यही सोच नई राजनीति की नींव है—और यही वजह है कि आज कई लोग कह रहे हैं: “मान सरकार—पंजाब की उम्मीद।”

  • पंजाब की फ्री बस योजना का दायरा बढ़ा: 7,698 नई छात्राओं को भी मिली विशेष सुविधा

    पंजाब की फ्री बस योजना का दायरा बढ़ा: 7,698 नई छात्राओं को भी मिली विशेष सुविधा

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य की सभी महिलाओं के लिए निःशुल्क बस सेवा की शुरुआत करके महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह व्यापक जनकल्याणकारी योजना केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब की प्रत्येक महिला – चाहे वह छात्रा हो, कामकाजी महिला हो, गृहिणी हो या वरिष्ठ नागरिक – सभी को पंजाब रोडवेज और पेप्सू रोडवेज की बसों में बिना किसी शुल्क के यात्रा करने का अधिकार देती है। इस महत्वाकांक्षी पहल से रोजाना लाखों महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं और सार्वजनिक परिवहन में महिला यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन विभाग के अनुसार, इस योजना ने महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और गतिशीलता प्रदान करने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।

    इस व्यापक योजना के तहत एक विशेष घटक के रूप में सरकारी स्कूलों की छात्राओं के लिए समर्पित बस सेवा भी शुरू की गई है। प्रदेश के लगभग 200 सरकारी स्कूलों में अब छात्राओं को विशेष निःशुल्क बस सेवा मिल रही है, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करती है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि स्कूल परिवहन सुविधा से कुल 10,448 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं, जिनमें 7,698 बालिकाएं और 2,740 बालक शामिल हैं। विशेष रूप से 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस सहित विभिन्न सरकारी विद्यालयों में यह सेवा संचालित है। हालांकि, कुछ लोगों ने इस पहल को केवल स्कूली छात्राओं तक सीमित समझने की भूल की है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह पंजाब सरकार की उस बड़ी दृष्टि का एक हिस्सा है जिसमें हर महिला को मुफ्त बस सेवा का अधिकार है।

    पंजाब सरकार की मुफ्त बस योजना का दायरा बेहद व्यापक है और यह राज्य भर में संचालित सभी सरकारी बसों में लागू है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आवागमन में आने वाली आर्थिक बाधाओं से मुक्त करना और उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है। चाहे कोई महिला नौकरी के लिए यात्रा कर रही हो, अस्पताल जा रही हो, रिश्तेदारों से मिलने जा रही हो या बाजार जाना हो – हर स्थिति में उसे मुफ्त परिवहन की सुविधा मिलती है। यह योजना विशेष रूप से निम्न और मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके लिए प्रतिदिन का परिवहन खर्च एक बड़ा बोझ होता था। अब वे इस बचत को अपने परिवार की अन्य जरूरतों में लगा सकती हैं।

    स्कूली छात्राओं के लिए समर्पित बस सेवा इस व्यापक योजना का एक महत्वपूर्ण लेकिन छोटा हिस्सा है। आंकड़े बताते हैं कि 4,304 बालिकाएं 10 से 20 किलोमीटर की दूरी और 1,002 बालिकाएं 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके रोजाना विद्यालय पहुंच रही हैं। पहले इतनी दूरी तय करना न केवल असुरक्षित था बल्कि कई परिवारों के लिए आर्थिक रूप से असंभव भी था, जिससे बालिकाओं की शिक्षा बीच में ही छूट जाती थी। योजना के तहत प्रति छात्र परिवहन लागत 1,200 रुपये है, जिसमें से 80 प्रतिशत यानी 960 रुपये पंजाब सरकार वहन करती है और मात्र 20 प्रतिशत यानी 240 रुपये अभिभावक देते हैं। यह राशि प्राइवेट स्कूलों के परिवहन शुल्क की तुलना में नगण्य है। बसों की व्यवस्था स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों के माध्यम से की जाती है, जिससे पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी दोनों सुनिश्चित होती है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता राज्य की सभी महिलाओं को समान अवसर और सुविधाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पंजाब की हर महिला के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू की है क्योंकि हम मानते हैं कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और गतिशीलता समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। स्कूली छात्राओं के लिए विशेष बस व्यवस्था इसी बड़ी योजना का एक हिस्सा है, न कि पूरी योजना। हम चाहते हैं कि पंजाब की हर महिला – चाहे वह किसी भी उम्र या पृष्ठभूमि की हो – बिना किसी चिंता के अपने गंतव्य तक पहुंच सके।” उन्होंने यह भी कहा कि यह योजना केवल आर्थिक राहत नहीं देती बल्कि महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

    फिरोजपुर जिले के जीरा स्थित SGRM गर्ल्स स्कूल में सबसे अधिक 712 बालिकाएं स्कूल बस सेवा का लाभ ले रही हैं। इसके अलावा बठिंडा के माल रोड गवर्नमेंट स्कूल में 645, जालंधर के नेहरू गार्डन गर्ल्स स्कूल में 466, कोटकपूरा में 399, आनंदपुर साहिब गर्ल्स स्कूल में 300 और फतेहगढ़ साहिब के गोविंदगढ़ गर्ल्स स्कूल में 200 बालिकाएं इस सुविधा का उपयोग कर रही हैं। इन सभी क्षेत्रों में स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं, व्यापक मुफ्त बस योजना से हजारों कामकाजी महिलाएं, नर्सें, शिक्षिकाएं, कॉलेज छात्राएं और घरेलू महिलाएं भी लाभान्वित हो रही हैं। लुधियाना की एक कामकाजी महिला सिमरनजीत कौर ने बताया, “पहले मुझे रोजाना ऑफिस जाने में 100-150 रुपये खर्च होते थे। अब मुफ्त बस से जाती हूं और महीने के 3,000-4,000 रुपये बच जाते हैं जो मैं अपने बच्चों की शिक्षा में लगाती हूं।”

    यह स्कूल बस पहल स्कूल ऑफ एमिनेंस कार्यक्रम का भी एक हिस्सा है, जो मान सरकार का प्रमुख शिक्षा मिशन है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, व्यापक खेल सुविधाएं और NIFT द्वारा डिजाइन की गई निःशुल्क वर्दी प्रदान की जाती है। इन स्कूलों में नामांकन 82,000 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गया है और 158 छात्रों ने JEE में सफलता हासिल की है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी स्कूलों को समुचित संसाधन और सुविधाएं मिलती हैं तो वे प्राइवेट स्कूलों से किसी भी तरह कम नहीं होते। एक अभिभावक ने कहा, “पहले हम सोचते थे कि बेटी को आठवीं के बाद स्कूल भेजना मुश्किल होगा क्योंकि स्कूल दूर है। अब यह चिंता खत्म हो गई है और हमारी बेटी अपने सपनों को पूरा कर सकती है।”

    समाज के विभिन्न वर्गों से इस व्यापक पहल को जबरदस्त सराहना मिल रही है। शिक्षाविद डॉ. अमरजीत कौर कहती हैं, “पंजाब सरकार की मुफ्त बस योजना केवल परिवहन की सुविधा नहीं है, यह एक सामाजिक और आर्थिक क्रांति का माध्यम है। जब सभी महिलाओं को समान रूप से यात्रा की सुविधा मिलती है तो समाज में समानता का वास्तविक अर्थ सामने आता है। यह पूरे देश के लिए एक मॉडल है।” महिला अधिकार कार्यकर्ता जसप्रीत कौर ने कहा, “यह योजना साबित करती है कि जब सरकार महिलाओं की वास्तविक जरूरतों को समझती है और उन पर कार्य करती है तो असली बदलाव संभव है। पंजाब की हर महिला आज इस योजना की वजह से ज्यादा स्वतंत्र और आत्मनिर्भर महसूस कर रही है।”

    पंजाब सरकार की यह मुफ्त बस योजना महिला सशक्तिकरण, आर्थिक समावेशन और शैक्षिक न्याय की दिशा में एक ठोस कदम है। यह योजना केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर लाखों महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है। हर वह महिला जो रोजाना मुफ्त बस में यात्रा करती है, हर वह छात्रा जो सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचती है, और हर वह परिवार जो परिवहन खर्च में बचत कर पाता है – सभी इस बात के गवाह हैं कि जब सरकार जनता की समस्याओं को समझती है और उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध होती है तो वास्तविक विकास संभव है। मान सरकार की यह पहल निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और पंजाब को महिला सशक्तिकरण में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।

  • तीन सरकारें हुई मौन, अब मान सरकार की सख्ती—‘328 पावन स्वरूपों’ की गुमशुदगी में दर्ज हुई FIR, बड़े नामों की बढ़ी मुश्किलें

    तीन सरकारें हुई मौन, अब मान सरकार की सख्ती—‘328 पावन स्वरूपों’ की गुमशुदगी में दर्ज हुई FIR, बड़े नामों की बढ़ी मुश्किलें

    चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक ऐसा मामला जो करीब साढ़े नौ वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा था। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने उसे फिर से खोल दिया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों की रहस्यमयी गुमशुदगी का यह मामला 2016 में पहली बार उजागर हुआ था, लेकिन तीन मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी—तीनों के शासनकाल में यह मामला केवल फाइलों में सिमटा रहा। अब चौथे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहली बार कानूनी कार्रवाई करते हुए 16 एसजीपीसी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कदम न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान है, बल्कि पंजाब की न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल भी है। यह मामला महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि करोड़ों सिखों की आस्था से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों का बिना रिकॉर्ड के गायब होना या अनियमित तरीके से वितरित होना सिख समुदाय के लिए गहरी पीड़ा का विषय रहा है। 2016 में जब यह मामला सामने आया, तब एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग के एक वरिष्ठ कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद रिकॉर्ड की जांच में यह खुलासा हुआ कि दर्जनों स्वरूप बिना उचित प्रविष्टि के विभाग से बाहर गए है। शुरुआत में 267 स्वरूप गायब बताए गए, लेकिन 2020 में अकाल तख्त की विशेष जांच समिति ने इस संख्या को बढ़ाकर 328 कर दिया। इसमें से कम-से-कम 186 स्वरूप बिना किसी आधिकारिक अनुमति के जारी किए गए थे, जो एक गंभीर धार्मिक और प्रशासनिक उल्लंघन है।

    बादल सरकार का मौन और कैप्टन सरकार की अनदेखी

    2016 में जब यह मामला सामने आया, तब पंजाब में प्रकाश सिंह बादल की सरकार थी। एसजीपीसी, जो सिख धर्म के सबसे बड़े धार्मिक संस्थान के रूप में जानी जाती है, पर आरोप लगे कि वह मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। हालांकि आंतरिक जांच की बात कही गई, लेकिन न तो पुलिस को मामला सौंपा गया और न ही किसी ज़िम्मेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। 2017 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार सत्ता में आई, तो सिख संगठनों ने उम्मीद जताई कि अब न्याय मिलेगा। धार्मिक संगठनों ने पुलिस जांच की मांग उठाई, अमृतसर में धरने-प्रदर्शन हुए, लेकिन कैप्टन सरकार ने भी मामले को आगे नहीं बढ़ाया। कुछ समीक्षा कमेटियां बनाईं, बैठकें हुईं, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। एसजीपीसी ने स्वीकार किया कि गड़बड़ी हुई है, लेकिन कानूनी कार्रवाई से बचा गया। यह वह दौर था जब राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ दिख रही थी।

    चन्नी सरकार का छोटा कार्यकाल, बड़ा सवाल

    2021 में जब चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बने, तो फिर से आशा की किरण जगी। लेकिन चुनावी माहौल, छोटे कार्यकाल और राजनीतिक अस्थिरता के कारण इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। धार्मिक संगठनों ने एसजीपीसी पर “दोषियों को बचाने” का आरोप लगाया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई। तीन मुख्यमंत्रियों के शासनकाल में यह मामला केवल राजनीतिक बयानों और वादों तक सीमित रहा, जबकि जनता और सिख समुदाय न्याय की प्रतीक्षा करता रहा। यह साफ था कि पिछली सरकारों ने या तो इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, या फिर किन्हीं राजनीतिक दबावों के कारण इसे दबाए रखा।

    मान सरकार का साहसिक निर्णय: पहली एफआईआर

    2022 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने, तो सिख संगठनों ने फिर से सरकार को ज्ञापन सौंपे और न्याय की मांग की। मान सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पुरानी फाइलों, दस्तावेज़ों और रिपोर्टों को दोबारा खोला। पहली बार पुलिस से कानूनी राय ली गई कि मामला दर्ज किया जा सकता है। साढ़े तीन साल की कड़ी मेहनत और जांच के बाद, 2025 में मान सरकार ने पहली बार 16 एसजीपीसी कर्मचारियों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इन कर्मचारियों ने रिकॉर्ड से बाहर पावन स्वरूपों का वितरण किया, अनुचित ढंग से स्वरूप जारी किए और आधिकारिक पुस्तकों में छेड़छाड़ की। यह नौ साल में पहली कानूनी कार्रवाई है, जो मान सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    जांच की तह में जाने का समय

    अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस 16 नामजद कर्मचारियों को कब तलब करती है और पूछताछ किस दिशा में आगे बढ़ती है। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब इन कर्मचारियों से पूछताछ शुरू होगी, तो यह सामने आ सकता है कि स्वरूपों का वितरण किनके निर्देश पर हुआ। यदि यह किसी संगठित ढांचे या उच्च स्तर के निर्देशों के तहत हुआ है, तो जांच एसजीपीसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कुछ पूर्व नेताओं और संभवतः 2016-17 के दौरान प्रभावशाली रहे राजनीतिक चेहरों तक भी पहुंच सकती है। यदि पूछताछ में धन लेन-देन, दबाव या साठगांठ के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति को भी गहराई से हिला सकता है। मान सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस जांच में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो।

    धार्मिक संगठनों और जनता की प्रतिक्रिया

    सिख धार्मिक संगठनों ने मान सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। अमृतसर स्थित एक धार्मिक संगठन के प्रवक्ता ने कहा, “साढ़े नौ साल बाद आखिरकार न्याय की दिशा में पहला कदम उठा है। यह भगवंत मान सरकार का साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय है, जो दिखाता है कि वे किसी दबाव में नहीं है और सिख समुदाय की आस्था का सम्मान करते हैं।” सोशल मीडिया पर भी इस कदम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया आ रही है। लोग पिछली सरकारों की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं और मान सरकार की पारदर्शिता की सराहना कर रहे हैं। एक ट्वीट में लिखा गया, “तीन सीएम बदले, कोई एफआईआर नहीं। भगवंत मान ने साबित किया कि इच्छाशक्ति हो तो न्याय मिल सकता है।” यह जनभावना साफ दर्शाती है कि पंजाब की जनता अब सच्चाई और जवाबदेही की उम्मीद कर रही है।

    पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता: पारदर्शिता और न्याय

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हमारी सरकार का मानना है कि धर्म और आस्था के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पिछली सरकारों ने इस मामले को नजरअंदाज किया, लेकिन हमने पहले दिन से ही इसे प्राथमिकता दी है। जांच निष्पक्ष होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिलेगी।” पंजाब सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाएगी और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। यह कदम न केवल इस मामले में न्याय दिलाने की दिशा में है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि आम आदमी पार्टी की सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या अनियमितता के खिलाफ सख्त है। पंजाब की जनता ने इस सरकार को ईमानदार और पारदर्शी प्रशासन की उम्मीद के साथ चुना था, और मान सरकार अपने वादों को पूरा करने में लगी हुई है।

    एक नई शुरुआत, एक मज़बूत संदेश

    साढ़े नौ साल बाद दर्ज हुई यह पहली एफआईआर पंजाब के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल है। यह न केवल सिख समुदाय की आस्था का सम्मान है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भगवंत मान की सरकार किसी भी राजनीतिक या संस्थागत दबाव से ऊपर उठकर सच्चाई और न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। तीन मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जो मामला केवल फाइलों में सिमटा रहा, उसे मान सरकार ने कानूनी दायरे में लाकर एक नई दिशा दी है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और भी दिलचस्प हो सकते हैं, क्योंकि यह मामला अब केवल 16 कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता। यदि जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो पंजाब की राजनीति और एसजीपीसी के कई बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। भगवंत मान सरकार ने यह साबित कर दिया है कि जब इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी मामला कितना भी पुराना या जटिल क्यों न हो, उसे हल किया जा सकता है। यह कदम पंजाब की जनता के विश्वास को मजबूत करने और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।  
  • मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान: पैंशनरों के बकाया मेडिकल बिल एक महीने में होंगे क्लियर

    मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान: पैंशनरों के बकाया मेडिकल बिल एक महीने में होंगे क्लियर

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पैंशनरों के सभी लंबित चिकित्सा बिलों की अदायगी आगामी एक माह के भीतर पूर्ण कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा आज यहां हिमाचल प्रदेश पैंशनर संयुक्त फ्रंट के प्रतिनिधिमंडल को सम्बोधित करते हुए की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के कर्मचारियों एवं पैंशनरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सरकार की रीढ़ की तरह कार्य करते हैं और उनकी समस्याओं और मांगों का उचित समाधान करना प्रदेश सरकार का दायित्व है। सेवानिवृत्ति के उपरान्त कर्मचारी अपने सामाजिक सरोकारों का बिना किसी बाधा के निर्वहन सुनिश्चित कर सकें, इसलिए प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने के बाद ओपीएस बहाल की। इससे प्रदेश के 1 लाख 36 हजार कर्मचारी लाभावित हुए हैं।

    सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार पैंशनरों की मांगों का समाधान सुनिश्चित कर रही है और उनकी विभिन्न देनदारियों की अदायगी भी समय-समय पर की जा रही है।प्रदेश सरकार संसाधनों के सृजन के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी सुनिश्चित कर रही है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान वित्तीय कुप्रबन्धन से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ा और कर्मचारियों और पैंशनरों की देनदारियों की अदायगी भी समय सीमा में पूर्ण नहीं हो पाई।

    प्रदेश सरकार सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कर्मचारियों और पैंशनरों की सभी देनदारियां प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। हिमाचल प्रदेश पैंशनर संयुक्त फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और अपनी विभिन्न मांगों से अवगत करवाया।

  • मान सरकार का किसानों को तोहफा: लंबे इंतजार के बाद खेतों में आया नहरी पानी, बढ़ी उम्मीदें

    मान सरकार का किसानों को तोहफा: लंबे इंतजार के बाद खेतों में आया नहरी पानी, बढ़ी उम्मीदें

    चंडीगढ़: पंजाब के किसान आज एक नई सुबह देख रहे हैं। यह बदलाव किसी घोषणा से नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरे काम से आया है, जिसने सूबे की सिंचाई व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की दूरदर्शी पहल के कारण, पंजाब के लगभग हर खेत तक अब नहर का पानी पहुँच रहा है, एक ऐसा सपना जो दशकों से अधूरा था।

    यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि जिस पंजाब में कभी केवल 68% खेतों को ही नहरी पानी मिल पाता था, वहाँ आज यह आँकड़ा बढ़कर प्रभावशाली 84% तक पहुँच गया है। यह उपलब्धि ‘एकीकृत प्रांतीय जल योजना’ के तहत लागू किए गए 14-सूत्री कार्यक्रम का सीधा परिणाम है। सरकार ने न केवल 15,914 जल मार्गों को बहाल किया है, बल्कि 916 नहरों और मिनर्स में फिर से पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया है, जिससे राज्य के टेल-एंड (सबसे दूरस्थ) इलाकों तक भी पानी पहुँचने लगा है।

    इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान है—भूमिगत पाइपलाइनें। पानी की बर्बादी को रोकने और उसे सीधे खेत तक पहुँचाने के लिए सरकार ने 2,400 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई हैं, जिससे 30,282 हेक्टेयर जमीन को नई सिंचाई सुविधा मिली है।

    इसी पहल का उत्साह श्री आनंदपुर साहिब हल्के के किसानों में साफ दिखाई देता है। जब इन किसानों ने पहली बार अपने खेतों में पाइपलाइन के ज़रिए नहरी पानी पहुँचते देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह पानी उनके लिए केवल सिंचाई का साधन नहीं, बल्कि 35-40 साल से सूखे पड़े इलाके में जीवन की उम्मीद बनकर आया है। भावुक किसानों ने तुरंत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और स्थानीय विधायक हरजोत सिंह बैंस का धन्यवाद किया। किसानों के चेहरे पर लौटी यह मुस्कान ही मान सरकार की सफलता की सच्ची कहानी है।

    मान सरकार सिर्फ पानी पहुंचाने पर ही नहीं रुकी है। जल संरक्षण और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं। भूमिगत जल संकट से जूझ रहे पंजाब में अब 300 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) ट्रीटेड पानी 28 परियोजनाओं के तहत खेतों तक पहुँचाया जा रहा है। साथ ही, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के लिए किसानों को समूह स्तर पर 90% और व्यक्तिगत स्तर पर 50% तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, कंडी क्षेत्र में 160 जल संचयन संरचनाएं और 125 गाँवों में सोलर-लिफ्ट सिंचाई योजनाएं भी शुरू की गई हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया है कि यह केवल जल प्रबंधन नहीं है, बल्कि ‘हर खेत तक पानी पहुंचाने का विजन’ है। उनकी नीतियों ने पंजाब को अब सिंचाई और टिकाऊ कृषि के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है, जहां किसान अब अधिक उपज और बेहतर जीवन स्तर की उम्मीद कर रहे हैं।

  • CM मान का बड़ा ऐलान: पंजाबी यूनिवर्सिटी को 30 करोड़, अब शिक्षा में नहीं होगी कोई रुकावट

    CM मान का बड़ा ऐलान: पंजाबी यूनिवर्सिटी को 30 करोड़, अब शिक्षा में नहीं होगी कोई रुकावट

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाते हुए पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला को 30 करोड़ रुपये की राशि जारी करने की घोषणा की है। यह ऐलान उन्होंने जरीआ फाउंडेशन की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर पंजाबी यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह राशि इसलिए दी जा रही है ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए और संस्थान अपनी शैक्षणिक गतिविधियों को निर्बाध रूप से जारी रख सके। यह घोषणा पंजाब सरकार की उच्च शिक्षा के प्रति गंभीरता और छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाती है। पंजाबी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाली इस यूनिवर्सिटी को मिली यह आर्थिक सहायता न केवल संस्थान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी बल्कि हजारों छात्रों के शैक्षणिक सपनों को भी पंख देगी।

    कार्यक्रम में विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी हालत में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है बल्कि पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति का गढ़ है जिसकी मजबूती प्रदेश की पहचान से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार ने इस बात को समझा है कि शिक्षा में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश है और यही कारण है कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद शिक्षा बजट में कोई कटौती नहीं की गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें और पंजाब को देश-विदेश में गौरवान्वित करे।

    पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला उत्तर भारत की उन गिनी-चुनी यूनिवर्सिटीज में से एक है जो क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति को समर्पित है। इस संस्थान में हजारों छात्र पंजाबी साहित्य, भाषा विज्ञान, इतिहास, कला और विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय संकट के कारण यूनिवर्सिटी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। 30 करोड़ रुपये की यह राशि इन समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस राशि से न केवल वेतन और प्रशासनिक खर्चों को पूरा किया जा सकेगा बल्कि पुस्तकालय, प्रयोगशाला और डिजिटल संसाधनों के विकास में भी निवेश संभव होगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए आश्वासन दिया है कि इस राशि का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ छात्रों के हित में किया जाएगा।

    पंजाब सरकार ने सत्ता में आने के बाद से शिक्षा क्षेत्र में कई क्रांतिकारी कदम उठाए है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शिता, मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म योजना तथा उच्च शिक्षा संस्थानों को वित्तीय सहायता इसके प्रमुख उदाहरण है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई बार स्पष्ट किया है कि शिक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है क्योंकि शिक्षित युवा ही प्रदेश के विकास की असली ताकत है। इस नीति के तहत न केवल पंजाबी यूनिवर्सिटी बल्कि प्रदेश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को भी समय-समय पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इससे उच्च शिक्षा में पंजाब की स्थिति मजबूत हो रही है और अधिक से अधिक छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर पा रहे है।

    ज़रीआ फाउंडेशन की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और समाजसेवी उपस्थित थे। ज़रीआ फाउंडेशन एक गैर-सरकारी संगठन है जो सामाजिक कार्यों, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के कौशल विकास के लिए कार्यरत है। पिछले दशक में इस संस्था ने समाज के विभिन्न वर्गों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम चलाए हैं। मुख्यमंत्री ने फाउंडेशन के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि समाज के हर वर्ग तक विकास की धारा पहुंच सके। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और युवाओं को समाज को वापस देने की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    पंजाबी यूनिवर्सिटी के छात्रों ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया। छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह राशि उनके लिए राहत की सांस लेकर आई है क्योंकि पिछले कुछ समय से वित्तीय संकट के कारण कई शैक्षणिक कार्यक्रम और सुविधाएं बाधित हो रही थीं। पंजाबी साहित्य की छात्रा सिमरनजीत कौर ने कहा कि सरकार का यह कदम सिद्ध करता है कि पंजाब सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेती है। कंप्यूटर साइंस के छात्र अमरजीत सिंह ने कहा कि अब वे बिना किसी चिंता के अपने करियर पर फोकस कर सकेंगे। शिक्षकों ने भी इस निर्णय की सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह राशि यूनिवर्सिटी के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार का यह कदम दूरदर्शी और स्वागत योग्य है। पंजाब में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थानों का दबदबा बढ़ता जा रहा है और ऐसे में सरकारी यूनिवर्सिटीज को मजबूत करना बेहद जरूरी है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। शिक्षाविद डॉ. बलविंदर सिंह ने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी यूनिवर्सिटीज को नियमित रूप से वित्तीय सहायता देनी चाहिए ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित हो सकें। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस तरह की घोषणाएं युवाओं में सकारात्मक संदेश भेजती है और उन्हें पंजाब में रहकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

    पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राशि एकमुश्त अनुदान के रूप में जारी की जा रही है और यूनिवर्सिटी को इसका उपयोग तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करना होगा। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस राशि का एक हिस्सा शिक्षकों और कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान के लिए उपयोग किया जाएगा जबकि शेष राशि से बुनियादी ढांचे के विकास और शैक्षणिक संसाधनों में सुधार किया जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे हर तीन महीने में राशि के उपयोग की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपें। इस पारदर्शिता से यह सुनिश्चित होगा कि जनता का पैसा सही तरीके से खर्च हो और छात्रों को अधिकतम लाभ मिले। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो भविष्य में और भी वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान की यह घोषणा पंजाब की शिक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल पंजाबी यूनिवर्सिटी के लिए बल्कि पूरे प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संदेश है। इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए गंभीर है और छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेगी। शिक्षा में निवेश का यह निर्णय लंबे समय में पंजाब के युवाओं को सशक्त बनाएगा और प्रदेश के सर्वांगीण विकास में योगदान देगा। जैसे-जैसे यह राशि यूनिवर्सिटी तक पहुंचेगी और इसका उपयोग शुरू होगा, हजारों छात्रों के चेहरों पर मुस्कान आएगी और उनके सपने नई उड़ान भरेंगे। पंजाब सरकार का यह कदम शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।

     

  • सुखबीर–कैप्टन की विदेशी सैरों के विपरीत, CM मान का जापान दौरा युवाओं को देगा नौकरी

    सुखबीर–कैप्टन की विदेशी सैरों के विपरीत, CM मान का जापान दौरा युवाओं को देगा नौकरी

    चंडीगढ़: पंजाब की जनता ने दशकों तक भ्रष्टाचार, परिवारवाद और जनता के पैसे की बर्बादी का दर्द सहा है। अकाली दल और कांग्रेस के पुराने मुख्यमंत्रियों ने सरकारी खजाने को अपनी निजी संपत्ति समझा, जहां विदेश यात्राओं के नाम पर करोड़ों रुपये उड़ाए जाते थे, लेकिन राज्य के विकास के लिए एक पैसा भी नहीं लगता था। इन नेताओं की लग्जरी ट्रिप्स, परिवार के साथ शॉपिंग और मौज-मस्ती पर जनता का मेहनत का पैसा लुटाया जाता था, जबकि पंजाब के किसान, नौजवान और आम आदमी गरीबी, बेरोजगारी और कर्ज के बोझ तले दबे रहते थे।

    आज भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस काले दौर को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जहां हर फैसला जनता के हित में लिया जाता है और पारदर्शिता सबसे ऊपर है। अब विदेश यात्राओं का एकमात्र मकसद पंजाब में निवेश लाना, फैक्ट्रियां लगाना और लाखों नौकरियां पैदा करना है, ताकि राज्य आर्थिक रूप से मजबूत बने और युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो। यह बदलाव न सिर्फ राजनीतिक है, बल्कि पंजाब की जनता के लिए एक नई उम्मीद की किरण है, जहां भ्रष्टाचार की जगह ईमानदारी और विकास ने ले ली है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान इन दिनों जापान और दक्षिण कोरिया के 10 दिवसीय दौरे पर हैं, जहां वे पंजाब को निवेश का हब बनाने के लिए रोडशो और उच्च-स्तरीय बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान ही जापानी कंपनी टोप्पन स्पेशलिटी फिल्म्स ने पंजाब में 400 करोड़ रुपये का निवेश करने का ऐलान किया है, जो राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। टोक्यो और ओसाका में रोडशो के दौरान भगवंत मान ने जापानी उद्योगपतियों को बताया कि पंजाब अब निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और लाभदायक जगह है, जहां सरकारी नीतियां सरल हैं और बुनियादी ढांचा मजबूत है। आप सरकार की यह रणनीति पंजाब को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पहले कभी नहीं देखा गया।

    अब जरा पुराने मुख्यमंत्रियों को याद कीजिए, जैसे सुखबीर सिंह बादल, जिन्होंने मुख्यमंत्री रहते विदेश यात्राओं का बहाना बनाकर दुबई, लंदन और दक्षिण अफ्रीका जैसी जगहों पर सरकारी पैसे से मौज की। इन ट्रिप्स पर लाखों रुपये खर्च होते थे, जिसमें पॉकेट मनी तक शामिल होती थी, लेकिन लौटकर आते तो हाथ खाली रहते और सूटकेस परिवार के लिए ब्रांडेड कपड़े-जूते से भरे होते थे। एक बार तो दक्षिण अफ्रीका जाने के बहाने दुबई में रुककर परिवार के साथ शॉपिंग की गई और पूरा बिल पंजाब की जनता के टैक्स से चुकाया गया। लंदन ओलंपिक्स देखने के नाम पर भी सरकारी खजाने से लाखों उड़ाए गए, जबकि पंजाब में किसानों की आत्महत्या और बेरोजगारी बढ़ रही थी।

    कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी भी भ्रष्टाचार में पीछे नहीं थे, जिन्होंने 2022 में चुनाव हारने के बाद जैसे ही ईडी की जांच उनके करीब पहुंची, फौरन कनाडा और अमेरिका भाग गए। महीनों तक वे वहां रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ रहकर मौज करते रहे, जबकि पंजाब में उनके भतीजे भूपिंदर सिंह हनी से 10 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी, जिसमें 8 करोड़ उनके रिश्तेदार से ही मिले। अवैध रेत खनन मामले में ईडी ने छापे मारे, लेकिन चन्नी जांच से बचने के लिए विदेश में छिपे रहे और पंजाब की जनता को उनके भ्रष्टाचार की सजा भुगतनी पड़ी। सरकारी पैसों से विदेशी टूर करना और जांच आते ही फरार हो जाना कांग्रेस की पुरानी आदत है, जहां नेता अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं और राज्य को अराजकता में छोड़ देते हैं। चन्नी ने खुद को आम आदमी बताकर सत्ता हासिल की, लेकिन ईडी की छापेमारी ने उनकी असली छवि उजागर कर दी, जहां करोड़ों का काला धन परिवार के लिए जमा किया गया था। ऐसे नेताओं ने पंजाब को विकास से दूर रखा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।

    इन सबके विपरीत भगवंत मान विदेश इसलिए जा रहे हैं ताकि पंजाब में फैक्ट्रियां लगें, नौजवान नौकरियां पाएं और गांव-गांव में तरक्की आए। उनकी हर यात्रा का पूरा हिसाब जनता के सामने है, जहां कोई परिवार साथ नहीं जाता, कोई शॉपिंग या मौज-मस्ती नहीं होती – सिर्फ और सिर्फ पंजाब के आर्थिक उत्थान पर फोकस रहता है। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा जैसे अधिकारियों के साथ यह डेलीगेशन निवेशकों से सीधे बात करता है, और परिणाम भी दिखते हैं जैसे टोप्पन कंपनी का निवेश। आप सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त शासन दिया है, जहां विदेश यात्राएं विकास का माध्यम बनी हैं, न कि निजी सुख का। यह पारदर्शिता पंजाब की जनता को विश्वास देती है कि उनका पैसा सही जगह लग रहा है, और राज्य अब देश का सबसे समृद्ध प्रदेश बनने की राह पर है। मान की यह पहल पूर्ववर्ती सरकारों के भ्रष्टाचार से मुक्ति का प्रतीक है।

    आज पंजाब की जनता देख रही है कि असली मुख्यमंत्री कैसा होता है – जो जनता के पैसे की एक-एक पाई का हिसाब देता है और उसी पैसे से पंजाब को दुनिया का सबसे समृद्ध राज्य बनाने में जुटा रहता है। भगवंत मान और आम आदमी पार्टी ने साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार का दौर अब इतिहास बन गया है, और पंजाब का सुनहरा दौर शुरू हो चुका है, जहां निवेश, रोजगार और समृद्धि हर घर पहुंचेगी। पुराने नेताओं की लग्जरी ट्रिप्स और परिवारवाद की जगह अब विकास की राजनीति ने ले ली है, जो पंजाब को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। जनता अब समझ चुकी है कि सच्चा नेता वही है जो राज्य के हित में सोचे, न कि निजी लाभ में। आप सरकार की यह सफलता अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा है, जहां ईमानदारी से शासन चलाया जा सकता है। अंत में, भगवंत मान की यह यात्रा पंजाब के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।

  • पंजाब में 5,000 से अधिक शिक्षकों को IIT मद्रास द्वारा सिखाए जाएंगे टॉप 100 हाई-डिमांड जॉब्स

    पंजाब में 5,000 से अधिक शिक्षकों को IIT मद्रास द्वारा सिखाए जाएंगे टॉप 100 हाई-डिमांड जॉब्स

    चंडीगढ़: आईआईटी मद्रास प्रवर्तक के साथ साझेदारी कर पंजाब राज्य स्तर पर करियर गाइडेंस प्रोग्राम शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक शिक्षक को एक प्रशिक्षित करियर मैंटर बनाने के लिए एक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

    आज यहां यह जानकारी साझा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तहत 5,000 से अधिक शिक्षकों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि वे छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर सकें, करियर संबंधी विकल्पों के बारे में सटीक जानकारी दे सकें और करियर चयन में मार्गदर्शन कर सकें।

    बैंस ने कहा कि इस कार्यक्रम में शिक्षकों को बुनियादी करियर काउंसलिंग, कक्षा सत्रों के लिए कौशल तथा वन-टू-वन गाइडेंस के लिए मुफ्त ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षक टॉप 100 उच्च-डिमांड वाले करियर, ढांचागत मूल्यांकन उपकरणों तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर उभर रहे करियर रुझानों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। आईआईटी मद्रास प्रवर्तक निरंतर शैक्षणिक सहायता और डिजिटल संसाधन प्रदान करेगा।

    इस साझेदारी के माध्यम से हमारा लक्ष्य शिक्षकों को अपने स्कूलों में प्रभावशाली करियर सलाहकार के रूप में सेवा देने में सक्षम बनाकर एक सार्थक और सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करना है। इस सहभागिता के माध्यम से शिक्षक एक ढांचागत करियर मार्गदर्शन वातावरण की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब अब शिक्षकों के लिए राज्य-स्तरीय करियर काउंसलिंग गाइडेंस कार्यक्रम लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है।

    प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी शिक्षक छात्रों को उनकी क्षमताओं की पहचान कराने, नए युग के पेशों की खोज करवाने तथा साक्ष्य एवं योग्यता आधारित मार्ग चुनने में सक्षम होंगे।

    पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने कहा कि इस पहल से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को विशेष रूप से लाभ होने की उम्मीद है जिससे उन्हें उच्च-गुणवत्ता वाली करियर गाइडेंस तक आसान पहुंच मिलेगी, जो पहले निजी काउंसलरों तक सीमित थी। अगले कुछ महीनों में हजारों शिक्षक नए कौशल, नए आत्मविश्वास और लाखों बच्चों के भविष्य को आकार देने की नई क्षमता हासिल करेंगे।

    बोर्ड के साथ साझेदारी पर खुशी व्यक्त करते हुए आईआईटी मद्रास प्रवर्तक के चीफ नॉलेज ऑफिसर श्रीकांत ने कहा, “हमारा उद्देश्य स्पष्ट और सीधा है, पंजाब में कोई भी बच्चा भ्रम या अधूरी जानकारी के आधार पर करियर का चयन न करे।”

  • पंजाब में बेटियों की सुरक्षा को लेकर अहम पहल, 2026 तक लड़कियों का अनुपात बढ़ाने का लक्ष्य

    पंजाब में बेटियों की सुरक्षा को लेकर अहम पहल, 2026 तक लड़कियों का अनुपात बढ़ाने का लक्ष्य

    चंडीगढ़: पंजाब में कन्या भ्रूण हत्या जैसे बुरे काम को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि अब पंजाब सिर्फ बदलाव नहीं चाहता, बल्कि सबसे अच्छा बनना चाहता है। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक पंजाब का लिंग अनुपात देश के औसत से भी बेहतर हो।

    मान सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारियों को सख्त आदेश दिए हैं कि गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक हर बात पर नजर रखी जाए। इसका मकसद है कि कहीं भी लिंग जांच या कन्या भ्रूण हत्या की कोशिश न होने पाए। यह कदम दिखाता है कि सरकार महिलाओं के सम्मान और बराबरी को बहुत महत्वपूर्ण मानती है।

    चंडीगढ़ में हुई एक कार्यशाला में डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि लड़की के जन्म को रोकना समाज के लिए सबसे बड़ा दोष है। उन्होंने साफ कहा कि अब पंजाब में इस अपराध के लिए “बिल्कुल बर्दाश्त नहीं” की नीति लागू होगी। यह संदेश स्वास्थ्य कर्मचारियों और पूरे समाज के लिए है कि कन्या भ्रूण हत्या किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है।

    इस मिशन के लिए राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सिविल सर्जन, स्वास्थ्य अधिकारी, नर्सें और खासकर ASHA वर्कर हर गर्भवती महिला पर निगरानी रखेंगे, ताकि उसकी सही देखभाल हो सके और कोई गलत काम न हो सके। यह निगरानी न केवल अपराध रोकने में मदद करेगी, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा भी बढ़ाएगी।

    मंत्री ने पीसी-पीएनडीटी कानून (1994) की अहमियत भी समझाई। यह कानून इसलिए बनाया गया था कि कोई भी व्यक्ति मशीनों का गलत इस्तेमाल करके लिंग जांच न कर सके। उन्होंने कहा कि कानून तभी काम करता है जब सरकार और समाज दोनों मिलकर इसे लागू करें—और मान सरकार यही कर रही है।

    सरकार सिर्फ सख्ती ही नहीं कर रही, बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रही है। पूरे राज्य में ऐसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनसे लोगों में बेटियों के प्रति सम्मान बढ़े और सभी समझें कि लड़की और लड़का दोनों बराबर हैं। यह केवल सरकारी काम नहीं, बल्कि समाज को बदलने का अभियान है।

    पंजाब सरकार का यह कदम आने वाले समय में राज्य की पहचान को और ऊँचा करेगा—एक ऐसा पंजाब, जहाँ बेटी का जन्म खुशी की बात होगा, जहां महिलाओं को बराबर मौके मिलेंगे और जहाँ सरकार एक सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य बनाएगी। यह अभियान दूसरे राज्यों के लिए भी एक अच्छी मिसाल बनेगा।