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  • पंजाब स्कूलों में चार साहिबजादों की शहादत का नमन, तीन दिन का विशेष शैक्षिक कार्यक्रम शुरू

    पंजाब स्कूलों में चार साहिबजादों की शहादत का नमन, तीन दिन का विशेष शैक्षिक कार्यक्रम शुरू

    चंडीगढ़: पंजाब के शिक्षा मंत्री स हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबज़ादों—बाबा अजीत सिंह जी, बाबा जुझार सिंह जी, बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की अतुलनीय शहादत को नमन करने के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड राज्यभर के स्कूलों में तीन दिवसीय शैक्षिक सत्र आयोजित करेगा, ताकि विद्यार्थियों को सिख इतिहास की गौरवशाली परंपरा और वीरता की समृद्ध विरासत से अवगत जा सके।

    उन्होंने कहा कि चार साहिबज़ादों के जीवन और शहादत पर विशेष रूप से तैयार शैक्षिक कार्यक्रम 22 से 24 दिसंबर 2025 तक पंजाब के सभी स्कूलों (सरकारी, निजी और एडिड) में प्रातःकालीन सभा के दौरान 15 मिनट के विशेष सत्र के रूप में आयोजित किया जाएगा।

    बैंस ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सत्रों में उपयोग होने वाली शैक्षिक सामग्री श्रीोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एस जी पी सी ) द्वारा प्रमाणित हो, ताकि उसकी ऐतिहासिक शुद्धता, मर्यादा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

    शिक्षा मंत्री ने आगे बताया कि ये सत्र विद्यार्थियों को उस शौर्यपूर्ण और विलक्षण अध्याय से परिचित करवाएंगे, जिसमें श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा किला आनंदगढ़ साहिब से प्रस्थान से लेकर साका सरहिंद तक के इतिहास का वर्णन किया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड मुख्यालय में 22 से 24 दिसंबर 2025 तक स्कूली विद्यार्थियों द्वारा कीर्तन दरबार (शाम 4:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक) आयोजित करने के साथ-साथ धार्मिक और ऐतिहासिक समारोह भी होंगे, जिनका उद्देश्य सिख शहीदों के अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय को श्रद्धांजलि देना है। इन आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में पंजाब के इतिहास और सिख योद्धाओं की बहादुरी के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और अधिक मजबूत किया जाएगा।

    हरजोत सिंह बैंस ने इस बात पर जोर दिया कि “वास्तविक शिक्षा का अर्थ केवल पुस्तकें पढ़ना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी भूमि की असली पहचान तथा महान बलिदानों से जोड़ना है। साहिबज़ादों पर आधारित यह तीन दिवसीय शैक्षिक कार्यक्रम उनकी अतुलनीय शहादत को नमन करते हुए हर विद्यार्थी के भीतर साहस, वीरता और सत्य-असत्य के प्रति सजग रहने का जज़्बा जगाने के लिए है।”

  • AAP सांसद ने लोकसभा में उठाई बाढ़ पीड़ितों की आवाज, पंजाब के लिए मांगा ₹50,000 करोड़ का पैकेज

    AAP सांसद ने लोकसभा में उठाई बाढ़ पीड़ितों की आवाज, पंजाब के लिए मांगा ₹50,000 करोड़ का पैकेज

    चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (AAP) ने पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद केंद्र की BJP सरकार द्वारा की जा रही घोर उपेक्षा और भेदभाव को संसद में बेनकाब किया है। AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने लोकसभा सत्र के दौरान पंजाब में हुए भारी नुकसान का मुद्दा उठाया और BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल ₹50,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की।

    आनंदपुर साहिब से सांसद कंग ने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित छह जिलों के 2,500 गाँवों को दो महीने बीत जाने के बाद भी केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है।

    सांसद कंग ने सदन को बताया कि कुछ महीने पहले पंजाब में आई भयंकर बाढ़ ने लगभग 2,500 गाँवों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और 5 लाख एकड़ से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे गंभीर असर सीमावर्ती (बॉर्डर) जिलों में पड़ा, और याद दिलाया कि ये वही जिले हैं जिनके लोगों ने ‘ऑपरेशन संदूर’ के दौरान भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की लड़ाई लड़ी थी।

    कंग ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और भारत सरकार के तमाम मंत्री बाढ़ के बाद पंजाब का दौरा करने आए, लेकिन दो महीने बाद भी इन छह जिलों के लोगों को दोबारा पैरों पर खड़ा करने के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई।

    उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्र की दोहरी नीति पर सवाल उठाया – “जब बिहार में चुनाव होते हैं तो आप ₹50,000 करोड़, ₹70,000 करोड़ और यहाँ तक कि ₹90,000 करोड़ के पैकेज की बोलियाँ लगाते हैं।” उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब, जिसने देश की आज़ादी की लड़ाई में और देश के अन्न भंडार को भरने में सबसे बड़ा योगदान दिया, उसे संकट के समय अकेला छोड़ दिया गया है। उन्होंने इसे “सबसे बड़ा भेदभाव” बताया और इसके लिए BJP सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सांसद कंग ने हरियाणा और राजस्थान की सरकारों की भी आलोचना की, जो पंजाब के पानी का हिस्सा मांगती हैं, लेकिन आपदा के इस समय में पंजाब का साथ देने में विफल रहीं।

    AAP सांसद ने BJP सरकार से तत्काल ₹50,000 करोड़ का विशेष पैकेज जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह राशि पंजाब के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए, जिनके घर, अस्पताल, सड़कें और पूरा बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया है, और जिनकी 5 लाख एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं हैं, बेहद ज़रूरी है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फंड खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने और खुद का पुनर्वास करने में मदद करेगा, जो राष्ट्र के लिए लड़ते हैं। AAP सरकार इस अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और केंद्र को पंजाब का हक़ देना ही होगा।

  • पंजाब में शिक्षा का नया अध्याय: अब हर शिक्षक बनेगा करियर मेंटर, आईआईटी मद्रास देगा प्रशिक्षण

    पंजाब में शिक्षा का नया अध्याय: अब हर शिक्षक बनेगा करियर मेंटर, आईआईटी मद्रास देगा प्रशिक्षण

    चंडीगढ़: आईआईटी मद्रास प्रवर्तक के साथ साझेदारी कर पंजाब राज्य स्तर पर करियर गाइडेंस प्रोग्राम शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक शिक्षक को एक प्रशिक्षित करियर मैंटर बनाने के लिए एक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। आज यहां यह जानकारी साझा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तहत 5,000 से अधिक शिक्षकों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि वे छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर सकें, करियर संबंधी विकल्पों के बारे में सटीक जानकारी दे सकें और करियर चयन में मार्गदर्शन कर सकें।

    बैंस ने कहा कि इस कार्यक्रम में शिक्षकों को बुनियादी करियर काउंसलिंग, कक्षा सत्रों के लिए कौशल तथा वन-टू-वन गाइडेंस के लिए मुफ्त ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षक टॉप 100 उच्च-डिमांड वाले करियर, ढांचागत मूल्यांकन उपकरणों तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर उभर रहे करियर रुझानों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। आईआईटी मद्रास प्रवर्तक निरंतर शैक्षणिक सहायता और डिजिटल संसाधन प्रदान करेगा।

    बैंस ने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से हमारा लक्ष्य शिक्षकों को अपने स्कूलों में प्रभावशाली करियर सलाहकार के रूप में सेवा देने में सक्षम बनाकर एक सार्थक और सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करना है। इस सहभागिता के माध्यम से शिक्षक एक ढांचागत करियर मार्गदर्शन वातावरण की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब अब शिक्षकों के लिए राज्य-स्तरीय करियर काउंसलिंग गाइडेंस कार्यक्रम लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है।

    हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी शिक्षक छात्रों को उनकी क्षमताओं की पहचान कराने, नए युग के पेशों की खोज करवाने तथा साक्ष्य एवं योग्यता आधारित मार्ग चुनने में सक्षम होंगे। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने कहा कि इस पहल से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को विशेष रूप से लाभ होने की उम्मीद है जिससे उन्हें उच्च-गुणवत्ता वाली करियर गाइडेंस तक आसान पहुंच मिलेगी, जो पहले निजी काउंसलरों तक सीमित थी। अगले कुछ महीनों में हजारों शिक्षक नए कौशल, नए आत्मविश्वास और लाखों बच्चों के भविष्य को आकार देने की नई क्षमता हासिल करेंगे।

    बोर्ड के साथ साझेदारी पर खुशी व्यक्त करते हुए आईआईटी मद्रास प्रवर्तक के चीफ नॉलेज ऑफिसर श्रीकांत ने कहा, “हमारा उद्देश्य स्पष्ट और सीधा है, पंजाब में कोई भी बच्चा भ्रम या अधूरी जानकारी के आधार पर करियर का चयन न करे।”

  • मान सरकार का त्वरित निर्णय—5 गांवों में सिंचाई नहर का कार्य फिर से शुरू, किसानों में खुशी

    मान सरकार का त्वरित निर्णय—5 गांवों में सिंचाई नहर का कार्य फिर से शुरू, किसानों में खुशी

    चंडीगढ़: पंजाब में मान सरकार की जनसुनवाई और त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण सामने आया है। मोगा ज़िले के गांव झंडेवाल और आसपास की 5 गांवों की पंचायतों ने जल आपूर्ति व्यवस्था की समस्या को लेकर एक वीडियो माध्यम से अपनी व्यथा साझा की थी। वीडियो में ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांवों में पानी की उचित व्यवस्था नहीं है और पुरानी जल प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। इस वीडियो के सामने आते ही मोगा विधानसभा क्षेत्र से विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पूरी मदद की और जल प्रणाली का निर्माण कार्य दोबारा शुरू करवाया। यह कार्य अब बेहतरीन तरीके से पूरा किया जा रहा है और स्थानीय लोग इस पहल की प्रशंसा कर रहे है।

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछली सरकारों के दौरान उनकी आवाज़ कभी सत्ता के कानों तक नहीं पहुंच पाती थी। दशकों तक उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज किया जाता रहा। लेकिन मान सरकार के कार्यकाल में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब आम जनता की बात सुनी जा रही है और उनकी समस्याओं का समाधान दिनों में हो रहा है। झंडेवाल के एक किसान ने कहा, हमारे गांव में पानी की इतनी बुरी हालत थी कि खेती के लिए संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन मान सरकार ने हमारी एक वीडियो देखी और तुरंत काम शुरू हो गया। यह सच्ची जनता की सरकार है।”

    पानी की समस्या पंजाब के कई ग्रामीण इलाकों में एक गंभीर मुद्दा रही है। खासकर मोगा ज़िले के कई गांवों में पुरानी जल आपूर्ति प्रणाली जर्जर हो चुकी थी और नई व्यवस्था के लिए वर्षों से मांग की जा रही थी। झंडेवाल और उसके आसपास के 5 गांवों की पंचायतों ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए अपनी समस्या को सार्वजनिक किया। उन्होंने एक वीडियो बनाकर बताया कि किस तरह उनके गांवों में पानी की कमी से जीवन दूभर हो गया है और खेती भी प्रभावित हो रही है। इस वीडियो को जैसे ही MLA अमनदीप कौर अरोड़ा ने देखा, उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और संबंधित विभागों को तत्काल निर्देश दिए। परिणामस्वरूप, रुका हुआ निर्माण कार्य फिर से शुरू हुआ और अब यह योजनाबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है।

    MLA अमनदीप कौर अरोड़ा ने इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने न केवल ग्रामीणों की समस्या को समझा बल्कि उसका तुरंत समाधान भी सुनिश्चित किया। अरोड़ा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा, “आम जनता की आवाज़ ही हमारी प्राथमिकता है। झंडेवाल और आसपास के गांवों में पानी की समस्या को लेकर जो वीडियो सामने आई, उस पर तुरंत कार्रवाई की गई। मान सरकार का संकल्प है कि पंजाब के हर नागरिक को बुनियादी सुविधाएं मिलें। किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हमारी पहली जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह काम पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।

    झंडेवाल और आसपास के गांवों के निवासी इस पहल से बेहद खुश हैं। एक स्थानीय सरपंच ने कहा, “हमने कई बार पुरानी सरकारों से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन मान सरकार ने हमारी एक वीडियो पर इतनी जल्दी प्रतिक्रिया दी कि हम हैरान रह गए। यह सच्ची लोकतांत्रिक सरकार का उदाहरण है।” ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समुचित व्यवस्था होने से न केवल उनकी घरेलू जरूरतें पूरी होंगी बल्कि खेती में भी सुधार आएगा। पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और पानी की उपलब्धता किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से लगभग 5 गांवों के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

    मान सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने का वादा किया था और अब यह वादा धरातल पर उतरता दिख रहा है। पहले की सरकारों में शिकायतों और समस्याओं का निवारण महीनों और सालों तक लटका रहता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए नागरिक सीधे अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा रहे हैं और सरकार भी त्वरित कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है जहां सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद हो। पंजाब में इस तरह की कई पहल देखने को मिल रही हैं जहां नागरिकों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।

    पानी की समस्या केवल झंडेवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के कई हिस्सों में यह एक बड़ा मुद्दा रहा है। मान सरकार ने ग्रामीण इलाकों में जल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव तक साफ पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था हो। इसके तहत पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदला जा रहा है, नए जल स्रोतों का विकास किया जा रहा है और जल संरक्षण की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। झंडेवाल में जो काम हुआ है वह इसी योजना का हिस्सा है और आने वाले समय में ऐसे कई और गांवों को इसका लाभ मिलेगा।

    इस पूरे प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार जनता के प्रति संवेदनशील होती है तो बदलाव संभव है। कईं सालों से उपेक्षित रहे किसानों और ग्रामीणों को अब लग रहा है कि उनकी सरकार वाकई उनके लिए काम कर रही है। झंडेवाल की यह घटना पूरे पंजाब में एक उदाहरण बन गई है कि किस तरह एक छोटी सी पहल और सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया जनता के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह काम न केवल उनकी तात्कालिक समस्या का समाधान है बल्कि यह भविष्य के लिए भी एक मज़बूत बुनियाद तैयार कर रहा है। पंजाब के अन्य इलाकों से भी ऐसी ही उम्मीदें जुड़ी हुई हैं कि मान सरकार उनकी समस्याओं को भी इसी तरह प्राथमिकता देगी और त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी।

  • मान सरकार का बड़ा तोहफ़ा—कपास के दामों में ₹1,800+ की सीधी छलांग!

    मान सरकार का बड़ा तोहफ़ा—कपास के दामों में ₹1,800+ की सीधी छलांग!

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह राज्य के मेहनती किसानों के साथ मज़बूती से खड़ी है। इस साल, जब बाज़ार में कपास (नरमा और देसी) की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिर रही थीं, तब मान सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया और किसानों को भारी नुकसान से बचाया।

    शुरुआत में, जब कपास मंडियों में आना शुरू हुआ, तो निजी व्यापारी इसे ₹5,700 से ₹6,800 प्रति क्विंटल के बीच खरीद रहे थे। यह दाम MSP से काफी कम थे, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। इस मुश्किल घड़ी में, मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर, राज्य सरकार ने तुरंत केंद्र सरकार की एजेंसी कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) पर बड़े पैमाने पर खरीद शुरू करने के लिए दबाव डाला।

    CCI की सक्रिय भागीदारी के कारण, कपास की कीमतों में ज़बरदस्त सुधार हुआ। आज, पंजाब मंडी बोर्ड के आंकड़ों से यह पुष्टि होती है कि नरमा कपास का औसत दाम ₹7,500 प्रति क्विंटल से भी ज़्यादा हो गया है, जो कि ₹7,710 प्रति क्विंटल के MSP के बेहद करीब है। वहीं, देसी कपास की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है। यह किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्होंने पहले कम दाम पर अपनी फसल बेचने की मजबूरी महसूस की थी। मान सरकार की पहल से वे अब अपनी मेहनत का सही मूल्य पा रहे हैं।

    इस साल पंजाब के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ आने के बावजूद, कपास की आवक पिछले साल के मुकाबले 1 लाख क्विंटल से ज़्यादा रही है। यह दिखाता है कि मान सरकार की नीतियों पर किसान अब भी कपास की खेती में भरोसा बनाए हुए हैं।राज्य सरकार की प्रो-एक्टिव सोच का ही नतीजा है कि मंडी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में CCI ने जहाँ केवल 170 क्विंटल कपास खरीदी थी, वहीं इस बार सरकार के दबाव के बाद CCI ने 35,348 क्विंटल से ज़्यादा कपास की खरीद सुनिश्चित की है। इस बड़े पैमाने की खरीद ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया और कीमतों को नीचे गिरने से रोका।

    मान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पंजाब के किसानों को उनकी फसल के लिए MSP से कम कीमत पर बिक्री का संकट न झेलना पड़े। 1 दिसंबर तक खरीदी गई 2,30,423 क्विंटल कपास में से, शुरुआत में 60% से अधिक फसल MSP से नीचे बेची गई थी, लेकिन CCI के प्रवेश के बाद यह ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है।

    किसानों का मुनाफा सुरक्षित करना और उन्हें आर्थिक मज़बूती देना ही मान सरकार का मुख्य लक्ष्य है। यह पहल स्पष्ट रूप से दिखाती है कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए संकट के समय में भी तुरंत और प्रभावी कदम उठाने को तैयार है।मान सरकार किसानों के सम्मान और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है!

  • मुख्यमंत्री मान ने जापान से दिलाया 500 करोड़ का निवेश, पंजाब को मिलेगी नई औद्योगिक ताकत

    मुख्यमंत्री मान ने जापान से दिलाया 500 करोड़ का निवेश, पंजाब को मिलेगी नई औद्योगिक ताकत

    चंडीगढ़: अपने जापान दौरे के तीसरे दिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज प्रदेश के लिए 500 करोड़ रुपए का निवेश सुरक्षित किया है, जिसमें जापान की स्टील कंपनी आइची स्टील ने प्रदेश में वर्धमान स्पेशल स्टील्स के साथ अपने सहयोग को बढ़ाने का आश्वासन दिया है। आइची स्टील और वर्धमान स्पेशल स्टील्स ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदेश के लिए एक स्वर्णिम दिन है क्योंकि आइची स्टील कॉर्पोरेशन, जिसे टोयोटा की स्टील शाखा के रूप में जाना जाता है, ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि आइची स्टील की वर्धमान में पहले से ही लगभग 24.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह मुख्य तकनीकी साझेदार के रूप में पंजाब के औद्योगिक परिवेश में एक मजबूत तथा विकसित हो रही भारत-जापान साझेदारी का प्रतीक है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि जापान की अग्रणी स्टील कंपनी पंजाब में भविष्य की फैक्ट्री संचालन का अध्ययन करेगी, जिसमें लगभग 500 करोड़ रुपये के संभावित निवेश के लिए मूल्यांकन शामिल है।

    वर्धमान स्पेशल स्टील्स के साथ आइची स्टील की साझेदारी को मजबूत और सुदृढ़ करने के लिए पंजाब सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा जापानी कंपनियों को प्रदेश में उनके कारोबार और संचालन के विस्तार में सहायता करना पंजाब की प्रमुख प्राथमिकता है। भगवंत सिंह मान ने उम्मीद जताई कि आइची ग्रुप का तकनीकी सहयोग और वर्धमान ग्रुप की विशेषज्ञता प्रदेश में औद्योगिक क्रांति के नए युग की शुरुआत करेगी।

    आइची को 13-15 मार्च, 2026 को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, मोहाली में होने वाले प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन 2026 में भाग लेने का न्योता भी दिया ताकि गहन भागीदारी और विस्तारित निवेश को और प्रोत्साहित किया जा सके। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सम्मेलन पंजाब के विकास को दर्शाता है, जिसमें अग्रणी औद्योगिक दिग्गजों को एक मंच पर लाकर साझेदारी और सहयोग के नए अवसर प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि जापानी निवेशक इस सम्मेलन में बड़े पैमाने पर शामिल होंगे, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को भारी बल मिलेगा।

    प्रदेश सरकार का लक्ष्य हमारे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना और निवेशकों के लिए एक स्थिर तथा विश्वसनीय माहौल बनाना है। जापानी उद्योग के साथ पंजाब के संबंधों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि ये संबंध पहले से ही मजबूत हैं और जापान की कई बड़ी कंपनियों ने पंजाब में अपना भरोसा जताया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह साझेदारी जापानी निवेशकों का पंजाब में विश्वास और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    इस साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने के लिए पंजाब सरकार प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं को उजागर कर रही है, सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाएं तलाश रही है और जापानी उद्योग के साथ लंबे समय की साझेदारी को और गहरा कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब आज भारत के सबसे अधिक कारोबार-अनुकूल राज्यों में से एक है और भारत सरकार ने व्यापार सुधार कार्य योजना (बी.आर.ए.पी.) 2024 रैंकिंग में पंजाब को अग्रणी के रूप में मान्यता दी है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश सरकार द्वारा कारोबार को सुगम बनाने, पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूरंदेशी सोच है, जो नीति में स्थिरता, समय पर निर्णय लेना और निवेशकों के समय तथा विश्वास का सम्मान करने वाली शासन प्रणाली प्रदान करना है, ताकि पंजाब को वैश्विक स्तर पर उद्योग के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि पंजाब का दृष्टिकोण साझेदारों और उद्योगों के साथ मिलकर काम करना, उनकी जरूरतों को समझना और सरकार की ओर से विकास को सुनिश्चित करना है। भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि पंजाब ने अपने बुनियादी ढांचे को और मजबूत करते हुए औद्योगिक क्षमता का विस्तार कर चुका है और निवेश के नए रास्ते खोल चुका है।

  • पंजाब में उद्योग लाने के लिए सक्रिय हुए CM मान, यामाहा–होंडा–आइसन से की अहम बैठकें

    पंजाब में उद्योग लाने के लिए सक्रिय हुए CM मान, यामाहा–होंडा–आइसन से की अहम बैठकें

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज जापान के प्रमुख उद्योगपतियों के सामने राज्य को सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्हें अपने व्यावसायिक विस्तार के लिए पंजाब में निवेश करने का आमंत्रण दिया।

    जापान दौरे के पहले दिन मुख्यमंत्री ने जे.बी.आई.सी., आइसन इंडस्ट्री, यामाहा, होंडा मोटर, जे.आई.सी.ए. दक्षिण एशिया विभाग के महानिदेशक, टॉरे इंडस्ट्रीज़, अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एम.ई.टी.आई.) के संसदीय उप-मंत्री, फुजित्सु लिमिटेड और अन्य प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। चर्चा के दौरान भगवंत सिंह मान ने उन्नत विनिर्माण, मोबिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जापान के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने जापानी कंपनियों को राज्य में उभर रहे नए अवसरों का अन्वेषण करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि पंजाब का भविष्य इन क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप नए रूप में आकार ले रहा है।

     

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों को 13–15 मार्च 2026 को आईएसबी मोहाली कैंपस में होने वाले 6वें प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सम्मेलन पंजाब की प्रगति को प्रदर्शित करेगा और विश्व के बड़े उद्योगों को एक मंच पर लाकर साझेदारी और सहयोग के नए अवसर प्रस्तुत करेगा। उन्होंने दोहराया कि पंजाब और जापान विश्वास, गुणवत्ता और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के आधार पर मजबूत व्यापारिक संबंध स्थापित कर सकते हैं और राज्य सरकार इन संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।

    अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से विकास और समृद्धि का साझा भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती अपने साहस, लचीलापन, मेहनत, उद्यमशीलता, रचनात्मकता और पारस्परिक भाईचारे के लिए जानी जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य ने हमेशा भारत के विकास में, विशेषकर देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में, महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पंजाब आधुनिक उद्योगों, तकनीक और वैश्विक सहयोग के लिए अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।

    जापानी उद्योग जगत के साथ पंजाब के मजबूत और उपयोगी संबंधों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने जापानी कंपनियों को पंजाब के बदलते औद्योगिक वातावरण के अगले चरण का हिस्सा बनने के लिए हार्दिक आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि विश्वास, अनुशासन और दीर्घकालिक साझेदारी की मूल्य-व्यवस्था पंजाब और जापान दोनों की नींव में है, जो राज्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। भगवंत सिंह मान ने बताया कि कई जापानी कंपनियां पहले से ही पंजाब में अपने व्यवसाय के साथ उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर चुकी हैं और अब और अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां भी राज्य में निवेश के प्रति विश्वास और रुचि दिखा रही हैं।

    इस दौरान मुख्यमंत्री के आमंत्रण पर जापानी कंपनियों ने पंजाब में निवेश के प्रति गहरी दिलचस्पी जताई। भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसे निवेश न केवल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति को भी और गति देंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जापानी निवेशकों को हर स्तर पर पूर्ण समर्थन और सहयोग प्रदान करेगी तथा राज्य में औद्योगिक विकास को और प्रोत्साहन देना समय की आवश्यकता है।

  • मान सरकार का संवेदनशील कदम: 93 शिक्षकों को मिला न्याय का भरोसा

    मान सरकार का संवेदनशील कदम: 93 शिक्षकों को मिला न्याय का भरोसा

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के शिक्षकों के साथ हुई वर्षों की अनदेखी को समाप्त करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। बाबा हीरा सिंह भट्टल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी समेत विभिन्न सरकारी कॉलेजों में कार्यरत 93 शिक्षकों को पिछली सरकार के कार्यकाल में रोके गए 36 महीनों के बकाया वेतन का भुगतान करने की घोषणा की है। यह निर्णय उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब इसी वेतन संकट के कारण एक शिक्षक ने आत्महत्या कर ली थी। मुख्यमंत्री ने विशेष बैठक आयोजित कर पीड़ित शिक्षकों और शहीद शिक्षक के परिवार से मुलाकात की तथा तत्काल राहत का आश्वासन दिया।

    सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रभावित शिक्षकों के साथ विस्तृत बैठक की, जिसमें उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। बैठक में सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब उस शिक्षक के दो बच्चे भी उपस्थित थे, जिनके पिता ने वेतन न मिलने और कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर ली थी। मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। इस घटना ने पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग की उपेक्षित स्थिति और शिक्षकों की दुर्दशा को उजागर कर दिया था। सीएम मान ने इस त्रासदी को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया और वित्त विभाग से बकाया राशि जारी करने की मंजूरी दी।

    पिछली सरकार के कार्यकाल में इन 93 शिक्षकों का वेतन लगातार 36 महीनों तक रोका गया था, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। कई शिक्षकों को अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण के लिए भारी ब्याज दरों पर कर्ज़ लेना पड़ा। वेतन की अनिश्चितता और बढ़ते कर्ज के दबाव ने कई शिक्षकों को मानसिक तनाव और अवसाद में धकेल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आय का बंद होना किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन-मृत्यु का प्रश्न बन सकता है, खासकर तब जब परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर हो। शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे को बार-बार उठाया था, लेकिन पिछली सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कहा कि शिक्षक समाज के निर्माता होते है और उनकी उपेक्षा किसी भी सरकार के लिए शर्म की बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्ती की सरकार हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी है जिसके साथ अन्याय हुआ है। सीएम ने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। इन शिक्षकों के साथ जो अन्याय हुआ है, वह क्षमा योग्य नहीं है।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति को उत्पन्न नहीं होने दिया जाएगा और शिक्षकों के वेतन में कोई देरी नहीं होगी।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 36 महीने के बकाया वेतन की राशि करोड़ों रुपये में है, और इसे चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। पहले चरण में जिसने आत्महत्या की उस शिक्षक के परिवार और सबसे अधिक संकटग्रस्त शिक्षकों को राशि जारी की जाएगी।

    बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील और त्वरित निर्णय की सराहना की। कई शिक्षक भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि वर्षों बाद उन्हें ऐसा लगा कि सरकार उनकी सुन रही है। एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा, “हमें लगा था कि हमारी आवाज़ कभी नहीं सुनी जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने हमें विश्वास दिलाया कि हर समस्या का समाधान है।” शिक्षक के परिवार के सदस्यों ने कहा कि यह कदम उनके लिए न्याय की दिशा में पहला कदम है और वे सरकार के आभारी है। शिक्षक संघों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया और इसे पंजाब सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण बताया।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय पंजाब में शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जब शिक्षक आर्थिक रूप से सुरक्षित होंगे, तो वे अपने कार्य में पूरी तरह समर्पित हो सकेंगे। विशेषज्ञों ने कहा कि वेतन की अनिश्चितता न केवल शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित करती है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर डालती है। पंजाब सरकार के इस निर्णय से अन्य राज्यों को भी प्रेरणा मिलेगी कि शिक्षकों के कल्याण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। कई शैक्षणिक संस्थानों ने इस पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसी समस्याएं नहीं होंगी।

    पंजाब के विभिन्न शहरों में शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस कदम का स्वागत करते हुए धन्यवाद सभाएं आयोजित की हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस निर्णय की प्रशंसा कर रहे हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान की संवेदनशीलता को सराह रहे है।

    यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि सरकारी तंत्र में संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है। पंजाब सरकार का यह कदम न केवल 93 शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय में विश्वास भी जगाया है। शिक्षक की आत्महत्या एक दुखद घटना थी, लेकिन उनके बलिदान ने इस मुद्दे को राज्य स्तर पर चर्चा में ला दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह साबित किया है कि उनकी सरकार हर नागरिक की आवाज़ सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।

  • मान सरकार का बड़ा कदम: फगवाड़ा को मिला करोड़ों की लागत वाला वर्ल्ड-क्लास स्कूल ऑफ एमिनेंस

    मान सरकार का बड़ा कदम: फगवाड़ा को मिला करोड़ों की लागत वाला वर्ल्ड-क्लास स्कूल ऑफ एमिनेंस

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति लाई है, उसका सबसे बेहतरीन और चमचमाता उदाहरण फगवाड़ा का सरकारी स्कूल है। यह वह संस्थान है जो कई सालों तक टूटा-फूटा रहा और उपेक्षा का शिकार था, लेकिन आज करोड़ों रुपये के बड़े निवेश से यह एक विश्व-स्तरीय ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ बन चुका है, जो पंजाब की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नया और सुनहरा उदाहरण पेश कर रहा है। यह सिर्फ एक नई इमारत नहीं है, बल्कि यह गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को मुफ्त में प्राइवेट स्कूलों जैसी शानदार और अच्छी शिक्षा देने के लिए तैयार किया गया एक संपूर्ण केंद्र है।

    फगवाड़ा के इस ऐतिहासिक सरकारी स्कूल में जो परिवर्तन हुआ है, उसे छात्रों ने खुद “ओल्ड टू आउटस्टैंडिंग” (पुराने से बेहतरीन) नाम दिया है। यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, बल्कि यह उस अद्भुत बदलाव की गवाही है जो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने लाया है। इस अभूतपूर्व ‘बदलाव’ के बाद, छात्र खुद कह रहे हैं कि उन्होंने महंगे प्राइवेट स्कूल छोड़ दिए और यहां दाखिला लिया, क्योंकि जो सुविधाएं यहां मिल रही हैं, वह कहीं नहीं हैं। यह बात साबित करती है कि भगवंत सिंह मान की सरकार सिर्फ बातें नहीं करती, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए ज़मीन पर काम कर रही है, और ये तस्वीरें विरोधियों के लिए सीधा जवाब हैं।

    फगवाड़ा स्कूल ऑफ एमिनेंस को इसकी उत्कृष्ट उपलब्धियों खासकर बुनियादी ढांचे, खेल और पढ़ाई में—के लिए पंजाब सरकार द्वारा सबसे अच्छा स्कूल घोषित किया गया है। अब यहाँ वो हर सुविधा है जिसकी कल्पना पहले केवल प्राइवेट स्कूलों में होती थी। छात्रों के लिए हाई-टेक क्लासरूम और उन्नत साइंस लेबोरेटरी उपलब्ध हैं, जो डिजिटल और इंटरैक्टिव शिक्षा को बढ़ावा देते हैं। यहाँ सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों को JEE, NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग भी दी जाती है। परिसर में एक अत्याधुनिक एस्ट्रोटर्फ़ फुटबॉल ग्राउंड बनाया जा रहा है, और यहां के छात्रों ने राज्य स्तरीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा दिखाई है। बुनियादी ढांचे में हुए बदलाव किसी क्रांति से कम नहीं हैं। पुराने परिसर की जगह अब एक सुंदर, सुरक्षित और आकर्षक इमारत खड़ी है, जिसमें साफ़-सुथरे टॉयलेट, एक आधुनिक लाइब्रेरी, स्टाफ रूम, मल्टीपर्पज़ हॉल, और सुरक्षा के लिए गार्ड की व्यवस्था है। छात्रों के लिए बस सेवा भी शुरू की गई है, जिससे दूर-दराज के बच्चों का स्कूल तक पहुँचना आसान हो गया है।

    फगवाड़ा के ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सफलता सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया है।

    इस पहल के तहत, पंजाब के 118 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ में बदला गया है। यह दिखाता है कि पंजाब सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रही है। फगवाड़ा का स्कूल इस व्यापक शिक्षा क्रांति का एक प्रमुख उदाहरण मात्र है, जिसका उद्देश्य पूरे पंजाब के गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को विश्व-स्तरीय शिक्षा मुफ्त में प्रदान करना है।

    इस स्कूल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं, और आम लोग इसकी जमकर तारीफ़ कर रहे हैं। यह सिर्फ एक सरकारी स्कूल की तस्वीर नहीं, यह बदलते पंजाब की तस्वीर है, और यह दिखाती है कि सरकार

  • मान सरकार ने नशामुक्त मरीजों के लिए फ्री स्किल ट्रेनिंग और नौकरी शुरू की

    मान सरकार ने नशामुक्त मरीजों के लिए फ्री स्किल ट्रेनिंग और नौकरी शुरू की

    लुधियाना: जो युवा कभी नशे की दलदल में थे, आज वही पंजाब के उज्जवल भविष्य के निर्माता बनने को तैयार हैं। यह कोई सपना नहीं, बल्कि पंजाब सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ की ज़मीनी हकीकत है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने सिर्फ नशा तस्करों पर नकेल ही नहीं कसी है, बल्कि नशा छोड़ने वाले हमारे युवाओं के लिए सम्मान और स्वरोजगार का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

    पंजाब में नशा बेचने वालों का बुरा समय आ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के सीधे और सख्त आदेशों पर, राज्य में नशों के खिलाफ शुरू की गई निर्णायक लड़ाई ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ ने 9 महीने पूरे कर लिए हैं और इसके बड़े नतीजे दिख रहे हैं। 1 मार्च 2025 से अब तक, पंजाब पुलिस ने रिकॉर्ड कार्रवाई करते हुए 26,256 केस दर्ज किए हैं और 38,687 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान, 1714 किलोग्राम से ज़्यादा हेरोइन समेत बहुत सारा नशीला सामान ज़ब्त किया गया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार नशे को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति पर कायम है और नशे के जाल को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    कड़ी कार्रवाई के साथ ही सरकार सुधार और रोजगार को जोड़कर एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में, लुधियाना के जिला प्रशासन ने डेयरी विकास और स्वास्थ्य विभाग की मदद से, जगरांव के सरकारी पुनर्वास केंद्र में 10 दिन का हुनर सिखाने का खास कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का मकसद, नशा छुड़ाने का इलाज करा रहे नौजवानों को पक्की कमाई के मौके देना है ताकि वे पैसों के लिए वापस नशे के दलदल में न फंसे।

    उपायुक्त हिमांशु जैन ने इस पहल को पूरा सुधार (होलीस्टिक पुनर्वास) की दिशा में एक बड़ा और इंसानियत भरा कदम बताया। उन्होंने साफ कहा, “हम पक्का कर रहे हैं कि जो भी व्यक्ति नशे को हराकर बाहर आया है, वह गरीबी या काम न मिलने की वजह से वापस नशे की तरफ न फिसले।” इसी सोच के साथ, डेयरी विकास विभाग के उप निदेशक सुरिंदर सिंह ने उद्घाटन के दिन युवाओं को डेयरी फार्मिंग (पशुपालन) और इससे जुड़े कामों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी।

    अधिकारियों का मानना है कि ये हुनर ठीक हो रहे लोगों को खुद का काम शुरू करने और आर्थिक रूप से आज़ाद होने में मदद करेंगे, जिससे उनका सुधार पक्का हो सके। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, जो लोग काबिल होंगे उन्हें छोटी डेयरी यूनिट लगाने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत बैंक से लोन और पैसे की मदद भी दी जाएगी। यह पहल सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गुरदेव सिंह कंग, और केंद्र प्रभारी डॉ. विवेक गोयल जैसे खास अधिकारियों की देखरेख में चल रही है।

    पंजाब सरकार मानती है कि हुनर सिखाने से ही सुधार को एक नया मौका बनाया जा सकता है। यह कार्यक्रम सिर्फ हुनर सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आत्मविश्वास की पूंजी देता है, जिससे वे सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। जब उनके हाथ में पक्का काम होता है, तो उन्हें किसी भी मजबूरी या लत की तरफ मुड़ना नहीं पड़ता। इस तरह यह पहल न केवल उनका जीवन सुधारती है, बल्कि नशे के पूरे दुष्चक्र को ही जड़ से तोड़ देती है, और उन्हें एक नई पहचान दिलाती है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में, पंजाब सरकार ने दिखाया है कि वह इरादों की पक्की है। सरकार ने न केवल नशा बेचने वालों के खिलाफ सख़्त क़दम उठाए हैं, बल्कि उन नौजवानों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई है जो नशे की चपेट में आ गए थे। यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे, और इसी ज़िम्मेदारी को समझते हुए, उसने नशे से बचाने के लिए एक निर्णायक लड़ाई लड़ी है और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए बेहतरीन मौके दिए हैं।

    पंजाब की अगली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो रहा है, जब सरकार नशे के कारोबारियों पर कड़ा एक्शन लेती है (जैसे 38 हज़ार से ज़्यादा तस्करों को पकड़ा गया है) और साथ ही, हमारे युवाओं को हुनर सिखाकर, काम देकर और इज्जत की ज़िंदगी देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करती है, तो यह पूरे समाज के लिए एक बड़ी और अच्छी बात है। यह कोशिश सिर्फ एक परेशानी खत्म करने तक नहीं रुकती, बल्कि यह पंजाब को फिर से रंगला पंजाब, और ख़ुशहाल बनाने की एक मजबूत शुरुआत है।