Category: Government News>Punjab Govt
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मनरेगा कर्मचारियों की जायज़ मांगों का सहानुभूतिपूर्वक समाधान किया जाएगा : तरुनप्रीत सिंह सौंद
कैबिनेट मंत्री सौंद ने सिविल अस्पताल खन्ना पहुंचकर घायल मनरेगा कर्मचारी का जाना हालचाल
चंडीगढ़/खन्ना (लुधियाना): पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं खन्ना विधानसभा क्षेत्र से विधायक तरुनप्रीत सिंह सौंद बीती रात सिविल अस्पताल, खन्ना पहुंचे और घायल मनरेगा कर्मचारी सौदागर सिंह तथा डीएसपी खन्ना विनोद कुमार का हालचाल जाना। उन्होंने सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनिंदर सिंह भसीन को निर्देश दिए कि दोनों का निःशुल्क एवं सर्वोत्तम उपचार सुनिश्चित किया जाए। इस अवसर पर सिविल एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी, मनरेगा कर्मचारी यूनियन के संरक्षक वरिंदर सिंह, अध्यक्ष गुरसेवक सिंह तथा अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। मीडिया से बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पिछले लगभग 20 दिनों से मनरेगा कर्मचारियों के साथ लगातार बातचीत और बैठकें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को बंद कर नई योजना लागू करना है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों ने अपने जीवन के कई वर्ष मनरेगा योजना के लिए समर्पित किए हैं और नई व्यवस्था में उन्हें उचित अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि मनरेगा कर्मचारियों ने नई योजना के अंतर्गत कार्य करने की इच्छा जताई है, बशर्ते उनकी जायज़ मांगों को स्वीकार किया जाए।
सौंद ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार और मनरेगा कर्मचारियों के बीच कोई मतभेद नहीं है तथा पंजाब सरकार संवाद के माध्यम से हर समस्या का समाधान चाहती है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के स्पष्ट निर्देश हैं कि मनरेगा कर्मचारियों की बात पूरी सहानुभूति के साथ सुनी जाए और उनकी जायज़ मांगों का समाधान किया जाए। उन्होंने बताया कि वे आज चंडीगढ़ में अपनी बैठकों के बाद तुरंत खन्ना पहुंचे और मनरेगा कर्मचारियों के साथ एक घंटे से अधिक समय तक बैठक की। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से दूरभाष पर बातचीत कर मनरेगा कर्मचारियों की जायज़ मांगों के संबंध में लिखित आश्वासन देने के निर्देश भी दिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनकी सभी जायज़ मांगों का संवैधानिक एवं सहानुभूतिपूर्ण ढंग से समाधान किया जाएगा।
इस अवसर पर मनरेगा कर्मचारी यूनियन, पंजाब के संरक्षक वरिंदर सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मनरेगा कर्मचारी पिछले 18 वर्षों से मनरेगा योजना के अंतर्गत सेवाएं दे रहे हैं और उनकी मुख्य मांग सरकार द्वारा रोजगार उपलब्ध कराया जाना है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद स्वयं सिविल एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के साथ सिविल अस्पताल, खन्ना पहुंचे तथा घायल कर्मचारियों के निःशुल्क और बेहतर उपचार के निर्देश डॉक्टरों को दिए।
वरिंदर सिंह ने बताया कि इससे पहले कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद के आवास पर उनकी मांगों को लेकर लगभग एक घंटे तक विस्तृत बैठक हुई। बैठक में मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से बातचीत कर जायज़ मांगों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने तथा उनके समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए और सकारात्मक समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सभी जायज़ मांगों का समाधान आपसी बातचीत के माध्यम से किया जाएगा और मनरेगा कर्मचारी यूनियन कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद द्वारा दिए गए आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया, उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) खन्ना स्वाति टिवाणा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) डॉ. मनिंदर सिंह भसीन सहित सिविल एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा मनरेगा कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
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पंजाब देश का पहला राज्य, जहां प्रत्येक जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (एसएए) स्थापित: डॉ. बलजीत कौर
चंडीगढ़: पंजाब में बाल संरक्षण तथा बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाने की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री स.भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी-एसएआरए), पंजाब द्वारा आज ‘एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करने के उपरांत आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि राज्य का कोई भी बच्चा परिवार के स्नेह, देखभाल और सुरक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रतिबद्धता को एक अधिक मजबूत, पारदर्शी और बाल-केंद्रित व्यवस्था में परिवर्तित कर रही है, जो प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और उसके सर्वोत्तम हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है।

मंत्री ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां प्रत्येक जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (एसएए) स्थापित की गई है। वर्तमान में राज्य में कुल 26 स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियां सफलतापूर्वक कार्यरत हैं, जिनमें 16 सरकारी तथा 10 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) द्वारा संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान पंजाब में अनाथ, परित्यक्त तथा सरेंडर किए गए कुल 87 बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाया गया है। इनमें से 66 बच्चों को देश के भीतर ही परिवार मिले, जिनमें 18 लड़के और 48 लड़कियां शामिल हैं, जबकि 21 बच्चों को विदेशों में गोद लिया गया, जिनमें 5 लड़के और 16 लड़कियां हैं। इसी अवधि के दौरान विशेष आवश्यकता (स्पेशल नीड्स) वाले 10 बच्चों को भी स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया।

इसके अतिरिक्त रिश्तेदारों तथा सौतेले माता-पिता (स्टेप-पेरेंट्स) के माध्यम से भी 47 बच्चों को कानूनी रूप से गोद लिया गया, जिससे कुल 134 बच्चों को स्थायी पारिवारिक सुरक्षा और स्नेहपूर्ण वातावरण प्राप्त हुआ। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित घर उपलब्ध कराने के प्रति राज्य सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के समयबद्ध पुनर्वास तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और कानूनी रूप से विनियमित बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बाल कल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू) तथा स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के सभी जिलों से उपायुक्तों के प्रतिनिधि, सिविल सर्जनों/मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के प्रतिनिधि, बाल कल्याण समितियों के सदस्य, जिला बाल संरक्षण इकाइयों के अधिकारी, स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के अधिकारी तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) के प्रतिनिधि सयम बिन खालिद ने एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022 के प्रमुख प्रावधानों, CARINGS पोर्टल के उपयोग, दस्तावेजीकरण, समयबद्ध कार्यवाही तथा विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं पर विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही पीजीआई के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. भवनीत भारती ने बच्चों की चिकित्सीय जांच, स्वास्थ्य मूल्यांकन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान तथा उनके मेडिकल रिकॉर्ड के महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के दौरान आने वाली चुनौतियों, उनके समाधान तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा की गई, ताकि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया से जुड़े सभी हितधारक कानूनी प्रावधानों और नवीनतम दिशा-निर्देशों से पूरी तरह अवगत और अद्यतन रह सकें।
इस अवसर पर सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक श्रीमती शेना अग्रवाल, विशेष सचिव श्री केशव हिंगोनिया तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
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अमृतसर में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, I.S.I. का गुर्गा हैंड ग्रेनेड और पिस्तौल समेत गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपी को पुलिस संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे : डी.जी.पी. गौरव यादव
चंडीगढ़ / अमृतसर: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दिशा-निर्देशों के अनुसार पंजाब को सुरक्षित राज्य बनाने के लिए जारी अभियान के दौरान बड़ी सफलता हासिल करते हुए अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने एक व्यक्ति को हैंड ग्रेनेड, 9 एम.एम. ग्लॉक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूसों समेत गिरफ्तार कर सीमा पार की आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। यह जानकारी आज यहां डायरैक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डी.जी.पी.) पंजाब गौरव यादव ने दी। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुमित कुमार उर्फ पंडित (24) के रूप में हुई है, जो रूपनगर के गांव सुखसाल का रहने वाला है और वर्तमान में अमृतसर के पंडोरी वड़ैच में रह रहा था। हैंड ग्रेनेड और पिस्तौल बरामद करने के अलावा पुलिस टीमों ने उसकी मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली है। डी.जी.पी. गौरव यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए सीमा पार के आई.एस.आई. हैंडलरों के संपर्क में था और उसे कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए पुलिस संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और इसमें शामिल अन्य सहयोगियों तथा हैंडलरों की पहचान के लिए आगे की जांच की जा रही है। ऑपरेशन का विवरण साझा करते हुए अमृतसर के पुलिस कमिश्नर (सी.पी.) गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पुख्ता खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीमों ने सुमित कुमार उर्फ पंडित को गिरफ्तार कर लिया और शुरू में उसके कब्जे से एक ग्लॉक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के खुलासों के आधार पर पुलिस टीमों ने एक और हैंड ग्रेनेड बरामद किया, जिससे उक्त आरोपी के सीमा पार के हैंडलरों से संबंधों का खुलासा हुआ और एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो गया। उन्होंने बताया कि आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि की आगे की जांच से पता चला है कि उसके खिलाफ पहले भी एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत आपराधिक मामला दर्ज है। इस संबंध में अमृतसर के थाना कैंट में शस्त्र अधिनियम की धाराओं 25(6,7,8), भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) की धारा 113 और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं 4 और 5 के तहत एफ.आई.आर. संख्या 109 दिनांक 21.06.2026 दर्ज की गई है। -

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत छह महीनों में 914 मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से कैशलेस स्ट्रोक उपचार
चंडीगढ़: स्ट्रोक किसी भी परिवार के जीवन में बिना किसी पूर्व चेतावनी के दस्तक देता है। एक क्षण पहले तक व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बातचीत कर रहा होता है और अपने दैनिक कार्य कर रहा होता है, लेकिन अगले ही पल मस्तिष्क की किसी धमनी में अवरोध या रक्त वाहिका फटने के कारण सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति में बदल सकता है। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि यह योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर आधुनिक इमेजिंग, गहन चिकित्सा (आईसीयू) और दीर्घकालिक उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों से जूझ रहे मरीजों को प्रभावी सहायता प्रदान कर रही है। स्ट्रोक, जिसे सामान्यतः ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाता है अथवा कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू का सेवन, मोटापा तथा अस्वस्थ जीवनशैली स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी विश्वभर में मृत्यु और स्थायी विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जिन्हें समय रहते जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखकर रोका जा सकता है। वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार समय पर उपचार मिलने से मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है तथा रक्तचाप, मधुमेह और जीवनशैली संबंधी जोखिमों पर नियंत्रण रखकर स्ट्रोक की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्ट्रोक का उपचार अत्यंत महंगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना करते हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से कैशलेस उपचार किया गया। इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले शामिल रहे, जिनके उपचार पर 14.27 लाख रुपये व्यय किए गए। राज्य सेहत एजेंसी (एसएचए) के रिकॉर्ड के अनुसार, एक्यूट स्ट्रोक तथा एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणी के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद प्रति मरीज उपचार लागत अधिक दर्ज की गई। कुल व्यय का बड़ा हिस्सा सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी आधुनिक जांचों तथा ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सीय प्रक्रियाओं पर हुआ। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का वास्तविक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक कठिनाइयों के कारण उपचार में देरी न करे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार उपलब्ध हो। स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता उपचार में होने वाली देरी तथा जीवनरक्षक चिकित्सा के बीच निर्णायक अंतर पैदा कर सकती है।” मोहनदई ओसवाल अस्पताल, लुधियाना के वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा कि स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति है, जिसमें समय पर जांच और उपचार मरीज के भविष्य का निर्धारण करते हैं। उन्होंने कहा, “आधुनिक इमेजिंग तकनीकों, गहन निगरानी और त्वरित उपचार के कारण स्ट्रोक मरीजों के उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार आया है।”उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। लोगों को शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी आना, चेहरे का एक ओर झुक जाना या बोलने में कठिनाई जैसे शुरुआती लक्षणों को पहचानकर बिना समय गंवाए चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। डॉ. सोबती के अनुसार, उपचारित मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक के मरीजों की संख्या सर्वाधिक रही है तथा सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी उन्नत जांच तकनीकें अब स्ट्रोक प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जटिल स्ट्रोक के मामलों में परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है और ऐसे समय में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना एक महत्वपूर्ण सहारा साबित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है तथा रक्तचाप को नियंत्रित रखने, मधुमेह का समुचित प्रबंधन करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।स्ट्रोक से जुड़े प्रमुख तथ्य :
स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति है, जिसमें तुरंत उपचार अत्यंत आवश्यक होता है। उपचारित मरीजों में इस्कीमिक स्ट्रोक के मामले सबसे अधिक पाए गए। सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक जांच तकनीकें स्ट्रोक प्रबंधन का प्रमुख आधार बन चुकी हैं। जटिल स्ट्रोक के मामलों में उपचार का खर्च परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाएं आकस्मिक चिकित्सा आपात स्थितियों में परिवारों के लिए प्रभावी सुरक्षा कवच सिद्ध हो रही हैं। रक्तचाप नियंत्रण, मधुमेह का समुचित प्रबंधन तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाना स्ट्रोक की रोकथाम के सबसे प्रभावी उपाय हैं। -

7,000 रुपये की रिश्वत लेते ASI को विजिलेंस ब्यूरो ने रंगे हाथों किया काबू
चंडीगढ़: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान के तहत महिला पुलिस थाना, पुलिस लाइंस, संगरूर में तैनात एएसआई (लोकल रैंक) कमलजीत सिंह को 7,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि उक्त आरोपी को भवानीगढ़, जिला संगरूर निवासी एक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। शिकायतकर्ता का अपनी पत्नी के साथ घरेलू विवाद चल रहा था, जिसके कारण उसकी पत्नी उससे अलग रह रही थी। बाद में उसकी पत्नी ने महिला पुलिस थाना, संगरूर में शिकायतकर्ता, उसके पिता तथा उसके भाई के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई थी। इस मामले की जांच एएसआई कमलजीत सिंह कर रहा था। आरोप है कि उसने इस मामले का चालान सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करने के बदले शिकायतकर्ता से 10,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि शिकायतकर्ता रिश्वत की पहली किस्त के रूप में आरोपी एएसआई को पहले ही 3,000 रुपये दे चुका था तथा शेष 7,000 रुपये शीघ्र देने का आश्वासन दिया था।रिश्वत की शेष राशि देने के लिए सहमति जताने के बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो, रेंज पटियाला से संपर्क किया। शिकायत की जांच के उपरांत विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और दो सरकारी गवाहों की उपस्थिति में आरोपी एएसआई को शिकायतकर्ता से 7,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
इस संबंध में आरोपी के विरुद्ध विजिलेंस ब्यूरो थाना, पटियाला में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
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‘सांझ राहत केंद्र’ महिलाओं की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस का सशक्त कम्युनिटी पुलिसिंग मॉडल बनकर उभरे
चंडीगढ़: महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए पंजाब पुलिस के ‘सांझ राहत केंद्र’ आज एक प्रभावी कम्युनिटी पुलिसिंग मॉडल के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ये केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को हर प्रकार की सहायता, काउंसलिंग, आपात स्थिति में तत्काल मदद तथा पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। शुरुआत में मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और जालंधर स्थित सांझ राहत केंद्रों में केवल दो प्रशिक्षित काउंसलर तैनात थे। अब इस पहल से कई काउंसलर जुड़ चुके हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान इन केंद्रों द्वारा 1,656 मामलों की स्क्रीनिंग की गई है तथा 1,069 मामले दर्ज किए गए हैं।
इस संबंध में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “राज्य में संचालित चारों सांझ राहत केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को मानसिक आघात से उबरने और सामान्य जीवन पुनः शुरू करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। ऐसी पहलें विश्वास और सहयोग पर आधारित जन सुरक्षा के प्रति पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।” डीजीपी ने कहा, “सांझ राहत केंद्रों की सफलता की अनेक कहानियां हैं, लेकिन मोहाली में घरेलू हिंसा की शिकार एक महिला को समय पर बचाया जाना पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। एक महिला ने सहायता के लिए संपर्क कर बताया कि उसका पति उसके साथ मारपीट कर रहा है और उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है। उसे तत्काल सहायता की आवश्यकता थी। यह महिला पहली बार पंजाब पुलिस के संपर्क में नहीं आई थी, क्योंकि उससे संबंधित एक पुराना मामला पहले ही एसएएस नगर (मोहाली) टीम के रिकॉर्ड में दर्ज था। सांझ राहत केंद्र की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की, सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की और उसे सुरक्षित वातावरण में उसके मायके पहुंचाया।”
उन्होंने आगे कहा, “एक अन्य मामले में अकेली रह रही एक महिला को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सांझ राहत केंद्र की टीम ने उसकी काउंसलिंग की और उसे आवश्यक उपचार कराने के लिए प्रेरित किया। टीम ने उसे पीजीआई में भर्ती कराने में सहायता की तथा विशेष समन्वय के माध्यम से लगभग दो महीने तक उसका उपचार सुनिश्चित कराया। उपचार के दौरान उसका गर्भपात हो गया। इस कठिन समय में टीम ने निरंतर भावनात्मक सहयोग और काउंसलिंग के माध्यम से उसे इस संकट से उबरने में मदद की। स्वास्थ्य लाभ के बाद टीम ने उसे रोजगार दिलाने में भी सहायता की तथा उसके परिवार से पुनः जोड़ने का प्रयास किया, जिससे वह सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपना जीवन फिर से शुरू कर सकी।”
सांझ राहत केंद्रों के अतिरिक्त महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस की कई अन्य पहलें भी प्रभावी सिद्ध हुई हैं। जागृति कार्यक्रम के तहत पंजाब पुलिस की महिला मित्रों ने पिछले लगभग दो वर्षों में 12,482 स्कूलों तक पहुंच बनाकर 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 11,75,010 बच्चों को जागरूक किया। इसी अवधि के दौरान 76,299 प्राचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों को भी जागरूक किया गया।
महिला हेल्प डेस्क पहल के अंतर्गत पिछले पांच वर्षों में 69,329 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल यौन शोषण, बाल विवाह निषेध कानून, किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, नशे तथा लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।
गुरप्रीत कौर देओ, स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन) ने कहा, “वर्ष 2011 में स्थापना के बाद से ‘सांझ’ व्यवस्था ने पुलिस और जनता के बीच साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पंजाब के जिलों, उप-मंडलों तथा पुलिस थानों में स्थापित 530 से अधिक सांझ केंद्रों के सुदृढ़ नेटवर्क के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह पहल संकटग्रस्त महिलाओं को काउंसलिंग, पुलिस सहायता तथा कानूनी सहयोग उपलब्ध कराकर महिलाओं से संबंधित विभिन्न गंभीर समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।”
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7,000 रुपये की रिश्वत लेते एएसआई को विजिलेंस ब्यूरो ने रंगे हाथों किया काबू
चंडीगढ़: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान के तहत महिला पुलिस थाना, पुलिस लाइंस, संगरूर में तैनात एएसआई (लोकल रैंक) कमलजीत सिंह को 7,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि उक्त आरोपी को भवानीगढ़, जिला संगरूर निवासी एक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता का अपनी पत्नी के साथ घरेलू विवाद चल रहा था, जिसके कारण उसकी पत्नी उससे अलग रह रही थी। बाद में उसकी पत्नी ने महिला पुलिस थाना, संगरूर में शिकायतकर्ता, उसके पिता तथा उसके भाई के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई थी। इस मामले की जांच एएसआई कमलजीत सिंह कर रहा था। आरोप है कि उसने इस मामले का चालान सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करने के बदले शिकायतकर्ता से 10,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी। प्रवक्ता ने आगे बताया कि शिकायतकर्ता रिश्वत की पहली किस्त के रूप में आरोपी एएसआई को पहले ही 3,000 रुपये दे चुका था तथा शेष 7,000 रुपये शीघ्र देने का आश्वासन दिया था।
रिश्वत की शेष राशि देने के लिए सहमति जताने के बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो, रेंज पटियाला से संपर्क किया। शिकायत की जांच के उपरांत विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और दो सरकारी गवाहों की उपस्थिति में आरोपी एएसआई को शिकायतकर्ता से 7,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में आरोपी के विरुद्ध विजिलेंस ब्यूरो थाना, पटियाला में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
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गैंगस्टरों ते वार का 174वां दिन: पंजाब पुलिस द्वारा 667 स्थानों पर छापेमारी; 413 काबू
चंडीगढ़: राज्य में चल रहे अभियान ‘गैंगस्टरों ते वार’ के 174वें दिन पंजाब पुलिस ने आज पूरे राज्य में गैंगस्टरों के साथियों के चिन्हित और मैप किए गए 667 ठिकानों पर छापेमारी की। उल्लेखनीय है कि ‘गैंगस्टरों ते वार’— पंजाब को गैंगस्टर मुक्त राज्य बनाने के लिए निर्णायक जंग, जिसकी शुरुआत 20 जनवरी, 2026 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव द्वारा की गई थी। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) पंजाब के समन्वय से सभी जिलों की पुलिस टीमें पूरे राज्य में विशेष अभियान चला रही हैं।
174वें दिन पुलिस टीमों ने 4 हथियारों सहित 413 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिससे अभियान की शुरुआत के बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या 48,098 हो गई है। इसके अलावा 293 व्यक्तियों के विरुद्ध एहतियाती कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीमों ने 4 भगोड़े अपराधियों को भी गिरफ्तार किया है। लोग, एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के माध्यम से वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों के बारे में गुप्त रूप से रिपोर्ट कर सकते हैं तथा अपराध एवं आपराधिक गतिविधियों संबंधी सूचना भी दे सकते हैं।
इस दौरान पुलिस टीमों ने नशों के विरुद्ध अपनी मुहिम ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ को 499वें दिन भी जारी रखते हुए आज 45 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 621 ग्राम हेरोइन, 190 नशीली गोलियां तथा 1600 रुपये ड्रग मनी बरामद की गई। इसके साथ ही केवल 499 दिनों में गिरफ्तार किए गए कुल नशा तस्करों की संख्या 73,596 हो गई है। नशा मुक्ति अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने आज 15 व्यक्तियों को नशा छुड़ाने एवं पुनर्वास का उपचार करवाने के लिए भी प्रेरित किया है।
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पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने नंद किशोर गोयनका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के स्पीकर स कुलतार सिंह संधवां ने प्रख्यात समाजसेवी एवं एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्र के पिता नंद किशोर गोयनका के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।स्पीकर संधवां ने कहा कि नंद किशोर गोयनका मानवता की सेवा के प्रति समर्पित एक महान व्यक्तित्व थे। उन्होंने गोयनका की समाज कल्याण तथा गौ-सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
संधवां ने कहा, “गोयनका जी न केवल दूरदर्शी सोच के धनी थे, बल्कि समाज की उन्नति और अग्रोहा धाम के विकास के लिए भी एक प्रेरक शक्ति थे। उनके निधन से सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में एक बड़ी रिक्तता उत्पन्न हो गई है।”
स्पीकर ने डॉ. सुभाष चंद्र तथा एस्सेल परिवार के सभी सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
