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  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कामगारों की सेवाओं को नियमित किया, नियमित हुए कर्मचारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कामगारों की सेवाओं को नियमित किया, नियमित हुए कर्मचारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

    चंडीगढ़: ठेका आधारित कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भगवंत सिंह मान सरकार ने आज वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कामगारों की सेवाओं को नियमित किया है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे और वन विभाग के 237 अधिकारियों व कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को बहाल करने की भी घोषणा की।

    कर्मचारियों की भलाई और पारदर्शी शासन के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा ठेकेदारी प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, पूर्ण रूप से मेरिट के आधार पर 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं और रंगला पंजाब बनाने के सरकार के लक्ष्य के तहत हर योग्य कर्मचारी को सम्मान, नौकरी की सुरक्षा और बराबर के अवसर मिलते रहेंगे।

    इस समारोह की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स हैंडल पर लिखा: “आज का दिन वन विभाग के कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण और खुशी भरा रहा। सालों से इंतजार कर रहे 516 दिहाड़ीदार कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करते हुए हमने उन्हें नियमित नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे हैं। इसके साथ ही विभाग के 237 कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को बहाल करने पर भी मुहर लगाई गई है।”

    उन्होंने आगे लिखा, “हमारी सरकार ने ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त कर दी है और अब तक 68,000 से अधिक युवाओं को नियमित सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। हम रंगला पंजाब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

    एकत्रीकरण को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैंने कभी भी ऐसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए जिससे किसी कर्मचारी का नुकसान हुआ हो या राज्य या इसके कर्मचारियों को कोई वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा हो। पिछली सरकारों ने कभी भी ठेका आधारित कर्मचारियों का साथ नहीं दिया क्योंकि उन्होंने इन कर्मचारियों द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका को कभी समझा ही नहीं। मुझे पूरा भरोसा है कि वन विभाग के कर्मचारी पंजाब के हरे-भरे क्षेत्र को बढ़ाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान लगातार देते रहेंगे। इसके साथ ही हमारी सरकार पूरे राज्य में वन फॉरेस्ट रेस्ट हाउसों के कायाकल्प के लिए भी सार्थक प्रयास कर रही है।”

    कर्मचारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकारों के दौरान ऐसे समारोह कभी हुए ही नहीं क्योंकि उस समय सत्ता में बैठे लोग कर्मचारियों के प्रति हमेशा उदासीन रवैये वाले रहे। पर आप सरकार के सत्ता में आने के बाद माहौल बदल गया है। आज लोग ऐसे खुशी के मौकों के गवाह और हिस्सा बन रहे हैं। यह रंगले पंजाब की झलक है और हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही कि लोग ऐसी पहलकदमियों के माध्यम से खुशी और सम्मान का अनुभव करते रहें।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के 65,000 से अधिक ठेका आधारित कामगारों ने राज्य की सेवा में अपनी जिंदगी के कई कीमती साल दिए हैं। आज पंजाब सरकार उन्हें वह दे रही है, जो उनका हक है। अब इन कर्मचारियों और सरकार के बीच कोई ठेकेदार नहीं होगा। अब से इन कर्मचारियों को सीधा रोजगार होगा, जो सम्मानजनक होने के साथ-साथ उन्हें पक्का होने का स्पष्ट रास्ता देगा।”

    सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि हमारी सरकार ने पंजाब के युवाओं को लगभग 68,268 सरकारी नौकरियां दी हैं। पैसे लेने और पक्षपात का दौर खत्म हो गया है। आज योग्य युवाओं को केवल मेरिट और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। यही कारण है कि हमारी सरकार द्वारा की गई एक भी नियुक्ति को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी गई।”

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “यह नीति कर्मचारियों के लिए सेवा सुरक्षा की गारंटी देती है क्योंकि हमारी सरकार हर कर्मचारी के हितों और भलाई की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 16 मई, 2023 को अधिसूचित ऐतिहासिक नीति के तहत इस नीति के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मचारियों को नौकरी की पूरी सुरक्षा प्रदान की गई है। वे 58 वर्ष की आयु तक बिना किसी बाधा के अपनी नौकरी करते रहेंगे, जिसके बाद वे सामान्य प्रक्रिया के तहत सेवानिवृत्त होंगे।”

    नीति के प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जनवरी 2024 में वित्त विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, ऐसे सभी कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी और स्पष्ट वेतन संरचना निर्धारित की गई है। इस नीति में ग्रुप डी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा और ग्रुप सी ड्राइवरों के लिए दसवीं कक्षा निर्धारित की गई है। जो 516 कर्मचारी शैक्षणिक योग्यता के मानदंड पूरे नहीं करते, सरकार द्वारा उन्हें भी बड़ी राहत दी गई है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी योग्य कामगार इस नीति के लाभों से वंचित न रहे।”

    पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के लोगों ने उन शासकों को भुला दिया है जिन्होंने उन्हें तवज्जो नहीं दी थी। आज मैं राहत महसूस कर रहा हूं क्योंकि हमारी सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। वन विभाग के दिहाड़ीदार कामगारों के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है, जिन्होंने कई सालों तक विभाग के लिए अपनी सेवाएं दी हैं और अब वे नियमित कर्मचारियों के रूप में औपचारिक रूप से सरकारी परिवार का हिस्सा बन रहे हैं। मैं उन सभी को दिल से बधाई देता हूं क्योंकि एक सरकारी नौकरी न सिर्फ एक कर्मचारी को बल्कि पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करती है।”

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज नियमित किए जा रहे 516 दिहाड़ीदार कामगारों में से कई ने 10 साल से अधिक सेवा निभाई है, जबकि कई ने लगभग 25 साल तक दिहाड़ीदार के रूप में काम किया है। एक दशक से अधिक समय तक विभाग के लिए सेवा करने के बावजूद, कई कामगार निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं और आयु के मानदंडों के कारण 2023 की नीति के तहत योग्य नहीं हो सके थे। इसलिए मंत्रिमंडल ने इन शर्तों में विशेष छूट को मंजूरी दी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी योग्य कामगार नियमित होने के लाभों से वंचित न रहे।”

    वन विभाग के कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “वन विभाग के दिहाड़ीदार कामगारों ने पंजाब को हरा-भरा रखने और इसके जंगलों व वन्य जीवों की रक्षा के लिए अमूल्य योगदान दिया है। पिछले चार वर्षों के दौरान वन विभाग में 1,458 दिहाड़ीदार कामगारों को नियमित किया गया है। पिछले पांच वर्षों में 342 अन्य कर्मचारियों को नियमित नियुक्तियों के माध्यम से भर्ती किया गया है।”

    इस दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए सुरिंदर कौर, जसपाल सिंह, सुरिंदर सिंह, जसबीर कौर, गुरप्रीत सिंह, हालम सिंह, रविकांत और अन्यों ने बताया कि वे कई सालों से विभाग में सेवा निभा रहे हैं लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने उनकी भलाई के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों से किए हर वादे को पूरा किया है, जबकि पिछली सरकारें उन्हें लगातार नजरअंदाज करती रही। इस फैसले पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सेवाओं के नियमित होने से उनमें और उनके परिवारों में खुशी की लहर है और वे अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री के हमेशा ऋणी रहेंगे।

    इस मौके पर कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक, वन विभाग के सचिव के.के. यादव और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

    भगवंत मान सरकार ने दिहाड़ीदार कामगारों की सालों की प्रतीक्षा को किया समाप्त, वन विभाग के 516 कर्मचारियों को किया नियमित

    • भगवंत मान सरकार ने अब तक केवल मेरिट के आधार पर 68,228 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं, जिसमें हर भर्ती पारदर्शी तरीके से और बिना किसी सिफारिश के की गई है। इस आंकड़े में आज नियमित किए गए वन विभाग के 516 कर्मचारी शामिल नहीं हैं।

    • अकेले वन विभाग में ही पिछले चार वर्षों के दौरान 1,458 दिहाड़ीदार कामगारों को नियमित किया गया है, जबकि पिछले पांच वर्षों में नियमित नियुक्तियों के माध्यम से 342 कर्मचारी भर्ती किए गए हैं।

    • सरकार ने विभाग की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए वन विभाग के 237 अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबित पदोन्नतियों को भी बहाल किया है।

    • पंजाब सरकार की 2023 की रेगुलराइजेशन नीति के तहत, योग्य कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु तक सेवा का भरोसा दिया गया है, जिसमें एक पारदर्शी वेतन ढांचा, वार्षिक वृद्धि और जहां भी लागू हो मौजूदा वेतन की सुरक्षा शामिल है।

  • ‘मेरी रसोई’ योजना के तहत राशन किट वितरण का आंकड़ा 27 लाख के पार

    ‘मेरी रसोई’ योजना के तहत राशन किट वितरण का आंकड़ा 27 लाख के पार

    अब तक सबसे अधिक 3 लाख से ज्यादा राशन किट लुधियाना में वितरित, 2 लाख के साथ पटियाला दूसरे और 1.68 लाख किटों के वितरण के साथ बठिंडा तीसरे स्थान पर

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने कमजोर परिवारों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपनी जारी राशन किट वितरण मुहिम ‘मेरी रसोई’ में तेजी लाई है, जिसके तहत अब तक लगभग 27.18 लाख परिवारों को लाभ मिल चुका है। इस अभियान का लक्ष्य राज्यभर के 40.48 लाख पात्र परिवारों को प्रत्येक तिमाही (तीन माह) में राशन किट उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दूरदर्शी नेतृत्व तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क की सक्रिय निगरानी में इस महत्वपूर्ण पहल के तहत मिशन मोड में राशन किटों का वितरण किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को एक राशन किट प्रदान की जाती है, जिसे घरेलू खाद्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस किट में मासिक उपयोग के लिए दो किलोग्राम दाल, दो किलोग्राम चीनी, एक किलोग्राम नमक, 200 ग्राम हल्दी पाउडर तथा एक लीटर सरसों का तेल शामिल है। ये राशन किट राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पात्र लाभार्थियों को पहले से वितरित की जा रही गेहूं के अतिरिक्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। राशन किटों का निर्माण मार्कफैड द्वारा किया जाता है, जबकि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग राज्यभर में इनके वितरण नेटवर्क की निगरानी कर रहा है। अब तक वितरित 27.18 लाख राशन किटों में लुधियाना 300480 किटों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद पटियाला 203591 किटों के साथ दूसरे, बठिंडा 168811 किटों के साथ तीसरे, अमृतसर 159408 किटों के साथ चौथे, फाजिल्का 151458 किटों के साथ पांचवें तथा संगरूर 147339 किटों के साथ छठे स्थान पर है। इसके अतिरिक्त जालंधर में 144965 श्री मुक्तसर साहिब में 1,38,009, सीमावर्ती जिले तरनतारन में 133220 होशियारपुर में 128720, गुरदासपुर में 126901, फिरोज़पुर में 1,09,444, मोगा में 107324 मानसा में 91274, फतेहगढ़ साहिब में 80,910, साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) में 76928, फरीदकोट में 77,574, कपूरथला में 75,274 पठानकोट में 73793, बरनाला में 66193, रूपनगर में 60,785, मलेरकोटला में 50841 तथा शहीद भगत सिंह नगर में 45546 राशन किटों का वितरण किया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों की रसोई तक केवल अनाज ही नहीं, बल्कि आवश्यक प्रोटीन, खाद्य तेल तथा मसाले भी पहुंचाना है, ताकि योजना के अंतर्गत शामिल परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके। राशन किटों के वितरण की सतत एवं प्रभावी निगरानी की जा रही है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके, मिलावटी सामग्री पर रोक लगाई जा सके तथा प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक समय पर किट पहुंचाई जा सके। जिला प्रशासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग तथा स्थानीय अधिकारी पूर्ण समन्वय के साथ इस जनकल्याणकारी अभियान को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। यह योजना राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कोई भी पात्र परिवार खाद्य सुरक्षा से वंचित न रहे। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत वितरित किए जा रहे गेहूं के साथ इन राशन किटों को जोड़कर सरकार भूख और कुपोषण—दोनों चुनौतियों का प्रभावी समाधान करने का सार्थक प्रयास कर रही है।  
  • फोटोग्राफर से कृषि-उद्यमी तक का सफर: मंत्री मोहिंदर भगत के निर्देशों पर बागवानी विभाग ने एआईएफ योजना के तहत युवा को दिलाई नई पहचान

    फोटोग्राफर से कृषि-उद्यमी तक का सफर: मंत्री मोहिंदर भगत के निर्देशों पर बागवानी विभाग ने एआईएफ योजना के तहत युवा को दिलाई नई पहचान

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार का बागवानी विभाग, जो राज्य में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) योजना को लागू करने वाली नोडल एजेंसी है, बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत के निर्देशों के तहत सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से युवाओं को सफल उद्यमी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    इस योजना के संबंध में जानकारी देते हुए बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बताया कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) योजना कृषि से जुड़े आधुनिक बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। यह योजना युवाओं को कृषि-आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रही है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

    उन्होंने एक सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि एस.ए.एस. नगर के युवा सरबजीत सिंह को एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) योजना के तहत मात्र 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध हुआ। इससे उन्हें कम वित्तीय बोझ के साथ अपना उद्योग स्थापित करने में सहायता मिली। आज वह उच्च गुणवत्ता वाला आटा और मसाले तैयार कर न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

    अपने अनुभव साझा करते हुए सरबजीत सिंह ने बताया कि पहले वे फोटोग्राफर के रूप में कार्य करते थे, लेकिन एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) योजना की सहायता से आज वे एक सफल कृषि-उद्यमी बन चुके हैं। इस योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है।

    बागवानी मंत्री ने प्रदेश के युवाओं से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि एआईएफ योजना कृषि-आधारित उद्योग स्थापित कर रोजगार सृजन करने तथा पंजाब की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करती है।

  • मुख्यमंत्री मांवां-धियां सत्कार योजना’ ने पंजाब की महिलाओं में जगाई उम्मीद, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई किरण

    मुख्यमंत्री मांवां-धियां सत्कार योजना’ ने पंजाब की महिलाओं में जगाई उम्मीद, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई किरण

    चंडीगढ़: पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री माँवां-धियां सत्कार योजना’ ने पूरे राज्य की महिलाओं में उत्साह की नई लहर पैदा कर दी है। अनेक महिलाओं के बैंक ख़ातों में योजना की राशि पहुँच चुकी है, जबकि अन्य महिलाएँ भी राशि मिलने का इंतजार कर रही हैं। पंजाब की हज़ारों महिलाओं के लिए यह पहली राशि ,आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर है। वर्षों से टलती आ रही इच्छाओं को पूरा करने, बच्चों की शिक्षा में सहयोग देने, अपने स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखने और सबसे बढ़कर अपने ही बैंक ख़ाते में सीधे पैसे आने से मिलने वाले सम्मान का अनुभव करने का अवसर है।

    गांव अदालतपुर की 40 वर्षीय गगनदीप कौर अपने ख़ाते में राशि आने से बेहद ख़ुश हैं। उन्होंने कहा, “मेरे खाते में ₹3,000 आए हैं। मैंने अभी तक यह राशि ख़र्च नहीं की है क्योंकि मैं इसे केवल अपने बेटे पर ख़र्च करना चाहती हूँ। वह जो भी माँगेगा, मैं अपने पैसों से उसे दिलाऊँगी। जब मेरा बच्चा खुश होता है तो मुझे भी ख़ुशी मिलती है। आगे मिलने वाली हर राशि मैं उसी पर ख़र्च करूँगी।”उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे पंजाबी में कहा, “जो ओह मंगूगा, ओही ले के दवांगी।” (वह जो भी माँगेगा, मैं उसे वही ख़रीदकर दूँगी)

    इच्छेवाला गाँव की घरेलू कामगार सोमा के लिए ₹4,500 जमा होने का संदेश राहत और ख़ुशी दोनों लेकर आया। उन्होंने कहा, “मैं बहुत गरीब हूँ, लेकिन इस सरकार ने महिलाओं के ख़ातों में सीधे पैसे भेजकर बहुत अच्छा काम किया है। इससे हमें सुरक्षा और आत्मसम्मान मिलता है। अगर नकद पैसे दिए जाते तो परिवार के दूसरे सदस्य उन्हें ले सकते थे, लेकिन अपने बैंक ख़ाते में पैसा होने से आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है।”

    कम हीमोग्लोबिन और ख़राब स्वास्थ्य से जूझ रही सोमा ने पहले से तय कर रखा है कि वे इस राशि का उपयोग कैसे करेंगी। उन्होंने कहा, “मैं पौष्टिक भोजन ख़रीदूँगी। डॉक्टरों ने हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए चुकंदर और मेवे खाने की सलाह दी है। मैं ड्रैगन फ्रूट भी ख़रीदूँगी। यह फल मैंने पहली बार ‘द कपिल शर्मा शो’ में देखा था। तब तक मुझे लगता था कि इसे केवल अमीर लोग ही खाते हैं। अब मैं ख़ुद भी इसका स्वाद चखूँगी।” यह कहते हुए वे हँस पड़ीं।

    सोमा की बेटी, जिसने हाल ही में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की है और अब कॉलेज में प्रवेश ले रही है,ने भी इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है। सोमा ने कहा, “हम दोनों को मिलाकर हर तीन महीने में कुल ₹6,000 मिलेंगे। मेरी बेटी काफ़ी समय से कॉलेज के लिए नए कपड़े, एक अच्छी सलवार-कमीज़ और सैंडल की माँग कर रही थी। मेरे पति बेरोज़गार हैं, इसलिए हमारे घर में हमेशा पैसों की तंगी रहती है। मैं इसे हर बार टालती रही। अब मैं उसकी यह इच्छा पूरी कर सकूँगी और उसकी किताबों के लिए भी हम कुछ पैसे बचा पाएँगे।” सोमा की छह बेटियाँ हैं।

    जब सोमा और उनकी दो देवरानियों रीतु और ज़ीना के मोबाइल फ़ोन पर पैसे जमा होने का संदेश आया तो तीनों ख़ुशी से झूम उठीं और नाचने लगीं। संयुक्त परिवार में रहने वाली इन तीनों महिलाओं को मिलाकर कुल ₹13,500 की सहायता राशि प्राप्त हुई , जिससे परिवार की कई तत्काल ज़रूरतें पूरी हो सकेंगी। सुनाम की 53 वर्षीय गृहिणी रेणु के लिए यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हम ख़ुद कमाते नहीं हैं। घर के छोटे-छोटे ख़र्चों के लिए भी हमें अपने पति या बेटों पर निर्भर रहना पड़ता है। मेरी दो बेटियाँ शादीशुदा हैं। इस पैसे से मैं मिठाई, स्नैक्स और फल खरीदकर दोनों बेटियों को घर बुलाना चाहती हूँ। इस बार मेहमाननवाज़ी मैं अपने पैसों से करूँगी।”

    47 वर्षीय सविता इस सहायता राशि को बचत शुरू करने के एक अवसर के रूप में देखती हैं। उनके पति दो वर्ष पहले गंभीर हृदय रोग से पीड़ित होने के बाद से काम करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी भी इस योजना के लिए पात्र है, इसलिए हम दोनों को मिलाकर कुल ₹6,000 मिलेंगे। मेरी योजना है कि मैं हर महीने ₹1,000 डाकघर की बचत योजना में जमा करूँगी, जबकि मेरी बेटी अपने हिस्से की राशि उन छोटी-छोटी व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करने में ख़र्च कर सकेगी, जिन्हें वह अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।”

    बठिंडा में तीन घरों में घरेलू काम करने वाली जसबीर कौर के लिए यह योजना उनकी बेटी की उच्च शिक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, “मैं अनुसूचित जाति वर्ग से हूँ, इसलिए मुझे ₹1,500 प्रति माह मिलने चाहिए थे, लेकिन मैं आवेदन के समय जाति प्रमाण पत्र अपलोड नहीं कर सकी क्योंकि मैंने अभी तक प्रमाण पत्र बनवाया ही नहीं था। अब मैं प्रमाण पत्र बनवाकर सरकार से अपनी श्रेणी अपडेट करने का अनुरोध करूँगी। ₹1,000 प्रति माह भी बहुत मायने रखते हैं। मेरी बेटी बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश ले रही है और मैं यह राशि उसकी एडमिशन पर ख़र्च करूँगी।”

    गुरदासपुर की 55 वर्षीय राज ने अपनी प्राप्त राशि में से कुछ पैसे पहले ही निकाल लिए हैं। उन्होंने कहा, “मेरे ख़ाते में ₹3,000 आए हैं, लेकिन अभी मैंने केवल ₹1,000 निकाले हैं। यह पूरा पैसा मेरी दवाइयों पर ख़र्च होगा। मैं अक्सर बीमार रहती हूँ और इलाज पर काफ़ी ख़र्च आता है। अब कम-से-कम दवाइयाँ ख़रीदने के लिए मुझे किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।” वह शेष राशि को बाद में अपनी दवाइयों और इलाज से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रखना चाहती हैं, क्योंकि वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा, “मेरी टाँगों में बहुत दर्द रहता है और मैं ठीक से चल भी नहीं पाती। अब यह पैसा मैं अपनी दवाइयों और विटामिन पर ख़र्च करूँगी।”

    यह योजना आम आदमी पार्टी के प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करती है। नवंबर 2021 में मोगा में आयोजित एक जनसभा के दौरान तत्कालीन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि यदि पंजाब में उनकी सरकार बनी तो महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। पंजाब के गाँवों और शहरों से सामने आ रही कहानियाँ बताती हैं कि यह राशि भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन इसका महत्त्व केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। किसी के लिए यह बच्चों की शिक्षा का सहारा है, तो किसी के लिए बेहतर स्वास्थ्य, बचत, पारिवारिक ख़ुशियों और आयोजनों का माध्यम। कई महिलाओं के लिए यह अपने नाम के बैंक ख़ाते से अपनी ज़रूरतों पर ख़र्च करने की संतुष्टि का अनुभव है।

     

  • गैंगस्टरों ते वार का 173वां दिन: पंजाब पुलिस की 1074 स्थानों पर छापेमारी; 911 काबू

    गैंगस्टरों ते वार का 173वां दिन: पंजाब पुलिस की 1074 स्थानों पर छापेमारी; 911 काबू

    पुलिस टीमों ने 510 व्यक्तियों के विरुद्ध एहतियाती कार्रवाई की

    चंडीगढ़: राज्य में चलाए जा रहे अभियान ‘गैंगस्टरों ते वार’ के 173वें दिन पंजाब पुलिस ने आज पूरे प्रदेश में गैंगस्टरों के सहयोगियों के चिन्हित एवं मैप किए गए 1074 ठिकानों पर छापेमारी की। उल्लेखनीय है कि ‘गैंगस्टरों ते वार’ अभियान—पंजाब को गैंगस्टर मुक्त राज्य बनाने के उद्देश्य से छेड़ी गई निर्णायक मुहिम—का शुभारंभ 20 जनवरी, 2026 को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव द्वारा किया गया था। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) पंजाब के समन्वय से सभी जिलों की पुलिस टीमें पूरे राज्य में विशेष अभियान चला रही हैं।

    अभियान के 173वें दिन पुलिस टीमों ने 6 हथियार बरामद करते हुए 911 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
    इसके साथ ही अभियान शुरू होने के बाद से अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर 47,685 हो गई है। इसके अतिरिक्त पुलिस ने 510 व्यक्तियों के विरुद्ध एहतियाती कार्रवाई की। अभियान के दौरान 19 भगोड़े अपराधियों को भी गिरफ्तार किया गया।

    जनता एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 पर वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों के संबंध में गोपनीय रूप से सूचना दे सकती है तथा अपराध एवं आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी साझा कर सकती है।

    इस बीच, पंजाब पुलिस ने नशों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के 498वें दिन भी कार्रवाई जारी रखते हुए आज 69 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 829 ग्राम हेरोइन, 565 नशीली गोलियां तथा 5,250 रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई।

    इसके साथ ही पिछले 498 दिनों में गिरफ्तार किए गए कुल नशा तस्करों की संख्या बढ़कर 73,505 हो गई है। नशामुक्ति अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने आज 13 व्यक्तियों को नशा मुक्ति एवं पुनर्वास उपचार कराने के लिए भी प्रेरित किया।

  • भगवंत मान सरकार ने जमीनी स्तर पर ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान को और मजबूत किया

    भगवंत मान सरकार ने जमीनी स्तर पर ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान को और मजबूत किया

    चंडीगढ़ : नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाते हुए भगवंत मान सरकार ने ‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। यह एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना है, जिसका उद्देश्य जनस्तर पर भागीदारी बढ़ाना तथा नशों के विरुद्ध लड़ाई में लोगों को अधिक सक्रिय रूप से शामिल करना है। इस एक्शन प्लान को जून माह में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक ‘गांवों का हाल, सीएम के साथ’ के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। यह योजना विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, नियमित निगरानी तथा पूरे राज्य में निरंतर जनभागीदारी सुनिश्चित करती है।

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य नशों के विरुद्ध संघर्ष में गांव स्तर पर लोगों की सहभागिता बढ़ाना है। एक्शन प्लान में जिला एवं राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें, प्रत्येक गांव के लिए विशेष नशा विरोधी रणनीति तथा पूरे पंजाब में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र शामिल किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया का प्रमुख आधार ‘नशा मुक्ति मोर्चा’ है, जिसका गठन 15 अप्रैल 2025 को किया गया था। इसके साथ ही पांच रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान भी प्रारंभ किया गया।

    प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय समुदाय के बीच ब्लॉक कोऑर्डिनेटर महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। वे जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ नशा पीड़ितों के पुनर्वास में सहयोग, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने तथा रोकथाम संबंधी गतिविधियों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पूरे पंजाब में जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, ग्राम रक्षा समिति के सदस्य तथा स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भाग ले रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य अभियान की जमीनी स्थिति का आकलन करना, स्थानीय चुनौतियों की पहचान करना तथा नशा विरोधी अभियान से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

    वर्तमान समय में पंजाब में 1,708 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर कार्यरत हैं, जो 1.25 लाख से अधिक ग्राम रक्षा समिति सदस्यों के साथ मिलकर जनजागरूकता फैलाने, उपचार एवं पुनर्वास को प्रोत्साहित करने तथा नशाखोरी एवं नशा तस्करी के विरुद्ध सामुदायिक सतर्कता बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। इन समीक्षा बैठकों के माध्यम से अभियान के अंतिम स्तर तक प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा। इसके लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों की भूमिका को सशक्त करने के साथ-साथ श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को अपनाने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा अभियान में आम लोगों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। बैठकों के माध्यम से परिवारों को नशा पीड़ित सदस्यों का समय पर उपचार कराने के लिए प्रेरित करने तथा आम जनता को नशा तस्करों के विरुद्ध सतर्क रहने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

    जिला-वार समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत 6 जुलाई को तरनतारन, अमृतसर (शहरी) और अमृतसर (ग्रामीण) से हुई। इसके बाद 7 जुलाई को गुरदासपुर और पठानकोट में बैठकें आयोजित की गईं। इसके पश्चात होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, एस.बी.एस. नगर, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर तथा पटियाला (शहरी) में भी बैठकें सम्पन्न हो चुकी हैं। जनसंपर्क अभियान के अगले चरण में 11 जुलाई को संगरूर, पटियाला (ग्रामीण) तथा मालेरकोटला; 12 जुलाई को बरनाला, बठिंडा तथा मानसा; 13 जुलाई को श्री मुक्तसर साहिब, फिरोजपुर तथा फाजिल्का; 14 जुलाई को फरीदकोट, मोगा तथा लुधियाना (शहरी); तथा 15 जुलाई को लुधियाना (ग्रामीण-1), लुधियाना (ग्रामीण-2) एवं फतेहगढ़ साहिब में बैठकें आयोजित की जाएंगी।

    इस अभियान का उद्देश्य नशा तस्करों के विरुद्ध लगातार की जा रही कार्रवाई के साथ-साथ नशों के विरुद्ध जन आंदोलन में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों के जमीनी स्तर के नेटवर्क को और अधिक मजबूत करते हुए गांव स्तरीय संस्थाओं, युवाओं तथा शैक्षणिक संस्थानों को सक्रिय बनाकर सरकार का लक्ष्य नशों की समस्या के विरुद्ध दीर्घकालिक सामाजिक जागरूकता, सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा पंजाब को नशामुक्त राज्य बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाना है।

  • 1,279 नई सरकारी बसों के शामिल होने से पंजाब सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में भारत का नंबर-1 राज्य बनेगा

    1,279 नई सरकारी बसों के शामिल होने से पंजाब सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में भारत का नंबर-1 राज्य बनेगा

    चंडीगढ़  : पंजाब के वित्त एवं परिवहन मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां घोषणा की कि पंजाब 1,279 नई सरकारी बसों को शामिल कर अपने सार्वजनिक परिवहन बेड़े का व्यापक विस्तार करेगा, जिससे सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में राज्य देश का नंबर-1 राज्य बनने की दिशा में अग्रसर होगा। इस विस्तार के साथ राज्य में सरकारी बसों की संख्या 2,267 से बढ़कर 3,546 हो जाएगी, जो 56 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि होगी तथा पिछले दो दशकों में सबसे बड़ा विस्तार माना जाएगा। बेड़े के विस्तार के साथ-साथ भगवंत मान सरकार यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा तथा अंतिम छोर (लास्ट माइल) तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित करने के लिए डैशकैम, आंतरिक सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली तथा यूपीआई क्यूआर कोड आधारित इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी लागू करेगी।

    पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब पिछले दो दशकों से भी अधिक समय के दौरान अपने सरकारी बस बेड़े का सबसे बड़ा विस्तार कर रहा है। 1,279 नई बसों के शामिल होने के बाद हमारी सरकारी बसों की कुल संख्या 2,267 से बढ़कर 3,546 हो जाएगी, जिससे पंजाब सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बन जाएगा।” सरकारी बसों की प्रत्यक्ष खरीद के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार पहले ही 696 साधारण बसों की खरीद का आदेश जारी कर चुकी है। इनमें से 387 बसें पनबस तथा 309 बसें पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) में शामिल की जाएंगी। इनमें से लगभग 300 बसों के नवंबर 2026 तक सड़क पर उतरने की संभावना है, जबकि शेष बसों को दिसंबर 2026 के अंत तक चरणबद्ध ढंग से शामिल किया जाएगा।”

    उन्होंने आगे बताया कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पीआरटीसी हेतु 100 मिडी बसें पहले ही खरीदी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, “ये बसें सितंबर 2026 तक सेवा में आ जाएंगी, जिससे प्रत्यक्ष रूप से खरीदी गई बसों की कुल संख्या 796 हो जाएगी।” वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विस्तारित बस बेड़े की तैनाती वैज्ञानिक योजना के आधार पर की जाएगी। उन्होंने कहा, “राज्यभर में कम बस सुविधा वाले मार्गों की पहचान करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि बसों की तैनाती वहीं हो, जहां लोगों को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है, उपग्रह आधारित यात्रा पैटर्न सर्वेक्षण शुरू किए जा रहे हैं। यह साक्ष्य-आधारित व्यवस्था वर्तमान संपर्क अंतराल (कनेक्टिविटी गैप) को दूर करने में सहायक सिद्ध होगी।”

    एक बड़े तकनीकी उन्नयन की घोषणा करते हुए परिवहन मंत्री ने कहा, “नई बसें पूर्ण निगरानी सुनिश्चित करने तथा यात्रियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए डैशकैम, आंतरिक सीसीटीवी कैमरों तथा अत्याधुनिक जीपीएस ट्रैकिंग प्रणालियों से सुसज्जित होंगी।” महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के प्रति भगवंत मान सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “वर्तमान में सरकारी बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों में लगभग 54 प्रतिशत महिलाएं हैं। सभी नई बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने से उनकी सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा उन्हें सुरक्षित एवं भरोसेमंद यात्रा का वातावरण उपलब्ध होगा।”

    परिवहन मंत्री ने यह भी घोषणा की कि परिवहन विभाग परिचालकों (कंडक्टरों) को ऐसी अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनें उपलब्ध करा रहा है, जिनके माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन कर यूपीआई भुगतान स्वीकार किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, “इस आधुनिक प्रणाली को डिजिटल भुगतान के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, जिससे टिकटिंग व्यवस्था अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और दक्ष बनेगी।”

    इस विस्तार के संरचनात्मक प्रभाव की व्याख्या करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “वर्तमान में पंजाब में प्रति एक लाख आबादी पर लगभग सात सरकारी बसें उपलब्ध हैं। इस विस्तार के बाद यह अनुपात बढ़कर प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 12 बसें हो जाएगा, जिससे पंजाब राज्य परिवहन उपक्रमों के राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे निकल जाएगा।”
    उन्होंने आगे कहा, “सरकारी बसों की बढ़ी हुई संख्या से पनबस तथा पीआरटीसी को अधिक मांग वाले मार्गों पर बसों के फेरे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। साथ ही, उन गांवों और कस्बों तक भी सरकारी बस सेवा का विस्तार किया जाएगा, जहां वर्तमान में कोई नियमित सरकारी बस सुविधा उपलब्ध नहीं है।”

    प्रेस सम्मेलन के समापन पर वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह सुदृढ़ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क राज्य के प्रत्येक नागरिक को किफायती, विश्वसनीय, सुरक्षित तथा सुलभ परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंजाब सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
    भगवंत मान सरकार द्वारा पंजाब के सार्वजनिक परिवहन का बड़ा विस्तार

  • ‘मुख्य मंत्री माँवां धीआं सत्कार योजना’ के तहत 66 लाख  महिलाओं ने करवाई रजिस्ट्रेशन

    ‘मुख्य मंत्री माँवां धीआं सत्कार योजना’ के तहत 66 लाख  महिलाओं ने करवाई रजिस्ट्रेशन

    चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने ‘मुख्य मंत्री माँवां धीआं सत्कार योजना’ के तहत अब तक ₹1,147 करोड़ की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से राज्य की लगभग 33 लाख महिलाओं के बैंक ख़ातों में सीधे जमा किए हैं।अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की पात्र महिलाओं को तीन मासिक किस्तों के रूप में ₹1,500 प्रति माह के हिसाब से कुल ₹4,500 की राशि प्रदान की गई, जबकि अन्य सभी वर्गों की पात्र महिलाओं को तीन मासिक किस्तों के रूप में ₹1,000 प्रति माह के हिसाब से कुल ₹3,000 की राशि दी गई।

    यह राशि उन पात्र लाभार्थियों को जारी की गई है, जिनकी रजिस्ट्रेशन 25 जून, 2026 तक हो चुकी थी। ‘मुख्य मंत्री माँवां धीआं सत्कार योजना’ के तहत पूरे पंजाब में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया लगातार जारी है और अब तक 66 लाख से अधिक महिलाओं ने अपनी रजिस्ट्रेशन करवा ली है।जो महिलाएँ अब रजिस्ट्रेशन करवा रही हैं, उन्हें अगली किस्त में राशि मिल जाएगी। पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पहली किस्त का सफ़ल वितरण साबित करता है कि पंजाब सरकार प्रत्येक पात्र महिला तक वित्तीय सहायता सीधे और पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचाने के अपने संकल्प पर दृढ़ है। उन्होंने कहा, ‘मुख्य मंत्री माँवां धीआं सत्कार योजना’ महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सहायता मिले। कोई भी पात्र महिला इस योजना से वंचित नहीं रहेगी।”

    डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह योजना महिलाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता उपलब्ध करवा रही है और इससे उनकी वर्तमान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जो महिलाएँ पहले से ही विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन या वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रही हैं, उन्हें वे सभी लाभ पहले की तरह मिलते रहेंगे। ‘मुख्य मंत्री माँवां धीआं सत्कार योजना’ उनके लिए सामाजिक सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत के रूप में कार्य करेगी। पूरे पंजाब में पहली किस्त प्राप्त करने वाली महिलाओं ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया। कई महिलाओं ने कहा कि यह पहली बार है जब उनके अपने बैंक ख़ाते में सीधे धनराशि जमा हुई है। गुरदासपुर ज़िले के मुस्ताबा जट्टा गाँव की निवासी कुलदीप कौर ने कहा कि पहली किस्त प्राप्त करना उनके जीवन के सबसे भावुक पलों में से एक था। ₹4,500 उनके ख़ाते में आने के बाद उन्होंने पहली बार आर्थिक स्वतंत्रता का अनुभव किया।उन्होंने कहा, “मैं बहुत ख़ुश हूँ कि मेरी अपनी कमाई मेरे अपने बैंक ख़ाते में आई है। अज्ज तों पहलाँ मैं आपने हत्थ विच कमाई देखी ही नहीं सी। जब मेरे मोबाइल पर तीन किस्तों के आने का संदेश आया तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैं पंजाब सरकार और हमारे मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने हमें आत्मसम्मान का यह एहसास करवाया।”

    कुलदीप कौर ने कहा कि यह राशि आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर है।उन्होंने कहा, “पहले लोग बेटों को बेटियों से अधिक महत्त्व देते थे, लेकिन अब यह सोच धीरे-धीरे बदल रही है। जिन परिवारों में बेटियाँ हैं, वे अब अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि महिलाओं के पास अपनी आर्थिक सहायता है। मैं ताँ आपने हसबैंड लयी मानयोग हो गई।” घुम्मणकलां गाँव की एक अन्य लाभार्थी हरमीत कौर ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी गाँव में आयोजित जागरूकता शिविर के दौरान मिली।उन्होंने कहा, “मैं इस पैसे से अपने लिए सूट ख़रीदूँगी और कुछ राशि घर के ख़र्च में लगाऊँगी। मैं बहुत ख़ुश हूँ। मैं वी हुन कमा रही हाँ (मैं भी अब कमा रही हूँ)”

    हरमीत कौर ने कहा कि यह योजना समाज को एक महत्त्वपूर्ण संदेश भी देती है।उन्होंने कहा, “बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार का गौरव होती है। यह राशि बेटियों की शिक्षा और उनके सशक्तीकरण में मदद करेगी। जब हम किसी बेटी को शिक्षित और सशक्त बनाते हैं, तो पूरे परिवार और समाज का भविष्य उज्ज्वल बनता है। हुन मैं सयानी हो गई।”

    संगरूर ज़िले के धूरी की रहने वाली एक विधवा किरण ने कहा कि यह आर्थिक सहायता उनके जीवन के कठिन दौर में बहुत बड़ा सहारा साबित होगी।उन्होंने कहा, “मेरे लयी ताँ एह बहुत वड्डी रक़म है। मैं विधवा हां और बेहद गरीब हां। मेरे घर कमान वाला कोई नहीं है। मैं मुख्यमंत्री मान जी दी बहुत धनवादी हां।”( मेरे लिए यह बहुत बड़ी राशि है। मैं विधवा हूँ और बहुत गरीब हूँ। मेरे परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। यह सहायता मेरे लिए बहुत बड़ी मदद साबित होगी। मैं मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करती हूँ।)

    इसी प्रकार गुरदासपुर ज़िले के एक गाँव की दिहाड़ी मज़दूर रीता ने कहा कि इस आर्थिक सहायता से उनके परिवार की कई चिंताएँ कम हो गई हैं। उन्होंने कहा, “मुझे इस योजना की जानकारी आँगनवाड़ी केंद्र से मिली और वहीं की मदद से मैंने आवेदन भरा। मैं और मेरे पति दोनों दिहाड़ी मजदूर हैं। यह राशि हमारे लिए बहुत बड़ी मदद है। अब मैं इस पैसे का उपयोग अपनी आवश्यकताओं पर कर सकूँगी।”

    अपने मोबाइल पर भुगतान की पुष्टि वाला एसएमएस देखते हुए उनकी आँखों में ख़ुशी के आँसू आ गए। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “मोबाइल की ‘टूँ-टूँ’ ने हमारी ज़िंदगी बदल दी।”(मेरे मोबाइल की नोटिफ़िकेशन टोन ने हमारी ज़िंदगी बदल दी।)

  • पंजाब पुलिस के महिला हेल्प डेस्कों ने पुलिस थानों को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाया

    पंजाब पुलिस के महिला हेल्प डेस्कों ने पुलिस थानों को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाया

    चंडीगढ़ : महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए पंजाब पुलिस द्वारा स्थापित महिला हेल्प डेस्कों को पूरे राज्य में व्यापक जनसमर्थन मिला है। इन हेल्प डेस्कों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से संबंधित कुल 2,31,677 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। राज्य पुलिस ने सभी 424 पुलिस थानों, जिनमें 39 विशेष प्रयोजन पुलिस थाने भी शामिल हैं, में महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं। पंजाब ग्रिवेंस डिस्पोजल (पीजीडी) पोर्टल के माध्यम से 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2026 तक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से संबंधित 1,33,152 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 99,692 शिकायतों (74.8 प्रतिशत) का निपटारा पंजाब पुलिस महिला मित्रों द्वारा किया गया।

    हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्यभर में महिला मित्र पहल और महिला हेल्प डेस्कों के तहत कार्यरत महिला पुलिस कर्मियों के लिए 93 इलेक्ट्रिक स्कूटरों को मंजूरी दी है। इन इलेक्ट्रिक स्कूटरों को हाल ही में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य महिला पुलिस कर्मियों को राज्य के हर क्षेत्र तक पहुंचने तथा महिलाओं और बच्चों की शिकायतों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने में सक्षम बनाना है।

    इस अवसर पर डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “इस पहल ने महिलाओं तक पुलिस सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार किया है, जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग को सुनिश्चित किया है, लोगों के विश्वास को मजबूत किया है तथा समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में समय पर हस्तक्षेप संभव बनाया है। महिला हेल्प डेस्कों ने पुलिस थानों को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और सुलभ स्थानों में परिवर्तित कर दिया है। 424 पुलिस थानों में कुल 848 पंजाब पुलिस महिला मित्र तैनात की गई हैं, जो पंजाब पुलिस के प्रति बढ़ते जनविश्वास का प्रमाण हैं। पंजाब पुलिस ने राज्य के प्रत्येक पुलिस थाने में महिला हेल्प डेस्क स्थापित कर महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है।”

    महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत से पहले महिलाओं और बच्चों से संबंधित शिकायतों का निपटारा मुख्य रूप से पुरुष पुलिस कर्मियों द्वारा किया जाता था। शिकायत दर्ज कराने के लिए अधिक सहज, संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस ने वर्ष 2021 में पंजाब पुलिस महिला मित्र (पीपीएमएम) परियोजना शुरू की।

    इस पहल के तहत महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 848 पंजाब पुलिस महिला मित्र विशेष रूप से तैनात की गई हैं।

    इसके अतिरिक्त, पंजाब पुलिस वर्तमान में राज्य में 10 महिला पुलिस थाने तथा 15 महिला सहायता केंद्र संचालित कर रही है, जो महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों में विशेष सहायता प्रदान करते हैं। ये केंद्र महिलाओं को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण उपलब्ध कराते हैं, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं और सहायता प्राप्त कर सकती हैं। प्रशिक्षित महिला पुलिस कर्मियों द्वारा संचालित ये केंद्र शिकायतों की संवेदनशील सुनवाई, परामर्श, कानूनी मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहायता सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

    डीजीपी गौरव यादव ने आगे कहा, “समर्पित महिला अधिकारियों की उपलब्धता से पीड़ित महिलाओं का पुलिस तक पहुंचने का विश्वास बढ़ा है, जिससे लैंगिक आधार पर होने वाले अपराधों की रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है तथा पीड़ितों को बेहतर सहायता मिल रही है।”

    पंजाब पुलिस ने न केवल प्रत्येक पुलिस थाने में महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं, बल्कि उनकी उपयोगिता और प्रभाव का आकलन करने के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं जे-पाल और हारटेक फाउंडेशन के सहयोग से एक मूल्यांकन प्रक्रिया भी शुरू की है।

    समुदाय एवं महिला मामलों के एसडीजी गुरप्रीत दियो ने कहा, “इन हेल्प डेस्कों ने पुलिस और आम नागरिकों के बीच की दूरी कम करने में मदद की है तथा पीड़ितों में यह विश्वास पैदा किया है कि उन्हें प्रशिक्षित और संवेदनशील महिला पुलिस अधिकारियों से उचित सहायता मिलेगी।”

     

  • मानसून के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकते हैं परिवार : डॉ. बलबीर सिंह

    मानसून के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकते हैं परिवार : डॉ. बलबीर सिंह

    चंडीगढ़: मानसून की पहली बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं यह स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से भरे मौसम की शुरुआत भी होती है। हर वर्ष पूरे भारत में डेंगू, मलेरिया और बुखार से जुड़ी अन्य बीमारियों के मामलों में वृद्धि दर्ज की जाती है। इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है।

    अमृतसर की 32 वर्षीय लाभार्थी बलविंदर कौर ने बताया, “मैंने हाल ही में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 8,400 रुपये का कैशलेस इलाज कराया है।” तेज बुखार होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां अस्पताल के कर्मचारियों ने उनका मुख्यमंत्री सेहत योजना में पंजीकरण कराया। उन्होंने कहा, “मैं सिलाई का काम करके अपना परिवार चलाती हूं। इस योजना ने समय पर इलाज और आर्थिक सहायता देकर मेरा बोझ कम किया, जिससे मैं अपनी सेहत पर ध्यान दे सकी। मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शुरू की गई इस योजना की आभारी हूं, क्योंकि यह जरूरत के समय परिवारों का सच्चा सहारा बनती है।”

    वर्ष 2025 में किए गए एक भारतीय अस्पताल अध्ययन में पाया गया कि मानसून के दौरान भर्ती मरीजों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस (तीव्र बुखार संबंधी बीमारी) का सबसे सामान्य कारण डेंगू था। यह अध्ययन इस बात पर बल देता है कि समय पर जांच और तत्काल उपचार अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि मानसून से जुड़ी अनेक बीमारियों के शुरुआती लक्षण एक जैसे होते हैं। डॉक्टर लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे लगातार बने रहने वाले बुखार को नजरअंदाज न करें। वहीं, पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना पात्र परिवारों को अस्पताल के खर्च की चिंता किए बिना कैशलेस इलाज उपलब्ध करा रही है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने मच्छरों और जलजनित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए निगरानी व्यवस्था, अस्पतालों की तैयारियों तथा जांच सुविधाओं को और मजबूत किया है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास पानी जमा न होने देने तथा बुखार के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।

    उन्होंने कहा, “जलजनित बीमारियों की रोकथाम घर से ही शुरू होती है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने में प्रत्येक परिवार, स्कूल और समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही हम लोगों को यह भी बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के पात्र लाभार्थी बिना किसी आर्थिक चिंता के समय पर इलाज करा सकते हैं।” सीनियर मेडिकल अधिकारी एवं एम.डी. मेडिसिन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, वेरका (पंजाब) के डॉ. राज कुमार ने कहा कि मरीज अक्सर हर बुखार को सामान्य वायरल संक्रमण समझने की गलती कर बैठते हैं।

    डॉ. राज कुमार ने बताया कि शुरुआती अवस्था में इस प्रकार के बुखार का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। समय पर जांच और उपचार से जटिलताएं कम होती हैं तथा बड़े अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता भी घट जाती है।

    बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने मौसमी बुखार का इलाज कराया, वहीं मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उसी दिन डायलिसिस, हृदय संबंधी उपचार, इंटेंसिव केयर तथा अन्य महंगे उपचारों का भी खर्च वहन किया गया। कुछ हजार रुपये वाले बुखार उपचार पैकेजों से लेकर जीवनरक्षक हृदय सेवाओं तक, यह योजना सामान्य बीमारियों से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक परिवारों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभर रही है।

    डॉ. राज कुमार ने सलाह दी कि यदि बुखार दो दिन से अधिक बना रहे, विशेषकर उसके साथ तेज शरीर दर्द, लगातार उल्टियां, पेट दर्द, रक्तस्राव, सांस लेने में तकलीफ या अचानक अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। उन्होंने कूलरों, गमलों और अन्य स्थानों पर जमा पानी नियमित रूप से खाली करने, मच्छररोधी उत्पादों का उपयोग करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा मानसून के दौरान विशेष स्वच्छता बनाए रखने की भी सलाह दी।