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  • अनुराग जैन बने नीति आयोग के नए CEO, जानिए कौन हैं MP के पूर्व मुख्य सचिव और कितना पढ़े-लिखे हैं

    अनुराग जैन बने नीति आयोग के नए CEO, जानिए कौन हैं MP के पूर्व मुख्य सचिव और कितना पढ़े-लिखे हैं

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को नीति आयोग (NITI Aayog) का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। बुधवार को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। आधिकारिक आदेश के अनुसार, अनुराग जैन दो वर्ष के कार्यकाल के लिए नीति आयोग के CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह इस पद पर उन्हीं नियमों और शर्तों के तहत कार्य करेंगे, जो उनके पूर्ववर्ती CEO पर लागू थीं। 1989 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को करीब चार दशक के प्रशासनिक अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। उन्होंने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए प्रशासन, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से जुड़े बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाई है।

    कई अहम पदों पर दे चुके हैं सेवाएं

    अनुराग जैन ने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सचिव, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) में सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में संयुक्त सचिव, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध निदेशक (MD) रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश में जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री के सचिव और विभिन्न प्रशासनिक विभागों में भी अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। प्रशासनिक सुधार, औद्योगिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में उनका अनुभव उन्हें देश के अनुभवी अधिकारियों में शामिल करता है।

    नीति आयोग में निभाएंगे अहम भूमिका

    नीति आयोग देश का प्रमुख सार्वजनिक नीति (Public Policy) थिंक टैंक है, जो केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ विकास योजनाओं को दिशा देने का काम करता है। नए CEO के रूप में अनुराग जैन सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद को मजबूत करने, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने और केंद्र सरकार की प्रमुख विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे। उनसे देश के विभिन्न क्षेत्रों में नीति निर्माण और विकास कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।

    अनुराग जैन की शिक्षा और शुरुआती जीवन

    अनुराग जैन का जन्म 11 अगस्त 1965 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। वह बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे। उन्होंने वर्ष 1986 में आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की और अपने बैच में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया। वर्ष 1988 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए। बाद में उन्होंने अमेरिका की सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी से लोक प्रशासन (Public Administration) में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की।

    मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव थे अनुराग जैन

    नीति आयोग का CEO बनने से पहले अनुराग जैन मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके केंद्र में जाने के बाद राज्य सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक बर्णवाल को मध्य प्रदेश का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। अशोक बर्णवाल ने माइनिंग इंजीनियरिंग में बीटेक करने के साथ-साथ पब्लिक पॉलिसी एंड मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की है। अब अनुराग जैन राष्ट्रीय स्तर पर नीति आयोग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि अशोक बर्णवाल मध्य प्रदेश के प्रशासन की कमान संभालेंगे। अनुराग जैन की नियुक्ति को केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्ति माना जा रहा है। उनके व्यापक अनुभव और नीति निर्माण की समझ से नीति आयोग के कामकाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
  • जंतर-मंतर पर सीधा हो गया निंहग सिख, दी खुली चुनौती, देखें वीडियो

    जंतर-मंतर पर सीधा हो गया निंहग सिख, दी खुली चुनौती, देखें वीडियो

    नई दिल्लीः कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में निहंग भी शामिल हो गए है। निहंग सिंहो को देखकर प्रदर्शनकारियों में बड़ा उत्साह देखने को मिला। प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने निहंग को देखकर कहा, “हमारे अंदर जो जान आ गई है ना, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।” वहीं एक निहंग ने कहा कि आपको जब भी हमारी जरूरत पड़ेगी हम आपके साथ हैं। बहुत बढ़िया है कि आप डटे हुए हो। वहीं नौजवान निहंग सिंह ने कहाकि हमने लाठी नहीं चलाई, प्रशासन ने चलाई है। इस दौरान खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर हमारे से लाठियां बरसाई गई तो पिछला हिस्सा लाल हो जाएगा।

    जिसके बाद जयकारों के नारे गूजने लगे। नौजवान ने कहा कि वह इंसाफ की लड़ाई लड़ते रहेंगे। अभी लोग एकत्रित नहीं हुए है और हम शांति से प्रदर्शन कर रहे है और करते रहेंगे। अगर जनता लड़ने पर आ गई तो ये पुलिस वाले कुछ नहीं कर पाएंगे, चाहे जितनी मर्जी तोपे और आंसू गैस के गोले बरसा दें। यह सारे पुलिस वाले इस्तीफा देने पर लग जाएगे। वहीं अन्य वीडियो में पुलिस कर्मी निहंग सिंह को शस्त्र उतारने की अपील कर रहा है।

    जिसके बाद नौजवान ने कहाकि वह उनके पीर है और वह इसे उतार नहीं सकते। नौजवान ने कहा कि वह शस्त्र से लड़ने नहीं जा रहे। वह बाहर शांतिमय से छात्रों के समर्थन में आकर प्रदर्शन कर रहे है। इस दौरान अन्य छात्र पुलिस को खरी खोटी सुनाने लग गए। बता दें कि देर रात जंतर-मंतर पर पुलिस लाठीचार्ज के दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में शरण ली थी। पुलिस जब उन्हें पीटने के लिए पहुंची तो आंदोलनकारियों ने गुरुद्वारे के अंदर आकर गेट बंद कर दिया। जिस वजह से पुलिस उन्हें नहीं खदेड़ सकी और बाहर ही रुकना पड़ा।

  • BJP पर Rahul Gandhi ने साधे निशाने, कहा- देश में 10 सालों में 152 पेपर हुए लीक, देखेंं वीडियो

    BJP पर Rahul Gandhi ने साधे निशाने, कहा- देश में 10 सालों में 152 पेपर हुए लीक, देखेंं वीडियो

    7.5 करोड़ परिवारों पर पड़ा सीधा असर

    नई दिल्लीः देशभर में छात्रों द्वारा पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। आज पटना मेंं भी भारी मात्रा में छात्र सड़कों पर उतरे। वहीं पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारे की गई। दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर इंदिरा भवन में मीडिया से बात की। दरअसल, राहुल गांधी ने बुधवार को दावा किया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है और सुधार के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी ने दिल्ली में पीएम आवास के पास धरना दिया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धरमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ सुरक्षा बलों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है।पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए हैं। इस पेपर लीक का 7.5 करोड़ परिवारों पर सीधा असर पड़ रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं। 152 पेपर लीक में एक को भी सजा नहीं मिली है। युवाओं में व्यवस्था के प्रति आक्रोश है। शिक्षा व्यवस्था पर काम करने की जरूरत है। नेता विपक्ष ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दिया गया है। सरकार छात्रों के प्रति संवेदनशील नहीं है। नीट परीक्षा पर खर्च शिक्षा बजट के बराबर है। 1.32 लाख करोड़ रुपए छात्र NEET परीक्षा पर खर्च कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? उन्होंने असल में क्या गलत किया है? सुरक्षा बल उन पर हथियार तान रहे हैं। वे शांति से अपनी मांगें रख रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि यह देश उनका क्या कर्जदार है? वे बस यह मांग कर रहे हैं कि देश के छात्रों को एक निष्पक्ष और उचित शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बच्चों ने आत्महत्या कर ली है। हमारे छात्र असीमित तनाव से गुजर रहे हैं और आखिरी क्षण में उन्हें बताया जाता है कि पेपर लीक हो गया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि वे अपनी मेहनत की कमाई इसमें लगाते हैं और फिर उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है। और सबसे हैरानी की बात यह है कि किसी को भी सज़ा नहीं हुई है। पिछले 10 सालों में 152 बार पेपर लीक हुए, लेकिन सज़ा किसी को नहीं मिली। तो कोई व्यक्ति या लोगों का कोई समूह हमारे एजुकेशन सिस्टम को – जो भारत की सबसे कीमती संपत्ति है – बर्बाद कर रहा है और हमारे छात्रों की ज़िंदगी खराब कर रहा है। सरकार क्या करती है? सज़ा किसी को नहीं मिलती।
  • कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ता में हुई झड़प, जमकर चलीं लाठियां, देखें वीडियो

    कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ता में हुई झड़प, जमकर चलीं लाठियां, देखें वीडियो

    पटनाः देश भर में भाजपा के खिलाफ युवा नीट पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे है। इस दौरान कांग्रेस भी युवाओं के समर्थन में सड़कों पर उतर गई। वहीं भाजपा द्वारा कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। दरअसल, बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी आज देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है। बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की। वहीं पटना स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान भारी बवाल मच गया।

    दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। उनके बीच लाठी-डंडे और पत्थर चलने लगे। कई लोगों के चोटिल होने की सूचना है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि जब वह सदाकत आश्रम स्थित कांग्रेस दफ्तर पहुंचे, तो विपक्षी पार्टी के लोग पहले से वहां बड़ी संख्या में मौजूद थे और सभी लाठी लेकर वहां खड़े थे। इसके बाद दोनों पक्षों में जमकर भिड़ंत्त हो गई। जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर लगभग सवा दो बजे सदाकत आश्रम के बाहर का इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जमकर पत्थरबाजी और लाठीचार्ज होने लगा।

    कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टी के झंडे लेकर आमने-सामने हो गए। इससे कुछ देर माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की। इस बवाल में दोनों ही पार्टियों से कई लोगों को चोटें आई हैं। बीजेपी के लोगों का कहना है कि वह कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। इस बीच कांग्रेस दफ्तर पर पहले से लोग लाठी-डंडे लेकर मौजूद थे। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि पहले लाठी-डंडे कांग्रेस के लोगों ने चलाए। पटना में तनाव को देखते हुए पुलिस ने कांग्रेस मुख्यालय और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर भी पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई ताकि दोनों दलों के कार्यकर्ता फिर आमने-सामने न आएं।

  • अब इस जगह BJP के खिलाफ प्रदर्शन, छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन, आंसू गैस के दागे गोले, देखें Live

    अब इस जगह BJP के खिलाफ प्रदर्शन, छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन, आंसू गैस के दागे गोले, देखें Live

    IG की एस्कॉर्ट गाड़ी को बनाया निशाना तोड़े शीशे, माहौल तनावपूर्ण

    पटनाः दिल्ली के बाद अब पटना में छात्रों द्वारा भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। जहां छात्रों द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। वामदल के छात्र संगठन आइसा के बैनर तले हजारों की तादाद में छात्रों और युवाओं का हल्ला बोल जारी है। पुलिस की सख्ती के बावजूद लगातार आगे बढ़ रहे हैं। जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश हुई तो नोकझोंक भी हुई। जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन से पानी की बौछार की। इस दौरान पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया। छात्रों ने बताया कि ये मार्च दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन और वहां शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में निकाला जा रहा है। पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद हजारों की संख्या में छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कई छात्र विरोध जताने के लिए सड़क पर ही बैठ गए। पुलिस अधिकारी उन्हें समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन करीब 20 मिनट के भीतर ही छात्रों ने बैरिकेडिंग उखाड़ फेंकी और आगे बढ़ गए। जेपी गोलंबर से निकलकर छात्रों का हुजूम डाकबंगला चौराहे पहुंच गया। जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और भारी संख्या में पुलिस बल, वाटर कैनन और आंसू गैस के दस्तों के साथ तैनात था। प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब कुछ उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर बोतलें और चप्पलें फेंकना शुरू कर दिया। इसी हंगामे के बीच पटना आईजी की एस्कॉर्ट गाड़ी को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ी पर हमला करके उसके शीशे तोड़ दिए। स्थिति को बिगड़ता देख पटना आईजी ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और पुलिस पूरे इलाके में स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटी हुई है।
  • पति ने पत्नी और 2 मासूमों को उतारा मौत के घाट, फिर खुद लगाया फंदा

    पति ने पत्नी और 2 मासूमों को उतारा मौत के घाट, फिर खुद लगाया फंदा

    मैसूरुः कर्नाटक के मैसूरु से एक सनसनी मामला सामने आया है, जहां एक पति ने पहले अपनी पत्नी फिर दो मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। बाद में आरोपी खुद फंसे से लटक गया। एक ही झटके में पूरा परिवार खत्म हो गया। इस दौरान एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ। सुसाइड नोट में प्रॉपर्टी के कागजात और तिजोरी की चाबियों को लेकर किए खुलासे ने पुलिस को जांच के नए एंगल पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

    पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान (39) हरीश के रूप में हुई है। उसने अपनी (37) की पत्नी निश्चिता, (8) की बेटी रक्षा और (4) के बेटे नक्शा को मौत की नींद सुला दिया। ये वारदात हुंसूर शहर के न्यू मारुति लेआउट की है। शुरुआती तफ्तीश में साफ हो गई है कि हरीश ने इस वारदात को अचानक अंजाम नहीं दिया, बल्कि इसकी पूरी प्लानिंग की थी। साजिश के तहत ही उसने तीन दिन पहले अपनी मां को दादी के घर भेज दिया था ताकि वह घर पर अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या कर सके।

    सुसाइड नोट में हरीश ने खुद लिखा था कि उसका शव ऊपर के कमरे में फंदे से लटकता मिलेगा। इसके अलावा उसने तिजोरी में रखे प्रॉपर्टी के महत्वपूर्ण कागजात और चाबियों का जिक्र करते पुलिस से गुजारिश की है कि इन्हें नोट में बताए एक खास व्यक्ति को सौंप दिया जाए।

    बताया जा रहा है कि हरीश एक बीमा कंपनी की व्हीकल रिकवरी यूनिट में काम करता था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि वह आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, जिसके चलते उसने पूरे परिवार को खत्म करने का फैसला किया। पुलिस अब इस एंगल से भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे कोई और बड़ा राज या किसी बाहरी शख्स का दबाव तो नहीं था। घटनास्थल की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि इस वारदात की असली सच्चाई सामने आ सके।

     

  • Cockroach Janta Party के प्रदर्शन पर भड़की Pakistani Expert, अपने ही देश की लगा दी क्लास

    Cockroach Janta Party के प्रदर्शन पर भड़की Pakistani Expert, अपने ही देश की लगा दी क्लास

    नई दिल्ली: देशभर में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के बड़े प्रदर्शन को अब पाकिस्तान के न्यूज चैनल भी लगातार ही दिखा रहे हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान के ऐसे कई न्यूज चैनल है जो इस आंदोलन की दिन-रात कवरेज कर रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान की एक पत्रकार और एक्सपर्ट कुर्रत-उल-ऐन शिरजी ने अपने देश के मीडिया पर सवाल उठा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि – पाकिस्तानी टीवी चैनल भारत की राजधानी नई दिल्ली में क्या हो रहा है यह तो लगातार दिखा रहे हैं परंतु वो यह क्यों नहीं दिखा रहे हैं कि POK में क्या हो रहा है। उन्होंने सवाल किया है कि पाकिस्तान का नेशनल मीडिया कश्मीर की असली स्थिति आखिर कब दिखाएगा।

    Pok पर चल रहे हैं बड़े प्रदर्शन

    Pok पर पिछले कई महीनों से बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। वहां के कई नेता पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे हैं। POK के नेताओं ने पाकिस्तान की असेंबली से आजादी तक का ऐलान कर दिया है। प्रदर्शन को रोकने के लिए पाकिस्तान की सेना ने पीओके की नाकेबंदी कर रखी है। आरोप है कि खाने-पीने की सामान की सप्लाई भी रोक दी गई है परंतु इन घटनाओं को पाकिस्तान की मीडिया में ज्यादा जगह ही नहीं मिल रही है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की मीडिया भारत में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लगातार प्रमुखता से दिखा रहा है। पाकिस्तान ने सबसे मशहूर अखबार डॉन ने अपनी रिपोर्ट में यह हेडलाइन भी दी है कि भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने विपक्ष को मोदी के खिलाफ एक सही मौका दिया है।

    डॉन की रिपोर्ट में लिखी गई ये बात

    डॉन की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि दिल्ली में हजरों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए हैं परंतु जिनकी संख्या उम्मीद से ज्यादा थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकारियों की सख्त कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद लगभग सभी विपक्षी दल इस आंदोलन के समर्थन में आ गए हैं हालांकि आंदोलन से जुड़े लोगों ने अभी तक यह कह दिया है कि वो चुनावी राजनीति से दूर रहना चाहते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स के हवाले से यह कहा गया है कि 2014 मे नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से लगातार चुनावी हार का सामना कर रहे विपक्ष के लिए देश का युवा एक बड़ा राजनीतिक मौका बन सकता है। भारत की 1,42 अरब आबादी में 30 साल के उम्र के लोगों की संख्या आधे से ज्यादा है। इनमें से कई लोग रोजगार की कमी को लेकर लंबे समय से नाराज भी हैं।

    पाकिस्तान पत्रकार की रिपोर्ट

    पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर के जियो न्यूज ने इस मामले पर एक रिपोर्ट पब्लिश की है। उसकी हेडलाइन थी भारतीय विपक्षी नेता ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई को लेकर मोदी के इस्तीफे की मांग की है। जियो न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में समाचार एजेंसी AFP का हवाला देते हुए लिखा कि – भारत के प्रमुख विपक्षी नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी का यह कहना था कि शिक्षा व्यवस्धा में सुधार की मांग कर रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई गलत थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा भी इस आंदोलन की लगातार कवरेज कर रहा है। अल जजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा विरोध प्रदर्शन बढ़ने के बीच पुलिस ने भारतीय विपक्षी नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिया है।

    पीएम के लिए आंदोलन बना सबसे बड़ी चुनौती

    बता दें कि यह आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक ही सीमित नहीं रहा है। इसमें पेशेवर लोग, परिवार और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग भी शामिल हो रहे हैं। अल जजीरा के अनुसार, हाल के सालों में यह आंदोलन मोदी सरकार के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। रिपोर्ट में यह भी बोला गया है कि इस आंदोलन ने सरकार की ओर से विरोध प्रदर्शनों और असहमति संभालने की तरीके को लेकर एक नई बहस शुरु कर दी है।  
  • रेप की कोशिश नाकाम हुई तो महिला की गला घोंटकर हत्या, दोनों आरोपी काबू

    रेप की कोशिश नाकाम हुई तो महिला की गला घोंटकर हत्या, दोनों आरोपी काबू

    दुर्ग-भिलाईः छत्तीसगढ़ के दुर्ग में एक महिला की हत्या कर देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार पुलिस को शुरुआती जांच में मामला गुमशुदगी का सामने आया था। परिजनों ने शिकायत में बताया था कि महिला मजदूरी करने के लिए घर से निकली थी जो देर रात तक घर नहीं लौटी, जिस पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। उसी रात पुलिस को एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था।

    पुलिस ने शव सिविल अस्पताल में रखवा दिया था। जहां रिश्तेदारों ने उसकी पहचान भगवंतीन साहू के रूप में की। पोस्टमॉर्टम में महिला के सिर, चेहरे और हाथ पर गंभीर चोट के निशान मिले। रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलगांव थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    शुरुआती जांच में एसीपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि ये मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर था। इसे सुलझाने के लिए पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई। टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच की और आसपास लगे 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले।

    इसके अलावा इलाके के लोगों, मजदूरों और ई-रिक्शा चालकों से भी पूछताछ की गई। तकनीकी सबूतों और मिले सुरागों के आधार पर पुलिस का शक राइस मिल कर्मचारी हर्ष यादव (19) और मैकेनिक नितेश ठाकुर (20) पर गया। दोनों को हिरासत में लेकर अलग-अलग पूछताछ की गई। शुरुआत में दोनों पुलिस को गुमराह करते रहे, लेकिन जब उनके सामने तकनीकी और अन्य साक्ष्य रखे गए तो उन्होंने हत्या करना स्वीकार कर लिया।

    आरोपियों ने बताया कि वह महिला को पैसों का लालच देकर सुनसान जगह पर ले गए थे। वहां उन्होंने कथित तौर पर महिला से रेप करने की कोशिश की। विरोध करने पर एक आरोपी ने गमछे से महिला का गला दबाया, जबकि दूसरे ने पत्थर से उसके सिर और चेहरे पर हमला कर उसे मार डाला। वारदात के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने 300 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले। साथ ही आसपास के लोगों, मजदूरों और ई-रिक्शा चालकों से पूछताछ की। जांच के दौरान मिले सुराग के आधार पर मंगलवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामला दुर्ग के पुलगांव थाना क्षेत्र का है।

     

  • CJP Protest को लेकर राजीव चौक समेत 4 स्टेशन बंद, 5 हजार जवान तैनात, देखें वीडियो

    CJP Protest को लेकर राजीव चौक समेत 4 स्टेशन बंद, 5 हजार जवान तैनात, देखें वीडियो

    नई दिल्लीः जंतर-मंतर में सीजेपी के द्वारा दिल्ली में प्रदर्शन जारी है। वहीं सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों को एक बार फिर सुरक्षा कारणों के चलते बंद कर दिया गया है। दिल्ली मेट्रो के जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। CJP के विरोध के चलते सुरक्षा कारणों से DMRC ने यह फैसला लिया है। दिल्ली मेट्रो की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, इन स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर रोक रहेगी। हालांकि, राजीव चौक और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर इंटरचेंज (लाइन बदलने) की सुविधा फिलहाल जारी रहेगी। ऐसे में यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मेट्रो की नवीनतम जानकारी जरूर जांच लें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

    डीएमआरसी की ओर से अगले निर्देश जारी होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। वहीं संसद सत्र के बीच इस बड़े आंदोलन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक जैसे प्रमुख स्थलों पर त्रि-स्तरीय (थ्री-टियर) सुरक्षा ग्रिड तैनात किया गया है। इस घेरे में दिल्ली पुलिस के जवानों की दो परतें और पैरामिलिट्री फोर्स की एक परत शामिल है। किसी भी आपात स्थिति पर काबू पाने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमों को चौबीसों घंटे तैयार रहने को कहा गया है।

    विजय चौक, प्रधानमंत्री आवास, गृहमंत्री आवास, सेवा तीर्थ, सेल्फी पॉइंट, ट्रांसपोर्ट भवन-संसद मार्ग, राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट जैसे हाई-सिक्योरिटी वाले वीवीआईपी इलाकों में किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के खास इंतजाम किए गए हैं। डीसीपी सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पब्लिक एडवाइजरी जारी किया है। उन्होंने लिखा, ‘दिल्ली पुलिस साफ तौर पर ये स्पष्ट करती है कि इस तरह के किसी भी विरोध मार्च या जुलूस के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई है और न ही कोई अनुमति दी गई है।’ डीसीपी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इस नियम के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह जमा होने, प्रदर्शन करने, जुलूस निकालने या धरना देने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

    आंदोलन से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के 5 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं। इसमें सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की 25 से ज्यादा बटालियनें शामिल की गई हैं, जिनमें भारी संख्या में महिला कर्मी भी ड्यूटी पर हैं। पूरी नई दिल्ली को 15 जोन में विभाजित किया गया है. सुरक्षा बल सुबह 4 बजे से ही मुस्तैद हैं। स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी और डीसीपी रैंक के अधिकारी खुद अलग-अलग इलाकों की सुरक्षा की कमान संभाल रहे हैं। सुरक्षा बलों को निर्देश हैं कि तोड़फोड़, लूटपाट या आगजनी जैसी हरकतों से कड़ाई से निपटा जाए। पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां और दूसरे दंगा नियंत्रण वाहन संवेदनशील जगहों पर खड़े कर दिए गए हैं।

     

  • दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा, पश्चिम बंगाल से CRPF की 20 कंपनियां बुलाई गईं; संसद सत्र और प्रदर्शनों के बीच फैसला

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद के मानसून सत्र और विभिन्न संगठनों व राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 20 अतिरिक्त कंपनियों को दिल्ली बुलाने का फैसला किया है। इन जवानों की तैनाती कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए की जाएगी। गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार देर रात इन अतिरिक्त कंपनियों की तत्काल तैनाती के निर्देश जारी किए। इसके बाद CRPF की टुकड़ियों को हवाई मार्ग से पश्चिम बंगाल से दिल्ली लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। बताया जा रहा है कि इन कंपनियों को पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान वहां तैनात किया गया था और चुनाव के बाद भी राज्य सरकार के अनुरोध पर वहीं रखा गया था। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन तेज हुए हैं। इनमें नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन भी शामिल हैं। इसके अलावा संसद का मानसून सत्र जारी होने के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक संवेदनशील मानी जा रही है।

    करीब 2,000 अतिरिक्त जवान होंगे तैनात

    CRPF की एक कंपनी में सामान्य तौर पर करीब 100 जवान होते हैं। ऐसे में 20 कंपनियों की तैनाती से लगभग 2,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी दिल्ली में उपलब्ध होंगे। इन जवानों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हाल के प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर तनाव और हिंसक झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसी को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ विरोध-प्रदर्शनों और विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई। हालांकि, अधिकारियों की ओर से किसी विशेष संगठन के बारे में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

    पहले से भी तैनात हैं CRPF और RAF की कंपनियां

    अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार पहले ही दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए CRPF और उसकी विशेष दंगा-रोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की करीब 30 कंपनियां उपलब्ध करा चुकी है। अब 20 अतिरिक्त कंपनियों के आने से राजधानी में केंद्रीय बलों की मौजूदगी और बढ़ जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि संसद सत्र के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, वीआईपी मूवमेंट और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल मिलकर संवेदनशील इलाकों की निगरानी करेंगे। फिलहाल राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट जारी है और प्रशासन का कहना है कि आम लोगों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।