Category: Health
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Food Poisoning का कारण बना कुट्टू का आटा, डॉक्टर से जानें कैसे करें सही आटे की पहचान?
सेहत: नवरात्रि के इन 9 दिनों में कुछ लोग उपवास करके मां दुर्गा को प्रसन्न करते हैं। नौ दिनों तक व्रत वाला खाना खाते हैं। व्रत वाले खाने में कुट्टू का आटा भी मुख्य तौर पर शामिल होता है। दिल्ली के साथ-साथ कई आस-पास के जिलों में नवरात्रि व्रत के दौरान इस आटे का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कुछ इलाकों में लोग सिंघाड़े का आटा भी इस्तेमाल करते हैं। कुट्टू का आटा सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है परंतु यदि यह आटा मिलावटी या पुराना हो जाए तो ये लोगों के बीमार पड़ने के कारण बन सकता है। हर साल बहुत से लोगों में कुट्टू का आटा खाने के कारण फूड पॉइजिंग होती है। इस साल भी कुछ ऐसा भी हुआ नवरात्रि के पहले दिन दिल्ली में कुट्टू का आटे से बना खाना खाने के कारण 200 लोग बीमार हो गए। यह लोग जहांगीरपुरी, महेंद्र पार्क, समयपुर, भलस्वा डेयरी, लाल बाग और स्वरुप नगर जैसे इलाकों के रहने वाले थे। डॉक्टरों का यह कहना है कि ज्यादातर लोगों को आटे के कारण फूड प्वॉइजनिंग हो गई क्योंकि उन्होंने मिलावटी या फिर पुराना कुट्टू का आटा खा लिया था। ऐसे में अब यहां यह सवाल आता है कि कितने समय तक कुट्टू का आटा खाने लायक रहता है और इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं? आइए जानते हैं डॉक्टर्स का क्या कहना है। -

Health Sector के लिए मुश्किल बन सकता है AI, Lancet की स्टडी में हुआ खुलासा
सेहत: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आज के समय में हर फील्ड में आगे दिख रहा है। मेडिकल सेकटर भी इससे नहीं बच पाया। जहां एक ओर एआई को डायग्नोसिस और डिजीज मैनेजमेंट का फ्यूचर माना जा रहा है। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अभी एक नई स्टडी ने अब गंभीर खतरे की ओर इशारा दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, लगातार एआई आधारित टूल्स पर निर्भरता डॉक्टरों की स्किल्स को कमजोर कर सकती है। जिस तकनीक से मरीजों का इलाज आसान होना चाहिए अब वही डॉक्टरों की क्षमता को धीरे-धीरे खत्म कर देगी।डॉक्टर्स की स्किल्स पर होगा असर
पौलेंड के चार कोलेनोस्कोपी सेंटर्स में की गई स्टडी के अनुसार, एआई असिस्टेड डायगोसिस से डॉक्टरों की अडेनोमा डिटेक्शन रेट (यानी की कैंसर जैसी बीमारियों का शुरुआती पता लगाना) कम हो गया। आंकड़ों की मानें तो जहां पहले बिना एआई की मदद के 28 मामलों में एडेनोमा डिटेक्ट कर रहा था। अब वहीं एआई पर निर्भर होने के कारण यह कम होकर 22 प्रतिशत रह गया इससे 20 प्रतिशत कमी आई। इसका अर्थ है कि डॉक्टर लगातार यदि एआई पर निर्भर रहेंगे तो अपनी क्लिनिकल जजमेंट और डायग्नोसिस की क्षमता खो देंगे।एआई बन रहा खतरा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब किसी डॉक्टर को लगातार तैयार सॉल्यूशन और सजेशन्स मिलते हैं तो उनकी खुद की सोचने और एनालाइज करने की क्षमता कम हो जाती है। हेल्थ सेक्टर में यह स्थिति और भी खतरनाक होगी क्योंकि यहां गलत डायग्नोसिस का सीधा असर मरीज की सेहत पर पड़ेगा। रिसर्चर्स का कहना है कि यदि यह ट्रैंड बढ़ा तो आने वाले समय में डॉक्टर सिर्फ एआई पर निर्भर होकर रह जाएंगे और उनकी प्रोफेशन्ल स्किल्स पीछे छूट जाएगी। इस स्टडी में शामिल डॉक्टर मार्सिन रोमास्किर्जक का कहना है कि हमको यह समझना पड़ेगा कि किन फैक्टर्स के कारण यह समस्या बढ़ती जा रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओस्लो के प्रोफेसर यूइची मोरो ने बताया कि यदि डॉक्टर लगातार एआई का इस्तेमाल करेंगे तो वो खुद कम मोटिवेटेड, कम फोक्सड और कम जिम्मेदार हो सकेंगे। ऐसे में वह मरीज की जान बचाने के लिए आंखे बंद करके टेक्नोलॉजी पर भरोसा करने लगा जाएंगे।भारतीय डॉक्टर्स को देना पड़ेगा ध्यान
भारत में पहले से ही डॉक्टरों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। ऐसे में यदि यहां पर डॉक्टर्स एआई पर निर्भर हो जाएंगे तो और भी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। डॉक्टर्स का कहना है कि हमें एआई के बढ़ते हुए इस्तेमाल के फायदे और नुकसान दोनों पर ही ध्यान देना पड़ेगा। एआई टेक्नोलॉजी को अपनाना जरुरी है परंतु इसके साथ ही डॉक्टरों की ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल स्किल्स को भी मजबूत करना पड़ेगा। लैंसेट की रिपोर्ट की एक बड़ी चेतावनी देती है कि यदि एआई का इस्तेमाल बैलेंस सही तरह से नहीं किया तो हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर्स की स्किल धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। एआई को मदद के तौर पर इस्तेमाल करना सही है परंतु इस पर ज्यादा निर्भर रहना मुश्किल खड़ी कर देगा। ऐसे में वो दिन दूर नहीं होगा जब डॉक्टर सिर्फ मशीनों के फैसलों पर अपना काम करेंगे। मरीजों की जान भी इससे खतरे में पड़ सकती है। -

रोज इतने कदम पैदल चलने से कंट्रोल रहेगा Blood Pressure, वजन भी होगा कम
सेहत: भागदौड़ भरी इस जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन एक आम समस्या बन गई है पर बहुत से लोग इस गंभीर समस्या का आसान समाधान नहीं जानते। रोज पैदल चलने की आदत से सिर्फ आपका बीपी ही कंट्रोल नहीं रहेगा बल्कि आपकी हेल्थ भी अच्छी होगी। डॉक्टर्स के अनुसार, पैदल चलना एक नैचुरल और आसान तरीका है जिससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहेगा। नियमित तौर पर पैदल चलने से यह प्रक्रिया बेहतर होती जाती है। इससे आपके रक्तवाहिकाओं की दीवारें मजबूत और लचीली होती है। इससे खून का प्रवाह सुचारु होगा। इसके अलावा पैदल चलने से शरीर का वजन भी कंट्रोल में रहेगा।ब्लड प्रेशर रहेगा कंट्रोल
जब भी आप पैदल चलते हैं तो शरीर की मांसपेशियों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरुरत पड़ती है। ऐसे में दिल तेजी से धड़कता है और रक्तवाहिकाएं फैलती हैं। नियमित तौर पर पैदल चलने से यह प्रक्रिया और आसान होती है और रक्तवाहिकाओं की दीवार मजबूत और लचीली बनती है। इससे रक्त का प्रवाह अच्छे से होता है। इसके अलावा पैदल चलने से शरीर का वजन भी कंट्रोल में रहता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर कम होता है।इतने घंटे रोज करें सैर
यदि आप अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखना चाहते हैं तो रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। यदि आप शुरुआत में हैं तो 15 मिनट से शुरु करके धीरे-धीरे अपना समय बढ़ा सकते हैं। यदि आप तेजी से बीपी कम करना चाहते हैं तो दिन में दो बार 20-20 मिनट तक सैर करें।इस बात का भी रखें ध्यान
पैदल चलने का असली फायदा आपको तभी होगा यदि आप सही तरह से चलेंगे। पैदल चलते समय सीधी मुद्रा में चलें अपने कंधे पीछे की ओर रखें और पेट को अंदर की ओर खींचे। अपनी गति इस तरह की रखें कि आपकी सांस तेज हो परंतु बातचीत करने में आपको आसानी हो। . गर्मी में सुबह या शाम के समय ही पैदल चलें। . आरामदायक जूते पहन कर चलें। . शरीर में पानी की कमी न होने दें। रोज पैदल चलने से सिर्फ बीपी ही नहीं बल्कि बाकी बीमारियों से भी आपका बचाव होगा। इससे डायबिटीज का खतरा कम होगा, हड्डियां मजबूत होगी, वजन कंट्रोल रहेगा। इसके अलावा पैदल चलने से तनाव भी कम होगा, नींद में सुधार होगा और आप एनर्जेटिक रहेंगे। -

आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकते हैं Ultra Processed Foods, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
सेहत: प्रोसेस्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड्स इन दिनों कई लोगों की पसंद बने हुए हैं। ज्यादातर लोग इस तरह के फूड्स को अपनी डेली रुटीन में शामिल करते हैं लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह आपकी सेहत के लिए कितने खतरनाक हैं? अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने हाल ही में प्रोसेस्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड्स को लेकर गाइडलाइन्स जारी की हैं। गाइडलाइंस इसलिए भी खास है क्योंकि इस विषय पर जल्द ही अमेरिका की सरकार एक ओर बड़ी रिपोर्ट जारी करने वाली है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने यह साफ कह दिया है अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स दिल और पूरे शरीर की सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक हैं।सही मात्रा में करें सेवन
यहां पर एक दिलचस्प बात यह भी है कि ऐसे बहुत लेस प्रोसेस्ड फूड्स होते हैं जो आपकी सेहत को इतना नुकसान नहीं पहुंचाते। इसका अर्थ है कि इस तरह के फूड औरों के मुकाबले आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। यदि आप इन्हें सही तरीके से चुनते हैं और सीमित मात्रा में खाएंगे तो इनको आप डेली डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कुछ अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को इंप्रुव्ड डाइट क्वालिटी वाला भी माना है। इनमें साबुत अनाज से बनी ब्रेड, कम चीनी वाला दही, कुछ टमाटर और ड्राई फ्रूड्स या बीन्स से बने स्प्रेड इसमें शामिल है हालांकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सलाह दी है कि इनके प्रोडक्शन पर यदि ध्यान और नियंत्रण रखा जाए तो ये अनहेल्दी नहीं होंगे। अपने साइंटिफिक बयान में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कहा है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। ये वो फूड्स हैं जिनको बहुत ज्यादा प्रोसेस करके बनाया जाता है। इसमें एक्स्ट्रा शुगर, नमक, फैट और एडिटिव्स डाले जाते हैं। ऐसे में इनको खाने से आपको ज्यादा भूख लगती है। एएचए (AHA) ने फूड इंड्स्ट्री और नियम बनाने वालों को यह भी कहा है कि सबसे खराब अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के प्रोड्क्शन और उपलब्धा को कम करें। इस पर रिपोर्ट तैयार करने वाले एक्सपर्ट ने यह चेतावनी दी है कि फूड इंडस्ट्री को इसलिए नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि कुछ अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स बाकियों के मुकाबले थोड़े अच्छे होते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कम हानिकारक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स असली समस्या को हल नहीं कर सकते ऐसे में अनहेल्दी और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड्स उपलब्ध करवाना बहुत बड़ी चुनौती है। न्यूट्रिशनिस्ट ने भी इस तरह के फूड्स को लेकर चुनौती दी है। उनका यह कहना है कि कुछ हेल्दी दिखने वाले अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स लोगों को घर में बने कम प्रोसेस्ड खाने की तुलना में ज्यादा खाना खाने के लिए उक्साते हैं। -

लोहे के बर्तन में खाना बनाना कितना फायदेमंद, जानें सच
हेल्थः बाकी पोषक तत्वों की तरह आयरन भी हमारे शरीर के लिए जरूरी है। हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं कि लोहे के बर्तन में खाना बनाने से लोहे का कुछ अंश मिलने के कारण खाने में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है। क्या लोहे के बर्तन में खाना पकाने से सच में आयरन मिलता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लोहे के बर्तनों में खाना पकाना शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाने का एक अच्छा और आसान तरीका है। यह तब काम करता है जब खाने में मौजूद एसिड बर्तन के आयरन के साथ रिएक्ट करते हैं, जिससे खाने में थोड़ी मात्रा में आयरन मिल जाता है। लोहे के बर्तन में पका हुआ खाना खाने पर शरीर इस आयरन को सोख लेता है।
हालांकि खाने में आयरन की मात्रा इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप क्या पका रहे हैं और कैसे पका रहे हैं। जब आप लंबे समय तक ज्यादा तापमान पर खट्टी चीजें पकाते हैं तो वो खाना सबसे ज्यादा आयरन सोखता है। उदाहरण के लिए टमाटर से बना स्टू जो धीमे-धीमे पकाया जाता है, उसमें लोहे के पैन में तेजी से तले अंडे की तुलना में ज्यादा आयरन होगा।
आयरन एक मिनरल है। जिसका इस्तेमाल शरीर के विकास और स्वस्थ रहने के लिए होता है। आपका शरीर आयरन का इस्तेमाल हीमोग्लोबिन और मायोग्लोबिन बनाने के लिए करता है जो लाल रक्त कोशिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) में मौजूद प्रोटीन हैं और ये शरीर की मांसपेशियों तक ऑक्सिजन पहुंचाते हैं।
ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज नुकसानदायक हो सकती है। अगर आप लगातार ज्यादा आयरन का सेवन करते हैं तो आपके पेट की परत में सूजन हो सकती है और पेट के अल्सर का खतरा बढ़ सकता है। आयरन का ज्यादा सेवन करने से शरीर को जिंक सोखने में भी मुश्किल हो सकती है जो विकास, वृद्धि और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी एक और मिनरल है।
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Health और Term Insurance भी हुई Tax Free, अब होगी बचत ही बचत
हेल्थः जीएसटी रिफॉर्म्स लागू होने से आज से तमाम सामानों और सुविधाओं पर लोगों को बड़ी राहत मिली है। वहीं लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाला जीएसटी जीरो हो गया है। जिसका असर पॉलिसी होल्डर्स को प्रीमियम भुगतान पर देखने को मिलेगा और उन्हें कम पैसा देना होगा।
नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म के तहत जरूरी सामानों और सेवाओं पर नए सिरे से जीएसटी रेट्स लागू किए गए हैं। पहले लागू 12% और 28% के स्लैब को खत्म किया गया है, तो इनमें शामिल चीजों को 5% और 18% के स्लैब में डाल दिया गया है। बात अगर इंश्योरेंस पर लागू जीएसटी की करें, तो अब इसे शून्य कर दिया गया है। अब तक लाइफ-हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर 18 फीसदी की दर से ही जीएसटी लागू था।
प्रीमियम पेमेंट पर बचत का कैलकुलेशन
अगर आपकी पॉलिसी का मंथली बेस प्रीमियम 30,000 रुपये था, तो उस पर 18% जीएसटी के हिसाब से 5400 रुपये मंथली जोड़कर 35,400 रुपये का पेमेंट करना होता था। लेकिन अब जीरो जीएसटी होने पर प्रीमियम पर टैक्स की अतिरिक्त लागत नहीं देनी होगी और सिर्फ बेस प्रीमियम का पेमेंट ही करना होगा। वहीं अगर किसी का प्रीमियम 10,000 रुपये है, तो उसे इस हिसाब से सीधे 1800 रुपये की बचत होगी।अगर टर्म इंश्योरेंस की बात करें, तो ये भी अब पहले से काफी सस्ता हो गया है। आपने 30 साल की उम्र में 1 करोड़ का टर्म इंश्योरेंस लिया है, तो आपका सालाना प्रीमियम करीब 15000 रुपये बनता था। लेकिन, अब पॉलिसी होल्डर पर पड़ने वाला 18 फीसदी टैक्स का अतिरिक्त बोझ कम हो जाएगा।
फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस पर कितनी बचत?
अगर कोई व्यक्ति फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस लेता है, तो उसके भी काफी पैसा बचेंगे। अगर आपकी उम्र 35 साल और पत्नी की उम्र 33 साल है, इसके साथ ही आपके दो बच्चे हैं। पूरी फैमिली के लिए 10 लाख कवर का प्रीमियम औसतन सालाना 25,000 रुपये होता है। उस पर 18% GST लगता था, जो 4500 रुपये होता था, यानी कुल 29,500 रुपये भरना होता था, लेकिन अब जीएसटी नहीं लगेगा, इसलिए सीधे-सीधे 4500 रुपये बचने वाला है। -

Acidity, Gas और पेट फूलने को न करें नजरअंदाज, बन सकता है Cancer
हेल्थः एसिडिटी, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जिसके पीछा का कारण देर रात मसालेदार खाना, अनियमित खान-पान, या मानसिक तनाव हो सकता है। हालांकि कभी-कभी जो सामान्य पाचन समस्याएं लगती हैं, वे असल में पेट के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरूआती संकेत हो सकता है। समस्या यह है कि पेट का कैंसर अपने शुरुआती दौर में सामान्य पाचन संबंधी परेशानियों के रूप में छिपा रहता है, जिससे पहचानना मुश्किल हो जाता है।
ये लक्षण दिखे तो हो जाए चौकना
कम खाना खाने के बाद भी भारीपन: खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होना सामान्य है, लेकिन पेट का कैंसर हल्का खाना खाने के बाद भी पेट में भारीपन का अहसास पैदा कर सकता है। यह तब होता है जब ट्यूमर पेट में जगह घेरता है और पेट की क्षमता कम हो जाती है।बार-बार मतली आना: कई लोग मतली को अपच मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर तैलीय भोजन न करने के बावजूद मतली बार-बार हो, तो यह संकेत हो सकता है कि पेट की परत सिर्फ एसिड से नहीं, बल्कि किसी और गंभीर कारण से प्रभावित हो रही है। लगातार मतली आना, खासकर जब साथ में भूख भी न लगे, पेट के कैंसर का एक अनदेखा संकेत हो सकता है।
मल के रंग में बदलाव आना: पेट के कैंसर की वजह से आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है, जिससे मल का रंग गहरा या टार जैसा हो सकता है। कभी-कभी यह बदलाव बहुत सूक्ष्म होते हैं, जैसे कि थोड़ा चिपचिपा मल। यह एसिडिटी के सामान्य लक्षण नहीं हैं और अगर बार-बार दिखाई दें तो इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
लगातार डकार आना: cancer खाने के बाद डकार आना सामान्य है, लेकिन अगर डकारें बार-बार आने लगें या इनके साथ खट्टा स्वाद, या उल्टी भी हो, तो यह गैस की बजाय कहीं अधिक गंभीर समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में यह इसलिए होता है क्योंकि पेट में ट्यूमर पाचन प्रक्रिया में रुकावट डालता है, जिससे गैस बनती है और डकारें “भोजन के बाद की डकार” से ज्यादा बार-बार और असहज महसूस होती हैं।
Disclaimer: यह आम जानकारी के लिए हैं। किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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सावधान! ये Symptoms दिखे तो नजर अंदाज न करें, हो सकता है Alzheimers
हेल्थः अल्जाइमर को ज्यादातर लोग भूलने की बीमारी के नाम से भी जानते हैं। अल्जाइमर एक तरह का मेंटल डिसऑर्डर है। समय रहते इस बीमारी की पहचान करना बेहद जरूरी होता है वरना आपकी मेंटल हेल्थ और फिजिकल हेल्थ बुरी तरह से डैमेज हो सकती है।
अल्जाइमर के लक्षणों में घटनाओं को, नामों को या फिर जानकारियों को भूल जाना शामिल है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ लक्षण अल्जाइमर की तरफ इशारा कर सकते हैं। एक ही सवाल को या फिर कहानी को या फिर बात को रिपीट करना, इस तरह का लक्षण भी अल्जाइमर का संकेत साबित हो सकता है। अल्जाइमर की वजह से दूसरों की बात समझने में भी दिक्कत महसूस हो सकती है।
निर्णय लेने में दिक्कत महसूस होना, ये लक्षण अल्जाइमर की तरफ इशारा कर सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जैसे-जैसे ये बीमारी बढ़ती है, लक्षणों की इंटेंसिटी भी बढ़ने लगती है। अल्जाइमर की वजह से मूड स्विंग की दिक्कत का सामन करना पड़ सकता है। इस तरह के लक्षण एक साथ नजर आने पर आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए और अपना चेकअप करवा लेना चाहिए।
अल्जाइमर धीरे-धीरे मरीज की सेहत पर इतना ज्यादा हावी होता जाता है कि मरीज की रोजमर्रा के काम करने की क्षमता भी खत्म होती चली जाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मेंटल डिसऑर्डर का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, दवाइयों से और थोड़ी-बहुत सावधानी बरतकर इस बीमारी के लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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Skin को जवान रखने के लिए Bani पीती हैं ये स्पेशल सूप, Nutritionist से जानें फायदे
सेहत: बिग बॉस फेम वीजे बानी की ग्लोइंग स्किन के फैंस दीवाने हैं। उनके जैसी त्वचा हर लड़की की पहली चाहत होती है। अब हाल में उन्होंने अपने फैंस को डाइट के बारे में बताया है। वीजे बानी ने बताया कि वो अपने खाने-पीने का कैसे ख्याल रखती हैं। नाश्ते में वो बोन ब्रॉथ यानी की हड्डियों का सूप पीना पसंद करती हैं। बोन ब्रॉथ सूप को पाया भी कहते हैं। एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में बानी ने अपने फेवरेट ब्रेकफास्ट के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि – मैं बोन ब्रॉथ पीती हूं मैं इसको घर पर बनाती हूं और सुबह ब्रेकफास्ट में इसको पीती हूं। यह त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है। बोन ब्रॉथ जानवरों की हड्डियों को उबालकर बनाया जाता है। यह सूप पोषक तत्वों से भरपूर होता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो इसको पीने से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ होते हैं। पाचन अच्छा रखने के लिए, हड्डियों को मजबूत बनाने, बालों और त्वचा को हेल्दी रखने के लिए यह बेहद फायदेमंद होता है। नाश्ते में यदि आप इसे पीने की आदत डालते हैं तो पहले कुछ बातों का ध्यान रखें। बोन ब्रॉथ में पाए जाने वाले पोषक तत्व यह कोलेजन का बहुत अच्छा स्त्रोत होता है। यह जोड़ों को स्वस्थ बनाए रखने, त्वचा की इलास्टिसिटी बढ़ाने और बाल व नाखूनों को मजबूत करने में भी मदद करता है। इसमें जिलेटिन, प्रोलाइन और ग्लाइसिन जैसे अमीनो एसिड मौजूद होते हैं जो पाचन मजबूत करने, सूजन को कम करने और टिश्यू की मरम्मत में खास भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे मिनरल्स भी पाए जाते हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य और मांसपेशियों की मरम्मत करने में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।इस बात का भी रखें ध्यान
बोन ब्रॉथ में कैलोरी कम होती है परंतु यह कंप्लीट डाइट नहीं हो सकती। इसमें फाइबर और कार्बोहाइड्रेट नहीं पाए जाते और इसमें प्रोटीन भी पूरी मात्रा में नहीं होता। ऐसे में यदि आप इसका सेवन ब्रेकफास्ट के तौर पर करते हैं तो इसके साथ अंडे, एवाकोडो, सब्जियां और साबुन अनाज के टोस्ट जैसे बाकी खाद्य पदार्थ भी अपनी डेली रुटीन में शामिल करें। इससे आपके शरीर को बैलेंस्ड डाइट मिलेगी। बाजार में जो बोन ब्रॉथ मिलता है उसमें सोडियम काफी ज्यादा मात्रा में होता है। ऐसे में जो लोग हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। घर में आप बोन ब्रॉथ बनाकर खा सकते हैं और इसमें आप नमक की मात्रा अपने हिसाब से रख सकते हैं। कम सोडियम वाले प्रोडक्ट्स ही इस दौरान चुनें।हेवी मेटल्स का भी रहता है खतरा
कुछ जानवरों की हड्डियों में खासतौर पर बड़े जानवरों की हड्डियों में सीसा जैसे भारी धातुओं के अंश हो सकते हैं। ऐसे में यह तय करना जरुरी है कि आप अच्छी क्वालिटी वाले मीट प्रोडक्ट्स की ही हड्डियां इस्तेमाल करें । -

किसी जादुई फल से कम नहीं ये Fruit, skin को मिलेगा Natural Glow और वजन होगा कम
हेल्थः सेहतमंद रहने के लिए हेल्दी डाइट जरूरी है। जिसके लिए सीड्स, नट्स, फल, हरी सब्जी, ग्रीन टी जैसे तमाम चीजों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं। हम आपको एक ऐसे सुपरफूड के बारे में बताने जा रहे हैं जो विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और पाचक एंजाइमों से भरपूर है। उसे खाने से स्किन चमकदार होती है और वजन भी कम होता है।
हेल्दी रहने के लिए लोग तरह-तरह के सुपरफूड्स ढूंढ़ते हैं, लेकिन पपीता किसी जादुई फल से कम नहीं है, क्योंकि इसे खाने से बॉडी को कई फायदे मिलते हैं। मीठा और टेस्टी होने के साथ-साथ पपीता कई पोषक तत्वों से भरा है।
वजन घटाने में मददगार
कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर वाला पपीता अगर आप खाते हैं तो ये आपको ओवरईटिंग से बचाता है। पपीता खाने से पेट भरा हुआ लगता है और इसकी वजह से हम बार-बार खाने से बचते हैं। इसलिए वेट लॉस के दौरान पपीता को डाइट में शामिल करना बहुत बेहतर होता है।पपीते में मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है। पपीते का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और इसी वजह से ये शुगर के मरीजों के लिए भी बेहद गुणकारी माना जाता है, वो लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
पपीते में पपीन एंजाइम पाए जाते हैं तो खाने को जल्दी और सही तरीके से पचाने में मदद करते हैं, फाइबर की वजह से गैस, एसिडिटी और कब्ज में भी पपीता खाना सही होता है और ये इम्युनिटी को बी मजबूत करता है।
स्किन को दे नेचुरल ग्लो
विटामिन C, लाइकोपीन और बीटा-कैरोटीन ये सब चीजें पपीते में मौजूद होती हैं और इसी वजह से ये स्किन के लिए बहुत गुणकारी है। एंटीऑक्सीडेंट्स होने की वजह से इसके सेवन से स्किन ग्लोइंग और जवान बनी रहती है और ये झुर्रियां को भी कम करता है।कैसे खाएं पपीता?
– सुबह नाश्ते में ताजे पपीते के टुकड़े खाएं।
– चाहें तो नींबू निचोड़कर इसका स्वाद बढ़ा सकते हैं।
– पपीते को स्मूदी, सलाद या दही के साथ खा सकते हैं।
– टमाटर, प्याज और हरी धनिया डालकर पपीते की सालसा भी बना सकते हैं।