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  • Health Tips: घंटों कंप्यूटर पर काम करने वालों के लिए फायदेमंद है ये योगासन

    Health Tips: घंटों कंप्यूटर पर काम करने वालों के लिए फायदेमंद है ये योगासन

    Health Tips: आजकल ज्यादातर लोग घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते हैं। लगातार एक ही जगह बैठे रहने, गलत तरीके से बैठने और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर, पीठ और कंधों में दर्द की समस्या आम हो गई है। लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है, जिससे शरीर में जकड़न और दर्द महसूस होने लगता है। कई लोग इस दर्द से राहत पाने के लिए पेन किलर या दर्द निवारक बाम का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह केवल कुछ समय के लिए आराम देता है। अगर आप इस समस्या से लंबे समय तक छुटकारा पाना चाहते हैं, तो नियमित रूप से कुछ आसान योगासन कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 4 योगासन जो पीठ और कमर दर्द को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
    1. मार्जरीआसन (कैट-काउ पोज)
    मार्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पीठ की जकड़न दूर करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और कमर दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। कैसे करें?
    • सबसे पहले घुटनों और हथेलियों के बल जमीन पर आ जाएं।
    • सांस लेते हुए सिर को ऊपर उठाएं और पीठ को नीचे की ओर झुकाएं।
    • अब सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे करें और पीठ को ऊपर की ओर गोल कर लें।
    • इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे 8 से 10 बार दोहराएं।
    फायदे
    • रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
    • पीठ और कमर की अकड़न कम होती है।
    • शरीर में लचीलापन बढ़ता है।
    1. भुजंगासन (कोबरा पोज)
    जो लोग लंबे समय तक झुककर काम करते हैं, उनके लिए भुजंगासन बेहद फायदेमंद है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और कमर के निचले हिस्से के दर्द को कम करने में मदद करता है। कैसे करें?
    • पेट के बल सीधे लेट जाएं।
    • दोनों हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें।
    • गहरी सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
    • गर्दन को पीछे की ओर ले जाकर ऊपर देखें।
    • कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें।
    • फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस नीचे आ जाएं।
    • इस आसन को 3 से 5 बार दोहराएं।
    फायदे
    • कमर दर्द में राहत मिलती है।
    • रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
    • छाती और कंधों की मांसपेशियां खुलती हैं।
    1. अधोमुख श्वानासन (डाउनवर्ड डॉग पोज)
    यह योगासन पूरे शरीर को स्ट्रेच करने का काम करता है। खासकर कंधों, हाथों, पैरों और कमर की जकड़न को दूर करने में यह काफी प्रभावी माना जाता है। कैसे करें?
    • हाथों और पैरों के बल खड़े हो जाएं।
    • धीरे-धीरे अपने कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं।
    • शरीर को उल्टे V आकार में लाने की कोशिश करें।
    • एड़ियों को जमीन की ओर दबाएं।
    • अपनी नजर नाभि की तरफ रखें।
    • इस स्थिति में 5 गहरी सांसें लें।
    फायदे
    • पूरे शरीर में खिंचाव आता है।
    • कमर और पीठ का तनाव कम होता है।
    • शरीर में ऊर्जा और लचीलापन बढ़ता है।
    1. बालासन (चाइल्ड पोज)
    बालासन एक आरामदायक योग मुद्रा है, जो शरीर और मन दोनों को शांति प्रदान करती है। यह पीठ, गर्दन और कमर के दर्द को कम करने में मदद करती है। कैसे करें?
    • वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
    • अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें।
    • माथे को जमीन से लगाने की कोशिश करें।
    • दोनों हाथों को सामने की ओर सीधा फैलाएं।
    • शरीर को पूरी तरह रिलैक्स रखें।
    • इस अवस्था में 1 से 2 मिनट तक गहरी सांस लेते रहें।
    फायदे
    • मानसिक तनाव कम होता है।
    • पीठ और गर्दन को आराम मिलता है।
    • शरीर की थकान दूर होती है।
    योग करते समय रखें इन बातों का ध्यान
    • योग हमेशा खाली पेट या हल्का भोजन करने के बाद करें।
    • किसी भी आसन को जल्दबाजी में न करें।
    • दर्द होने पर जबरदस्ती शरीर को न मोड़ें।
    • यदि पहले से कोई गंभीर रीढ़ या कमर की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
    • नियमित रूप से योग करने पर ही बेहतर परिणाम मिलते हैं।
     
  • Health Tips: सुबह खाली पेट हल्दी पानी पीने से क्या होता है, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: सुबह खाली पेट हल्दी पानी पीने से क्या होता है, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: हल्दी भारतीय रसोई का एक ऐसा मसाला है जो लगभग हर घर में इस्तेमाल किया जाता है। यह न केवल खाने का स्वाद और रंग बढ़ाती है, बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी देती है। आयुर्वेद में हल्दी का उपयोग सदियों से औषधि के रूप में किया जाता रहा है। हल्दी में पाया जाने वाला “करक्यूमिन” नामक तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट हल्दी वाला पानी पीना सेहत के लिए काफी लाभदायक हो सकता है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख फायदे और इसे पीने का सही तरीका।
    1. शरीर की सूजन को कम करने में मददगार
    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खानपान के कारण शरीर में सूजन की समस्या आम हो गई है। कई लोगों को चेहरे, हाथ-पैरों या जोड़ों में सूजन की शिकायत रहती है। हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से हल्दी का पानी पीने से जोड़ों के दर्द और सूजन में भी राहत मिल सकती है।
    1. इम्यूनिटी को बनाता है मजबूत
    अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है और आप बार-बार बीमार पड़ जाते हैं, तो हल्दी का पानी आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
    1. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक
    डायबिटीज के मरीजों के लिए भी हल्दी का पानी लाभदायक माना जाता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इससे ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
    1. लिवर को साफ रखने में मदद करता है
    लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। हल्दी का पानी लिवर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन लिवर को स्वस्थ रखने और शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में सहायक होता है।
    1. त्वचा को बनाता है चमकदार
    अगर आप प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और चमकदार त्वचा चाहते हैं, तो हल्दी का पानी आपकी मदद कर सकता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे त्वचा अंदर से साफ और स्वस्थ बनती है। नियमित सेवन से त्वचा की चमक बढ़ सकती है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार दिखाई दे सकता है। हल्दी का पानी पीने का सही तरीका
    • सुबह उठकर खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी लें।
    • उसमें एक चुटकी या आधा चम्मच हल्दी मिलाएं।
    • पानी को अच्छी तरह से मिलाकर तुरंत पी लें।
    • बेहतर परिणाम के लिए इसका नियमित सेवन करें।
    ध्यान रखें हालांकि हल्दी का पानी ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर आपको किसी प्रकार की एलर्जी, गंभीर बीमारी या कोई दवा चल रही है, तो इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।      
  • खाने की थाली बनी मौत का कारण, हर साल 15 लाख बच्चों की हुई मौत, WHO ने जारी की रिपोर्ट

    खाने की थाली बनी मौत का कारण, हर साल 15 लाख बच्चों की हुई मौत, WHO ने जारी की रिपोर्ट

    सेहत: विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक नई रिपोर्ट ने फूड सेफ्टी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गंदे और खराब खाने की वजह से हर साल लाखों लोग बीमार पड़ रहे हैं जबकि बड़ी संख्या में लोगों की जान भी जा रही है। वहीं सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि छोटे बच्चे इस खतरे का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खराब खाने से होने वाली बीमारियों का खतरा बड़े बच्चों और एडल्ट्स की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है। दुनिया की कुल आबादी में इन बच्चों की हिस्सेदारी केवल 9 प्रतिशत है लेकिन फूड बोर्न डिजीज के करीब एक तिहाई मामले इन्हीं से जुड़े हैं।

    छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा क्यों है?

    विश्व की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह ग्रो नहीं होता है। यही वजह है कि खराब खाने में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। खराब खाने की वजह से होने वाली कई बीमारियां डायरिया से जुड़ी होती है। छोटे बच्चों के लिए डायरिया जानलेवा साबित हो सकता है क्योंकि इससे शरीर में पानी और जरुरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

    2021 में करोड़ों लोग हुए बीमार

    रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ साल 2021 में खराब खाने के कारण से दुनिया भर में करीब 86.6 करोड़ लोग बीमार पड़े। वहीं लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से बड़ी संख्या में मौतों और बीमारियों को रोका जा सकता है। यदि साफ पानी उपलब्द हो, खाने को सही तरीके से तैयार और स्टोर किया जाए। साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और समय पर इलाज मिल जाए तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि खराब खाने का मतलब सिर्फ बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमण है लेकिन विश्व की स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि खाने में मौजूद कुछ कैमिकल भी बेहद खतरनाक हो सकते हैं। सीसा और मिथाइलमरकरी जैसे कैमिकल बच्चों के ग्रो हो रहे दिमाग को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे बच्चों के मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और तंत्रिका तंत्र पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों को कहना है कि केमिकल प्रदूषण को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि इसके प्रभाव कई बार लाइफटाइम बने रह सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाने से जुड़ी बीमारियों के ज्यादातर मामले बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों की वजह से होते हैं लेकिन मौतों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार केमिकल प्रदूषण हैं। 2021 में खराब खाने से जुड़ी कुल मौतों में लगभग 73 प्रतिशत हिस्सेदारी केमिकल खतरों की रही है। इनमें अकार्बनिक आर्सेनिक और सीसा सबसे बड़े कारण रहे हैं। ये दोनों तत्व हार्ट डिजीज स्ट्रोक और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। विश्व संगठन के अनुसार, फूड बोर्न डिजीज हुई मौतों में करीब 42 प्रतिशत मामलों का संबंध अकार्बनिक आर्सेनिक से था जबकि 31 प्रतिशत मौतें सीसे के संपर्क से जुड़ी थी। यह हर फैमिली और हर दिन के खाने से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि खराब खाना लंबे समय से पब्लिक हेल्थ के लिए बड़ी चुनौती रहा है लेकिन अब सामने आए नए आंकड़े यह दिखाते हैं कि इसका इंसानों और अर्थव्यवस्ता पर कितना बड़ा असर पड़ रहा है। रिपोर्ट में दुनिया के कई क्षेत्रों के बीच बड़ी असामनता भी सामने आई है हालांकि साल 2000 के बाद से फूड बोर्न डिजीज का कुल बोझ कुछ कम हुआ है लेकिन अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया आज भी सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। दुनिया भर में होने वाली लगभग 75 प्रतिशत फूड बोर्न डिजीज और करीब 60 प्रतिशत मौतें इन्हीं क्षेत्रों में दर्ज की गई है। खराब खाने असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2021 में खराब खाने के कारण से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। बीमारी के कारण लोगों के काम न कर पाने से दुनिया को लगभग 310 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रोडक्टिविटी को नुकसान हुआ है।

    आगे और बढ़ सकती है चुनौती

    विश्व का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण और एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता Antimicrobial Resistance आगे फूड सेफ्टी की चुनौती को और मुश्किल बना सकता है। रिपोर्ट में 2000 से 2021 के बीच 194 देशों में 42 प्रमुख फूड खतरों का अध्ययन किया गया है। इसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और रासायनिक प्रदूषकों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर आंकड़ों और निगरानी व्यवस्था की मदद से देश फूड सेफ्टी से जुड़े सबसे बड़े खतरों की पहचान कर सकते हैं और समय रहते जरुरी कदम उठा सकते हैं।          
  • गर्मियों में भी जरूरी है धूप की रोशनी, नहीं तो हो सकती है हड्डियों में कमजोरी!

    गर्मियों में भी जरूरी है धूप की रोशनी, नहीं तो हो सकती है हड्डियों में कमजोरी!

    सेहतः हर तरह की आराम भरी सहूलतें मिलने के चलते आजकल कई लोग नाजुक हो गए हैं। गर्मियों में लोग धूप में बिल्कुल भी नहीं उठते हैं। जहां पहले लोग सुबह उठते ही सूर्य के दर्शन कर कुछ देर धूप में बैठते थे। वहीं, आजकल लोगों के सुबह का टाइम ज्यादातर मोबाइल चलाने, ऑफिस जाने की तैयारी और अन्य कामों में चला जाता है। लेकिन, लंबे समय तक सूर्य की रोशनी या धूप से दूरी बनाने के कारण आपके शरीर की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सूर्य की रोशनी हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए आवश्यक विटामिन को बनाने में मदद करती है। यदि आपको लंबे समय तक विटामिन डी की कमी हो तो ऐसे में हड्डियों से जुड़ी समस्याएं जैसे जोड़ों में दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस या अर्थराइटिस आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। रिपोर्ट के अनुसार सूरज की रोशनी से शरीर को विटामिन डी मिलता है। जब आपकी त्वचा पर सूर्य की रोशनी पड़ती है, तो इससे शरीर के अंदर विटामिन डी बनना शुरू हो जाता है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस को अवशोषित करने में मदद करता है। यही वजह है कि हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाएं रखने के लिए विटामिन डी की मुख्य भूमिका मानी जाती है। यदि शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाए तो ऐसे में कैल्शियम सही तरह से अवशोषित नहीं हो पाता है, जिससे हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। विटामिन डी की कमी से व्यक्ति को हड्डियों में दर्द और कमजोरी हो सकती है। जो आगे चलकर अन्य समस्या का कारण बन सकती है। उम्र के साथ शरीर में विटामिन डी की कमी के चलते खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो सकती है। विटामिन डी की कमी के कारण मांसपेशियों में कमजोरी होने लगती है और इसकी वजह से चोट लगने और गिरने का जोखिम बढ़ जाता है। एनसीबीआई के अनुसार सूर्य की रोशनी में बैठने से हड्डियों को कमजोर होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए आप सुबह व शाम के समय की धूप में बैठ सकते हैं। अध्ययन के अनुसार मिडिल ईस्ट और अफ्रिकाई देशों में गर्मियों में सुबह 10 से 12 के समय को डी3 के लिए बेहतर माना जाता है। दिन के समय सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सूर्य की रोशनी में आप मात्र 15 से 20 मिनट तक बैठ सकते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों में विटामिन डी की कमी होने का जोखिम सबसे अधिक होता है। इससे बचने के लिए आप सुबह व शाम के समय वॉक पर जाएं। अपनी जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करें और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डिस्कलेमरः यह एक सामान्य जानकारी है। ज्यादा जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लें।    
  • PM Modi ने मन की बात में कलबुर्गी रोटी की कर दी तारीफ, आखिर क्या होते हैं इसके फायदे?

    PM Modi ने मन की बात में कलबुर्गी रोटी की कर दी तारीफ, आखिर क्या होते हैं इसके फायदे?

    सेहत: भारत विविधताओं का देश है और इसकी झलक यहां के खान-पान में भी साफ दिखाई देती है। देश के हर क्षेत्र का अपना एक खास स्वाद और स्वाद और पहचान है। जब किसी जगह के व्यंजनों की तारीफ खुद पीएम मोदी करते हैं तो पूरे देश में उसकी अलग पहचान बना जाती है। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 123वें एपिसोड में कर्नाटक की कलबुर्गी रोटी का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि यह रोटी न सिर्फ लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाती है बल्कि कई महिलाओं को रोजगार भी देती है।

    आखिर क्या होता है कलबुर्गी रोटी?

    कलबुर्गी रोटी कर्नाटक के कलबुर्गी क्षेत्र की एक पारंपरिक रोटी है। इसे मुख्य रुप से ज्वार के आटे से बनाया जाता है। उत्तर कर्नाटक का प्रमुख अनाज माना जाता है। यह रोटी अपने बड़े आकार, मुलायम बनावट और देसी स्वाद के लिए जानी जाती है। इसे बनाने के लिए ज्वार के आटे को गर्म पानी से गूंथा जाता है। इसके बाद हाथों से थपथपाकर रोटी का आकार दिया जाता है। तवे पर सेंकी जाती है। यह रोटी आमतौर पर भरवां बैंगन की सब्जी, मूंगफली की ग्रेवी या लहसुन, तिल और मूंगफली से बनी मसालेदार चटनी के साथ खाई जाती है।

    सेहत के लिए फायदेमंद यह रोटी

    ज्वार को मोटे अनाजों का राजा कहते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और कई जरुरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। ज्वार की रोटी वजन कंट्रोल रखने में मदद कर सकती है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद मानी जाती है। हार्ट हेल्थ के लिए भी यह बेहतर होती है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है। यही कारण है कि ज्वार की रोटी को हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है।  
  • Health Tips: जानें किस विटामिन की कमी से नींद नहीं आती है

    Health Tips: जानें किस विटामिन की कमी से नींद नहीं आती है

    Health Tips: अच्छी और गहरी नींद हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होती है। नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है और दिमाग को भी आराम मिलता है। लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कुछ लोगों को देर रात तक नींद नहीं आती, कुछ की बार-बार नींद खुल जाती है, जबकि कई लोग पर्याप्त समय तक सोने के बाद भी थकान महसूस करते हैं। अक्सर लोग इसकी वजह तनाव, चिंता या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं, लेकिन कई बार शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

    नींद क्यों है जरूरी?
    नींद सिर्फ आराम करने का समय नहीं है, बल्कि यह शरीर की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। अच्छी नींद लेने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है और मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। अगर लगातार नींद पूरी न हो तो इसके कारण थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी, कमजोरी और काम करने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    कौन-सी विटामिन और पोषक तत्वों की कमी नींद को प्रभावित कर सकती है?
    कुछ विटामिन और मिनरल्स शरीर की उन प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाते हैं जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होती हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

    1. विटामिन डी की कमी
    विटामिन डी शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जरूरी होता है। इसकी कमी कुछ लोगों में नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। विटामिन डी का स्तर कम होने पर व्यक्ति को थकान, कमजोरी और नींद से जुड़ी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

    2. विटामिन बी12 की कमी
    विटामिन बी12 शरीर के नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है और व्यक्ति को पर्याप्त आराम महसूस नहीं होता।

    3. मैग्नीशियम की कमी
    मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण मिनरल है जो मांसपेशियों और नसों को आराम देने में मदद करता है। इसकी कमी के कारण बेचैनी, मांसपेशियों में खिंचाव और नींद में बाधा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    4. आयरन की कमी
    आयरन की कमी से शरीर में कमजोरी और थकान बढ़ सकती है। कुछ मामलों में यह नींद से जुड़ी समस्याओं और बेचैनी का कारण भी बन सकती है।

    कब करानी चाहिए विटामिन्स की जांच?
    अगर आपको लंबे समय से नींद नहीं आने की समस्या है और इसके साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेकर जांच करानी चाहिए:

    • लगातार थकान महसूस होना
    • शरीर में कमजोरी रहना
    • ध्यान लगाने में कठिनाई होना
    • बार-बार मूड बदलना
    • चिड़चिड़ापन बढ़ना
    • मांसपेशियों में दर्द या अकड़न
    • सिरदर्द की शिकायत रहना
    • सामान्य काम करने पर भी जल्दी थक जाना
    • ये संकेत शरीर में किसी विटामिन या पोषक तत्व की कमी की ओर इशारा कर सकते हैं।

    अच्छी नींद पाने के लिए क्या करें?
    अगर आप अपनी नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाना चाहते हैं, तो कुछ आसान आदतें अपनाकर फायदा पा सकते हैं।

    नियमित समय पर सोएं और जागें
    हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं। इससे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक सही तरीके से काम करती है।

    स्क्रीन टाइम कम करें
    सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल कम कर दें। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद को प्रभावित कर सकती है।

    संतुलित भोजन करें
    अपनी डाइट में विटामिन और मिनरल्स से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। हरी सब्जियां, फल, दूध, दही, मेवे और साबुत अनाज शरीर को जरूरी पोषण देते हैं।

    पर्याप्त पानी पिएं
    दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी शरीर के लिए जरूरी है और यह कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद करता है।

    नियमित व्यायाम करें
    रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या वॉक करने से शरीर सक्रिय रहता है और रात में बेहतर नींद आने में मदद मिल सकती है। हालांकि सोने से ठीक पहले भारी व्यायाम करने से बचना चाहिए।

    तनाव को करें कम
    तनाव और चिंता भी नींद खराब होने के बड़े कारणों में से एक हैं। योग, ध्यान और रिलैक्सेशन तकनीकों की मदद से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है।

     

  • Ebola का नया Strain Global Emergency घोषित, भारत के लिए कितना होगा खतरनाक?

    Ebola का नया Strain Global Emergency घोषित, भारत के लिए कितना होगा खतरनाक?

    सेहत: दुनिया एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर एक्टिव हो गई है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है। शुरुआती जेनेटिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह वायरस कई हफ्तों में संभव है। कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस नए स्ट्रेन के व्यवहार और इसकी क्षमता को लेकर अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। ऐसे में दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस वायरस ने डरने की जरुरत है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इबोला उन वायरसों 1976 में पहली बार इबोला पर स्टडी किया था। बताते हैं कि यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में मुख्य रुप से शारीरिक लिक्यूड के जरिए फैलता है। यही कारण है कि मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।

    शरीर में कैसे फैलता है

    वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे इम्यून सिस्टम पर हमला करता है। जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ मेंज के वायरोलॉजी प्रोफेसर डॉ. बोडो प्लाख्टर के अनुसार, वायरस के पहले लसीका ग्लैंड में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर खून के जरिए शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच जाता है। यह उन सेल्स को निशाना बनाता है जो सामान्य परिस्थितियों में शरीर को इंफेक्शन से बचाती है। जब यह इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है तो वायरस तेजी से पूरी शरीर में फैलने लगता है।

    पहचानना क्यों होती है मुश्किल

    इबोला की सबसे बड़ी चुनौती इसके शुरुआत लक्षण हैं। शुरुआत में मरीज को सामान्य बुखार, सर्दी, इंफेक्शन या मलेरिया जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। कई बार मरीज को कुछ समय के लिए भी राहत भी महसूस होती है लेकिन इसके बाद गंभीर रुप ले सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाद के चरण में शरीर के विभिन्न हिस्सों में ब्लड निकलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। यही वह समय होती है जब मरीज सबसे ज्यादा संक्रामक होता है और इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

    भारत में क्या स्थिति है?

    भारत को कितना डरना चाहिए। मई 2026 तक भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट क्लिनिक के एक्सपर्ट्स के आकलन के अनुसार, भारतीय आबादी के लिए फिलहाल सीधा खतरा कम है। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निगरानी व्यवस्था, स्वास्थ्य जांच बड़े अस्पतालों में त्वरित जांच सुविधाएं और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की चेतावनी सिस्टम संभावित मामलों की पहचान में मदद कर रही है हालांकि अफ्रीकी देशों के साथ यात्रा और व्यापारिक संबंधों को देखते हुए सतर्कता बनाए रखना जरुरी माना जा रहा है।
  • Health Tips: जानें सुबह खाली पेट कच्चा पपीता खाने के फायदे, सेहत को मिलते हैं कई बड़े लाभ

    Health Tips: जानें सुबह खाली पेट कच्चा पपीता खाने के फायदे, सेहत को मिलते हैं कई बड़े लाभ

    Health Tips: अगर दिन की शुरुआत पौष्टिक और हेल्दी भोजन से की जाए, तो शरीर पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करता है। ज्यादातर लोग सुबह खाली पेट फल खाना पसंद करते हैं, लेकिन कच्चा पपीता एक ऐसा सुपरफूड है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कच्चे पपीते में कई ऐसे पोषक तत्व और एंजाइम पाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं कि सुबह खाली पेट कच्चा पपीता खाने से शरीर को कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं।
    1. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है
    कच्चे पपीते में पेपेन (Papain) और काइमोपेपेन (Chymopapain) नामक एंजाइम पाए जाते हैं, जो भोजन को आसानी से पचाने में मदद करते हैं। सुबह खाली पेट कच्चा पपीता खाने से पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। जो लोग कब्ज, गैस, एसिडिटी या अपच जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं, उनके लिए कच्चा पपीता काफी लाभदायक साबित हो सकता है। यह आंतों की सफाई करने और पेट को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
    1. वजन कम करने में करता है मदद
    आजकल बढ़ता वजन एक बड़ी समस्या बन चुका है। ऐसे में कच्चा पपीता वजन घटाने वालों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें कैलोरी कम होती है, जबकि फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में सहायता मिल सकती है।
    1. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक
    कच्चा पपीता डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसका सेवन ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह शरीर में इंसुलिन के बेहतर उपयोग में भी सहायक माना जाता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट में कोई भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
    1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
    कच्चे पपीते में विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन ई जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को संक्रमणों से लड़ने की ताकत मिलती है और सर्दी, खांसी, फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
    1. त्वचा को बनाता है स्वस्थ और चमकदार
    कच्चा पपीता शरीर से विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में मदद करता है। जब शरीर अंदर से साफ रहता है, तो इसका सकारात्मक असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। इसके सेवन से मुंहासे, दाग-धब्बे और त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं में राहत मिल सकती है। साथ ही त्वचा में प्राकृतिक निखार और चमक आने में भी मदद मिलती है।
    1. शरीर को करता है डिटॉक्स
    कच्चा पपीता शरीर की सफाई करने वाले प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में शामिल माना जाता है। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाकर शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में सहायता करता है। इससे शरीर हल्का और तरोताजा महसूस करता है। ध्यान रखने वाली बातें
    • कच्चे पपीते का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
    • गर्भवती महिलाओं को कच्चा पपीता खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
    • यदि किसी प्रकार की एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, तो विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
       
  • दिमाग को खोखला करेगी मोबाइल की लत, खुद डॉक्टरों ने बताया नींद और थकान का खौफनाक सच

    दिमाग को खोखला करेगी मोबाइल की लत, खुद डॉक्टरों ने बताया नींद और थकान का खौफनाक सच

    नई दिल्ली: आज की जिंदगी में इंसान शायद ही कभी सच में शांत बैठ पाता है। पहले लंबा सफर खिड़की के बाहर देखते हुए कट जाता था। लाइन में इंतजार करते समय लोग आस-पास की चीजों को महसूस करते थे। रात को सोने से पहले दिमाग खुद ब खुद धीमा पड़ जाता था लेकिन अब हर खाली पल किसी न किसी स्क्रीन से भर चुका है। कभी मोबाइल, नोटिफिकेशन, कभी छोटी वीडियो, कभी पॉडकॉस्ट तो कभी लगातार आने वाले मैसेज। ऐसे में दिमाग को असली आराम मिल ही नहीं पा रहा है।

    क्या इससे हमारे ऊपर असर पड़ा रहा है

    न्यूरोलॉजिस्ट्स का कहना है कि लगातार मिलने वाला यह बैकग्राउंड स्टिमुलेशन इंसान के दिमाग के काम करने के तरीके को बदल रहा है। बाहर से देखने पर भले कोई इंसान आराम करता दिखाई दे लेकिन दिमाग लगातार एक्टिव रहता है। यही कारण है कि आजकल लोग बिना ज्यादा शारीरिक मेहनत किए भी मानसिक रुप से थका हुआ महसूस करते हैं।

    ब्रेन हमेशा एक्टिव रहने के लिए बना है

    मीडिया इंटरव्यू के अनुसार, इंसानी दिमाग को कभी भी इस तरह लगातार एक्टिव रहने के लिए नहीं बनाया गया था। पहले दिनभर में छोटे-छोटे ऐसे पल मिल जाते थे, जब दिमाग खुद शांत हो जाता था लेकिन अब हर खाली जगह डिजिटल चीजों से भर चुकी है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया लगातार आने वाली नोटिफिकेशन और हर समय जुड़े रहने का दबाव इंसानी दिमाग को लगातार एक्टिव रखता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह समस्या थकान तुरंत महसूस नहीं होती है। लोगों को लगता है कि मोबाइल स्क्रॉल करना या देर रात तक वीडियो देखना आराम देने वाला काम होता है परंतु असल में दिमाग लगातार नई जानकारी को प्रोसेस करता रहता है। यही कारण है कि नर्वस सिस्टम हमेशा हल्की सतर्क अवस्था में बना रहता है। धीरे-धीरे यह आदत मानसिक थकान, ध्यान की कमी और इमोशनल बर्नआउट में बदल सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूटस ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी सामने आया है कि जरुरत से ज्यादा स्क्रीन देखने और देर रात तक डिजिटल चीजों में लगे रहने से नींद की क्वालिटी, इमोशनल संतुलन और ध्यान लगाने की क्षमता पर असर पड़ता है। खासतौर पर देर रात की लगातार स्क्रॉलिंग दिमाग को अलर्ट मोड में बनाए रखती है।    
  • Health Tips: गर्मियों में मूंगफली को भिगोकर खाने से क्या फायदे होते हैं, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: गर्मियों में मूंगफली को भिगोकर खाने से क्या फायदे होते हैं, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: गर्मियों के मौसम में मूंगफली को कच्चा या भूनकर खाने की जगह अगर रातभर पानी में भिगोकर खाया जाए तो यह सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। भिगोने से इसकी तासीर हल्की हो जाती है, जिससे यह गर्मी में शरीर पर ज्यादा बोझ नहीं डालती। इसमें मौजूद पोषक तत्व भी शरीर को आसानी से मिल जाते हैं।

    1. पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है
    कच्ची मूंगफली में फाइटिक एसिड होता है, जो कई बार पेट में गैस, भारीपन और अपच की समस्या पैदा कर सकता है। लेकिन जब मूंगफली को पानी में भिगो दिया जाता है, तो यह एसिड काफी हद तक कम हो जाता है। इससे मूंगफली आसानी से पच जाती है और पेट हल्का रहता है।

    फायदे:
    • कब्ज से राहत
    • गैस कम होती है
    • एसिडिटी में आराम मिलता है

    2. शरीर को ज्यादा पोषण मिलता है
    भिगोने के बाद मूंगफली के अंदर मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए ज्यादा आसान हो जाते हैं।
    इसमें मौजूद चीजें जैसे:
    • आयरन
    • कैल्शियम
    • विटामिन E
    • पोटेशियम
    ये सभी शरीर में जल्दी और अच्छे तरीके से अवशोषित (absorb) हो जाते हैं, जिससे शरीर को पूरा पोषण मिलता है।

    3. दिनभर ऊर्जा बनाए रखती है
    गर्मियों में धूप और पसीने के कारण शरीर जल्दी थक जाता है।
    भीगी हुई मूंगफली में प्रोटीन और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं।

     फायदे:
    • शरीर दिनभर एक्टिव रहता है
    • कमजोरी कम होती है
    • एनर्जी लेवल बना रहता है

    4. दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है
    भीगी हुई मूंगफली दिल की सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है।
    इसमें अच्छे फैट्स और ओमेगा-3 जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।

    फायदे:
    • हार्ट मजबूत होता है
    • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है
    • दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है

    5. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद
    गर्मी और धूप का असर त्वचा और बालों पर भी पड़ता है।
    भीगी हुई मूंगफली में विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं।

    फायदे:
    • त्वचा में निखार आता है
    • झुर्रियां कम हो सकती हैं
    • बाल मजबूत और चमकदार बनते हैं

    सेवन करने का सही तरीका
    • रात में एक मुट्ठी मूंगफली साफ पानी में भिगो दें
    • सुबह खाली पेट इसे अच्छी तरह चबा-चबाकर खाएं
    चाहें तो इसमें भीगे हुए चने या किशमिश भी मिला सकते हैं।