Category: Health

  • Health Tips: हर व्यक्ति को सुबह खाली पेट कितना पानी पीना चाहिए, जानें एक्सपर्ट से

    Health Tips: हर व्यक्ति को सुबह खाली पेट कितना पानी पीना चाहिए, जानें एक्सपर्ट से

    Health Tips: सुबह उठते ही खाली पेट पानी पीना एक अच्छी आदत मानी जाती है। यह न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि दिन की अच्छी शुरुआत करने में भी मदद करता है। रातभर सोने के बाद हमारा शरीर कुछ समय तक पानी के बिना रहता है, इसलिए सुबह पानी पीना जरूरी माना जाता है। लेकिन अक्सर लोग यह नहीं जानते कि कितना पानी पीना सही होता है, और कब ज्यादा या कम पानी पीना नुकसानदेह हो सकता है। सुबह खाली पेट पानी पीने की सही मात्रा डॉक्टरों के अनुसार, सुबह खाली पेट 1 से 2 गिलास पानी पीना पर्याप्त होता है।
    • इसे धीरे-धीरे पीना चाहिए ताकि शरीर आसानी से पानी को अवशोषित कर सके।
    • बहुत ज़्यादा पानी एक बार में पीने से पेट में भारीपन या असहजता हो सकती है।
    • बहुत कम पानी पीने से शरीर को लाभ नहीं मिलता।
    जरूरी बात: शरीर के संकेतों को समझें और उसी अनुसार पानी की मात्रा तय करें। यह आदत जबरदस्ती नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से अपनानी चाहिए। सुबह पानी पीने के फायदे
    1. तरोताज़गी महसूस होती है: रातभर बिना पानी के रहने के बाद सुबह पानी पीने से शरीर ताजगी महसूस करता है।
    2. पाचन प्रणाली एक्टिव होती है: पानी पीने से पेट हल्का रहता है और पाचन प्रक्रिया सही रहती है।
    3. दिनभर हाइड्रेट रहता है: यह आदत शरीर को पूरे दिन पानी की कमी से बचाती है।
    4. सक्रिय और फुर्तीला बनाता है: सुबह पानी पीने से सुस्ती कम होती है और शरीर एक्टिव रहता है।
    5. सही पानी पीने की आदत बनती है: सुबह यह आदत बनाने से दिनभर पर्याप्त पानी पीने की आदत भी विकसित होती है।
    पानी पीते समय सावधानियां
    1. बहुत ठंडा पानी न पिएँ: इससे कुछ लोगों को पेट में तकलीफ़ या असहजता हो सकती है।
    2. एक बार में अधिक मात्रा न लें: धीरे-धीरे और संतुलित मात्रा में पीना सही है।
    3. स्वास्थ्य समस्याओं में सतर्क रहें: अगर किसी को पेट, किडनी या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो पानी की मात्रा डॉक्टर से सलाह लेकर ही तय करें।
    आसान तरीका
    • सुबह उठते ही 1 गिलास पानी धीरे-धीरे पीना शुरू करें।
    • धीरे-धीरे इसे 2 गिलास तक बढ़ा सकते हैं।
    • शरीर के संकेतों को समझें और उसी अनुसार आदत को अपनाएं।
     
  • Bhagyashree ने फैंस के साथ शेयर की खास Recipe, Gut Health के लिए साबित होगी वरदान

    Bhagyashree ने फैंस के साथ शेयर की खास Recipe, Gut Health के लिए साबित होगी वरदान

    सेहत: बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एक्टर्स अपनी खूबसूरती और फिटनेस को लेकर काफी एक्टिव है। इसी कारण वह इस उम्र में भी काफी फिट और हेल्दी नजर आती हैं। भाग्यश्री सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और फैंस के साथ अपनी फिटनेस का सीक्रेट शेयर करती रहती हैं। अपनी अब हाल ही की पोस्ट में उन्होंने एक बेहद खास डिश की रेसिपी बताई है जो पेट के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।

    गट हेल्थ के लिए फायदेमंद

    भाग्यश्री ने अपने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में वो गट हेल्थ के लिए एक बेस्ट डिश बता रही हैं। इसको वो अक्सर खाती हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि कद्दू का रायता पेट की समस्याओं से राहत दिलवाने में बेहद फायदेमंद साबित होगा और ये बनाने में बहुत आसान है। कद्दू का रायता बनाने की रेसिपी भी उन्होंने शेयर की है।
     
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    सामग्री

    कद्दू – उबला हुआ प्याज – बारीक कटा हुआ हरी मिर्च – 1 कटी हुई सरसों का तेल – 1 चम्मच कड़ी पत्ता – 1-2 हींग – 1 चम्मच कसूरी मेथी – 1 चम्मच नमक – स्वादअनुसार लाल मिर्च – 1/2 चम्मच

    बनाने की विधि

    .सबसे पहले एक कटोरी में दही डालें। फिर इसमें हरी मिर्च, प्याज, कद्दू, धनिया, नमक डालकर अच्छे से मिला लें। . इसके बाद तड़का पैन में थोड़ा सा सरसों का तेल डालें। इसमें कड़ी पत्ता, हींग, कसूरी मेथी, लाल मिर्च डालकर तड़का बना लें। अब इसको कद्दू दही पर डाल दें।

    ज्वार की रोटी के साथ लें मजा

    भाग्यश्री ने बताया कि – वो इस रायते के साथ ज्वार की रोटी भी खाती हैं। ज्वार की रोटी खाने के अपने फायदे होते हैं हालांकि यह भी पाचन के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार में फाइबर, प्रोटीन काफी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है। इसके अलावा यह ग्लूटेन फ्री भी होती है। यह पाचन सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने, वजन घटाने में मदद मिलती है। यह हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाती है। इसके अलावा हड्डियों को मजबूत बनाने में भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। खासतौर पर डायबिटीज और ग्लूटेन एलर्जी वाले लोगों के लिए यह बेहतरीन ऑप्शन साबित होगी।      
  • सर्दियों में इस वजह से बढ़ता है Periods Pain, Gynaecologist ने बताया कारण

    सर्दियों में इस वजह से बढ़ता है Periods Pain, Gynaecologist ने बताया कारण

    सेहत: कई महिलाओं को ऐसा लगता है कि सर्दियों में उनके पीरियड्स का दर्द बढ़ जाता है। यदि आपको भी ठंड के इस मौसम में पीरियड्स के दौरान तेज ऐंठन, मूड स्विंग्स या ज्यादा बैचेनी हो रही है तो आप अकेले नहीं हैं। रिसर्च और क्लिनिकल अनुभव के अनुसार, सर्दियां पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों को ज्यादा प्रभावित करती हैं। आइए आपको बताते हैं कि यदि सर्दियों में पीरियड्स में ज्यादा पेन हो रहा है तो कैसे आप इसको कंट्रोल में रख सकते हैं और इसके क्या कारण हैं।

    इस वजह से बढ़ता है दर्द

    ठंड के मौसम में तापमान, धूप और शरीर के काम करने के तरीके में कई तरह के बदलाव आते हैं। इससे पीरियड्स के लक्षण ज्यादा तीव्र लग सकते हैं। अब हाल ही में एक गॉयनोकॉलिजिस्ट ने इसको लेकर अपने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने बताया कि ठंड पड़ते ही शरीर गर्मी बचाने के लिए ब्लड फ्लो को सीमित कर देता है। इससे यूट्रस की मांसपेशियां ज्यादा सख्त होकर सिकुड़ने लगती है ऐसे में दर्द और ऐंठन बढ़ जाती है।
     
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    विटामिन-डी की कमी

    सर्दियों में धूप कम मिलने के कारण विटामिन-डी का स्तर कम हो जाता है। विटामिन-डी सूजन कम करने और हार्मोन संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी के कारण दर्द, थकान और मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं।

    हार्मोनल बदलाव

    सर्दियों में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन्स में बदलाव हो सकता है जिससे चिड़चिड़ापन, उदासी और पीएमएस के लक्षण बढ़ जाते हैं। ठंड के कारण लोग कम चलते फिरते हैं। इसके कारण पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो कम होता है और दर्द बढ़ सकता है।

    दर्द के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता

    ठंड में शरीर दर्द को ज्यादा महसूस करता है। इसी कारण से सामान्य ऐंठन भी सर्दियों में ज्यादा तेज लग सकती है। इस मौसम में कई महिलाओं को भारीपन, पेट फूलना, मीठा खाने की इच्छा, ज्यादा थकान, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और एक्सरसाइज की इच्छा कम लगने जैसी दिक्कतें होती हैं। इसके चलते भी दर्द ज्यादा होता है। यदि सर्दियों में ऐंठन ज्यादा हो, पेल्विक दबाव बढ़े, पीएमएम के लक्षण तेज हो, थकान और कमर दर्द ज्यादा हो या मूड ज्यादा खराब रहे तो यह मौसम से जुड़ा असर हो सकता है।

    ऐसे दर्द करें कम

    . हल्की एक्सरसाइज, योग या वॉक रखें। . गुनगुना पानी और हर्बल टी पिएं। . सूजन कम करने वाला खाना जैसे फल, सब्जियां नट्स शामिल करें। . तनाव कम लें और पूरी नींद लें। . अपना पीरियड साइकिल और लक्षणों को ट्रैक करें। . गर्म पानी की बोतल या फिर हीट पैड का इस्तेमाल करें। . विटामिन-डी से भरपूर फूड लें और यदि जरुरत हो तो डॉक्टरों से सप्लीमेंट पर बात करें।

    ज्यादा दर्द होने पर करें डॉक्टर को संपर्क

    एक रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि दर्द ज्यादा हो कई दिनों तक बना रहे कामकाज प्रभावित करे बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, पीरियड्स अनियमित हो या घरेलू उपायों से राहत न मिले तो डॉक्टर से सलाह लें। एंड्रोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स या पीसीओएस जैसी समस्याएं भी इसके कारण हो सकती है।    
  • Health Tips: क्या सूरज की रोशनी से कंट्रोल हो सकती है डायबिटीज, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: क्या सूरज की रोशनी से कंट्रोल हो सकती है डायबिटीज, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: सर्दी के मौसम में जब धूप हल्की होती है और हवा साफ रहती है, तब सूरज की किरणें चेहरे को छूकर मन और शरीर दोनों को सुकून देती हैं। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति हमें कुछ पल रुकने, गहरी सांस लेने और खुद से जुड़ने का संदेश दे रही हो। यह खिली-खिली धूप सिर्फ देखने में अच्छी नहीं होती, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। सूरज की रोशनी क्यों है ज़रूरी सूरज की रोशनी सिर्फ उजाला नहीं देती, बल्कि हमारे शरीर की बॉडी क्लॉक को सही समय पर चलाने में मदद करती है। यह शरीर को यह संकेत देती है कि कब जागना है, कब एक्टिव रहना है और कब आराम करना है। मेडिकल साइंस इसे सर्कैडियन रिदम कहती है, यानी शरीर की प्राकृतिक समय-प्रणाली। जब बॉडी क्लॉक बिगड़ती है तो क्या होता है अगर शरीर की यह प्राकृतिक लय बिगड़ जाए, तो इसका असर सिर्फ नींद पर नहीं पड़ता। इसका सीधा असर ब्लड शुगर पर भी पड़ता है। यही एक बड़ी वजह है कि आज डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं और दवाइयों पर निर्भरता भी बढ़ती जा रही है। धूप और ब्लड शुगर का सीधा रिश्ता अब मेडिकल रिसर्च भी यह मान चुकी है कि जो लोग रोज़ाना प्राकृतिक धूप में समय बिताते हैं, उनका ब्लड शुगर लंबे समय तक नॉर्मल रहता है। दिन की रोशनी शरीर में एक खास हार्मोन को संतुलित करती है, जिसे मेलाटोनिन कहते हैं। मेलाटोनिन हार्मोन कैसे करता है मदद मेलाटोनिन हार्मोन तय करता है कि नींद कितनी गहरी होगी, शरीर कितना एक्टिव रहेगा और इंसुलिन कितना असरदार बनेगा। जब मेलाटोनिन संतुलित रहता है, तो इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है और डायबिटीज का खतरा कम होता है। सूरज की किरणें मेटाबॉलिज्म को तेज करती हैं। ग्लूकोज को सही तरीके से एनर्जी में बदलने में मदद करती हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस को धीरे-धीरे कम करती हैं। आज जब डायबिटीज आम बीमारी बन चुकी है, तो इलाज सिर्फ दवाइयों में नहीं, बल्कि खुली हवा, सुबह की धूप और बालकनी में आने वाले उजाले में भी छुपा है। हर सूर्योदय एक नया मौका जरूरी है कि हम खिड़की और दरवाज़े खोलें। याद रखिए, हर सूर्योदय बीमारियों को अलविदा कहने और ज़िंदगी को हैलो कहने का एक नया मौका होता है। हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए अपनाएं ये आदतें
    • रोज़ जल्दी उठें
    • योग या हल्की एक्सरसाइज़ करें
    • हेल्दी और संतुलित डाइट लें
    • तला-भुना और जंक फूड न खाएं
    • पूरी नींद लें
    • दिन में करीब 4 लीटर पानी पिएं
    स्वस्थ शरीर के लिए क्या खाएं
    • खाना हमेशा ताज़ा और गर्म खाएं
    • जरूरत से ज्यादा न खाएं
    • खाने में भरपूर सलाद शामिल करें
    • मौसमी फल ज़रूर खाएं
    • दही और छाछ को डाइट में शामिल करें
    मोटापा कम करने के आसान उपाय
    • अदरक-नींबू की चाय पिएं
    • रात में 1 चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी के साथ लें
    • 3–6 ग्राम दालचीनी को 200 ग्राम पानी में उबालें और उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर पिएं
    शुगर कंट्रोल रखने के घरेलू उपाय
    • खीरा और करेला
    • गिलोय का काढ़ा
    • टमाटर का जूस
     
  • Health Tips: सावधान! Pain Killer की आदत से शरीर को हो सकते हैं ये गंभीर नुकसान

    Health Tips: सावधान! Pain Killer की आदत से शरीर को हो सकते हैं ये गंभीर नुकसान

    Health Tips: आजकल सिरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द या छोटी-छोटी चोटों में पेन किलर लेना आम बात हो गई है। बहुत लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें लंबे समय तक लगातार लेते रहते हैं। शुरू में ये दवाएं राहत देती हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने से ये शरीर के अंदरूनी अंगों पर असर डाल सकती हैं, खासकर किडनी और लिवर पर। पेन किलर कैसे काम करती हैं? डॉक्टर बताते हैं कि पेन किलर शरीर में दर्द और सूजन कम करने का काम करती हैं। ये दर्द के संकेत भेजने वाले रसायनों (chemical) को रोकती हैं, जिससे हमें दर्द कम महसूस होता है। लेकिन अगर लंबे समय तक इन्हें लेते रहें, तो ये हमारे किडनी और लिवर पर दबाव डाल सकती हैं। पेन किलर का किडनी पर असर
    • किडनी का काम शरीर से अतिरिक्त पानी और अवशिष्ट पदार्थ बाहर निकालना होता है।
    • लगातार पेन किलर लेने से किडनी की ब्लड वेसल्स पर असर पड़ सकता है।
    • इससे किडनी तक खून का फ्लो कम हो जाता है और उसकी काम करने की क्षमता घट सकती है।
    • लंबे समय तक इसका असर किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्याओं तक जा सकता है।
    पेन किलर का लिवर पर असर
    • लिवर का काम दवाओं को टूटकर शरीर से बाहर निकालना होता है।
    • लगातार पेन किलर लेने से लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
    • इससे लिवर सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है और कुछ मामलों में सूजन, फैटी लिवर या लिवर एंजाइम बढ़ना जैसी समस्या हो सकती है।
    • पहले से अगर किसी को किडनी या लिवर की बीमारी है तो खतरा और बढ़ जाता है।
    किडनी और लिवर डैमेज के लक्षण अगर पेन किलर से किडनी या लिवर प्रभावित हो रहा है, तो शरीर कुछ संकेत देता है: किडनी से जुड़ी समस्याओं के संकेत
    • बार-बार थकान महसूस होना
    • पैरों या चेहरे में सूजन
    • पेशाब में कमी या रंग बदलना
    लिवर से जुड़ी समस्याओं के संकेत
    • भूख न लगना
    • मतली या उल्टी
    • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
    • आंखों या त्वचा का पीला पड़ना
    कई बार बिना किसी तेज दर्द के भी अंदरूनी नुकसान हो सकता है, इसलिए हल्के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। पेन किलर से बचाव कैसे करें?
    1. बिना डॉक्टर की सलाह के पेन किलर न लें।
    2. लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल से बचें।
    3. पर्याप्त पानी पिएं।
    4. पहले से कोई बीमारी हो तो डॉक्टर को जरूर बताएं।
    5. नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहें।
         
  • Health Tips: पूरी नींद के बाद भी सिर भारी क्यों लगता है, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: पूरी नींद के बाद भी सिर भारी क्यों लगता है, जानें एक्सपर्ट की राय

    Health Tips: अक्सर ऐसा माना जाता है कि अगर नींद पूरी हो जाए तो शरीर और दिमाग दोनों फ्रेश महसूस करेंगे। लेकिन कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि 7–8 घंटे सोने के बाद भी सुबह सिर भारी, मन सुस्त और शरीर थका-थका सा लगता है। इस वजह से सुबह काम करने का मन नहीं करता, चिड़चिड़ापन रहता है और ध्यान लगाने में परेशानी होती है। अधिकतर लोग इसे मामूली थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह शरीर में चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है। अगर यह परेशानी रोज होने लगे, तो दिनभर की एनर्जी और काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। नींद पूरी होने के बाद भी सिर भारी रहने के मुख्य कारण
    1. नींद की क्वालिटी अच्छी न होना
    डॉक्टरों के मुताबिक, कई बार नींद की अवधि तो पूरी होती है, लेकिन नींद गहरी नहीं होती। देर रात तक मोबाइल, टीवी या लैपटॉप देखने से दिमाग पूरी तरह आराम नहीं कर पाता। तनाव, चिंता और ज्यादा सोचने की आदत भी दिमाग को एक्टिव बनाए रखती है, जिससे सुबह उठने पर थकान महसूस होती है।
    1. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
    रात में कई घंटों तक पानी नहीं पीया जाता, ऐसे में अगर दिनभर पर्याप्त पानी न पिया जाए तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है। डिहाइड्रेशन की वजह से सुबह सिर भारी, मुंह सूखा और कमजोरी महसूस हो सकती है।
    1. गलत तकिया या सोने की गलत पोजीशन
    अगर तकिया बहुत ऊंचा या बहुत सख्त है, या फिर सोने की पोजीशन सही नहीं है, तो गर्दन और सिर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। इससे सुबह उठते ही गर्दन में जकड़न और सिर भारी लग सकता है।
    1. नाक बंद होना या साइनस की समस्या
    नाक बंद रहने, साइनस या सांस लेने में दिक्कत होने पर नींद के दौरान शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस वजह से सुबह सिर भारी, आंखों में दबाव और थकान महसूस होती है।
    1. हार्मोनल बदलाव और खराब दिनचर्या
    कुछ मामलों में हार्मोनल असंतुलन, देर से सोना, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या की वजह बन सकती है। सिर भारी होने के साथ और कौन-सी समस्याएं हो सकती हैं? सिर भारी रहने के साथ-साथ कई और लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे—
    • सुस्ती और नींद-नींद सा महसूस होना
    • चक्कर आना
    • आंखों में जलन या भारीपन
    • ध्यान लगाने में परेशानी
    • काम करने की क्षमता में कमी
    कुछ लोगों को सुबह उठते ही चिड़चिड़ापन, बेचैनी या घबराहट भी महसूस होती है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो सिरदर्द, गर्दन दर्द और लगातार थकावट हो सकती है, जो दिनभर की एक्टिविटी को प्रभावित करती है। सिर भारी रहने की समस्या से कैसे बचें? इस परेशानी से बचने के लिए रोजमर्रा की आदतों में थोड़ा बदलाव जरूरी है— -समय पर सोने और उठने की आदत डालें रोज एक ही समय पर सोना और उठना शरीर की घड़ी को सही रखता है। -सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद करें। -पर्याप्त पानी पिएं दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। -हल्का और संतुलित भोजन करें रात में भारी और तला-भुना खाना खाने से बचें। हल्का भोजन बेहतर नींद में मदद करता है। -सही तकिया और पोजीशन अपनाएं ऐसा तकिया चुनें जो गर्दन को सही सपोर्ट दे और सोने की पोजीशन आरामदायक हो। -तनाव कम करें योग, ध्यान और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज तनाव कम करने में मदद करती हैं।    
  • Health Tips: आंवला-चुकंदर व गाजर का जूस सेहत के लिए अमृत समान, जानें पीने का सही टाइम

    Health Tips: आंवला-चुकंदर व गाजर का जूस सेहत के लिए अमृत समान, जानें पीने का सही टाइम

    Health News: आजकल खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। ऐसे में आंवला, चुकंदर और गाजर से बना एबीसी जूस सेहत को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करता है। इन तीनों चीजों का कॉम्बिनेशन शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है। एबीसी जूस क्या है? एबीसी जूस का मतलब है आंवला (Amla), चुकंदर (Beetroot) और गाजर (Carrot) का जूस। यह जूस विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स इस जूस को रोज़ाना डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। एबीसी जूस में पाए जाने वाले पोषक तत्व आंवला-चुकंदर-गाजर के जूस में कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जैसे—
    • विटामिन C और विटामिन A
    • आयरन और फोलेट
    • एंटीऑक्सीडेंट
    • फाइबर
    ये सभी तत्व शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, तो एबीसी जूस का सेवन फायदेमंद हो सकता है। आंवला में मौजूद विटामिन C शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है और बार-बार होने वाली सर्दी-खांसी से बचाव करता है। एनर्जी और मेटाबॉलिज्म को करे बेहतर इस जूस को पीने से शरीर में एनर्जी लेवल बढ़ता है। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करता है, जिससे शरीर ठीक से काम करता है और थकान कम महसूस होती है। पेट की समस्याओं से दिलाए राहत आंवला-चुकंदर-गाजर का जूस पेट की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। यह—
    • कब्ज की समस्या दूर करता है
    • अपच और गैस से राहत देता है
    • गट हेल्थ को बेहतर बनाता है
    अगर आपको अक्सर पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, तो इस जूस को अपने डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं। खून की कमी को करे दूर चुकंदर और आंवला आयरन से भरपूर होते हैं। इस जूस का नियमित सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद मिलती है और एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या दूर हो सकती है। शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक एबीसी जूस शरीर से गंदे और हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है। यह लिवर को साफ रखने और शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में सहायक होता है। ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद आंवला-चुकंदर-गाजर का जूस ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा यह दिल को मजबूत बनाए रखता है और हार्ट से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है। कब और कैसे पिएं एबीसी जूस? बेहतर परिणाम पाने के लिए इस जूस को सुबह खाली पेट पीने की सलाह दी जाती है। रोज़ाना सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से कुछ ही हफ्तों में इसके पॉजिटिव असर दिखने लगते हैं।  
  • सर्दियों में किस पानी से चेहरा धोने से दूर होगी Dryness? एक्सपर्ट्स से जानें जवाब

    सर्दियों में किस पानी से चेहरा धोने से दूर होगी Dryness? एक्सपर्ट्स से जानें जवाब

    सेहत: सर्दियों के इस मौसम में लोगों के मन में यही सवाल आता है कि चेहरा कौन से पानी से धोना चाहिए। चेहरे के लिए ठंडा पानी या फिर गर्म कौन सा पानी सही है? सुबह का समय त्वचा के लिए बेहद जरुरी होता है। नींद के दौरान स्किन खुद को रिचार्ज करती है और दिन की शुरुआत अच्छी करने से स्किन काफी समय तक हेल्दी और चमकदार भी बनी रहती है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों के अनुसार, यही माना जाता है कि पानी का तापमान स्किन के पोर्स तेल और नमी पर भी सीधा असर डालता है। इसी वजह से सर्दियों में चेहरा धोने का सही तरीका पता होना बेहद जरुरी है।

    चेहरे के लिए कौन सा पानी सही?

    गर्म पानी शुरुआत में त्वचा को भले ही ताजगी और आराम देने वाला लगता है परंतु यदि बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल आप चेहरे को धोने के लिए करेंगे तो यह आपकी त्वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आयुर्वेद में ऐसा बताया गया है कि बहुत गर्म पानी त्वचा की नैचुरल ऑयल लेयर हटा देगा। इससे त्वचा रुखी और लाल दिखने लगती है। वहीं साइंस के अनुसार, गर्म पानी स्किन के ऊपर मौजूद नैचुरल बैरियर सीबम खत्म कर देता। इससे त्वचा नमी और इंफेक्शन से बचती है। लगातार गर्म पानी का यदि आप इस्तेमाल करेंगे तो चेहरे पर खुजली, रुखापन और कभी-कभी मुंहासे जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। ऐसे में ठंडा हो या फिर गर्म, ज्यादा गर्मा पानी से चेहरा धोना त्वचा के लिए सही नहीं है।

    ठंडा पानी से चेहरा धोने के फायदे

    वहीं यदि ठंडे पानी की बात करें इस पानी के साथ चेहरा धोने से आप ताजगी महसूस करेंगे। आयुर्वेद के अनुसार, ठंडा पानी वात दोष को संतुलित करता है। इससे स्किन में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और त्वचा को ताजगी मिलती है। यह चेहरे की सूजन और लालिमा दूर करने में भी मदद करेगा। चेहरे के पोर्स भी ठीक होंगे। विज्ञान के अनुसार, सिर्फ ठंडे पानी से त्वचा की गहराई से भी साफ नहीं होगी क्योंकि ठंडा पानी ऑयल और गंदगी को पूरी तरह से हटाने में असरदार नहीं साबित होता। यदि आप ठंडे पानी का इस्तेमाल करेंगे तो त्वचा रुखी हो जाएगी। स्किन को अच्छे से साफ करने के लिए ठंडा पानी इस्तेमाल करना जरुरी है।

    सर्दियों में ऐसे पानी से धोएं चेहरा

    सर्दियों के इस मौसम में चेहरा धोने के लिए गुनगुना पानी इस्तेमाल करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, भी ऐसा पानी सर्दियों में सबसे सही रहता है। गुनगुना पानी चेहरे की गंदगी, तेल और पसीने को धीरे-धीरे हटा देता है और स्किन के नैचुरल ऑयल को बरकरार रखेगा। विज्ञान के अनुसार, गुनगुना पानी पोर्स को खोलकर गंदगी और डेड स्किन को बाहर निकालता है। इससे त्वचा सॉफ्ट, फ्रेश और चमकदार बनेगी। त्वचा इससे ड्राई या इरिटेट नहीं होगी।

    आइस वॉटर से भी धो सकते हैं चेहरा

    त्वचा को साफ करने के लिए एक बर्फ या आइस वॉटर भी बेहतर ऑप्शन रहेगा। यह आपकी त्वचा को तुरंत ताजगी देगा। इसके साथ खून की धमनियां सिकुड़कर सूजन और लालिमा को भी कम करेगा। आयुर्वेद के अनुसार, इससे वात शांत होगी और चेहरे को ठंडक मिलेगी। लंबे समय तक यदि आप बर्फ वाला पानी इस्तेमाल करेंगे तो त्वचा की नमी भी कम हो सकती है। ऐसे में बर्फ के पानी का इस्तेमाल सावधानी से करें। चेहरा धोने के बाद मॉइश्चराइजर लगाएं।            
  • HEALTH TIPS: भीषण सर्दी में ऊनी कपड़े पहनने के बाद भी लगती है ठंड, तो अपनाएं ये आसान उपाय

    HEALTH TIPS: भीषण सर्दी में ऊनी कपड़े पहनने के बाद भी लगती है ठंड, तो अपनाएं ये आसान उपाय

    HEALTH NEWS: सर्दियों के मौसम में लगभग हर कोई ठंड से बचने के लिए ऊनी कपड़ों का सहारा लेता है। लोग घर से बाहर निकलते समय ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी स्वेटर, जैकेट, टोपी, मोजे और मफलर पहनकर रखते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इतने कपड़े पहनने के बाद भी ठंड से राहत नहीं मिलती। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान उपाय अपनाकर आप पूरे सर्दियों के मौसम में खुद को गर्म और आरामदायक महसूस कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसे विस्तार से… बाहर निकलते समय सही जैकेट का चुनाव करें अक्सर लोग सर्दियों में पॉलिएस्टर या डेनिम की जैकेट पहन लेते हैं, क्योंकि ये दिखने में स्टाइलिश होती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसी जैकेट ठंडी हवा को पूरी तरह रोक नहीं पातीं। अगर आप ठंडी हवा से सही मायनों में बचना चाहते हैं, तो विंडप्रूफ और वॉटर रेसिस्टेंट जैकेट पहनना ज्यादा फायदेमंद होता है। क्या पहनें?
    • डाउन फेदर जैकेट
    • पफर जैकेट
    • ऐसी जैकेट जिनके अंदर गर्म लाइनिंग हो
    • ये जैकेट शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोकती हैं और ठंडी हवा को अंदर नहीं आने देतीं।
    घर के अंदर ठंड से कैसे बचें? घर के अंदर ठंड से बचने के लिए बहुत से लोग हीटर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, हर कोई हीटर खरीदना नहीं चाहता या बिजली के ज्यादा बिल से बचना चाहता है। अगर आप भी हीटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अपनी डाइट में थोड़ा बदलाव करके भी शरीर को अंदर से गर्म रख सकते हैं। डाइट में बदलाव से मिलेगी अंदरूनी गर्माहट सर्दियों में हमारा शरीर ज्यादा ऊर्जा और गर्माहट चाहता है। ऐसे में गर्म तासीर वाले खाने-पीने की चीजें बहुत फायदेमंद होती हैं। मसाले और जड़ी-बूटियां
    • अदरक
    • लहसुन
    • दालचीनी
    • लौंग
    • काली मिर्च
    • हल्दी
    • तुलसी
    इनका सेवन करने से शरीर को गर्माहट मिलती है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। सर्दियों में खाएं ये सब्जियां कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जो शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती हैं।
    • शकरकंद
    • गाजर
    • चुकंदर
    • इन सब्जियों को उबालकर, भूनकर या सब्जी के रूप में खाने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है।
    ड्राई फ्रूट्स और देसी चीजें भी हैं फायदेमंद सर्दियों में कुछ देसी और पौष्टिक चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए, जैसे गुड, शहद, घी, खजूर, अंजीर, मुनक्का, बादाम, तिल इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और ठंड से बचाने में मदद करते हैं।  
  • गंदे पानी से फैल सकता है Typhoid, ऐसे लक्षण दिखने पर हो जाएं Alert

    गंदे पानी से फैल सकता है Typhoid, ऐसे लक्षण दिखने पर हो जाएं Alert

    सेहत: भारत में टाइफाइड के मामले एक बार फिर से बढ़ने शुरु हो गए हैं। हर साल इसके कई केस सामने आते हैं। खासतौर पर मानसून और उसके बाद मौसम में टाइफाइड तेजी से फैलता है। अब हाल ही में गुजरात के गांधीनगर में टाइफाइट के प्रकोप में करीब 100 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। इससे यह साफ हो गया है कि खराब पानी और साफ-सफाई की कमी वाले इलाकों में यह बीमारी कितनी तेजी से फैल सकती है। टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से फैलता है। यह बैक्टीरिया गंदे खाने और पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

    हर साल 47-48 लाख मामले आते हैं सामने

    टाइफाइड फीवर एक गंभीर इंफेक्शन है। इसको मेडिकल भाषा में एंटरिक फीवर भी कहते हैं। यह बीमारी मुख्य तौर पर आंतों और खून को प्रभावित करती है। इससे तेज, बुखार, पेट दर्द और कमजोरी होती है। भारत में हर साल करीबन 47 से 48 लाख टाइफाइड के मामले सामने आते हैं। कई लोगों की इसके कारण मौत भी हो जाती है। यह बीमारी बच्चों और युवाओं में ज्यादा होती है परंतु यहां पर साफ पानी और सफाई की कमी हो वहां पर रहने या घूमने वाला व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकता है।

    इसलिए खतरनाक है टाइफाइड

    इसका इलाज उस समय मुश्किल हो जाता है जब सही समय पर इसकी पहचान न की जाए। ऐसे ही यदि कोई व्यक्ति एंटीबॉयोटिक दवाईयां लेता है जो बैक्टीरिया पर असर न करे। भारत के कई हिस्सों में टाइफाइड के बैक्टीरिया अब दवाईयों के प्रति रेजिस्टेंट हो गए हैं। ऐसे में इसका इलाज भी मुश्किल हो गया है। भारत में टाइफाइड फैलने का सबसे बड़ा कारण गंदा पानी और सफाई की कमी है। कई जगहों पर खुले कुएं, हैंडपंप और पाइपलाइन इस्तेमाल होती है जो बारिश या बाढ़ के दौरान सीवेज से गंदा हो जाता है। इसके अलावा खुले में शौच, ओवरफ्लो नाले और कमजोर सीवरेज सिस्टम के कारण भी बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। बिना साफ सफाई के खाना बनाना और बेचने के कारण भी यह फैल सकता है। स्ट्रीट फूड, कच्ची सब्जियां, लस्सी और गन्ने का रस यदि साफ पानी और हाथों के साथ न बने तो इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग टाइफाइड से ठीक होने के बाद भी अपने शरीर में बैक्टीरिया लिए रहते हैं। इसके कारण दूसरों को भी इंफेक्शन फैल सकता है।

    लक्षण दिखने पर न करें इग्नोर

    इसके लक्षण आमतौर पर इंफेक्शन के 1-3 हफ्ते बाद नजर आते हैं। शुरुआत में इसके लक्षण तेज फ्लू जैसे लगते है जैसे कि धीरे-धीरे बढ़ने वाला तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, बहुत ज्यादा थकान, पेट दर्द, भूख न लगना, मतली या उल्टी, सूखी खांसी, तेज बुखार, दिल की धड़कन कम होना। यदि टाइफाइड बढ़ जाए तो पेट पर छोटे-छोटे दाने भी दिख सकते हैं। पेट फूल सकता है और कमजोरी ज्यादा बढ़ सकती है। गंभीर मामलों में बेहोशी, आंतों में खून आना या छेद होने जैसी स्थितियां भी बन सकती है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी के तौर पर मानी जाती है। यदि किसी को 3-4 दिन से ज्यादा बुखार होता है और साथ में पेट में दर्द रहती है तो टाइफाइड जरुर चेक करवाएं।