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  • सर्दियों में सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डालें? Premanand Maharaj से जानें

    सर्दियों में सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डालें? Premanand Maharaj से जानें

    धर्म: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज से लोग अपनी जिंदगी की कई समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। महाराज भी भक्तों को परेशानियों का जवाब बहुत ही सरलता के साथ देते हैं। हर दिन उनका कोई न कोई वीडियो रोज सोशल मीडिया पर सामने आता है जिसमें वह भक्तों को जीवन की शिक्षा देते दिखते हैं। इन दिनों काफी सर्दी पड़ रही है ऐसे में काफी लोग सुबह जल्द उठने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जैसे ज्यादा ठंड या आलस आदि। अब इसी विषय को लेकर प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें एक महिला महाराज से अपनी समस्या बताती हुई नजर आ रही है।

    सर्दियों में सुबह जल्दी कैसे उठें?

    सामने आए वीडियो में महिला महाराज से अपनी समस्या शेयर करती दिख रही है। महिला महाराज को कहती है कि सर्दियों में मै रोज सोचती हूं कि कल से जल्दी उठूंगी लेकिन उठ नहीं पाती हूं। आलस बढ़ गया है और देर तक सोने के कारण से गलत तरह के सपने भी आने लगते हैं। इस बात का जवाब सुनकर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ज्यादा सपने उन्हें ही आते हैं जो देर तक सोते ही रहते हैं। उन्होंने कहा कि – अगले 24 घंटे में सिर्फ 5 घंटे की नींद ले जाए तो सपने नहीं आते हैं। सुबह नींद ने उठते ही अपने ईश्वर का नाम जाप करना चाहिए। इससे मन शुद्ध रहता है और बुरे सपनों से भी मुक्ति मिलती है।

    ब्रह्मामुहूर्त में उठने की आदत डालें

    प्रेमानंद महाराज से साफ शब्दों में कहा कि जो लोग रात में देर से सोते हैं और सुबह भी देर तक सोते रहते हैं। उनमें मनुष्यता नहीं बल्कि पशुता झलकने लगती है ऐसे में हर व्यक्ति को ब्रह्मामुहूर्त में उठने की आदत डालनी चाहिए जो लोग सुबह देर तक सोते रहते हैं वो न तो अध्यात्म को ठीक से समझते हैं और न ही धर्म को।

    उठते ही लें भगवान का नाम

    प्रेमानंद महाराज ने आगे बताते हुए कहा कि सुबह के समय सबसे पहले उठकर टहलते हुए भगवान का नाम जप करना चाहिए। यदि इसका लगातार एक महीने तक अभ्यास किया जाए तो यह आदत ही बन जाती है क्योंकि भगवान के नाम-जप में बहुत शक्ति होती है जो भी लोग नाम-जप कर रहे हैं उनके चरित्र का पवित्र होना भी बहुत ही जरुरी है। रोज नाम-जप और शुद्ध आचरण से जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति मिलती है परंतु यदि चरित्र ही पवित्र नहीं होगा और नाम-जप भी नहीं किया जाएगा तो आप चाहे कितनी भी कोशिश कर लो, जीवन में सच्ची उन्नति कभी भी संभव नहीं हो पाएगी।
  • HEALTH TIPS: मूंगफली के दाने छिलके के साथ खाना सही या गलत?, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

    HEALTH TIPS: मूंगफली के दाने छिलके के साथ खाना सही या गलत?, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

    HEALTH TIPS NEWS: मूंगफली हमारी रोजमर्रा की डाइट का एक आम लेकिन बेहद खास हिस्सा है। सर्दियों में तो इसका मज़ा और भी बढ़ जाता है। लोग इसे कई तरह से खाते हैं—भुनी हुई, गुड़ के साथ, या कभी-कभी भूनकर।लेकिन जब मूंगफली खाने की बात आती है, तो ज्यादातर लोग इसके अंदर वाले लाल छिलके को हटा देते हैं। वहीं कुछ लोग इसे छिलके के साथ ही खाना फायदेमंद मानते हैं। तो सवाल उठता है—मूंगफली के लाल छिलके को खाना चाहिए या नहीं? लाल छिलका क्या है और क्यों खास है? मूंगफली के अंदर जो लाल छिलका होता है, वह सिर्फ एक परत नहीं है। यह पोषक तत्वों से भरा हुआ खजाना है। लाल छिलके में पाए जाने वाले पोषक तत्व
    • फाइबर – पेट के लिए अच्छा
    • एंटीऑक्सीडेंट्स – शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं
    • विटामिन E और B6 – इम्यूनिटी और एनर्जी के लिए
    • मिनरल्स – जैसे मैग्नीशियम, फॉस्फोरस
    • इसलिए, मूंगफली खाते समय इसे छीलकर फेंकना सही नहीं है।
    एक्सपर्ट क्या कहते हैं? आयुर्वेद और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि मूंगफली को लाल छिलके के साथ ही खाना चाहिए। लाल छिलके में पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनोइड्स होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। इसमें फाइबर होने की वजह से यह पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करता है। हां, अगर बहुत ज्यादा मात्रा में खाई जाए तो गैस या पेट में भारीपन की समस्या हो सकती है। लाल छिलके के फायदे
    1. पाचन में मदद – पेट सही से काम करता है।
    2. इम्यूनिटी बढ़ाता है – बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
    3. दिल के लिए अच्छा – हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है।
    4. ब्लड शुगर कंट्रोल – खासकर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए मददगार।
    5. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर – शरीर की कोशिकाओं को डैमेज से बचाता है।
    किन लोगों को बचना चाहिए? हालांकि लाल छिलका फायदेमंद है, लेकिन कुछ लोगों को इससे परहेज करना चाहिए थाइराइड की समस्या वाले लोग – इसमें गोइट्रोजनिक कंपाउंड्स होते हैं, जो थाइराइड ग्लैंड पर असर डाल सकते हैं। गैस या पेट में भारीपन की समस्या वाले लोग – छिलका खाने से गैस बढ़ सकती है।  
  • कानों में लगातार घंटी बजना हो सकता है खतरनाक, इन Symptoms को भूलकर भी न करें Ignore

    कानों में लगातार घंटी बजना हो सकता है खतरनाक, इन Symptoms को भूलकर भी न करें Ignore

    हेल्थः कानों में लगातार घंटी बजना, भनभनाहट या सीटी जैसी आवाज आना आमतौर पर लोग हल्के में ले लेते हैं। मेडिकल भाषा में इसे टिनिटस (Tinnitus) कहा जाता है। हालांकि डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर बार टिनिटस मामूली नहीं होता। कई मामलों में यह गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है, जिनका समय पर इलाज न होने पर स्थायी नुकसान का खतरा रहता है।

    अगर आपके एक कान में अचानक घंटी बजने के साथ सुनाई देना कम हो जाए, तो यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है। इसे सडन सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस कहा जाता है। इस कंडीशन में कान बंद या भरा भरा महसूस हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती दिनों में इलाज मिलने से सुनने की क्षमता वापस आने की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन देरी होने पर यह और खतरनाक हो सकता है।

    वहीं अगर टिनिटस सिर्फ एक कान में हो और लंबे समय तक बना रहे, तो यह एक एकॉस्टिक न्यूरोमा नाम के ट्यूमर का संकेत हो सकता है। यह ट्यूमर कान और दिमाग को जोड़ने वाली नस पर बढ़ता है। शुरुआती दौर में सिर्फ घंटी बजने की शिकायत होती है, बाद में सुनने में कमी, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना या चेहरे में सुन्नपन जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।

    कान में घंटी के साथ तेज चक्कर, कान में भारीपन और सुनने की क्षमता में उतार-चढ़ाव मेनिएरे डिजीज की पहचान हो सकती है। यह बीमारी कान के अंदर तरल पदार्थ के असंतुलन से होती है। टिनिटस की आवाज इस कंडीशन में तेज गूंज या गरज जैसी लग सकती है जो चक्कर आने से पहले बढ़ जाती है।

    वहीं अगर कान में दिल की धड़कन के साथ-साथ धक-धक जैसी आवाज आए तो यह हाई ब्लड प्रेशर या ब्लड वेसल से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। इसे पल्सेटिला टिनिटस कहा जाता है। यह कंडीशन स्ट्रोक या हार्ट अटैक के खतरे से भी जुड़ी हो सकती है, इसलिए जांच बहुत जरूरी है।

  • रोज की ये आदतें चुपचाप बढ़ा रही हैं Stress Hormone Cortisol, हो जाए सावधान

    रोज की ये आदतें चुपचाप बढ़ा रही हैं Stress Hormone Cortisol, हो जाए सावधान

    हेल्थः शरीर में बनने वाला कोर्टिसोल एक बेहद जरूरी हार्मोन है, जिसे आमतौर पर स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है। यह तनाव की स्थिति में शरीर को संभालने और एनर्जी देने का काम करता है। सामान्य तौर पर सुबह कोर्टिसोल का लेवल ज्यादा होता है, जिससे शरीर एक्टिव रहता है, जबकि रात में यह कम हो जाता है ताकि नींद आ सके।

    लेकिन जब रोज़मर्रा की कुछ गलत आदतें इस नेचुरल साइकल को बिगाड़ देती हैं, तो शरीर में जरूरत से ज्यादा कोर्टिसोल बनने लगता है। इसका असर पेट की चर्बी बढ़ने, नींद खराब होने, मूड स्विंग, कमजोर इम्युनिटी और शरीर की रिकवरी पर साफ दिखाई देता है।

    1. नींद की कमीः अगर आप लगातार कम सोते हैं तो शरीर कोर्टिसोल को कम नहीं कर पाता। रोज़ाना 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। एक रात की खराब नींद भी कोर्टिसोल लेवल बढ़ा सकती है। जो लोग 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें शाम तक भी स्ट्रेस हार्मोन हाई बना रहता है। नींद की कमी से जंक फूड की क्रेविंग और वजन बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    2. जरूरत से ज्यादा वर्कआउटः तेज और ज्यादा वर्कआउट के दौरान कोर्टिसोल बढ़ना सामान्य है, लेकिन जब शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिलता, तो यह नुकसानदायक हो जाता है। लगातार ओवरट्रेनिंग से थकान बढ़ती है और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकता है। इसका असर महिलाओं में पीरियड्स और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल पर भी पड़ सकता है।

    3. ज्यादा कैफीन का सेवनः कॉफी और चाय में मौजूद कैफीन शरीर को अलर्ट करता है, लेकिन साथ ही कोर्टिसोल भी बढ़ाता है। दिन में ज्यादा कैफीन या दोपहर के बाद कॉफी पीने से स्ट्रेस और नींद दोनों प्रभावित होती हैं। खासतौर पर पहले से तनाव में रहने वालों पर कैफीन का असर ज्यादा होता है।

    4. लगातार मानसिक तनावः ऑफिस का दबाव, घर की टेंशन और रोज़मर्रा की परेशानियां शरीर के स्ट्रेस सिस्टम को लगातार एक्टिव रखती हैं। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव मूड, याददाश्त और इम्युनिटी को नुकसान पहुंचाता है। लगातार नेगेटिव सोच कोर्टिसोल लेवल को और बढ़ा देती है।

    5. ज्यादा स्क्रीन टाइमः मोबाइल और टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को एक्टिव रखती है। इससे नींद के लिए जरूरी मेलाटोनिन हार्मोन बनने में रुकावट आती है और रात में भी कोर्टिसोल हाई रहता है। ज्यादा स्क्रीन टाइम नींद की क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित करता है।

    6. मील्स स्किप करनाः ब्रेकफास्ट या लंच छोड़ने पर शरीर इसे भूख की स्थिति मान लेता है, जिससे कोर्टिसोल बढ़ जाता है। इस दौरान शरीर एनर्जी के लिए मसल्स और फैट को तोड़ने लगता है। लगातार मील्स स्किप करने से पेट की चर्बी और स्ट्रेस दोनों बढ़ सकते हैं।

  • Healthy रहने के लिए रात में कितने बजे तक खाना चाहिए खाना? जानें एक्सपर्ट्स की राय

    Healthy रहने के लिए रात में कितने बजे तक खाना चाहिए खाना? जानें एक्सपर्ट्स की राय

    सेहत: यह बात सभी अच्छे से जानते हैं कि पोषण से भरपूर खाना खाना हमारे शरीर के लिए कितना जरुरी है। यदि डाइट पोषण से भरपूर होगी तो पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। यह शरीर के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है परंतु यह काफी लोग नहीं जानते कि डेली रुटीन में किस तरह का खाना खाना चाहिए और कब खाना खाना शरीर के लिए सही रहेगा। काफी लोग यह नहीं जानते कि किस समय पर खाना खाना चाहिए जिससे सेहत को फायदा मिल पाए। यदि आप सही समय पर खाना खाएंगे तो गट हेल्थ यानी की पेट की सेहत भी अच्छी रहेगी।

    दिन में शरीर पचा सकता है भारी खाना

    यदि आप दिन के समय भारी खाना खाएंगे तो इससे पाचन तंत्र पर ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि दिन के समय हमारी पाचन शक्ति बहुत ज्यादा मजबूत होती है। शरीर में घड़ी की तरह काम करने वाली एक चीज मौजूद होती है जिसको सर्केडियन रिदम कहते हैं। यह हमारे शरीर में 24 घंटे का चक्र पूरा करती है। जब रोशनी होती है तो शरीर को पता चल जाता है कि अब जागने, काम और खाने का समय है और जब अंधेरा होता है तो हमारे शरीर को पता चलता है कि अब आराम करने और सोने का समय हो गया है।

    रात में सही समय पर खाना जरुरी

    वहीं यदि रात के समय आप खाना समय पर नहीं खाएंगे तो यह दिल की सेहत के लिए काफी ज्यादा खतरनाक होगा। इससे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती है। जब आप रात में देर से खाना खाते हैं तो शरीर को उस समय मजबूरी में भी पाचन का काम करना पड़ता है। देर रात में शरीर ग्रोथ हार्मोन बनाने का काम करता है। इसके कारण पेट संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं जैसे कि अपच, पेट फूलना और पेट में भारीपन जैसी दिक्कतें हो सकती है।

    कितने बजे तक करना चाहिए डिनर?

    डॉक्टर्स की मानें तो यदि किसी भी व्यक्ति को स्वस्थ, रोगों से दूर रहना है और पेट की सेहत का ध्यान रखना है तो डिनर जल्दी खा लेना चाहिए। जल्दी डिनर करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होगा। इससे पाचन तंत्र मजबूत होगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो शाम को 6 बजे से 8 बजे तक डिनर कर लेना चाहिए। जल्दी डिनर करने से डायबिटीज का खतरा काफी हद तक कम होता है। पेट में अच्छे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इसके अलावा जल्दी खाना खाने से पाचन तंत्र को खाना पचाने में समय मिल जाता है जो अच्छी सेहत के लिए बहुत जरुरी है।
  • हल्दी का ये काढ़ा Diabetes और kidney से जुड़ी समस्याओं को करेगा दूर, जानें Experts की राय

    हल्दी का ये काढ़ा Diabetes और kidney से जुड़ी समस्याओं को करेगा दूर, जानें Experts की राय

    हेल्थः हल्दी एक शक्तिशाली देसी उपाय है, जिसे आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। इसमें पावरफुल एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने में और दर्द को कम करने में सहायता कर सकते हैं। आयुर्वेद के एक्सपर्ट ने हल्दी का उपाय बताया है, जिसमें आपको कच्ची हल्दी को बारीक काटकर इस्तेमाल करना है। उन्होंने बताया कि इसके साथ कुछ चीजें मिलाकर लेने से आपको जो फायदा मिलेगा। एक्सपर्ट के अनुसार जिन लोगों को शुगर है और साथ में उनके पैरों में सुन्नपन भी बना रहता है। इसके अलावा हर समय पांव में कांटे से चुभते रहते हैं या पूरे बदन में जलन रहती है तो उन्हें यह उपाय करना चाहिए।

    क्या क्या चाहिए?
    – 25 ग्राम बारीक कटी हुई कच्ची हल्दी
    – 1 नींबू को बारीक स्लाइस में काट लें
    – 1 चुटकी दालचीनी का पाउडर
    – 1 चुटकी काली मिर्च​​

    कैसे बनाना है उपाय?
    एक्सपर्ट के अनुसार इन चारों सामान को आधा लीटर पानी में धीमी आंच पर इतना उबालिए कि यह पानी पककर आधा रह जाए और इसको छानकर सुबह में पी लीजिए। जो छलनी के ऊपर सामान बचेगा, उसको फिर से शाम को उबालिए। इसी तरह से लगातार 3 हफ्तों तक ये काढ़ा पीजिए। जिन लोगों को शुगर के कारण शरीर में बहुत सारी दिक्कतें पनप रही हैं, उनके लिए यह उपाय फायदेमंद साबित हो सकता है। डॉक्टर का कहना है कि आपकी किडनी भी डिटॉक्स होने लगेंगी।

  • नाखूनों का रंग देता हैं इन बीमारियों का संकेत, लक्षण दिखने पर हो जाएं सतर्क

    नाखूनों का रंग देता हैं इन बीमारियों का संकेत, लक्षण दिखने पर हो जाएं सतर्क

    सेहत: काफी लोग नाखूनों के बदलते रंग की ओर ध्यान नहीं देते। इसको मामूली समस्या समझकर इग्नोर कर देते हैं परंतु एक्सपर्ट्स की मानें तो नाखून शरीर के अंदर चल रही गड़बड़ी का संकेत देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, नाखूनों की बनावट, रंग और मजबूती में यदि कोई बदलाव आए तो यह हाई कोलेस्ट्रॉल, दिल की बीमारी, खून की कमी या फिर न्यूट्रिशन की कमी का संकेत हो सकता है।

    मेटाबॉलिक समस्याओं का संकेत

    नाखूनों पर यदि लंबी धारियां या उभरी हुई रेखाएं नजर आती हैं तो यह सिर्फ उम्र का असर नहीं होता बल्कि न्यूट्रिशन की कमी, एनीमिया या मेटाबॉलिक समस्याओं के कारण भी हो सकती है। मेडिकल टर्म में इन्हें ऑनिकोरेक्सिस कहते हैं। जब कोलेस्ट्रॉल हाई हो तो ऐसी स्थिति में खून का प्रवाह प्रभावित होता है। इससे नाखूनों तक पहुंचने वाला ऑक्सीजन और पोषक तत्व भी कम हो जाते हैं। इसी कारण नाखूनों पर काले निशान, रंग में बदलाव या फिर असामान्य तौर पर धारियां नजर आ सकती हैं।

    ऑक्सीजन की कमी

    नाखूनों का रंग बदलना शरीर में लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी का संकेत भी हो सकता है। यह कई बार हाई कोलेस्ट्रॉल और उससे जुड़ी हार्ट समस्याओं के कारण होता है। यदि नाखूनों का आकार धीरे-धीरे बदल रहा है तो इसे हल्के में न लें। अगर नाखूनों का रंग नीला या बैंगनी दिख रहा है तो इससे यह पता चलता है कि खून में ऑक्सीजन का स्तर ठीक नहीं है। इससे ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है।

    कमजोर होना

    यदि नाखून कमजोर होकर जल्दी टूट रहे हैं, धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं या पीले पड़ते जा रहे हैं तो यह भी हाई कोलेस्ट्रॉल, एनीमिया या खराब ब्लड सर्कुलेशन का संकेत हो सकता है। लंबे समय तक यदि कोई ऐसा बदलाव दिखे तो जांच जरुर करवाएं। नाखूनों में किसी भी तरह का बदलाव दिखने पर डॉक्टर्स की सलाह जरुर लें।  
  • Heart की अच्छी सेहत के लिए हर रोज चबाएं 2 हरी इलायची, ये भी मिलेंगे लाभ

    Heart की अच्छी सेहत के लिए हर रोज चबाएं 2 हरी इलायची, ये भी मिलेंगे लाभ

    हेल्थः अगर आप हरी इलायची को सिर्फ एक साधारण मसाला मानते हैं, तो अब इस सोच को बदलने का समय है। आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में हरी इलायची को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। सही मात्रा और सही तरीके से इसका सेवन करने पर यह कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत दिला सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 2 हरी इलायची चबाने से कुछ ही हफ्तों में इसके सकारात्मक असर महसूस होने लगते हैं।

    हरी इलायची पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है। गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत पाने के लिए सुबह खाली पेट 1–2 हरी इलायची चबाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा जिन लोगों को मुंह से बदबू (बैड ब्रेथ) की समस्या रहती है, उनके लिए भी इलायची काफी लाभकारी मानी जाती है।

    पोषक तत्वों से भरपूर हरी इलायची दिल की सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है। कुछ अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद कर सकती है। साथ ही यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में सहायक हो सकती है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है।

    हरी इलायची में मौजूद प्राकृतिक तत्व मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं। अगर आप नींद न आने या बेचैनी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो रात को सोने से पहले 1 इलायची चबाना फायदेमंद हो सकता है।

    सेवन का सही तरीका और सावधानी
    – रोजाना 1 से 2 हरी इलायची पर्याप्त होती है।
    – ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचें।
    – किसी गंभीर बीमारी या दवा चल रही हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • बिना जिम के कम होगा Weight, डेली रुटीन में शामिल करें वॉकिंग की आदत

    बिना जिम के कम होगा Weight, डेली रुटीन में शामिल करें वॉकिंग की आदत

    सेहत: वॉकिंग सबसे आसान और असरदार एक्सरसाइज के तौर पर मानी जाती है पर लोग इसे बहुत ही हल्के में लेते हैं। काफी लोगों को ऐसा लगता है कि फैट बर्न करने के लिए जिम या फिर हैवी एक्सरसाइज करना जरुरी होता है पर हर किसी के लिए यह नहीं होता। यदि आप रोज सही तरीके से वॉक करते हैं तो कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है और वजन कम करने का प्रोसेस आसान बनता है। वॉकिंग करने से पाचन क्रिया भी अच्छी होती है, मेटाबॉल्जिम तेज होता और शरीर एक्टिव रहेगा। वॉकिंग से जोड़ों पर ज्यादा जवाब नहीं पड़ता ऐसे में हर उम्र के लोग इसको आसानी से कर सकते हैं। अपनी डेली रुटीन में थोड़े से बदलाव करके आप वॉकिंग से ज्यादा कैलोरी बर्न कर पाएंगे। इसके अलावा बिना ज्यादा डाइट के भी वजन कम कर सकते हैं।

    वॉकिंग से कम होगा वजन

    वजन उस समय कम होता है जब शरीर ज्यादा मात्रा में कैलोरी लेता है। इससे ज्यादा खर्च करता है। वॉकिंग से रोज की एक्टिविटी भी बढ़ती है और ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। रिसर्च में यह सामने आया है कि रोजाना चलने से शरीर में जमा फैट एनर्जी के तौर पर इस्तेमाल होता है जिससे धीरे-धीर ेवजन कम होता है और मेटाबॉल्जिम अच्छा होता है।

    तेज-तेज करें वॉक

    लंबा रास्ता करने की जगह आप तेज चलें। इससे घुटनों पर कम दबाव पड़ेगा और हार्ट रेट बढ़ेगा। इससे ज्यादा कैलोरी बर्न होगी। इसको पॉवर वॉकिंग भी कहते हैं।

    इंटवल वॉकिंग से कम होगा वजन

    इंटरवल वॉकिंग में एक मिनट तेज चलें। इसके बाद एक मिनट धीरे चलकर आराम करें। ऐसा बार-बार करें। इससे फैट भी बर्न होगा और वॉकिंग ज्यादा असरदार बन जाएगी।

    खाना-खाने के 10-20 मिनट वॉक करें

    खाना खाने के बाद हल्की वॉक करें। इससे पाचन तंत्र अच्छा होगा, ब्लड शुगर कंट्रोल में रहेगी और ज्यादा कैलोरी भी बर्न होगी। दिन में 3 बार 10 मिनट चलें। यह 30 मिनट चलने से भी ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।

    वजन पहनकर चलें

    वॉक करते हुए बैक पैक जरुर पहनें। इसके अलावा हल्के वेट का भी इस्तेमाल आप कर सकते हैं। इससे आपके शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी और कम समय में ज्यादा कैलोरी बर्न होगी।

    ऊंचाई या सीढ़ियों पर चलें

    ऊपर की ओर चलने से आपकी जांघों, पिंडलियों और मांसपेशियां ज्यादा काम करेगी। ऐसे में आप सीढ़ियों पर चल सकते हैं। इसके अलावा ट्रेडमिल पर वॉक करना भी आपके लिए अच्छा ऑप्शन रहेगा।  
  • जापान के ट्री फ्रॉग में पाया गया ताकतवर Anti Cancer Drug, एक डोज से खत्म हो सकती है जानलेवा बीमारी

    जापान के ट्री फ्रॉग में पाया गया ताकतवर Anti Cancer Drug, एक डोज से खत्म हो सकती है जानलेवा बीमारी

    Anti Cancer Drug News : कैंसर आज भी मेडिकल साइंस के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। वैज्ञानिक लगातार ऐसे नए तरीकों की खोज में लगे हैं, जो इलाज को ज्यादा असरदार और आसान बना सकें। हाल ही में जापान से एक नई स्टडी सामने आई है, जिसने मेडिकल जगत का ध्यान खींचा है। इस रिसर्च में जापानी ट्री फ्रॉग (एक खास मेंढक) में पाए जाने वाले तत्व को कैंसर के खिलाफ असरदार पाया गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह अभी शुरुआती खोज है, लेकिन इसके नतीजे भविष्य में कैंसर के इलाज की दिशा बदल सकते हैं।

    ट्री फ्रॉग से कैसे मिली यह खोज?
    जापान के वैज्ञानिकों ने इस स्टडी में ट्री फ्रॉग की आंत से एक खास बैक्टीरिया अलग किया। इसके बाद इस बैक्टीरिया से जुड़े तत्व को चूहों पर टेस्ट किया गया।

    -यह परीक्षण खासतौर पर कोलन कैंसर मॉडल पर किया गया।

    -टेस्ट में केवल एक डोज ही कैंसर ट्यूमर पर असर दिखाने के लिए पर्याप्त पाया गया।

    -कंट्रोल हालात में किए गए प्रयोग से वैज्ञानिकों को स्पष्ट नतीजे मिले।

    -स्टडी का मकसद यह जानना था कि क्या भविष्य में यह तरीका इंसानों के लिए सुरक्षित और असरदार हो सकता है।

    शुरुआती नतीजे…
    स्टडी में देखा गया कि इस तत्व का कैंसर कोशिकाओं पर असर बहुत मजबूत था। सीमित डोज में ही पॉजिटिव नतीजे सामने आए। इससे वैज्ञानिकों को आगे और गहराई से रिसर्च करने की प्रेरणा मिली। हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि यह खोज अभी शुरुआती चरण में है। इंसानों पर असर, सुरक्षा और साइड इफेक्ट्स को समझने के लिए कई स्तर के परीक्षण करना जरूरी है।

    भविष्य में क्या उम्मीदें हैं?
    फिलहाल इसे किसी इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह स्टडी बताती है कि प्रकृति में मौजूद जीव-जंतु और उनके तत्व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद कर सकते हैं। भविष्य में इस दिशा में रिसर्च से नए और असरदार इलाज की उम्मीद बढ़ सकती है।