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  • सिर्फ नाग पंचमी वाले दिन खुलता है यह मंदिर, श्रद्धालुओं की लगती है भारी भीड़

    सिर्फ नाग पंचमी वाले दिन खुलता है यह मंदिर, श्रद्धालुओं की लगती है भारी भीड़

    धर्म: हर साल सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वाले दिन नाग पंचमी मनाई जाती है। यह दिन आमतौर पर हरियाली तीज के दो दिन बाद आता है। इस साल नाग पंचमी 29 जुलाई यानी की आज मनाई जा रही है। यह दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि सांपों की पूजा करने से नाग देव प्रसन्न होते हैं और बुराई व सांपों के भय का नाश होता है। इसलिए महिलाएं नाग पंचमी वाले दिन भाईयों और परिवार की भलाई के लिए नाग देव का पूजन करती हैं। मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी वाले दिन नाग देवता की उपासना के साथ भगवान शिव की पूजा और उनका रुद्राभिषेक करना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे जिन जातकों के जीवन में कालसर्प है वो खत्म हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नागों को भगवान शिव के आभूषण के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में महाकाल नगरी उज्जैन में स्थित नागचंद्रेशवर मंदिर भी इसी परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर पूरे साल में सिर्फ एक बार 24 घंटे के लिए नाग पंचमी वाले दिन ही खुलता है। आइए आपको आज इस मंदिर की पौराणिक मान्यता बताते हैं। नागचंद्रेशवर मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यह सिर्फ 24 घंटे के लिए ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। दरअसल इस मंदिर को साल में एक बार खोले जाने को लेकर एक पौराणिक कथा बताई जाती है। कथा की मानें तो सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को खुश करने के लिए घोर तपस्या की थी। सांपों के राजा तक्षक की तपस्या से खुश होकर भोलेनाथ ने उनको अमरता का वरदान दिया था परंतु इस वरदान को पाने के लिए बाद भी सांपों के राजा तक्षक खुश नहीं थे। उन्होंने भगवान शिव से कहा कि वो हमेशा उनके सानिध्य में ही रहना चाहते हैं इसलिए उन्हें महाकाल वन में ही रहना दिया जाए। भगवान भोलेनाथ ने उन्हें महाकाल वन में रहने की अनुमति देते हुए आशीर्वाद भी दिया की उन्हें एकांत में विघ्न न हो इसी कारण से ही साल में एक बार सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही मंदिर खोला जाएगा। श्री नागचंद्रेश्वर का दुर्लभ रुप श्री महाकालेशवर मंदिर के तीसरे तल पर स्थापित है जिसको नागराज तक्षक का निवास भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में नागचंद्रेश्वर के दर्शन के बाद ही व्यक्ति किसी भी तरह के सर्प दोष से मुक्त हो जाता है। नागचंद्रेशवर मंदिर के कपाट खोलने के साथ ही त्रिकाल पूजा का भी विधान है। त्रिकाल यानी की तीन अलग-अलग समय करने वाली पूजा इसमें पहली पूजा मध्य रात्रि 12 बजे पट खुलने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा की जाती है। दूसरी पूजा नाग पंचमी के दिन दोपहर 12 बजे प्रशासन के द्वारा अधिकारियों के द्वारा की जाती है। तीसरी पूजा शाम को 7:30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर समिति की ओर से महाकाल मंदिर के पुरोहित पुजारी करते हैं। इसके बाद रात बारह बजे आरती के बाद मंदिर के पट फिर से एक साल के लिए बंद हो जाते हैं।

    मंदिर की मान्यता

    हर साल रात को 12 बजे नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरु हो जाता है। मंदिर में सालों से महानिर्वाणी अखाड़े मंदिर के कपाट खोलने की परंपरा निभाते रहे हैं इसके अतंर्गत शैव मत के साथ नारियल बांध कर पूजन विधि खत्म करते हैं और नागचंद्रेश्वर भगवान के जयघोष के साथ मंदिर के कपाट आम लोगों के लिए खोल देते हैं।
  • Sawan 2025: 5 साल के बच्चे की भक्ति से प्रसन्न होकर इस ज्योतिर्लिंग में प्रकट हुए थे भगवान शिव

    Sawan 2025: 5 साल के बच्चे की भक्ति से प्रसन्न होकर इस ज्योतिर्लिंग में प्रकट हुए थे भगवान शिव

    धर्म: सावन के इस पावन महीने में शिव भक्त महादेव के दर्शनों के लिए ज्योर्तिलिंग में जाते हैं। ऐसे में उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग में भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। आपको बता दें कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग ऐसा स्थान है जहां पर भगवान शिव महाकाल के तौर पर प्रकट होकर स्वयंभू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के तौर पर विराजमान हुए थे। इससे जुड़ी कथा का अगर जिक्र करें तो उसमें शिवभक्त राजा चंद्रसेन, एक पांच साल के बालक की भक्ति और रामभक्त हनुमान की उपस्थिति और दूषण राक्षस का वध शामिल है। उज्जैन का महाकाल ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंग में से खास स्थान रखता है। आज आपको बताते हैं कि उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर कब विराजे हैं। किस तरह एक पांच साल के बालक के कारण भगवान शिव महाकाल के तौर पर विराजित होने के लिए राजी हुए हैं और कैसे खुद शिवजी ने दूषण राक्षस का वध किया था। एक कथा के अनुसार, उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। राजा चंद्रसेन भगवान शिव के परम भक्त थे एक बार उनके मित्र शिवगण मणिभद्र ने उनको एक अनमोल चिंतामणि दी। राजा चंद्रसेन ने इसको गले में धारण कर लिया जिससे राजा का तेज और कीर्ति दूर-दूर फैल गई। अन्य शासक भी उस मणि को पाने की इच्छा करने लगा। मणि को पाने के लिए कुछ ने चंद्रसेन पर हमला भी कर दिया। तभी राजा चंद्रसेन भगवान शिव की शरण में गए और उनके ध्यान में मग्न हो गए। चंद्रसेन जब शिव के ध्यान में मग्न थे उसी दौरान एक विधवा गोपी अपने पांच साल के छोटे बालक को साथ में लेकर दर्शन के लिए आ गई। चंद्रसेन को शिव की भक्ति में लीन होता देखकर वो छोटा सा बालक भी भगवान शिव की भक्ति करने के लिए आतुर हो गया। बालक अपने घर में एकांत जगह में बैठकर शिवलिंग की पूजा करने लग गया। बालक की मां ने उसको भोजन के लिए बुलाया लेकिन वो नहीं आया। जब मां खुद बुलाने आई तो उसने देखा बालक शिव की भक्ति में बैठा है। मां ने गुस्से में अपने बालक को पीटना शुरु कर दिया और सारी पूजा की सामग्री भी उठाकर फेंक डाली। उसी दौरान शिव का चमत्कार हुआ और उसी जगह पर एक सुंदर मंदिर और स्वभाविक ज्योतिर्लिंग प्रकट हो गया। उस ज्योतिर्लिंग को देखकर बालक की मां भी हैरान रह गई। इस बात का जब राजा चंद्रसेन को पता चला तो वह शिवभक्त होने के नाते बालक के साथ मिलने के लिए पहुंचे। राजा भी वहां पर पहुंचे जहां मणि के लिए युद्ध करने पर लोग आए थे। सभी ने राजा चंद्रसेन से माफी मांगी और भगवान शिव की पूजा करने लग गए। उसी दौरान हनुमानजी प्रकट हुए और उन्होंने बालक की पूजा की प्रशंसा की। इस घटना के बाद स्वयंभू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ।

    एक अन्य पौराणिक कथा भी है शामिल

    इस स्थान से जुड़ी एक और पौराणिक कथा भी है। इस कथा के अनुसार, भगवान शिव खुद धरती को चीरकर महाकाल के तौर पर प्रकट हुए थे। प्राचीन काल में अवंती नगर हुआ करती थी जिसको आज उज्जैन के नाम से जाना जाता है यहां पर वेदप्रिय नाम के एक ब्राह्मण रहते थे वह भगवान शिव के परम भक्त थे। वो रोज पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करते थे। उसी समय पास के रत्नमाल पर्वत पर दूषण नाम का एक राक्षस रहता था। वो राक्षस ब्राह्मणों के धार्मिक कामों को रोक कर उन पर अत्याचार करने लग गया। उससे भयभीत होकर ब्राह्मणों ने भगवान शिव से रक्षा के लिए मदद मांगी। भगवान शिव ने पहले दूषण राक्षस को चेतावनी भी दी लेकिन वो नहीं माना। जब दूषण ने ब्राह्मणों पर हमला किया तब भगवान शिव धरती फाड़कर महाकाल के तौर पर प्रकट हुए। उन्होंने राक्षस का वध कर दिया। दूषण राक्षस का वध करने के बाद महाकाल ने राक्षस की भस्म से अपना श्रृंगार किया था। इस चमत्कारिक घटना से भयमुक्त हुए ब्राहमणों ने भगवान शिव से निवेदन किया कि वो सदा के लिए वहीं पर विराजमान रहें। भक्तों की प्रार्थना से खुश होकर भगवान शिव ने उस जगह की ही अपना निवास स्थान बना लिया। तभी से वह जगह महाकालेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हो गई है।

    सावन में दूर-दूर से आते हैं भक्त

    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बहुत ही खास माना जाता है। उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ नजर आती है। यह मंदिर सात मोक्षदायिनी नगरों में से एक उज्जैन में स्थित है। सावन के सोमवार को यहां दर्शन बहुत ही फलदायक माने जाते हैं। यहां पर लोग दर्शन के लिए बुकिंग की जरुरत नहीं होती परंतु भस्म आरती में शामिल होने के लिए पहले ऑनलाइन बुकिंग जरुरी है।

    आखिर क्या है भस्म आरती की टाइमिंग?

    महाकाल मंदिर में भस्म आरती रोज सुबह 4 बजे से लेकर 5 बजे तक होती है परंतु श्रद्धालु मुख्यतौर पर रात में 1 बजे से ही लाइन में लग जाते हैं। आरती में भाग लेने के लिए ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन परमिशन जरुरी होती है जिसका प्रिंटआउट साथ रखना होता है। श्रद्धालु कई दिन पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग करवाने लग जाते हैं क्योंकि बुकिंग नहीं मिलती। आरती से पहले शिवलिंग पर अभिषेक होता है फिर भक्तों को एक हाल में दर्शन करवाया जाता है।
  • एक साथ सावन सोमवार और कामिका एकादशी, बन रहे ये 4 खास योग, जानें कैसे करें पूजा

    एक साथ सावन सोमवार और कामिका एकादशी, बन रहे ये 4 खास योग, जानें कैसे करें पूजा

    धर्म: कल सावन सोमवार का दूसरा और कामिका एकादशी का व्रत है। यह व्रत धार्मिक दृष्टि से बहुत ही खास है। इस दिन भगवान शिव को समर्पित सोमवार और साथ में भगवान विष्णु को प्रिय कामिका एकादशी का संयोग एक साथ बन रहा है। इस दुर्लभ संयोग के साथ कई शुभ योग भी बन रहे हैं ऐसे में यह दोनों ही योग इस दिन को और भी खास बनाते हैं। इस दिन व्रत रखकर यदि आप भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करते हैं तो सुख-शांति, समृद्धि, यश, लाभ की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही सभी इच्छाएं भी पूरी होगी।

    बन रहे कई खास योग

    दृक पंचागों के अनुसार, 21 जुलाई को श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सुबह 09:38 तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरु होगी। नक्षत्र रोहिणी रात 09:07 तक, इसके बाद मृगशीर्षा रहेगा। सूर्य कर्क राशि में रहेंगे और वृद्धि योग शाम को 06:38 तक रहेगा। वृद्धि योग के साथ ध्रुव योग का भी दुर्लभ संयोग बनेगा। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। यह संयोग भगवान विष्णु और शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत ही खास अवसर है।

    इस वजह से खास है सावन सोमवार

    भगवान शिव की पूजा के लिए सावन सोमवार का दिन बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन मास खासतौर पर सोमवार शिव को बहुत ही प्रिय है। इस व्रत में जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा आदि शिव को चढ़ाना बहुत ही कल्याणकारी माना जाता है। यह व्रत मनोकामना पूरी करने के साथ-साथ वैवाहिक सुख, रोग नाश और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। सावन सोमवार के अलावा सावन की प्रमुख तिथियों का व्रत करने से भी जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है और सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

    एक साथ पड़ेंगे दोनों व्रत

    सावन सोमवार और कामिका एकादशी व्रत का दिन भगवान शिव और विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ मौका होता है। ऐसा संयोग बहुत ही दुर्लभ होता है और यह बेहद फलदायक भी माना जाता है। दोनों व्रत करने वाले को संपूर्ण भौतिक और आधात्मिक लाभ, कर्मों की शुद्धि और मोक्ष मार्ग की प्राप्ति का योग बनता है। जब कामिका एकादशी सोमवार को पड़े तो वह सभी तीर्थों के स्नान से भी ज्यादा पुण्य देने वाली होती है।

    इसलिए खास है कामिका एकादशी

    महाभारत काल में खुद भगवान कृष्ण ने युद्धिष्ठिर को कामिका एकादशी के महत्व को बताया था। यह व्रत देवशयनी एकादशी के बाद पहली एकादशी का होता है। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रह्माजी ने नारदजी को बताया था कि सिर्फ इस कथा को सुनने से ही महायज्ञ का फल मिलता है। इसके अलावा इस दिन गंगा में स्नान करने का भी खास महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से न सिर्फ भगवान विष्णु और पितरों का आशीर्वाद मिलता है बल्कि बिगड़े हुए काम भी बनने लगते हैं। इस दिन यदि श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान शिव और नारायण की पूजा करें तो उनके जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं।

    ऐसे करें भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा

    इस दिन सुबह उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु को पंचामृत जल से स्नान करवाएं। उन्हें हल्दी, चंदन लगाएं और फुल, तुलसी पत्र और भोग चढ़ाएं। इसके बाद दीप, धूप जलाकर कल्याण के लिए प्रार्थना करें और कथा सुनें। इसके बाद विष्णु सहस्नाम का पाठ करें और एकादशी व्रत की कथा सुनें। तुलसी के दर्शन और पूजा करने से ही आपके सारे पापों का नाष होगा। व्रत का पारण अगले दिन 22 जुलाई को सुबह 05:37 के बाद में करें। माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के साथ ही शिव जी की पूजा करें। शिवजी को दूध, जल, घी, शहद और जल से स्नान करवाने के बाद इत्र, भस्म, जनेऊ, बेल पत्र, भांग, फूल और फल आदि चढ़ाएं। इसके बाद कपूर से आरती करें।            
  • Sawan 2025: सावन के पहले सोमवार इस तरह करें भोलेनाथ को प्रसन्न, शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीजें

    Sawan 2025: सावन के पहले सोमवार इस तरह करें भोलेनाथ को प्रसन्न, शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीजें

    भोलेनाथ और उनके भक्तों का पसंदीदा महीना सावन शुरु हो गया है। शिव की भक्ति और उनकी कृपा पाने के लिए यह सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस बार सावन 11 जुलाई से शुरु हो चुका है। सावन में आने वाले हर सोमवार का खास महत्व होता है क्योंकि सोमवार और सावन भगवान शिव को ही समर्पित है। सावन के महीने में सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की सच्चे दिल से आराधना करने से मनचाहा फल मिलता है। इसके साथ ही जीवन में खुशहाली भी आती है। इस बार सावन में 4 सोमवार आएंगे जिसमें सावन का पहला सोमवार कल यानी की 14 जुलाई को पड़ेगा।

    ऐसे करें श्रावन सोमवार मे पूजा

    सावन सोमवार वाले दिन ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़क दें। भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल, फिर दूध और पंचामृत चढ़ाएं। फिर बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, फल, मिठाई और चावल चढ़ाएं। घी का दीया और धूप भी जलाएं। फिर 108 बार ऊं नम शिवाय का जाप करें। अंत में भगवान शिव की आरती और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

    व्रत के दौरान क्या खाएं

    व्रत में अन्न नहीं खाना चाहिए। आप सिर्फ फलाहार खा सकते हैं। इसके अलावा फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा जैसी चीजें खाएं। यह भगवान शिव को भी अर्पित की जाती हैं। इसी के अलावा इन्हें खाने से आपके शरीर को एनर्जी भी मिलेगी। ताजा फल जैसे कि केले, सेब, अंगूर और सूखे मेवे जैसे कि बादाम अखरोट आप व्रत में खा सकते हैं। शिवजी को पूजा में बेलपत्र भी अर्पित किया जाता है ऐसे में आप प्रसाद के तौर पर इसको भी खा सकते हैं।

    शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें

    गन्ने का रस

    सावन सोमवार वाले दिन आप शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं की मानें तो शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से धन लाभ के योग बनते हैं और दरिद्रता भी दूर होती है।

    केसर

    यदि आप महादेव की कृपा पाना चाहते हैं तो सावन सोमवार वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा अर्चना करें। इसके साथ ही शिवलिंग पर केसर जरुर चढ़ाएं। धार्मिक मान्यताओं की मानें तो इस उपाय को करने से जातक के मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी और महादेव भी प्रसन्न होंगे। इसके अलावा आपकी सारी मुरादें भी पूरी होंगी।

    बेलपत्र

    यदि आपके जीवन में लंबे समय से दुख और संकट चल रहा है तो इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए सावन सोमवार का दिन शुभ माना जाएगा। इस दिन शिव की पूजा में शिवलिंग पर 21 बेलपत्र चढ़ाएं। इस उपाय को करने से आपको जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा और बिगड़े काम पूरे होंगे।    
  • Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि का नवमी तिथि कल, जानें मां सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त

    Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि का नवमी तिथि कल, जानें मां सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त

    Chaitra Navratri 2025 9th Day Maa Siddhidatri: नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है. इनके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं. मां सिद्धिदात्री देवी सरस्वती की ही स्वरूप है. वैसे तो इनका वाहन सिंह है, लेकिन यह माता लक्ष्मी की तरह कमल के आसन पर विराजमान होती हैं. माता के चार हाथ हैं और इनके दाहिने और नीचे वाले हाथ में चक्र ऊपर वाले हाथ में गदा और बाईं ओर नीचे के हाथ में कमल का फूल और ऊपर वाले हाथ में शंख हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार मां भगवती के इस स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति को अष्टसिद्धियों की प्राप्ति होती है. साथ ही भय और रोगों से मुक्ति मिलती है.
    पंचांग के अनुसार, महानवमी तिथि का शुरुआत हो जाएगी जो कि 6 अप्रैल को शाम 7 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में महानवमी 6 अप्रैल को है. वहीं मां सिद्धिदात्री और कन्या पूजन के लिए शुभ अभिजित मुहूर्त सुबह11बजकर 58 से लेकर दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा.

    मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि | Maa Siddhidatri Puja Vidhi

    नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने के लिए सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें, उसके बाद सबसे पहले कलश की पूजा व समस्त देवी देवताओं का ध्यान करें. मां को मोली, रोली, कुमकुम, पुष्प और चुनरी चढ़ाकर मां की भक्ति भाव से पूजा करें. इसके बाद मां को पूरी, खीर, चने, हलुआ, नारियल का भोग लगाएं. उसके बाद माता के मंत्रों का जाप करें और नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भोजन कराएं.
    मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, हलवा, खीर और नारियल बहुत प्रिय हैं. मान्यता है कि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को इन चीजों का भोग लगाने से वह बहुत प्रसन्न होती है. इसेक अलावा मां सिद्धिदात्री का प्रिय रंग सफेद और बैंगनी है. महानवमी को बैंगनी या सफेद रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ होता है. यह रंग अध्यात्म का प्रतीक माना जाता है.

    मां सिद्धिदात्री मंत्र जाप | Maa Siddhidatri Mantra

    • पूजा मंत्र
    सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि, सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
    • स्वयं सिद्ध बीज मंत्र:
    ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
    • मां सिद्धिदात्री स्तुति
    या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    • मां सिद्धिदात्री ध्यान
    वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्। कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥ स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्। शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्। कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

    मां सिद्धिदात्री की आरती | Maa Siddhidatri Aarti

    जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता। तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि। कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम। तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है। रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो। तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे। तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया। सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली। हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा। मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता। Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.एनकाउंटर इंडिया पुष्टि नहीं करता है.
  • शेयर मार्केट में लगातार दूसरे दिन आई गिरावट

    शेयर मार्केट में लगातार दूसरे दिन आई गिरावट

    नई दिल्लीः अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया तो आज लगातार दूसरे दिन दुनिया भर के स्टॉक मार्केट पर झटका दिख रहा है। भारत में भी बात करें तो घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 135.27 और निफ्टी 50 लगातार दूसरे दिन धड़ाम से गिर गए हैं। टैरिफ के ऐलान को अमेरिका में ‘मुक्ति दिवस’ के तौर पर मनाया गया और उसके झटके से भारतीय स्टॉक मार्केट में चौतरफा बिकवाली दिखने लगी। आज की बात करें तो इस झटके से BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2.02 लाख करोड़ रुपये घट गया है यानी निवेशकों की दौलत मार्केट खुलते ही 2.02 लाख करोड़ रुपये डूब गई है। सेक्टरवाइज बात करें तो फार्मा और बैंकिंग को छोड़ हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव है।

    आज तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव है, जबकि एक दिन पहले इनमें जोरदार खरीदारी हो रही थी। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 158.34 प्वाइंट्स यानी 0.21 फीसदी की गिरावट के साथ 76137.02 और 50 निफ्टी 66.90 प्वाइंट्स यानी 0.29 फीसदी की फिसलन के साथ 23183.20 पर है। एक कारोबारी दिन पहले दिन के आखिरी में बीएसई सेंसेक्स 322.08 प्वाइंट्स यानी 0.42% फिसलकर 76295.36 तो निफ्टी 50 भी 0.35% यानी 82.25 प्वाइंट्स की गिरावट के साथ 23250.10 पर बंद हुआ था।

    एक कारोबारी दिन पहले यानी 3 अप्रैल 2025 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप 4,13,33,265.92 करोड़ रुपये था। आज यानी 4 अप्रैल 2025 को मार्केट खुलते ही यह 4,11,30,452.67 करोड़ रुपये पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी 202,813.25 करोड़ रुपये घट गई है। सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 4 ही ग्रीन जोन में हैं।

    सबसे अधिक तेजी एचडीएफसी बैंक, एमएंडएम और बजाज फाइनेंस में है। वहीं दूसरी तरफ टाटा मोटर्स, इंफोसिस और टाटा स्टील में सबसे तेज गिरावट है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं। बीएसई पर आज 2289 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 1029 शेयर मजबूत दिख रहे हैं तो 1101 में गिरावट का रुझान है और 159 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। इसके अलावा 24 शेयर एक साल के हाई और 23 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 103 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 29 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

  • Donald Trump के नए टैरिफ ऐलान के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट

    Donald Trump के नए टैरिफ ऐलान के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट

    नई दिल्लीः शेयर बाजार में आज यानी 3 अप्रैल को गिरावट देखने को मिल रही है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच गया है। एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी स्टॉक मार्केट तक, हर जगह गिरावट देखने को मिल रही है। इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। वीरवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। इसी गिरावट के साथ सेंसेक्स 76,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

    वहीं निफ्टी में भी करीब 150 अंक की गिरावट है, ये 23,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आज IT, ऑटो और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा गिरावट है। ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई। डाउ जोन्स 2.4% गिरा,नैस्डैक 4.2% टूटा,एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 3.5% की गिरावट,टोक्यो के निक्केई 225 इंडेक्स में 2.9% की गिरावट,कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.9% टूटा और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 1.8% गिरकर बंद हुआ।

    डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके तहत,जापान पर 24%,दक्षिण कोरिया पर 25%,यूरोपियन यूनियन और चीन पर भी नए टैरिफ लगाए गए हैं। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया है। भारतीय कंपनियों को भी इस फैसले से झटका लग सकता है, खासकर वे जो एक्सपोर्ट और टेक सेक्टर से जुड़ी हैं। ट्रंप के इस फैसले से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश प्रभावित होगा।

  • भूलकर भी ना करे नजरअंदाज, आज से ही सुधारे अपनी आदत

    भूलकर भी ना करे नजरअंदाज, आज से ही सुधारे अपनी आदत

    धर्मः अगर आप भी शादी या किसी पार्टी में जा रहे है और आप दोस्तों से उधार मांगे कपड़े पहनकर जा रहे है तो आपके थोड़ा सा सावधान होने की जरूरत है। अक्सर देखा जाता है कि लोगों में कपड़े मांगकर पहनने की आदत होती है। लेकिन आज से ऐसा भूलकर भी न करें। जिससे आपको कई बड़े नुक्सान पहुंच सकता है।

    ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति को भूलकर भी किसी और का पहना हुआ कपड़ा नहीं पहनना चाहिए। इससे आप अपना आभामंडल खुद ही खराब कर लेते हैं और आभा मंडल खराब होने से व्यक्ति को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल, हर व्यक्ति का औरा व एक आभामंडल होता है और वही, उसे एक सुरक्षा प्रदान करता है। वह उसकी ऊर्जा होती है। ऐसे में अगर आप किसी का कपड़ा लेकर पहनते हैं, तो आप उस व्यक्ति का नकारात्मक उर्जा भी ले लेते हैं और आपकी सकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देता है। जिससे आपको टेंशन, डिप्रेशन व चिंता जैसी चीज देखने को मिलेगी।

    इसके अलावा ऐसे व्यक्ति को नजर लगने की भी संभावना काफी अधिक होती है। कुछ व्यक्ति तो ऐसे होते हैं, जिनको कुछ भी कर दो नजर नहीं लगती। दरअसल, यह आभा मंडल का ही कमाल होता है। ऐसे में इसे मजबूत रखना बहुत ही जरूरी होता है। जिनका आभा मंडल कमजोर होगा। अगर वह किसी नकारात्मक चौक चौराहे से गुजर जाए, तो उनको नकारात्मक ऊर्जा या नजर लग जाएगी। ज्योतिष के अनुसार ऐसे में व्यक्ति को यह आदत आज से ही सुधार लेनी चाहिए, भले सामने वाले का कोई चीज कितनी भी सुंदर क्यों न पहन कर आया हो। लेकिन आपकी सकारात्मक ऊर्जा से अच्छा और कुछ नहीं हो सकता।

  • नवरात्रि 2025: जानें चैत्र नवरात्रि की तिथियां और पूजन विधि

    नवरात्रि 2025: जानें चैत्र नवरात्रि की तिथियां और पूजन विधि

    Chaitra Navratri 2025 :  मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। साधना और आराधना का पवित्र पर्व चैत्र नवरात्र शुरू होने में कुछ दिन शेष हैं। मान्यता है कि नवरात्रि का व्रत रखने और माता की अराधना से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। शास्त्रों व पुराणों में आदिशक्ति मां दुर्गा की महिमा का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि माता अपने भक्तों के सभी दुख और कष्टों का निवारण करती है। हिंदू नववर्ष के साथ प्रारंभ होने वाली चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 30 मार्च रविवार से रेवती नक्षत्र और एंद्र योग में प्रारंभ होगी। इसी दिन से भारतीय नववर्ष शुरू होता है। इसलिए चैत्र नवरात्रि को हिंदू धर्म में बहुत महत्‍व दिया गया है। चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा और व्रत किए जाते हैं। वहीं, पांच अप्रैल को महाअष्टमी, छह अप्रैल को महानवमी में पाठ का समापन, हवन और कन्या पूजन होगा। सात अप्रैल को देवी को विदाई दी जाएगी। इस वर्ष रविवार को नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा हाथी पर विराजमान होकर आएंगी, जो समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा और व्रत किए जाते हैं। चैत्र नवरात्रि महापर्व 30 मार्च रविवार से रेवती नक्षत्र और एंद्र योग में शुभारंभ होगा। कलश स्थापना और ध्वजारोहण के साथ हिंदू नववर्ष उत्सव की शुरुआत होगी। बनारसी पंचांग के अनुसार, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक है।
    सामग्री: कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और शृंगार पिटारी चाहिए।
    पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में शैलपुत्री देवी की पूजा, तिलक, व्रत और विद्या प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किए जाएंगे। चैत्र नवरात्रि का समापन 6 अप्रैल को महानवमी के साथ, 7 अप्रैल को विजयादशमी मनाई जाएगी। महाअष्टमी व्रत 5 अप्रैल, महानवमी 6 अप्रैल और विजयादशमी 7 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस वर्ष रविवार को नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा हाथी पर विराजमान होकर आएंगी, जिससे यह वर्ष शुभ फलदायी रहेगा।
  • Laddu Gopal की सेवा में भूल कर भी न करें ये गलतियां

    Laddu Gopal की सेवा में भूल कर भी न करें ये गलतियां

    धर्मः भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। लोग अक्सर घरों में लड्डू गोपाल के बाल रूप की पूजा करते हैं। लड्डू गोपाल की सेवा एक बच्चे की तरह ही की जाती है, यदि आप उन्हें घर में रखते हैं, तो आपको कुछ खास नियमों का पालन करना होगा। समय-समय पर उनकी पूजा और जीवनशैली में बदलाव भी करना चाहिए। इस दौरान कुछ बातों का ध्यान देना बहुत जरूरी है जैसेः इन बातों का रखें ध्यान
    • आजकल देखा जाता है कि लोग लड्डू गोपाल को हर जगह अपने साथ लेकर जाते हैं। फिर चाहें, वो बाजार जा रहे हों या फिर किसी शोर-शराबे वाली पार्टी में, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती है। लड्डू गोपाल को हर जगह लेकर जाने से बचना चाहिए। इससे लड्डू गोपाल को परेशानी हो सकती है।
    • हम जिस तरह बच्चों की नींद का ख्याल रखते हैं, उसी तरह लड्डू गोपाल की नींद का भी ख्याल रखना चाहिए। लड्डू गोपाल को सुबह कब उठाना है, यह मौसम पर निर्भर करता है लेकिन फिर भी इसके लिए कोई तय नियम नहीं है लेकिन आपको इस बात का ख्याल भी रखना चाहिए कि आपने लड्डू गोपाल को कब सुलाया है। उन्हें अगर थोड़ी और नींद की जरूरत है, तो आप उन्हें थोड़ी देर बाद उठा सकते हैं।
    • कई लोग लड्डू गोपाल को स्नान कराने के बाद जो कपड़े पहनाते हैं, उसे रात तक लड्डू गोपाल को पहनाए रखते हैं लेकिन ऐसा करना सबसे बड़ी गलती है। लड्डू गोपाल के कपड़े रात के समय जरूर बदलें। रात के समय लड्डू गोपाल को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं।
    • हमें रात में जैसे प्यास लगती है, उसी तरह लड्डू गोपाल को भी लग सकती है। अगर उन्हें रात में प्यास लगे, तो वे खुद से पानी पी सकते हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि जब आप उन्हें सुलाकर आएं, तो उनके पास पानी का बर्तन जरूर रखें।