Category: Spiritual

  • Akshaye Tritya के मौके पर Vrindavan पहुंचे Virushka, Social Media पर Viral हुआ वीडियो

    Akshaye Tritya के मौके पर Vrindavan पहुंचे Virushka, Social Media पर Viral हुआ वीडियो

    धर्म : आईपीएल के बीच में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा एक बार फिर वृंदावन पहुंच गए हैं। दोनों ने अक्षय तृतीया के खास मौके पर संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए हैं। इस दौरान दोनों भक्ति में लीन दिखे। प्रवचन सुनते ही अनुष्का इमोशनल भी हुई और उनकी आंखें नम दिखी।

    अनुष्का हुई इमोशनल

    अनुष्का शर्मा और विराट कोहली का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अनुष्का और विराट दोनों ही प्रेमानंद महाराज के प्रवचन में बैठे दिखे। कपल के अलावा भी वहां कई दूसरे लोग मौजूद थे। प्रेमानंद महाराज की यदि बात करें तो इसको सुनकर अनुष्का शर्मा भी इमोशनल हो गई है। उनकी आंखों में आंसू दिखे। वहीं विराट भी इस दौरान भक्ति में लीन दिखे। वहां मौजूद दूसरे लोग भी इमोशनल होते दिखे।
     
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    अनुष्का और विराट ने दोनों ही माथे पर तिलक लगाए थे। अनुष्का गले में कंठी पहले भी देखी जा सकती है। सफेद सूट में उनका भरा अंदाज फैंस का दिल जीत रहा है। अनुष्का-विराट अक्सर ही प्रेमानंद महाराज से मिलने आते-जाते रहते हैं। अपने बच्चों को भी उनका आशीर्वाद दिलवा चुके हैं।

    IPL में व्यस्त हैं विराट-कोहली

    कपल अक्सर वृंदावन आते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर विराट कोहली इन दिनों आईपीएल में व्यस्त हैं। अनुष्का शर्मा उनकी सपोर्ट सिस्टम बनकर हर मैच में स्टेडियन में उन्हें चीयर करती दिखती हैं। शादी के सालों बाद भी कपल का प्यार और बॉन्ड काफी स्ट्रांग है। दोनों ने अपनी स्ट्रांग पार्टनरशिप से एक नई मिसाल कायम कर दी है।

    लंदन में रहता है कपल

    परिवार के खातिर अनुष्का ने लाइमलाइट से दूरी बना ली है। दोनों बच्चों और विराट कोहली के साथ वो आजकल लंदन में शिफ्ट हो गई हैं। वो अब किसी बॉलीवुड पार्टी का हिस्सा नहीं बनती। बच्चों की परवरिश पर वो पूरा ध्यान दे रही हैं हालांकि वो भारत में आती-जाती रहती हैं।      
  • इस दिन मनाई जाएगी Varuthini Ekadashi, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

    इस दिन मनाई जाएगी Varuthini Ekadashi, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

    धर्म: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व बताया गया है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर पूजा करने के से जन्मो-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। वैशाख माह की कृष्ण पक्ष में मनाई जाने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। इस साल यह एकादशी 13 अप्रैल 2026 को सुबह 1:16 पर शुरु होगी। अगले दिन 14 अप्रैल 2026 को सुबह 1:08 पर खत्म होगी।

    एकादशी का व्रत होता है शुभ

    वरुथिनी एकादशी पर व्रत रखने के साथ विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की खास कृपा मिलती है हालांकि धार्मिक ग्रंथों में वरुथिनी एकादशी पर कुछ कामों पर करने की मनाही है। इन कामों को करने से जीवन में कई तरह के परेशानियां का सामना कर पड़ सकता है।ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन उपवास रखने से कन्यादान या 10 हजार सालों की कठिन तपस्या के समान आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। एकादशी से 24 घंटे पहले तामसिक भोजन और मांसाहार का सेवन करना वर्जित है। इसके अलावा प्याज, लहसुन, शलजम, बैंगन आदि तामसिक तत्वों का सेवन भी एक दिन पहले ही बंद करना चाहिए। इसके अलावा उपवास की पूरी अवधि के दौरान माांसाहारी भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन भी पूरी तरह से वर्जित माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, वरुथिनी एकादशी के व्रत के दौरान व्यक्ति को अपने मन में नेगेटिव विचार, दूसरों के प्रति जलन, द्वेषपूर्ण भावानाएं या मन में अशुद्धता रखते हैं। भगवान विष्णु अप्रसन्न हो जाते हैं। यदि कोई भक्त निषिद्ध पदार्थों का सेवन करता है। चाहे जानबूझकर या अनजाने में नेगेटिव विचार रखता है। निषिद्ध पदार्थों का सेवन करता है। व्रत के प्रतिकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। यह नेगेटिव प्रभावों को किसी भी उपाय से दूर या खत्म हो सकता है।      
  • इस दिन मनाई जाएगी Hanuman Jayanti, जानें पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

    इस दिन मनाई जाएगी Hanuman Jayanti, जानें पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

    धर्म: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर हर साल हनुमान जयंती मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अंजनी के पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जी को भगवान शंकर का अंश माना जाता है इसलिए वो शिवजी के रुद्रावतार भी कहे जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जयंती पर विधिवत पूजा-अर्चना ने बजरंगबली को खुश किया जा सकता है। इस दिन जो लोग व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करते हैं। उनके सार संकट दूर हो जाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इस बार हनुमान जयंती कब मनाई जाएगी।

    आखिर कब है हनुमान जयंती?

    हिंदू पंचाग के अनुसार, इस साल चैत्र पूर्णिमा 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहने वाली है। उदयातिथि के अनुसार, हनुमान जयंती का त्योहार 2 अप्रैल दिन गुरुवार को रखा जाएगा।

    शुभ मुहूर्त

    इस साल हनुमान जयंती पर सुबह और शाम के समय दो अबूझ मुहूर्त रहने वाले हैं। हिंदू पंचागों के अनुसार, 2 अप्रैल को हनुमान जयंती पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक पूजा के लिए सबसे अच्छे मुहूर्त है। इसके बाद शाम को 6 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 6 मिनट तक दूसरा मुहूर्त रहेगा। अप्रैल को हनुमान जयंती पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके बाद शाम को 6 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 6 मिनट तक पूजा का दूसरा मुहूर्त रहेगा।

    शुभ योग

    इस साल हनुमान जयंती पर ध्रुव योग और हस्त नक्षत्र का संयोग रहने वाला है। ध्रुव योग सूर्योदय से लेकर दोपहर 2 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके बाद व्याघात योग शुरु हो जाएगा। फिर शाम को 5 बजकर 38 मिनट तक हस्त नक्षत्र भई रहने वाला है। इसके बाद चित्रा नक्षत्र लग जाएगा।

    पूजा विधि

    हनुमान जंयती वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद लाल कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद रंग का कपड़ा डालें। उस पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। उनके सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। हनुमान जी को लाल सिंदूर, चंदन और चमेली का तेल अर्पित करें। इस दिन बजरंगबली को चोला भी चढ़ाया जाता है। पंचामृत और लड्डू के प्रसाद का भोग महावीर बजरंगी को लगाना न भूलें। इसके बाद वहीं बैठक उनके मंत्रों का जाप करें। उनकी आरती उतारें।  
  • Vrindavan में धूमधाम के साथ मनाया गया Premanand Maharaj का जन्मदिन, देखें वीडियो

    Vrindavan में धूमधाम के साथ मनाया गया Premanand Maharaj का जन्मदिन, देखें वीडियो

    धर्म: वृंदावन की गलियों में इन दिनों भक्ति का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है क्योंकि हमेशा की तरह इस बार भी 18 और 19 मार्च को राधा रानी के भक्त और राधा केलि कुंज वाले श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। 18 मार्च से शुरु हुए इस उत्सव में भक्ति, संगीत और संतों के समागम ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन प्रेमानंद महाराज का जन्मदिन होता है इसलिए उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे।

    वृंदावन में हुआ संतों का संगम

     
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    प्रेमानंद महाराज के जन्मदिन के मौके पर एक बार फिर संतों का अनूठा संगम देखने को मिला। ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि उत्सव की शुरुआत संतों के स्वागत और पाद-प्रक्षालन के साथ हुई। कई बड़े आश्रमों के पीठाधीश्वर और जटाधारी संत पीले और सफेद वस्त्रों में महाराज के चरणों में नमन करने पहुंचे। संतों ने महाराज को माला पहनाई और तिलक लगाकर उनका सम्मान किया। इस दौरान राधा-राधा के जप से पूरा परिसर गूंज रहा था।

    फूलों की बनाई गई रंगोली

    प्रेमानंद महाराज के जन्मोत्सव का आकर्षण पुष्प वर्षा और फूलों की रंगोली रही है। भक्तों ने महाराज के स्वागत में जमीन पर गुलाब और गेंदे के फूलों की सुंदर कालीन बिछाई गई थी। साथ ही उत्सव के दौरान कलाकारों ने राधा-कृष्ण का रुप रखकर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे महाराज खुद भी भाव-विभोर होकर भक्तों के प्रेम को स्वीकार कर रहे हैं।

    कहां हुआ प्रेमानंद महाराज का जन्म

    प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ब्राह्माण परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनकी दोनों किडनियां खराब होने के बाद भी वो काफी ऊर्जा और भक्ति के साथ भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं। महाराज अपनी उम्र और शरीर का लेकर ज्यादा चर्चा करना पसंद नहीं करते लेकिन उनके जीवन के सफर और सन्यास के सालों को देखें तो उनकी उम्र 57 साल हो गई है।
     
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    अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म 30 मार्च 1969 को हुआ था लेकिन वो हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत के हिसाब से चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जन्मदिन मनाते हैं।

    भक्तों के लिए खास संदेश

    जन्मोत्सव के दौरान महाराज ने अपने भक्तों से किसी भी दिखावे से दूर रहने और सिर्फ नाम जप पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। उन्होंने सिखाया कि भगवान के प्रति समर्पण ही जीवन का असली सुख है। उत्सव में पहुंचे भक्तों ने उनके स्वास्थ्य के लिए खास प्रार्थना की और महाराज ने सभी को आशीर्वाद दिया।
  • चैत्र नवरात्रि पर सिर्फ इतने मिनट का रहेगा शुभ मुहूर्त, जानें पूजा-विधि

    चैत्र नवरात्रि पर सिर्फ इतने मिनट का रहेगा शुभ मुहूर्त, जानें पूजा-विधि

    धर्म: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र बहुत ही पवित्र पर्व माना जाता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व मां दुर्गा को समर्पित होता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है। यह त्योहार हमें अच्छाई की बुरराई पर जीत का संदेश भी देता है। इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के लिए व्रत रखते हैं। पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा का भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पंचागों के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरु होगी और 27 मार्च राम नवमी वाले के दिन खत्म होगी। इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रुप की पूजा की जाती है। हर दिन का अपना खास रंग और भोग भी होता है आपको बता दें कि नवरात्रि में घटस्थानपा का शुभ मुहूर्त क्या होगा।

    शुभ मुहूर्त

    पंचागों के अनुसार, चैत्र महीने की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च यानी की क सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरु होगी और तिथि का समापन 20 मार्च का सुबह 4 बजकर पर खत्म होगा। इसी तिथि के चलते चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 6:52 मिनट से लेकर सुबह 7:43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त जो दोबरहर 12:05 मिनट से लेकर 12:53 मिनट तक रहेगा।

    कलश स्थापना की विधि

    नवरात्रि की पूजा शुरु करने से पहले स्नान करें। इसके बाद मां दुर्गा के स्वागत के लिए घर और पूजा को स्थान को अच्छी तरह से साफ करें। इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। फिर मां दुर्गा के लिए घर और पूजा स्थान को अच्छे से साफ करें। इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या खास तस्वीर स्थापित करें और पास में पानी से भरा कलश रखकर उसके ऊपर नारियल रखें। शुभ मुहूर्त में घट स्थापना या फिर कलश स्थापना करें। फिर मां दुर्गा के आगे देसी घी का दीपक जलाएं। मां को फूलों की माला चढ़ाएं और फल, सूखे मेवे, मीठा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची का भोग लगाए। इसके बाद मां दुर्गा को कम से कम सात श्रृंगार की चीजें अर्पित करें और उनके मंत्रों का जाप करके आह्वान करें। फिर दुग्रा सप्तशाती और दुर्गा चालिसा का पाठ करें। शाम के समय भी रोज रोजाना मां की पूजा करें और भोग लगाएं। भोग अर्पित करने के बाद भक्त सात्विक् भोजन करके अपना व्रत खोल सकते हैं।

    पूजा में इस्तेमाल करें ये सामग्री

    चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना कुछ जरुरी सामग्री के बिना अधूरी मानी जाती है। इसमें लकड़ी की चौकी, मिट्टी का एक बर्तन, मिट्टी का कलश, पवित्र स्थान की मिट्टी, 7 तरह के अनाज, गंगाजल, कलावा या मौली, सुपारी, आम या अशोक के पत्ते, अक्षत, जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा, और पुष्पमाला।  
  • Vrindavan में इस दिन खेली जाएगी फूलों की होली, जानें क्यों खास माना जाता है ये Festival

    Vrindavan में इस दिन खेली जाएगी फूलों की होली, जानें क्यों खास माना जाता है ये Festival

    धर्म: ब्रज क्षेत्र में होली का नाम सुनते ही हर कोई खुश हो जाता है। जब बात बांके बिहारी मंदिर में मनाई जाने वाली फूलों की होली की आती है तो यह किसी भी परम सुख से कम नहीं है। यह पारंपरिक होली सिर्फ रंगों का ही पर्व नहीं है बल्कि भक्त और भगवान के बीच में दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस साल वृंदावन में फूलों की होली 28 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

    इस वजह से खेली जाती है फूलों की होली

    वृंदावन में फूलों की होली खेलने के पीछे खास कारण है जो इसको इतना अनोखा और लोकप्रिय बना देता है। बांके बिहारी मंदिर में दिव्य फूलों की होली 28 जनवरी 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। वृंदावन में फूलों की होली का उत्सव उस द्वापर युग से चलता आ रहा है जब भगवान श्रीकृष्ण राधा रानी और प्रिय गोपियों के साथ फूलों का इस्तेमाल करके होली खेला करते थे। आज भी जब बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे कि मानो खुद भगवान कृष्ण उन पर अपना प्यार बरसा रहे हों।

    श्रीकृष्ण और राधा को अति प्रिय है होली

    फूलों की होली मनाने का खास कारण यह है कि इसको पवित्र और पुण्यकारी माना जाता है। गुलाल या रसायनों की जगह गुलाब, गेंदा और चमेली के फूलों का इस्तेमाल रिश्तों की कोमलता को सुंगधित करने के साथ ताजगी से भर देता है। मान्यताओं के अनुसार, इन फूलों की सुगंध और स्पर्श भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को काफी प्रिय है। ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की फूलों से श्रृंगार करना बहुत ही खास अनुष्ठान है इसी वजह से ब्रज में फूलों से होली खेलने की खास परंपरा रही है। फूलों की होली के पवित्र मौके पर भक्त और गोसई जी ठाकुर श्री बांके बिहारी लाल के साथ मनमोहक होली खेलते हैं और भक्ति में लीन रहते हैं।
  • आज लगेगा साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण, जानें भारत में कितना दिखेगा असर

    आज लगेगा साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण, जानें भारत में कितना दिखेगा असर

    धर्म: 17 फरवरी यानी की आज साल का पहला सूर्यग्रहण लगने वाला है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जो कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला है। इसे कंकण सूर्य ग्रहण भी कहते हैं। इसमें सूर्य की आकृति एक चमकीले रिंग की तरह नजर आया है। खगोलविदों की भाषा में इसको रिंग ऑफ फायर कहते हैं। सूर्य ग्रहण धार्मिक रुप से बहुत जरुरी माना जाता है। ऐसे में आज लगने वाले सूर्य ग्रहण भारत में लगेगा या नहीं इसको लेकर लोग काफी कंफ्यूजन में हैं।

    इतने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण

    भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण 17 फरवरी दिन मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम को 7:57 मिनट तक रहेगा। सूर्य ग्रहण की अवधि करीब 4 घंटे की है। शाम 5 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 11 मिनट के बीच सूर्य ग्रहण अपने पीक पर होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। यह सूर्य ग्रहण दुनिया के कई अलग-अलग हिस्सों में नजर आएगा। जिम्बाब्वे, नामीबिया, मॉरीशस, बोत्सवाना, जाम्बिया, तंजानिया, मोजाम्बिक, चिली और अर्जेंटीना सहित दक्षिणी अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका में रहने वाले लोग ही इस सूर्य ग्रहण को देख पाएंगे।

    भारत में नहीं लगेगा सूतक काल

    सूर्य ग्रहण जब भारत में होता है तो उसका सूतक काल 12 घंटे पहले ही लग जाता है हालांकि 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा ऐसे में इसका सूतक काल भी यहां पर मान्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान कुछ काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए। इस दौरान कोई मांगलिक या शुभ कार्य नहीं करनी चाहिए जैसे शादी, गृह प्रवेश, नामकरण या पूजा-पाठ आदि से परहेज किया जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद रहते हैं ताकि भक्त भगवान की प्रतिमा को हाथ न लगा सकें। इसके अलावा सूतक काल में खाना बनाना या खाना भी वर्जित है। सूतक में गर्भवती महिलाओं, पीड़ित रोगियों, वृद्धजनों और बच्चों को भी घर से बाहर निकलने से मना किया जाता है। इस दौरान धारदार या नुकीली वस्तु इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। इसमें यात्रा या नई चीजों को खरीद करने से भी बचना चाहिए।
  • महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें भगवान शिव की पूजा करने का शुभ मुहूर्त

    महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें भगवान शिव की पूजा करने का शुभ मुहूर्त

    धर्म : फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर हर साल महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह पावन त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का योग भी बन रहा है। ऐसे में कई भक्तों के मन में यह भी सवाल आ रहा है कि इससे शिव पूजा या फिर जलाभिषेक पर कोई असर होगा या नहीं।

    महाशिवरात्रि पर कब तक रहेगा भाद्रा का साया

    पंचाग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम करीबन 5:04 बजे से भद्रा शुरु होगी और इसका समापन 16 फरवरी की सुबह 5:23 मिनट पर होगा। ऐसे में करीबन 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा हालांकि चिंता की कोई बात नहीं है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में बताया जा रहा है। शास्त्रों में ऐसा बोला गया है कि जब भद्रा पाताल में हो तो इसका असर पृथ्वी पर नहीं होता। ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन भक्त किसी आसमंजस के भगवान शिव का अभिषेक और पूजा-पाठ कर सकते हैं। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई आराधना ही सबसे ज्यादा फल देती है।

    जलाभिषेक का मुहूर्त

    इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त हैं। इस दौरान कभी भी भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं। पहला मुहूर्त सुबह 8:24 मिनट से शुरु होगा और 9:48 तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 9:48 से लेकर 11:11 तक रहेगा। तीसरा मुहूर्त सर्वोत्तम होगा जो कि सुबह 11:11 से लेकर 12:35 तक रहेगा। इसमें जल चढ़ाना बहुत शुभ और फलदायी रहेगा। इसके साथ ही जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं वो 6:11 मिनट से 7:47 मिनट के बीच में अभिषेक कर सकते हैं। इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होगी।

    ऐसे करें जलाभिषेक

    महाशिवरात्रि वाले दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ और हल्के रंग के कपड़े पहन लें। फिर मन में भगवान शिव को ज्यादा करें और ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के स्थान पर दीपक जलाएं । यदि संभव तो उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करें। उसके बाद तांबे या मिट्टी के लोटे में साफ जल भर लें। उसमें चाहें तो आप गंगाजल, थोड़ा सा कच्चा दूध या शहद भी डाल सकते हैं। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाएं। इस बात का ध्यान रखें कि जल शिवलिंग के ऊपर से प्रवाहित हो। इधर-उधर न बिखरे। जल चढ़ाने के बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल या आक के फूल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी डंडी आपकी ओर न हो इस बात का भी ध्यान रखें। इसके बाद चंदन का तिलक लगाएं। धूप-दीप दिखाएं। पूजा के दौरान कम से कम 108 बार ऊं नम: शिवाय का जाप करें। यदि समय हो तो शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी करें। अंत में हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना शांत मन से बताएं।          
  • इस दिन लगेगा 2026 का पहला सूर्यग्रहण, जानें भारत में कितना दिखेगा असर?

    इस दिन लगेगा 2026 का पहला सूर्यग्रहण, जानें भारत में कितना दिखेगा असर?

    धर्म : साल का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी को लग रहा है। इसकी शुरुआत भारतीय समय से दोपहर 3:26 बजे होगा। सूर्य ग्रहण का मध्य समय शाम 5:42 बजे होगा और इस ग्रहण का समापन शाम 7:57 बजे होगा। यह ग्रहण कुंभ राशि और घनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला है। यह वलयाकार सूर्यग्रहण होगा जो भारत में दिखाई नहीं देगा।

    क्या भारत में भी लगेगा सूतक काल?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल का खास महत्व मनाया जाता है। सामान्य तौर पर सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरु हो जाता है। इसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है हालांकि 17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में कहीं नहीं दिखेगा इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा। ऐसे में भारत में रहने वाला लोगों को न तो सूतक से जुड़ी धार्मिक पांबदियों का पालन करना होगा और न ही दैनिका कार्यों पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा। यह सूर्य ग्रहण सिर्फ खगौलीय दृष्टि से खास रहेगा वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से भारत में इसका कोई खास प्रभाव नहीं होगा।

    कहां-कहां नजर आएगा सूर्य ग्रहण

    खगोलविदों के अनुसार, यह कंकण सूर्य ग्रहण मुख्य तौर पर दक्षिणी अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ ही क्षेत्रों में दिखेगा। जिन देशों में यह सूर्य ग्रहण दिखेगा उनमें जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, नामीबिया, मॉरीशस, बोत्सवाना, मोजाम्बिक, अर्जेंटीना और चिली शामिल है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग खास उपकरणों की मदद से सूर्य ग्रहण देख पाएंगे।

    इस बात का रखें ध्यान

    ग्रहण के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। आप चाहें तो गुरु मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रहण काल में विष्णु सहस्त्नाम का पाठ भी करें। ग्रहण काल के बाद भी स्नान करें। इसके बाद सूर्य संबंधी वस्तुओं का दान करें। इसके अलावा जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं उन्हें भी इस दौरान ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है।  
  • ‘कुल का भ्रम हटा दो’, भक्त के प्रश्न का Premanand Maharaj ने कुछ ऐसा दिया जवाब

    ‘कुल का भ्रम हटा दो’, भक्त के प्रश्न का Premanand Maharaj ने कुछ ऐसा दिया जवाब

    धर्म: हिंदू परंपरा में भक्ति को कभी भी जाति, कुल या जन्म की सीमाओं में नहीं बांधा गया है पंरतु आज भी समाज में ऐसी कई धारणाएं मौजूद हैं जो इंसान की पहचान उसके कुल और जाति को तय करने लगती हैं। दूसरी ओर भक्ति का मार्ग इन सभी भेदों को तोड़कर सिर्फ समर्पण, आचरण और भाव को महत्व देता है। यही कारण है कि जब कोई व्यक्ति खुद को पूर्ण रुप से ठाकुर जी को अर्पित कर देता है तो उसकी पहचान न किसी कुल से होती है न किसी जाति से बल्कि वह सिर्फ और सिर्फ हरि का ही हो जाता है। इसी से जुड़ी एक समस्या को लेकर भक्त वृंदावन मथुरा के जाने माने संत प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा। भक्त ने महाराज से इस दौरान कहा कि मैं अति तुच्छ अदम और नीच कुल में जन्मा हूं।

    कुल का भ्रम हटाओ

    प्रेमानंद महाराज ने भक्त को बीच में रोकते हुए कहा कि – कुल का तो पहले भ्रम हटाओ। आज के बाद ये शब्द कभी भी मत बोलना क्योंकि हमारे यहां इस शब्द की कोई मान्यता नहीं है। जब हम ठाकुर जी को स्वंय को समर्पित कर चुके हैं तो हमारी पहचान अब किसी सांसारिक कुल या गोत्र से नहीं बल्कि अच्युत प्रभु से होती है। फिर अपने कुल का स्मरण क्यों करें? चाहे कोई चंडाल कुल में जन्मा हो यदि वह सच्चे भाव से भजन करता है और शुद्ध आचरण पर चलता है तो उसके नाम के उच्चारण मात्र से भी हम उसका चरणामृत माथे से लगाएंगे।

    ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं

    प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि – हमारे लिए वही श्रेष्ठ है जो भक्ति के मार्ग पर है। भक्ति ही सर्वोपरि है और जो भक्ति को धारण करता है वही सर्वोपरि होता है। इसमें कुल, जाति या ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है। आज से तिलक धारण किया है तो समझिए कि अब आप अच्युत गोत्री हैं सिर्फ और सिर्फ हरि के है।