Category: Spiritual

  • Anant Chaturdasi पर होती है भगवान विष्णु-गणेश की पूजा, जानें महत्व

    Anant Chaturdasi पर होती है भगवान विष्णु-गणेश की पूजा, जानें महत्व

    धर्म: भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि हर साल अनंत चतुर्दशी के तौर पर मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरुप की पूजा और व्रत का खास महत्व बताया गया है। शास्त्रों में यह बताया गया है कि इस व्रत को यदि कोई विधि के साथ करता है तो व्यक्ति के सारे पाप दूर होते हैं और उसे जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है। इस बार यह त्योहार 6 सितंबर शनिवार को मनाया जाएगा।

    पूजा का महत्व

    अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का बहुत महत्व होता है। यह अनंत सूत्र सूत के धागे को हल्दी में रंंगकर 14 गांठें लगाकर बनाया जाता है। इसको हाथ या गले में धारण करते हैं। हर गांठ पर भगवान विष्णु के स्वरुप अनंत-ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुण्ठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि इस सूत्र को धारण करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

    महाभारत की कथा का महत्व

    महाभारत की कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में हार गए थे और वनवास भोग रहे थे तो उस दौरान श्रीकृष्ण उनसे मिलने के लिए आए। युद्धिष्ठिर ने अपनी पीड़ा श्रीकृष्ण को बताई और उपाय पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने उनको भाद्र महीने की शुक्ल चतुर्दशी का व्रत करके अनंत भगवान की पूजा करने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी बताया कि अनंत भगवान विष्णु का ही स्वरुप होते हैं। यह चतुर्मास में शेषनाग पर अनंत शयन करते हैं। युद्धिष्ठिर ने परिवार के साथ यह व्रत किया और अंत में उन्हें हस्तिनापुर का राजपाट दोबारा से मिला।

    इसलिए खास है अनंत चतुर्दशी

    इस दिन का महत्व और भी खास है क्योंकि इसी दिन गणेश चतुर्थी पर स्थापित की गई गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। भगवान गणेश को पूरे विधि-विधान के साथ विदाई देकर घर में सुख-समृद्धि और विघ्न खत्म करने की प्रार्थना भगवान से करते हैं। इसी वजह से अनंत चतुर्दशी का त्योहार भगवान विष्णु और गणेश दोनों की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है।  
  • Lunar Eclipse 2025: इस दिन लगेगा साल का दूसरा चंद्रग्रहण, जानें क्या करें क्या नहीं?

    Lunar Eclipse 2025: इस दिन लगेगा साल का दूसरा चंद्रग्रहण, जानें क्या करें क्या नहीं?

    धर्म: ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से चंद्रग्रहण लगना अशुभ माना जाता है इसलिए लोगों को इस दौरान विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। इस बार 7 सितंबर को साल का दूसरा चंद्रग्रहण लगने वाला है। यह चंद्रग्रहण भारत के लोगों को भी दिखेगा। इसकी शुरुआत रात में 09:58 मिनट पर होगी और इसका समापन रात 1:26 मिनट पर होगा। स्थानीय ग्रहण की अवधि 3 घंटे 28 मिनट्स 02 सैकेंड्स की होगी हालांकि यह ग्रहण भारत में भी दिखेगा इसलिए इसका सूतक भी यहां पर मान्य होगा।

    इतने समय तक रहेगा सूतक काल

    चंद्र ग्रहण का सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12:19 से शुरु होगा और इसकी समाप्ति 8 सितंबर की देर रात 1:26 पर होगी। बच्चों, बूढ़ों और अस्वस्थ लोगों के लिए सूतक शाम 6:36 पर शुरु होगा और इसकी समाप्ति ग्रहण खत्म होने के बाद होगी।

    क्या होता है सूतक?

    सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण से पहले एक निश्चित समय अवधि को सूतक के तौर पर जाना जाता है। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरु होगा। वहीं सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले ही लग जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के समय पृथ्वी पर वातावरण दूषित हो जाता है परंतु सूतक के अशुभ दोषों के सुरक्षित रहने हेतु खास सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है।

    सूतक में क्या नहीं करना चाहिए?

    . पूजा, हवन, यज्ञ, मूर्ति स्थापना, शादी, गृह प्रवेश जैसा कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। . सूतक काल में खाना बनाना या फिर खाना नहीं चाहिए। . बाल कटवाना, नाखून काटना, दाढ़ी बनाना या कोई भी शारीरिक शुद्धिकरण के काम भी इस दौरान नहीं करने चाहिए। . मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन भी इस दौरान नहीं करना चाहिए। . यदि जरुरी नहीं है तो यात्रा न करें खासतौर पर यदि आप किसी लंबी यात्रा पर जा रहे हैं तो न जाएं। . कोई नया व्यवसाय, परियोजना या निवेश शुरु न करें। . गर्भवती महिलाओं को इस दौरान सूई, चाकू या फिर किसी भी तरह की नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    सूतक में क्या करें?

    . सूतक के दौरान भगवान के नाम का जाप करें जैसे कि ओम नम: भगवते वासुदेवाय नम: और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। . ग्रहण खत्म होने के बाद नहाएं और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। . ग्रहण के बुरे प्रभाव से खुद को बचाने के लिए गरीबों को दान जरुर करें।
  • Radha Ashtami: 28 नामों से जानी जाती हैं श्रीजी, इस वजह से श्रीकृष्ण से पहले लिया जाता है राधा नाम

    Radha Ashtami: 28 नामों से जानी जाती हैं श्रीजी, इस वजह से श्रीकृष्ण से पहले लिया जाता है राधा नाम

    धर्म: पूरे भारत में आज राधा अष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन वृषभानु की लाडली राधा रानी का जन्म हुआ था। राधा अष्टमी कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि बिना राधा जी की पूजा के श्रीकृष्ण कोई भी प्रार्थना स्वीकार नहीं करते हैं। वैसे तो राधा रानी के कई नाम है परंतु 28 नाम दिव्य हैं और बेहद खास है। मान्यताओं के अनुसार, यदि भक्त पूरी भक्ति, निष्ठा और समर्पण के साथ राधा का नाम लेते हैं तो उन पर भगवान श्रीकृष्ण की भी कृपा बरसती है।

    ये है राधा रानी के 28 दिव्य नाम

    राधा, रासेश्वरी, रम्या, कृष्ण मत्राधिदेवता, सर्वाद्या, सर्ववन्दया, वृंदावन विहारिणी, वृंदा राधा, रमा, अशेष गोपी मण्डल पूजिता, सत्या, सत्यपरा, सत्यभामा, श्रीकृष्ण वल्लभा, वृष भानु सुता, गोपी, मूल प्रकृति, ईश्वरी, गान्धर्वा, राधिका, रम्या, रुक्मिणी, परात्परतरा, पूर्णा, पूर्णचन्द्रविमानना, भुक्ति-मुक्तिप्रदा, भवव्याधि-विनाशिनी।

    इसलिए श्रीकृष्ण से पहले लिया जाता है राधा का नाम

    राधा जी श्रीकृष्ण की आत्मा और श्रीकृष्ण की शक्ति मानी जाती है। श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए भक्तों को राधा जाप करने के लिए भी कहा जाता है पर बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि आखिर क्यों कान्हा से पहले राधा जी का नाम लिया जाता है। व्यास मुनि के पुत्र शुकदेव जी तोता बनकर राधा के महल में रहते थे। शुकदेव जी हमेशा राधा-राधा रटा करते थे एक दिन राधा ने शुकदेव जी से कहा कि अब से तुम सिर्फ कृष्ण-कृष्ण नाम जपा करो। शुकदेव जी ऐसा ही करने लगे। उनको देखकर दूसरे तोते भी कृष्ण-कृष्ण कहने लगे। ऐसा ही पूरा नगर कृष्णमय हो गया कोई राधा नाम ही नहीं लेता था। एक दिन श्रीकृष्ण उदास भाव से राधा जी से मिलने जा रहे थे तो इस दौरान नारद जी ने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा। वो कहने लगे अब जगत में कोई राधा नहीं कहता जबकि मुझे राधा नाम सुनकर प्रसन्नता मिलती है। कृष्ण की ऐसी बातें सुनकर राधा रानी रोने लगी। राधा ने महल में लौटकर शुकदेव जी से कहा कि अब से आप राधा-राधा ही जपा करें। तभी से कान्हा से पहले राधा (राधा-कृष्ण) का नाम लिया जाता है।    
  • Radha Ashtami: राधा के बिना अधूरे हैं श्रीकृष्ण, जानें श्रीजी के जन्म की कहानी

    Radha Ashtami: राधा के बिना अधूरे हैं श्रीकृष्ण, जानें श्रीजी के जन्म की कहानी

    धर्म: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्री राधा रानी को समर्पित होती है। इस दिन राधा अष्टमी मनाई जाती है। इस बार राधा अष्टमी 31 अगस्त रविवार को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधा रानी का अवतार हुआ था इसलिए यह दिन राधा अष्टमी के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन श्री राधा रानी की पूजा होती है और उनको उनकी मनपसंदीदा चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यताओं को अनुसार, ऐसा करने से राधा रानी की कृपा मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होती है। आज आपको बताते हैं कि राधा रानी कौन है और किस वजह से यह दिन मनाया जाता है।

    श्रीकृष्ण के लिए हुआ था राधा रानी का जन्म

    जहां कृष्ण वहां राधा, राधा बिना श्याम आधा ये दो नहीं बल्कि एक नाम है और एक ही शब्द है। यह एक दूसरे के लिए बने हुए हैं। राधा एक ऐसा नाम है जिसमें श्रीकृष्ण समाए हुए हैं। राधा कृष्ण की प्रेरणा और आराध्य शक्ति हैं उनमें भक्ति का संपूर्ण भोग समाया है। आज के समय में श्री कृष्ण और राधा रानी अपने अटूट निस्वार्थ प्रेम के कारण सच्चे प्यार का प्रतीक माने जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शंकर और मां पार्वती के मन में विपरीत रति की इच्छा हुई थी तो भगवान शंकर भी राधा रानी बने थे और मां पार्वती श्री कृष्ण बन गई थी। भगवान शंकर ने राधा रानी के रुप में रास रचाकर एक खास उल्लास दिया था जो राधा अष्टमी के महत्व को और भी खास बनाता है।

    11 महीनें तक नहीं खोली थी राधा रानी ने आंखें

    ऐसा कहा जाता है कि राधा रानी धरती पर श्रीकृष्ण की इच्छा से ही आई थी। अपने जन्म के 11 महीने तक राधा रानी ने आंखे नहीं खोली थी और कुछ दिन के बाद वह बरसाने में चली गई थी। बरसाना में आज भी राधा रानी का महल मौजूद है। ऐसा कहा जाता है कि राधा रानी वृंदावन धाम की अर्धश्वेरी हैं। वृंदावन से 43 किमी दूर बरसाना के ब्रह्माचल पर्वत पर राधा रानी लाडली सरकार के स्वरुप में विराजमान है। राधा रानी का दरबार श्रीजी दरबार के रुप में प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि राधा रानी अपने भक्तों को धन और ऐश्वर्य का भी वरदान देती हैं।
  • Hartalika Teej 2025: इस विधि से करें मां पार्वती-भगवान शिव की पूजा, सारी मनोकामनाएं होगी पूरी

    Hartalika Teej 2025: इस विधि से करें मां पार्वती-भगवान शिव की पूजा, सारी मनोकामनाएं होगी पूरी

    धर्म: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का खास महत्व बताया गया है। इस दिन कुंवारी कन्याएं और सुहागिन लड़कियां व्रत करके मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से शादी में आ रही बाधा से राहत मिलती है और जल्द विवाह के योग बनेंगे। सुहागिन महिलाओं के जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा में खास चीजों को शामिल न करने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। ऐसे में व्रत से पहले ही हरतालिका तीज की पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री इकट्ठी कर लें। घी, दीपक, अगरबत्ती और धूपबत्ती, भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा, कपूर पान और बाती, साबुत नारियल, चंदन, सुपारी, भोग के लिए केले, फूल, बेल के पत्ते, कलश, धतूरा, आम के पत्ते, केले के पत्ते, एक चौकी, शमी के पत्ते, 16 श्रृंगार की वस्तुएं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 25 अगस्त दोपहर 12:34 पर होगी और इसका समापन दोपहर 1:54 मिनट पर होगी ऐसे में हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा। ऐसे में पूजा करने के लिए सुबह 5:56 मिनट से लेकर सुबह 8:31 तक रहेगा।

    आर्थिक तंगी हो जाएगी दूर

    यदि आप किसी तरह की आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं तो हरतालिका तीज वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करें। इस दौरान सच्चे मन के साथ आक के 5 फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं और शिव चालिसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से आर्थिक तंगी दूर होगी और धन लाभ के योग बनेंगे।

    बनेंगे सभी बिगड़े काम

    यदि आप चाहते हैं कि आपको हर काम में सफलता मिले तो हरतालिका तीज वाले दिन दूध, दही और शहद समेत सभी चीजों के साथ शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से सभी रुके काम पूरे होंगे और भगवान शिव की कृपा मिलेगी।

    दान करें ये चीजें

    इस दिन पूजा करने के बाद गरीब लोगों को अन्न-धन्न समेत आदि चीजों का दान करें। इससे आपके जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहेगी। इसके अलावा धन लाभ के भी योग बनेंगे।
  • Janmashtami 2025: सिर्फ इतने मिनट तक रहेगा पूजा का मुहूर्त, ऐसे करें श्रीकृष्ण को प्रसन्न

    Janmashtami 2025: सिर्फ इतने मिनट तक रहेगा पूजा का मुहूर्त, ऐसे करें श्रीकृष्ण को प्रसन्न

    धर्म: कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर बहुत ही धूमधाम और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। हर साल यह त्योहार भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि वाले दिन मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन रोहिणी नक्षत्र में भगवान विष्णु के आठंवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

    इस बार अष्टमी तिथि की शुरुआत 15 अगस्त की रात 11:49 पर होगी और इसका समापन 16 अगस्त को रात में 09:34 पर होगा। ऐसे में द्रिक पंचाग के अनुसार, इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। यह भगवान श्रीकृष्ण का 525वां जन्मोत्सव होगा।

    कृष्ण जन्माष्टमी पर इस साल पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात 12:04 से 12:47 बजे तक रहेगा। ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त कुल 43 मिनट के लिए रहने वाला है। चन्द्रोदय 16 अगस्त को देर रात 11:32 बजे वहीं रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत 17 अगस्त 2025 को सुबह 4:38 होगा और इसका समापन 18 अगस्त 2025 की सुबह 3:17 बजे होगा।

    पंचाग के अनुसार, इस साल व्रत का पारण 17 अगस्त को सुबह 5:51 पर किया जाएगा। जन्माष्टमी पर भक्त निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं। इस दिन पूजा में तुलसी, माखन-मिश्री, धूप-दीप और पंचामृत का खास महत्व होता है।

     

  • Sawan Purnima: इस दिन करें इन चीजों का दान, मिलेगी श्री हरि और भगवान शिव की कृपा

    Sawan Purnima: इस दिन करें इन चीजों का दान, मिलेगी श्री हरि और भगवान शिव की कृपा

    धर्म: हिंदू धर्म में सावन महीने का बहुत ही खास महत्व बताया गया है। इस महीने में भगवान शिव की खास तौर पर पूजा अर्चना की जाती है। इसके साथ ही श्रावण महीने की पूर्णिमा भी बहुत ही खास मानी जाती है। इस बार सावन महीने की पूर्णिमा 9 अगस्त शनिवार वाले दिन मनाई जाएगी। इसके साथ ही श्रावण पूर्णिमा तिथि पर हर साल राखी का त्यौहार मनाया जाता है।

    इसलिए भी खास है सावन पूर्णिमा

    सावन पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व बताया है क्योंकि यह श्रावण महीने का अंतिम दिन होता है और बहुत ही पवित्र माना जाता है। यह दिन मुख्य तौर पर भगवान शिव, मां पार्वती और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इसी दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक राखी का त्योहार मनाया जाता है जिससे इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इस दिन दान-पुण्य, गंगा स्नान और व्रत रखने से सभी पापों से भी मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    दान करना होता है बेहद शुभ

    इस दिन दान करने का भी खास महत्व बताया गया है। माना जाता है कि सावन पूर्णिमा के दिन किए गए दान से सुख-समृद्धि और श्री हरि भोलेनाथ का आशीर्वाद भी मिलता है। सावन पूर्णिमा वाले दिन दान करते समय जब भी आप दान करें तो इस बात का ध्यान रखें कि अपना मन साफ करें। इससे दान का फल आपको दोगुना मिलेगा। आपको बताते हैं कि इस खास दिन पर किन चीजों का दान करना चाहिए।

    बेलपत्र

    सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र चढ़ाने का खास महत्व बताया गया है। ऐसे में इस दिन बेलपत्र का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

    दाल

    इसके अलावा दाल का दान करना भी जरुरी है। इस दिन गरीबों का दाल दान करने से परिवार में खुशहाली आती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    गेहूं या चावल

    गेंहू या चावल का दान भी बहुत ही शुभ माना जाता है। ये खाने की मुख्य वस्तु होती है और इनको दान करने से गरीबों की मदद होती है और कई तरह के कष्ट भी दूर होते हैं।  
  • Rakhi 2025: 4 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा है ऐसा संयोग, जानें शुभ मुहूर्त

    Rakhi 2025: 4 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा है ऐसा संयोग, जानें शुभ मुहूर्त

    धर्म: इस साल राखी का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। हिंदू पंचागों के मुताबिक, हर साल रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि वाले दिन मनाया जाता है। पूरे देश में राखी का त्योहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। राखी भाई-बहनों के बीच प्यार और सुरक्षा का त्योहार है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, भद्रा के साए में कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। तो चलिए आपको बताते हैं कि इस बार राखी पर भद्रा का साया कब तक रहेगा और शुभ मुहूर्त क्या है।

    पूरे दिन बांध सकते हैं राखी 

    इस साल सावन पूर्णिमा की तिथि 8 अगस्त को दोपहर 2:12 पर शुरु होगी और 9 अगस्त में दोपहर 1:24 पर खत्म होगी। उदयातिथि के मुताबिक, राखी का त्योहार इस बार 9 अगस्त को ही मनाया जाएगा। हिंदू पंचाग के अनुसार, इस बार 9 अगस्त को पूरे भारत में राखी बांधी जाएगी। इस बार खास बात यह है कि राखी पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। भद्रा 9 अगस्त को सुबह 1:52 पर ही खत्म हो जाएगी। इसके बाद 9 अगस्त को सुबह राखी बांधने का शुभ मुहूर्त शुरु हो जाएगा। खास बात यह है कि 4 साल बाद ऐसा योग बन रहा है जब राखी पर भद्रा नहीं लगेगी।

    इस समय बांधे राखी 

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 9 अगस्त को राखी बांधने का मुहूर्त सुबह 5:47 से शुरु होगा और दोपहर 1:24 पर खत्म हो जाएगा। ऐसे में राखी बांधने के लिए पूरे 7 घंटे 37 मिनट का समय मिल पाएगा। इसके अलावा यदि आप चाहें तो इस दिन बनने जा रहे शुभ योगों में भी राखी बांध सकते हैं जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र और धनिष्ठा नक्षत्र खास है। 9 अगस्त का दिन ग्रह-नक्षत्र के अनुसार, भी खास है क्योंकि इस दिन बुध कर्क राशि में उदय होने वाले हैं।
    ऐसे करें पूजा
     
    राखी की शुरुआत बहन भाई को सामने बिठाकर उसकी कलाई पर राखी बांधने से होती। सबसे पहले बहनें भाई के माथे पर रोली के साथ तिलक करती हैं। इसके बाद भाई की खुशहाली के लिए थाली में दीपक जलाकर उसकी आरती उतारती है। इसके बाद बहन मिठाई खिलाकर भगवान से प्रार्थना करती है कि उसका भाई हमेशा स्वस्थ, खुशहाल और सफल बना रहे। भाई भी बहन की खुशी के लिए उनको तोहफे देते हैं। यह तोहफा बड़ा या छोटा हो सकता है परंतु इसका अर्थ बहन के लिए भाई के प्यार और सम्मान होता है। राखी के दिन परिवार में बहुत खुशी और उल्लास होता है। घर  में बच्चे, बूढ़े सभी इस त्योहार को धूमधाम के साथ मनाते हैं।
  • Sawan 2025: सावन का आखिरी सोमवार कल, इस तरह करें भगवान शिव को प्रसन्न

    Sawan 2025: सावन का आखिरी सोमवार कल, इस तरह करें भगवान शिव को प्रसन्न

    धर्म: भगवान शिव का प्रिय सावन अब बस खत्म होने वाला है। अभी तक सावन के तीन सोमवार हो चुके हैं और कल आखिरी सोमवार है। ऐसे में यह सावन का आखिरी सोमवार है तो इसका महत्व और भी खास है। मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन भगवान शिव पर सच्चे भाव के साथ लोटा जल चढ़ाया जाए तो वह शीघ्र प्रसन्न होंगे। तो चलिए आपको बताते हैं कि कल आप शिव को कैसे प्रसन्न कर सकते हैं।

    ब्रह्म मुहूर्त में करें पूजा

    कल सावन का आखिरी सोमवार है। ऐसे में इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ ब्रह्म और इंद्र योग का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में भक्त सारा दिन कभी भी पूजा कर सकते हैं परंतु ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। पंचाग के अनुसार, सावन के आखिरी सोमवार के दिन जलाभिषेक करने के ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 से लेकर 5:02 तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 2:42 मिनट से शुरु होगा और दोपहर 3:36 पर खत्म होगा। इस दिन अमृत काल शाम 5:47 से लेकर 7:34 मिनट तक होगा।

    ऐसे करें पूजा

    सावन के आखिरी सोमवार वाले दिन सुबह जल्दी उठ जाए। फिर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा रखें। इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल और पंचामृत के साथ अभिषेक करें। बेलपत्र, चंदन, अक्षत, धतूरा, फल और मिठाई शिवलिंग पर चढ़ाएं। इसके साथ ही घी का दीपक जलाएं और शिव चालिसा का पाठ करें। सावन सोमवार की व्रत कथा पढ़ें और भगवान शिव की आरती करें। यदि पूजा में कोई भूल हो जाए तो शिव भगवान से क्षमा मांग लें।

    रुद्राभिषेक करें

    सावन के आखिरी सोमवार वाले दिन रुद्राभिषेक करें। इससे नेगेटिव एनर्जी दूर होगी और ग्रह दोष शांत होगे। इसके साथ ही सोमवार को 108 बेलपत्र लें। फिर उन पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं और उन्हें शिवलिंग पर अर्पित कर दें। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से जीवन में आ रही सारी दिक्कतें दूर होगी।
  • क्या सच में 2 August को लग रहा है साल का बड़ा Solar Eclipse? जानें पूरी सच्चाई

    क्या सच में 2 August को लग रहा है साल का बड़ा Solar Eclipse? जानें पूरी सच्चाई

    धर्म: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को एक जरुरी खगोलीय घटना माना जाता है फिर चाहे वो चंद्र ग्रहण हो या फिर सूर्य ग्रहण। पूरी दुनिया के ज्योतिष विद्वानों और वैज्ञानिकों की नजर ग्रहण पर होती है क्योंकि इसका हमारे जीवन में गहरा असर होता है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सूर्य ग्रहण को लेकर काफी खबरें वायरल हो रही हैं। इसमें कहा जा रहा है कि 2 अगस्त 2025 को 100 सालों में पहली बार लंबा सूर्य ग्रहण लगने वाला है। तो चलिए जानते हैं कि इस बात में कितनी सच्चाई है?

    क्या सच में लगेगा सूर्य ग्रहण?

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों के अनुसार, 2 अगस्त को सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगेगा। इस दौरान 2 मिनट के लिए सूर्य बिल्कुल गायब हो जाएगा और दुनिया में अंधेरा फैल जाएगा वहीं इस बात में कोई भी सच्चाई नहीं है। 2 अगस्त को कोई सूर्य ग्रहण नहीं लगेगा। 2 अगस्त को सूर्य ग्रहण की खबर में कोई भी सच्चाई नहीं है और यह खबर पूरी तरह से झूठी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) और नासा की ऑफिशियल कैलेंडर के अनुसार, 2 अगस्त 2025 को किसी भी तरह का आंशिक या पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं लगेगा।

    इस दिन लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण

    साल 2025 में दो सूर्य ग्रहण लगने हैं। पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को लग चुका है वहीं दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को लगेगा जो कि आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। फेक खबरों के अनुसार, 2 अगस्त 2025 को सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह पूरी तरह से गलत खबर है। सच्चाई तो यह है कि सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण इस साल नहीं बल्कि 2 अगस्त 2027 में लगेगा। इस दौरान 6 मिनट के लिए सूरज गायब हो जाएगा और धरती पर पूरा अंधकार छा जाएगा।