Category: Tech
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NASA के Artemis II ने रचा इतिहास, 10 दिन की यात्रा करके धरती पर लौटे अंतरिक्ष यात्री, देखें वीडियो
टेक्नोलॉजी: नासा के मून मिशन आर्टेमिस-11 के अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को प्रशांत महासागर में चंद्रमा से वापिस लौटे और इस तरह आधी सदी से भी ज्यादा समय में मानवता की पहली चंद्र यात्रा का समापन हुआ। अंतरिक्षयान ओरियोन 10 दिन के सफल मिशन के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरा। आर्टेमिस 2 कैलिफोर्निया के प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास उतरने का नेटफ्लिक्स और नासा के यूट्यूब चैनल पर प्रसारण किया गया है। -

Whatsapp पर Two Step Verification अकाउंट को बनाएगा Secure, इस तरह करें Activate
टेक्नोलॉजी: हाल ही में खबर आई थी कि इटली में Fake Whatsapp App के जरिए लोगों के फोन में स्पाईवेयर इंस्टॉल किया जा रहा है। खुद व्हाट्सऐप ने भी इसे लेकर अलर्ट जारी किया था। इस घटना ने व्हाट्सऐप अकाउंट सिक्योरिटी को लेकर चिंता पैदा कर दी है। व्हाट्सऐप ने इस फर्जी ऐप के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही है। साथ ही एक जरुरी फीचर को भी हाईलाइट किया है। कंपनी का कहना है कि Whatsapp Two-Step Verification आपके अकाउंट को और सिक्योर बनाता है।आखिर क्या होता है व्हाट्सऐप टू स्टेप वेरिफिकेशन?
यदि आप व्हाट्सऐप पर Two-Step-Verification एक्टिव कर लेते हैं तो जब भी आप नए डिवाइस पर अपना नंबर रजिस्टर करेंगे तो यह आपसे एसएमएस ओटीपी के साथ-साथ 6 डिजिट का पिन नंबर भी मांगेगी। इसका अर्थ है कि यदि कोई आपके ओटीपी को एक्सेस कर भी लेते हैं तो पिन नंबर के बिना आपके अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पाएंगे। ऐसे में यदि कोई सिम स्वैप या डिवाइस चोरी के बाद आपके नंबर से व्हाट्सऐप पर रजिस्टर करना चाहेगा तो उसे कामयाबी नहीं मिलेगी। हालिया स्पाईवेयर वाली घटना जैसे मामलों में सिक्योरिटी की यह एक्स्ट्रा लेयर काफी फायदेमंद हो सकती है।ऐसे एक्टिवेट करें
. व्हाट्सऐप पर टू-स्पेट वेरिफिकेशन ऑन करने के लिए सबसे पहले ऐप ओपन करे। . अब सेटिंग आइकन पर टैप कर अकाउंट में जाएं। . अकाउंट में टू-स्टैप वेरिफिकेशन का ऑप्शन दिखेगा। इसे टर्न ऑन कर लें। . इसके लिए आपसे 6 डिजिट का पिन नंबर मांगा जाएगा। पिन एंटर करके कंफर्म कर दें। . आप चाहें तो इसमें ईमेल-एड्रेस भी एंटर कर सकते हैं। यदि आप ईमेल एंटर करते हैं तो इसे वेरिफाई किया जाएगा। . आखिर में डन कर सेव कर दें। यदि आप व्हाट्सऐप पर Two-Step Verification एक्टिव कर लेते हैं जब भी आप नए डिवाइस पर अपना नंबर रजिस्टर करेंगे तो यह आपसे यह आपसे SMS OTP के साथ-साथ 6 डिजिट का पिन नंबर भी मांगेगी। इसका अर्थ है कि यदि कोई आपके ओटीपी को एक्सेस कर भी लेते हैं तो पिन नंबर के बिना आपके अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पाएंगे। ऐसे में यदि कोई सिम स्वैप या डिवाइस चोरी के बाद आपके नंबर से व्हाट्स ऐप पर रजिस्टर करना चाहेगा तो उसे कामयाबी नहीं मिलेगी। हालिया स्पाईवेयर वाली घटना जैसी मामलों में सिक्योरिटी की यह एक्स्ट्रा लेयर काफी फायदेमंद हो सकती है। -

AI के कारण बदलती नौकरी की दुनिया संभाल पाएंगे Gen-Z, Elon Musk ने बताया सच
नई दिल्ली: साल 2026 में नौकरी की दुनिया में कदम रखने का अर्थ है कि ऐसे माहौल में चले जाना जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब कोई खास टूल नहीं रहा बल्कि काम का बुनियादी हिस्सा बन गया है। ड्राफ्टिंग, डेटा एनालिसिस से लेकर कस्टमर एंग्जेमेंट तक एआई सिस्टम लगभग हर काम में शामिल हैं। इससे सिर्फ काम करने का तरीका नहीं बदला बल्कि करियर की शुरुआत का ढांचा भी बदल गया है। अब सवाल यहां ये नहीं है कि लगातार ऑटोमेशन के दौर में क्या रणनीति अपनाई जा सकती है।धीरे-धीरे नहीं बदल रही चीजें
सर्वे के अनुसार, दुनिया भर के ज्यादातर कर्मचारियों को यही लगता है कि एआई उनके रोजमर्रा के काम को प्रभावित करेगा। एआई से जुड़ी स्किल्स वाली नौकरियों की भी मांग तेजी से बढ़ रही है वहीं कम जटिल और बार-बार दोहराए जाने वाले काम तेजी से मशीनों को दिए जा रहे हैं। पीढ़ियों के बीच फर्क भी साफ दिखता है। Gen-z की नौकरी की सुरक्षा पर एआई के असर की सबसे ज्यादा चिंता है वहीं उम्रदराज कर्मचारियों को खुद को ढाल लेने पर ज्यादा भरोसा है। इसका एक कारण है समय। युवा ऐसे सिस्टम में एंट्री ले रहे हैं जो पहले से ही ऑटोमेशन के हिसाब से बदल गया है वहीं पीढ़ी ने बदलाव के साथ खुद को ढाल लिया है।एलन मस्क ने दी युवाओं को सलाह
एलन मस्क ने युवाओं को कहा है कि मैं यही कहूंगा कि आशावादी रहो भविष्य को लेकर पॉजिटिव रहना अच्छा है। आशावादी होकर गलत होना निराशावादी होकर सही होने से बेहतर है आपकी जिंदगी की गुणवत्ता बेहतर होगी। मैं लोगों से कहूंगा कि भविष्य को लेकर एक्साइटेड रहे मैं खुद भविष्य को लेकर उत्साहित हूं। मुझे भरोसा है कि भविष्य उबाऊ नहीं होगा ज्यादा किताबें पढ़ो अलग-अलग चीजें आजमाओ जिंदगी का मजा लो लेकिन काम करना भी जिंदगी का हिस्सा है। यह सलाह ज्यादा दार्शनिक है व्यावहारिक कम लेकिन आज के युवाओं के लिए आशावाद पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करेगा।युवाओं के लिए कम हो रहे एंट्री प्वाइंट
एआई अपनाने का एक कम दिखाई देने वाला असर शुरुआती करियर पर भी हुआ है। पहले जो काम जूनियर कर्मचारियों को सीखने का मौका देते थे जैसे बेसिक रिपोर्टिंग, कस्टमर हैंडलिंग, रुटीन एनालिसिस, अब वे मशीनें करने लगी हैं। इससे पढ़ाईसे नौकरी तक का सफर ज्यादा अनिश्चित हो गया है। मौके मौजूद हैं लेकिन कम हैं ज्यादा स्किल की मांग करते हैं और सीखने के लिए पहले जैसे ढील नहीं देते।आशावाद अब कोई ऑप्शन नहीं
एआई को लेकर चिंता सिर्फ नौकरी जाने की नहीं बल्कि बदलाव की रफ्तार की है। नौकरी की जरुरतें इतनी तेजी से बदलती जा रही हैं कि ट्रेनिंग सिस्टम पीछे छूट रहा है। अब एआई की समझ को सिखाया नहीं जाता मान लिया जाता है कि आपको आती है। यानी खुद को बदलने की जिम्मेदारी व्यक्ति पर आ गई है। 2026 में आशावादी रहने का अर्थ है कि आप नई स्किल्स उतनी ही तेजी से सीख पाएंगे जितनी तेजी से काम बदल रहे हैं। यह भी मानना पड़ेगा कि करियर अब सीधी रेखा में नहीं चलेगा और पारंपरिक पड़ाव कम होंगे। चिंता ज्यादा है लेकिन दूसरी ओर Gen-Z एआई टूल्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। कई युवा पहले से ड्राफ्टिंग, रिसर्च, कोडिंग और रोजमर्रा के काम में जनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये परिचय जोखिम खत्म नहीं करता है लेकिन अनजान होने का डर जरुर कम करता है। सर्वे के डेटा से यह भी पता चलता है कि चिंता के बाद भी लोग पीछे नहीं हट रहे हैं बल्कि उन्हें समझ है कि तकनीकी बदलाव अस्थायी नहीं संरचनात्मक हैं। -

Meta के नए Ray-Ban Glasses बने दुनिया के लिए खतरा, Experts ने किया अलर्ट
टेक्नोलॉजी: एआई और स्मार्ट ग्लासेज को लेकर दुनिया में तेजी से बदलाव होते जा रहे हैं। Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लास को नेक्स्ट जेनेरेशन टेक्नोलॉजी बताया जा रहा है परंतु अब इन्हीं ग्लासेज को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसने प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, Meta Rayban स्मार्ट ग्लासेज से रिकॉर्ड होने वाली कुछ वीडियो क्लिप्स इंसान बैठकर भी देख रहे हैं यानी की जो लोग स्मार्ट ग्लास पहन रहे हैं वो खुद भी निगरानी का हिस्सा बन सकते हैं। 27 फरवरी को स्वीडन की अखबर में Svenska Dagbladet की एक इनवेस्टिगेशन में Meta Ray Ban पार्टनरशिप और उसके AI ग्लासेज के काम करने के तरीके को भी देखा गया है। जांच में सामने आया है कि इन ग्लासेज से रिकॉर्ड हुए फुटेज कई लोगों तक पहुंचती है जिनमें एआई को ट्रेन करने वाले ह्यूमन ट्रेनर भी शामिल हैं।सबकुछ हुआ कैमरे में रिकॉर्ड
केन्या के नैरोबी में स्थित एक कंपनी से जुड़े कुछ अनोनिमस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि उन्होंने ऐसे वीडियो देख हैं जिसमें लोग अपनी सबसे पर्सनल और संवेदनशील स्थितियों में दिखते हैं। रिपोर्ट्स में ऐसी वीडियोज का भी जिक्र हुआ है कि जहां कपड़े बदलते हुए या पार्टनर के साथ प्राइवेट मोमेंट्स रिकॉर्ड हुए हैं और उसे मेटा में ट्रेनिंग के नाम पर ह्यून मॉडरेटर देख रहे हैं। ऐसे पल जिसमें मेटा के स्मार्ट ग्लास पहनने वाले यूजर शायद बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि कैमरा चालू हो। इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि Sama नाम की कंपनी मेटा की केन्याई सब-कॉन्ट्रैक्टर है जो ऐसे कर्मचारियों को उपलब्ध करवाती है। ये तस्वीरों और वीडियो में चीजों की पहचान करके मेटा के एआई को ट्रेन करते हैं। हजारों लोग स्क्रीन पर बॉक्स बनाकर अलग-अलग ऑब्जेक्ट पहचानते हैं। यह डेटा बाद में एआई सिस्टम को दिया जाता है ताकि उसके मॉडल अच्छे हो पाए।ग्लासेज में दिखा सबकुछ
एक कर्मचारी ने रिपोर्ट में बताया है कि उसने वीडियो देखे जिनमें लोग बाथरुम में जा रहे थे या कपड़े उतार रहे थे हालांकि उसने यह भई कहा था कि उसे नहीं पता था कि वीडियो में कैद लोग जानते थे या नहीं कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा रहा है लेकिन यह साफ है कि वो शायद नहीं चाहेंगे कि उनकी यह फुटेज कही ओर न देखी जाए। रिपोर्ट में बाकी कर्मचारियों ने भी अपने अनुभव शेयर किए हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि उसने एक वीडियो देखा जिसमें एक आदमी ने अपने स्मार्ट ग्लास बेडसाइड कैबिनेट पर रख दिए और कमरे से बाहर चला गया और कुछ देर बाद एक महिला कमरे में आकर कपड़े बदलने लगी। डेटा एनोटर्टर्स को दिखाए गए वीडियो में क्रेडिट कार्ड की जानकारी और सेक्स गतिविधियों की भी फुटेज शामिल थी। कुछ वीडियो यूजर ने जानबूझ कर रिकॉर्ड किए होंगे लेकिन माना जा रहा है कि कई मामलों में यह रिकॉर्डिंग बिना पूरी जानकारी या सहमति के हो गई। ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में रिकॉर्ड हुई फुटेज यदि लीक हो जाए तो यह बहुत ही शर्मनाक और खतरनाक साबित होगी।ऐसे स्मार्ट ग्लासेज क्या है?
Meta ने Ray-Ban के साथ मिलकर यह स्मार्ट ग्लास बनाए हैं। देखने में ये सामान्य सनग्लास जैसे लगते हैं लेकिन इनके अंदर छोटे कैमरे माइक्रोफोन और स्पीकर लगे होते हैं। यूजर इन ग्लास के मदद से फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकते हैं। लाइव स्ट्रीम कर सकते हैं। वॉयस कमांड से AI Assistant से सवाल पूछ सकता है।टेक कंपनियों की सलाह
मेटा का कहना है कि कंपनी प्राइवेसी को लेकर गंभीर है। कंपनी ने दावा किया है कि यूजर डेटा को सुरक्षित रखने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इसके अलावा कंपनी का कहना है कि रिकॉर्डिंग के समय LED लाइट जाती है ताकि लोगों को पता चल पाए लेकिन प्राइवेसी एडवोकेट्स का यही कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि समस्या सिर्फ रिकॉर्डिंग नहीं है बल्कि उस डेटा के इस्तेमाल की भी है।कानून अभी भी है पीछे
नई टेक्नोलॉजी अक्सर कानून से तेज दौड़ती है। स्मार्ट ग्लास भी उसी का उदाहरण है। भारत सहित कई देशों में सार्वजनिक जगह पर वीडियो रिकॉर्डिंग कानूनी है लेकिन जब कैमरा किसी के चेहरे पर लगा हो और हर समय चालू हो सकता है तब स्थिति अलग हो जाती है। कानून अभी तक इस तरह की डिवाइस के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।क्या होने वाला है फ्यूचर?
टेक कंपनियां स्मार्ट ग्लास को अगले बड़े कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के रुप में देख रही है। जिस तरह प्लेटफॉर्म ने दुनिया बदल दी है। उसी तरह आने वाले समय में स्मार्ट ग्लास भी रोजर्मरा की जिंदगी का हिस्सा बन सकते हैं लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ चुका है। यदि हर व्यक्ति के चेहरे पर कैमरा होगा तो क्या दुनिया एक बड़े सर्विलांस नेटवर्क में बदल जाएगी और शायद यही वह सवाल है जिसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। -

AI के नाम पर Hackers ने लूटे लाखों, 25 देशों में हो रहा था App का इस्तेमाल
टेक्नोलॉजी: डेटा लीक का एक नया मामला सामने आया है। इस मामले में दो ऐप ने लाखों स्मार्टफोन यूजर्स का डेटा लीक किया है। इसमें एक एआई टूल्स भी मौजूद हैं। ये जानकारी फॉर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है। ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद थे। इन ऐप्स को करीबन 25 देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Video AI Art Generator&Maker नाम का ऐप है। इसे 5 लाख से ज्यादा बार इंस्टाल किया जा चुका है। इसे 11 हजार से ज्यादा रिव्यू हासिल हुए हैं।15 लाख फोटो और 3.85 लाख वीडियो हुए लीक
फोर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि Deo AI Art Generator & Maker ऐप के कारण से 15 लाख से ज्यादा यूजर इमेज 3.85 लाख वीडियो और कई AI Generated फाइल्स लीक हुई है। रिसर्चर ने पता लगाया है कि प्ले स्टोर पर मौजूद ऐप में गलत तरीके से कॉन्फिगर हुए Google Cloud Storage बकेट के कारण से मीडिया फाइल्स तक बिना ऑथेंटिकेशन के एक्सेस संभव हो पाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल मिलाकर 12Tb से ज्यादा डेटा यानी ऐप के 13 जून 2023 को लॉन्च होने के बाद से जमा 82.7 लाख फाइल्स लीक हो गई है हालांकि अब ये ऐप प्ले स्टोर पर दिखाई नहीं दे रहा है।दूसरे ऐप का नाम
दूसरा ऐप IDMerit और दोनों ही ऐप के डेवलपर हैं। रिपोर्ट में बताया है कि इस ऐप से वो डेटा लीक हुआ है जिसका आमतौर पर इस्तेमाल KYC में किया जाता है। KYC डिटेल्स में आमतौर पर Identity Document, Address, Phone number और बाकी पर्सनल डिटेल्स भी शामिल होती हैं। इसका इस्तेमाल बैंकिंग में किया जाता है। इस डेटा लीक का असर अमेरिका के साथ-साथ करीबन 25 देशों पर होता है। इसमें जर्मनी, फ्रांस, चीन और ब्राजील जैसे देशों के भी नाम शामिल हैं।ऐसे करें खुद को सुरक्षित
प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से किसी भी न्यू ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसकी पहचान को इस्तेमाल कर लें। खासतौर पर डेवलपर का प्रोफाइल चेक करें। हम यह सलाह देते हैं कि गूगल से वेरिफाइड बैच का इस्तेमाल करें। -

बिना इंटरनेट के चलेगा Sarvam AI, Chatgpt-Google Gemini को देगा टक्कर
नई दिल्ली : भारत-एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सरवम एआई का नाम तेजी से सामने आ रहा है। इसका कारण है कि कंपनी का नया प्लेटफॉर्म सरवम Edge इसको ऑन डिवाइस एआई के तौर पर पेश किया गया है। आसान शब्दों में बोलें तो एआई आपके मोबाइल और लैपटॉप में बिना इंटरनेट के भी चल पाएगा। मतलब है कि हर सवाल या कमांड के लिए डेटा क्लाउड पर भेजने की जरुरत नहीं होगी। प्रोसेसिंग डिवाइस के अंदर ही होगी। यह आईडिया नया नहीं है परंतु भारत जैसे देश में यह काफी प्रैक्टिक्ल हो सकता है। यहां हर जगह तेज और स्टेबल इंटरनेट नहीं मिलेगा। ऐसे में ऑफलाइन या लो इंटरनेट पर चलने वाला एआई ज्यादा काम का साबित हो सकता है।किसके लिए बना है Sarvam Edge
Sarvam Edge का फोकस रोजमर्रा के बेसिक एआई कामों पर है जैसे वॉइस को टेक्सट में बदलना। टेक्सट को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करना और कुछ लिमिटेड एआई असिस्टेंट टास्क। कंपनी भारतीय भाषाओं पर इस समय ज्यादा काम कर रही है इसलिए इसका इस्तेमाल उन यूजर्स के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा जो हिंदी या दूसरी किसी लोकल लेंग्वेज में काम करते हैं। ऑन डिवाइस होने का एक फायदा प्राइवेसी से जुड़ा हुआ है। यूजर का डेटा बाहर सर्वर पर नहीं जाता है। सब कुछ फोन या लैपटॉप में ही प्रोसेस होता है हालांकि दूसरा पहलू भी है। यदि डिवाइस पुरानी या कमजोर हार्डवेयर है तो परफॉर्मेंस और बैटरी पर असर पड़ेगा। चैटजीपीटी क्लाउड पर चलने वाला बड़ा एआई मॉडल है। यह इंटरनेट के जरिए काम करता है। इसकी ताकत यह है कि यह काफी जटिल सवालों को हैंडल कर सकता है। लॉन्ग कनर्सवेशन कर सकता है और कई टॉपिक्स पर डीप जवाब देता है। सरवम ऐज का अप्रोच अलग है। यह छोटे और हल्के मॉडल पर काम करता है। इसका मकसद हर तरह का एक जनरल एआई बनाना नहीं है बल्कि कुछ खास टास्क को लोकर लेवल पर आसान बनाना है जहां इटरनेट नहीं है या स्लो है। वहां यह ज्यादा काम का हो स कता है। सीधी भाषा में कहें तो चैट जीपीटी ज्यादा पावरफुल है लेकिन सरवम Edge ज्यादा प्रैक्टिकल कंडीशन को टारगेट करता है। दोनों का इस्तेमाल अलग अलग है। -

2034 तक मानवता खत्म कर देगा AI, एक्सपर्ट्स ने Technology को लेकर की भविष्यवाणी
टेक्नोलॉजी : एआई का चलन आज के इस दौर में बढ़ता ही जा रहा है। डैनियल कोकोताजलो ने भविष्यवाणी भी की थी कि अप्रैल 2027 में मानवता खत्म हो जाएगी। उन्होंने ये बात एक डॉक्यूमेंट में कही थी। अप्रैल 2025 में पब्लिश एआई 2027 डॉक्यूमेंट में पूर्व ओपन एआई कर्मचारी और कई साथियों ने अनियंत्रित एआई डेवल्पमेंट को लेकर कुछ घोषणाएं भी की थी।2034 में आएगी सुपर इंटेलिजेंस
उन्होंने कहा था कि एआई विकास से सुपरइंटेलिजेंस आएगा। इसके कारण मानवता खत्म हो जाएगी। इसकी जानकारी एआई 2027 डॉक्यूमेंट में दी गई थी हालांकि अब लेखक ने अपनी भविष्यवाणी में बदलाव कर दिया है। डैनियर का यह कहना है कि उन्होंने जिस सुपर इंटेलिंजेंस की बात कही थी अब वो 2034 में आएगी। इसके अलावा उन्होने यह भी कहा है कि उन्हें नहीं पता कब और क्या एआई मानवता का अंत करेगा। डैनियल अब अपने पुराने बयान से पीछे हट गए हैं। एआई 2027 में उन्होंने कहा था कि सुपर इंटेलिजेंस के कारण से फुली ऑटोनॉमस कोडिंग आएगी जिसेस एआई सिस्टम अपना विकास खुद कर पाएंगे। साल 2022 में चैट जीपीटी के लॉन्च होने के बाद से एआई बनाम मानवता को लेकर कई लोग टिप्पणी भी कर चुके हैं। एक्सपर्ट्स एआई के अनकंट्रोल डेवल्पमेंट को एक चुनौती ही मान रहे हैं। ऐसी किसी परिस्थिति को रोकने के लिए कुछ सीमाएं भी तय करने की बात हो रही है। न्यूयॉक यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंस प्रोफेसर गैरी मार्कस का मानना है कि एआई के जिस भयावह रुप की चर्चा एआई 2027 में हुई है वो सिर्फ एक कल्पना ही है। बता दें कि इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इमपैक्ट समिट 2026 दिल्ली के भारत मंडपम में 16-20 फरवरी तक होने वाला है। इस बीच अब एआई को लेकर शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने भी खास बयान दे दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे एआई की मदद से पढ़ाई का तरीका बदल रहा है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एआई कितना जरुरी है इस पर भी खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को रटने की परंपरा को ही यह खत्म कर देगा। -

Grok AI विवाद पर Elon Musk ने लिया बड़ा फैसला, X से डिलीट किए 600 Accounts
टेक्नोलॉजी : दुनिया के सबसे अमीर शख्स के तौर पर जाने जाने वाले एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने कंटेंट को लेकर अपनी गलती मान ली है। एक्स ने कहा है कि वह भारत के कानून के हिसाब से ही काम करेगा। बता दें कि एक्स पर आपत्तिजनक कंटेंट के चलते केंद्र सरकार ने संज्ञान लिया था जिसके बाद एक्स प्लेटफॉर्म ने उन पर कड़ा एक्शन लिया है और उसको ब्लॉक कर दिया है।सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार करेगा काम
एक्स ने अपने अकाउंट से 3500 पोस्ट ब्लॉक किए हैं। 600 अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो एक्स अपने प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट की अब अनुमति नहीं देगा। इसके साथ ही वह सरकार के दिशा-निर्देशों पर ही काम करेगा। यह एक्शन उस घटना के हफ्ते बाद लिया गया है जब इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट को मार्क किया था। पिछले कुछ दिनों से एक्स प्लेटफॉर्म पर सर्कुलेट हो रहे अश्लील कंटेंट को लेकर विवाद भी चल रहा है। कई अंकाउंट GrokAI की मदद से अश्लील कंटेंट जनरेट कर रहे हैं। इसको लेकर कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की है।आखिर क्या है Grok AI?
Grok असल में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चेटबॉट है। इसको खुद एलन मस्क की कंपनी एक्स एआई ने ही बनाया है। इसको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और अलग से ऐप इंस्टॉल करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यूजर्स टेक्स्ट कमांड या फिर वॉयस प्रॉम्पट देकर भी अपना काम करवाते हैं।इस वजह से हुआ विवाद
हाल ही के दिनों में Grok के द्वारा कुछ अश्लील तस्वीरें और उनकी एडिटिंग काफी चर्चा में चल रही है। Grokइसका गलत इस्तेमाल करके एआई की मदद से महिलाओं और नाबालिगों की तस्वीरों का इस्तेमाल करके अश्लील कंटेंट बना रहा था। ऐसे में इसको सरकार ने गंभीरता से लेते हुए कड़़ा एक्शन लिया है। -

अब Youtube पर लंबी ऐड नहीं करेगी परेशान, इस देश में बना नया Rule
टेक्नोलॉजी: यूट्यूब पर लंबी ऐड से यदि आप परेशान हो रहे हैं तो अब आपको राहत मिल सकती है। कई बार जरुरी वीडियो देखते समय एक लंबी एड आ जाती है जिससे वीडियो का मजा ही खराब हो जाता है। इस एड को न ही स्किप कर सकते हैं और न ही देखने का मन करता है।। कुछ लोग तो इससे बचने के लिए एड ब्लॉकर भी इंस्टाल कर लेते हैं परंतु अब यूट्यूब ने एड ब्लॉकर की परमिशन देनी बंद कर दी है। इसके बाद सिर्फ यूट्यूब प्रीमियम ही एक ऑप्शन बचता है जिससे बिना एड वाले वीडियो आसानी से देखे जा सकते हैं। अब एक देश ने इसे बदलने के लिए कानून बना दिया है।वियतनाम ने बनाया नया कानून
वियतनाम ने एक नया कानून बनाया है। इस कानून के अंतर्गत यूट्यूब समेत किसी भी दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 5 सैकेंड से लंबी अनस्किपेबल एड नहीं दिखाई जा पाएगा। ऐसे में हर प्लेटफॉर्म पर 5 सैकेंड से लंबी एड पर स्किन करने का ऑप्शन भी देना पड़ेगा। यह कानून वीडियो के साथ-साथ मूविंग इमेजेज पर भी लागू होगा। इसके अलावा स्टेटिट एड को भी स्किप करने का ऑप्शन यूट्यूब को देना पड़ेगा। यह कानून 15 फरवरी से लागू हो जाएगा।सरकार से फैसले से यूजर्स हुए खुश
वियतनाम सरकार के फैसले से यूजर्स भी काफी खुश हैं। रेड्डीट पर कई दूसरे देशों में लोग भी कमेंट कर रहे हैं कि उनके देश में भी ऐसा कानून होना चाहिए। अब फ्री में वीडियो देखने के लिए यूजर्स के पास बहुत कम कंट्रोल होगा। इससे वह यूट्यूब के साथ-साथ प्लेटफॉर्म की मनमानी का शिकार होना पड़ेगा।आखिर क्यों जरुरी है यूट्यूब के लिए ऐड?
यूजर को वियतनाम के इस कानून से फायदा होगा पर यूट्यूब के लिए एड जरुरी होती है। एड के कारण ही अभी तक यूट्यूब का इस्तेमाल करना फ्री बना है और इससे क्रिएटर्स को भी पैसा कमाने का मौका मिलेगा। लंबी और स्किप न होने वाले एड पर यूट्यूब की निर्भरता भी बढ़ती जा रही है। इससे न सिर्फ वीडियो देखने में रुकावट आएगी बल्कि यूजर्स का एक्सपीरियंस भी खराब होगा। -

Meta की प्राइवेसी पर उठाए यूजर्स ने सवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
नई दिल्ली: मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर इस समय सोशल मीडिया पर काफी हलचल मची हुई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप्प और थ्रेड्स का इस्तेमाल करने वालों को अब यह डर लग रहा है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने वाली है। मेटा का यह कहना है कि इससे यूजर्स को उनकी पसंद की ऐड्स दिखाई जाएंगे लेकिन खई लोगों के अनुसार, प्राइवेसी के लिए यह खतरा बन सकती हैं।एआई के भरोसे चलेगा बिजनेस
यह कोई छोटा बदलाव नहीं है। मेटा अपनी पूरी ऐड का बिजनेस अब एआई के सहारे चलाने वाली है। ऐसे में यह साफ है कि कंपनी अपने सभी प्लेटफॉर्म्स पर यूजर डेटा का इस्तेमाल पहले से ज्यादा गहराई के साथ करने वाली है। इससे विज्ञापन और भी स्टीक बनेंगे। नई पॉलिसी के अनुसार, मेटा का यह एआई ट्रैक करेगा कि आप क्या पसंद करते हैं क्या सर्च करते हैं और किस तरह की पोस्ट पर रुकते हैं। इसके अलावा आप एआई असिस्टेंट के साथ क्या बात करते हैं। इसमें सिर्फ मैसेज ही नहीं बल्कि उससे जुड़ा हुआ मेटा डेटा जैसे कि टॉपिक, कीवर्ड या फिर वॉयस चैट से जुड़ी जानकारी भी एल्गोरिदम तक पहुंच जाएगी।यूजर्स को नहीं आएंगे बेकार के विज्ञापन
मेटा ने यह दावा किया है कि प्राइवेट मैसेज को इंसानों की तरह पढ़ता नहीं है लेकिन इन्हीं जानकारियों के आधार पर विज्ञापन को दिखाने की बात के कारण प्राइवेसी एक्सपर्ट्स को अलर्ट कर दिया है। अब मेटा एआई, सीधे तौर पर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप का हिस्स बन गया है। यदि आप एआई से ट्रेकिंग, फिटनेस या ट्रैवल से जुड़ा कोई सवाल पूछेंगे तो कुछ ही समय के बाद आपको फीड में वैसे ही विज्ञापन दिखने लगेंगे। कंपनी ने यह भी कह दिया है कि इससे यूजर्स को बेकार और गैर जरुरी विज्ञापनों की जगह अपनी रुचि के ऐड नजर आएंगे।ऐसे काम करेंगे मेटा के विज्ञापन
मेटा का यह कहना है कि उसने अक्टूबर 2025 में इन बदलावों के संकेत भी दिए थे और कंपनी को पूरा भरोसा भी है कि एआई आधारित विज्ञापन यूजर्स के लिए बेहतर साबित होंगे। कंपनी ने यह दावा किया है कि पर्सनल डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। अब मेटा ऐप खोलते ही आपको जो कंटेंट और विज्ञापन दिखेंगे। इनमें एआई की भूमिका और ज्यादा होगी। भले ही फीड पहले से ज्यादा रिलेटेबल लगे परंतु यह सवाल बन रहा है कि आपका डेटा कैसे और कितनी हद तक इस्तेमाल होगा। पारदर्शिता और सहमति को लेकर भी इस समय चिंताएं उठ रही हैं जो फिलहाल अभी खत्म नहीं हो सकती।