Category: International

  • शटल ट्रेन पर हमले के बाद PAK का एक्शन, 17 आतंकियों को किया ढेर, देखें वीडियो

    शटल ट्रेन पर हमले के बाद PAK का एक्शन, 17 आतंकियों को किया ढेर, देखें वीडियो

    बलूचिस्तानः पाकिस्तान में इस वक्त आंतरिक सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। देश के अंदर ही अलग-अलग मोर्चों पर विद्रोहियों ने पाकिस्तानी फौज की चूलें हिला रखी हैं। ऐसे में फौज भी खुद को साबित करने के लिए एक बार फिर से पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में बड़ी कार्रवाई करते 17 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। दरअसल, पिछले सप्ताह बलूचिस्तान में एक शटल ट्रेन पर बम हमले के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 17 संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया है। 24 मई को क्वेटा में हुए संदिग्ध आत्मघाती हमले में 16 लोग मारे गए थे, जिनमें 3 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।

    पाकिस्तान सेना के आईएसपीआर के अनुसार, घटना के बाद सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के विभिन्न जिलों में खुफिया-आधारित अभियान चलाए। इन अभियानों में मस्तंग, नुश्की, ज़ेहरी, खुज़दार और केच में विद्रोहियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। फिटना-अल-हिंदोस्तान से जुड़े 17 आतंकवादी भारी गोलीबारी में मारे गए। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों से हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और तैयार आईईडी बरामद किए। सुरक्षाबलों के मुताबिक मारे गए विद्रोही पाकिस्तानी क्षेत्र में कई आतंकी वारदातों में शामिल थे। बचे हुए आतंकवादियों को खत्म करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी हैं।

    किशोरों की सुरक्षा और मानसिक सेहत को लेकर बढ़ते वैश्विक दबाव के बीच सोशल मीडिया दिग्गज मेटा ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और मैसेंजर पर किशोरों के लिए कंटेंट सेटिंग्स का दायरा वैश्विक स्तर पर बढ़ा दिया है। इस पहल की शुरुआत पिछले साल अक्तूबर में कुछ चुनिंदा देशों से हुई थी, जिसका मकसद बच्चों को अनुपयुक्त सामग्री से बचाना है। मेटा ने कहा है कि अब किशोरों के खातों (अकाउंट्स) के लिए 13+ कंटेंट सेटिंग्स को डिफॉल्ट रूप से लागू कर दिया गया है। इसके अलावा इस साल के अंत तक फेसबुक और मैसेंजर पर अधिक प्रतिबंधात्मक अनुभव देने वाली लिमिटेड कंटेंट सेटिंग भी पेश की जाएगी।

    मेटा ने जानकारी दी कि वह इंस्टाग्राम पर एक नए फीचर का परीक्षण कर रहा है, जो किशोरों को एक ही तरह के कंटेंट को बार-बार देखने से रोकेगा और उनके फीड में विविधता लाएगा। मेटा ने कहा कि हम मानते हैं कि पोषण, वेटलिफ्टिंग या चिंता (एंग्जायटी) से निपटने से जुड़े पोस्ट मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें बार-बार दिखाने के बजाय अन्य प्रकार के कंटेंट के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब हाल में (25 मार्च को) लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने मेटा और गूगल को युवाओं के लिए हानिकारक प्लेटफॉर्म डिजाइन करने का दोषी पाते हुए जुर्माना लगाया था। साथ ही मेटा ने अप्रैल में निवेशकों को चेतावनी दी थी कि युवाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनी और नियामक फैसलों से उनके बिजनेस और वित्तीय नतीजों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

     

  • Trump की फटकार के बाद Netanahayu ने पीछे खींचा कदम, लेबनान पर हमला नहीं करेगा Israel

    Trump की फटकार के बाद Netanahayu ने पीछे खींचा कदम, लेबनान पर हमला नहीं करेगा Israel

    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन कॉल पर फटकार लगाने के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लेबनान को लेकर सुर नरम पड़े हैं। ट्रंप ने नेतन्याहू को लेबनान के खिलाफ हमले को रोकने के लिए राजी कर लिया है जिसके बाद उन्होंने अपने सैनिकों को वापिस बुला लिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर पोस्ट कर खुद इसकी जानकारी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेरुत पर हमले को रोकने के लिए मना लिया है। इसके बाद इजरायली नेता ने अपने सैनिकों को वापिस बुला लिया है। ट्रंप ने सोमवार शाम को ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा की है।

    नेतन्याहू के साथ की फोन पर बात

    उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री को उनके पॉपुलर निकनेम से संबंधित करते हुए कहा कि – आज मेरे बीबी नेतन्याहू से बात हुई हैं। मैंने उनसे लेबनान के बेरुत पर बड़ा हमला न करने की अपील की है। उन्होंने अपने सैनिकों को वापिस बुला लिया है। थैंक्यू बीबी। ऐसी खबरें थी कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत गरमागरम रही और अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू से कहा कि यदि उन्होंने दखल न दिया होता तो वह जेल में होते।

    नेतन्याहू को खुद लगी फटकार

    एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के लेबनान पर बढ़ते हमलों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को नेतन्याहू को कॉल कर फटकार लगाई है। ट्रंप ने नेतन्याहू को पागल तक कह दिया है। ट्रंप ने कहा कि – अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इस कारण से हर कोई इजराइल से नफरत करता हूं।

    ईरान ने दी थी डील से पीछे हटने की धमकी

    यह सब उस समय हुआ जब ईरान ने लेबनान पर इजरायल की बढ़ती कार्रवाई को लेकर अमेरिका के साथ शांति समझौते पर बातचीत को छोड़ने की धमकी दी थी। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तस्त्रीम ने सोमवार को कहा कि तेहरान को बातचीत करने वाली टीम लेबनान पर हमलों की वजह से अमेरिका के साथ मीडिएटर के जरिए मैसेज को लेन-देन रोक रही है हालांकि ट्रंप ने बातचीत जारी रहने की बात कही है।
  • शादी के कुछ घंटे बाद मातम में बदली खुशियां, हेलीकॉप्टर क्रैश में एक की मौत

    शादी के कुछ घंटे बाद मातम में बदली खुशियां, हेलीकॉप्टर क्रैश में एक की मौत

    जॉर्जियाः अमेरिका में भारतीय दंपति की शादी के कुछ घंटे बाद ही खुशियां मातम में बदल गईं। दरअसल, हनीमून पर जा रहे भारतीय मूल के दूल्हे की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत हो गई, जबकि उसकी दुल्हन कई घंटों तक मलबे में फंसी रही। परिवार के लिए यह सदमा और भी बड़ा इसलिए है क्योंकि शादी के कुछ ही घंटे पहले ही दोनों ने सैकड़ों मेहमानों की मौजूदगी में नई जिंदगी की शुरुआत की थी। यह हादसा अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में हुआ है, जान गंवाने वाला युवक खुद पायलट था। मृतक की पहचान 25 वर्षीय पायलट डेव फिजी के रूप में हुई है।

    हादसे में डेव की पत्नी जेस्नी गंभीर हादसे के बाद बच गई हैं। उन्हें घायल हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया। विवाह समारोह समाप्त होने के बाद नवविवाहित जोड़े के लिए एक विशेष विदाई की व्यवस्था की गई थी। दोनों हेलीकॉप्टर से अटलांटा के एक होटल जाने वाले थे, जहां वे अपनी शादी की पहली रात बिताने वाले थे। इसके बाद उनका हनीमून कार्यक्रम भी तय था। उड़ान भरने के कुछ समय बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा डॉसनविल के पास अटलांटा शहर के स्वामित्व वाली लगभग 10 हजार एकड़ में फैली घने जंगलों वाली भूमि पर हुआ। दुर्घटनास्थल बेहद दुर्गम था, जिसके कारण बचाव दल को वहां पहुंचने और मलबे तक पहुंचने में काफी समय लगा। जेस्नी करीब 6 घंटे तक मलबे के बीच फंसी रहीं।

    जब उन्हें होश आया तो उन्होंने खुद को टूटे हुए हेलीकॉप्टर के मलबे के नीचे पाया। उनके ऊपर डेव का शरीर पड़ा हुआ था। केरल से संबंध रखने वाले 25 वर्षीय डेव फिजी डेल्टा एयर लाइंस में पायलट थे। उन्होंने कुछ घंटे पहले जेस्नी के साथ जॉर्जिया के डॉसनविल स्थित ‘द रिवीयर’ वेडिंग वेन्यू में विवाह किया था। शादी में सैकड़ों मेहमान शामिल हुए थे और परिवार के अनुसार समारोह बेहद शानदार ढंग से संपन्न हुआ। डेव के माता-पिता जॉर्ज और फीबा फिजी कई साल पहले केरल के एर्नाकुलम जिले के मुवत्तुपुझा क्षेत्र से अमेरिका आकर बस गए थे। वहीं जेस्नी का परिवार भी केरल के अलप्पुझा जिले से जुड़ा हुआ है. परिवार के मुताबिक, डेव और जेस्नी की मुलाकात चर्च से जुड़े परिचितों के जरिए हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और उन्होंने जीवनसाथी बनने का फैसला किया था।

     

  • नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया, संसद में बोले बालेन शाह

    नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया, संसद में बोले बालेन शाह

    Balendra Shah in Nepal Parliament: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मार्च 2026 में सत्ता संभालने के बाद पहली बार देश की संसद को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने नेपाल की घरेलू और विदेश नीति के कई अहम मुद्दों पर बात की। इस दौरान भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद को लेकर भी उन्होंने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया।

    बातचीत से सुलझाया जाएगा भारत-नेपाल सीमा विवाद
    संसद में बोलते हुए बालेन शाह ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर जो सीमा विवाद चल रहा है, उसका समाधान बातचीत और राजनयिक प्रयासों के जरिए निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय जमीन पर किया अतिक्रमण
    सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री शाह ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों की समीक्षा में यह सामने आया है कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि कुछ स्थानों पर नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों का समाधान तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए।

    विशेषज्ञों की मदद से निकलेगा समाधान
    बालेन शाह ने सुझाव दिया कि सीमा विवाद को हल करने के लिए दोनों देशों के सर्वेक्षक, इतिहासकार और क्षेत्रीय विशेषज्ञ मिलकर काम करें। उनका मानना है कि विशेषज्ञों की मदद से वास्तविक स्थिति को समझा जा सकता है और स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

    भारत, चीन और ब्रिटेन से हुई बातचीत
    प्रधानमंत्री शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भारत, चीन और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के साथ बातचीत की है। उनकी सरकार पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के पक्ष में है।

    मार्च में बने थे नेपाल के प्रधानमंत्री
    बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। आम चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी सफलता मिली थी, जिसके बाद उन्होंने सरकार बनाई। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अभी तक कोई विदेश दौरा नहीं किया है और न ही विदेशी नेताओं के साथ ज्यादा मुलाकातें की हैं।

    संसद के पहले भाषण पर थी सबकी नजर
    प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला संसदीय संबोधन था, इसलिए देश और विदेश के राजनीतिक जानकारों की नजर इस भाषण पर थी। खास तौर पर भारत के साथ संबंधों और विदेश नीति को लेकर उनकी सरकार का रुख जानने की उत्सुकता थी।

    भारत को लेकर अब तक रहा है संतुलित रुख
    नेपाल में जेन-जी आंदोलन और राजनीतिक बदलाव के बाद हुए चुनाव में बालेन शाह की पार्टी को बड़ी जीत मिली थी। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने भारत को लेकर कोई आक्रामक बयान नहीं दिया है। अपने पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों के मुकाबले उन्होंने अब तक भारत का दौरा भी नहीं किया है। ऐसे में संसद में दिया गया उनका यह बयान भारत-नेपाल संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     

  • PSG की जीत के जश्न दौरान हंगामा, उपद्रवियों ने कई जगह लगाई आग, की तोड़फोड़, देखें वीडियो

    PSG की जीत के जश्न दौरान हंगामा, उपद्रवियों ने कई जगह लगाई आग, की तोड़फोड़, देखें वीडियो

    पेरिसः पीएसजी की दूसरी चैंपियंस लीग खिताबी जीत के जश्न के दौरान शनिवार देर रात हिंसा भड़कने के बाद पेरिस पुलिस ने दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया है। इस दौरान कुछ लोगों ने राजधानी में एक पुलिस थाने में घुसने की भी कोशिश की। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में खेले गए रोमांचक फाइनल में पीएसजी ने पेनाल्टी शूटआउट में आर्सेनल को हराकर खिताब अपने नाम किया। मैच समाप्त होते ही पेरिस में समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
     
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    प्रशंसक आर्क द ट्रायम्फ के आसपास की सड़कों पर जुटे। कई लोगों ने फ्लेयर जलाए और वाहनों के हॉर्न बजाए। करीब 20,000 लोग शॉम्प्स-एलिजे क्षेत्र में एकत्र हुए, जहां पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही। पेरिस पुलिस मुख्यालय के अनुसार, छोटे-छोटे समूहों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में उपद्रव किया। कुछ लोगों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि एक पुलिसकर्मी इस दौरान घायल हो गया। शहर के पॉश 8वें एरोंडिस्मां इलाके में स्थित एक पुलिस थाने में घुसने की कोशिश करने वाले लोगों को भी तितर-बितर कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, रात 10 बजे तक 45 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। पेरिस को घेरने वाली मुख्य रिंग रोड को भी कुछ समय के लिए भीड़ ने अवरुद्ध कर दिया था, लेकिन बाद में पुलिस ने रास्ता खाली करा दिया। पुलिस ने बताया कि एक बेकरी और एक रेस्तरां को भी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने पीएसजी स्टेडियम के पास 16वें एरोंडिस्मां क्षेत्र में जुटे करीब 1,000 लोगों को भी नियंत्रित किया और साइकिलों से बनाए गए बैरिकेड हटाए।    
  • भारत और अमेरिका में जल्द होगी बड़ी Deal, अमेरिकी राजदूत Sargio Gor ने दिया बड़ा बयान

    भारत और अमेरिका में जल्द होगी बड़ी Deal, अमेरिकी राजदूत Sargio Gor ने दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गौर ने दावा किया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का सिर्फ 1 फीसदी हिस्सा ही अंतिम रुप दिए जाने के लिए बचा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस बीच अमेरिकी वार्ताकारों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 1 से 4 जून के बीच नई दिल्ली पहुंचकर आगे की बातचीत करेगा।

    IIT-दिल्ली में अमेरिकी राजदूत ने दिया बयान

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने शुक्रवार को आईआईटी-दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया है। यूएस इंडिया ट्रस्ट इनिशिएटिव एडवांसिंग पार्टनरशिप इन रिसर्च एंड इनोवेशन विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फार्मास्यूटिकल्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में साथ और मजबूत करना चाहिए। इस हफ्ते वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका के मुख्य वार्ताकार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 1 से 4 जून तक भारत आएगा। यह दौरा दोनों देशों के बीच अंतरिम द्वपिक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रुप देने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय वार्ताकारों की टीम 20 से 23 अप्रैल के बीच वॉशिंगटन गई थी। जहां समझौते के अंतिम बिंदुओं पर चर्चा हुई थी। 1 फीसदी हिस्से को अंतिम रुप देने के लिए तैयार है और इससे दोनों देशों की समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि – भारत ने इस व्यापार समझौते के आखिरी 1 फीसदी हिस्से को अंतिम रुप देने के लिए अपनी टीम वॉशिंगटन भेजी थी। अगले हफ्ते हम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का भारत में स्वागत करेंगे और बातचीत को आगे बढ़ाएंगे। हमें पूरी उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में यह समझौता हो जाएगा।

    20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर पहुंचा व्यापार

    गोर ने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक भागीदारी, गहरे संबंधों और मजबूत आर्थिक एकीकरण का प्रमाण है।

    ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य क्या है

    गोर के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उद्देश्य ऐसा व्यापारिक माहौल तैयार करना है। इससे अमेरिकी कंपनियों और कर्मचारियों को अभूतपूर्व अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। 7 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर अंतिम व्यापार समझौते के लिए एक ढांचे पर सहमति जताई थी। इस ढांचे में दोनों देशों के लिए पारस्परिक और लाभकारी व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। साथ ही व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई थी। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस समझौते को जल्द पूरा करने के लिए अधिक उत्सुक दिखाई दे रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण नवबंर में होने वाले अमेरिकी मध्यावाधि चुनाव है। ट्रंप प्रशासन इन चुनावों से पहले एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि अपने खाते में दर्ज करना चाहता है हालांकि भारतीय पक्ष ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। इससे देश के किसानों और घरेलू उत्पादकों के हित प्रभावित हों। खासतौर पर कृषि क्षेत्र और अधिक खोलने जैसे मुद्दों पर भारत अलर्ट का रुख अपनाकर रख रहा है। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान कोई आर्थिक समझौता नहीं हो पाया है। इससे भारत के साथ व्यापार समझौते को जल्दी पूरा करने के दबाव बढ़ गया है। एक सूत्र ने बताया कि चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, विशेष तौर पर सोयाबीन की खरीद बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत अंतरिम समझौते के अंतिम विवरण को तय करने के साथ-साथ व्यापक व्यापार समझौते पर भी बातचीत आगे बढ़ रहा है। इनमें बाजार तक पहुंच, गैर शुल्क, बाधाएं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा तथा आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। सर्जियो गोर ने यह कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में वृद्धि का मुख्य कारण नवाचार, निवेश और डिजिटल व्यापार, उन्नत, विनिर्माण, ऊर्जा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि नई और महत्वपूर्ण तकनीकें वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल रही हैं। इस क्षेत्र में भारत और अमेरिकी की साझेदारी सबसे अच्छी स्थिति में है। गोर ने कहा कि उनकी इच्छा है कि भारत अमेरिका संबंध 21वीं सदी का सबसे जरुरी रणनीतिक साझेदारी के रुप में स्थापित हो। इसी सोच के अंतर्गत ट्रांसफोर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजीज यानी की ट्रस्ट पहल शुरु की गई है। जब ट्रंप ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरु किया था। इसका उद्देश्य भरोसेमंद साझेदार देशों के साथ नवाचार को बढ़ावा देना और संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गोर ने कहा कि द्विपक्षीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप के अंतर्गत अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने उन्नत एआई चिप्स की आपूर्ति को फिर से शुरु किया है।    
  • क्या सच में Israel को मान्यता देगा पाकिस्तान? Mark Rubio और Ishaq Dar ने दिया जवाब

    क्या सच में Israel को मान्यता देगा पाकिस्तान? Mark Rubio और Ishaq Dar ने दिया जवाब

    नई दिल्ली: अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार की अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई बैठक के दौरान एक सवाल ने सबका ध्यान खींच लिया। एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अचानक पूछा कि क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने के लिए तैयार है हालांकि डार और रुबियो ने उस समय कोई जवाब नहीं दिया है परंतु बाद में पाकिस्तान ने अपने रुख साफ करते हुए कहा कि फिलिस्तीन मुद्दे पर उसकी कोई नीति में बदलाव नहीं आया है।

    रिपोर्टर ने किया सवाल

    शुक्रवार को वॉशिंगटन में हुई बैठक के दौरान द पाकिस्तान डेली के पत्रकार फैसल अली शाह ने जोर से सवाल किया है। क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देगा। यह सवाल ऐसे समय पूछा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई अरब और मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील कर चुके हैं हालांकि बैठक के दौरान न तो इशाक और न ही मार्को रुबियो ने इस सवाल का कोई जवाब दिया है।
     
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    बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तान और गाजा के मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद तब तक इजरायल के प्रति अपनी नीति में किसी बदलाव पर विचार नहीं करेगा। जब तक फिलिस्तानी राज्य की स्थापना की दिशा में ठोस प्रगति नहीं होती है। डार ने दोहराया कि पाकिस्तान का मानना है कि फिलिस्तीन समस्या का समाधाना दो राष्ट्र सिद्धांत के आधार पर होना चाहिए। पाकिस्तान आज तक इजरायल को एक राष्ट्र के रुप में मान्यता नहीं देगा और दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तानी मुद्दे का समर्थन करता रहा है। इजरायल के साथ संबंध स्थापित करने के लिए फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को जरुरी शर्त मानता है।

    ट्रंप ने मुस्लिम देशों से क्या की अपील

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्न और जॉर्डन से सामूहिक रुप से अब्राहम समझौतों में शामिल होने और इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने का आग्रह किया है। यह पहल ईरान से जुड़े तनाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताई जा रही है। पाकिस्तान के इस सुझाव को उन्होंने ठुकरा दिया है। वहीं अन्य देशों की ओर से अभी तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    क्या है अब्राहम समझौता?

    अब्राहम एकॉर्ड की शुरुआत ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी की मध्यस्थता में हुई थी। इसका उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। इसके अंतर्गत संयुक्त अरब अमीरात बहरीन और मोरक्को ने इजरायल के साथ राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित किए। सूडान भी इस प्रक्रिया में शामिल हुआ था परंतु उसने अभी तक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं।

    पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

    हाल के महीनों में पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रुप में पेश किया है हालांकि ईरान से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की पहल में सबसे प्रमुख भूमिका सेना प्रमुख आसिम मुनीर निभाते हुए दिखाई दिए हैं। फिलहाल इजरायल को मान्यता देेने के सवाल पर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख अपरिवर्तित हैं और सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से पहले इस दिशा में किसी बदलाव की संभावना नहीं है।  
  • ईरानी वाणिज्य दूतावास ने बोला तीखा हमला, सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

    ईरानी वाणिज्य दूतावास ने बोला तीखा हमला, सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

    नई दिल्ली: बीते दिन ईद-उल-अजहा का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया गया। इजरायल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर बकरीद की मुबारकबाद भी दी। इस पर ईरान के हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने तीखा हमला बोलते हुए इजरायल को कसाई कह दिया है। इजरायल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए पोस्ट में लिखा कि – यरुशलम से इजरायल और दुनिया भर के मुसलमानों को ईद अल अधा की हार्दिक शुभकामनाएं। ईद मुबारक। हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने यरुशलम की बकरीद पर दी मुबारकबाद पर पलटवार करते हुए लिखा कि – कसाई ईद उल अजहा की हार्दिक शुभकामनाएं दे रहा है। भारत में ईरानी दूतावास ने सभी भारतीयों को ईद की बधाई दी है। एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि – ईद अल अजहा के मौके पर भारत की सरकार और प्यारी जनता खासतौर से हमारे प्रिय मुस्लिम भाईयों और बहनों को मुबारकबाद देते हैं। यह मुबारक त्योहार सभी के लिए शांति, समृद्धि और खुशी लाए और हमारे दोनों राष्ट्रों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मित्रता के बंधन को और मजबूत करे। ईद मुबारक।

    ईरान के राष्ट्रपति ने भी दी बधाई

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी बकरीद के मौके पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इराक, ओमान, कतर, तुर्की, ताजिकिस्तान, मिस्न, किर्गिस्तान और अजरबैजान के नेताओं के साथ अपनी बातचीत में उन्होंने ईद उल अजहा की मुबारकबाद देते हुए कहा कि – मैंने उम्मीद जताई है कि अल्लाह हम मुसलमान के दिलों को एक-दूसरे के करीब लाए और हम सभी क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार और खतरों के सामने एक-दूसरे के लिए और ज्यादा मजबूती से साथ रहे।    
  • समदंर में सरेआम ढोया जा रहा 8 जहाज, US ने टोल वसूली System को किया बैन

    समदंर में सरेआम ढोया जा रहा 8 जहाज, US ने टोल वसूली System को किया बैन

    नई दिल्ली: अमेरिका ने गुरुवार को कह दिया है कि उसने ईरान के तेल कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है। जब अमेरिका और ईरान युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट के जरिए जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटाने को लेकर एक शुरुआती समझौते पर पहुंचे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने कहा कि उसने ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में शामिल आठ जहाजों पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें मार्शल आईलैंड्स के झंडे वाला ऑयल टैंकर फ्लोरा कोमोरोस के झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर हौनकायो और पनामा के झंडे वाला टैंकर इल गैप शामिल है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बयान में कहा कि – हम ईरानी सरकार को अपनी सेना और उसकी क्षमताओं को फिर से मजबूत करने के लिए तेल से कमाई बढ़ाने की इजाजत नहीं देंगे। इस संघर्ष के कारण से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है क्योंकि ईरान और ओमान के बीच स्थित अहम होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया था। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सामान्य तौर पर दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति होती है।

    ईरानी तेल से जुड़ी 15 संस्थाओं पर बैन

    अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद बिक्री से जुड़ी 15 से ज्यादा संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें हांगकांग की वर्थ सीन एनर्जी लिमिटेड दुबई की सिम्फनी शिपिंग एंड मैरीटाइम मैनेजमेंट इंक और हांगकांग की मेहदियेव ट्रेडिंद कंपनी शामिल है। ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं में से कुछ ईरानी सेना के तेल बिक्री नेटवर्क का इस्तेमाल कर ईरान के बाहर से तेल उत्पाद हासिल करती हैं। विभाग के अनुसार, वर्थ सीन की ईरान की नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी के लिए रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद करती है। यह काम वो सेपेहर एनर्जी जहां की ओर से करती है। यह ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाइप की तेल बेचने वाली ब्रांच हैं और जिस पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है।

    जहाजों पर टोल लगाने वाली ईरानी एजेंसी भी हुई बैन

    इससे पहले बुधवार को अमेरिका ने ईरान की उस नई एजेंसी को निशाना बनाया जो होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। ये प्रतिबंध बुधवार देर रात उस समय घोषित किए गए जब अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर हमला किया है। इससे पहले अमेरिका ने ईरानी अटैक ड्रोन को मार गिराया था। द एसोसिएटेड प्रेस ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा कि – वैश्विक समुद्री व्यापार को बंधक बनाने की ईरानी सेना की हालिया कोशिश इस बात का सबूत है कि हमारे इकोनॉमिक फ्यूरी ऑपरेशन ने ईरानी शासन को पैसों के लिए बेताब कर दिया है। नए प्रतिबंध ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी और उस एजेंसी के साथ काम करने वाली सभी व्यक्तियों या संस्थाओं को निशाना बनाते हैं। इस एजेंसी की घोषणा इसी महीने की गई थी। यह संस्था स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षित रास्ता देने की जगह टोल वसूलती है जो प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक हो सकता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपनी टोल वसूली एजेंसी का बचाव करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सिर्फ उसी कॉरिडोर से संभव है। जिसे उसने तय किया है। गार्ड्स ने चेतावनी दी कि तय रास्ते से हटने वाले जहाजों को हमलों और अन्य खतरों को सामना करना पड़ सकता है।  
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    विदेश में भारतीय मूल की महिला का गोलियां मारकर कत्ल, देखें वीडियो

    वर्जीनियाः अमेरिका के वर्जीनिया में एक गुजराती मूल की महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक मेघना पटेल (47) एक स्टोर में काम करती थीं। सुबह मेघना ने स्टोर खोला था। कुछ देर बाद ही एक नकाबपोश शख्स स्टोर में दाखिल हुआ और उन पर फायरिंग कर दी। इसके बाद स्टोर में लूटपाट की और फरार हो गया। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग स्टोर पहुंचे और एंबुलेंस को सूचना दी।
    हालांकि, मेघना की मौके पर ही मौत हो गई थी। हत्या की पूरी घटना स्टोर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। फुटेज में देखा जा सकता है कि एक अज्ञात शख्स स्टोर में दाखिल होता है। पहचान छिपाने के लिए उसने ट्रैक सूट, जैकेट, हाथों में दस्ताने, चेहरे पर मास्क और सिर पर टोपी पहनी हुई थी, जिससे उसकी सिर्फ आंखें ही दिखाई दे रही थीं। आरोपी मेघना के पास पहुंचते ही उन पर ताबड़तोड़ दो-तीन राउंड फायरिंग कर देता है। उनके जमीन पर गिरते ही वह कैश बॉक्स से करंसी निकालकर फरार हो जाता है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। बता दें कि मेघना पटेल मूल रूप से गुजरात में मेहसाणे जिले के जंत्राल गांव की रहने वाली हैं। परिवार के साथ वे पिछले 10 सालों से वर्जीनिया सिटी में रह रही थीं। इस स्टोर में करीब 8 सालों काम कर रही थीं। मेघनाबेन के पिता करसनभाई और माता कपिलाबेन गुजरात के जंत्राल गांव में ही रहते हैं। पिछले एक साल में अमेरिका में 4 गुजराती नागरिकों की हत्या हो चुकी है।