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  • कनाडा में पढ़ना या नौकरी करने जाना अब हुआ महंगा

    कनाडा में पढ़ना या नौकरी करने जाना अब हुआ महंगा

    नई दिल्लीः कनाडा में पढ़ने या नौकरी करने जाना अब पहले से थोड़ा महंगा हो गया है। कनाडाई सरकार ने टेंपरेरी रेजिडेंट एप्लिकेशन के लिए फीस बढ़ा दी है। नई फीस 1 दिसंबर, 2024 से लागू हो गया है। टेंपरेरी रेजिडेंट एप्लिकेशन के जरिए ही कनाडा में अस्थायी रूप से रहने के लिए वीजा की गुजारिश की जाती है। यह बदलाव उन सभी पर लागू होता है जो कनाडा में घूमने, काम करने या पढ़ाई करने के लिए जाना चाहते हैं। भारतीयों पर भी यह नियम लागू होगा। वहीं, अगर आप पहले से ही कनाडा में हैं और अपना ‘टेंपरेरी रेजिडेंट स्टेटस’ रिन्यू कराना चाहते हैं, तो आपको भी बढ़ी हुई फीस भरनी पड़ेगी। फीस बढ़ाने के लिए अलावा कनाडा सरकार अपने यहां इमिग्रेशन टारगेट में भी बड़ी कटौती कर रही है। 2024 में 4,85,000 लोगों को परमानेंट रेजिडेंसी देने का टारगेट रखा गया है, लेकिन 2025 में ये संख्या 3,95,000 रहने वाली है। आने वाले सालों में इसमें और भी कटौती की जाने वाली है। कनाडा अपने यहां कम से कम लोगों को पीआर देना चाहता है।

    कितनी बढ़ाई गई है फीस?

    कनाडा के इमिग्रेशन, रेफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने बताया है कि किस तरह के आवेदन के लिए कितनी फीस देनी पड़ेगी। नीचे फीस की डिटेल्स दी गई है, जो कुछ इस प्रकार है
    • Authorisation to return to Canada: 479.75 कनाडाई डॉलर (40,624 रुपये), पहले ये 459.55 डॉलर था।
    • Inadmissibility on criminal grounds: 239.75 कनाडाई डॉलर (14,432 रुपये), पहले ये 229.77 डॉलर था।
    • Inadmissibility on serious criminal grounds: 1,199 कनाडाई डॉलर (72,175 रुपये), पहले ये 1,148.87 डॉलर था।
    • Restoration of student status: 389.75 कनाडाई डॉलर (23,461 रुपये), पहले ये 379 डॉलर था।
    • Restoration of visitor status: 239.75 कनाडाई डॉलर (14,432 रुपये), पहले ये 229 डॉलर था।
    • Restoration of worker status: 394.75 कनाडाई डॉलर (23,762 रुपये), पहले ये 384 डॉलर था।
    • Temporary resident permit: 239.75 कनाडाई डॉलर (14,432 रुपये), पहले ये 229.77 डॉलर था।

    अगर आपने पुरानी फीस भरी तो क्या होगा?

    अगर आपने नई फीस लागू होने से पहले ही ऑनलाइन आवेदन कर दिया है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। IRCC ऑनलाइन आवेदन मिलते ही उसकी पुष्टि कर देता है। आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
  • सांप से भी खतरनाक है ये पेड़, छांव में खड़े होने से भी जा सकती है जान!

    सांप से भी खतरनाक है ये पेड़, छांव में खड़े होने से भी जा सकती है जान!

    धरती पर सिर्फ जहरीले जानवर ही नहीं, बल्कि ऐसे पौधे भी हैं जो अपनी घातक प्रकृति के कारण मौत का कारण बन सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताएंगे, जो सांप के जहर से भी ज्यादा खतरनाक है। इसे “मैनचिनिल” (Manchineel Tree) के नाम से जाना जाता है।

    मैनचिनिल पेड़, जिसे Hippomane mancinella कहा जाता है, दुनिया का सबसे जहरीला पेड़ माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर कैरेबियन और अमेरिका के कुछ तटीय इलाकों में पाया जाता है। इस पेड़ का हर हिस्सा—छाल, पत्तियां, फल और रस—खतरनाक जहर से भरा हुआ है।

    अगर आप सोच रहे हैं कि यह पेड़ सिर्फ खाने पर नुकसान पहुंचाता है, तो आप गलत हैं। इस पेड़ के नीचे खड़े होना भी खतरनाक साबित हो सकता है। बारिश के दौरान इसकी पत्तियों से टपकने वाला रस इतना जहरीला होता है कि यह त्वचा पर पड़ते ही गंभीर जलन और फफोले पैदा कर सकता है। यही कारण है कि कैरेबियन देशों में इस पेड़ पर चेतावनी लिखी जाती है कि “बारिश में इसके नीचे खड़ा न हों।”

    मैनचिनिल के फल को स्थानीय भाषा में “डैथ एप्पल” यानी “मौत का सेब” कहा जाता है। इसका सेवन करने पर गंभीर जहर शरीर में फैल सकता है, जिससे व्यक्ति की मौत तक हो सकती है। इसे गलती से खाना सांप के काटने से भी ज्यादा घातक हो सकता है।

    इस पेड़ का जहर इतना ताकतवर है कि कई बार जहरीले सांप भी इसके प्रभाव में आकर शिकार बन जाते हैं। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति ने इस पेड़ को कितना खतरनाक बनाया है।

    मैनचिनिल पेड़ देखने में एक साधारण तटीय पेड़ की तरह लगता है, लेकिन इसके खतरनाक प्रभाव इसे खास बनाते हैं। इसके करीब जाने से पहले चेतावनी संकेतों को जरूर पढ़ें।

    मैनचिनिल पेड़ प्रकृति का एक अनूठा और खतरनाक हिस्सा है। यह हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के प्रति जागरूक रहना कितना जरूरी है। जहरीले जीवों के साथ-साथ ऐसे पेड़ों से भी बचाव करना बेहद जरूरी है।

    इस पेड़ के बारे में जानकारी फैलाना जरूरी है, ताकि लोग इसके खतरों से सावधान रह सकें और अनजाने में किसी हादसे का शिकार न बनें।

  • Football Match के दौरान फैंस में हुई झड़प, Police Station जलाया, 100 से ज्यादा के मरने की आशंका, देखें वीडियो

    Football Match के दौरान फैंस में हुई झड़प, Police Station जलाया, 100 से ज्यादा के मरने की आशंका, देखें वीडियो

    गिनीः पश्चिमी अफ्रीकी के देश गिनी में एक फुटबॉल मैच के दौरान बड़ा हादसा हुआ है। जहां गिनी के दूसरे सबसे बड़े शहर एन’जेरेकोर में एक फुटबॉल मैच के दौरान प्रशंसकों के बीच हुई झड़प में दर्जनों लोगों की मौत हो गई। हालांकि, एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से बात करते हुए एएफपी को बताया, ‘अस्पताल में जहां तक आंख देख सकती है, वहां शव कतार में पड़े हैं, मुर्दाघर भरा हुआ है। लगभग 100 लोग मारे गए हैं।’ सोशल मीडिया पर इस हिंसा के कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। इस वीडियो में मैच के बाहर सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल दिख रहा है और कई शव जमीन पर पड़े हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने एन’जेरेकोर पुलिस स्टेशन में भी तोड़फोड़ की और आग लगा दी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘यह हिंसा मैच रेफरी द्वारा एक विवादित निर्णय के साथ शुरू हुआ। इसके बाद फैंस ने पिच पर हमला कर दिया।’ स्थानीय मीडिया ने कहा कि यह मैच गिनी के जुंटा नेता ममादी डौंबौया के सम्मान में आयोजित एक टूर्नामेंट का हिस्सा था। डौंबौया 2021 के तख्तापलट में सत्ता पर कब्जा कर लिया था और खुद को राष्ट्रपति के रूप में स्थापित किया था। पश्चिम अफ्रीकी देश में इस तरह के टूर्नामेंट आम हो गए हैं। डौंबौया की नजरें अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में संभावित चुनाव लड़ने और राजनीतिक गठबंधन बनाने पर टिकी हैं। डौंबौया ने सितंबर 2021 में राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को उखाड़ फेंककर बलपूर्वक सत्ता पर कब्जा कर लिया था। हैरान करने वाली बात यह है कि अल्फा ने ही डौंबौया को कर्नल के पद पर रखा था ताकि वह इस तरह के तख्तापलट से राज्य और उनकी रक्षा करने का काम करें। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव में डौंबौया ने 2024 के अंत तक एक नागरिक सरकार को सत्ता वापस सौंपने का वादा किय था, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसा नहीं करेंगे। सैन्य नेता ने जनवरी में असाधारण रूप से खुद को लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत किया और पिछले महीने उन्होंने खुद को सेना के जनरल के पद पर पदोन्नत किया। डौंबौया ने हाल फिलहाल में कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में रखवाया है, अदालतों में पेश किया या निर्वासन के लिए मजबूर कर दिया। इसके बावजूद डौंबौया के समर्थकों ने हाल ही में अगले राष्ट्रपति चुनाव में उनकी उम्मीदवारी के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है। अपने काफी प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद, गिनी एक गरीब राष्ट्र बना हुआ है। यह दशकों से सत्तावादी सरकारों द्वारा शासित है। डौंबौया उन कई अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने माली, बुर्किना फासो और नाइजर में साथी सैन्य नेताओं के साथ 2020 से पश्चिम अफ्रीका में सत्ता पर कब्जा किया है। गिनी के दक्षिण-पूर्व में स्थित एन’जेरेकोर, जहां संघर्ष हुआ, वहां की आबादी लगभग 200,000 लोगों की है।  
  • पत्नी के सिर पर हुआ खून सवार, पति का बेरहमी से कत्ल कर खुद को भी मारी गोली

    पत्नी के सिर पर हुआ खून सवार, पति का बेरहमी से कत्ल कर खुद को भी मारी गोली

    फ्लोरिडाः यहां एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है जहां एक महिला ने अपने पति का ही मर्डर कर दिया और उसके बाद उसने खुद भी आत्महत्या कर ली। घटना के बारे में दूसरों को तब पता चला जब उन्होंने बालकनी से नीचे जमीन पर खून को गिरते हुए देखा।

    जानकारी मुताबिक, 27 साल की मॉडल सबरीना कास्निकी ने मियामी के बीच क्लब हैलैंडेल कोंडो टावर में बुधवार रात को करीब साढ़े 12 बजे अचानक अपने 34 साल के पति पजतिम कास्निकी को 5 गोलियां मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। घटना के बाद आस-पास से गुजर रहे लोगों ने जब बालकनी में खून देखा तो वह सहम गए जिसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पति को मारकर खुद को मारने का कोई कारण अब तक पता नहीं चला है।

    मृतक पजतिम कास्निकी की बहन ने बताया कि उनकी भाभी सबरीना ने परिवार को तोड़ दिया था। मुझे डर है कि मेरी मां इस सदमे से कभी नहीं उभर सकेगी। हम इस वक्त बहुत ज्यादा दुखी हैं। पजतिम के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • खालिस्तानी आतंकी Arsh Dalla को लेकर कोर्ट का आया फैसला

    खालिस्तानी आतंकी Arsh Dalla को लेकर कोर्ट का आया फैसला

    नई दिल्ली: खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला को लेकर आज कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां कोर्ट में हुई सुनवाई आतंकी अर्श डल्ला को जमानत मिल गई। दरअसल, कनाडा की अदालत ने पिछले दिनों गिरफ्तार किए गए खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला को 30 हजार डॉलर के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 24 फरवरी, 2025 को होगी। खालिस्तान टाइगर फोर्स की कमान संभाल रहे अर्श डल्ला को कुछ समय पहले ही कनाडा पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

    पुलिस को उसके पास से कई हाईटेक हथियार भी मिले थे। सूत्रों के अनुसार अर्श डल्ला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के सीधे संपर्क में रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कनाडा में 28 अक्टूबर की रात खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला को गोली लगी थी। अर्श डल्ला अपने साथी गुरजंत सिंह के साथ कार में सवार होकर हॉल्टन इलाके से गुजर रहा था। इसी दौरान कार में रखे हथियार से एक्सिडेंटल फायर हो गया था। गोली डल्ला के दाहिने हाथ में लगी थी। जिसके बाद डल्ला और गुरजंत सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

    फिर उसे अरेस्ट किया गया। डल्ला ने तब पुलिस को खुद पर हुए हमले की एक फर्जी कहानी बताई थी। पुलिस ने जांच में कई खुलासे किए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कनाडा की पुलिस ने अर्श डल्ला की कार की तलाशी ली थी। फिर रूट भी चेक किया गया था। कनाडा की पुलिस को पता चला कि अर्श डल्ला की कार रास्ते में एक घर के बाहर कुछ देर रुकी थी। उस घर के गैराज से पुलिस को कई प्रतिबंधित हथियार और कारतूस मिले हैं। जांच में पता चला कि ये सभी हथियार अर्श डल्ला के ही हैं।

  • Canada सरकार ने दिया झटका, अब अंतर्राष्ट्रीय छात्र नहीं ले सकेंगे शरण

    Canada सरकार ने दिया झटका, अब अंतर्राष्ट्रीय छात्र नहीं ले सकेंगे शरण

    नई दिल्लीः कनाडा और भारत में चल रही तकरार का असर विदेश में रहने वाले भारतीयों पर पड़ रहा है। दरअसल, कनाडा सरकार द्वारा लगातार नियमों में बदलाव किए जा रहे है। वहीं अब आव्रजन मंत्री मार्क मिलर ने कहा कि आने वाले हफ्तों में कनाडा के इमिग्रेशन और शरण प्रणालियों में और अधिक सुधार प्रस्तावित किए जाएंगे। संघीय सरकार ने हाल ही में अगले 2 वर्षों में कनाडा में प्रवेश करने वाले स्थायी निवासियों की संख्या में महत्वपूर्ण कटौती की है और अस्थायी कर्मचारी परमिट के नियम को सख्त किया है। कनाडाई अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े बताते हैं कि शरणार्थी और शरण दावों पर कार्रवाई के लिए औसत प्रतीक्षा समय लगभग 44 महीने है।

    इमिग्रेशन मंत्री मार्क मिलर ने एक संसदीय समिति के समक्ष उपस्थित होकर कहा कि शरण प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है और इसे पूरी तरह से बदलना होगा। इमिग्रेशन और शरणार्थी बोर्ड (रिफ्यूजी बोर्ड) के पास अक्टूबर के अंत तक असालियम (शरण) के 2,60,000 से अधिक दावे विचाराधीन थे और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। कनाडा सरकार ने विजिटर वीजा पर आकर शरण का दावा करने वालों के मामलों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए कमर कस ली है और आने वाले दिनों में हजारों दावे खारिज हो सकते हैं। मार्क मिलर ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने गैर जवाब तरीके के साथ शरण दावे किए, जबकि वे बिल्कुल भी योग्य नहीं थे। उन्होंने कहा कि ऐसे हजारों अंतर्राष्ट्रीय छात्र हैं जिन्होंने शरणार्थी दावे दायर किए हैं, जिनकी सच्चाई से मिलर ने सवाल उठाए है।

    मिलर ने कहा, “शरण का दावा करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या बढ़ रही है, मुझे लगता है कि उनकी परिस्थितियों को देखते हुए बहुत कम उम्मीद है।” इससे पहले अपनी गवाही में मिलर ने कहा था कि छात्र वीजा पर अधिक से अधिक लोग शरण के दावे दाखिल कर रहे हैं। समिति में जब मिलर ने अपनी गवाही समाप्त कर रहे थे तो प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर पकड़े हुए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ” हमें वापिस ना भेजें “, माइग्रेंट वर्करस अलाइंस फार चेंज के समूह प्रदर्शनकारियों में एक ने मंत्री से कहा कि हम वे लोग हैं जिन्हें आप इस देश से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

    इस दौरान संसदीय सुरक्षा सेवा के अधिकारियों ने लगभग 20 लोगों के समूह को इमारत से बाहर निकाला। एनडीपी के इमिग्रेशन आलोचक जेनी क्वान ने हाल ही में इमिग्रेशन परिवर्तनों को वापस लेने का आह्वान किया, मिलर ने जवाब दिया कि कनाडाई नागरिक बनना कोई अधिकार नहीं है। बता दें कि अक्टूबर में कनाडा में 17,400 लोगों ने शरण का दावा किया था, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 20,000 दर्ज किया गया था। असाइलम के 14 हजार से अधिक दावे शरण छात्रों द्वारा किए गए थे। इमिग्रेशन मंत्री ने संसदीय समिति को बताया कि शरण प्रणाली में सुधारों के दौरान अंतरराष्ट्रीय छात्रों को शरण का दावा करने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।

    हालांकि नए नियम आने से पहले शरण के दावे बढ़ रहे हैं, लेकिन इन्हें जल्द से जल्द निपटाने की रणनीति बनाई जा रही है। इमिग्रेशन मंत्री ने अभी नये नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। इस बीच, टोरंटो विश्वविद्यालय में कानून की प्रोफेसर और मानवाधिकार इकाई की प्रमुख ऑड्रे मैकलीन ने अपने विचार साझा किए और कहा कि नए नियमों के तहत शरण के दावों को खारिज करने की प्रक्रिया कानूनी चुनौतियों में उलझ सकती है। किसी भी दावे को एकतरफा तौर पर फर्जी नहीं माना जा सकता। इमिग्रेशन मंत्री ने संसदीय समिति को संकेत दिया कि यह बेहतर होगा यदि इमिग्रेशन और शरणार्थी बोर्ड अधिक संसाधन आवंटित करे और निर्धारित समय सीमा के भीतर शरण दावों का समाधान करे।

    यहां बता दें कि कनाडा सरकार ने खुद माना है कि देश में अस्थायी वीजा पर लोगों की संख्या 30 लाख से ज्यादा हो गई है, जिनमें से बड़ी संख्या स्टडी वीजा और विजिटर वीजा पर लोगों की है। लगभग 2 लाख पूर्व-अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के वर्क परमिट समाप्त हो रहे हैं या समाप्त हो चुके हैं। जिसे देखते हुए आने वाले समय में देश में शरण चाहने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है। इमिग्रेशन अधिवक्ताओं ने इमिग्रेशन और शरणार्थी बोर्ड के बेहतर रिसोर्सिंग की दलील दी है ताकि यह अधिक दावों को तेजी से संसाधित कर सके और संभावित रूप से उच्च स्वीकृति दर वाले देशों के दावों को अधिक तेज़ी से हल कर सके क्योंकि उनकी सफलता की संभावना अधिक है।

     

  • पुलिस स्टेशन के पास Radha Govinda और Santaneshwar Temple पर हुआ हमला, देखें वीडियो

    पुलिस स्टेशन के पास Radha Govinda और Santaneshwar Temple पर हुआ हमला, देखें वीडियो

    नई दिल्लीः बांग्लादेश में हिंदू मंदिर पर कट्टरपंथियों पर लगातार हमले होने की घटनाए सामने आ रही है। वहीं आज आज जुमे की नमाज के बाद चटगांव में मंदिरों पर हमला होने की घटना सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार जुमे की नमाज के बाद चटगांव के कोतवाली पुलिस स्टेशन के पास राधा गोविंदा और शांतनेश्वरी मातृ मंदिर पर चरमपंथी संगठनों ने हमला किया। इसके साथ ही उन्होंने इलाके में रहने वाले सनातनी समुदाय पर भी हमला किया। आरोप है कि पुलिस और सेना के जवानों ने इस दौरान मदद नहीं की। वहीं इन हमालों के बाद इस इलाके के हिंदू अब पलायन को मजबूर हैं। लोग सुरक्षित ठिकानों पर जा रहे हैं। दरअसल, यह इलाका मुख्य रूप से हिंदू बहुल है, जिसमें 90% आबादी हिंदू समुदाय की है। इसके बावजूद जमात और बीएनपी के चरमपंथी कार्यकर्ताओं ने यहां घुसकर हिंदुओं के मंदिरों पर हमला किया और लोगों के साथ मारपीट की। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें चरमपंथी लोग हिंदुओं के घरों के गेटों को तोड़कर अंदर घुसकर मारपीट करते नजर आ रहे हैं। लोग डंडों से और ईंट पत्थर से हिंदुओं के पिटाई करते नजर आ रहे हैं। इस हमले का पूर्व मुख्यमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने विरोध किया है। आवामी लीग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदुओं के पक्ष में सवाल उठाते हुए लिखा, “आवामी लीग चटगांव में हिंदू समुदाय पर दिनदहाड़े हुए हमले की कड़ी निंदा और विरोध करती है। क्या बांग्लादेश में कोई हिंदू नहीं रहेगा?” बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लगातार हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। वहीं चरमपंथी संगठन खुलेआम हिंदुओं और उनके मंदिरों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में चटगांव में हिंसा को लेकर इस्कॉन के पुजारी चिन्मय दास को संगीन आरोपों के तहत जेल भेज दिया गया। वहीं एक वकील की हत्या मामले में अब कई और हिंदुओं को जेल भेजा जा रहा है। इसको लेकर भारत सरकार लगातार आवाज भी उठा रही हैम
  • भूस्खलन ने मचाया कहर, करीब 15 लोगों की मौत, 40 घर नष्ट

    भूस्खलन ने मचाया कहर, करीब 15 लोगों की मौत, 40 घर नष्ट

    बुलाम्बुलीः जहां भूस्खलन की दुखद घटना सामने आई है। पूर्वी युगांडा के 6 गांवों में भूस्खलन से करीब 15 लोगों की मौत हो गई तथा 113 अन्य लापता हैं। पुलिस के अनुसार 15 घायल लोगों को बचा लिया गया है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। युगांडा रेडक्रॉस सोसायटी ने बताया कि भूस्खलन में 40 घर नष्ट हो जाने के बाद 13 शव बरामद किए गए तथा बचाव कार्य अभी जारी है। अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़कर 30 तक हो सकती है।

    बुधवार रात भारी बारिश के बाद पहाड़ी जिले बुलाम्बुली में भूस्खलन हुआ। यह जिला राजधानी कंपाला से लगभग 280 किलोमीटर पूर्व में है। स्थानीय अधिकारियों मुताबिक, बचाव कार्य में सहायता के लिए भारी मशीन लाई जाएगी, लेकिन सड़कों पर कीचड़ है और अब भी बारिश हो रही है। बताया जा रहा है कि अब तक बरामद अधिकांश शव बच्चों के हैं।

  • बड़ा झटकाः सरकार ने ठुकराया Apple का 850 करोड़ का ऑफर, नहीं मिलेंगा IPhone 16

    बड़ा झटकाः सरकार ने ठुकराया Apple का 850 करोड़ का ऑफर, नहीं मिलेंगा IPhone 16

    नई दिल्लीः भारत सहित कई देशों में एप्पल आईफोन के दीवाने आपको मिल जाएंगे। कंपनी द्वारा हर साल कुछ नया लांच किया जाता है और एप्पल के दीवानों में उसे खरीदने की होड़ लगी रहती है। एप्पल कंपनी के दीवाने लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होकर कंपनी की नई सीरीज के फोन सहित अन्य सामान खरीदने में लग जाते है। वहीं दूसरी ओर एप्पल कंपनी ने हाल ही में नई iPhone 16 सीरीज को लॉन्च किया है, लेकिन इंडोनेशिया सरकार ने एप्पल iPhone 16 पर बैन लगा दिया है। दरअसल, यह बैन एप्पल द्वारा लोकल इन्वेस्टमेंट के नियमों का पालन न करने की वजह से लगाया गया है। हालांकि इस बैन को हटाने के लिए एप्पल कंपनी लगातार काफी प्रयास कर रही है। बताया जा रहा है कि हाल ही में एप्पल ने बैन को हटाने के लिए इंडोनेशिया सरकार के सामने 100 मिलियन डॉलर यानी लगभग 845 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट करने का ऑफर रखा था, लेकिन इंडोनेशियाई सरकार ने इस ऑफर को ठुकरा दिया है। यही नहीं सरकार ने iPhone 16 की बिक्री पर लगाए गए बैन को हटाने से पहले एप्पल के साथ आगे की बातचीत की मांग की है। इंडस्ट्री मंत्री अगुस गुमीवांग कार्तसस्मिता ने इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच एप्पल के इन्वेस्टमेंट में असमानता की आलोचना की है। दरअसल, कंपनी ने वियतनाम में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज में अरबों डॉलर का निवेश किया है, लेकिन इंडोनेशिया में एप्पल का इन्वेस्टमेंट अभी भी सीमित है, जबकि यह एक बड़ा और उभरता हुआ बाजार है। कार्तसस्मिता का इस मामले पर कहना है कि “हम चाहते हैं कि Apple यहां व्यापार करे, लेकिन हमें एक निष्पक्ष समाधान चाहिए।” उन्होंने Apple से वार्ता टीमें भेजने और समस्या का समाधान निकालने का अनुरोध किया। इंडोनेशिया ने iPhone 16 की सेल्स पर बैन इसलिए लगाया है, क्योंकि Apple लोकल रेगुलेशंस का पालन नहीं कर सका है। नियमों के अनुसार, 40% कंपोनेंट्स का लोकल लेवल पर सोर्स होना अनिवार्य है। सरकार चाहती है कि एप्पल लोकल मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट बढ़ाए।

    इंडोनेशियाई अधिकारियों ने प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कही ये 3 बातें

    Apple को 2023 के इन्वेस्टमेंट वादों को पूरा करना चाहिए। 2024-2026 के लिए सॉलिड इन्वेस्टमेंट प्लान्स प्रस्तुत करने होंगे। लोकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सेटअप करनी होगी। यह पहली बार नहीं है जब इंडोनेशिया ने विदेशी टेक दिग्गज कंपनियों पर कड़ा रुख अपनाया है। Google Pixel डिवाइस और TikTok शॉपिंग जैसे प्रोडक्ट्स पर भी इसी तरह के इन्वेस्टमेंट इश्यूज के चलते बैन लगाया गया था। भले ही एप्पल इंडोनेशिया में बड़ा स्मार्टफोन खिलाड़ी नहीं है, लेकिन देश की बड़ी आबादी कंपनी के लिए एक बड़ा बाजार है।
  • ISKCON पर बैन की तैयारी में सरकार!

    ISKCON पर बैन की तैयारी में सरकार!

    नई दिल्लीः बांग्लादेश में इस समय एक जटिल और संवेदनशील स्थिति बनी हुई है, जिसमें हिंदू समुदाय के खिलाफ हमलों और धार्मिक तनाव के साथ-साथ, ISKCON पर प्रतिबंध लगाने की संभावना को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है। बांग्लादेश की सरकार ने ISKCON को धार्मिक कट्टरपंथी संगठन के रूप में पेश किया है, और इसके खिलाफ कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

    इस मामले में, बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने यह दावा किया कि ISKCON एक कट्टरपंथी धार्मिक संगठन है, और इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। बांग्लादेश के उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर एक याचिका दायर की गई, जिसमें सरकार से यह पूछा गया था कि वह इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे। न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया कि वह देश की मौजूदा स्थिति और सरकार के रुख के बारे में विस्तृत जानकारी पेश करे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानून-व्यवस्था में कोई विघटन न हो।

    यह स्थिति इस तथ्य को भी उजागर करती है कि बांग्लादेश में धार्मिक तनाव बढ़ रहा है, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं के बीच। ऐसे में, इस्कॉन जैसे धार्मिक संगठन पर प्रतिबंध लगाने की सरकार की योजना धार्मिक असहमति और सामाजिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकती है।

    यह भी महत्वपूर्ण है कि बांग्लादेश का संविधान धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा पर आधारित है, और कुछ समय पहले ही बांग्लादेश के एक राजनीतिक नेता ने संविधान से धर्मनिरपेक्षता शब्द हटाने की मांग की थी। यह स्थिति सरकार के लिए न केवल आंतरिक, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संवेदनशील बनाती है।

    इसमें कोई संदेह नहीं कि बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता और कट्टरता के कारण वहां की सामाजिक और राजनीतिक संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है।