कनाडा के शहर सरे के 14100 ब्लॉक के 61 एवेन्यू के पास दो पड़ोसियों के बीच हुए झगड़े के दौरान पंजाबी मूल के फिल्म निर्माता मनबीर मैनी अमर की हत्या किए जाने की खबर सामने आई है। पुलिस द्वारा इस झगड़े की जांच शुरू कर दी है। यह झगड़ा वुडवर्ड हिल के पास दोपहर करीब दो बजे हुआ था। मनबीर मैनी अमर की हत्या के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है लेकिन उसके नाम का खुलासा नहीं किया है।
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जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद में विस्फोट, 14 की मौत, 200 घायल
काबुलः अफगानिस्तान के हेरात में शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान एक मस्जिद में विस्फोट होने का मामला सामने आया है। अफगानिस्तान के हेरात प्रांत की गुजरगाह मस्जिद में बम विस्फोट से 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 लोग बुरी तरह घायल हैं। अस्पताल में इन घायलों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल में न तो पर्याप्त संख्या में डॉक्टर हैं और न ही सुविधाएं। इस धमाके में मस्जिद के इमाम मौलवी मुजीब रहमान अंसारी की मौत हो गई है। स्थानीय सूत्रों के हवाले से टोलो न्यूज ने ये खबर दी है। जबकि अभी तक इस बारे में तालिबान की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अफगानिस्तान में पत्रकार बिलाल सरवरी ने ट्विटर हैंडल से घटना के बारे मेंं दी है। उन्होंने कहा है कि धमाके मेंं बुरी घायल हुए लोगों को खून की जरूरत है और अभी अस्पताल में खून नहीं है। बहुत कम संख्या में डॉक्टर हैं। सोशल मीडिया पर धमाके के बाद के कुछ वीडियो डाले गए हैं। जिनसे साफ है कि हेरात में गुजरगाह मस्जिद में विस्फोट के बाद काफी बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। इस विस्फोट में हताहतों की संख्या बहुत अधिक है।
गौरतलब है कि हाल ही में अफगानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना की वापसी और तालिबान के सत्ता में आने के एक साल पूरे हुए हैं। तालिबान पिछले अगस्त में आसानी से सत्ता में आ गया था, जब अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं ने 20 साल के संघर्ष के बाद सभी विदेशी सैनिकों की जल्दबाजी में वापसी कराई थी। हेरात में गुजरगाह मस्जिद के अंदर हुए विस्फोट में मौलवी मुजीब अंसारी मारे गए, उनको इस्लाम का एक बड़ा विद्वान और धार्मिक नेता माना जाता है। अंसारी तालिबान से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में से एक थे। मौलवी मुजीब रहमान अंसारी को तालिबान का करीबी और एक कट्टरपंथी मौलवी माना जाता था।
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अब कनाडा जाना हुआ महंगा, पंजाब के छात्रों के लिए आई ये बड़ी समस्या
कनाडा के अलग-अलग शहरों में स्थित यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में सितंबर महीने से नया सत्र शुरू हो गया है। अंतिम समय में वीजा की कमी के कारण हजारों छात्र महंगे हवाई टिकट खरीदने को मजबूर हैं। फिलहाल दिल्ली से टोरंटो के लिए सबसे सस्ता हवाई टिकट 1 लाख 67 हजार रुपये के औसत आधार मूल्य के साथ उपलब्ध है और टैक्स और चार्जिस आदि लगाने के बाद यह टिकट लगभग 2 लाख रुपये में पड़ रही है।
ये उड़ानें एक या दो स्टॉप के साथ 26 से 30 घंटे में कनाडा पहुंचती हैं। 16 से 20 घंटे सीधे या एक या दो घंटे के स्टॉपेज वाले टिकटों की कीमत 2 लाख 20 हजार से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। लेकिन अगर आप तत्काल टिकट लेना चाहते हैं तो 3-3 लाख रुपये तक का टिकट मिल रही है। ऐसे में टिकटों की स्थिति में छात्रों का कनाडा जाना काफी महंगा हो रहा है। इस महंगी कीमत से छात्र और उनके अभिभावक परेशान हो रहे हैं।
इस संबंध में कैनेडियन डॉलर खरीदने आए छात्रों ने बताया कि फिलहाल डॉलर 63.50 से 64 रुपये के भाव पर मिल रहा है, जबकि एक्सचेंज रेट 60.46 रुपये है। कई छात्र शुरू में अपने साथ रोजाना के खर्चे के लिए 5 से 10 हजार डॉलर लेकर जाते हैं और वर्तमान में हजारों छात्र कनाडा जा रहे हैं। दूसरे, कोरोना के कारण पिछले दो साल से कनाडा से बहुत कम लोग भारत आ रहे हैं, जिससे खुले बाजार में कैनेडियन डॉलर की कमी है।
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अब इस देश में हुए श्रीलंका जैसे हालात, कई लोगों की मौत, कर्फ्यू लागू, देखें वीडियो
बगदादः श्रीलंका संकट याद होगा आपको! दो महीने पहले की ही बात है। आम जनता राष्ट्रपति भवन में घुस गई थी। हर तरफ उत्पात और हिंसा का माहौल था। अब बिलकुल ऐसे ही हालात एक और देश में बन गए हैं। यहां भी आम जनता राष्ट्रपति भवन में घुस गई है। स्विमिंग पूल से लेकर अन्य सामानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अराजकता और अव्यवस्था से भर रहे इस देश का नाम है इराक। इराक सेना ने बढ़ते तनाव को शांत करने करने के लिए से देश में कर्फ्यू की घोषणा कर दी है।
राष्ट्रपति भवन रिपब्लिकन पैलेस में घुसें प्रदर्शनकारी
हालात ये हैं कि इराक की राजधानी बगदाद में फैली अराजकता अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। वीडियोज में देखा जा सकता है कि किस तरह उग्र प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन रिपब्लिकन पैलेस में घुस गए हैं। स्विमिंग पूल में गोते लगाए जा रहे हैं। सामानों का इस्तेमाल किया रहा है। कई जगह पर हिंसा और आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं।
मशहूर नेता धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र ने की थी राजनीति से संन्यास की घोषणा
बता दें कि सोमवार को इराक के मशहूर नेता धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र ने देश की राजनीति से संन्यास की घोषणा की थी। इसके बाद उनके सैकड़ों समर्थकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि इस पूरे माहौल की जड़ें अक्टूबर 2021 से जुड़ी हैं। साल 2021 के अक्टूबर महीने में इराक में आम चुनाव हुए थे। इस दौरान धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र की पार्टी ने सबसे अधिक सीटें जीती थीं लेकिन वह बहुमत तक नहीं पहुंच पाए थे। तब बहुमत हासिल करने के लिए उन्होंने ईरान समर्थित शिया प्रतिद्वंद्वियों के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था।
अल-सद्र के संन्यास की घोषणा के बाद उनके समर्थक हुए उग्र
इसके बाद इराक के अन्य राजनीतिक दलों ऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ब्लॉक की तरफ से मोहम्मद अल-सुडानी के नाम का ऐलान कर दिया। लेकिन इराक की जनता मोहम्मद अल-सुडानी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं चाहती। उनका कहना था कि किसी सूडानी को देश कमान नहीं सौंपने देंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस वक्त भी उनके समर्थक प्रतिद्वंद्वियों को सरकार बनाने से रोकने के लिए संसद में घुस गए थे। अब एक बार फिर जब अल-सद्र ने जब संन्यास की घोषणा की है तो उनके समर्थक उग्र हो गए हैं। हालांकि राजनीतिक जानकार अल-सदर के इस कदम को भी राजनीति बढ़त हासिल करने का एक दांव मान रहे हैं। हालांकि इस सबके बीच देश के हालात जरूर खराब होते नजर आ रहे हैं।
अब तक के 5 बड़े अपडेट
1. इराक सेना ने बढ़ते तनाव को शांत करने करने के लिए से देश में कर्फ्यू की घोषणा कर दी है।
2. धर्मगुरु अल सद्र के समर्थकों से अपील भी की गई है कि वह हिंसक प्रदर्शन रोकें और सरकारी आवास से तुरंत बाहर आ जाएं। फिर भी आशंका जताई जा रही है कि इराक में हालात खराब हो सकते हैं।
3.रिपोर्ट्स के मुताबिक इन विरोध प्रदर्शनों में 300 प्रदर्शनकारी घायल हो गए। अल-सदर के सर्मथकों और सुरक्षाबलों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 प्रदर्शनकारियों की मौत की बात भी कही जा रही है।
4. बता दें कि इराक में पिछले 10 महीने से ना तो सरकार है ना ही कोई सक्रिय मंत्रीमंडल। यह वजह भी है कि देश में लगातार अराजकता की स्थिति बढ़ती जा रही है।
5. यह भी बताया जा रहा है कि अल सद्र बीते एक महीने से जल्द चुनाव कराने और संसद को भंग करने की मांग कर रहे थे। अब उन्होंने ट्विटर पर अपने संन्यास का ऐलान करते हुए लिखा था- मैं अपने फाइनल विड्रॉ की घोषणा करता हूं।
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कनाडा में दो ट्रकों की टक्कर, वाहनों को लगी आग, जिंदा जला पंजाबी युवक
मोगाः कनाडा में दर्दनाक घटना सामने आई है। जहां गांव घोलियां के रहने वाले जगसीर सिंह गिल्ल की कनाडा के ब्रिटिश कोलंबियां में हुए सड़क हादसे दौरान मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि इस हादसे में दोनों ट्रकों की टक्कर के बाद वाहनों को आग लग गई। वहीं इस हादसे में मोगा के रहने वाले युवक की मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक नेशनल हाईवे 1 पर जानवरों को ले जा रहा एक ट्रक ओवरटेक करते समय उनके ट्रक से जा टकराया। इससे उनका ट्रक पलट गया और दोनों वाहनों में आग लग गई। मृतक के पिता कुलवंत सिंह ने बताया कि गिल का शरीर आंशिक रूप से जल गया था और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हादसे में दूसरे ट्रक के चालक की भी जलने से मौत हो गई। लेकिन उसकी अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है। दुर्घटना के बाद ट्रांस-कनाडा हाईवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
मृतक नौजवान करीब 6 साल पहले अपने अच्छे भविष्य के लिए कनाडा गया था। मृतक के परिवार वाले भी कनाडा ही रहते हैं और लड़का ट्रक ड्राईवर था। आज सुबह जैसे ही इस घटना की खबर जैसे मिली तो परिवार सहित पूरे गांव में मातम छा गया।
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पंजाब को अलग देश बनाने की साजिश, लदंन के बाद इस देश में ट्रक रैली निकाल रहे खालिस्तानी समर्थक
ओटावा: पंजाब को अलग देश बनाने की नापाक साजिश रच रहे खालिस्तानी आतंकियों ने ब्रिटेन के बाद अब कनाडा में जनमत संग्रह की तैयारी तेज कर दी है। भारत में प्रतिबंधित आतंकी संस्था सिख फॉर जस्टिस कनाडा में खालिस्तान पर 18 सितंबर को जनमत संग्रह का आयोजन करने जा रही है। भारत के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाला गुर पतवंत सिंह पन्नू इस आतंकी गुट का प्रमुख है। पन्नू पाकिस्तान के इशारे पर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। इससे कनाडा की राजनीति बहुत गरम हो गई है और खालिस्तान पर जनमत संग्रह का भारतीयों ने कड़ा विरोध किया है।
भारत समर्थक सिख कर रहे कड़ा विरोध
इस जनमत संग्रह में आतंकी संस्था सिख फॉर जस्टिस कनाडा में रह रहे लोगों से यह पूछ रहा है कि क्या पंजाब को एक अलग देश बनाना चाहिए ? इससे पहले सिख फॉर जस्टिस ने नवंबर 2021 में ब्रिटेन में जनमत संग्रह कराने का नाटक किया था। सिख फॉर जस्टिस की इस नापाक मुहिम का कनाडा में रह रहे भारत समर्थक सिख कड़ा विरोध कर रहे हैं। भारत सरकार ने भी इस जनमत संग्रह का कड़ा विरोध किया है।
कनाडा में ट्रक रैली निकाल रहे खालिस्तानी
खालिस्तान समर्थक आतंकी 18 सितंबर को जनमत संग्रह कराने से ठीक पहले कनाडा में ट्रक रैली निकाल रहे हैं, बड़े-बड़े पोस्टर लगा रहे हैं और टोरंटो में गुरुद्वारे के अंदर सिखों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस जनमत संग्रह में एक और खतरनाक बात यह है कि इसे कनाडा सरकार के स्वामित्व वाले और संचालित किए जाने वाले कम्युनिटी सेंटर में अंजाम दिया जाएगा। सिख फॉर जस्टिस ने इस जनमत संग्रह की शुरुआत 31 अक्टूबर 2021 को लंदन में की थी।
इसके बाद स्विटजरलैंड और इटली में भी इस जनमत संग्रह को कराया गया। इन जनमत संग्रह को पाकिस्तान से भरपूर समर्थन मिल रहा है और सिखों के नाम पर पाकिस्तानी वोट देने पहुंचे थे। सिख फॉर जस्टिस ने दावा किया था कि लंदन में हुए जनमत संग्रह में 10 से 12 हजार लोगों ने हिस्सा लिया लेकिन ब्रिटेन पर नजर रखने वाले लोगों का कहना था कि केवल 100 से लेकर 150 लोग ही इसमें शामिल हुए थे।
ब्रिटेन में सिख आतंकियों ने दिया था लालच
यही नहीं 3 खालिस्तान समर्थक गुरुद्वारों को छोड़कर किसी ने इस कथित जनमत संग्रह के लिए अपने प्लेटफार्म की अनुमति नहीं दी थी। खालिस्तान समर्थक ब्रिटेन में गैरकानूनी तरीके से रह रहे सिख प्रवासियों तक पहुंचे और उन्हें नागरिकता सहायता देने का लालच दिया। साथ ही जनमत संग्रह में हिस्सा लेने के लिए पैसा भी दिया था।
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पड़ोसी देश में बिक रहा 500 रुपये किलो टमाटर, 400 में प्याज, गहराया आर्थिक सकंट
पाकिस्तानः पड़ोसी देश पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से अप्रत्याशित संकटों का सामना कर रहा है। पहले आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की हालत पस्त हुई। अभी इसका कोई हल निकल भी नहीं पाया था, उसके पहले राजनीतिक संकट ने पाकिस्तान को जकड़ लिया, जिसका परिणाम सत्ता परिवर्तन के रूप में देखने को मिला। अब पाकिस्तान के ऊपर प्रकृति कहर बरपा रही है। देश के कई हिस्सों में बाढ़ की भयावह स्थिति बनी हुई है। एक के बाद एक आ रहे इन संकटों के बीच पाकिस्तान में आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आसमान छू रही महंगाई के बीच अब सब्जियों के दाम लोगों को खून के आंसू रुला रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में इन दिनों टमाटर के भाव 500 रुपये किलो पर पहुंच चुके हैं, तो प्याज 400 रुपये किलो है।
भारत से टमाटर और प्याज का आयात करने पर हो रहा विचार
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट में लाहौर के सब्जी मार्केट के डीलर्स के हवाले से बताया गया है कि बेतहाशा बढ़ते दामों के बीच पाकिस्तान की सरकार भारत से टमाटर और प्याज का आयात करने पर विचार कर रही है। बता दें कि भयानक बाढ़ के कारण सब्जियों व अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके चलते पाकिस्तान में सब्जियों समेत कई जरूरी खाने-पीने की चीजों की कमी का संकट पैदा हो गया है। सिर्फ टमाटर और प्याज ही नहीं बल्कि लाहौर समेत पाकिस्तानी पंजाब के कई हिस्सों में सभी सब्जियों के भाव रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
बलूचिस्तान और सिंध में बाढ़ से हजारों एकड़ फसल तबाह
रिपार्ट के अनुसार, बलूचिस्तान और सिंध में बाढ़ के कारण टमाटर, प्याज और अन्य सब्जियों की हजारों एकड़ फसल तबाह हो गई है। ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि पाकिस्तान की सरकार वाघा बॉर्डर के जरिए भारत से टमाटर और प्याज मंगाने पर विचार कर रही है। अभी लाहौर समेत पाकिस्तानी पंजाब के अन्य शहरों को तोरखम बॉर्डर के जरिए अफगानिस्तान से टमाटर और प्याज की सप्लाई मिल रही है।
अफगानिस्तान से मिल रही सप्लाई
लाहौर मार्केट कमिटी के सेक्रेटरी शहजाद चीमा ने बताया, ‘तोरखम बॉर्डर पर हर रोज टमाटर के 100 कंटेनर और प्याज के करीब 30 कंटेनर मिल रहे हैं। इनमें से दो कंटेनर टमाटर और एक कंटेनर प्याज हर रोज लाहौर आ रहा है। यह पाकिस्तानी पंजाब की राजधानी लाहौर में इनकी मांग के हिसाब से बहुत कम है। शिमला मिर्च जैसी सब्जियां भी बाढ़ के कारण नहीं मिल रही हैं। ऐसे में सरकार भारत से टमाटर और प्याज मंगा सकती है।’
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दो पत्रकारों की गोली मारकर हत्या, अपराधियों की तलाश कर रही पुलिस
कोलंबियाः दो पत्रकारों की मोटरसाइकिल पर आए अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने कहा कि रविवार को दोनों पत्रकार अपनी कार से एक कार्यक्रम से लौट रहे थे इसी दौरान उन पर हमला किया गया। पुलिस ने बताया कि मरने वालों में एक ऑनलाइन रेडियो स्टेशन के निदेशक लेइनर मोंटेरो और एक ऑनलाइन समाचार वेबसाइट के निदेशक डिलिया कॉन्ट्रेरास थे, दोनों को फंडेसियन की नगर पालिका के गोली मार दी। दोनों साथ में एक गांव के कार्यक्रम से लौट रहे थे। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘हम मगदलीना के नागरिकों के लिए कम से कम समय में इस दुखद मामले को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पत्रकारों को उनके यूनियन, परिवार और परिचितों के बीच बहुत सराहा गया था। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या हत्याएं पत्रकारों के पेशे से संबंधित थीं। वहीं फाउंडेशन फॉर प्रेस फ्रीडम ने मामले की जल्द से जल्द जांच करने और जांच के दौरान उनके काम को ध्यान में रखने का आह्वान किया।
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भारत के इस पड़ोसी देश में गहराया आर्थिक संकट…
नई दिल्लीः भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आर्थिक संकट गहराने लगा है। यहां पर श्रीलंका जैसे हालात नजर आने लगे हैं। लोग सड़कों पर उतर गए हैं। देश के वामपंथी संगठनों ने बीते दिन हड़ताल की। लेफ्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (एलडीए) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल के दौरान जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन हुए। एलडीए से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार लिया गया।
ईंधन की महंगाई को देखते हुए बांग्लादेश की सरकार ने बिजली का उपभोग घटाने के कई उपाय घोषित किए हैं। इसके तहत अब स्कूलों को हर हफ्ते एक दिन अतिरिक्त बंद रखने का फैसला किया गया है। बांग्लादेश में शुक्रवार को स्कूलों छुट्टी रहती है। अब वे शनिवार को भी बंद रहेंगे। सरकारी दफ्तरों और बैंकों में कामकाजी घंटे घटा दिए हैं। ये तमाम उपाय बुधवार से लागू हो गए। गुरुवार को इसके खिलाफ जन विरोध का नजारा देखने को मिला।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार आ रही गिरावट के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की सरकार को कमखर्ची लागू करने के ये उपाय अपनाने पड़े हैं। पिछले महीने बांग्लादेश के कच्चे तेल के आयात बिल में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी। अब सरकार ने कहा है कि वह रूस से सत्ता तेल हासिल करने की संभावना तलाश रही है।
देश में महंगाई की दर भी काफी ऊंची हो गई है। इस कारण हाल के हफ्तों में पहले भी कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। अनाज की महंगाई पर काबू पाने के लिए हसीना सरकार ने रूस, वियतनाम और भारत से अनाज आयात करने का समझौता किया है। इसके तहत 83 लाख लाख टन गेहूं और चावल का आयात किया जाएगा।
विश्लेषकों के मुताबिक इससे देश में अनाज की महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी, लेकिन साथ ही विदेशी मुद्रा का संकट और गहराने की आशंका है। एक ताजा रिपोर्ट में बांग्लादेश में बन रही हालत की तुलना पिछले वर्ष की श्रीलंका की स्थिति से की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी हाल तक बांग्लादेश ने कोरोना महामारी और यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया भर में लग रहे आर्थिक झटकों से अपने को बचा रखा था। इसकी वजह देश का मजबूत निर्यात सेक्टर है। लेकिन अब हालत बदल रहे हैं। इसे देखते हुए शेख हसीना सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 4.5 बिलियन डॉलर का कर्ज मांगा है।
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अमेरिका: गुरुद्वारे के बाहर दो सिखों के ग्रुपों में फायरिंग, मची भगदड़, 3 घायल, देखें वीडियो
वॉशिंगटन: अमेरिका के कैलिफोर्निया में गुरुद्वारे के पास गोलीबारी का मामला सामने आया है। घटना स्टॉकटन में हुई है। स्थानीय पुलिस ने गोलीबारी की घटना की पुष्टि की है। अधिकारियों को स्थानीय समय के मुताबिक शनिवार शाम की घटना की जानकारी हुई। घटना में तीन लोग घायल हो गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के मुताबिक कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं है। घटना दो सिख ग्रुप के बीच विवाद का नतीजा बताया जा रहा है। गोली चलाने वाले और पीड़ित दोनों ही सिख हैं।
हालांकि पहले खबर थी कि गोलीबारी गुरुद्वारे के अंदर हुई है, लेकिन इसे गुरुद्वारा प्रशासन ने नकार दिया है। गुरुद्वारा प्रशासन की ओर से एक विज्ञप्ति में कहा गया कि घटना गुरुद्वारा के अंदर नहीं हुई है। इसके साथ ही ये भी कहा गया कि गोलीबारी गुरुद्वारे की हद के बाहर सड़क पर हुई है। गुरुद्वारा कमेटी ने कहा कि भारोत्तोलन के कार्यक्रम को कराया जा रहा था। गोलीबारी का उससे भी कोई लेना देना नहीं है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में कहा कि जांच चल रही है। वहीं सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसे गोलीबारी के समय बनाया गया है। वीडियो को पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन ने ट्वीट किया है जिसमें मंच पर कार्यक्रम चलता दिख रहा है। इसी बीच कई राउंड गोलियों की आवाज सुनाई देती है। आवाज सुन कर पंडाल में बैठे हुए लोगों में अफरा तफरी मच जाती है। लोग पंडाल से भागने लगते है।
