मोहाली: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने 16 नंवबर को पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद से अध्यक्ष पद खाली चल रहा था। वहीं आज नए अध्यक्ष का चुनाव आज होने जा रहा है। इसके लिए पार्टी ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह चुनाव अकाली दल की कार्यसमिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। चुनाव से पहले पार्टी ने अपने सदस्यता अभियान को 20 जनवरी से 20 फरवरी तक चलाया था, जिसमें 25 लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया था।
पार्टी के नेताओं का मानना है कि यह सदस्यता अभियान संगठन को और मजबूत करेगा और पार्टी की ताकत बढ़ेगी। सुखबीर बादल के इस्तीफे को पार्टी की कार्यसमिति ने मंजूर किया था। पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने 10 जनवरी को यह जानकारी दी थी कि बादल का इस्तीफा कार्यसमिति की बैठक के बाद स्वीकृत किया गया। इस निर्णय के बाद से पार्टी में बदलाव की उम्मीदें बढ़ गई हैं और नए अध्यक्ष का चुनाव आज तय करेगा कि पार्टी की दिशा किस ओर जाएगी।
इससे पहले, 30 अगस्त, 2024 को सुखबीर बादल ने सक्रिय नेतृत्व से हटकर बलविंदर सिंह भुंदर के नेतृत्व में एक कार्यसमिति का गठन किया था, जो पार्टी के दैनिक कार्यों को देखेगी। यह निर्णय अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के निर्देशों के बाद लिया गया था, जिसमें शिअद से बादल के इस्तीफे को लागू करने का आदेश दिया गया था। यह निर्णय दिसंबर की शुरुआत में अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के निर्देश के बाद लिया गया, जिसमें शिअद से बादल के इस्तीफे के संबंध में 2 दिसंबर के आदेश को लागू करने का आग्रह किया गया था।
यह स्वीकृति पार्टी मुख्यालय में कार्यसमिति की बैठक के दौरान हुई। अकाल तख्त ने 2 दिसंबर को 2007 से 2017 तक पंजाब में शिअद की सत्ता के दौरान हुई ‘गलतियों’ के लिए बादल एवं अन्य नेताओं को धार्मिक सजा सुनाई थी। पिछले साल 30 अगस्त को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ अकाल तख्त ने बादल को तनखैया घोषित किया था।









अब अगले चुनाव तक पंजाब में नशे को पूरी तरह से खत्म करने करने और तस्करों पर सख्ती करने की योजना है। वहीं नशे को रोकने के लिए सरकार ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत नशे की रोकथाम और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने सभी डिप्टी कमिश्नरों (DCs) को अपने-अपने जिलों में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुनर्वास और नशा मुक्ति केंद्रों को पूरी तरह से दवाइयों, टेस्टिंग किट और आवश्यक स्टाफ से लैस किया जाए ताकि नशे के आदी व्यक्तियों का उचित इलाज हो सके।
इस अभियान के तहत आईएएस अधिकारी संदीप कुमार सभी नशा मुक्ति केंद्रों का दौरा करेंगे और उनकी स्थिति का जायजा लेंगे। वह किसी भी प्रकार की कमी या लापरवाही की सीधी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान को उच्च स्तर पर मॉनिटर किया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने आदेश जारी करते हुए कहा कि सभी डिप्टी कमिश्नरों को दो दिनों के भीतर अपने जिलों के नशा मुक्ति केंद्रों को पूरी तरह से सुसज्जित करना होगा। इनमें आवश्यक दवाइयां, बुप्रेनोर्फिन, टेस्टिंग किट और पर्याप्त मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी जिले में पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था में कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य को नशामुक्त बनाने के लिए अपनी मंशा साफ कर दी है। सरकार न केवल ड्रग तस्करों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी, बल्कि नशे के आदी लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए पुनर्वास केंद्रों को भी पूरी तरह से तैयार करेगी। राज्य के सभी जिलों में यह अभियान एक साथ चलाया जाएगा और इसकी निगरानी उच्च स्तर पर की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि पंजाब को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




जांच अधिकारी, रिटायर्ड जज बी.आर. बंसल ने सभी आरोपों को सही ठहराया और पाया कि वरिंदरपाल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट और सरकार के आदेशों की अवहेलना करते हुए निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया। इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) अनुराग वर्मा ने 24 फरवरी 2025 को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई सरकारी नियमों और आदेशों का उल्लंघन करने के कारण की गई, जिससे यह एक महत्वपूर्ण कदम बन गया है।
दिल्ली चुनाव के बाद पंजाब सरकार करप्शन के खिलाफ इस बार काफी सख्त है। भ्रष्टाचार की शिकायत आने पर सबसे पहले श्री मुक्तसर साहिब के डीसी को 2016 बैच के आईएएस अफसर राजेश त्रिपाठी को सस्पेंड किया था। इसके बाद उनके खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू की है।