Punjab News: Shambhu Border को लेकर बेनतीजा रही किसानों के साथ मीटिंग

बिना ट्रैक्टर-ट्रालियों के दिल्ली जाने से किसानों ने किया इनकार

पटियालाः पंजाब व हरियाणा के आला पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की पटियाला के पुलिस लाइन में किसान जत्थेबंदियों के साथ शंभू बॉर्डर को लेकर बैठक हुई। दरअशल यह बैठक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले रखी गई। बताया जा रहा हैकि किसानों के साथ हुई बैठक करीब एक घंटा चली, लेकिन इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। दरअसल, बैठक में किसानों ने बिना ट्रैक्टर-ट्रालियों के दिल्ली जाने से साफ इन्कार कर दिया है। बैठक में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को हो रही असुविधा का हवाला देते हुए किसान जत्थेबंदियों को शंभू बॉर्डर खोलने के लिए कहा। जवाब में किसान नेताओं ने कहा कि रास्ता किसानों ने नहीं, बल्कि हरियाणा सरकार ने बंद किया है। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसान मांगों को लेकर केंद्र से बात करना चाहते हैं, तो फिर वह ट्रैक्टर-ट्रालियों के बिना जाएं। इस पर किसानों ने कहा कि ट्रैक्टर-ट्रालिया उनके लिए दूसरा घर हैं। हर मौसम में ट्रैक्टर-ट्रालियां किसानों का बचाव करती हैं। इसलिए ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ ही किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए। बैठक में पंजाब व हरियाणा के एडीजीपी (ला एंड आर्डर), एसएसपी पटियाला नानक सिंह, डीसी पटियाला शौकत अहमद परे, अंबाला के एसएसपी व डीसी ने भाग लिया। दोनों किसान जत्थेबंदियों की तरफ से भी करीब सात मेंबरों की टीम ने शिरकत की। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बातचीत के जरिये मामले के हल को बनाई जाने वाली कमेटी के नामों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। डल्लेवाल ने कहा कि बैठक में पुलिस अधिकारियों ने मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला देकर बिना ट्रैक्टर-ट्रालियों के किसानों को जाने के लिए कहा। इसके जवाब में किसानों ने कहा कि अगर एक्ट की ही बात है, तो ऐसे में ट्रैक्टर-ट्रालियां सड़क पर चढ़ ही नहीं सकती हैं। लेकिन किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में ही अपनी फसलें बेचने के लिए 50-50 किलोमीटर दूर जाते हैं। यही नहीं 13 फरवरी को जब पंजाब के कोने-कोने से किसान शंभू व खन्नौरी बॉर्डरों पर पहुंचे थे, उस समय भी ट्रैक्टर-ट्रालियों पर ही आए थे। तब भी कानून व्यवस्था का कोई मसला खड़ा नहीं हुआ था। इसलिए जत्थेबंदियों की मांग है कि किसानों को ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ ही दिल्ली जाने की अनुमति दी जाए। डल्लेवाल ने कहा कि बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि किसानों का निशाना रास्ते रोकना नहीं है। किसान केवल अपनी बात रखने के लिए दिल्ली जाना चाहते हैं। डल्लेवाल ने कहा कि किसान मांगों को लेकर बात करने के लिए केंद्र सरकार से राजी हैं। लेकिन पहले चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर सरकार ने बात करने से पल्ला झाड़ लिया। लेकिन जून में नई सरकार बनाने के बावजूद अब तक बात करने को कोई न्यौता नहीं दिया है। इससे सरकार की नीयत साफ होती है। डल्लेवाल ने कहा कि किसान बॉर्डरों पर डटे रहेंगे। रास्ते खुलते ही ट्रैक्टर-ट्रालियों पर दिल्ली के लिए कूच किया जाएगा।

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