किश्तवाड़ः जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में शनिवार तड़के छत्रू इलाके में बादल फटने से भारी तबाही देखने को मिली। बादल फटने के कारण नेशनल हाईवे बंद हो गया। वहीं कई गाड़ियां पानी के तेज बहाव में बह गई। मिली जानकारी के अनुसार जिले के चत्रू इलाके में शुक्रवार देर रात करीब 2ः 30 मिनट पर बादल फटने की घटना हुई। इस दौरान लोगों की संपत्ति को भी नुकसान हुआ है। इससे कुछ कमर्शियल आउटलेट और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं शोपियां जिले के पेहलीपोरा इलाके में बादल फटने के बाद स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स तेजी से बचाव और लोगों को सुरक्षित निकालने का ऑपरेशन चलाया।
जोरदार बारिश की वजह से पानी और कीचड़ का तेज बहाव हुआ, जिससे इलाके के पांच घरों और एक स्कूल की बिल्डिंग में पानी भर गया। इस हादसे पर केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर जानकारी साझा की। पोस्ट में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि बादल फटने की खबर मिलने के बाद उन्होंने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर (DC) पंकज कुमार शर्मा से बात की। उन्होंने कहा, “आज सुबह छत्रू इलाके में बादल फटने की खबर मिलने के बाद मैंने किश्तवाड़ के DC पंकज कुमार शर्मा से बात की। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
कुछ कमर्शियल आउटलेट और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, जिसके लिए उचित मुआवज़ा दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इलाके में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (समय से पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली) को मज़बूत करने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “स्थानीय निवासियों को भरोसा दिलाने के लिए यह बताना ज़रूरी है कि पिछले साल चसोती में बादल फटने की घटना के बाद, भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने किश्तवाड़ और मछैल में दो अत्याधुनिक ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ लगाए हैं।
इससे पहले 19 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के राजौरी में भारी बारिश और उसके बाद बादल फटने से ज़बरदस्त भूस्खलन हुआ। इससे थन्नामंडी-DKG-बुफलियाज़ सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। यह सड़क बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) का एक अहम प्रोजेक्ट है, जो राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती ज़िलों को कश्मीर घाटी से जोड़ने के लिए बहुत ज़रूरी है। भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आ गई, जिससे थन्नामंडी और बुफलियाज़ के बीच कई जगहों पर नई बनी सड़क के हिस्से, पुलिया और बड़े-बड़े पेड़ बह गए। 13 दिन बाद भी यह सड़क ट्रैफ़िक के लिए बंद है और गाड़ियों को BG (बिंबर गली) रूट से भेजा जा रहा है।
