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पंजाब

Power Cut in Punjab: पंजाब में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली संकट गहराया, जालंधर समेत कई शहरों में आज भी लगेंगे लंबे कट

Mahabir
Last updated: April 24, 2026 12:00 am
Mahabir
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डेली संवाद, चंडीगढ़/जालंधर/पटियाला। Power Cut in Punjab News Update: पंजाब में अप्रैल महीने की शुरुआत के साथ ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, और इसके साथ ही राज्य में बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने लगी है। इसी बीच पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा अलग-अलग जिलों में लंबा बिजली कट लगाना शुरू कर दिया। पावरकॉम इन कटों को “मेंटेनेंस शटडाउन” का नाम दे रहा है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

Contents
  • उत्पादन क्षमता बनाम वास्तविक उत्पादन
  • मांग और सप्लाई के बीच बढ़ती खाई
  • अचानक बढ़ी मांग ने बढ़ाया दबाव
  • हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की घटती क्षमता
  • थर्मल प्लांट्स और मेंटेनेंस का असर
  • इन शहरों में बिजली कट आज भी
  • उद्योगों और आम जनता पर असर
  • सरकार के लिए चुनौती
  • आगे क्या?
  • बड़े पैमाने पर बिजली कटौती

पंजाब (Punjab) में 21 अप्रैल से शुरू हुए ये बिजली कट 26 अप्रैल तक जारी रहने वाले हैं। राज्य के कई शहरों मोहाली, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा में अलग-अलग समय पर बिजली बंद की जा रही है। आम लोगों और उद्योगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली के लंबे कटों से न केवल इंडस्ट्री प्रभावित हुई है, बल्कि आम लोगों का जीना मुहाल हो गया। भारी गर्मी के बीच पानी की सप्लाई भी बंद है, जिससे लोगों की परेशानी दोगुना बढ़ गई है।

उत्पादन क्षमता बनाम वास्तविक उत्पादन

पावरकॉम और पावरग्रिड के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में कुल बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 15,000 मेगावाट है। इसमें सरकारी थर्मल प्लांट, निजी थर्मल यूनिट्स, हाइडल प्रोजेक्ट्स और भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) से मिलने वाला हिस्सा शामिल है।

यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा

लेकिन 23 अप्रैल के आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। राज्य केवल लगभग 4,600 मेगावाट बिजली ही खुद पैदा कर पा रहा है। यह कुल क्षमता का एक तिहाई से भी कम है। इसके अलावा, पंजाब सेंट्रल पूल यानी बाहरी ग्रिड से औसतन 3,550 मेगावाट बिजली खरीद रहा है। इस तरह कुल उपलब्ध बिजली लगभग 8,150 मेगावाट ही हो रही है।

Electricity
Power Cut

मांग और सप्लाई के बीच बढ़ती खाई

  • 23 अप्रैल को पंजाब में बिजली की मांग 10,260 मेगावाट तक पहुंच गई।
  • यानी उपलब्ध बिजली (8,150 मेगावाट) के मुकाबले लगभग 2,110 मेगावाट की कमी है।
  • यह अंतर बताता है कि राज्य में वास्तविक बिजली संकट मौजूद है।
  • मौसम विभाग ने 26 अप्रैल तक भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया है।
  • जिससे आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की संभावना है।
  • ऐसे में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

अचानक बढ़ी मांग ने बढ़ाया दबाव

अप्रैल की शुरुआत में राज्य में बिजली की मांग लगभग 6,450 मेगावाट थी। मात्र 22 दिनों में यह बढ़कर 10,260 मेगावाट हो गई। यानी 3,810 मेगावाट की अचानक बढ़ोतरी। यह वृद्धि करीब 60% के आसपास है, जिसने पावर ग्रिड पर भारी दबाव डाल दिया है।

पिछले साल अप्रैल 2025 में अधिकतम मांग 7,500 से 8,000 मेगावाट के बीच थी। इस साल यह 25 से 30 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि इस स्तर की मांग आमतौर पर जून महीने में देखने को मिलती थी, लेकिन इस बार अप्रैल में ही यह स्थिति बन गई है।

हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की घटती क्षमता

पंजाब के बिजली संकट का एक बड़ा कारण हाइडल प्रोजेक्ट्स का कम उत्पादन भी है। पठानकोट स्थित रणजीत सागर डैम की क्षमता 600 मेगावाट है, लेकिन यह औसतन केवल 133 मेगावाट बिजली ही पैदा कर पा रहा है। इसी तरह मुकेरियां हाइडल प्रोजेक्ट, जिसमें चार यूनिट्स हैं, पूरी तरह बंद पड़ा है।

अधिकारियों का कहना है कि नदियों में पानी का फ्लो कम होने के कारण हाइड्रो पावर उत्पादन प्रभावित हुआ है। यह स्थिति गर्मियों में और भी खराब हो सकती है, क्योंकि पानी की उपलब्धता और कम हो जाती है।

थर्मल प्लांट्स और मेंटेनेंस का असर

पावरकॉम के अनुसार, रोपड़ और गोइंदवाल साहिब जैसे बड़े थर्मल प्लांट्स में मेंटेनेंस कार्य चल रहा था, जिसके कारण कुछ यूनिट्स बंद थीं। हालांकि, अब बढ़ती मांग को देखते हुए इन्हें दोबारा चालू किया जा रहा है। लेकिन मेंटेनेंस के कारण उत्पादन में पहले ही गिरावट आ चुकी है। यही वजह है कि अब अचानक बढ़ी मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

पावरकॉम इन बिजली कटों को “मेंटेनेंस शटडाउन” बता रहा है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे छिपा हुआ पावर कट मान रहे हैं। डिमांड-सप्लाई के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि राज्य में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रिड को संतुलित रखने के लिए लोड शेडिंग की जा रही है, जिसे तकनीकी रूप से “शटडाउन” कहा जा रहा है।

Power Cut
Power Cut

इन शहरों में बिजली कट आज भी

24 अप्रैल: मोहाली, जीरकपुर, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा के कई इलाकों में सुबह से शाम तक 4 से 8 घंटे तक बिजली बंद रही। औद्योगिक क्षेत्रों में भी कट लगाए गए, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ।

25 अप्रैल: मोहाली के G-ब्लॉक, लुधियाना के कई रिहायशी और औद्योगिक इलाकों, जालंधर, अमृतसर और पटियाला में सुबह 10 बजे से दोपहर या शाम तक बिजली बंद रहेगी। खन्ना और अमलोह के औद्योगिक क्षेत्रों में भी लंबी कटौती की घोषणा की गई है।

26 अप्रैल: मोहाली, जीरकपुर, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और पटियाला में फिर से अलग-अलग समय पर बिजली बंद रहेगी। कुछ जगहों पर 5 घंटे तक और कुछ जगहों पर पूरे दिन के बड़े हिस्से में बिजली गुल रहने की संभावना है।

उद्योगों और आम जनता पर असर

बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ रहा है। लुधियाना, जो पंजाब का औद्योगिक हब माना जाता है, वहां उत्पादन पर सीधा असर देखा जा रहा है। छोटे और मध्यम उद्योगों को जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है। आम जनता भी परेशान है। गर्मी के इस मौसम में बिजली कटने से पानी की सप्लाई, कूलिंग और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

सरकार के लिए चुनौती

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अगर समय रहते बिजली की उपलब्धता नहीं बढ़ाई गई, तो मई-जून की भीषण गर्मी में हालात और बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को तुरंत वैकल्पिक स्रोतों से बिजली खरीद बढ़ानी चाहिए और बंद पड़े यूनिट्स को जल्द चालू करना चाहिए।

आगे क्या?

पंजाब में बिजली संकट फिलहाल शुरुआती चरण में दिखाई दे रहा है, लेकिन संकेत चिंताजनक हैं।

  • मांग तेजी से बढ़ रही है
  • उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो रहा
  • हाइड्रो प्रोजेक्ट्स कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं
  • थर्मल यूनिट्स में मेंटेनेंस का असर दिख रहा है

बड़े पैमाने पर बिजली कटौती

अगर यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो सकती है। पंजाब में लगाए जा रहे बिजली कट केवल “मेंटेनेंस शटडाउन” नहीं लगते, बल्कि यह बढ़ती मांग और सीमित सप्लाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश नजर आते हैं।

आंकड़े साफ बताते हैं कि राज्य में बिजली की कमी है और यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है। सरकार और पावरकॉम को तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे, वरना गर्मियों में यह संकट एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे में बदल सकता है।

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