Jagannath Temple की मान्यता, 214 फीट ऊंचाई पर ध्वजा बदलना अनिवार्य, देखें वीडियो

एक दिन की भूल से 18 साल के लिए बंद हो सकता है मंदिर

पुरी: जगन्नाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। श्रद्धालुओं का यह विश्वास है कि इस यात्रा में भाग लेना और भगवान जगन्नाथ के दर्शन करना जीवन के कष्टों को दूर करता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस यात्रा में सच्चे मन से शामिल होता है, उसे न केवल शांति और सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि मृत्यु के बाद मोक्ष भी मिलता है। जगन्नाथ मंदिर से कई रोचक कथाएं और परम्पराएं जुड़ी हुई हैं। इसी परम्परा में मंदिर के शीर्ष पर लगी हुई ध्वजा को बदलना भी शामिल है। जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि श्रद्धा, रहस्य और भक्ति से जुड़ी हुई एक महान परंपरा है।

पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर पर हर दिन शाम को ध्वजा बदली जाती है। यह कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक धार्मिक अनिवार्यता मानी जाती है। पौराणिक मान्यता है कि यदि किसी दिन ध्वजा नहीं बदली गई, तो मंदिर 18 वर्षों तक स्वतः बंद हो जाएगा। इस मान्यता के पीछे यह विश्वास छिपा है कि भगवान जगन्नाथ की उपस्थिति और उनकी कृपा ध्वजा के माध्यम से आकाश की ओर फैलती है। यदि यह ध्वजा पुरानी, फटी या अनुपस्थित हो जाए, तो वह दिव्य ऊर्जा बाधित हो जाती है। इसलिए, हर दिन सूर्यास्त से पूर्व इसे बदला जाना आवश्यक है।

श्री जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा अपने आप में एक अनोखा रहस्य समेटे हुए है यह सदैव हवा की दिशा के विपरीत लहराती है। सामान्यतः समुद्र तटीय क्षेत्रों में हवा समुद्र से भूमि की ओर बहती है, लेकिन पुरी में यह नियम उलट जाता है। यहाँ हवा भूमि से समुद्र की ओर बहती है। अचरज की बात यह है कि मंदिर की ध्वजा इन प्राकृतिक हवाओं की विपरीत दिशा में फहराती है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अब तक समझ नहीं आया है। यह रहस्य आज तक विज्ञान के लिए चुनौती है, लेकिन भक्तों के लिए यह भगवान जगन्नाथ की अलौकिक शक्ति का प्रमाण है।

ध्वजा को बदलने का कार्य किसी साधारण व्यक्ति का नहीं, बल्कि पुरी के चोला परिवार का विशेष उत्तरदायित्व है। यह परिवार पिछले 800 वर्षों से यह सेवा लगातार निभा रहा है। इस सेवा को कोई आम धार्मिक कर्तव्य नहीं माना जाता, बल्कि यह भगवान के प्रति समर्पण, साहस और निष्कलंक परंपरा का प्रतीक है। मंदिर की शिखर तक चढ़कर, बिना किसी सुरक्षा उपकरण या मशीन के, प्रतिदिन सैकड़ों फीट ऊंचाई पर ध्वजा को चढ़ाना अत्यंत कठिन कार्य है। इस जोखिम भरे सेवा को यह परिवार श्रद्धा से निभाता है, जिससे यह परंपरा आज भी जीवित है।

ध्वजा को प्रतिदिन बदलने की परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक समय भगवान जगन्नाथ ने मंदिर के सेवकों को स्वप्न में दर्शन दिए और संकेत दिया कि मंदिर पर लगी उनकी ध्वजा पुरानी और फटी हुई है। जब अगली सुबह सेवकों ने ध्यान दिया, तो वास्तव में ध्वजा जीर्ण अवस्था में थी। यह घटना भगवान की ओर से चेतावनी मानी गई और तभी से यह निर्णय लिया गया कि अब से प्रतिदिन नई ध्वजा अर्पित की जाएगी। इस तरह यह परंपरा आरंभ हुई, जो आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है।

Hot this week

Now Is the Time to Think About Your Small-Business Success

Find people with high expectations and a low tolerance...

Program Will Lend $10M to Detroit Minority Businesses

Find people with high expectations and a low tolerance...

Kansas City Has a Massive Array of Big National Companies

Find people with high expectations and a low tolerance...

Olimpic Athlete Reads Donald Trump’s Mean Tweets on Kimmel

Find people with high expectations and a low tolerance...

The Definitive Guide To Marketing Your Business On Instagram

Find people with high expectations and a low tolerance...

Topics

Now Is the Time to Think About Your Small-Business Success

Find people with high expectations and a low tolerance...

Program Will Lend $10M to Detroit Minority Businesses

Find people with high expectations and a low tolerance...

Kansas City Has a Massive Array of Big National Companies

Find people with high expectations and a low tolerance...

Olimpic Athlete Reads Donald Trump’s Mean Tweets on Kimmel

Find people with high expectations and a low tolerance...

The Definitive Guide To Marketing Your Business On Instagram

Find people with high expectations and a low tolerance...

How Mary Reagan Gave Glamour and Class to the Elites Society

Find people with high expectations and a low tolerance...

Entrepreneurial Advertising: The Future Of Marketing

Find people with high expectations and a low tolerance...

Mobile Marketing is Said to Be the Future of E-Commerce

Find people with high expectations and a low tolerance...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img