Jalandhar News: पूर्व जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने सुखबीर बादल और SGPC पर साधा निशाना, चुनावों को लेकर लगाए आरोप, देखें वीडियो

जालंधर, ENS: प्रतापुरा की दाना मंडी में गुरप्रताप सिंह वडाला की अगुवाई शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत की ओर से बैठक रखी गई। जहां अलग-अलग जत्थेबंदियों के नेता व कार्यकर्ता पहुंचे। वहीं अकाल तख्त के पूर्व कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं का आभार व्यक्त किया। पूर्व जत्थेदार ने कहा कि गुरप्रताप वडाला पिता कुलदीप सिंह वडाला की विरासत को संभाल रहे है। उन्होंने दोआबा की धरती को योद्धाओं की धरती बताते हुए कहा कि दाना मंडी में पहुंचे सभी योद्धाओं के वारिस हो। इस दौरान पंथक की समस्या को लेकर कहा कि हमारी संस्थाओं को तबाह कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि हम विदेशों में बैठे लोगों से तो नाराजगी जाहिर करते है, लेकिन सबसे ज्यादा दुख उन लोगों से है, जिन्होंने संस्थाओं को अंदर बैठे लोगों ने तबाह कर दिया है। पूर्व जत्थेदार ने कहाकि इसकी मिसाल कल जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह के बयानों से मिल गई थी। पूर्व जत्थेदारी हरप्रीत सिंह ने कहाकि भले ही देर आए और दुरुस्त आए, लेकिन उनके बयानों ने चिंता पैदा कर दी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सुखबीर बादल कमेटी बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि जमीनें बेची जा रही है। गुरुद्वारा अंब साहिब की जमीन गमाडा को बेची गई। गुरुद्वारा साहिब में गमाडा की ओर से एक साल पहले जमीन का 49.47 करोड़ रुपए आ गए।

उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के एक्ट के अनुसार गुरुद्वारा साहिब की जमीन बेचने के बदले जमीन खरीदी जाती है, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद कोई जमीन नहीं खरीदी गई। उन्होंने कहाकि उस पैसे का क्या किया गया, इसके बार में एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ही बता सकते है। जिन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि वह खुशनसीब मानते है वह शिरोमणि अकाली दल के सिपाही है। हरप्रीत सिंह ने कहा कि अकाली ने इन्हें सिपाही के तौर पर भर्ती किया था। लेकिन आज एसजीपीसी का प्रधान कह रहा है कि वह अकाली दल के सिपाही है जो कि निंदनीय है। हरप्रीत सिंह ने कहा कि बुजुर्गों ने जमीने सेवा के लिए दी है और एजीपीसी कमेटी को गुरुद्वारा साहिब की केयर करने के लिए बिठाया है, लेकिन एसीजीपी मालिक बनकर बैठ गई है और जमीने बेच रही है।

हरप्रीत सिंह ने कहा कि उन्हें लगता है कि जमीने बेचकर एसजीपीसी आगामी चुनावों में सुखबीर बादल के लिए फंड इकट्ठा करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल पंजाब का ही नहीं बल्कि उतरी भारत का बड़ा समरमाएदार है और जब हमारी संस्थाए इन समरमाएदारों के हाथों में आई तो आम लोगों के लिए समरमाएदारों द्वारा दरवाजें बंद कर दिए गए। हरप्रीत सिंह ने कहा कि समरमाएदार राजनीति में आकर ना कभी राज्य का भला कर सकते है और ना ही कौम का भला कर सकते है।

उन्होंने कहाकि बिजनेस डिवेल्प करके स्टेट के विकास में योगदान तो डाल सकते है, लेकिन राजनीति में आने के बाद वह सत्ता पाने के लिए ना देश का भला सकते है और ना ही कौम का भला कर सकते है। उन्होंने कहा कि जब से सुखबीर बादल के हाथों में संस्था आई तो संस्थाओं की हालत पतली हो गई। हरप्रीत सिंह ने कहा कि उन्हें विदेश से फोन आया और कहा कि बाबा सुखा सिंह फौज के वारिस पता नहीं कब पैदा होंगे और इन्हें पंथ से हटाएंगे। उन्होंने सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए कहा कि लोग शराब के लालच में उन्हें सुनने के लिए बैठ जाते है।

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