Punjab News: नौजवान ने बनाया World Record, 40 Second में लगाए 64 Pushups, देखें वीडियो

सुल्तानपुर लोधी: जब मेहनत, जुनून और लगन एक साथ होते हैं, तो असंभव भी संभव बन जाता है। इसे पवित्र नगरी सुल्तानपुर लोधी से जुड़े युवक हरप्रीत सिंह उर्फ विक्की ढिल्लो ने साबित कर दिखाया है। जिन्होंने फिटनेस के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित कर विश्व स्तर पर नया कीर्तिमान बना दिया है। उनकी इस शानदार सफलता के साथ ही सुल्तानपुर लोधी का नाम न केवल पंजाब बल्कि देश और विदेश में भी गर्व से लिया जा रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित फिट इंडिया कार्निवाल के दौरान विक्की ढिल्लो ने सिर्फ 40 सेकंड में 64 दोनों अंगूठे वाली पुशअप्स लगा कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह प्रदर्शन सामान्य नहीं था, क्योंकि इस दौरान वह 3 फुट ऊंचाई पर लगी 3 लोहे की रोड़ों पर संतुलन बनाते हुए एक पैर हवा में रख कर यह कठिन काम कर रहे थे। मौके पर मौजूद दर्शकों के लिए यह दृश्य हैरानी और जोश से भरपूर था।

इस उपलब्धि की खास बात यह भी रही कि विक्की ढिल्लो ने इस प्रदर्शन के साथ अपना ही पहले बनाया रिकॉर्ड तोड़ दिया। पहले वह 40 सेकंड में 40 पुशअप्स लगाकर रिकॉर्ड बना चुके थे, लेकिन अब उसी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने 64 पुशअप्स कर नया इतिहास रच दिया। इसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन द्वारा प्रमाणित किया गया है। फिट इंडिया कार्निवाल के दौरान लगभग 1000 से 1500 छात्रों ने भाग लिया। कार्निवाल में विभिन्न खेल मुकाबले और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों में फिटनेस के प्रति काफी उत्साह देखा गया। विक्की ढिल्लो का प्रदर्शन मौके पर मौजूद सभी लोगों को प्रेरित किया।

इस विश्व रिकॉर्ड के बाद पवित्र नगरी सुल्तानपुर लोधी में खुशी और गर्व की लहर है। लोग कहते हैं कि विक्की ढिल्लो ने अपने शहर का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। विशेष बातचीत के दौरान हरप्रीत सिंह विक्की ढिल्लो ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। उनके अनुसार 40 सेकंड में 64 पुशअप्स लगाने के पीछे सालों की कठिन मेहनत और अनुशासन है। वह रोजाना लगभग सात से आठ घंटे अभ्यास करते थे। इसके अलावा जब भी वह छात्रों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने जाते थे, उस समय भी अपने लक्ष्य पर ध्यान रखते हुए अभ्यास जारी रखते थे।

उन्होंने कहा कि फिटनेस के क्षेत्र में आने की प्रेरणा उन्हें अपनी माँ से मिली, जो प्राथमिक स्कूल में अध्यापिका हैं। माँ ने ही बचपन से उन्हें खेलों और तंदुरुस्ती की ओर उत्साहित किया और यही प्रेरणा उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही। विक्की ढिल्लो के अनुसार दो अंगूठे वाली पुशअप बहुत ही मुश्किल होती है और इसके अभ्यास के लिए उन्हें लगभग 10 से 15 साल का समय लग गया। शुरुआत में वह हाथों पर पुशअप करते थे, फिर उंगलियों पर, फिर दो उंगलियों पर और आखिरकार वह अपने अंगूठों पर पुशअप करने में समर्थ हो गए।

उन्होंने बताया कि तीन फुट ऊंचाई पर लोहे की रोड़ों पर संतुलन बनाकर यह परफॉर्मेंस करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। घर में अभ्यास के दौरान दबाव कम रहता है, लेकिन जब सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शन करना पड़ता है, तो मन कई बार डोल जाता है। वह कहते हैं कि हर प्रदर्शन की शुरुआत से पहले वह अकाल पुरख के आगे श्रद्धा से प्रार्थना करते हैं और इसी विश्वास के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि जब इस बार वह अपने ही 40 पुशअप्स के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने जा रहे थे, तो मन में कई विचार आ रहे थे, क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई साल लगाए थे और अभी तक कोई भी उनका पुराना रिकॉर्ड नहीं तोड़ सका था।

विकी ढिल्लो ने अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए कहा कि इस मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वह रोज़ाना सुबह तीन बजे उठते हैं और लगभग छह से सात घंटे अभ्यास करते हैं। वह किसी भी प्रकार के फूड सस्प्लीमेंट नहीं लेते, बल्कि सिर्फ घरेलू खुराक जैसे दूध, लस्सी और पंजाब की देसी खुराक ही खाते हैं। वह माँ द्वारा बनाई गई रोटियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस सफर में उनके परिवार और दोस्तों का बहुत बड़ा सहयोग रहा है, जिनकी हौसला अफज़ाई और मोटिवेशन के कारण ही वह आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। विक्की ढिल्लो के अनुसार आज की युवा पीढ़ी फिटनेस की तरफ कम ध्यान दे रही है, जबकि हमें अपने स्वास्थ्य की ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

स्वस्थ शरीर ही निर्बल जीवन की नींव है और जब शरीर तंदुरस्त होगा, तो मन और समाज भी तंदुरस्त बनेंगे। उन्होंने बताया कि पंजाब के युवाओं को फिटनेस की तरफ प्रेरित करने के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं। वह कई स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों और खास कर लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देते हैं ताकि कठिन समय में वे अपनी रक्षा खुद कर सकें। इसके अलावा वह बच्चों को कराटे और अन्य फिटनेस तकनीकें भी सिखाते हैं ताकि वे खुद सक्षम बन सकें।

विक्की ढिल्लो ने कहा कि भले ही अब उनकी उम्र लगभग 50 साल के करीब हो गई है, लेकिन इसके बावजूद भी वह आगे कई विश्व रिकॉर्ड बनाने का मन बनाये बैठे हैं। वह कहते हैं कि जब भी वह स्कूलों में छात्रों को ट्रेनिंग देने जाते हैं, तो बच्चे अक्सर पूछते हैं कि आप आगे क्या करेंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए वह कहते हैं कि वह अपने छात्रों के लिए ही आगे भी रिकॉर्ड बनाते रहेंगे और अपने टैलंट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक आगे ले जाने का प्रयास करते रहेंगे। दूसरी ओर, इस सफलता को लेकर विक्की ढिल्लो की माँ ने भी बहुत खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चे का अच्छा होना ही परिवार को खुशहाल रखता है। उन्हें बहुत गर्व है कि आज पवित्र नगर सुल्तानपुर लोधी में उनके परिवार के घर खुशियों का माहौल है और पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।

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