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प्रदेश के 12 लाख मजदूरों के हित में नहीं VB-Ram Ji योजना, Central Government करेगी केंद्र से मजबूती से पैरवी

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प्रदेश के 12 लाख मजदूरों के हित में नहीं VB-Ram Ji योजना, Central Government करेगी केंद्र से मजबूती से पैरवी

शिमला: मनरेगा के स्थान पर वीबी-जीराम-जी योजना शुरु होने से हिमाचल प्रदेश के लगभग 12 लाख मजदूरों को बड़ा झटका लग सकता है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर वीबी-जीराम-जी योजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी राज्यों को 30 जून तक नई योजना को अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि नई योजना को अधिसूचित करने वाले राज्यों को ही बजट आवंटित किया जाएगा। हालांकि, हिमाचल प्रदेश सरकार का मानना है कि वर्तमान स्वरूप में इस योजना के कई प्रावधान राज्य और यहां के श्रमिकों के हितों के अनुरूप नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश के लाखों ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका से जुड़े किसी भी मुद्दे पर राज्य सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। योजना के प्रावधानों के तहत फिलहाल हिमाचल प्रदेश के गैर-जनजातीय क्षेत्रों में मजदूरी दर 247 रुपये तथा जनजातीय क्षेत्रों में 309 रुपये निर्धारित है। राज्य सरकार का मानना है कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों, महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए यह मजदूरी दर पर्याप्त नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को केंद्र सरकार से मजदूरी दर में उचित वृद्धि की मांग करने के निर्देश दिए हैं।

रोजगार गारंटी योजना का मूल स्वरूप ‘डिमांड आधारित’ ही रहना चाहिए, जैसा कि मनरेगा में था। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था किसी निर्धारित सीमा से नहीं बंधनी चाहिए और जरूरत के अनुसार कार्य उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत लगभग 395 लाख मानव दिवस (मैन-डे) सृजित किए गए थे। जबकि वर्ष 2025-26 में भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश को 250 लाख मानव दिवस का लक्ष्य ही आवंटित किया। वीबी-जीराम-जी योजना के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार प्रदेश को मिलने वाले मानव दिवस और अधिक सीमित हो जाएंगे। राज्य सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और लाखों श्रमिकों की आय प्रभावित हो सकती है। इस विषय को भी केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा।

इसके अतिरिक्त वर्तमान में मनरेगा की विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत 1194 कर्मचारी स्कीम आधारित, अनुबंध अथवा आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं। नई व्यवस्था में इन कर्मचारियों के भविष्य और वेतन भुगतान को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वीबी-जीराम-जी के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाला धन सीमित होगा और एसएनए-स्पर्श मोड में आएगा, न कि राज्य सरकार की ट्रेजरी में, जिससे स्कीम के कर्मचारियों को वेतन मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। राज्य सरकार इस मामले को भी केंद्र सरकार के साथ उठाएगी और यह पैसा एडवांस में मांगेगी, ताकि वेतन भुगतान में किसी प्रकार की बाधा न आए। इन कर्मचारियों के लिए नई योजना के तहत ही सेवा शर्तें लागू होंगी।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वीबी-जीराम-जी योजना के सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करने तथा प्रदेश के हितों के अनुरूप सुझाव तैयार करने के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति में पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासू तथा निदेशक राघव शर्मा भी सदस्य होंगे। यह समिति 29 जून तक अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी, जिसके आधार पर राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश में वीबी-जीराम-जी योजना को लागू करने पर फैसला करेगी।

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