जालंधर, ENS: कटोनमेंट बोर्ड के खिलाफ इलाका निवासियों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। इलाका निवासियों ने बताया कि पीसीबी के साथ आज मीटिंग के लिए बुलाया गया, लेकिन कोई मीटिंग में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। लोगों ने बताया कि आर्मी के अधिकारियों द्वारा सिक्योरिटी रिजन के तहत इलाका निवासियों को परेशान किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि वह इस मामले को लेकर जल्द कोर्ट का रूख करेंगे और याचिका दायर करेंगे। इस प्रदर्शन में लोगों ने ब्रिगेडियर (करनल) पर धक्केशाही के आरोप लगाए है। लोगों का कहना है कि आर्मी द्वारा देर रात सभी बैरियर बंद कर दिए जाते है।
जिसके कारण उन्हें आधे घंटे का सफर डेढ घंटे में तय करना पड़ता है। मामले की जानकारी देते हुए लाल कुर्ती के वार्ड नंबर 6 से 55 वर्षीय कमल किशोर ने बताया कि पिछले लंबे समय से फौजियों द्वारा गेट मुख्य गेट बंद कर दिए जाते है। इसी के साथ रात को नाकेबंदी को बंद कर दिया जाता है। कमल ने कहा कि कैंट हलके के निवासी काफी परेशान है। उनका कहना है कि रात 10.30 से 11 बजे तक कैंट के सभी बैरियर आर्मी की ओर से बंद कर दिए जाते है। अगर किसी मरीज को ईलाज के लिए कैंट से बाहर लेकर जाना है तो वह उसे रामामंडी की तरफ से लेकर जा सकता है, उसे किसी ओर बैरियर से जाने की इजाजत नहीं होगी।
व्यक्ति ने कहाकि अगर इलाका निवासियों द्वारा कोई धार्मिक स्थल का आयोजन किया जाता है तो वहां पर क्यूआरटी गाड़ी आ जाती है और धार्मिक स्थल के प्रोग्राम को बंद करवा देती है। व्यक्ति ने कहाकि 20 दिनों से गुरुद्वारा साहिब में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को समस्या के बारे में अवगत करवाया गया, लेकिन उनकी समस्या का हल नहीं हुआ। इसी के साथ आर्मी के सीनियर अफसरों के ध्यान में भी मामला ला गया। लोगों का कहना है कि कैंट में औरंगजेब का राज चल रहा है। व्यक्ति ने कहाकि 4 दिन पहले इलाके की महिला 10 वर्षीय बच्चे को एक्टिवा के बीच बिठाकर ले जा रही है।
इस दौरान उसे आर्मी की ओर से रोका जाता है और बच्चे के हेलमेट के बारे में पूछा जाता है। जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर चालान काटा जाता है। व्यक्ति ने कहा कि आर्मी के अधिकारी खुद गाड़ी पर बिना सीट बेल्ट के घूमते है। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी रिजन के तहत उनके साथ धक्का किया जा रहा है, जो कि गलत है। इस मामले को लेकर वह जल्द कोर्ट में याचिका दायर करने जा रहे है। व्यक्ति ने कहाकि पीर दरगाह पर मेले का आयोजन होना था, लेकिन अब उसे बंद करवा दिया गया। लोगों की मांग है कि उन्हें भी जीने का अधिकार दिया जाए। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्यों को हल नहीं किया गया तो वह बाजार बंद करके तीखा संघर्ष करने पर मजबूर होंगे।

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