श्रीहरि ओम योगा सोसाईटी ने वीर सावरकर जयन्ती पर किया किशेष योग शिविर का आयोजन

बददी / सचिन बैंसल : बद्दी की योग में अग्रणी सामाजिक संस्था श्रीहरि ओम योगा सोसाईटी ने वीरसावरकर जयन्ती के उपलक्ष्य पर विशेष योग शिविर का आयोजन किया । जिसमें किशोर योगा एकेडमी के संचालक किशोर ठाकुर ने विश्व योग दिवस प्रोटोकॉल का अभ्यास करवाया । उन्होंने कहा कि यह अभ्यासक्रम आठ वर्ष से लेकर अस्सी वर्ष तक की आयु को ध्यान में रखकर डिजाईन किया गया है । जिसे सभी बडी ही आसानी से कर सकते हैं और अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाकर जीवन भर सुखी और स्वास्थ जीवन यापन कर सकते हैं । उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवन शैली में हर व्यक्ति तनाव और स्ट्रेस से ग्रसित है जिसके कारण युवा अवस्था में ही लोगों को आर्ट स्ट्रोक हो रहे हैं और कई बार तो स्टेज पर डांस करते हुए अथवा ट्रेड मिल पर व्यायाम करते हुए हार्ट अटैक के कारण मृत्यु हो रही है । इसलिए साधारण योगासन और प्राणायाम से इन सभी प्रकार की लाईफ स्टाईल बिमारियों से बच सकते हैं । उन्होंने कहा कि इस वर्ष 21 जून को पूरे विश्व में नौवां अर्न्तराष्ट्रीय योग दिवस बडी धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है जिसमें बीबीएम क्षे़त्रा हर घर तक हमें योग के प्रकाश को पहुंचाना है ।

योग सत्रा के उपरान्त आये हुए सभी स्वास्थ्य साधकों ने सर्व प्रथम वीरसावरकर की मूर्ति पर पुष्प अर्पित किए तथा उन्हें श्रद्वांजलि दी। श्रीहरि ओम योगा सोसाईटी के महामन्त्राी कुलवीर सिंह आर्य ने वीर सावरकर की जयन्ती के अवसर पर कि वीर सावरकर ने ही राष्ट्रध्वज तिरंगे के बीच में धर्मचक्र लगाने का सर्वप्रथम सुझाव दिया था, जिसे राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने मान्य किया । उन्होंने कहा कि वह एक ऐसे क्रांतिकारी नेता थे जिन्होंने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का चिंतन किया, वे एक ऐसे प्रथम राजनीतिक बंदी थे, जिन्हें विदेशी (फ्रांस) भूमि पर बंदी बनाने के कारण हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला पहुंचा और बंदी जीवन समाप्त होते ही उन्होंने अस्पृश्यता आदि कुरीतियों के विरुद्व आंदोलन शुरू किया ।

श्रीहरि ओम योगा सोसाईटी के अध्यक्ष डा़ श्रीकान्त शर्मा ने कहा कि वीर सावरकर पहले ऐसे भारतीय विद्यार्थी थे, जिन्होंने इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना कर दिया था, वे पहले ऐसे भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रों की होली जलाई । और ऐसे पहले स्नातक थे, जिनकी स्नातक की उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अंग्रेज सरकार ने उनकी डिग््री को वापस ले लिया । उन्होंने कहा कि ऐसे वीर पुरूष और स्वतन्त्राता सेनानीयों की जीवन गाथायें हमें आने वाली पीढियों को अवश्य पढनी चाहिए जिससे उनके अंदर आजादी की सही किमत सदैव जिन्दा रहे । इस अवसर पर योगा सोसाईटी कार्यकर्ताओं सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों के इलावा सैकडों गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *