Home Chandigarh Punjab News: 2019 में Scholarship घोटाले को लेकर 6 पूर्व अधिकारियों पर FIR दर्ज

Punjab News: 2019 में Scholarship घोटाले को लेकर 6 पूर्व अधिकारियों पर FIR दर्ज

0
Punjab News: 2019 में Scholarship घोटाले को लेकर 6 पूर्व अधिकारियों पर FIR दर्ज

चंडीगढ़ः राज्य के 304 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, यह मामला शैक्षणिक सत्र 2016-17 से जुड़ा है। छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों की पढ़ाई के लिए निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों को राशि जारी की जाती थी। वर्ष 2019 में इस योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। उस समय पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे। सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग का जिम्मा तत्कालीन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत के पास था। घोटाले के उजागर होने के बाद राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ, लेकिन कई वर्षों तक किसी के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ।

वहीं वर्षों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब पहली बार आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस ब्यूरो ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए चलाई गई पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर 6 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से हाल ही में जांच में देरी पर कड़ी टिप्पणी किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। मामले की जांच पहले विभागीय स्तर पर और फिर उच्चस्तरीय प्रशासनिक समितियों के माध्यम से कराई गई। कांग्रेस सरकार के बाद सत्ता में आई आम आदमी पार्टी सरकार ने जनवरी 2023 में इस पूरे मामले को विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दिया था। इसके बावजूद करीब तीन साल तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

इस बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विजिलेंस की धीमी कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद अब केस दर्ज किया गया है। विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(1)(डी) और 13(2) के साथ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 465, 466, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर वर्ष 2020 में गठित तीन आईएएस अधिकारियों—केएपी सिन्हा, वीपी सिंह और जसपाल सिंह—की उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आम आदमी पार्टी सरकार ने 2023 में केस विजिलेंस को सौंपा था। जिन 6 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें पूर्व उपनिदेशक परमिंदर सिंह गिल, पूर्व डिप्टी कंट्रोलर चरणजीत सिंह, पूर्व सेक्शन अधिकारी मुकेश भाटिया, पूर्व सुपरिंटेंडेंट राजिंदर चोपड़ा और वरिष्ठ सहायक रहे राकेश अरोड़ा व बलदेव सिंह शामिल हैं।

विभाग ने पहले ही इन अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था और इनके खिलाफ विभागीय आरोप पत्र भी जारी किए गए थे। उच्चस्तरीय समिति की जांच में सामने आया था कि छात्रवृत्ति राशि जारी करने में विभाग ने तय नियमों का पालन नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने ‘पिक एंड चूज’ नीति अपनाते हुए कुछ चुनिंदा संस्थानों को लाभ पहुंचाया। कई ऐसे निजी शिक्षण संस्थानों को भुगतान कर दिया गया जो योजना के लिए पात्र ही नहीं थे। कुछ संस्थानों को निर्धारित राशि से कई गुना अधिक भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here