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Diljit Dosanjh की ‘Punjab-95’ फिल्म जल्द हो सकती है रिलीज, देखें वीडियो

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Diljit Dosanjh की ‘Punjab-95’ फिल्म जल्द हो सकती है रिलीज, देखें वीडियो

चंडीगढ़ः पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ ने चर्चित फिल्म “पंजाब-95” की जल्द रिलीज हो सकती है। दरअसल, दिलजीत दोसांझ ने वीडियो जारी करके इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि का ऐलान कर दिया है। इससे पहले इस फिल्म को लेकर दिलजीत दोसांझ ने फरवरी 2025 में रिलीज होने का ऐलान किया था, लेकिन फिल्म को लेकर विवाद हो गया था, जिसके बाद फिल्म पर रोक लगा दी गई थी। यह फिल्म मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है और आतंकवाद के दौर को दर्शाती है। बता दें कि इस फिल्म के विवादों में आने पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की ओर पहले फिल्म में 120 कट्स लगाने की मांग की थी, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था।

जिसके बाद दिलजीत ने अपने अपकमिंग म्यूजिक एल्बम की रिलीज को टाल दिया था। दिलजीत दोसांझ इस फिल्म में जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभा रहे हैं, जो उनके करियर की सबसे अहम भूमिकाओं में से एक मानी जा रही है। वहीं इस मामले को लेकर उस समय जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने बीते साल सेंसर बोर्ड की इस मांग की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उनके पति के जीवन पर बनी एक सच्ची बायोपिक है, जिसे उनके परिवार की सहमति से बनाया गया और इसे बिना किसी कट के रिलीज किया जाना चाहिए।

परमजीत कौर खालड़ा ने बताया था कि लगभग 4 साल पहले उनके परिवार ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी थी और निर्देशक हनी त्रेहन को फिल्म बनाने की अनुमति दी थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दिलजीत दोसांझ को जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए चुना गया था और इस चयन से परिवार पूरी तरह संतुष्ट था। जसवंत सिंह खालड़ा एक साहसी और समर्पित मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक के दौरान पंजाब में सिखों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने खुलासा किया कि उस दौर में हजारों सिख युवाओं को अवैध हिरासत में लिया गया, फर्जी मुठभेड़ों में मार दिया गया और उनके शवों का गुप्त अंतिम संस्कार कर दिया गया।

खालड़ा ने पंजाब पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही इन गुमशुदगी और हत्याओं को उजागर किया था। उन्होंने उस समय में अमृतसर के श्मशान घाटों का दौरा कर यह जानकारी जुटाई कि वहां 6,000 से अधिक शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार किया गया था। यह जानकारी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साझा की, जिससे भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए। खालड़ा को सिखों के हकों के लिए लड़ने का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ा था। परिवार का आरोप है कि 6 सितंबर 1995 को पुलिस ने खालड़ा का उनके घर से अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की। जिसके बाद, जसवंत की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दी और कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।

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