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मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने सड़क निर्माण से संबंधित सभी विभागों के कार्यों की समीक्षा की

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मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने सड़क निर्माण से संबंधित सभी विभागों के कार्यों की समीक्षा की

चंडीगढ़: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण तारकोल की कमी व इसकी बढ़ी कीमतों के कारण सड़क निर्माण व मरम्मत के कार्य बाधित न हों, इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों के अनुरोध पर अगले 6 माह के लिए इंपोर्टिड तारकोल के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज हरियाणा सिविल सचिवालय में सड़क निर्माण व रखरखाव से संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 में किए गए सड़क निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और वित्त वर्ष 2026-27 में किए जाने वाले कार्यों के संबंध में विभागों के लक्ष्यों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर), हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, जिला परिषद/पंचायती राज, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, एचएसआईडीसी, शहरी स्थानीय निकाय तथा पीएमडीए, जीएमडीए, एसएमडीए सहित अन्य विभागों के सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 28 फरवरी को जहां तारकोल के दाम 46402 रुपये प्रति मीट्रिक टन थे वहीं 1 अप्रैल को यह 76152 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गए हैं। तारकोल की आपूर्ति करने वाली आईओसीएल ने इसकी आपूर्ति 50 प्रतिशत तक प्रभावित होने की सूचना दी है। ऐसी परिस्थिति में केंद्र सरकार ने इंपोर्टिड तारकोल के इस्तेमाल की मंजूरी दी है। इस पर मुख्यमंत्री ने हरियाणा में भी 6 माह के लिए इंपोर्टिड तारकोल का इस्तेमाल करने की मंजूरी प्रदान की ताकि सड़क निर्माण व मरम्मत के कार्य प्रभावित न हों।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनता की सुविधा के लिए सड़कों का अच्छी हालत में होना आवश्यक है। संबंधित विभाग सभी जिलों में सड़कों के गड्ढ़े भरवाने तथा अन्य मरम्मत कार्यों के लिए पैच वर्क मशीनों का इस्तेमाल करें ताकि सड़कों की रिपेयर जल्द हो सके। पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) द्वारा इन मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, अन्य विभाग भी इन मशीनों के लिए पीडब्ल्यूडी से संपर्क कर सकते हैं। टूटी सड़कों से आमजन को परेशानी होती है जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर विभाग अपने कार्यों की मासिक प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से उनके पास भिजवाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘म्हारी सड़क’ एप पर आमजन द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों की शिकायत की जाती है। इन सभी शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई करते हुए इनका समाधान करवाया जाए। जिन सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी इनका निर्माण करने वाली कंपनी की होती है, उन कंपनियों के माध्यम से आवश्यक मरम्मत कार्य त्वरित गति से करवाए जाएं।

विभागों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क निर्माण हेतु जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे उन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों को भी समय पर पूरा किया जा सके। चालू वित्त वर्ष में सभी विभागों के माध्यम से प्रदेश में सड़कों के निर्माण व मरम्मत के लिए 63170 किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। यदि किसी तकनीकी पेंच के चलते जिला परिषद से संबंधित सड़क के प्रशासनिक अनुमोदन में कोई दिक्कत आती है तो संबंधित उपायुक्त को उसके अनुमोदन के लिए अधिकृत करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए।

अक्सर यह देखने में आया है कि सभी विभागों की सड़क निर्माण की गुणवत्ता अलग-अलग होती हैं। उन्होंने सभी विभागों से पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के मानकों के अनुरूप सड़क निर्माण करवाने के निर्देश दिए। सड़क निर्माण व मरम्मत के चालू कार्य मानसून के आने से पहले पूरे कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री ने सेक्टरों की क्षतिग्रस्त सड़कों को तुरंत ठीक करवाने के निर्देश देते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में किस सड़क की जिम्मेदारी किस विभाग की है, इस संशय को दूर किया जाए। उन्होंने अधिकारियों की एक कमेटी गठित कर इस संबंध में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सभी शहरी क्षेत्रों में कुछ स्मार्ट रोड बनाने की हिदायतें भी अधिकारियों को दीं ताकि शहरों की सुंदरता तथा आमजन की सुविधाओं को बढ़ाया जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, एके सिंह, विजेंद्र कुमार सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।

 

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