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भारत-जापान के सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने का काम करेगा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव जापान : Nayab Singh Saini

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भारत-जापान के सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने का काम करेगा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव जापान : Nayab Singh Saini

चंडीगढ़: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में जापान में हुए अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह महोत्सव भारत-जापान के सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने का काम करेगा। कुरुक्षेत्र में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में जापान के प्रतिनिधिमंडल को विशेष रूप से आमंत्रित करने तथा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान को और मजबूती देने के लिए आवश्यक पहल के निर्देश दिए।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-जापान की विस्तृत प्रतिवेदन (डिटेल रिपोर्ट) प्रस्तुत की गई। यह रिपोर्ट गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की गरिमामय उपस्थिति में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, मानद सचिव उपेंद्र सिंघल तथा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण के सदस्य विजय नरूला द्वारा प्रस्तुत की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 18 से 23 जून 2026 तक जापान में आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत कुल 18 विभिन्न कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य जापान में श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश का प्रचार-प्रसार, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा भारत, विशेषकर कुरुक्षेत्र, और जापान के मध्य सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना था।

महोत्सव के दौरान जापान की हाउस ऑफ काउंसलर्स (अप्पर हाउस), आईडीपी मुख्यालय, ओसाका असेंबली तथा जापान के पूर्व प्रधानमंत्री को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की गई। टोक्यो विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें गीता के वैश्विक संदेश एवं समकालीन प्रासंगिकता पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त भारत-जापान की सांस्कृतिक समानताओं पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी, विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीता यज्ञ, वैश्विक गीता पाठ, गीता सद्भावना यात्रा तथा अरिकवा नदी तट पर भव्य गीता आरती का आयोजन भी किया गया।

महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जापान की प्रसिद्ध काबूकी रंगमंच शैली के माध्यम से लगभग 40 मिनट की गीता प्रस्तुति रही, जिसे बड़ी संख्या में जापानी नागरिकों ने उत्साहपूर्वक देखा और सराहा।प्रतिनिधिमंडल ने जापान के प्राचीन एवं प्रतिष्ठित ओटनी विश्वविद्यालय (ओसाका) का भी दौरा किया। विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर के साथ भारत, विशेषकर कुरुक्षेत्र, और जापान के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा गीता विषयक शोध गतिविधियों के विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई।इसके अतिरिक्त जापान की सांस्कृतिक राजधानी क्योटो के महापौर के साथ प्रतिनिधिमंडल ने सिस्टर सिटी संबंध स्थापित करने तथा सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने के विषय पर सार्थक विचार-विमर्श किया।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि महोत्सव का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन एवं अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना, विश्वविद्यालयों में गीता आधारित शोध को प्रोत्साहित करना तथा भारत और जापान के मध्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का मॉरीशस, लंदन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका एवं इंडोनेशिया में सफल आयोजन किया जा चुका है तथा जापान इस श्रृंखला का सातवां अंतर्राष्ट्रीय आयोजन रहा।

 

 

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