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राखीगढ़ी विश्व मानचित्र पर भारत की प्राचीन सभ्यता का सबसे सशक्त प्रतीक बनेगा : CM Nayab Singh Saini

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राखीगढ़ी विश्व मानचित्र पर भारत की प्राचीन सभ्यता का सबसे सशक्त प्रतीक बनेगा : CM Nayab Singh Saini
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में राखीगढ़ी में विकसित किए जा रहे विश्वस्तरीय साइट म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर की प्रगति तथा डिजाइन को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक गुरुवार को देर सायं आयोजित की गई। बैठक में परियोजना के प्रत्येक पहलू की विस्तार से समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए, ताकि राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा का वैश्विक केंद्र बनकर उभरे। बैठक के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, मुख्यमंत्री के उपप्रधान सचिव डॉ. यशपाल, हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय के उप निदेशक डॉ. नरेंद्र परमार भी मौजूद थे। राखीगढ़ी को लेकर आगामी योजानाओं के बारे में विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि विकसित किए जा रहे इंटरप्रिटेशन सेंटर और साइट म्यूजियम में पारंपरिक संग्रहालय की अवधारणा से आगे बढ़ते हुए अत्याधुनिक डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, ऑडियो-विजुअल का उपयोग किया जाएगा। पर्यटक केवल पुराने अवशेषों को देखेंगे ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उस काल की जीवनशैली, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था का अनुभव भी कर सकेंगे। लगभग 1 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल में यह विकसित किया जा रहा है। इसके ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल पर पांच-पांच विषय आधारित गैलरियां बनाई जाएंगी, जिनमें सरस्वती-सिंधु सभ्यता के विभिन्न आयामों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इन गैलरियों में राखीगढ़ी के सातों टीलों का विस्तृत परिचय, विभिन्न चरणों में हुए पुरातात्विक उत्खनन, प्राप्त महत्वपूर्ण अवशेष, नगर नियोजन, आवास व्यवस्था, गलियां, जल निकासी प्रणाली, जल प्रबंधन, अन्न भंडारण, व्यापारिक गतिविधियां, आजीविका, सामाजिक जीवन तथा उस समय की तकनीकी और सांस्कृतिक उपलब्धियों को आकर्षक एवं वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। ओरिएंटेशन गैलरी में सप्त नदियों की सभ्यता तथा सरस्वती-सिंधु सभ्यता के विकास की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा लघु फिल्मों, डिजिटल प्रोजेक्शन, 3-डी प्रस्तुतीकरण और अन्य आधुनिक माध्यमों के जरिए पर्यटकों को पूरी सभ्यता की कहानी सहज और रोचक ढंग से समझाई जाएगी। इंटरप्रिटेशन सेंटर में बच्चों और युवाओं के लिए विशेष रूप से अनुभवात्मक गतिविधियों की भी व्यवस्था की जाएगी। यहां घूमने आने वाले बच्चों और अन्य पर्यटकों के लिए प्राचीन काल की सील बनाने की प्रक्रिया, उस समय उपयोग की जाने वाली ईंटों, पुरावशेषों की प्रतिकृतियों तथा अन्य ऐतिहासिक सामग्रियों को नजदीक से देख और समझ सकेंगे। बच्चों के लिए उस दौर के पारंपरिक खेलों एवं अन्य सहभागितापूर्ण गतिविधियों की भी व्यवस्था होगी, जिससे इतिहास को सीखना उनके लिए रोचक अनुभव बने। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राखीगढ़ी के तीन टीलों पर पुरातात्विक उत्खनन कार्य जारी है। संग्रहालय में यह भी दर्शाया जाएगा कि विभिन्न चरणों में कब-कब उत्खनन हुआ, कौन-कौन से महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए तथा इन खोजों ने विश्व इतिहास और भारतीय सभ्यता की समझ को किस प्रकार नई दिशा प्रदान की। राष्ट्रीय राजमार्ग-152 के निकट स्थित होने के कारण राखीगढ़ी में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के प्रमुख पर्यटन, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक केंद्रों में शामिल होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे तथा क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा 90 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके माध्यम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आगंतुकों की सुविधा के लिए शेड तथा अन्य आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित करने की योजना है, ताकि पर्यटकों को पुरातात्विक स्थल का सुरक्षित, सुविधाजनक एवं वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सके।

अखंड भारत का प्रतिरूप भी आएगा नजर:

नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य राखीगढ़ी को ऐसा वैश्विक विरासत केंद्र बनाना है, जहां आने वाला प्रत्येक पर्यटक भारत की प्राचीन सभ्यता की वैज्ञानिक सोच, सांस्कृतिक समृद्धि और मानवीय विकास यात्रा को गर्व के साथ अनुभव कर सके। उन्होंने कहा कि राखी गढ़ी में प्राचीन काल के अखंड भारत के अवलोकन को भी दिखाया जाए और राखी गढ़ी की विरासत कहां तक फैली थी उसको प्रदर्शित भी किया जाए। ताकि पर्यटकों को उस प्राचीन अखंड भारत के बारे में भी पता चल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय का उद्देश्य केवल इतिहास को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि उसे जीवंत बनाकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यहां आने वाले परिवारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और देश-विदेश के पर्यटकों को एक ऐसा अनुभव मिले, जिससे वे हजारों वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता को आधुनिक दृष्टिकोण से समझ सकें।  

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