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स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी

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स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी

चंडीगढ़: हरियाणा राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के मद्देनजर लागू आदर्श आचार संहिता के तहत हरियाणा प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1989 के सख्त पालन के निर्देश दिए हैं। आयोग के संज्ञान में आया है कि कई उम्मीदवार और राजनीतिक दल सार्वजनिक व निजी संपत्तियों पर अवैध रूप से पोस्टर-बैनर लगा रहे हैं और दीवारों पर लिखाई कर रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन है और प्रदेश की सुंदरता को प्रभावित करता है।

इस एक्ट की धारा- 3 और 3-ए के तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर आने वाली संपत्ति को स्याही, चॉक, पेंट या अन्य माध्यम से लिखकर या चिन्हित करना प्रतिबंधित है। इसी तरह सरकारी भवनों, बिजली के खंभों, बस स्टैंड, सार्वजनिक स्थानों या मूर्तियों पर पोस्टर, बैनर या फ्लेक्स लगाना तथा सार्वजनिक परिवहन, खासकर राज्य परिवहन की बसों पर प्रचार सामग्री चिपकाना पूरी तरह से मना है। यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।

ऐसे मामलों में अवैध प्रचार सामग्री हटाने और संपत्ति को पहले जैसी स्थिति में लाने का खर्च संबंधित उम्मीदवार या राजनीतिक दल से वसूला जाएगा। यदि किसी उम्मीदवार के पक्ष में इस तरह की गतिविधि होती है, तो उसे इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा, जब तक वह यह साबित न कर दे कि यह उसकी जानकारी या सहमति के बिना हुआ है।

उन्होंने निर्देश दिए कि उम्मीदवार केवल उन्हीं स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाएं, जो शहरी क्षेत्रों में कार्यकारी अधिकारी/सचिव और ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीपीओ/पंचायत अधिकारी द्वारा निर्धारित किए गए हैं। जिन संपत्ति मालिकों ने अपनी दीवारों पर विज्ञापन की अनुमति नहीं दी है, वे इसकी शिकायत संबंधित पर्यवेक्षक या उपायुक्त को कर सकते हैं। आयोग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसी शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर अवैध सामग्री हटाई जाए।

हरियाणा राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि लोकतंत्र में भागीदारी जरूरी है, लेकिन यह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी उम्मीदवारों से अपील की कि वे आदर्श आचरण अपनाएं और स्वच्छ व निष्पक्ष चुनाव में सहयोग करें। साथ ही, उड़न दस्तों को ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया है। किसी भी शिकायत के लिए उपायुक्त, नगर आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी या अन्य अधिकृत अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

 

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