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78वां सेना दिवस आरट्रैक शिमला में मनाया गया, राज्यपाल ने की सराहना

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78वां सेना दिवस आरट्रैक शिमला में मनाया गया, राज्यपाल ने की सराहना

शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड (आरट्रैक) में 78वें सेना दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण रक्षा क्षेत्र में निरंतर चुनौतियां बढ़ रही है। साइबर और सूचना युद्ध जैसी स्थितियों में आरट्रैक की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि यहां दी जा रही नेतृत्व क्षमता और प्रशिक्षण भारतीय सेना को सशक्त बनाने के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध बनाते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि सेना दिवस राष्ट्र की सम्प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा में भारतीय सेना के अतुलनीय बलिदान, अदम्य साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने आरटैªक को भारतीय सेना के प्रशिक्षण और संस्थागत उत्कृष्टता का केंद्र बताते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध क्षेत्रों की जटिल चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आरट्रैक द्वारा दिया जा रहा तकनीक-सक्षम और बहुआयामी प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करता है कि हमारी सेना सदैव तैयार और सक्षम बनी रहे। हिमाचल प्रदेश और सशस्त्र बलों के बीच गहरे और भावनात्मक संबंधों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। राज्य का लगभग हर गांव सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा को दर्शाता है, जो हमारी संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न अंग है। सैनिकों और उनके परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि हर सैनिक के पीछे एक परिवार होता है, जिसका मौन बलिदान हमारे सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति है। राष्ट्र उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता।

राज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार ने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए कई दूरदर्शी और ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2025दृ26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 6,81,210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह बदलते वैश्विक सुरक्षा परिवेश में भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करता है।

अग्निवीर योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने सशस्त्र बलों में युवा ऊर्जा का संचार किया है। इसके लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाकर 11,000 करोड़ रुपये से अधिक किया गया हैं, जिससे हमारी सेना और अधिक सक्षम बनी है। युवाओं में अनुशासन, कौशल और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित हो रही है।

उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं को अनुशासन, कौशल और राष्ट्र निर्माण की भावना से भी जोड़ती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण भारत की रणनीतिक प्राथमिकता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग इस प्रगति का सशक्त प्रमाण है।

पूर्व सैनिकों के लिए उठाए गए कल्याणकारी कदमों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि जुलाई, 2024 से लागू ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना के संशोधनों से लाखों पूर्व सैनिक परिवारों को सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा मिली है। साथ ही, पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए लगभग 8,317 करोड़ रुपये के आवंटन से देशभर में 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

राज्यपाल ने कहा कि मजबूत रक्षा बजट राष्ट्र की रणनीतिक सोच और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले, आरट्रैक के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने राज्यपाल का स्वागत किया और भारतीय सेना की तैयारियों और पेशेवर दक्षता पर प्रकाश डाला। आरट्रैक ट्रेनिंग कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. दहिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, सांसद सुरेश कश्यप, नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, नागरिक एवं सैन्य अधिकारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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