मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता में कर्म करने और फल की चिंता न करने का जो संदेश दिया गया है, उसी कर्मयोग की भावना से प्रदेश सरकार जनकल्याण के कार्यों में निरंतर जुटी हुई है। उराज्य सरकार महिलाओं, आमजन और गरीब वर्ग के कल्याण के लिए संवेदनशील, समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ योजनाओं को लागू कर रही है।
6,000 निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’का कानूनी दर्जा
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार निराश्रित बच्चों के लिए माता-पिता की भूमिका निभा रही है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने प्रदेश के 6,000 निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा प्रदान किया है। निराश्रित बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठा रही है। इस योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को 4,000 रुपये मासिक पॉकेट मनी दी जा रही है, जबकि शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य सहित सभी आवश्यकताओं का प्रबंध सरकार द्वारा किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी विद्यार्थी सिर्फ आर्थिक अभाव के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना शुरू की गई है, जिसके तहत 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवाया जा रहा है।
सुक्खू ने कहा कि दूसरी बार श्री राधाकृष्ण मंदिर आए हैं और यहां से उन्हें सदैव आध्यात्मिक ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिमाचल के हक़-हक़ूक़ की लड़ाई वे जनता के सहयोग और भगवान के आशीर्वाद से निरंतर लड़ते रहेंगे। इस अवसर पर बाबा बाल जी महाराज ने मुख्यमंत्री को शुभाशीर्वाद देते हुए कहा कि भगवान की कृपा से मुख्यमंत्री पूरे हिमाचल का भला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का परिवार धार्मिक संस्कारों से युक्त है और वे प्रदेश की जनता के लिए निष्ठा और समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में आई आपदा के समय मंदिर समिति की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये का योगदान भी दिया गया था।