उन्होंने बैठक को बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की आलोचना की और इस कदम को बेहद निंदनीय बताया। भाजपा इस मुद्देे को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय सिर्फ राजनीति कर रही है।
भाजपा नेता जनता के दबाव में बैठक में शामिल हुए
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि न केवल कांग्रेस, बल्कि सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी राजस्व घाटा अनुदान को फिर से बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जाहिर की है। भाजपा प्रदेश के अधिकारों के लिए खड़ी होने को तैयार नहीं है। भाजपा नेता जनता के दबाव में बैठक में शामिल हुए और फिर बीच में ही छोड़कर चले गए। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल के दौरान राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के तौर पर 16,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मौजूदा राज्य सरकार को अब तक राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं। पूरी सावधानी और वित्तीय प्रबंधन के साथ प्रदेश सरकार राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।भाजपा नेता दुविधा में है
अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का एक सांविधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना है। यह व्यवस्था 1952 से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों के लिए लड़ना अच्छी तरह से जानती है लेकिन भाजपा का रुख प्रदेश हित में नहीं है। यह प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा का मामला है। भाजपा नेता दुविधा में हैं और राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर लोगों के सामने अपना रुख साफ तौर पर रखने में नाकाम रहे।
भाजपा नेताओं को एहसास है कि केन्द्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान वापस लेना सही कदम नहीं है, लेकिन उनमें रुख स्पष्ट करने की हिम्मत नहीं है। रोप लगाया कि भाजपा कभी भी राज्य के लोगों के साथ खड़ी नहीं रही। 2023 की आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन भाजपा सदस्यों ने सबसे पहले सदन से वॉकआउट कर लिया। प्रदेश की जनता भाजपा के हिमाचल विरोधी रवैये को देख रही है और उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन लोगों के अधिकारों की रक्षा सबसे जरूरी है।