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गेहूं के प्रसंस्करण में गुणवत्ता नियंत्रण अनिवार्य: राज्य खाद्य आयोग

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गेहूं के प्रसंस्करण में गुणवत्ता नियंत्रण अनिवार्य: राज्य खाद्य आयोग

शिमला: राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एस. पी. कत्याल की अध्यक्षता में आज यहां जिला शिमला, बिलासपुर, सिरमौर एवं मण्डी के आटा मिल मालिकों के साथ आयोजित बैठक आयोजित की गई। बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत गेहूं एवं गेहूं के आटे की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, फोर्टिफिकेशन तथा वितरण से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग के संदर्भ में निर्धारित मिलिंग मानकों के अनुपालन एवं स्वच्छता बनाए रखने तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित फोर्टिफिकेशन मानकों (आयरन, फोलिक एसिड एवं विटामिन बी 12) के अनिवार्य अनुपालन पर बल दिया गया। फोर्टिफिकेशन प्रीमिक्स के सटीक मिश्रण के लिए माइक्रो-फीडर तकनीक अपनाने को प्रोत्साहित किया गया। पैकेजिंग से संबंधित मुद्दों, जैसे बैग की शेल्फ लाइफ एवं लेमिनेशन पर भी चर्चा की गई, जिसमें मिलर्स ने नमी के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए वजन में अनुमेय सहनशीलता की मांग की।

बैठक में निर्णय लिया गया कि परिवहन दूरी एवं लागत को कम करने के लिए जिलावार तर्क संगत आवंटन (मैपिंग) किया जाएगा और निरीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करते हुए गोदामों पर वाहनों की प्लेटफॉर्म तौल सुनिश्चित की जाएगी ताकि रिसाव को रोका जा सके और मात्रा की सटीकता बनी रहे। मिलर्स को एफसीआई गोदामों से ही निम्न गुणवत्ता अथवा संक्रमित गेहूं को अस्वीकार करने तथा प्रतिस्थापन के लिए उचित दस्तावेज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। यह भी निर्णय लिया गया कि मिलर्स संबंधित जिला नियंत्रकों को खरीद एवं मिलिंग की समय सीमा संबंधी नियमित एवं समेकित जिलावार रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

गुणवत्ता आश्वासन एवं निगरानी के संबंध में प्री-डिस्पैच परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया। औद्योगिक क्षेत्रों में अतिरिक्त परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि समयबद्ध एवं वैज्ञानिक गुणवत्ता जांच सुनिश्चित की जा सके।बैठक में खरीद, मिलिंग एवं वितरण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग प्रणाली अपनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।मिलर्स ने कई परिचालन संबंधी चुनौतियों के बारे में भी अवगत करवाया, जिनमें पैकेजिंग और परिवहन एवं बिजली की लागत आदि से संबंधित विषय शामिल हैं।  बैठक में आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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