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Punjab News: AAP का केंद्र पर बड़ा आरोप, BBMB बदलाव के जरिए पंजाब के पानी और अधिकारों पर कब्जे की कोशिश

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Punjab News: AAP का केंद्र पर बड़ा आरोप, BBMB बदलाव के जरिए पंजाब के पानी और अधिकारों पर कब्जे की कोशिश
चंडीगढ़, 15 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के राज्य मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े नियमों में केंद्र सरकार द्वारा किए गए हालिया बदलावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम पंजाब के जल संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने और राज्य के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पन्नू ने कहा कि पंजाब का इतिहास अन्याय के खिलाफ संघर्ष का रहा है और यहां के लोगों ने हर चुनौती का डटकर सामना किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार राज्य के अपने ही कुछ नेताओं के फैसलों ने पंजाब की स्थिति को कमजोर किया, जिसके परिणाम आज तक सामने आ रहे हैं।

BBMB बदलाव पर सवाल

बलतेज पन्नू ने कहा कि BBMB में महत्वपूर्ण पदों को पूरे देश के लिए खोलना पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 और बाद में BBMB के गठन के समय बनाए गए समझौतों की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इन पदों को मूल रूप से पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुए तय किया गया था, लेकिन अब केंद्र सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को नियुक्त कर निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया, जिसके तहत केंद्र सरकार धीरे-धीरे राज्यों के अधिकारों को सीमित कर रही है और महत्वपूर्ण संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है। पन्नू ने हरियाणा के जल उपयोग के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पिछले वर्ष हरियाणा अपने हिस्से का पानी पूरी तरह इस्तेमाल कर चुका था और बाद में अतिरिक्त पानी की मांग करने लगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई राज्य अपने हिस्से का पानी सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो इसके लिए पंजाब जिम्मेदार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी पंजाब की ओर से हरियाणा को बार-बार पानी के संतुलित उपयोग के लिए सलाह दी गई, लेकिन अब केंद्र के फैसलों से यह मामला और जटिल बनता जा रहा है।

SYL विवाद का जिक्र, पिछली सरकारों पर आरोप

बलतेज पन्नू ने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले समय में कांग्रेस और अकाली दल की सरकारों ने ऐसे फैसले लिए, जिनसे पंजाब के हितों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह के समय हुए समझौतों, प्रकाश सिंह बादल द्वारा जमीन आवंटन और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा शिलान्यास जैसे घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन फैसलों ने राज्य में असंतोष और अशांति को जन्म दिया था। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग इन घटनाओं को भूले नहीं हैं और अब वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग हो चुके हैं। पन्नू ने कहा कि पंजाब पहले ही गंभीर भूजल संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि धान की खेती और रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण न केवल भूजल स्तर गिरा है, बल्कि लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में यदि राज्य के जल संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण स्थापित किया जाता है, तो इससे स्थिति और भी खराब हो सकती है।

सरकार के प्रयास—नहर जल उपयोग में वृद्धि

पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 2022 में नहर के पानी का उपयोग केवल 22 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और जल्द ही इसे 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इससे भूजल पर निर्भरता कम हुई है और कई क्षेत्रों में जल स्तर में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। पन्नू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए विभिन्न संस्थानों और मुद्दों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने उन नेताओं पर भी सवाल उठाए जो पहले कांग्रेस में थे और अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जैसे कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और रवनीत बिट्टू। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए कि वे पंजाब के हितों के साथ खड़े हैं या नहीं। अंत में बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब सरकार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा और हर स्तर पर इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि पंजाब किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएगा और अपने जल संसाधनों, किसानों और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेगा।

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