इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा कि मेथाडोन सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार के नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ का हिस्सा है, जिसमें खास तौर पर उन लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है, जो सिंथेटिक नशे पर निर्भर हैं और जिनमें फिर से नशे की ओर लौटने का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा, ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (एनएसीओ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू की जा रही मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से सिंथेटिक नशों के आदी लोगों के लिए प्रभावी उपचार का विकल्प है। यह समग्र उपचार प्रणाली मरीजों के उपचार के परिणामों में सुधार लाएगी और उन्हें अपने परिवार एवं समाज में सफलतापूर्वक पुनः स्थापित होने में मदद करेगी।’
नए क्लीनिक विशेष आउटपेशेंट सुविधाओं के रूप में काम करेंगे, जहाँ मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में मेथाडोन थेरेपी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, मनोचिकित्सा सलाह, पुनः नशे की लत से बचाव संबंधी सेवाएं, पारिवारिक काउंसलिंग और नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी दी जाएगी।
मरीजों को अपनी निर्धारित खुराक लेने के लिए हर रोज क्लीनिक आना होगा, जहाँ उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में दवा दी जाएगी। दवा की हर खुराक डॉक्टर की निगरानी में दी जाएगी ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके और सही उपचार सुनिश्चित किया जा सके।