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  • 9वीं व 11वीं कक्षा के छात्र/छात्राओं के वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड करने की तिथि बढ़ाई

    9वीं व 11वीं कक्षा के छात्र/छात्राओं के वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड करने की तिथि बढ़ाई

    चंडीगढ़ : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से संबद्धता प्राप्त सभी राजकीय/अराजकीय विद्यालयों/गुरुकुलों/विद्यापीठों द्वारा शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 9वीं व 11वीं के छात्र/छात्राओं के वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2026 निर्धारित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 24 जुलाई, 2026 कर दिया गया है। ऐसे विद्यालय जिन द्वारा कक्षा 9वीं व 11वीं की वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड नहीं किए हैं वे 24 जुलाई, 2026 तक अंक अपलोड कर सकते हैं।

    बोर्ड के अध्यक्ष  शंकर लाल धूपड़ ने बताया कि सभी संबंधित संस्थाएं बोर्ड की आधिकारिक वेबसाईट www.bseh.org.in पर दिए गए लिंक पर आई.डी./पासवर्ड से लॉगिन करते हुए समय रहते अंक अपलोड करना सुनिश्चित करें। उन्होंने आगे बताया कि यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित तिथि में छात्र/छात्राओं के अंक अपलोड नहीं किए जाते हैं, तो ऐसे छात्र/छात्राओं को बोर्ड की कक्षा 10वीं एवं 12वीं की आगामी वार्षिक परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी कठिनाई के लिए दूरभाष नं 01664-254300, 254302 पर किसी भी कार्यदिवस में 09:00 बजे से 05:00 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त एनरोलमेंट शाखा की ई-मेल आई.डी. asenr@bseh.org.in के माध्यम से किसी भी कार्य दिवस में संपर्क कर सकते हैं।

  • हरियाणा ने लोक अवसंरचना को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाना किया सुनिश्चित

    हरियाणा ने लोक अवसंरचना को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाना किया सुनिश्चित

    चंडीगढ़ : लोक अवसंरचना को समावेशी और बाधा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने ‘राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता’ (एसएएससीआई) योजना के तहत वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सार्वभौमिक सुलभता मानकों का अनुपालन अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत सभी पात्र परियोजनाओं के लिए ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ और ‘भारत में सार्वभौमिक सुलभता के लिए सुसंगत दिशानिर्देश और मानक, 2021’ का अनुपालन करना आवश्यक होगा। यह कदम मौजूदा इमारतों में बाद में बदलाव करने के बजाय, योजना और डिजाइन के स्तर पर ही सुलभता सुविधाओं को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग और वास्तुकला विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि नई सरकारी इमारतों के साथ-साथ नवीनीकरण और मरम्मत कार्यों सहित सभी पात्र परियोजनाओं के डिजाइन और निष्पादन में सुलभता मानकों को शामिल किया जाए।

    डॉ. मिश्रा ने कहा कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पास लोक अवसंरचना का एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें मिनी सचिवालय भवन, तहसील और उप-तहसील कार्यालय परिसर, सरकारी आवासीय क्वार्टर और पारगमन फ्लैट शामिल हैं। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि उसके प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली सभी परियोजनाओं में सुलभता मानदंडों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि योजना और डिजाइन के चरण में ही सुलभता उपायों को एकीकृत करने से (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित होगा, साथ ही निर्माण के बाद होने वाले महंगे रैट्रोफिटिंग (संशोधनों) की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही सार्वभौमिक डिजाइन सिद्धांतों को अपनाने से ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी जो हर नागरिक के लिए समावेशी, टिकाऊ और सुलभ हो।

    उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक सुलभता केवल दिव्यांगजनों तक ही सीमित नहीं है। सार्वभौमिक सुलभता सिद्धांतों पर डिजाइन किया गया बुनियादी ढांचा वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और अस्थायी रूप से चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को भी लाभ पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि रैंप, सुलभ प्रवेश द्वार, लिफ्ट, स्पर्श पथ, हैंड्रेल्स, सुलभ शौचालय और उचित साइनबोर्ड जैसी विशेषताएं सरकारी भवनों को समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित, अधिक सुविधाजनक और उपयोग में आसान बनाती हैं। उन्होंने कहा कि लोक अवसंरचना में सुलभता को मुख्यधारा में लाने से न केवल (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम की वैधानिक आवश्यकताएं पूरी होंगी, बल्कि समावेशी और समान विकास के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।

    इस निर्णय के साथ हरियाणा ने अपने बुनियादी ढांचे के नियोजन को ‘सुगम्य भारत अभियान’ (के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप संरेखित किया है। इस कदम से भविष्य की लोक अवसंरचना परियोजनाओं के लिए सार्वभौमिक सुलभता को बाद के विचार के बजाय एक मुख्य डिजाइन आवश्यकता बनाकर एक नया मानदंड स्थापित करने की उम्मीद है।

     
  • प्राकृतिक खेती विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    प्राकृतिक खेती विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    चंडीगढ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रकृति  अन्न प्रेरक किसान कमेटी बनाई जाएगी, यह कमेटी हर जिला में होगी। इस कमेटी का मुख्य कार्य किसानों से संपर्क करना, उनके फार्म पर जाना और सरकार से सामंजस्य करवाकर प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ने का कार्य होगा। यह एक तरह से प्राकृतिक खेती के प्रेरक एम्बेस्डर होंगे।

    मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी बुधवार को पंचकूला में हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती संवाद को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान किसानों से संवाद भी किया, मुख्यमंत्री ने किसानों से मिले सुझावों को जल्द पूरा करवाने की दिशा में काम करने का आश्वासन भी दिया। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती करने वाले जिन किसानों ने गाय खरीदने के लिए सब्सिडी के लिए आवेदन किया है, उन्हें सब्सिडी जारी कर दी जाए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती करने का एक तरीका नहीं, बल्कि किसान, प्रकृति और समाज के बीच टूट चुके संबंधों को फिर से मजबूत करने का अभियान है। यह धरती माता की सेवा, खेती की लागत कम करने, जल और मिट्टी के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के ब्रांड एंबेसडर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि अब केवल चिंतन नहीं, बल्कि अमल करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का समय है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर किसानों से सीधा संवाद करेगी और प्राकृतिक खेती के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती पर प्रत्येक माह इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बड़े सेमिनारों में गुजरात के राज्यपाल आचार्य  देवव्रत को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि किसान उनके अनुभवों से लाभान्वित हो सकें।

    उन्होंने कहा कि आज का सेमिनार केवल प्राकृतिक खेती की तकनीक सीखने का अवसर नहीं है, बल्कि किसान और प्रकृति के बीच सदियों पुराने अटूट रिश्ते को फिर से मजबूत करने का अभियान है। पहले खेती का संबंध धरती माता और गौ माता से था। यही संबंध किसान के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आता था, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता कमजोर हुआ और आज प्राकृतिक आपदाएं तथा पर्यावरणीय संकट हमारे सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव ने विकास तो किया है, लेकिन कहीं न कहीं धरती का अत्यधिक दोहन भी किया है। आज सवाल यह नहीं है कि खाद और कीटनाशकों की कमी है, बल्कि यह है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी धरती और कैसा पर्यावरण छोड़कर जा रहे हैं। हमारे पूर्वज हमें भरपूर भूजल और उपजाऊ मिट्टी देकर गए थे, लेकिन आज कई क्षेत्रों में भूजल स्तर हर सीजन में 20 से 25 फुट तक नीचे जा रहा है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पहले श्रमिक मंडियों में अनाज की भारी-भरकम बोरियां आसानी से उठा लेते थे, लेकिन आज बदलती जीवनशैली, रासायनिक खेती और प्राकृतिक असंतुलन के कारण सभी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसलिए खेती की दिशा बदलना समय की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की आवश्यकता है। यह केवल खेती की नई पद्धति नहीं, बल्कि धरती बचाने का अभियान है। यह किसानों की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भारत बनाने का माध्यम है। भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है और उसकी सेवा करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती के एंबेसडर बनकर गांव-गांव लोगों को इसके लाभ बताएं। उन्होंने कहा कि केवल चर्चा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्वयं भी प्राकृतिक खेती अपनानी होगी और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को नकली बीज और दवाइयां ना मिले, इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने विधानसभा में कड़ा कानून बनाया है। अब यदि कोई किसान को नकली बीज बेचते हुए पाया जाता है तो उसे पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। हरियाणा सरकार ने भी किसानों से सुझाव लेकर तैयार किए गए राज्य बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की उपज की बिक्री में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि प्राकृतिक खेती से तैयार उपज के लिए मंडियों में अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा तथा हैफेड इसकी खरीद करेगा। इसकी व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में क्षेत्रवार बागवानी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गन्नौर मंडी में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए अलग शेड बनाया गया है तथा राज्य में चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं, जहां आधुनिक बागवानी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रही है। मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है और खेती की लागत बढ़ रही है। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों को देशी और गुणवत्तापूर्ण बीज विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। दुनिया के अनेक विकसित देश अब रासायनिक खेती से दूरी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भारत के पास ऋषि-मुनियों की परंपरा, किसानों का अनुभव और प्राकृतिक खेती का समृद्ध ज्ञान पहले से मौजूद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में प्राकृतिक खेती सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगी। इसके लिए सरकार और किसानों को मिलकर जन आंदोलन के रूप में इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा।

    प्राकृतिक खेती किसानों को बनाएगी आत्मनिर्भर और कर्जमुक्त- श्याम सिंह राणा

     हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों को कर्जमुक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का प्रभावी माध्यम है, जबकि रासायनिक खेती किसानों की लागत बढ़ाकर उन्हें कर्ज की ओर धकेलती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू की जाने वाली प्रत्येक योजना और नीति जनकल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की जाती है। नई पहल का प्रारंभिक स्तर पर विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन किसानों को यह समझना चाहिए कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य उनकी आय बढ़ाना, खेती की लागत घटाना और कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है।  राणा ने कहा कि रासायनिक खेती में किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि रसायन बनाने वाली कंपनियों के पास चला जाता है। इसके विपरीत प्राकृतिक खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनता है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक खेती की तीन प्रमुख पद्धतियां प्रचलित हैं। जैविक खेती में अधिक मात्रा में गोबर एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है, जबकि प्राकृतिक खेती कम लागत वाली, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रणाली है। इसी कारण राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरता बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप वर्ष 2047 तक देश में प्राकृतिक खेती का दायरा 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि प्राकृतिक खेती की शुरुआत अपने पशुओं के चारे से करें और चारे के उत्पादन में भी कीटनाशकों के उपयोग से बचें। उन्होंने कहा, मैं स्वयं एक किसान हूं और खेती से जुड़ी चुनौतियों तथा किसानों की जरूरतों को भली-भांति समझता हूं।

    प्राकृतिक खेती का अपना वैज्ञानिक तंत्र हैइसे समझना हर किसान के लिए जरूरी- धर्मपाल यादव

    कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसान धर्मपाल यादव ने कहा कि कृषि करना और कृषि को समझना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। प्रकृति की धारा को समझकर उसके अनुरूप चलना या उसे सकारात्मक दिशा देना ही वास्तविक कृषि ज्ञान है। यदि खेती को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाएगा, तो उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की अनदेखी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1907 में भूजल स्तर उस गहराई पर था, जहां वह सदियों से बना हुआ था, लेकिन रासायनिक खेती के बढ़ते प्रयोग से आज भूजल स्तर कई फीट नीचे चला गया है। इसके साथ ही पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। बढ़ता प्रदूषण भी आज एक बड़ी समस्या बन गया है। धर्मपाल यादव ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के चलते आज अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है और लोगों में गंभीर बीमारियां भी बढ़ी हैं। अब दुनिया भी प्राकृतिक खेती की ओर लौटने की आवश्यकता महसूस कर रही है और बड़े शहरों से लोग गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का अपना एक वैज्ञानिक तंत्र है, जिसे समझना आज हर किसान के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वे अपने खेतों में कभी भी कीटनाशकों या अन्य रासायनिक दवाइयों का प्रयोग नहीं करते। उनका मानना है कि कीट प्रबंधन के लिए भी प्राकृतिक उपाय पर्याप्त हैं और रासायनिक दवाइयों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। उन्होंने किसानों के साथ अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) मॉडल की भी जानकारी साझा की और प्राकृतिक खेती से बेहतर आय प्राप्त करने के अपने अनुभव बताए।

    मुख्यमंत्री का जताया आभारप्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए दिए सुझाव

    कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी के समक्ष प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा सकने वाले विभिन्न सुझाव साझा किए। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं किसानों के साथ आमने-सामने बैठकर संवाद करना उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उनका कहना था कि जब प्रदेश का मुखिया किसानों से सीधे संवाद करता है और उनकी बात सुनता है, तो इससे किसानों का मनोबल बढ़ता है तथा उन्हें यह विश्वास मिलता है कि राज्य सरकार उनके हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों ने राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों तथा किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से मंडी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे किसानों के हितों को मजबूती मिली है। किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार आगे भी इसी प्रकार सहयोग करती रहेगी।

    इसी क्रम में करनाल के एक किसान ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इससे उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में उठाए जा रहे कदमों के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए सुझाव दिया कि कृषि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में भी प्राकृतिक खेती को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी शुरुआत से ही टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त खेती की वैज्ञानिक समझ विकसित कर सके। इस दौरान कृषि विभाग के निदेशक  राजनारायण कोशिक, ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा,  पंचकूला के मेयर  श्याम लाल बंसल, पार्टी की नेता श्रीमती बंतो कटारिया, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीण आत्रेय, शिवालिक विकास बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश देवीनगरिया, जिलाध्यक्ष  अजय  भी मौजूद थे।

  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आइकिया इंडिया के सीईओ  ने  की मुलाकात

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आइकिया इंडिया के सीईओ  ने  की मुलाकात

    चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बुधवार को चंडीगढ़ स्थित संत कबीर कुटीर में आइकिया इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पैट्रिक एंटोनी के नेतृत्व में आए स्वीडन के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। बैठक में हरियाणा और आइकिया के बीच सहयोग को और सुदृढ़ बनाने तथा हरियाणा में भविष्य के निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान पैट्रिक एंटोनी ने हरियाणा में आइकिया की परियोजनाओं के निर्माण कार्यों तथा अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में राज्य सरकार द्वारा दिए गए निरंतर सहयोग के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का  आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय, विदेश सहयोग विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा नियमित स्वीकृतियों में तेजी लाने और कंपनी की आवश्यकताओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए दिए गए सहयोग की भी सराहना की।

    उल्लेखनीय है कि आइकिया स्वीडन की अग्रणी होम फर्निशिंग कंपनी है। भारत कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण विकासशील बाजारों में शामिल है। साथ ही, कंपनी की संपूर्ण वैल्यू-चेन उपस्थिति के लिहाज से भी भारत का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में आइकिया द्वारा निवेश करने संबंधी प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए कंपनी को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जायेगा।

    बैठक में पैट्रिक एंटोनी ने मुख्यमंत्री को अगले वर्ष गुरुग्राम में आइकिया स्टोर के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसके उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने हरियाणा के प्रति आइकिया की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना वैश्विक कंपनियों के लिए हरियाणा को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में और अधिक सुदृढ़ करेगी। उल्लेखनीय है कि इस स्टोर की आधारशिला हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री  मनोहर लाल ने रखी थी।

    कंपनी वर्तमान में गुरुग्राम में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से हरियाणा में लगभग 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, जिससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10,000 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही यह परियोजना भारत में आइकिया के प्रमुख निवेशों में से एक होगी, जिसमें एक ही परिसर में रिटेल, कार्यालय परिसर तथा समुदाय-केंद्रित अनुभवों का समावेश होगा। हरियाणा सरकार भी कंपनी के साथ मिलकर अपने सुदृढ़ कौशल विकास तंत्र के माध्यम से कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि इस परियोजना से सृजित रोजगार के अवसरों का लाभ राज्य के युवाओं को मिल सके।

    बैठक में मुख्यमंत्री  को अवगत करवाया गया कि हरियाणा का विदेश सहयोग विभाग राज्य के अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नोडल विभाग है, जो वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देने, कूटनीतिक संपर्कों को सुदृढ़ करने तथा प्रवासी हरियाणवियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करता है। यह विभाग राज्य सरकार के ‘गो ग्लोबल एप्रोच’ के माध्यम से हरियाणा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने  पैट्रिक एंटोनी को मद्भगवद्गीता  की प्रति भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन कुमार चौधरी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

  • Haryana News : Border इलाके से ड्रग्स लाकर Tricity मे सप्लाई करने वाला गिरफ्तार, देखें वीडियो

    Haryana News : Border इलाके से ड्रग्स लाकर Tricity मे सप्लाई करने वाला गिरफ्तार, देखें वीडियो

    पंचकूला : एंटी नारकोटिक्स सेल की टीम ने लाखों की हेरोइन के साथ एक अंतरराज्यीय ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मुकेश कुमार (33) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से हरियाणा के कैथल का रहने वाला है और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के बद्दी क्षेत्र में किराये पर रह रहा था।

    एंटी नारकोटिक सेल के इंचार्ज सौरभ रावत ने बताया कि आरोपी पाकिस्तान से ड्रग्स लाकर ट्राइसिटी में सप्लाई करता था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी चंडीमंदिर स्थित साकेत अस्पताल के पास फ्लाईओवर के नीचे एक ग्राहक को हेरोइन देने आने वाला है। सूचना के आधार पर ANC टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी कर आरोपी को काबू कर लिया।
    तलाशी के दौरान उसकी पैंट की जेब से पारदर्शी पॉलीथिन में

    तलाशी के दौरान आरोपी से 311 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना चंडीमंदिर में NDPS एक्ट की धारा 21(C) के तहत मामला दर्ज कर अदालत से
    3 दिन का रिमांड हासिल कर लिया है। ताकि ड्रग्स की सप्लाई चेन और जुड़े अन्य तस्करों का पता लगाया जा सके।

  • मान सरकार की “ऑनलाइन मिलनी” विदेशों में बसे पंजाबियों के लिए बनी भरोसेमंद मंच

    मान सरकार की “ऑनलाइन मिलनी” विदेशों में बसे पंजाबियों के लिए बनी भरोसेमंद मंच

    एनआरआई मामलों के मंत्री ने संपत्ति विवाद, वैवाहिक मामलों और पेंशन संबंधी शिकायतें सुनीं; अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश

    चंडीगढ़ : पंजाब सरकार द्वारा एनआरआई समुदाय के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने आज सरकार की मासिक “ऑनलाइन मिलनी” के दौरान विदेशों में बसे पंजाबियों से सीधे संवाद कर उनकी शिकायतें और समस्याएं सुनीं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार प्रवासी पंजाबियों की समस्याओं के पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि विभिन्न देशों में रह रहे पंजाबियों ने इस ऑनलाइन मिलनी में भाग लेकर अपनी शिकायतें साझा कीं। बैठक के दौरान संपत्ति एवं भूमि विवाद, वैवाहिक मामलों, धोखाधड़ी तथा अन्य व्यक्तिगत मामलों से संबंधित शिकायतें सुनी गईं।

    उन्होंने आगे बताया कि पंजाब सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे एनआरआई पंजाबियों ने अपनी पेंशन से संबंधित समस्याएं भी उठाईं। इनमें विदेश में रहने के कारण वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) प्राप्त न होने की समस्या तथा पेंशन सत्यापन (वेरिफिकेशन) प्रक्रिया से जुड़ी अन्य तकनीकी कठिनाइयां शामिल थीं। इस बात पर जोर देते हुए कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना ही नहीं, बल्कि उनका प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना भी है, डॉ. रवजोत सिंह ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत की प्राथमिकता के आधार पर गंभीरता से जांच करने तथा नियमों के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर शिकायतकर्ताओं से सीधे संपर्क कर उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मासिक “ऑनलाइन मिलनी” पहल पंजाब सरकार और विदेशों में बसे पंजाबियों के बीच संपर्क को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक भरोसेमंद और प्रभावी मंच के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि सरकार एनआरआई समुदाय के अधिकारों एवं हितों की रक्षा, उनकी शिकायतों के शीघ्र निपटारे तथा पंजाब के साथ उनके संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस ऑनलाइन मिलनी के दौरान एनआरआई मामलों के सचिव मोहम्मद तैयब, एडीजीपी एनआरआई विंग आर.के. जायसवाल, एनआरआई मामलों की विशेष सचिव श्रीमती अमनदीप कौर तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

     

  • Haryana News : इस इलाके मे पार्षद और पुलिस इंस्पेक्टर हुए आमने-सामने, देखें वीडियो

    Haryana News : इस इलाके मे पार्षद और पुलिस इंस्पेक्टर हुए आमने-सामने, देखें वीडियो

    पंचकूला : पिंजौर में पार्षद और थाना प्रभारी के आपस मे उलझने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी द्वारा सुरक्षा का हवाला देकर रेहड़ी और फड़ी वालो को हटाया जा रहा था। जिसकी सूचना मिलते ही वार्ड नंबर 11 के भाजपा पार्षद सौरव गुप्ता रेहड़ी वालो को साथ लेकर प्रभारी से मिलने थाना परिसर मे पहुंचे।

    जिसके बाद थाना परिसर मे पार्षद और प्रभारी आपस मे उलझ पड़े। पार्षद गुप्ता ने रेहड़ी वालो के पक्ष मे कहा कि उनके पास कोर्ट का स्टे आर्डर है। जिसमे लिखा है कि जब तक नगर निगम रेहड़ी वालो का कोई इंतजाम नहीं करता, तब तक वह लोग अपना कारोबार इसी स्थान पर कर सकते है।

    वहीं थाना प्रभारी का कहना है कि थाने की सुरक्षा के मद्देनजर जो उचित कार्रवाई करनी होगी वह करेंगे। इस बात को लेकर पार्षद और प्रभारी के बीच बहस-बाजी शुरू हो गई। पार्षद का आरोप है कि रेहडी-फड़ी वाले लोग कई दिनों से थाना प्रभारी से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया।

    जहां पुलिस द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं पार्षद और रेडी-फड़ी वालों का आरोप है कि उनको अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।

     

  • सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में 3468 अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया जारी: शिक्षा मंत्री

    सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में 3468 अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया जारी: शिक्षा मंत्री

    शिमला : शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी विद्यालयों के लिए 3,468 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। इनमें 19 श्रेणियों के 2,668 नियमित पदों का मामला हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग, हमीरपुर को भेजा जा चुका है, जबकि 800 अस्थायी अंग्रेजी एवं गणित अध्यापकों की नियुक्ति भी की जा रही है। संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत, ड्रॉइंग, विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, ललित कला तथा लोक प्रशासन विषयों के शिक्षकों की भर्ती भी शीघ्र पूरी की जाएगी। शिक्षा मंत्री बुधवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे विभिन्न सुधारात्मक कार्यक्रमों और योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को सरकार की जनकल्याणकारी पहलों को निर्धारित समय सीमा में प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बने।

    डॉ. वाई.एस. परमार डिजिटल विद्यार्थी योजना की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2022-23, 2023-24 तथा 2024-25 के दौरान 9,359 विद्यार्थियों को इस योजना के अंतर्गत टैबलेट प्रदान किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को शेष पात्र विद्यार्थियों को भी बिना विलंब प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) से जुड़ चुके हैं। पहली बार राज्य सरकार को 524 विद्यालयों में पुराने कंप्यूटरों के प्रतिस्थापन की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त 777 सरकारी विद्यालयों में बेहतर इंटरनेट एवं नेटवर्क सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए बीएसएनएल के साथ नेटवर्किंग टेंडर अंतिम चरण में है, जिससे विद्यालयों में डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

    सीबीएसई स्कूल पहल की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि 158 विद्यालयों को सीबीएसई पाठ्यक्रम की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 146 विद्यालयों को सीबीएसई की संबद्धता प्राप्त हो चुकी है। शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अस्थायी आधार पर 400 अंग्रेजी तथा 400 गणित अध्यापकों की नियुक्ति की है, जिनमें से 292 अंग्रेजी और 284 गणित अध्यापक अपने-अपने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। शिक्षा मंत्री ने एसएमसी अध्यापकों, कंप्यूटर अध्यापकों तथा एलडीआर मामलों सहित विभिन्न सेवा एवं भर्ती संबंधी विषयों की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रथम प्रयास में असफल एसएमसी अभ्यर्थियों को दूसरा अवसर प्रदान करने तथा लंबित सेवा मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शास्त्री पदों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर 191 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 870 शारीरिक शिक्षा अध्यापक (पीईटी) पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, जिनमें से 355 पदों के लिए काउंसलिंग भी संपन्न हो गई है।

    मुख्यमंत्री द्वारा घोषित भर्ती प्रस्तावों तथा विधानसभा आश्वासनों की समीक्षा के दौरान शिक्षा मंत्री को अवगत करवाया कि शारीरिक शिक्षकों के 486 नए पद सृजित किए जा चुके हैं तथा 112 अतिरिक्त पदों को भरने की स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने मल्टी टास्क वर्कर भर्ती की भी समीक्षा की। स्वीकृत 8,000 पदों में से 6,703 पद भरे जा चुके हैं। उन्होंने शेष पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री पोषण योजना के सामाजिक अंकेक्षण की समीक्षा करते हुए बताया कि राज्य सामाजिक अंकेक्षण इकाई ने वर्ष 2025-26 के दौरान 503 विद्यालयों का सामाजिक अंकेक्षण पूरा कर लिया है। उन्होंने सभी जिलों को शीघ्र कार्रवाई प्रतिवेदन (एटीआर) प्रस्तुत करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रोहित ठाकुर ने डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को इस योजना की प्रक्रियाओं को और सरल एवं विद्यार्थी हितैषी बनाने के निर्देश दिए।

    आपदा प्रभावित विद्यालयों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 एवं 2025 की प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के पुनर्स्थापन के लिए लोक निर्माण विभाग तथा हिमुडा को 19 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। कुल 101 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जबकि 80 करोड़ रुपये की राशि अभी प्राप्त होनी शेष है। शिक्षा मंत्री ने आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर पुर्नस्थापन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री ने गैर-कार्यशील केंद्रीय विद्यालयों को शीघ्र संचालित करने, विद्यालयों के लिए समयबद्ध मौसम परामर्श प्रणाली विकसित करने तथा भारत सरकार के शिक्षक पुरस्कार-2026 के प्रति अधिकाधिक शिक्षकों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए, ताकि प्रदेश से अधिक संख्या में नामांकन सुनिश्चित हो सकें।

    उन्होंने नए खोले गए शिक्षण और खेल विद्यालयों को शीघ्र शुरू करने तथा प्रस्तावित एआई विश्वविद्यालय की स्थापना, प्रवासियों के स्कूल नहीं जा रहे बच्चों की पहचान एवं उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों की भी समीक्षा की। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर व्हाट्सएप एवं गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था अपनाने पर बल दिया, ताकि निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी बने, प्रशासनिक दक्षता बढ़े और अनावश्यक विलंब को कम किया जा सके। शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • विजिलेंस ब्यूरो ने जून माह के दौरान रिश्वतखोरी के 6 मामलों में 6 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया

    विजिलेंस ब्यूरो ने जून माह के दौरान रिश्वतखोरी के 6 मामलों में 6 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया

    चंडीगढ़ : पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अपने अभियान के तहत जून माह के दौरान 6 अलग-अलग ट्रैप मामलों में रिश्वत लेते हुए पांच सरकारी अधिकारियों तथा एक निजी व्यक्ति को रंगे हाथों काबू करने में सफलता प्राप्त की है। आज यहां यह जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि विजिलेंस ब्यूरो ने इस अवधि के दौरान सरकारी कर्मचारियों तथा सभी क्षेत्रों से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए अपने प्रयास पूरी दृढ़ता से जारी रखे हैं।

    प्रवक्ता ने बताया कि ब्यूरो ने पिछले महीने विभिन्न सक्षम न्यायालयों में विजिलेंस के 15 मामलों से संबंधित चालान प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आगे बताया कि 15 आरोपियों के विरुद्ध 9 आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें 13 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। अधिक जानकारी साझा करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि पिछले महीने एक सक्षम न्यायालय ने ब्यूरो द्वारा दर्ज एवं पैरवी किए गए एक रिश्वतखोरी मामले में फैसला सुनाते हुए छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया। न्यायालय ने सभी दोषियों को 5-5 वर्ष के कारावास तथा 27,000 रुपये से 31,000 रुपये तक के जुर्माने की सजा सुनाई।

  • सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के समाधान का सुनहरा अवसर, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

    सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के समाधान का सुनहरा अवसर, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

    ऊना सुशील पंडित : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊना की सचिव शिखा लखनपाल ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों को आपसी सुलह एवं मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों को त्वरित, सरल एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय परिसर में समाधान समारोह-2026 का शुभारंभ 21 अप्रैल से हो चुका है। इस अभियान के अंतर्गत 21, 22 एवं 23 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय परिसर में विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया जाएगा, जहां आपसी सहमति एवं मध्यस्थता के माध्यम से लंबित मामलों का समाधान किया जाएगा।

    शिखा लखनपाल ने बताया कि इच्छुक पक्षकारों की सुविधा के लिए एक सरल गूगल फॉर्म तैयार किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने पात्र पक्षकारों से आग्रह किया कि वे 31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर अपने मामलों को विशेष लोक अदालत में शामिल करवाकर इस अवसर का लाभ उठाएं। मानसिक दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों को मिलेगी निःशुल्क कानूनी सहायता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मानसिक विकार एवं मानसिक मंदता से प्रभावित व्यक्तियों के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति अथवा उनके परिजन नालसा के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

    उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त संबंधित व्यक्ति उपमंडलीय विधिक सेवाएं समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अथवा हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर भी निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इच्छुक आवेदकों के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के लीगल एड पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। शिखा लखनपाल ने कहा कि मानसिक दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण एवं उन्हें न्यायिक सहायता से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में विशेष जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने पात्र व्यक्तियों एवं उनके परिजनों से इन सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।